Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ

    भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। त्योहारों के मौसम में यात्रियों को आकर्षित करने और मेट्रो में सफर को किफायती बनाने के लिए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने टिकट पर अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और इसका लाभ 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकेगा। इसके तहत यात्रियों को सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं रिटर्न टिकट और ग्रुप टिकट पर भी पहले की तुलना में ज्यादा बचत होगी। मेट्रो कॉरपोरेशन के मुताबिक मौजूदा ई-वॉलेट बोनस और नई टिकट छूट को मिलाकर यात्रियों को अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत तक का फायदा मिल सकता है।

    नई व्यवस्था के तहत सिंगल जर्नी टिकट यानी एक तरफ की यात्रा के टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। रिटर्न जर्नी टिकट लेने वाले यात्रियों को कुल 30 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा। पहले इस टिकट पर 5 प्रतिशत की छूट मिलती थी। इसी तरह ग्रुप टिकट पर मिलने वाली छूट को बढ़ाकर कुल 35 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाती थी। इस बदलाव से रोजाना मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के साथ ही परिवार और दोस्तों के साथ घूमने जाने वालों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

    ग्रुप टिकट की सुविधा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले इसका लाभ लेने के लिए कम से कम आठ यात्रियों का होना जरूरी था। अब इस संख्या को घटाकर केवल दो यात्री कर दिया गया है। यानी दो लोग भी एक साथ ग्रुप टिकट लेकर छूट का फायदा उठा सकेंगे। इससे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के लिए मेट्रो से सफर करना पहले से अधिक किफायती हो सकता है। हालांकि 20 रुपये वाले सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत की छूट लागू नहीं होगी। यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले संबंधित नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    मेट्रो में बचत का एक और तरीका मोबाइल ऐप का ई-वॉलेट है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन पहले से ही रिचार्ज की राशि के आधार पर बोनस दे रहा है। 200 से 499 रुपये तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत बोनस मिलता है। 500 से 999 रुपये तक के रिचार्ज पर 10 प्रतिशत बोनस दिया जाता है। वहीं 1000 से 1499 रुपये तक के रिचार्ज पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपये तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है। नई टिकट छूट के साथ इस बोनस का लाभ लेने पर यात्रियों की बचत और बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक फायदा टिकट के प्रकार और रिचार्ज राशि पर निर्भर करेगा।

    भोपाल और इंदौर मेट्रो में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा भी यात्रियों के लिए उपयोगी है। यात्री एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के जरिए टिकट प्राप्त कर सकते हैं और यूपीआई क्यूआर कोड तथा ई-वॉलेट जैसे डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं। इससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया आसान होती है और नकद भुगतान की जरूरत भी कम होती है।

    किराये की बात करें तो एक से दो स्टेशन की यात्रा के लिए 20 रुपये तीन से पांच स्टेशन के लिए 30 रुपये और छह से आठ स्टेशन के लिए 40 रुपये किराया निर्धारित है। पूरे रूट पर अधिकतम किराया 80 रुपये तक है। नई छूट लागू होने के बाद यात्रियों को मेट्रो के सफर पर खर्च कम करने का अवसर मिलेगा। त्योहारों के दौरान शुरू की जा रही यह पहल कितने नए यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित करती है इस पर भी नजर रहेगी।

  • MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

    MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस बीच रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। पचमढ़ी में प्रदेश की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है।

    पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। अमरकंटक और इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18.8 डिग्री और शाजापुर में 19 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी के तालुन में पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसे मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी मानसूनी सिस्टम की सक्रियता के चलते कुछ इलाकों में बारिश हुई है। हालांकि, शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि अगले तीन दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    जून की कम बारिश से सीजन का आंकड़ा 4% नीचे

    इस साल जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    कम बारिश की प्रमुख वजह जून में बारिश का कोटा पूरा नहीं होना रहा। इस महीने सामान्य के मुकाबले 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में मानसून सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हुई: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले प्रमुख जिले: इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार।

    इस तरह मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो रही है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट और दिन में तेज धूप के चलते मौसम में गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर बना हुआ है।

  • झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़

    झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में झांसी-शिवपुरी हाईवे पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से एक दंपती की मौत हो गई। दोनों सड़क की साफ-सफाई और रखरखाव के काम में लगे मजदूर थे। हादसे में पत्नी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि गंभीर रूप से घायल पति की ग्वालियर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। दंपती अपने पीछे चार साल के बेटे और 10 तथा 13 साल की दो बेटियों को छोड़ गए हैं। माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया है।

    यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब दो बजे दिनारा थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर में ऋषभ ढाबे के पास हुआ। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सिरसौद निवासी बलबीर लोधी हाईवे पर मेंटेनेंस और साफ-सफाई का काम करता है। घटना के समय उसके साथ सुपरवाइजर रमाकांत यादव समेत करीब दस मजदूर सड़क पर काम कर रहे थे। इसी दौरान दिनारा की ओर से एक अर्टिगा कार तेज रफ्तार से आई और सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से रामश्री बंशकार उनके पति धर्मेंद्र बंशकार और सीता देवी घायल हो गए।

    हादसा इतना गंभीर था कि रामश्री बंशकार की मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति धर्मेंद्र के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। वहीं सीता देवी के पैरों में भी चोट लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। साथियों ने घायलों की मदद की और एंबुलेंस के जरिए उन्हें उपचार के लिए भेजा गया। धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पहले झांसी ले जाया गया। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर कर दिया। वहां रात में उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

    दंपती की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रामश्री और धर्मेंद्र के तीन छोटे बच्चे हैं। इनमें सबसे छोटा बेटा महज चार साल का है जबकि दोनों बेटियों की उम्र 10 और 13 साल बताई गई है। हादसे ने इन बच्चों से उनके माता-पिता दोनों छीन लिए। परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत करने वाले माता-पिता की असमय मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गांव और आसपास के क्षेत्र में घटना को लेकर शोक का माहौल है।

    टक्कर के कारण घटनास्थल पर खड़ी कंपनी की महिंद्रा कैंपर गाड़ी और एक हीरो सीडी डीलक्स बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के समय गोमा विश्वकर्मा और रमाकांत यादव सहित अन्य मजदूर मौके पर मौजूद थे। उन्होंने दुर्घटना को होते देखा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। रामश्री के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए करैरा अस्पताल भेजा गया। मामले में फरियादी बलबीर लोधी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क पर सफाई और रखरखाव के दौरान मजदूरों को तेज रफ्तार वाहनों से खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों की सावधानी और सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल

    इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में मैदान आवंटन और किराया निर्धारण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अधिकारियों से अलग-अलग आयोजनों के लिए जमीन देने की प्रक्रिया का हिसाब मांगा। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम के लिए मैदान उपलब्ध कराने के बदले 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। इसी कथित अंतर को लेकर कांग्रेस ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और शुल्क से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचे और सीईओ का घेराव किया। चौकसे ने कहा कि जब तक मैदान पर हुए कार्यक्रमों की अनुमति और भुगतान से संबंधित रसीदें उपलब्ध नहीं कराई जातीं तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन का आवंटन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सभी आयोजकों पर समान नियम लागू होने चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि दोनों कार्यक्रमों के लिए जारी अनुमति पत्रों और किराए की राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुल्क किस आधार पर तय किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद राजू भदौरिया ने भी IDA के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यदि एक राजनीतिक दल से मैदान के इस्तेमाल के लिए बड़ी रकम ली गई है तो दूसरे दल को जमीन उपलब्ध कराने के दौरान भी नियमों और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन पूरी तरह मुफ्त दिए जाने के आरोप की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    विवाद का एक दूसरा पहलू पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान में प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार भी है। यहां करीब 40 दिनों के बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। दुकानों के अलावा जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराए की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये तक किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने फिलहाल प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। बताया जा रहा है कि इस राशि में दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल हैं। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि तीन से चार दिन के राजनीतिक कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो करीब 40 दिन चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर तय होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन और खर्च का विवरण भी मांगा है।

    कांग्रेस की मुख्य मांग है कि IDA मैदान आवंटन के नियम किराए की गणना और शुल्क में छूट से जुड़ी शर्तों को सार्वजनिक करे। पार्टी का कहना है कि पारदर्शिता से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अलग-अलग आयोजनों के लिए राशि में अंतर क्यों है और कहीं सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं हो रहा। अब इस मामले में IDA का आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होगा। प्राधिकरण की ओर से आवंटन की शर्तें और शुल्क निर्धारण का आधार सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन

    रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन


    नई दिल्ली। भारतीय नौकायन यानी रोइंग की दुनिया में मनजीत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने कठिन परिश्रम और खेल के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश के लिए पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने से लेकर ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा बनने तक उनका सफर कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। खेल में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अब मनजीत सिंह खुद नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर भारतीय नौकायन का भविष्य मजबूत बनाने में जुटे हैं।

    मनजीत सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1988 को हुआ था। उन्हें कम उम्र से ही नौकायन में दिलचस्पी थी। भारत में रोइंग ऐसा खेल रहा है जिसे क्रिकेट और हॉकी जैसे लोकप्रिय खेलों की तुलना में सीमित पहचान मिली है। इसके बावजूद मनजीत ने इस चुनौतीपूर्ण खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में रोइंग की शुरुआत की और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी क्षमता को निखारा। इस दौरान उन्हें इस्माइल बेग और बजरंग लाल जैसे प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। मनजीत अपने करियर में कोच इस्माइल बेग को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक मानते हैं।

    उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। वह हैदराबाद में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में एशियन जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय टीम से बुलावा मिला। यह उनके करियर का अहम पड़ाव था जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता खोला। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और भारतीय रोइंग टीम में अपनी जगह मजबूत की।

    मनजीत सिंह ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक और 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुषों की लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में उन्होंने भारतीय टीम के लिए हिस्सा लिया। इस स्पर्धा में उनके साथी देवेंद्र खंडवाल और संदीप कुमार रहे। ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। मनजीत ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और भारतीय नौकायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके करियर में 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स का भी खास महत्व रहा। इन खेलों में उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते। रोइंग में सफलता हासिल करने के लिए ताकत के साथ संतुलन और तालमेल की भी जरूरत होती है। खिलाड़ियों को पानी की परिस्थितियों के अनुसार अपनी गति बनाए रखनी पड़ती है और पूरी टीम को एक लय में प्रदर्शन करना होता है। मनजीत ने अपने अनुभव और निरंतर अभ्यास के जरिए इन चुनौतियों का सामना किया।

    खेल के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए अगस्त 2020 में उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार खेलों में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। सम्मान मिलने पर मनजीत ने इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। उनके लिए यह पुरस्कार वर्षों की मेहनत और इंतजार का परिणाम था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के बाद अब उनका ध्यान युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर है। वह नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें देश के लिए पदक जीतने का जज्बा पैदा कर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि किसी कम चर्चित खेल में भी लगन और अनुशासन के दम पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।

  • मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश। के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।
    नई दिल्ली ।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।

  • सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही। राजस्थान के सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर विवाद जारी है। पार्टी के नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया है। इनमें गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और धनपत सिंह शामिल हैं। इस घटनाक्रम को सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक किसी पार्षद के क्रॉस वोटिंग करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ। कांग्रेस ने रितु जैन को और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। मतदान में रितु जैन को 30 वोट मिले, जबकि पूजा माली को केवल 5 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति पद पर जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस के ईश्वर सिंह उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए और नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

    भाजपा के 10 पार्षदों के मुकाबले पार्टी उम्मीदवार को केवल पांच वोट मिलने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जाने लगी। नतीजों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के कुछ पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में मतदान गोपनीय होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। पार्टी के भीतर संदेह और असंतोष के बीच बुधवार देर रात चार लोगों को नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। फिलहाल उनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन या किसी पद से हटाने का आदेश सामने नहीं आया है।

    इस विवाद में गौरव प्रजापत का नाम भी चर्चा में है। सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। अब उन्हें भी व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मंदिर में ली गई कसम का मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, गौरव प्रजापत के क्रॉस वोटिंग करने की पुष्टि नहीं हुई है।

    व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ईमानदारी के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे थे और संगठन की ओर से दी गई जिम्मेदारियां निभाते रहे। नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, अब पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के माध्यम से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेजा है। राठौड़ ने संगठन के पद छोड़े हैं, लेकिन पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

    सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और संगठन इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है। इस बीच जिले के अन्य निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को एक-एक वोट मिलने की बात सामने आई है। आबूरोड में सभापति चुनाव में भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे, जबकि उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 और कांग्रेस के बढ़कर 18 हो गए। हालांकि, इन मामलों में भी संबंधित मतदाताओं की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। सिरोही में सभापति चुनाव से पहले रितु जैन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवार मैदान में रहे और रितु जैन चुनाव जीत गईं।

  • मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश । में पुलिस विभाग के भीतर अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के 10 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए नई पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर पुलिस अधीक्षक, सहायक पुलिस महानिरीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पदों पर पदस्थ किया गया है। नई व्यवस्था के तहत भोपाल पुलिस मुख्यालय के साथ बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में भी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फेरबदल में इंदौर और भोपाल में पहले से पदस्थ दो सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग दी गई है।

    जारी आदेश के अनुसार, प्रीतम सिंह बालरे को बालाघाट में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मनोहर सिंह गवली को नर्मदापुरम की अजाक रेंज में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इन दोनों अधिकारियों की नई तैनाती के साथ संबंधित स्थानों पर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। गृह विभाग के आदेश में सभी 10 अधिकारियों के लिए अलग-अलग पद और कार्यस्थल निर्धारित किए गए हैं।

    भोपाल में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। बाबूलाल वर्मा को भोपाल स्थित रेडियो मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। राम शंकर सिलावट को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इसी तरह महेंद्र रायपुरिया को भोपाल में विसबल के सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पुलिस मुख्यालय और उससे संबंधित इकाइयों में अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।

    भोपाल पुलिस मुख्यालय की क्यूडी शाखा में भी दो अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ऋतुराज गुप्ता को यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। सत्येन्द्र कुमार वर्मा को भी इसी शाखा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। दोनों अधिकारियों की नई पोस्टिंग के साथ क्यूडी शाखा में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। गृह विभाग के आदेश में इन पदों पर तैनाती का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

    अन्य जिलों और इकाइयों में भी नई पदस्थापनाएं की गई हैं। विनोद कुमार दीक्षित को उज्जैन लोकायुक्त में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। सतीश कुमार चतुर्वेदी को सागर जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं, बिट्टू शर्मा को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इन आदेशों के तहत अधिकारियों को उनके नए पदस्थापना स्थलों पर जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    गृह विभाग की ओर से जारी इस आदेश में कुल 10 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों की नई पोस्टिंग शामिल है। इसमें भोपाल पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के साथ क्षेत्रीय इकाइयों और अन्य स्थानों पर पदस्थापना की गई है। बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि भोपाल में रेडियो मुख्यालय, विसबल, क्यूडी शाखा और पुलिस मुख्यालय से जुड़े पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। आदेश में अधिकारियों के नाम और उनके नए पदस्थापना स्थलों का उल्लेख किया गया है।

  • मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी नहीं दी और कहा कि ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने यह भी माना कि सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से आगे जाने के लिए जरूरी असाधारण परिस्थितियां भी सरकार साबित नहीं कर पाई।

    इस फैसले से सरकारी भर्तियों में लंबे समय से अटके 13 प्रतिशत पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। हाईकोर्ट ने इन होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार को तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इन पदों पर नियुक्तियां लंबे समय से लंबित थीं, जिससे संबंधित अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा था। फैसले के बाद अनारक्षित वर्ग के उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी नियुक्तियां आरक्षण विवाद के कारण रुकी हुई थीं।

    अदालत ने पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को भी राहत दी है। फैसले के अनुसार, मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच हुई कुछ नियुक्तियां रद्द नहीं की जाएंगी। इस अवधि में 14 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आरक्षण के आधार पर नियुक्ति पाने वाले उम्मीदवारों की नौकरी पर भी फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इस तरह अदालत ने लंबित पदों पर नियुक्तियों के साथ पहले से कार्यरत अभ्यर्थियों की स्थिति को लेकर भी निर्देश दिए हैं।

    यह फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने सुनाया। दोनों न्यायाधीशों ने लाइव कोर्ट में पांच प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से निर्णय का सार समझाया। इनमें ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण को सही मानना, 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े नहीं होना, 50 प्रतिशत की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियों का साबित नहीं होना, 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर नियुक्तियां और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को राहत देना शामिल है।

    मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विवाद वर्ष 2019 से चल रहा है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं और बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने पर कानूनी रोक लगी। जुलाई 2019 में राज्य सरकार ने संबंधित आरक्षण कानून में संशोधन कर 27 प्रतिशत आरक्षण को वैधानिक आधार देने की कोशिश की, लेकिन विवाद जारी रहा।

    भर्तियों के परिणाम अटकने के बीच सितंबर 2022 में सरकार ने 87-13 प्रतिशत का फार्मूला अपनाया। इसके तहत 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर 87 प्रतिशत पदों के परिणाम जारी करने और शेष 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने की व्यवस्था की गई। इससे कई भर्तियों में नियुक्तियों का मामला लंबित रहा। ओबीसी वर्ग की ओर से प्रदेश में अपनी आबादी लगभग 52 प्रतिशत होने का दावा करते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जाती रही, जबकि सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया।

    यह मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और होल्ड किए गए 13 प्रतिशत पदों पर निर्णय लेने की मांग की थी। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद भी यह मुद्दा उठाया गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले से आरक्षण और नियुक्तियों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण दिशा सामने आई है। हालांकि, फैसले के सभी कानूनी प्रभावों की विस्तृत स्थिति लिखित आदेश के सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।

  • मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश। के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) दीपम रायचूरा को पद से हटा दिया है। रायचूरा पर वर्ष 2024-25 में शराब ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद देवड़ा ने संबंधित वाणिज्यिक कर विभाग को जल्द जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोपों का आधार करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया का कथित बयान बताया जा रहा है। हालांकि, इस बयान में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। रायचूरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताया है।

    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मामले में कहा कि दीपम रायचूरा वर्तमान में उनके ओएसडी हैं, लेकिन वर्ष 2024-25 में वे भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उस समय रायचूरा उनके ओएसडी नहीं थे। देवड़ा के अनुसार, शराब ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी उन्हें अखबारों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की जल्द जांच करने के निर्देश दिए और रायचूरा को ओएसडी के पद से हटा दिया। अब मामले में विभागीय जांच के जरिए आरोपों की पड़ताल की जानी है।

    मोहित गोगिया के नाम से सामने आए कथित बयान में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का उल्लेख है। आरोप है कि वर्ष 2024-25 में इन दुकानों के ठेके दिलाने के बदले कुल एक करोड़ रुपये लिए गए। कथित बयान के मुताबिक, इसमें 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा शराब ठेकों के लिए आवश्यक बैंक गारंटी से संबंधित फर्जी सावधि जमा रसीद यानी एफडीआर के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। आरोपों में फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में मदद करने और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में सहयोग की बात भी शामिल है। कथित बयान में बिचौलियों की भूमिका और एक मोबाइल नंबर पर बातचीत होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सत्यापित कॉल रिकॉर्ड या चैट की जानकारी उपलब्ध नहीं है और दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मोहित गोगिया से उनका नाम जोड़कर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। रायचूरा के मुताबिक, भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर रहते हुए गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर मुलाकात हुई होगी, लेकिन उन्होंने उससे किसी अन्य संबंध की बात स्वीकार नहीं की है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को भी झूठा बताया है। ऐसे में मामले में एक ओर कथित बयान के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर रायचूरा ने उन्हें गलत बताते हुए अपना पक्ष रखा है।

    इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पटवारी ने मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग रखी है। उनकी मांगों में शराब ठेकों के आवंटन, बैंक एफडीआर और कथित लेन-देन की जांच शामिल है। उन्होंने 50-50 लाख रुपये के बताए गए भुगतानों और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल के साथ जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित करने की मांग भी की है। पटवारी ने जांच और कार्रवाई की जानकारी जनता के सामने रखने तथा आरोप सिद्ध होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ये कांग्रेस की ओर से रखी गई मांगें हैं, सरकार का घोषित निर्णय नहीं।

    फिलहाल वाणिज्यिक कर विभाग को जांच के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में जांच पूरी करने की निश्चित समय-सीमा या विस्तृत जांच प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है। कथित बयान में किए गए दावों की सत्यता, बैंक लेन-देन और एफडीआर से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। एसआईटी गठित करने की मांग पर सरकार का निर्णय भी सामने नहीं आया है। ओएसडी को पद से हटाने की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि आरोपों की वास्तविकता और आगे की संभावित कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।