Category: Madhya Pradesh

  • गमी में गया परिवार, पीछे से चोरों ने साफ किया घर; देवास में लाखों की ज्वेलरी और नकदी पर हाथ साफ

    गमी में गया परिवार, पीछे से चोरों ने साफ किया घर; देवास में लाखों की ज्वेलरी और नकदी पर हाथ साफ

    देवास  मध्य प्रदेश के देवास जिले में चोरों ने एक बार फिर सूने मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की चोरी की वारदात को अंजाम दिया। शहर के अलकापुरी क्षेत्र में रहने वाला एक परिवार रिश्तेदारी में गमी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाहर गया था। इसी दौरान बदमाशों ने मकान का ताला तोड़कर घर में रखी सोने की ज्वेलरी और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। मंगलवार सुबह पड़ोसियों की सूचना पर चोरी का खुलासा हुआ, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

    जानकारी के अनुसार, मकान मालिक चेतनपुरी गोस्वामी 17 जुलाई की दोपहर करीब दो बजे अपने परिवार के साथ रिश्तेदारी में आयोजित शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शहर से बाहर गए थे। घर कई दिनों तक बंद रहने का फायदा उठाकर अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। मंगलवार सुबह करीब छह बजे पड़ोसियों ने घर का मुख्य दरवाजा खुला देखा तो उन्हें शक हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल मकान मालिक को फोन कर घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलने पर चेतनपुरी गोस्वामी के भाई मनीष गोस्वामी सबसे पहले मौके पर पहुंचे। घर के अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। पूरे मकान का सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था और अलमारी के ताले टूटे हुए थे। अलमारी में रखे मंगलसूत्र समेत कई सोने के आभूषण और नकदी गायब थी। मनीष गोस्वामी ने वीडियो कॉल के माध्यम से चेतनपुरी गोस्वामी को घर की स्थिति दिखाई, जिसके बाद चोरी की पुष्टि हुई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बदमाश लाखों रुपये मूल्य की ज्वेलरी और नकदी लेकर फरार हुए हैं। हालांकि चोरी की वास्तविक राशि और सामान का सही आकलन मकान मालिक के लौटने के बाद ही हो सकेगा। चेतनपुरी गोस्वामी का शहर में व्यवसाय है और फिलहाल वे परिवार के साथ बाहर होने के कारण विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके हैं।

    घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने घर से साक्ष्य जुटाए और फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके और उनके आने-जाने के रास्तों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चोरी गए सामान की विस्तृत सूची मिलने के बाद प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के लिए आसपास के संदिग्धों और हाल के दिनों में सक्रिय चोरी के गिरोहों की गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि लंबे समय के लिए घर से बाहर जा रहे हों तो इसकी जानकारी विश्वसनीय पड़ोसियों या स्थानीय पुलिस को दें तथा घरों में सीसीटीवी कैमरे और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके।

  • मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक

    मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी विधेयक चर्चा के लिए पेश किया जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठाई लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधानसभा में तीखी बहस नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया। अंततः भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर यूसीसी विधेयक को पारित करा लिया।

    विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मांग का समर्थन किया लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही पहले दस मिनट और फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन उमंग सिंघार आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों विशेषकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विधेयक को सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कानून है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और एक पति या एक पत्नी रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करता है तो उसे इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे लेकिन सरकार ने चर्चा पूरी कराकर बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में यूसीसी के विरोध में सांकेतिक नाटक का मंचन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी महंगाई किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को आगे ला रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश में समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

  • बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद

    बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच लोकायुक्त ने एक बड़ी छापेमार कार्रवाई करते हुए पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर फाइनेंस शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला उजागर किया है। मंगलवार सुबह तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में इंदौर धार पीथमपुर बगदून मुरैना और अन्य स्थानों सहित कुल नौ ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि अधिकारी के पास उनकी वैध आय की तुलना में लगभग 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति मौजूद है। इस खुलासे ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लोकायुक्त की टीम ने जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती आभूषण भी बरामद किए। अधिकारियों के अनुसार घर से करीब चार किलो चांदी तीन सौ ग्राम सोना और लगभग तीन लाख रुपए नकद मिले हैं। इसके अलावा कई बैंक खातों निवेश संबंधी दस्तावेज और अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए गए हैं। टीम को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे करोड़ों रुपए की संपत्तियों और निवेश का पता चला है।

    जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारी ने केवल अपने नाम पर ही नहीं बल्कि बेटे बहू दामाद और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी कई संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें आलीशान बंगले प्लॉट व्यावसायिक भवन और औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। पीथमपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपए की फैक्ट्री और अन्य निर्माण कार्य भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। लोकायुक्त अब इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और उनमें लगाए गए धन के स्रोत की गहन जांच कर रही है।

    छापेमारी के दौरान कई लग्जरी वाहन और महंगे घरेलू सामान भी जांच के दायरे में आए हैं। टीम ने संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है ताकि वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन किया जा सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि आगे की पड़ताल में और भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान दिनेश पटेल दीपक शेजवार सहित कई अधिकारी अलग अलग स्थानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटे हैं। बैंक खातों लेनदेन बेनामी संपत्तियों और निवेश के हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि संपत्ति के स्रोत संतोषजनक नहीं पाए गए तो संबंधित संपत्तियों की जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • भोपाल महिला आयोग में चौंकाने वाले वैवाहिक विवाद नौकरी के बाद बढ़ी दूरियां कहीं तलाक की मांग तो कहीं जान का खतरा

    भोपाल महिला आयोग में चौंकाने वाले वैवाहिक विवाद नौकरी के बाद बढ़ी दूरियां कहीं तलाक की मांग तो कहीं जान का खतरा


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक जीवन से जुड़े कई गंभीर और संवेदनशील मामले सामने आए हैं। सोमवार को हुई सुनवाई में कुल 30 लंबित मामलों पर चर्चा की गई जिनमें दो प्रकरण विशेष रूप से चर्चा का विषय बने। एक मामले में पति ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी बनने के बाद उसकी पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई जबकि दूसरे मामले में पति और पत्नी ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। इन मामलों की अभी जांच और सुनवाई जारी है तथा आयोग दोनों पक्षों की बात सुनकर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

    पहले मामले में एक सरकारी कॉलेज के प्रोफेसर ने आयोग के समक्ष कहा कि उनकी पत्नी को असिस्टेंट डायरेक्टर टीसीपी के पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आ गया। पति का कहना है कि करीब 20 वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद पत्नी बेटे को साथ लेकर मायके चली गई और अब तलाक चाहती है। सुनवाई के दौरान पत्नी उपस्थित नहीं हुई जबकि पति ने आयोग से भावुक अपील करते हुए कहा कि वह आज भी अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है और जरूरत पड़ने पर मायके में भी रहने को तैयार है।

    पति ने यह भी कहा कि उनका बेटा आईवीएफ प्रक्रिया से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार मानसिक प्रताड़ना होती तो परिवार इस कठिन प्रक्रिया से नहीं गुजरता। उन्होंने यह भी बताया कि पत्नी के अलग होने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया है और इस उम्र में अकेले जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन होगा।

    दूसरे मामले में पति ने आयोग के सामने दावा किया कि उसकी पत्नी के दूसरी महिला के साथ संबंध हैं और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। पति ने आरोप लगाया कि उसने कथित बातचीत सुनी है जिसमें उसे रास्ते से हटाने जैसी बातें कही गईं। उसने आयोग से सुरक्षा की मांग भी की।

    वहीं पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना घरेलू हिंसा और निजी जीवन में हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना है कि शादी के बाद लगातार उससे सोना नकदी और अन्य सामान की मांग की जाती रही। उसने आरोप लगाया कि उसके निजी फोटो और वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड किए गए और उन्हें सार्वजनिक करने की कोशिश की गई जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे कई बार कमरे में बंद रखा गया उसके साथ मारपीट की गई और उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराया गया। उसका कहना है कि वह लंबे समय से अकेले रह रही है और उसके खर्च का जिम्मा मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर पति ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसके पास अपने पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य हैं जिन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।

    महिला आयोग ने दोनों मामलों में संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों मामलों में अंतिम निर्णय आना बाकी है।

  • 21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी

    21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी


    मध्यप्रदेश । 21 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पूर्वी भारत और पश्चिमी तटीय राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। लगातार सक्रिय बने मानसूनी सिस्टम के कारण कई राज्यों में जलभराव बाढ़ और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर में पूरे दिन बादल छाए रहने और रुक रुक कर बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। सुबह और शाम के समय तेज हवा के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने से नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव से नुकसान की आशंका भी बनी रहेगी।

    महाराष्ट्र गुजरात गोवा कर्नाटक और केरल में भी मानसून पूरी मजबूती के साथ सक्रिय रहेगा। पश्चिमी घाट के आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क मार्ग प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। यात्रियों और श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र मानसून को लगातार मजबूती दे रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कई राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है इसलिए खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। किसानों को भी मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर 21 जुलाई का दिन देश के कई हिस्सों में बारिश राहत और सतर्कता तीनों का संदेश लेकर आएगा। जहां एक ओर गर्मी और उमस से राहत मिलेगी वहीं दूसरी ओर भारी बारिश वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।

  • MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?

    MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code UCC) के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल सोमवार को विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेश किया गया। सरकार इसे सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार देने वाला बिल बता रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश भी गोवा, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों में शामिल हो गया है।

    ऐसे में आइए जानते हैं कि समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है? संविधान इस पर क्या कहता है? यूसीसी का इतिहास क्या है? मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई? ड्राफ्ट बिल में क्या-क्या शामिल किया गया है? भारत के किन-किन राज्यों में यह लागू किया जा चुका है?


    समान नागरिक संहिता क्या है?

    समान नागरिक संहिता का अर्थ है हर नागरिक के लिए एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इसके लागू होने के बाद संबंधित राज्य में शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होते हैं।

    यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है। भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र का भी हिस्सा था। इसके साथ ही उसके शासन वाले राज्यों में इसे जोर-शोर से लागू भी कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश की कैबिनेट से इसकी मंजूरी इसी कड़ी का हिस्सा है।


    संविधान इस पर क्या कहता है?

    देश में संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि राज्य इसे लागू कर सकता है। इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर किसी भी वर्ग विशेष के साथ होने वाले भेदभाव या पक्षपात को खत्म करना और विविध सांस्कृतिक समूहों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आम्बेडकर ने कहा था कि UCC जरूरी है, लेकिन फिलहाल यह स्वैच्छिक रहना चाहिए।

    संविधान के मसौदे के अनुच्छेद 35 को भारत के संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 44 के रूप में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था। इसे संविधान में इस नजरिए के रूप में शामिल किया गया था जो तब पूरा होगा जब राष्ट्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होगा और UCC को सामाजिक स्वीकृति दी जा सकती है।


    इसका इतिहास क्या है?

    UCC की उत्पत्ति औपनिवेशिक भारत में हुई जब ब्रिटिश सरकार ने 1835 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानूनों की एकरूपता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। विशेष रूप से इसमें यह सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) को इस तरह के संहिताकरण के बाहर रखा जाए।

    ब्रिटिश सरकार को 1941 में हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने के लिए बी एन राव समिति बनाई। समिति ने शास्त्रों के अनुसार, एक संहिताबद्ध हिंदू कानून की सिफारिश की, जो महिलाओं को समान अधिकार देगा। इसके साथ ही समिति ने हिंदुओं के लिए विवाह और उत्तराधिकार के मुद्दों में भी नागरिक संहिता की सिफारिश की।


    मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई?

    मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में अभी विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, लिव-इन संबंध और अन्य पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का समग्र अध्ययन कर एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई।

    इसी उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।

    समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का भी परीक्षण किया। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, समानता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए गए। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनसे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर भी समिति ने विचार किया। साथ ही प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का अध्ययन किया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न हो। समिति को 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।


    जनता से सुझाव कैसे लिए गए?

    – जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया गया।
    – इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए।
    – वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए।
    – जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
    – इन बैठकों से 10,134 से अधिक सुझाव मिले।


    जन परामर्श में क्या सामने आया?

    – सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 93.54% लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।
    – 92.20% लोगों ने कहा कि सभी समुदायों में महिला और पुरुष के लिए समान कानून होना चाहिए।
    – 91.32% लोगों ने माना कि भेदभावपूर्ण तलाक कानून समाप्त होने चाहिए।
    – 92.66% लोगों ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार मिलने चाहिए।
    – 90.96% लोगों ने माना कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से कानूनी जटिलताएं बढ़ती हैं।
    – 86.78% लोगों ने कहा कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना समान नागरिक संहिता लागू की जा सकती है।


    ड्राफ्ट बिल के प्रमुख प्रावधान क्या है?

    ड्राफ्ट बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
    विवाह के बाद दूसरा विवाह तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हो जाए।
    केवल तलाक, तलाक, तलाक कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा। तलाक तभी प्रभावी होगा जब कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
    महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।
    जिन कानूनों में महिलाओं के अधिकार कम थे, वहां भाई और बहनों को समान अधिकार दिए जाएंगे।
    सरकार के अनुसार यह कानून सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी धर्म को नीचा नहीं दिखाता।
    महिलाओं की गरिमा, सम्मान और नारी सशक्तिकरण को इस कानून का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
    अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित रूढ़िगत समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है।
    धार्मिक समारोह, अनुष्ठान और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
    विवाह का पंजीकरण पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक अनिवार्य होगा।
    एक जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।
    न्यायालय के बाहर विवाह विच्छेद मान्य नहीं होगा।
    पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
    महिलाओं को संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं।

  • MP: मंदसौर में प्राचार्य के तबादले का विरोध…. छात्रों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन, झुका प्रशासन

    MP: मंदसौर में प्राचार्य के तबादले का विरोध…. छात्रों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन, झुका प्रशासन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर (Mandsaur) के लदुना (Laduna) स्थित सांदीपनी विद्यालय (Sandipani Vidyalaya) के प्रभारी प्राचार्य (Principal-in-Charge) के तबादले के विरोध में छात्रों ने लदुना-सीतामऊ मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन ने छात्रों से बातचीत कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम हटाया गया।

    छात्रों ने लदुना-सीतामऊ मार्ग पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब दो घंटे के प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर छात्रों ने आंदोलन समाप्त किया, जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी को पुनः विद्यालय का प्रभार सौंप दिया गया।

    जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी को उनकी मूल पदस्थापना नाटाराम वापस भेजने के आदेश जारी किए गए थे। वे सांदीपनि विद्यालय का प्रभार संभाल रहे थे। इस आदेश की जानकारी मिलते ही विद्यालय के छात्र आक्रोशित हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।


    लदुना-सीतामऊ रोड पर आवागमन बाधित हुआ

    छात्रों ने विरोध स्वरूप लदुना-सीतामऊ रोड पर जाम लगा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। सूचना मिलने पर सीतामऊ थाना प्रभारी और तहसीलदार मोहित सिनम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की समझाइश के बाद छात्रों ने सड़क से जाम हटा लिया, लेकिन विद्यालय के बाहर नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रखा।

    छात्रों का तर्क था कि अजीत त्रिपाठी के प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन और पढ़ाई के माहौल में उल्लेखनीय सुधार हुआ था। छात्रों ने उनके तबादले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आदेश को निरस्त कर उन्हें विद्यालय में बनाए रखने की मांग की।


    आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया

    लगभग दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश का हवाला देते हुए छात्रों को स्थिति स्पष्ट की।

    तहसीलदार मोहित सिनम ने छात्रों को बताया कि अजीत त्रिपाठी को उनकी मूल पदस्थापना के साथ-साथ सांदीपनि विद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। इस आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

  • एमपी में भोपाल-सीहोर-रायसेन में रातभर बरसे बादल, आज 4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में भोपाल-सीहोर-रायसेन में रातभर बरसे बादल, आज 4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार को मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं राजधानी भोपाल सहित रायसेन और सीहोर में रातभर बारिश का दौर जारी रहा। इसके अलावा राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में भी बारिश की संभावना जताई गई है।

    उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं। वहीं नीमच, मंदसौर और रतलाम में फिलहाल बारिश की संभावना नहीं जताई गई है और इन जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    उमरिया में अच्छी बारिश के लिए हुआ भजन-कीर्तन
    उमरिया जिले में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण ग्रामीणों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए धार्मिक आयोजन किया। मानपुर क्षेत्र के चिल्हारी स्थित पहाड़ी हनुमान मंदिर में ग्रामीणों ने लगातार 24 घंटे तक भजन-कीर्तन किया। जिले में अब तक 11.2 इंच बारिश दर्ज की गई है।

    रायसेन में बारिश से किसानों को मिली राहत
    रायसेन जिले में मानसून आने के बावजूद करीब 18 दिनों से अच्छी बारिश नहीं हुई थी। इससे बोवनी प्रभावित हो गई थी, धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं और पौधे सूखने की स्थिति में पहुंच गए थे। सोमवार रात से शुरू हुई बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी। खेतों में फिर से पानी भर गया, जबकि सांची रोड पर जलभराव के कारण जाम की स्थिति बन गई। आसपास की पहाड़ियों पर झरने भी बहने लगे हैं।

    सीहोर में 13 दिन बाद झमाझम बारिश
    सीहोर जिले में भी लंबे इंतजार के बाद बारिश लौटी। यहां करीब 13 दिन बाद रात 1 बजे से लगातार वर्षा हो रही है। पिछले 8 घंटे से जारी बारिश ने मौसम सुहाना कर दिया है और किसानों को राहत पहुंचाई है।

  • नरवर किले से तोप चोरी मामले में पुलिस ने घोषित किया 10 हजार का इनाम

    नरवर किले से तोप चोरी मामले में पुलिस ने घोषित किया 10 हजार का इनाम

    शिवपुरी। जिले के नरवर किले से 16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप चोरी के मामले में पुलिस अधीक्षक ने बड़ी घोषणा की है। तोप चोरी करने वाले आरोपियों की पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 हजार रुपये नगद पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
    15-16 जुलाई की रात को हुई चोरी-
    पुलिस के अनुसार 15-16 जुलाई की रात 25 से 30 हथियारबंद बदमाश किले के पिछले रास्ते से लोडिंग गाड़ियों में आए थे। उन्होंने पहरा दे रहे सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर तोप लूट ली और फरार हो गए। मामले में केयरटेकर की शिकायत पर नरवर थाने में केस दर्ज किया गया है। जांच के दौरान किले के पीछे टायरों के निशान भी मिले हैं। इस चोरी से पहले 5 जुलाई को भी बदमाशों ने तोप को नीचे गिराकर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन वजन अधिक होने के कारण सफल नहीं हो पाए थे। इसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई थी।
    सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा-
    पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को तोप या आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिले तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा और उसे 10 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया जाएगा।
    फिलहाल पुलिस ने आसपास के जिलों में नाकाबंदी कर वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह के शामिल होने की आशंका के चलते मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। किले में रखी अन्य 13 तोपों की सुरक्षा भी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं

    यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश हो गया है। उसे आगामी दिनों में चर्चा के बाद पारित कराया जाएगा। यूसीसी लागू करना बड़ी उपलब्धि है। भाजपा विधायकगण अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी से होने वाले लाभों की जानकारी जनता तक पहुंचाएं। जनता को बताएं कि यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं कानूनी संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमजन को यह भी बताएं कि यूसीसी में महिला-पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार देकर आधी आबादी के हितों का संरक्षण होगा। नए कानून में जनजातीय समाज की परंपराओं और मान्यताओं के संरक्षण के लिए उन्हें इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को पूरा करने जा रहा है। जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी के प्रावधानों से जनता को अवगत कराएं, ताकि कांग्रेस और विपक्षी दलों की वोटबैंक एवं तुष्टिकरण की राजनीति की सच्चाई जनता तक पहुंचाई जा सके। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल तथा मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मंचासीन रहे। बैठक का संचालन विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने किया।

    सरकार की उपलब्धियां जनता तक और जनता का फीडबैक सरकार तक पहुंचाएं – डॉ. मोहन यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी समानता, न्याय और सशक्त समाज की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यह बात जनता तक पहुंचाने का कार्य सभी विधायकों को करना है। हमने धार्मिक परंपराओं और आस्था को अलग रखा है तथा जनजातीय समुदाय को भी यूसीसी से अलग रखा गया है। इस तथय को भी हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है। इसलिए हमारी सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मध्यप्रदेश की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। देश की सबसे बड़ी टनल के माध्यम से सिंचाई का पानी विंध्य तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना से जबलपुर, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर एवं रीवा जिले की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विधायकगण डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र को मॉडल विधानसभा के रूप में विकसित करने के लिए विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार के पास विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य पंथ या व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप सभी पर समान रूप से लागू हों। यह निर्णय सामाजिक समरसता, न्यायिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इन तथयों को जनता तक पहुंचाते हुए विपक्ष के तथयहीन आरोपों का तथयों एवं प्रमाणों के साथ जवाब देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर सबसे अधिक लाभ हमारी मुस्लिम बहनों को मिलेगा। विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास करेगा, लेकिन उसके भ्रामक प्रचार का हमें तथयों के साथ जवाब देकर यूसीसी के लाभ आमजन तक पहुंचाने हैं।
    निवेश के लिए नियमों का सरलीकरण कर मध्यप्रदेश नीति आयोग में प्रथम स्थान पर आया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार जनता के समग्र कल्याण के लिए कार्य कर रही है। निवेशकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा पर सचिवालय बनाया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक विभागों की नीतियों में सुधार तथा नियमों का सरलीकरण किया गया है। नीति आयोग ने भी निवेशकों के अनुकूल नियमों के सरलीकरण के मामले में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान दिया है।
    विधायकगण सरकार के साथ संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाएं – श्री हेमंत खण्डेलवाल
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यूसीसी में धार्मिक आस्था एवं परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें यथावत रखा गया है। साथ ही महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाते हुए उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इन बातों को हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। साथ ही प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शत-प्रतिशत बूथों पर कार्यक्रम का श्रवण कराया जाए। हम सभी कार्यकर्ताओं को सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए पर्यावरण, जल और प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करना है। श्री खण्डेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज की परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सराहनीय निर्णय लिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प तथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को साकार करने वाला है। सभी विधायकगण यूसीसी के लाभों एवं उससे मिलने वाले अधिकारों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ संगठन की गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करें।