Category: Madhya Pradesh

  • शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार

    शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर  इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    English Tags:
    Indore, Crime, RapeCase, MadhyaPradesh, Police, Arrest, Hiranagar, CrimeNewsइंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत

    CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक धरने पर बैठे रहे। बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरना स्थल पहुंचे और विधायकों का समर्थन करते हुए सरकार पर छात्रों के मुद्दों को दबाने का आरोप लगाया।

    इससे पहले जीतू पटवारी राजभवन के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर हिरासत में लिया और वाहन में बैठाया। रिहा होने के बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे, जहां नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

    धरना देर रात करीब 11.30 बजे समाप्त हुआ। धरना खत्म होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस अगले दिन भी विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से छात्रों को लेकर दिए गए कथित बयान पर सार्वजनिक माफी की मांग करेगी।

    धरना स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों और नेता प्रतिपक्ष के फैसले के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को देशद्रोही और राजद्रोही बताने वाले मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले और उन्हें संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ही असली दोषी हैं।

    यह पूरा विवाद दिल्ली में छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्यभर में प्रदर्शन आयोजित किए।

    विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। विरोध के दौरान कुछ विधायक फर्श पर लेट गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें समझाकर धरना समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेस विधायकों से तीखी बहस हुई।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन सहित कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर रैलियां निकाली गईं, नारेबाजी हुई और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि देर रात तक अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गए।

    मध्य प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस छात्रों के मुद्दे और राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।

  • विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना

    विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर मुख्यमंत्री कक्ष तक राजनीतिक हलचल तेज रही। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से हुई, जबकि दिन का समापन पेपर लीक मामले और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के सामने कांग्रेस विधायकों के धरने के साथ हुआ। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

    सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समान नागरिक संहिता के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तीन सांकेतिक शव रखे गए, जिन पर भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी के नाम लिखे कफन ओढ़ाए गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए अन्य विषयों को प्राथमिकता दे रही है।

    इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार ने बहुमत के आधार पर UCC सहित चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से राय लेना जरूरी था। सरकार का पक्ष था कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया गया है और इसे पारित किया जाना आवश्यक है।

    शाम को कांग्रेस ने दिल्ली में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का असर देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर कांग्रेस चर्चा चाहती है, वह राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। सरकार ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए चर्चा से इनकार किया और विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

    दिनभर चले घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद गर्म बना दिया। एक ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों, युवाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

  • बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला

    बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। लंबे समय से सरकार से किराया संशोधित करने की मांग कर रहे निजी बस संचालकों ने अब आंदोलन का रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। लगातार आश्वासनों के बावजूद किराया वृद्धि पर कोई ठोस फैसला नहीं होने से नाराज मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने 26 जुलाई को सागर में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश के सभी 55 जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

    एसोसिएशन के अनुसार सागर के भोपाल रोड स्थित आदर्श गार्डन में दोपहर एक बजे होने वाली बैठक में प्रत्येक जिले से कम से कम पांच प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा बस किराया बढ़ाने की मांग, 7 जुलाई को जारी राज्य सड़क परिवहन योजना के राजपत्र और बस संचालकों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना होगा। यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं आता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और हड़ताल की रूपरेखा भी इसी बैठक में तय की जा सकती है।

    बस संचालकों का कहना है कि परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के साथ कई दौर की बातचीत में किराया बढ़ाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इस बीच डीजल की कीमतों के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स, टायर, बीमा, फिटनेस, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे निजी बसों का संचालन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है और कई ऑपरेटरों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

    एसोसिएशन का तर्क है कि पड़ोसी राज्यों ने समय-समय पर बस किराए में संशोधन किया है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी बस किराए में वृद्धि की है। ऐसे में मध्य प्रदेश में वर्षों से किराया नहीं बढ़ने के कारण यहां के बस संचालक प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत के बीच आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    बैठक में राज्य सड़क परिवहन योजना के तहत सरकारी बसों के संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हाल ही में सरकार ने प्रदेश में सरकारी बसों के संचालन के लिए 40 प्रमुख रूट प्रस्तावित किए हैं और इस संबंध में आपत्तियां व सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। निजी बस संचालक इस योजना के संभावित प्रभाव पर भी विचार करेंगे।

    बस संचालकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। ऐसे में 26 जुलाई को सागर में होने वाली बैठक पर पूरे प्रदेश के परिवहन क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आगे की रणनीति तय होगी और जरूरत पड़ने पर हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 4.2 इंच वर्षा नर्मदापुरम में रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल सहित कई शहरों में पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले 24 से 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम के अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच तथा खरगोन में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर सहित कई जिलों में भी तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला।

    लगातार बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद एक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में खेत पानी से लबालब भर गए हैं। कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर मजबूत हो गया है। प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र, लगातार बादलों की मौजूदगी और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी बारिश को लगातार बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी वर्षा हो रही है।

    बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। सुबह और रात के समय मौसम काफी सुहावना हो गया है तथा लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वातावरण में सापेक्षिक आर्द्रता 75 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है और वर्षा की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यही हवाएं समुद्र से नमी लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंच रही हैं और मानसून को लगातार मजबूत बनाए हुए हैं।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल तथा आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

  • निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल

    निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब का हवाला देते हुए फीस निर्धारण में पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच 5062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय की, जबकि वर्ष 2025-26 में एक ही बैठक के दौरान 355 निजी संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उन्होंने इसे नियमों और व्यावहारिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय करती है। उन्होंने जानकारी दी कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिकतम 15 दिनों के भीतर संस्थानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुल्क निर्धारण किया जाता है।

    सरकार के जवाब के बाद कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने दावा किया कि उनके मूल प्रश्न का महत्वपूर्ण हिस्सा अनुत्तरित छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने संस्थानों के आवेदन और वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया। उनके अनुसार वर्ष 2008 के राजपत्र में स्पष्ट प्रावधान हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की फीस तय करने से पहले उसके आय-व्यय, बैलेंस शीट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर संस्थान से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी लिया जाता है। ऐसे में एक ही दिन में बड़ी संख्या में संस्थानों की फीस तय होना कई सवाल खड़े करता है।

    उपाध्याय ने विशेष रूप से वर्ष 2025-26 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उनका कहना है कि प्रत्येक संस्थान के दस्तावेजों, निरीक्षण दल की रिपोर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट का अलग-अलग परीक्षण किए बिना इतनी बड़ी संख्या में शुल्क निर्धारण करना संभव नहीं लगता। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

    विधायक ने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस तय की जाती है, जबकि कई संस्थानों पर पहले से नियमों के उल्लंघन और अनियमित संचालन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे संस्थानों के मामलों में निरीक्षण दल और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किन मानकों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और शुल्क निर्धारण की अनुमति कैसे दी गई।

    कांग्रेस विधायक ने मांग की कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में समान पाठ्यक्रमों के लिए पारदर्शी और एक समान शुल्क व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

    यह मुद्दा विधानसभा में सामने आने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया, नियामक समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन आरोपों पर क्या आगे की कार्रवाई करती है।

  • भोपाल में शेफ की आत्महत्या सुसाइड नोट में लिखा कर्ज चुका दिया फिर भी रोज मांग रहे थे 10 हजार रुपये ब्याज

    भोपाल में शेफ की आत्महत्या सुसाइड नोट में लिखा कर्ज चुका दिया फिर भी रोज मांग रहे थे 10 हजार रुपये ब्याज


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में कर्ज और कथित सूदखोरी से जुड़ा एक दर्दनाक मामला सामने आया है। कलियासोत डेम के पास तेरा शटर क्षेत्र में एक 37 वर्षीय शेफ का शव पेड़ से फंदे पर लटका मिला। मृतक की पहचान नीलबड़ स्थित बृजधाम कॉलोनी निवासी रामश्रवण पटेल के रूप में हुई है। वह कोलार रोड स्थित एक निजी बंगले में शेफ के तौर पर कार्यरत थे। घटना स्थल से उनकी बाइक और जेब से एक सुसाइड नोट मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

    परिजनों के अनुसार रामश्रवण मंगलवार दोपहर काम पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। बाद में कलियासोत क्षेत्र में उनका शव पेड़ से लटका मिला। सुसाइड नोट में लिखे मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने परिवार को सूचना दी। बुधवार सुबह पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी।

    मौके से मिले सुसाइड नोट में मृतक ने आरोप लगाया कि मकान निर्माण के लिए उसने एक व्यक्ति से लगभग 3.70 लाख रुपये उधार लिए थे। नोट के अनुसार उसने पूरी मूल राशि चुका दी थी, लेकिन इसके बावजूद उससे प्रतिदिन 10 हजार रुपये ब्याज की मांग की जा रही थी। मृतक ने यह भी लिखा कि एक निजी फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट लगातार उस पर दबाव बना रहे थे, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में आ गया था।

    रामश्रवण के भाई अरुण पटेल ने बताया कि परिवार ने कर्ज चुकाने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए थे। इसके बावजूद वसूली करने वाले लगातार दबाव बना रहे थे। परिवार का कहना है कि पिछले कुछ समय से रामश्रवण बेहद तनाव में था और इसी कारण उसने यह कदम उठाया।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि तीन दिन पहले रामश्रवण को चुनाभट्टी थाने बुलाया गया था, जहां उस पर कर्ज चुकाने का दबाव बनाया गया। हालांकि पुलिस ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है।

    रातीबड़ थाना प्रभारी रास बिहारी शर्मा के अनुसार शुरुआती जांच में आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने यह भी जानकारी दी है कि चार दिन पहले रामश्रवण ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था, लेकिन उस समय उसकी जान बच गई थी।

    पुलिस अब सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग का परीक्षण कराएगी। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और नोट में जिन लोगों का उल्लेख किया गया है, उनसे पूछताछ भी की जाएगी। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि कहीं कर्ज वसूली के नाम पर अवैध वसूली, धमकी या प्रताड़ना तो नहीं की गई।

    पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित

    मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के नाम रहा। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और लगातार शोरगुल के चलते कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के विरोध को केवल राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास बताया।

    शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्रों का अपमान किया गया और उनके खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जवाब में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है और विधानसभा के नियमों के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सूचना निर्धारित समय के बाद दी गई थी।

    सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया। विधायकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था, आदिवासियों की जमीन, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक परियोजना पर लगाए गए जुर्माने, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर सरकार को घेरा।

    शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने 167 करोड़ रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार और किसानों तक पानी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों बाद भी किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि परियोजना पूरी हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी तकनीकी खामियां होंगी, वहां जांच कराकर सुधार कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी परियोजना का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

    पेसा एक्ट और सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सामूहिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

    सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनहित के मुद्दों पर बहस और विधायी कार्यवाही एक साथ देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी किसानों, शिक्षा, आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।

  • महिला आयोग की सुनवाई में भावुक कर देने वाला मामला बच्चों ने पिता पर लगाए अफेयर और घरेलू हिंसा के आरोप

    महिला आयोग की सुनवाई में भावुक कर देने वाला मामला बच्चों ने पिता पर लगाए अफेयर और घरेलू हिंसा के आरोप


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। दो नाबालिग बच्चे अपनी मां के लिए न्याय की गुहार लेकर आयोग पहुंचे और अपने ही पिता पर गंभीर आरोप लगाए। बच्चों का कहना था कि उनके पिता का पड़ोस में रहने वाली एक शादीशुदा महिला से पिछले चार वर्षों से संबंध है। इस रिश्ते का विरोध करने पर वह उनकी मां के साथ मारपीट करते हैं और कई बार उन्हें भी प्रताड़ित किया जाता है। लगातार घरेलू तनाव के कारण उनकी मां गहरे अवसाद में चली गई हैं और आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी हैं।

    बच्चों ने आयोग के सामने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी पुलिस से की गई थी। उस समय उनके पिता ने शपथ पत्र देकर दोबारा ऐसा नहीं करने का भरोसा दिया था लेकिन इसके बावजूद उनका व्यवहार नहीं बदला। बच्चों का आरोप है कि संबंधित महिला के भी तीन बच्चे हैं और वह आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उक्त महिला ने उनके पिता से आर्थिक मदद ली लेकिन अब तक राशि वापस नहीं की है।

    बच्चों ने आयोग से अपनी मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

    इसी जनसुनवाई के दौरान एक अन्य पारिवारिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान भी हुआ। पति और पत्नी दोनों पक्ष आयोग के सामने उपस्थित हुए। समझाइश और बातचीत के बाद दोनों साथ रहने पर सहमत हो गए। महिला ने आगे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की इच्छा जताई जबकि पति ने भी परिवार में आपसी विश्वास और सम्मान के साथ जीवन बिताने का आश्वासन दिया।

    जनसुनवाई में एक औद्योगिक हादसे से जुड़ा मामला भी सामने आया। मंडीदीप स्थित एक फैक्ट्री के वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों के नीचे दबने से एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद अब तक उसे उचित मुआवजा नहीं मिला। सुनवाई के दौरान कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ जिस पर महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई में कंपनी के प्रतिनिधि की अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने स्पष्ट कहा कि यदि अगली सुनवाई में भी कंपनी की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ तो उसके खिलाफ वारंट जारी करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आयोग पूरी गंभीरता से काम करेगा।

    मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में घरेलू हिंसा कार्यस्थल पर प्रताड़ना पारिवारिक विवाद और मुआवजे से जुड़े कुल 18 मामलों पर सुनवाई की गई। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव सदस्य साधना स्थापक और सचिव सुरेश तोमर की मौजूदगी में दोनों पक्षों को सुनकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। आयोग ने दोहराया कि महिलाओं और पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।