Category: Madhya Pradesh

  • प्रेमिका से फोन पर विवाद के बाद युवक ने खाया जहरीला पदार्थ, भोपाल में 19 वर्षीय अरशद की इलाज के दौरान मौत

    प्रेमिका से फोन पर विवाद के बाद युवक ने खाया जहरीला पदार्थ, भोपाल में 19 वर्षीय अरशद की इलाज के दौरान मौत


    भोपाल । भोपाल के बरखेड़ी जहांगीराबाद में 19 वर्षीय युवक मोहम्मद अरशद की जहरीला पदार्थ खाने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। गंभीर हालत में परिजन उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। परिजनों के मुताबिक जहरीला पदार्थ खाने से पहले अरशद की अपनी प्रेमिका से फोन पर बातचीत हुई थी और इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ था। परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद ही अरशद ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और युवक का मोबाइल भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।

    मृतक की पहचान मोहम्मद अरशद पिता मोहम्मद खालिद के रूप में हुई है। वह बरखेड़ी जहांगीराबाद का रहने वाला था। अरशद अपने पिता के साथ सेंटरिंग ठेकेदारी के काम में हाथ बंटाता था। परिवार में वह दूसरे नंबर का बेटा था। उसके एक छोटा भाई और छोटी बहन भी है। अचानक हुई इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    परिजनों के अनुसार अरशद का एक युवती से प्रेम संबंध था और दोनों के बीच काफी समय से बातचीत होती थी। परिवार को भी इस रिश्ते की जानकारी थी। कुछ दिन पहले अरशद के परिजनों ने युवती के परिवार के सामने शादी का रिश्ता रखा था। परिवार का कहना है कि रिश्ता भेजने के बाद युवती के घर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद से अरशद परेशान रहने लगा था। हालांकि वह युवती से फोन पर बातचीत करता रहा।

    मृतक के पिता मोहम्मद खालिद ने बताया कि बुधवार रात अरशद की युवती से फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ। इसके कुछ समय बाद अरशद जहरीला पदार्थ खाकर घर पहुंचा। घर आने के बाद उसने अपने पिता से तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए कहा। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन उसे तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलने के बाद जहांगीराबाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। गुरुवार दोपहर पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने अरशद का मोबाइल भी अपने कब्जे में लिया है। अब मोबाइल की जांच और कॉल डिटेल के जरिए उसकी आखिरी बातचीत की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले युवक की किन लोगों से बातचीत हुई थी और आखिरी फोन कॉल में क्या हुआ था।

    परिजनों का कहना है कि अरशद की मौत के पीछे फोन पर हुई बातचीत की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। मामले में उपलब्ध साक्ष्यों मोबाइल की जानकारी कॉल डिटेल और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच जारी रखी है।

  • ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज

    ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज


    भोपाल । भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में 17 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क को लेकर गुरुवार सुबह रहवासियों ने प्रदर्शन किया। कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान कहीं सीमेंटेड तो कहीं डामर की सड़क बनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। रहवासियों का कहना है कि जब पूरी कॉलोनी के लिए सड़क निर्माण का बड़ा टेंडर हुआ है तो अलग अलग हिस्सों में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण का तरीका अलग क्यों रखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि पूरी कॉलोनी में सीमेंटेड सड़क बनाई जाए ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बार बार उखड़ने की समस्या न हो।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रहवासी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी की। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी के मुताबिक करीब 85 एकड़ में फैली इस कॉलोनी में 1206 से अधिक मकान हैं। कॉलोनी में सड़क निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2026 को करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। रहवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि से कॉलोनी की सड़क व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद सड़क के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से काम होता दिखाई दे रहा है।

    रहवासियों के अनुसार कॉलोनी के HIG और MIG आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के सामने भी सीमेंटेड सड़क का निर्माण किया गया है। इसके बाद जब EWS और LIG आवासों वाले हिस्से में सड़क निर्माण शुरू हुआ तो वहां डामर की सड़क बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।

    मामले की जानकारी क्षेत्रवासियों ने मंत्री कृष्णा गौड़ और PWD अधिकारियों तक भी पहुंचाई। रहवासियों ने मांग की कि EWS और LIG क्षेत्र में भी सीमेंटेड सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि छोटे मकानों वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही मजबूत और टिकाऊ सड़क मिलनी चाहिए जितनी कॉलोनी के अन्य हिस्सों में बनाई जा रही है।

    वहीं PWD अधिकारियों की ओर से रहवासियों को बताया गया कि टेंडर में सीमेंटेड और डामर दोनों तरह की सड़कों का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक EWS और LIG क्षेत्र में डामर की सड़क ही बनाई जाएगी। उनका कहना है कि यदि रहवासी सीमेंटेड सड़क की मांग पर जोर देते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और ऐसी स्थिति में काम रोकना पड़ सकता है।

    रहवासियों का सवाल इसी बात को लेकर है कि यदि एक ही कॉलोनी में दोनों तरह की सड़क बनाने का प्रावधान था तो निर्माण का आधार क्या तय किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क और छोटे आवासों वाले हिस्से में डामर सड़क होने से उन्हें असमानता महसूस हो रही है। उनका यह भी कहना है कि कुछ हिस्सों में छोटे आवासों को छोड़कर करीब 300 मीटर आगे फिर अधिकारियों के आवासों के सामने सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है।

    EWS और LIG-1 तथा LIG-2 क्षेत्र में डामर सड़क का काम शुरू होने के बाद गुरुवार सुबह रहवासी मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने निर्माण कार्य को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों से सड़क निर्माण की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की। रहवासियों ने कहा कि वे सीमेंटेड सड़क की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। इसी क्रम में शनिवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित करने की भी बात कही गई है। अब देखना होगा कि PWD और प्रशासन रहवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और सड़क निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

  • भोपाल में गर्भवती महिला की मौत से सनसनी, पिता बोले- नशे में पति करता था मारपीट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

    भोपाल में गर्भवती महिला की मौत से सनसनी, पिता बोले- नशे में पति करता था मारपीट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार


    भोपाल । भोपाल के डिपो चौराहा स्थित आदिवासी हॉस्टल में गुरुवार सुबह 23 वर्षीय गर्भवती महिला प्रियंका अहिरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रियंका चार महीने की गर्भवती थी और अपने पति विष्णु अहिरवार के साथ हॉस्टल में रहती थी। विष्णु इसी हॉस्टल में केयरटेकर के तौर पर काम करता है। पुलिस की शुरुआती जांच में प्रियंका द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई है लेकिन उसके गले और पीठ पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल की मर्चुरी में रखवाया है।

    पुलिस के मुताबिक घटना गुरुवार सुबह करीब 4 बजे की है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। शुरुआती जांच में आत्महत्या की बात सामने आने के बावजूद शरीर पर मिले चोट के निशानों ने मामले को संदिग्ध बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोट के निशान किस परिस्थिति में आए और महिला की मौत से उनका कोई संबंध है या नहीं।

    प्रियंका के पिता गजराज सिंह ने अपने दामाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रियंका मूल रूप से विदिशा जिले के टेरन तहसील क्षेत्र की रहने वाली थी। करीब तीन साल पहले उसने विष्णु अहिरवार के साथ प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद से ही प्रियंका पति के साथ आदिवासी हॉस्टल में रह रही थी। पिता के अनुसार उनकी बेटी वर्तमान में चार महीने की गर्भवती थी।


    गजराज सिंह का आरोप है कि प्रियंका ने फोन पर कई बार पति के व्यवहार की शिकायत की थी। वह कथित तौर पर बताती थी कि विष्णु नशे की हालत में उसके साथ मारपीट करता था। पिता ने यह भी कहा कि बेटी की मौत की जानकारी उन्हें सीधे पति या ससुराल पक्ष की ओर से नहीं दी गई। हॉस्टल के पास रहने वाले एक परिचित ने फोन कर उन्हें प्रियंका की मौत की सूचना दी। इस बात ने भी परिवार के बीच कई सवाल खड़े किए हैं।

    पुलिस फिलहाल पिता के आरोपों और घटनास्थल से मिले तथ्यों दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। एएसआई असीम साहू के मुताबिक अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मृतका के परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह और शरीर पर मिले चोट के निशानों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना से पहले पति और पत्नी के बीच किसी तरह का विवाद हुआ था या नहीं। हॉस्टल में मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। फिलहाल मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बयानों का इंतजार कर रही है। प्रियंका की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि उसकी मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क

    UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क


    भोपाल । भोपाल में आज 8 अक्टूबर को थोक दाल और चावल व्यापारी नो UPI डे मनाकर प्रस्तावित MDR चार्ज का विरोध करेंगे। व्यापारियों ने इसे सांकेतिक आंदोलन बताते हुए कहा है कि 2 हजार रुपए से अधिक के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से प्रस्तावित UPI चार्ज को लेकर है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है और इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

    व्यापारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक हो सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में बड़ी रकम के भुगतान नियमित रूप से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।

    भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक UPI भुगतान व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज सरल और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। ऐसे में UPI पर MDR चार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    नो UPI डे के तहत व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 8 अक्टूबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार न करें। इसे किसी तरह के टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बताया गया है। दाल और चावल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है और डिजिटल इंडिया अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने भी MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाकर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने में सहयोग दिया है। अब सरकार से उम्मीद है कि नए शुल्क का फैसला लेते समय व्यापारियों की लागत और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

    व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन में मामूली प्रतिशत शुल्क भी लगातार कारोबार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण राशि बन सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कारोबारी दिन में 2 हजार रुपए से अधिक के कई UPI लेनदेन करता है तो प्रस्तावित शुल्क का कुल प्रभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

    भोपाल में आज होने वाला नो UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक रूप है। व्यापारियों की कोशिश है कि एक दिन के इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाए और प्रस्तावित MDR चार्ज पर दोबारा विचार किया जाए। अब देखना होगा कि इस सांकेतिक विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया

    वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान सूची से बाहर हुए नामों की दोबारा जांच की जा रही है। इसके लिए भोपाल में 8 और 9 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO घर घर जाकर भी जानकारी जुटा रहे हैं और यह पता किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं उनमें कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता हैं। भोपाल में ऐसे करीब 3.88 लाख नामों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के नाम जांच के दौरान पात्र पाए जाएंगे उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

    करीब 11 महीने पहले SIR की प्रक्रिया के दौरान भोपाल की मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव हुआ था। उस समय जिले में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 16.87 लाख रह गई। इस सूची में करीब 1 लाख 503 मतदाता ऐसे बताए गए हैं जो अनुपस्थित पाए गए थे जबकि 2 लाख 86 हजार 661 मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित यानी परमानेंट शिफ्टेड श्रेणी में रखा गया था। अब इन नामों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखे जा सकें।

    भोपाल की सभी सात विधानसभा सीटों बैरसिया हुजूर भोपाल उत्तर भोपाल मध्य दक्षिण पश्चिम गोविंदपुरा और नरेला में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को भी शिविरों में लोग पहुंचे और अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच कराई। गुरुवार और शुक्रवार को भी नागरिक इन शिविरों में पहुंचकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही BLO की ओर से तैयार की गई सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।

    मतदाता सूची में ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है। वहीं जो लोग स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं उनके नाम हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। दूसरी ओर ऐसे वास्तविक मतदाता जो अपने पते पर नहीं मिले थे या SIR के दौरान किसी कारण से सूची से बाहर हो गए थे उनकी पात्रता की पुष्टि होने पर नाम फिर जोड़े जा सकेंगे।

    खास बात यह है कि 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के लिए भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे युवा एडवांस में फॉर्म 6 भर सकते हैं। इसके लिए पहले जरूरी डिक्लेरेशन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य अनुपस्थित स्थानांतरित मृत और दोहराए गए नामों की जांच के साथ यह सुनिश्चित करना है कि कोई वास्तविक और पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके अलावा नाइट शेल्टर मजदूर बस्तियों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची से जोड़ा जा सके।

  • MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस

    MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर सरकार (Government) और पटवारियों (Patwaris) के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए देवास और आगर-मालवा (Dewas and Agar-Malwa) में 27 प्रोबेशनरी पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, अलग-अलग जिलों में कई पटवारियों को सेवा समाप्ति से पहले कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में पटवारियों को नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है। गुना में चार पटवारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस दिए गए हैं, जबकि पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष समेत चार पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसको लेकर अब पटवारी संघ ने भी नोटिस वापस नहीं लेने पर काम बंद करने की चेतावनी दी हैं।


    रजिस्ट्री में अड़ंगेबाजी का आरोप

    सरकार की कार्रवाई को स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में कथित देरी और अड़ंगेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की ओर से हालांकि कार्रवाई की वजह काम में लापरवाही और अनियमितता बताई जा रही है। कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रदेशभर में पटवारियों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर नोटिस और कार्रवाई वापस लेने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं रुकी तो ऑनलाइन राजस्व कार्य से दूरी बनाकर आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।


    नामांतरण के लिए 8 हजार मांगने वाले पटवारी पर मुकदमे की मंजूरी

    इधर, सीहोर जिले की जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी अभियोजन चलाने की मंजूरी दी गई है। उन पर भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त में शिकायत के अनुसार पटवारी ने नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान हुई बातचीत डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज की गई, जिसमें 8 हजार रुपए में बात तय होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पंच साक्षियों की मौजूदगी में रिकॉर्डिंग का पंचनामा तैयार कर ट्रैप की कार्रवाई की गई। एफएसएल जांच में रिकॉर्ड की गई आवाज पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर की होने की पुष्टि हुई। इन तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. ने अभियोजन की मंजूरी दी है।


    भोपाल में भी रिश्वत के आरोपी पटवारी पर कार्रवाई

    भोपाल में पटवारी मंगलेश खंडेलवाल के खिलाफ भी अभियोजन की स्वीकृति जारी की गई है। उन पर कोलार क्षेत्र में मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। एसडीएम के प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद भोपाल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने पटवारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी है।

  • शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता

    शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के घर एक बार फिर से किलकारी गूंजी है। उनके बेटे कुणाल (Son Kunal) की पत्नी रिद्धि (Wife Riddhi) ने बेटे को जन्म (Giving Birth Son) दिया है। इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शिवराज सिंह ने अपनी खुशू जाहिर की है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, आज हमारे जीवन में एक बार फिर से सौभाग्य का सूर्योदय हुआ है।


    क्या रखा है नाम

    बहू रिद्धि के बच्चे के जन्म के बाद शिवराज सिंह ने बच्चे के नाम का भी खुलासा किया है। शिवराज सिंह चौहान ने पोस्ट करते हुए लिखा, “बेटे के रूप में ‘अहान’ हमारे घर अपार खुशियां लेकर आया है। कुणाल और रिद्धि माता-पिता बने है, मुझे और साधना को फिर से दादा-दादी बनने का सौभाग्य मिला है। कार्तिकेय-अमानत बड़े पापा-बड़ी मम्मी बन गए हैं और हमारी लाड़ली इला का भाई हमारे घर खुशियां लेकर आया है। बेटे ‘अहान’ की नन्ही-सी किलकारी ने पूरे घर को आनंद और प्रेम से भर दिया है। यह हमारे लिए ईश्वर का अनमोल आशीष है। संदीप जैन जी और स्वाति जैन जी को भी नाना-नानी बनने की बहुत-बहुत बधाई।


    2025 में हुई थी शादी

    शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे कुणाल सिंह चौहान की शादी 14 फरवरी 2015 को भोपाल में हुई थी। भोपाल के वाना ग्रीन होटल में हुई शादी में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। दोनों की सगाई 23 मई, 2024 को हुई थी। अब रिद्धि ने बेटे को जन्म दिया है। इस दौरान पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।


    इससे पहले भी गूंजी है किलकारी

    छोटे बेटे कुणाल की पत्नी से पहले बड़े बेटे कार्तिकेय की पत्नी अमानत बंसल ने बेटी को जन्म दिया था। 21 जनवरी, 2026 को दिल्ली के अस्पताल में जन्म होने के बाद बेटी का नाम इला रखा गया। पोती इला के जन्म के बाद भई शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए खुशी जताई थी। अब एक बार फिर से चौहान परिवार में किलकारी गूंजी है।

  • गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम

    गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम


    नई दिल्ली। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने को लेकर भोपाल में धार्मिक बयान सामने आया है। मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुस्लिम युवाओं से गरबा में शामिल नहीं होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं का दूसरी कौम के धार्मिक त्योहार या धार्मिक रस्म में शामिल होना जायज नहीं है। उनके मुताबिक दूसरी कौम की मुशाबहत यानी अनुकरण से भी बचना चाहिए। मुफ्ती ने खास तौर पर मुस्लिम युवाओं को दोस्तों के साथ गरबा में जाने से भी परहेज करने की सलाह दी है।

    अपने वीडियो में मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी के सवाल पर इसे हराम बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में होने वाले गरबा या हिंदू धार्मिक रस्म में मुस्लिम लड़कों का शामिल होना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना सामान्य बात समझते हैं लेकिन उन्हें इससे बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने की बात कही।

    मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समाज की अपनी धार्मिक परंपराएं और रीति रिवाज हैं और युवाओं को इन्हीं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की धार्मिक रस्मों के अनुकरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं उनके लिए पर्याप्त हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है।

    मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने बयान में मस्जिद और नमाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को मुस्लिम धार्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई मस्जिद के गेट तक आया है तो आगे चलकर अंदर भी आ सकता है। उन्होंने लोगों को नमाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

    गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर यह अपील केवल मुफ्ती की ओर से ही नहीं आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं और समाज के लोगों से गरबा में जाने से परहेज करने की अपील कर चुकी है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा था कि इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और विवाद की स्थिति से बचना है।

    कमेटी की ओर से कहा गया है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। इसी को देखते हुए कमेटी ने अपने पदाधिकारियों को प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके तहत स्थानीय उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील की जाएगी।

    कमेटी के मुताबिक जिला प्रशासन को भी इस पहल की जानकारी दी जाएगी। उसका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना उद्देश्य नहीं है बल्कि विवाद से बचना और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है। गरबा और मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच अब यह मुद्दा धार्मिक पहचान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • रीवा में परमाणु प्लांट के खिलाफ ग्रामसभा का बड़ा फैसला, जमीन सर्वे का विरोध कर ग्रामीणों ने सरकार को दी दो टूक चेतावनी

    रीवा में परमाणु प्लांट के खिलाफ ग्रामसभा का बड़ा फैसला, जमीन सर्वे का विरोध कर ग्रामीणों ने सरकार को दी दो टूक चेतावनी



    रीवा । रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 28 हजार करोड़ रुपये के परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के लिए जमीन की जांच और सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और ग्रामीण खुलकर परियोजना के खिलाफ सामने आ रहे हैं। हालात इस कदर बढ़ गए कि जमीन के सर्वे के लिए पहुंची ड्रिलिंग मशीनों को ग्रामीणों ने वापस लौटा दिया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे सरकार की कई योजनाओं का लाभ छोड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन अपने गांव की जमीन पर परमाणु संयंत्र किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।

    सिरमौर क्षेत्र के सरई कला गांव में हुई ग्रामसभा में भी परमाणु परियोजना के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं है बल्कि परमाणु परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर भी गंभीर चिंता है। ग्रामीणों को आशंका है कि बड़े स्तर पर बनने वाले संयंत्र का असर पानी के स्रोतों पर्यावरण खेती और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से ग्रामीण परियोजना की शुरुआती गतिविधियों का भी विरोध कर रहे हैं।

    ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार चाहे तो लाड़ली बहना योजना की राशि बंद कर दे या राशन जैसी सुविधाएं रोक दे लेकिन गांव की जमीन पर परमाणु प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। ग्रामीणों के इस रुख ने प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ा दी है क्योंकि परियोजना को लेकर जमीन की स्थिति और स्थानीय लोगों की राय जानने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा है कि परियोजना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों की चिंताओं और सुझावों पर विचार किया जाएगा। प्रशासन की ओर से फिलहाल बातचीत के जरिए स्थिति को समझने की कोशिश की जा रही है।

    परमाणु परियोजनाओं के विरोध का यह मध्यप्रदेश में पहला मामला नहीं है। मंडला जिले में लंबे समय से प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना को लेकर भी ग्रामीणों का विरोध जारी है। यह परियोजना वर्ष 1982 से प्रस्तावित है और वर्ष 2017 में इसे 1400 मेगावाट की मंजूरी मिली थी। इसके बावजूद परियोजना अभी शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है। मंडला में 119 परिवार गांव छोड़ चुके हैं जबकि अन्य परिवार मुआवजे और परियोजना के विरोध से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

    रीवा में अब ग्रामीणों का विरोध गांव की बैठकों और ग्रामसभा के फैसलों तक पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद इस परियोजना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल ग्रामीणों के तेवर साफ हैं कि विकास योजनाओं का लाभ भले ही छिन जाए लेकिन उनकी जमीन और गांव में परमाणु संयंत्र को मंजूरी स्वीकार नहीं होगी।

  • मध्‍य प्रदेश के 12 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, चक्रवात और ट्रफ से बदला मौसम

    मध्‍य प्रदेश के 12 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, चक्रवात और ट्रफ से बदला मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के सक्रिय होने से पूर्वी हिस्से में आंधी-बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के 12 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जबकि 9 अक्टूबर के बाद सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा और 10 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार गुरुवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में आंधी के साथ बारिश हो सकती है। पिछले 24 घंटे के दौरान भी प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई है।

    9 अक्टूबर को भी इन जिलों में बारिश

    मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में बारिश की संभावना है। इसके बाद सक्रिय सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा।

    10 अक्टूबर से दोनों हिस्सों में मौसम रहेगा शुष्क

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक मौसम केंद्र के सात दिवसीय पूर्वानुमान में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 10 अक्टूबर से दिखाई देगा। इस तारीख से पूर्वी मध्य प्रदेश में भी ड्राय कंडीशन शुरू होने की संभावना है। यानी 10 से 12 अक्टूबर के दौरान पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है।

    बारिश का असर खेती पर, लेकिन पूरे प्रदेश में समान नहीं होगी नमी

    मौसम के इस बदलाव का सबसे सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। 9 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से में होने वाली स्थानीय बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसे पूरे प्रदेश में एक समान नमी उपलब्ध कराने वाली बारिश नहीं माना जा सकता।

    खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार शुष्क मौसम का पूर्वानुमान है। ऐसे में रबी की तैयारियों के दौरान किसानों के लिए अपने खेत की वास्तविक स्थिति, मिट्टी में मौजूद नमी, उपलब्ध सिंचाई सुविधा और पिछले दिनों हुई स्थानीय बारिश को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। केवल प्रदेश में बारिश होने की सामान्य जानकारी के आधार पर बोवनी या सिंचाई का फैसला करना उचित नहीं होगा।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। हालांकि, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के सक्रिय होने के कारण इसके बाद भी कुछ इलाकों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो अक्टूबर में मौसम में बारिश, गर्मी और ठंड—तीनों तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में यही स्थिति बनी हुई है। महीने की शुरुआत में कई जगह धूप खिली, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस हुई और पूर्वी हिस्से में बारिश भी दर्ज की गई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 4% कम हुई मानसून की बारिश

    जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज हुई।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4% अधिक रहा। हालांकि, इसी क्षेत्र के बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    वहीं 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।