Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी

    भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी


    भोपाल । राजधानी भोपाल का रानी कमलापति जिनालय परिसर इन दिनों भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम में राष्ट्रसंत आचार्य समय सागर महाराज के सान्निध्य में प्रस्तावित 20 मुनिराजों के मंगल चातुर्मास की तैयारियां पूरे श्रद्धाभाव के साथ चल रही हैं। परिसर में गूंजते श्रद्धालुओं के “हे स्वामी नमोस्तु… नमोस्तु… नमोस्तु…” के स्वर और साधु-संतों की तपस्या से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया है।

    कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना और परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज की आराधना के साथ हुई। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य आत्मकल्याण है, न कि प्रदर्शन। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दर्शन में प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है।” आचार्य श्री ने लोगों से बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मचिंतन, संयम और सच्ची आस्था के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

    प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। सुबह गुरु वंदना के साथ दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद पूजा-अर्चना, धार्मिक प्रवचन और साधना का क्रम चलता है। दोपहर में प्रतिक्रमण, तत्व चर्चा और आचार्य भक्ति का आयोजन किया जाता है, जबकि शाम को मंगल आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

    आचार्य श्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का सौभाग्य इस बार पंचायत कमेटी ट्रस्ट के उपमंत्री ऋषभ जैन, मनीष जैन, निमिषा जैन एवं प्रगति परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा राकेश जैन, सुनीता जैन, सुधा जैन, सविता जैन और पी.सी. जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ आहार चर्या में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।

    आयोजकों के अनुसार आचार्य समय सागर महाराज के मंगल चातुर्मास की विधिवत कलश स्थापना 2 अगस्त को होगी। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के भोपाल पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर तीर्थ परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम को भविष्य में जैन समाज के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चातुर्मास के इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर दिया है, बल्कि संयम, सेवा और आत्मशुद्धि के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

  • बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा

    बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। दतिया उपचुनाव के प्रचार से लेकर भोपाल में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और रीवा के थाने तक, कई घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं ने चुनावी आचार संहिता, राजनीतिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वे छोटे बच्चों से कांग्रेस के समर्थन में चुनावी नारे लगवाते नजर आ रहे हैं। बच्चों से “जात पे न पात पे, मुहर लगेगी हाथ पे” और “जीतेगा भाई जीतेगा, हाथ का पंजा जीतेगा” जैसे नारे लगवाने के बाद पटवारी ने उनसे पूछा कि उनकी बात सही है या गलत। इस पर बच्चों ने मासूमियत से “गलत” कह दिया। हालांकि उन्होंने इसे नजरअंदाज कर भाषण जारी रखा, लेकिन अब इस वीडियो को लेकर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    उधर राजधानी भोपाल में भाजपा कार्यालय तक निकाले गए कांग्रेस के पैदल मार्च के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने एक युवक को जेबकतरा बताकर बीच सड़क पर पीटना शुरू कर दिया। युवक को दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूंसों से मारा गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक माज कुरैशी ने दावा किया कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता है और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। घटना ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इधर रीवा के अमहिया थाने से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की छवि को झटका दिया है। वीडियो में प्रधान आरक्षक अच्छेलाल शराब के नशे में थाने के भीतर हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। वह खुद को “पुलिस लाइन का गुंडा” बताते हुए खुलेआम शराब पीने की बात स्वीकार करता नजर आया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पुलिस विभाग प्रदेशभर में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन घटना ने पुलिस व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच राज्य के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि अंतिम समय तक कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पद के लिए जोर-आजमाइश चलती रही। नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही में इसे लेकर चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं।

  • MP Weather Update: प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मानसून फिर हुआ एक्टिव; 50 से ज्यादा जिलों में बरसेंगे बादल

    MP Weather Update: प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मानसून फिर हुआ एक्टिव; 50 से ज्यादा जिलों में बरसेंगे बादल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के पांच जिलों-श्योपुर, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।

    गुरुवार को भी प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा डेढ़ इंच वर्षा टीकमगढ़ में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा रतलाम, छतरपुर, श्योपुर, धार, नर्मदापुरम, शिवपुरी, सीधी, इंदौर, उज्जैन, उमरिया, जबलपुर, रायसेन, राजगढ़, सागर, सतना, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, शाजापुर, सीहोर, विदिशा और देवास सहित कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई।

    प्रदेश में 24 जून को मानसून की दस्तक के बाद से अब तक औसतन 12.8 इंच (325.1 मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि यह सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इस समय तक प्रदेश में 14.1 इंच (359.6 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। राहत की बात यह है कि पिछले तीन दिनों में बारिश की कमी लगातार कम हुई है। 20 जुलाई तक जहां प्रदेश में वर्षा सामान्य से 17 प्रतिशत कम थी, वहीं अब यह अंतर घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 13 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रदेशभर में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। लगातार सक्रिय हो रहे मानसूनी सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है, जिससे बारिश की कमी और कम हो सकती है।

    बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। रायसेन जिले के बेगमगंज क्षेत्र में बीना नदी का जलस्तर बढ़ने से एक दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। वहीं बड़वानी के सेंधवा स्थित बिजासन घाट में लगातार तीसरे दिन घना कोहरा और धुंध छाई रही। टीकमगढ़ में भी रुक-रुककर हो रही बारिश से मौसम सुहावना बना हुआ है।

    प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है, जबकि 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग का मानना है कि आगामी दिनों में होने वाली लगातार बारिश से अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के करीब पहुंच सकता है।

  • एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश

    एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें करीब 40 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है और जानलेवा दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत नहीं मिली, क्योंकि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता और घातक प्रभाव बढ़ा है।

    देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन औसतन 40 लोगों की मौत दर्ज की गई है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

    बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 4E रणनीति पर काम कर रही हैं। इसका पहला हिस्सा एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसके तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने और यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें सुधारा जा रहा है। नए और पुराने राजमार्गों का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग सिस्टम, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। वाहन सुरक्षा के लिए भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट रेटिंग भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना जैसी आदतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। जब तक यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अपेक्षित कमी लाना चुनौती बना रहेगा।

  • सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े

    सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार अब लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें करीब 40 लोगों की जान चली जाती है। यही वजह है कि सड़क हादसों के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है और जानलेवा दुर्घटनाओं को लेकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क दुर्घटनाओं और मौतों दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि वर्ष 2025 में कुल सड़क हादसों की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत की बात नहीं है, क्योंकि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। इसका सीधा मतलब है कि हादसों की संख्या भले कम हुई हो, लेकिन वे पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहे हैं।

    देशव्यापी आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तमिलनाडु पहले स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे अधिक लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में प्रतिदिन होने वाले हादसों की संख्या उत्तर प्रदेश से अधिक है, लेकिन मौतों का औसत 40 प्रतिदिन दर्ज किया गया है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती को उजागर करती है।

    बढ़ते हादसों और मौतों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 4E रणनीति पर काम तेज किया है। इसके तहत पहला कदम एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसमें ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना, सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित हो।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर सुधार किया जा रहा है। नए और पुराने हाईवे का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। वहीं वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। साथ ही भारत एनकैप क्रैश टेस्ट रेटिंग व्यवस्था भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा और सबसे अहम हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर चोट पर मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। तभी मध्य प्रदेश समेत देशभर में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

  • भोपाल में कानून के रखवालों की शर्मनाक करतूत: मासूम छात्रा को बंधक बनाकर SAF जवान ने किया रेप, साथी आरक्षक बाहर देता रहा पहरा

    भोपाल में कानून के रखवालों की शर्मनाक करतूत: मासूम छात्रा को बंधक बनाकर SAF जवान ने किया रेप, साथी आरक्षक बाहर देता रहा पहरा


    भोपाल । राजधानी भोपाल में कानून की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस की साख को बट्टा लगाने वाला एक बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ विशेष सशस्त्र बल (SAF) में तैनात दो जवानों ने हैवानियत और आपराधिक साजिश की सारी हदें पार करते हुए एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। वारदात को अंजाम देने के लिए मुख्य आरोपी आरक्षक ने अपनी ही बेटी के जन्मदिन की पार्टी का झांसा देकर छात्रा का भरोसा जीता और फिर उसे बंधक बनाकर दुष्कर्म किया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस घिनौने कृत्य में उसका साथी पुलिसकर्मी भी बराबर का साझेदार रहा, जो वारदात के दौरान अपने 3-4 साल के मासूम बेटे को साथ लेकर घर के बाहर पहरा देता रहा ताकि किसी को शक न हो। पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    मिली जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपी संतोष सेन धार में आरक्षक के पद पर पदस्थ है और पीड़िता का पड़ोसी भी है। बीते 22 जुलाई की शाम आरोपी संतोष ने एक परिचित महिला के मोबाइल से किशोरी को फोन किया और अपनी बेटी के जन्मदिन का हवाला देते हुए उसे लाल परेड मैदान के पास मिलने के लिए बुलाया। मासूम छात्रा पड़ोसी पर भरोसा करके शाम करीब 6:30 बजे तय जगह पर पहुँच गई। वहाँ संतोष सेन अपने साथी आरक्षक जितेंद्र राजपूत के साथ कार में मौजूद था, जो ग्वालियर में पदस्थ है। जितेंद्र की कार में उसका छोटा बेटा भी बैठा हुआ था। आरोपी संतोष ने बेहद चालाकी से छात्रा का विश्वास हासिल किया और उसे झांसा देकर एमपी नगर स्थित एक मकान में ले गया।

    मकान में पहुँचते ही मुख्य आरोपी संतोष ने कमरा अंदर से बंद कर लिया और छात्रा को बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान साथी आरक्षक जितेंद्र राजपूत अपने मासूम बच्चे के साथ बाहर खड़ा होकर पहरा देता रहा ताकि कोई अचानक वहाँ न आ पहुँचे। हैवानियत का शिकार होने के बाद जब पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुँची, तो उसने अपने परिजनों को इस खौफनाक घटना की पूरी जानकारी दी। परिजनों के होश उड़ गए और वे तुरंत पीड़िता को लेकर कमला नगर थाने पहुँचे।

    घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए कमला नगर थाने में तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद मामले को जहांगीराबाद थाने स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी जवानों को हिरासत में लिया और गहन पूछताछ के बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कड़ा मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पीड़िता के बयानों के आधार पर निष्पक्ष व कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

  • MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!

    MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!


    रायसेन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन जिले (Raisen district) में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों के घटिया स्तर का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है. स्टेट हाईवे 19 बरेली-पिपरिया मार्ग (State Highway 19: Bareilly-Pipariya Road) पर स्थित नयागांव के नए पुल की एप्रोच रोड पहली ही मूसलाधार बारिश में धंस गई हैं।

    निर्माण कार्य में भर्राशाही और लापरवाही का आलम यह है कि नए पुल से आवागमन बाधित होने के बाद नीचे बनाया गया डायवर्जन भी नाले के उफान में पूरी तरह डूब चुका है. इसके बावजूद मौके पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही प्रशासन ने रूट डायवर्ट कर वाहनों की आवाजाही को रोका है।


    जवान की मौत के बाद बना था नया पुल

    बता दें कि इसी नयागांव पुल पर 1 दिसंबर 2025 को मरम्मत कार्य के दौरान 50 साल पुराना जर्जर पुल अचानक ढह गया था. उस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार सेना के एक जवान की असमय मौत हो गई थी।

    इस मुद्दे को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद MPRDC ने आनन-फानन में यहां नए पुल का निर्माण कराया था.लेकिन पहली ही बारिश ने पुल कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, तकनीकी मजबूती और दावों की हवा निकाल दी है।

    उफनते नाले के बीच से वाहन निकालने को मजबूर लोग
    नया पुल धंसने और एप्रोच रोड कट जाने के कारण पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद है. वहीं, नीचे बना कच्चा डायवर्जन मार्ग पानी में डूब चुका है. इसके बावजूद यात्री, बसें और बाइक सवार अपनी जान हथेली पर रखकर नाले के तेज बहाव के बीच से वाहन निकालने को मजबूर हैं।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि MPRDC के कराए जा रहे सभी कार्य बेहद निचले स्तर के साबित हो रहे हैं. अगर समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया या आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया, तो यहां एक बार फिर 1 दिसंबर 2025 जैसी बड़ी त्रासदी दोहराई जा सकती है।

  • बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर मध्य पूर्व और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कुछ इलाकों में भारी से अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश से नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है वहीं कई शहरों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश राजस्थान उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में शुक्रवार को तेज बारिश होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है। भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर सिवनी मंडला छिंदवाड़ा रायसेन नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में कहीं कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। लगातार वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

    उत्तर भारत में दिल्ली एनसीआर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन का खतरा बना रह सकता है इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल असम मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक तमिलनाडु और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में भी गरज चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण अगले कुछ दिनों तक मानसून की गतिविधियां मजबूत बनी रहेंगी। इसके चलते कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय सावधानी रखें और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े न हों। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते बचाव किया जा सके।

  • क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

    क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


    भोपाल । भोपाल के चर्चित अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निलंबन के बाद अब केवल उनके खिलाफ लगे आरोप ही चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में गिने जाने वाले अरेरा हिल्स थाने का प्रभारी बनाया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।

    मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।

    इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।

    डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।