Category: Madhya Pradesh

  • MP ट्रैवल मार्ट में दुनिया की नजर मध्य प्रदेश पर, 34 देशों के मेहमान और 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स करेंगे पर्यटन संभावनाओं पर मंथन

    MP ट्रैवल मार्ट में दुनिया की नजर मध्य प्रदेश पर, 34 देशों के मेहमान और 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स करेंगे पर्यटन संभावनाओं पर मंथन


    भोपाल । भोपाल में बुधवार से मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 का आगाज होने जा रहा है। कुशाभाऊ ठाकरे कंवेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस ट्रैवल मार्ट में दुनिया के 34 से अधिक देशों के 100 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। अमेरिका फ्रांस जापान इटली ब्रिटेन जर्मनी स्पेन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के टूर ऑपरेटर्स और ट्रैवल राइटर्स मध्य प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को करीब से समझेंगे। आयोजन में देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 180 से ज्यादा घरेलू टूर ऑपरेटर्स भी हिस्सा ले रहे हैं। इस तरह मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए एक बड़े बिजनेस टू बिजनेस मंच के रूप में सामने आएगा।

    इस आयोजन को मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ट्रैवल मार्ट के दौरान प्रदेश में 1100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जाएगा। पर्यटन क्षेत्र में होटल वेलनेस रिसॉर्ट लग्जरी टेंटेड कैंपिंग और इको टूरिज्म जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए 14 प्रमुख परियोजनाओं के लिए निजी निवेशकों को 252 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ अवार्ड दिए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों की सड़क यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक सुरक्षित और बेहतर बनाने के उद्देश्य से तीन प्रमुख पर्यटन राजमार्गों पर आधुनिक मार्ग सुविधा केंद्र विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाया जाएगा।

    इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण सीहोर जिले के रामगढ़ में प्रस्तावित 848.40 करोड़ रुपये का मेगा पर्यटन निवेश समझौता होगा। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और एआरएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच होने वाले इस समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स गोल्फ विला वेलनेस रिसॉर्ट लग्जरी होटल और उच्चस्तरीय आतिथ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना से मालवा और विंध्य क्षेत्र को पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही करीब 920 प्रत्यक्ष रोजगार और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

    मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट का यह सातवां संस्करण है और इसे राज्य के पर्यटन क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और रणनीतिक बी2बी नेटवर्किंग मंच बताया जा रहा है। आयोजन के जरिए विदेशी और घरेलू टूर ऑपरेटर्स को प्रदेश के पर्यटन स्थलों उत्पादों और अनुभवों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में 57 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई थी और कुल पर्यटक आंकड़ा 21.05 करोड़ तक पहुंच गया था। अब सरकार इस बढ़ती पर्यटक आवाजाही को वैश्विक निवेश आधुनिक अधोसंरचना और स्थानीय रोजगार के अवसरों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    ट्रैवल मार्ट में मध्य प्रदेश की संस्कृति और खानपान की झलक भी विदेशी मेहमानों को देखने को मिलेगी। इसके लिए मां की रसोई नाम से विशेष लाइव फूड काउंटर तैयार किया गया है। यहां मेहमानों को कोदो मेथी भात ज्वार बाजरे की रोटियां दाल बाफला मट्ठे के आलू चक्की का साग भुने भाटे का भर्ता और सिलबट्टे की ताजा चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे। इस आयोजन के जरिए मध्य प्रदेश अपने पर्यटन स्थलों के साथ अपनी संस्कृति खानपान और आतिथ्य परंपरा को भी दुनिया के सामने पेश करेगा।

  • इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल

    इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में सड़क धंसने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में मंगलवार को चैंबर के पास सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क की ऊपरी कांक्रीट परत टूटने के बाद जब मौके की जांच की गई तो उसके नीचे जमीन का बड़ा हिस्सा खोखला मिला। सड़क का एक स्लैब भी हवा में लटका हुआ दिखाई दिया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम के जनकार्य विभाग ने इंजीनियर को मौके पर भेजा और सड़क धंसने के कारणों की जांच शुरू कराई। खास बात यह है कि इसी जगह करीब एक साल पहले भी सड़क धंस चुकी है। ऐसे में दोबारा उसी स्थान पर सड़क बैठने से निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

    परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में सड़क के नीचे बने चैंबर के आसपास जमीन खोखली होने की जानकारी सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती तौर पर अधिकारियों को आशंका है कि पुराना ड्रेनेज चैंबर कमजोर होकर ढह गया होगा जिसके कारण सड़क के नीचे खाली जगह बनी और ऊपर का हिस्सा दबाव नहीं झेल सका। यहां ड्रेनेज लाइन पुरानी बताई जा रही है जबकि चैंबर का ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। हालांकि सड़क के नीचे इतना बड़ा खोखलापन किस वजह से बना यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले भी इसी स्थान पर सड़क धंस गई थी। उस समय चैंबर की मरम्मत कराने के बाद सड़क के नीचे मिट्टी का भराव किया गया था। अब एक बार फिर उसी जगह सड़क धंसने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछली मरम्मत के बाद समस्या पूरी तरह दूर क्यों नहीं हुई। क्या ड्रेनेज लाइन में लीकेज जारी रहा या फिर सड़क के नीचे मिट्टी का भराव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

    तकनीकी जानकारों के अनुसार पुरानी भूमिगत ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने पर पानी आसपास की मिट्टी को धीरे धीरे बहा सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर सड़क के नीचे खाली जगह बनती जाती है। ऊपर से सड़क पर लगातार वाहनों का दबाव पड़ता रहता है। जब जमीन का सहारा कमजोर हो जाता है तो कांक्रीट की परत टूटकर नीचे बैठ सकती है। इसी तरह किसी मरम्मत या निर्माण के बाद यदि मिट्टी का भराव ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो भी समय के साथ जमीन बैठने की समस्या सामने आ सकती है।

    परदेशीपुरा की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर में पिछले कुछ महीनों के दौरान सड़क धंसने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेघदूत गार्डन गोराकुंड गाड़ी अड्डा नासिया रोड और पंढरीनाथ क्षेत्र में भी सड़क धंसने के मामले सामने आए हैं। शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क चैंबर निर्माण कार्य और सड़क के नीचे किए जाने वाले भराव की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    फिलहाल नगर निगम की टीम मौके की स्थिति का परीक्षण कर रही है। सड़क के नीचे बने खोखले हिस्से की वजह स्पष्ट होने के बाद जरूरी सुधार कार्य किया जाएगा। लेकिन एक ही जगह पर एक साल के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली मरम्मत के दौरान समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल सतही सुधार किया गया था।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।

  • MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल

    MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamlapati Railway Station) को देश के वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों (World-class railway stations) में शुमार किया जाता है, जहां एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का दावा किया जाता है, उसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भैंसों के घूमने का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. प्लेटफॉर्म पर दो भैंसें ट्रेन के बिल्कुल बगल से गुजरती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दो भैंसें प्लेटफॉर्म पर आराम से टहल रही हैं और यात्रियों के बीच से होते हुए ट्रेन के पास तक पहुंच गईं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर भैंसें प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं?


    450 करोड़ के स्टेशन पर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है. इसे देश के पहले विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशनों में शामिल किया गया है। स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, एस्केलेटर, लिफ्ट, एसी लाउंज, फूड कोर्ट और आधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं. लेकिन प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।


    रेलवे बोला- मामले को दिखवा रहे हैं

    मामले को लेकर जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर शाह ने कहा कि वह पूरे मामले को दिखवाएंगे. उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे और बंसल के पास है. सुरक्षा में कहीं कोई चूक सामने आती है तो रेलवे, बंसल के साथ मिलकर उसे सुधारने का काम करता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आउटर की तरफ का हिस्सा खुला रह जाता है, जिसकी वजह से जानवर स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा रेलवे पटरी के आसपास लोग खाने-पीने का सामान भी फेंक देते हैं. खाने की तलाश में जानवर रेलवे ट्रैक और स्टेशन की तरफ आ जाते हैं।


    यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

    हालांकि रेलवे का तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि अगर एक भैंस प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है? प्लेटफॉर्म पर ट्रेनें लगातार आती-जाती हैं और बड़ी संख्या में यात्री मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी आवारा पशु के अचानक ट्रेन की चपेट में आने या यात्रियों से टकराने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।

    फिलहाल रेलवे ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराने की बात कही है. अब देखना होगा कि भैंसें स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे और स्टेशन प्रबंधन क्या कदम उठाता है।

  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • MP से मानसून की विदाई, फिर भी 3 दिन बारिश, जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में आज अलर्ट

    MP से मानसून की विदाई, फिर भी 3 दिन बारिश, जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में आज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन प्रदेश के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण अगले तीन दिन पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर जारी रह सकता है। बुधवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल समेत 16 जिलों में गरज-चमक, आंधी और बारिश का अनुमान है, जबकि भोपाल, इंदौर समेत पश्चिमी हिस्से में दिन में तेज धूप और रात में ठंडक बनी रहेगी।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पिछले दो दिन से मौसम बदला हुआ है। कई इलाकों में बादल छाए रहे और रिमझिम बारिश हुई। मंगलवार को रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भी बारिश दर्ज की गई। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, प्रदेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की एक्टिविटी बनी हुई है, जिसके प्रभाव से बारिश की स्थिति बन रही है।

    आज इन 16 जिलों में बारिश का अनुमान
    अगले 24 घंटे के दौरान जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। 8 और 9 अक्टूबर को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इसके बाद 10 अक्टूबर को मौसम सिस्टम के कमजोर पड़ने की संभावना है।

    भोपाल-इंदौर में धूप, रात में बढ़ेगी ठंडक
    पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज इसके उलट रहेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में दिन के समय तेज धूप खिलने की संभावना है। हालांकि, रात में ठंडक बनी रहेगी।

    प्रदेश में रात का तापमान भी लगातार नीचे जा रहा है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पचमढ़ी में 18 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री, शाजापुर में 18.3 डिग्री और अमरकंटक-करौंदी में 18.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं, दिन में ग्वालियर का तापमान 37 डिग्री के पार बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 साल के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का ट्रेंड देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का मिजाज इसी तरह रहने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ दिन में धूप तेज हुई है, जबकि रात में ठंडक बढ़ी है।

    100 दिन सक्रिय रहा मानसून
    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को मानसून ने प्रदेश में प्रवेश किया था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से इसकी विदाई हो गई।

    मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।

    पूर्वी हिस्से के इन जिलों में कम बारिश
    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग को मिलाकर पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा रहा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई।

    पश्चिमी MP में 9 से 51% तक कम पानी
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में मानसून का कोटा पूरा
    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा रहा। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर शामिल हैं। इसके अलावा आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य बारिश हुई।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के बाकी 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    मानसून की विदाई के बाद अब प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग रंग दिखा रहा है। पूर्वी जिलों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से बारिश का दौर चल रहा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में दिन गर्म और रातें ठंडी हो रही हैं। 10 अक्टूबर के बाद सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है।

  • जबलपुर की रैना यादव ने एशियन गेम्स में निभाई खास जिम्मेदारी, गोल्ड के बाद अब ओलंपिक जीत का सपना

    जबलपुर की रैना यादव ने एशियन गेम्स में निभाई खास जिम्मेदारी, गोल्ड के बाद अब ओलंपिक जीत का सपना


    जबलपुर । जबलपुर की रैना यादव ने भारतीय महिला हॉकी टीम की सहायक कोच के रूप में एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सफलता का हिस्सा बनकर शहर का नाम रोशन किया है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में 44 साल बाद स्वर्ण पदक अपने नाम किया और इसके साथ ही टीम ने ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद मंगलवार को जब रैना यादव जापान से बेंगलुरु होते हुए जबलपुर पहुंचीं तो शहर में उनका जोरदार स्वागत किया गया। परिवार के सदस्यों के साथ साथी खिलाड़ियों और शुभचिंतकों ने भी उन्हें बधाई दी।

    एशियन गेम्स में भारतीय टीम के प्रदर्शन के पीछे लंबे समय से की गई तैयारी और रणनीति की अहम भूमिका रही। रैना यादव ने बताया कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टीम का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट था। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का पूरा ध्यान स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर था। टीम ने हर मुकाबले को इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए खेला और फाइनल तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

    फाइनल मुकाबला चीन की टीम के खिलाफ था। चीन पिछले ओलंपिक में रजत पदक जीत चुका था और इसलिए भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती थी। रैना ने बताया कि टीम ने चीन के खिलाफ मुकाबले को लेकर पहले से रणनीति तैयार कर रखी थी। सेमीफाइनल में जब चीन और जापान आमने सामने थे तब भारतीय टीम चाहती थी कि चीन ही फाइनल में पहुंचे क्योंकि टीम की तैयारी चीन को ध्यान में रखकर की गई थी। चीन के फाइनल में पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को अपनी तैयार रणनीति के मुताबिक खेलने का मौका मिला।

    रैना के मुताबिक फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में दबाव होना स्वाभाविक था लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने इस दबाव को सकारात्मक तरीके से लिया। टीम ने मैदान पर अपनी रणनीति को लागू किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत ने भारतीय महिला हॉकी के लिए एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की और ओलंपिक का टिकट भी पक्का किया।

    रैना ने बताया कि भारतीय महिला हॉकी टीम की तैयारी केवल किसी एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है। टीम का वर्ष 2028 तक का कार्यक्रम और मैच शेड्यूल पहले से तय है। खिलाड़ियों के लिए हर दिन अलग तरह की तैयारी होती है जिसमें तकनीकी और टैक्टिकल अभ्यास के साथ वीडियो सेशन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग तथा रिकवरी पर भी ध्यान दिया जाता है। लंबे समय की योजना के अनुसार खिलाड़ियों को बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार किया जा रहा है।

    सहायक कोच के रूप में रैना का सफर भी मेहनत और तैयारी से जुड़ा रहा है। उन्होंने अप्रैल में हॉकी इंडिया के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक खुद को तैयार किया। उनके पास इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के विभिन्न स्तरों के कोर्स और कोचिंग से जुड़े प्रमाणपत्र हैं। इसके अलावा उन्होंने पटियाला से डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग भी किया है।

    रैना अपने सफर को संघर्षपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि आगे बढ़ने के रास्ते में प्रोत्साहित करने वाले लोगों के साथ हतोत्साहित करने वाले लोग भी मिलते हैं लेकिन आलोचनाओं और मुश्किल परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूती से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। एशियन गेम्स का स्वर्ण उनके सफर की बड़ी उपलब्धि है लेकिन अब उनकी नजर अगले बड़े लक्ष्य पर है। रैना का सपना 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ बेहतर प्रदर्शन करना और स्वर्ण पदक जीतना है।

  • रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप

    रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप


    जबलपुर । जबलपुर शहर के नया मोहल्ला स्थित तिलक वार्ड में सोमवार रात एक पुराने दो मंजिला मकान का अगला हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर चार परिवार मौजूद थे। मलबा गिरने के कारण बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया और बुजुर्गों महिलाओं तथा बच्चों समेत करीब 10 लोग अंदर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई।

    जानकारी के मुताबिक जिस मकान में यह हादसा हुआ वह करीब 80 से 100 साल पुराना बताया जा रहा है। मकान का अगला हिस्सा काफी समय से जर्जर हालत में था। सोमवार रात अचानक इसका एक बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। मलबा गिरने के बाद मकान से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। अंदर मौजूद लोगों के लिए स्थिति मुश्किल हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा।

    रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मकान तक पहुंचने का रास्ता था। मकान जिस गली में स्थित है वह काफी संकरी है। इसके कारण बचाव दल और मशीनों को अंदर ले जाने में परेशानी हुई। स्थिति को देखते हुए सबसे पहले आसपास की बिजली आपूर्ति बंद कराई गई ताकि टूटे हुए हिस्से और मलबे के बीच किसी तरह के शॉर्ट सर्किट का खतरा न रहे। इसके बाद नगर निगम की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया।

    संकरी गली के कारण जेसीबी मशीन को भी मौके तक पहुंचाने में काफी मुश्किल हुई। रेस्क्यू टीम ने मकान से बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का फैसला किया। इसके लिए बाड़े की पिछली दीवार को तोड़ा गया। रास्ता बनने के बाद बचाव दल अंदर पहुंच सका और एक एक करके फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान के बाद बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों समेत सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    मकान में रहने वाले चंदन सिंह ने बताया कि उनके अलावा लाल सिंह विक्रम सिंह और ईश्वर सिंह के परिवार भी इसी बाड़े में रहते हैं। मकान का अगला हिस्सा गिरने के बाद बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया था। अंदर मौजूद परिवारों में बुजुर्गों और बच्चों के होने के कारण चिंता और बढ़ गई थी। राहत दल की मदद से सभी को बाहर निकाला गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के अपर आयुक्त सौरभ सिंह भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। देर रात तक मकान का मलबा हटाने का काम जारी रहा। प्रशासन की ओर से आसपास के हिस्से की स्थिति का भी जायजा लिया गया।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक तिलक वार्ड में बड़ी संख्या में पुराने और जर्जर मकान मौजूद हैं। इनमें कई मकान 70 से 100 साल पुराने बताए जाते हैं। बारिश के बाद ऐसे मकानों की स्थिति और कमजोर होने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर मकानों को लेकर पहले भी नगर निगम से शिकायतें की गई हैं।

    अपर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया कि नगर निगम अब अभियान चलाकर जर्जर मकानों को चिन्हित करेगा। जरूरत के अनुसार ऐसे मकानों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की आशंका को कम किया जा सके।

  • RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री

    RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पिछले पौने तीन साल के दौरान विश्वविद्यालय में छह कुलसचिव बदल चुके हैं। किसी अधिकारी ने करीब छह महीने तक जिम्मेदारी संभाली तो किसी का कार्यकाल आठ महीने के आसपास रहा। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुछ समय के लिए बायो साइंस विभाग के प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से डीके बग्गा को नया कुलसचिव बनाए जाने का आदेश जारी हो गया। अब प्रोफेसर संधू नए कुलसचिव के ज्वाइन करने तक ही यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पांच जिलों के करीब 163 कॉलेज जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कुलसचिव का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार बदलाव के कारण प्रशासनिक कामकाज में स्थायित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुलगुरु के आदेश पर प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था। हालांकि देर रात भोपाल से उच्च शिक्षा विभाग का आदेश आने के बाद यह व्यवस्था भी अस्थायी साबित हुई और डीके बग्गा को नया कुलसचिव नियुक्त कर दिया गया।

    पिछले करीब पौने तीन साल में प्रोफेसर रश्मि टंडन डॉ. संतोष जाटव डॉ. रत्नेश कुरलिया आरएस बघेल प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह और डॉ. रविशंकर सोनवाल कुलसचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें आरएस बघेल की नियुक्ति शासन स्तर पर कुलसचिव के तौर पर हुई थी। उन्होंने करीब 11 महीने तक पद संभाला और इसके बाद सेवानिवृत्त हो गए। वहीं डॉ. रत्नेश कुरलिया को शासन की ओर से अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। अब नए कुलसचिव के रूप में डीके बग्गा की नियुक्ति हुई है।

    विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। यहां करीब छह हजार सीटें हैं और 29 से ज्यादा विभाग संचालित हो रहे हैं लेकिन नियमित प्राध्यापकों की संख्या महज 16 बताई जा रही है। विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के 156 पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में नियमित शिक्षक नहीं होने के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से अकादमिक और शोध कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    विश्वविद्यालय में उपकुलसचिव के अलावा तीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार फाइनेंस कंट्रोलर और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए शिक्षकों की सेवाएं लेने का मामला सामने आया है। छात्रों का कहना है कि कुलसचिव की जिम्मेदारी बार बार बदलने से विश्वविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा है। परीक्षा और परिणामों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासनिक नेतृत्व में स्थायित्व को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    इस बीच पूर्व कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का चार दिन पहले गुना तबादला किया गया है। इससे पहले उन्होंने कुलगुरु और राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में काम करने के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि एक कर्मचारी को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाने की आशंका है।

    अब विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव डीके बग्गा के कार्यभार संभालने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है इस पर नजर रहेगी। साथ ही शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों में सुधार को लेकर भी विश्वविद्यालय के अगले कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट

    अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट


    जबलपुर  । मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मौजूदा स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। इस दौरान सरकार की ओर से दी जाने वाली ताजा रिपोर्ट में अब तक की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति का ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है।

    लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई के जरिए मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया है कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इनमें से 63 संस्थानों का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन पंजीयन प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं इसकी जांच जरूरी है।

    जनहित याचिकाओं में जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में निजी अस्पतालों के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नए अस्पतालों और नर्सिंग होम का भौतिक सत्यापन किए बिना केवल ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के पंजीयन से पहले जरूरी मानकों की जांच होना महत्वपूर्ण है।

    मामले में फायर सेफ्टी की अनुमति भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि किसी निजी अस्पताल के पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी उपलब्ध नहीं है तो उसे पंजीयन किस आधार पर दिया गया। इसी तरह नगर निगम से मिलने वाली आवश्यक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जनहित याचिकाओं में अस्पतालों के पंजीयन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि सरकार पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी है। हालांकि मामले की वर्तमान स्थिति बताने वाली ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए यह भी निर्देश दिया कि नई रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पक्ष रखा। अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने सरकार की ताजा स्टेटस रिपोर्ट होगी। इसके आधार पर अदालत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन को लेकर लगाए गए आरोपों तथा सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर आगे विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि पंजीयन प्रक्रिया को लेकर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे किन स्तरों पर कार्रवाई की जानी है।