Category: Madhya Pradesh

  • 39 लाख की सप्लाई ठगी का आरोपी जयपुर से गिरफ्तार, भरोसा जीतकर कारोबारी को लगाया चूना

    39 लाख की सप्लाई ठगी का आरोपी जयपुर से गिरफ्तार, भरोसा जीतकर कारोबारी को लगाया चूना


    मध्‍य प्रदेश। शिवपुरी में एक बड़े सप्लाई फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए देहात थाना पुलिस ने करीब एक साल से फरार चल रहे आरोपी राजीव भाटिया को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर एक कारोबारी से मार्केटिंग सामग्री सप्लाई के नाम पर 39.49 लाख रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, शिवपुरी के छोटा लुहारपुरा निवासी राहुल गुप्ता, जो ‘श्री मां इंटरप्राइजेज’ नाम से मार्केटिंग व्यवसाय चलाते हैं, उनकी मुलाकात जयपुर स्थित ‘आरबीएम मार्ट प्राइवेट लिमिटेड’ के संचालक राजीव भाटिया से हुई थी। शुरुआत में आरोपी ने समय पर भुगतान लेकर माल की सप्लाई कर दी, जिससे दोनों के बीच विश्वास बन गया।

    यही भरोसा बाद में ठगी का आधार बन गया। अगस्त 2024 से राहुल गुप्ता ने आरोपी की कंपनी के खाते में लगातार आरटीजीएस के जरिए बड़ी रकम भेजनी शुरू कर दी। शुरुआती दौर में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे आरोपी ने माल भेजना बंद कर दिया और संपर्क से बचने लगा।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कुल 39 लाख 49 हजार रुपये प्राप्त करने के बाद न तो कोई माल सप्लाई किया और न ही रकम वापस लौटाई। जब कारोबारी ने पैसे या सामान की मांग की तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा।

    मामले को लेकर पीड़ित राहुल गुप्ता ने बताया कि जनवरी 2025 में वह अपने भाई के साथ जयपुर पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात आरोपी से होटल रॉयल ऑर्किड में हुई थी। वहां आरोपी ने पान मसाला ब्रांड लॉन्च करने की बात कही और 20 जनवरी से सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन यह वादा भी पूरा नहीं हुआ।

    बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेज और अन्य सबूतों की जांच के बाद पुलिस ने पाया कि यह पूरा मामला सुनियोजित धोखाधड़ी का है। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अमानत में खयानत जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

    देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार था और उसकी तलाश लगातार की जा रही थी। आखिरकार तकनीकी निगरानी और इनपुट के आधार पर उसे जयपुर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी ठगी की है।

  • इंदौर में बीजेपी नेता की बिल्डिंग पर फिर पथराव, दो गुटों में टकराव से तनाव

    इंदौर में बीजेपी नेता की बिल्डिंग पर फिर पथराव, दो गुटों में टकराव से तनाव


    मध्‍य प्रदेश। इंदौर के उषा नगर इलाके में रविवार का दिन उस समय तनावपूर्ण बन गया जब बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे की बिल्डिंग पर दो अलग-अलग बार पथराव की घटनाएं सामने आईं। सुबह जहां कुछ अज्ञात युवकों ने बिल्डिंग पर हमला कर ऑफिस के शीशे तोड़ दिए, वहीं शाम को भी एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उनके घर पर फिर से पत्थर फेंके जाते दिखाई दिए। लगातार हुई इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।

    पूरा विवाद एक सामान्य सी बात से शुरू हुआ था, जो बाद में राजनीतिक और सामाजिक तनाव में बदल गया। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात डॉग घुमाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि बिल्डिंग के बाहर गंदगी को लेकर डॉग मालिक और बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे के बीच कहासुनी हो गई, जो बाद में मारपीट तक पहुंच गई।

    इस विवाद में एक पक्ष ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद मामला और ज्यादा बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि दूसरा पक्ष भी बीजेपी से जुड़ा हुआ है और स्थानीय गुटीय राजनीति से इसका संबंध माना जा रहा है। यही कारण है कि इस पूरे मामले को अब पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 का बताया जा रहा है, जहां बीजेपी नेता मालिनी गौड़ के पीए वीरेंद्र शेडगे रहते हैं। घटना के बाद क्षेत्र में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।

    इसी बीच पुलिस ने चेतन पाटिल के दोस्त की शिकायत पर वीरेंद्र शेडगे, गिरीश शेडगे, शानू उर्फ सौरभ दिघे, मनीष ईमालिया, प्रशांत सोनी, प्रणय चितोडा, अमित कोकाटे सहित अन्य लोगों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

    हालांकि, विवाद के बाद स्थिति और जटिल हो गई जब एक और वीडियो सामने आया जिसमें फिर से पथराव की घटना दिखाई दी। इसके बाद पार्टी ने वीरेंद्र शेडगे को निष्कासित कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    सूत्रों के अनुसार, दूसरा पक्ष भी स्थानीय बीजेपी नेताओं से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद न रहकर राजनीतिक गुटबाजी का रूप ले चुका है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी वीडियो, बयान और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा

    MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा


    मध्‍य प्रदेश भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ती मनमानी और अनियंत्रित व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कोचिंग सेक्टर पूरी तरह एक नियामक ढांचे के दायरे में आ जाएगा।

    सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, पहले से चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।

    नए नियमों के तहत फीस और रिफंड व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    इसके अलावा कोचिंग संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। “100% चयन” या “गारंटीड रैंक” जैसे दावे अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। किसी भी सफल छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

    कानून में शिक्षकों की योग्यता को भी स्पष्ट किया गया है। केवल स्नातक (ग्रेजुएट) शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे और किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित रहेगा और न्यूनतम योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है।

    छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। साथ ही उन्हें वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी। कक्षाओं के समय को लेकर भी नियम तय किए गए हैं, जिसके अनुसार एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।

    सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी संस्थान अपनी वेबसाइट पर फीस, कोर्स विवरण, शिक्षक योग्यता और रिफंड नीति जैसी जानकारी सार्वजनिक करें।

    इस कानून की जरूरत को हाल के वर्षों में बढ़ते दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में 900 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे कोचिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

    फिलहाल यह ड्राफ्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने की संभावना है। अगर यह कानून पारित होता है, तो कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • मानसून आया नहीं, फिर भी कोटे से 65% ज्यादा बारिश; MP में मौसम का बदला मिजाज

    मानसून आया नहीं, फिर भी कोटे से 65% ज्यादा बारिश; MP में मौसम का बदला मिजाज


    मध्‍य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून ने अभी आधिकारिक तौर पर दस्तक नहीं दी है, लेकिन मौसम ने अपने तेवर पहले ही दिखाने शुरू कर दिए हैं। जून महीने की शुरुआत से ही राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। हालात यह हैं कि अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे मौसम विभाग भी हैरान है।

    राज्य के कई जिलों में रविवार को भी तेज बारिश देखने को मिली। खंडवा, जबलपुर और सीहोर जैसे जिलों में झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन साथ ही जनजीवन को भी प्रभावित किया। कई जगहों पर तेज हवाओं के कारण यातायात बाधित हुआ और हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बन गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। मानसून की आधिकारिक एंट्री अभी नहीं हुई है, लेकिन वातावरण में नमी और बदलते दबाव के कारण लगातार बारिश हो रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसून 15 से 18 जून के बीच मध्यप्रदेश में प्रवेश कर सकता है।

    भोपाल, आगर-मालवा, शाजापुर और नीमच जैसे जिलों में इस महीने अब तक 2 से ढाई इंच तक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत से काफी अधिक है। वहीं सतना, सीधी, रायसेन, रतलाम, श्योपुर, हरदा और बुरहानपुर जैसे जिलों में भी एक इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।

    मौसम विभाग ने सोमवार के लिए ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी सहित कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    लगातार बदलते मौसम ने किसानों और आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। जहां एक तरफ बारिश से तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसलों और शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की खबरें सामने आई हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्री-मानसूनी गतिविधियां मानसून के मजबूत संकेत हो सकती हैं, लेकिन इसके साथ ही सावधानी बरतना भी जरूरी है। तेज आंधी और बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।

    फिलहाल प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन सावधानी भी जरूरी होगी।

  • ट्विशा केस: जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, सबूत हैंडलिंग और दस्तावेज़ लीक की जांच तेज

    ट्विशा केस: जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, सबूत हैंडलिंग और दस्तावेज़ लीक की जांच तेज


    मध्‍य प्रदेश ट्विशा शर्मा डेथ केस में पुलिस जांच की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार सबूतों के हैंडलिंग, केस डायरी की पहुंच और मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। अब सीबीआई पूरे मामले की हर कड़ी को दोबारा जांच रही है।

    जांच प्रक्रिया में सामने आई खामियां
    मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार जांच के शुरुआती चरण में कई प्रक्रियागत चूक हुईं। 13 मई 2026 को सब-इंस्पेक्टर द्वारा फंदे की रस्सी जब्त की गई थी, लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी पहचान और सीलिंग किसने की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महत्वपूर्ण सबूत को सीधे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय उसे पुलिस वाहन में रखा गया, जिससे उसकी सुरक्षा और प्रमाणिकता पर सवाल उठे हैं।

    सबूत की हैंडलिंग पर विवाद
    दस्तावेजों में दावा किया गया है कि रस्सी और अन्य अहम साक्ष्यों को तुरंत एम्स या फॉरेंसिक लैब भेजने की बजाय देर से प्रोसेस किया गया। इस देरी को जांच की गंभीर चूक माना जा रहा है।

    इसके अलावा यह भी सामने आया है कि जब्ती से जुड़े दस्तावेजों में फंदे की पहचान करने वाले अधिकारी का स्पष्ट रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    केस डायरी और दस्तावेज लीक का आरोप
    हाईकोर्ट में पेश जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि केस डायरी से जुड़े दस्तावेज समय से पहले संबंधित पक्षों तक पहुंच गए।

    इससे जांच की गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    सीबीआई की नई जांच दिशा
    सीबीआई अब इस मामले में कई स्तरों पर जांच कर रही है:
    सबूतों की जब्ती और उनकी सुरक्षा प्रक्रिया
    मेडिकल दस्तावेजों की सत्यता
    केस डायरी की गोपनीयता
    जांच के दौरान की गई प्रशासनिक प्रक्रियाएं
    सीबीआई ने उस मनोचिकित्सक से भी पूछताछ की है, जिनका नाम इलाज संबंधी दस्तावेजों में सामने आया था।

    मेडिकल रिकॉर्ड पर भी सवाल
    जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पीड़िता का वास्तव में इलाज हुआ था या मेडिकल दस्तावेजों का उपयोग कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया।

    डॉक्टर से इलाज, काउंसलिंग और मानसिक स्थिति से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की गई है, जबकि डॉक्टर ने मरीज की निजी जानकारी साझा करने से इनकार किया है।

    अग्रिम जमानत और कोर्ट में दलीलें
    दस्तावेजों के आधार पर आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हाईकोर्ट में पहले ही प्रस्तुत की गई, जिसके चलते संबंधित पक्षों को कानूनी लाभ मिला। हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में अग्रिम जमानत से जुड़ा फैसला सुनाया था, जिसके बाद जांच पर और सवाल उठे।

    ट्विशा केस अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि पुलिस प्रक्रिया, सबूत प्रबंधन और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बनता जा रहा है। सीबीआई की जांच से यह तय होगा कि चूक लापरवाही थी या किसी बड़े स्तर पर गड़बड़ी।

  • MP Weather Update: 8 जून को गर्मी और उमस का डबल अटैक, कहीं बादल तो कहीं तेज धूप; मानसून की आहट का इंतजार

    MP Weather Update: 8 जून को गर्मी और उमस का डबल अटैक, कहीं बादल तो कहीं तेज धूप; मानसून की आहट का इंतजार


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। जून का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। 8 जून को भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहने की संभावना है। राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में दिनभर तेज धूप और उमस का असर देखने को मिल सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही राहत का अहसास करा सकती है।

    मौसम के ताजा संकेत बताते हैं कि भोपाल में सुबह के समय बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ धूप तेज होगी और तापमान तेजी से बढ़ेगा। दोपहर के समय पारा 39 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है। हवा में नमी अधिक रहने से गर्मी का एहसास वास्तविक तापमान से ज्यादा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसके प्रवेश में कुछ देरी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि लोगों को अभी कुछ और दिनों तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।

    राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग के कई जिलों में भी मौसम लगभग इसी तरह बना रह सकता है। दोपहर के समय तेज धूप लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है, जबकि शाम के समय बादलों की हल्की आवाजाही और तेज हवाएं कुछ राहत दे सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसम किसानों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। खरीफ फसलों की तैयारी कर रहे किसान मानसून की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि मानसून की रफ्तार सामान्य रहती है तो अगले एक-दो सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    कुल मिलाकर 8 जून का दिन मध्य प्रदेश में गर्मी, उमस और मानसून की प्रतीक्षा के बीच गुजरने वाला है। लोगों को राहत की उम्मीद बादलों और संभावित हल्की बारिश से जरूर रहेगी, लेकिन व्यापक बारिश के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।

  • बीड़ी नहीं दी तो युवक पर चाकू से हमला, मंदसौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप

    बीड़ी नहीं दी तो युवक पर चाकू से हमला, मंदसौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के दलौदा कस्बे में शनिवार रात एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करने के बाद शुरू हुई कहासुनी चाकूबाजी तक पहुंच गई। घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, कुमारवाड़ा निवासी 23 वर्षीय विजय नाथ शनिवार रात दलौदा कृषि उपज मंडी रोड स्थित एक चाय की दुकान पर चाय पीने गया था। इसी दौरान वहां सिराज नामक युवक भी पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, सिराज ने विजय से बीड़ी मांगी, लेकिन विजय ने उसे बीड़ी देने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

    शुरुआत में मामूली कहासुनी के रूप में शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में उग्र हो गया। आरोप है कि गुस्से में आकर सिराज ने विजय पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के दौरान विजय ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में गंभीर चोट लग गई। घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भीड़ एकत्र हो गई।

    स्थानीय लोगों ने तत्काल घायल युवक की मदद की और उसे दलौदा थाने पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी चोटों का इलाज किया। परिजनों के मुताबिक, चाकू का वार काफी गहरा था, जिसके कारण घायल युवक के हाथ में सात से आठ टांके लगाने पड़े। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद की वजह बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करना था। हालांकि पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं था।

    एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल ने बताया कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती आक्रामकता किस तरह गंभीर अपराधों का रूप ले रही है। सामाजिक स्तर पर भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि मामूली विवादों का हिंसा में बदलना कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। वहीं घायल युवक के परिजन आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • नदी में पहुंचे प्लास्टिक कचरे पर चला सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

    नदी में पहुंचे प्लास्टिक कचरे पर चला सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में शिवना नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर चल रहा जनअभियान लगातार नई मिसाल कायम कर रहा है। विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में संचालित शिवना शुद्धिकरण अभियान रविवार को अपने 128वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रमदानियों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी तट पर पहुंचकर सफाई कार्य में हिस्सा लिया और नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।

    हाल ही में हुई बारिश के कारण शहर के विभिन्न नालों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थ बहकर शिवना नदी में पहुंच गए थे। नदी के किनारों और उथले हिस्सों में यह कचरा जमा हो गया था, जिससे नदी की स्वच्छता और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने लगा था। इसी को ध्यान में रखते हुए रविवार को विशेष सफाई अभियान चलाया गया।

    श्रमदानियों ने नदी में उतरकर प्लास्टिक कचरा, गाद और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला। कई घंटों तक चले इस अभियान के दौरान लगभग एक ट्रॉली कचरा एकत्र किया गया। इसके बाद एकत्रित अपशिष्ट के उचित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, ताकि दोबारा यह सामग्री नदी या आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित न कर सके।

    अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि शिवना नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी स्वच्छता और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। लगातार हो रहे श्रमदान से न केवल नदी का स्वरूप बदल रहा है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

    अभियान के दौरान मौजूद सोनाली जैन ने बताया कि शिवना शुद्धिकरण अभियान का उद्देश्य केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले इस अभियान में शामिल होकर अपने शहर और नदी के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।

    रविवार को आयोजित श्रमदान में विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। अभियान में हेमराज खाबिया, रमेश सोनी, सुरेश सेजपुरिया, रफत पयामी, इष्टा भाचावत, सुनीता बंडी, राखी सत्रावाला, कौशल्या त्रिवेदी, सुनीता माली, राजनारायण लाड़, विकास दशोरा, अंसार मेव, ऋषिराज लाड़ और कनिष्क सोनी सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहे।

    लगातार 128 दिनों से बिना रुके चल रहा यह अभियान अब केवल सफाई कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का एक सफल मॉडल बनता जा रहा है। श्रमदानियों के समर्पण और नागरिकों के सहयोग से शिवना नदी के तटों पर स्वच्छता और सुंदरता लौटती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोग भी इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल मान रहे हैं।

    शिवना शुद्धिकरण अभियान यह संदेश दे रहा है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर किसी लक्ष्य के लिए कार्य करें, तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव संभव है।

  • जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज

    जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में अवैध जुए के कथित संचालन को लेकर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान पर एकत्र होकर दांव लगाते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के गुढ़ चौराहा इलाके का बताया जा रहा है, जहां एक बस्ती में लंबे समय से अवैध जुए का फड़ संचालित होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं।

    जानकारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि शहर के बीचोंबीच कथित रूप से इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन कैसे हो रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और लाखों रुपये तक का दांव लगाया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। लोगों का आरोप है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

    मामले को लेकर कुछ व्यक्तियों के नाम भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कथित जुआ फड़ के संचालन में कुछ लोगों की सक्रिय भूमिका होने की बातें कही जा रही हैं। इसके साथ ही एक महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम भी चर्चाओं में सामने आया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इन आरोपों को सत्यापित किया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता तभी स्थापित मानी जा सकती है जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलें और संबंधित एजेंसियां इसकी पुष्टि करें। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि तथ्य और आरोपों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके।

    उधर, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई है। सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि मामले की जानकारी प्राप्त हुई है और वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जाएगी। यदि जांच में जुआ खेले जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुआ एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस का यह भी कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

    अब शहरवासियों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके और कानून व्यवस्था में आमजन का विश्वास मजबूत हो।

  • चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

    चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

    शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है।

    नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।