Category: Madhya Pradesh

  • मध्यप्रदेश में MSP पर खरीफ फसलों की खरीद की तैयारी, 3 लाख 5 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन, जानें जरूरी नियम

    मध्यप्रदेश में MSP पर खरीफ फसलों की खरीद की तैयारी, 3 लाख 5 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन, जानें जरूरी नियम


    मध्यप्रदेश।
    में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन जारी है। अब तक 3 लाख 5 हजार 82 किसान अपना पंजीयन करा चुके हैं। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराने का आह्वान किया है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। पंजीयन व्यवस्था को किसानों के लिए सहज और सुगम बनाया गया है और प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं।

    अब तक जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, रीवा संभाग में 94 हजार 384, शहडोल संभाग में 21 हजार 456, नर्मदापुरम संभाग में 16 हजार 398, सागर संभाग में 16 हजार 155 और भोपाल संभाग में 8 हजार 599 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसानों के लिए नि:शुल्क पंजीयन की व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों के अलावा सहकारी समितियों तथा सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर की गई है।

    सशुल्क पंजीयन की सुविधा एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर उपलब्ध है। प्रति पंजीयन 50 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। पंजीयन के दौरान किसान के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर उपलब्ध होगी। इन श्रेणियों के सभी किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    किसानों की सुविधा के लिए जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केंद्रों को भी क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान अपना मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक अपडेट करा सकें। इस काम के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केंद्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर को बैंक खाते से लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ समन्वय किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिए पंजीयन के दौरान ही मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन और जेआईटी पोर्टल के माध्यम से एक रुपये का लेनदेन कराया जाएगा।

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। यह सत्यापन आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन तभी होगा, जब उसके भू-अभिलेख के खाते और खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। नाम में अंतर होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा और सत्यापन के बाद ही ऐसा पंजीयन मान्य होगा।

  • भोपाल में दिवाली से पहले पटाखा फैक्ट्री सील, तय सीमा से ज्यादा विस्फोटक सामग्री मिली

    भोपाल में दिवाली से पहले पटाखा फैक्ट्री सील, तय सीमा से ज्यादा विस्फोटक सामग्री मिली

    भोपाल जिले। में दिवाली से पहले पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में बैरसिया क्षेत्र के ग्राम बांदीखेड़ी में संचालित एक पटाखा फैक्ट्री का जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर में लाइसेंस या निर्धारित क्षमता के मुकाबले अधिक विस्फोटक सामग्री रखी मिली। इसके साथ ही फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई अनियमितताएं भी अधिकारियों के सामने आईं।

    फैक्ट्री की जांच के लिए एसडीएम बैरसिया शिवांगी बघेल, एसडीओपी वैशाली सिंह, तहसीलदार दुर्गा पटले और गुनगा थाना प्रभारी रिंकू जाटव की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान परिसर में रखी विस्फोटक सामग्री की स्थिति का जायजा लिया। इसके साथ ही फैक्ट्री में अपनाई जा रही सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जांच की गई। निरीक्षण के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक विस्फोटक सामग्री रखे जाने की बात सामने आई।

    प्रशासन के अनुसार, फैक्ट्री परिसर में जितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने की अनुमति निर्धारित थी, उससे अधिक सामग्री वहां मौजूद मिली। जांच के दौरान केवल भंडारण की मात्रा से जुड़ी अनियमितता ही सामने नहीं आई, बल्कि फैक्ट्री की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था से संबंधित अन्य कमियां भी अधिकारियों ने पाईं। इन परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त टीम ने मौके पर ही फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई की।

    जिला प्रशासन के मुताबिक, निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के प्रावधानों से संबंधित पाई गईं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विस्फोटक सामग्री के निर्माण, इस्तेमाल, रखरखाव और भंडारण के दौरान निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। फैक्ट्री में तय सीमा से अधिक सामग्री पाए जाने के साथ सुरक्षा और संचालन व्यवस्था में मिली कमियों को भी इसी संदर्भ में देखा गया।

    अधिकारियों के अनुसार, पटाखों और अन्य विस्फोटक सामग्री से जुड़े प्रतिष्ठानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जनसुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसी वजह से निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए फैक्ट्री को सील किया गया। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन प्रतिष्ठानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बांदीखेड़ी स्थित फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। दिवाली से पहले पटाखा निर्माण और भंडारण से जुड़े प्रतिष्ठानों की व्यवस्था की जांच के दौरान प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने निर्धारित सीमा, सुरक्षा और संचालन से संबंधित प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण किया।

  • SBI शाखा में टिफिन को लेकर हुआ विवाद फायरिंग तक पहुंचा, गार्ड की बंदूक जब्त कर पूछताछ शुरू

    SBI शाखा में टिफिन को लेकर हुआ विवाद फायरिंग तक पहुंचा, गार्ड की बंदूक जब्त कर पूछताछ शुरू


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर में रविवार रात एसबीआई की एसीबी शाखा में टिफिन कम आने को लेकर हुआ विवाद अचानक फायरिंग तक पहुंच गया। घटना के बाद बैंक परिसर में अफरा तफरी मच गई। गोली चलने की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर छिप गए। सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी गार्ड को हिरासत में लेकर उसकी बंदूक जब्त कर ली। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब 9 बजे बैंक शाखा में फर्नीचर का काम चल रहा था। इसी दौरान टिफिन सेंटर संचालक विपिन नेमा अपने दो बच्चों के साथ मजदूरों और सुरक्षा गार्ड के लिए टिफिन लेकर बैंक पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि टिफिन की संख्या को लेकर गार्ड राजकुमार नाराज हो गया। उसका कहना था कि टिफिन कम आए हैं। इसी बात को लेकर उसकी विपिन नेमा से बहस शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल टिफिन को लेकर था लेकिन कुछ ही देर में मामला बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में गार्ड ने अपनी बंदूक उठा ली और फायरिंग कर दी। अचानक बैंक परिसर में गोली चलने से वहां मौजूद लोगों में डर फैल गया। कुछ लोग खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर छिप गए। घटना के बाद बैंक परिसर में कुछ देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।

    फायरिंग की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने गार्ड को हिरासत में लिया और उसके पास मौजूद बंदूक को जब्त कर लिया। इसके बाद आरोपी को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और विवाद के दौरान वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ था।

    पुलिस ने घटना के समय बैंक में मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि फायरिंग की पूरी वजह सामने आ सके। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गोली किस दिशा में चली और इससे किसी व्यक्ति को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

    फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। टिफिन कम मिलने जैसी छोटी बात से शुरू हुआ विवाद हथियार चलाने तक कैसे पहुंचा यह जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हुई

    कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हुई

    मध्य प्रदेश। के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट चीता के तहत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। भारतीय धरती पर जन्मी 32 महीने की मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारतीय धरती पर हुआ है। कूनो में चीतों की नई पीढ़ी का यह विस्तार देश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    KJP21, मुखी और KGP12 के बाद भारतीय धरती पर जन्मी तीसरी मादा चीता है, जिसने देश में शावकों को जन्म दिया है। इस तरह कूनो में अब भारतीय धरती पर जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी के विस्तार की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा है। पांचों शावकों को स्वस्थ बताया गया है। शावकों का जन्म प्रोजेक्ट चीता के तहत चलाए जा रहे संरक्षण और निगरानी प्रयासों के बीच हुआ है।

    इन पांच शावकों का जन्म एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि भी लेकर आया है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है। इससे देश में बढ़ती चीता आबादी में एक नई आनुवंशिक वंशावली शामिल हुई है। इस घटनाक्रम को चीता पुनर्स्थापना अभियान के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की यात्रा में एक नया अध्याय है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, लगातार निगरानी और संरक्षण संबंधी प्रयास किए जा रहे हैं। KJP21 से जन्मे पांच शावकों का स्वस्थ होना इन प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। इससे कूनो में चीता आबादी के विस्तार की दिशा में चल रहे अभियान को भी आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम और सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने चीता पुनर्स्थापना के प्रयासों में शामिल लोगों के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। कूनो में पांच नए शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की संख्या 60 तक पहुंच गई है। इनमें भारतीय धरती पर जन्मे 41 चीते शामिल हैं। शावकों के आगमन को देश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के प्रयासों के क्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

  • MP News: 3,357 कर्मचारियों की पदोन्नति, 44 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, अगले साल 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य

    MP News: 3,357 कर्मचारियों की पदोन्नति, 44 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, अगले साल 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य


    भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रवींद्र भवन में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न विभागों के 44 दिवंगत शासकीय सेवकों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति केवल उनके लिए खुशी का विषय नहीं है, बल्कि सरकार के लिए भी संतोष की बात है कि वह अपने अधिकारी-कर्मचारियों के हितों की चिंता कर रही है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, कुल 3,357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति मिली है। इनमें 1,725 अधिकारी-कर्मचारी, कृषि विपणन बोर्ड के 1,439 कर्मचारी और कृषि अभियांत्रिकी के 139 कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने सभी पदोन्नत शासकीय सेवकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ-साथ उन परिवारों की भी चिंता कर रही है, जिन्होंने असमय अपने किसी स्वजन को खोया है। इसी क्रम में अब तक करीब 300 अनुकंपा प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है और 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जा रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े बाकी लंबित प्रकरणों का भी जल्द निराकरण किया जाए और इन्हें शून्य लंबित मामलों की स्थिति तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि असमय अपने लोगों को खोने वाले परिवारों के दर्द को समझना जरूरी है। इसी संवेदनशीलता के साथ सरकार और संबंधित विभाग इन परिवारों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर विभाग में कर्मचारियों की समय पर पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

    रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मंडियों में 600 उपनिरीक्षकों सहित 1,500 से अधिक पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब तक 85,000 नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। इसके साथ ही अगले वर्ष 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति और नई भर्ती की प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सरकार का जोर है, ताकि कर्मचारियों से जुड़े मामलों का निपटारा समय पर हो सके और विभागों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध रहे।

  • सीएम मोहन यादव ने SIR को बताया जरूरी, मतदाता सूची को विश्वसनीय बनाने नागरिकों से प्रक्रिया में भाग लेने की अपील

    सीएम मोहन यादव ने SIR को बताया जरूरी, मतदाता सूची को विश्वसनीय बनाने नागरिकों से प्रक्रिया में भाग लेने की अपील

    मध्यप्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को जरूरी प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में प्रत्येक जागरूक मतदाता की भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय होना आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे मतदाता सूची के सत्यापन की इस प्रक्रिया में अपनी जिम्मेदारी निभाएं और विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से इस प्रक्रिया को समझने और निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता की भागीदारी केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि सही और विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में भी नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया।

    SIR को लेकर मुख्यमंत्री ने नागरिकों से किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान नहीं देने को कहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है। फॉर्म 6 और घोषणा पत्र सहित प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान निर्धारित हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि वे इस संबंध में केवल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और तय प्रक्रिया पर ही भरोसा करें। उनका कहना है कि सही जानकारी के आधार पर प्रक्रिया में भाग लेना आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य दर्ज कराना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपनी जानकारी और मतदाता सूची में दर्ज नाम की पुष्टि करने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची में नाम की जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना नागरिक की जिम्मेदारी का हिस्सा है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर जागरूक मतदाता की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया में सहयोग करें। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण को ऐसी प्रक्रिया बताया, जिसके माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे भ्रम या अफवाहों से प्रभावित हुए बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें और अपनी मतदाता संबंधी जानकारी की पुष्टि करें। साथ ही, उन्होंने युवाओं से भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

  • मध्यप्रदेश में दिव्यांग यात्रियों को बस किराए में 50 प्रतिशत छूट, पूरा किराया लेने पर बस संचालक के खिलाफ होगी कार्रवाई

    मध्यप्रदेश में दिव्यांग यात्रियों को बस किराए में 50 प्रतिशत छूट, पूरा किराया लेने पर बस संचालक के खिलाफ होगी कार्रवाई

    मध्यप्रदेश: में यात्री बसों से सफर करने वाले दिव्यांग यात्रियों के लिए किराए में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। इसके तहत दिव्यांग यात्रियों से निर्धारित किराए का आधा हिस्सा ही लिया जाना चाहिए। यदि किसी यात्री से नियम के विपरीत पूरा किराया वसूला जाता है तो वह इसकी शिकायत कर सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित जिला परिवहन अधिकारी या आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े मामलों में आयुक्त कार्यालय शिकायतों की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकृत है।

    यात्रा के दौरान दिव्यांग यात्री को अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र या दिव्यांग कार्ड साथ रखना होगा। इसे प्रस्तुत करने के बाद निर्धारित किराए का 50 प्रतिशत लिया जाना चाहिए। यह सुविधा दिव्यांग यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन में सहूलियत देने के उद्देश्य से लागू है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बस संचालकों को निर्धारित नियम के मुताबिक ही किराया लेना चाहिए। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग प्रदेश में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के क्रियान्वयन से संबंधित कार्य करता है और दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के पालन की व्यवस्था करता है।

    दिव्यांग यात्री से पूरा किराया वसूले जाने का एक मामला रायसेन में सामने आया था। मामले की जानकारी मिलने के बाद आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला परिवहन अधिकारी, रायसेन ने संबंधित बस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार महादेव बस ट्रेवल्स के संचालक पर मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत जुर्माने की कार्रवाई की गई। इस मामले में हुई कार्रवाई के बाद दिव्यांग यात्रियों को मिलने वाली किराया रियायत के नियमों के पालन को लेकर सख्ती का संदेश गया।

    दिव्यांगजनों से कहा गया है कि वे आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आदेश की प्रति अपने जिले के जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत कर नियमों के पालन का आग्रह कर सकते हैं। यदि किसी बस संचालक या कंडक्टर द्वारा नियम के विपरीत पूरा किराया लिया जाता है तो यात्री संबंधित कार्यालय में शिकायत कर सकता है। शिकायत के समय यात्रा की तारीख, बस नंबर, रूट, बस संचालक का नाम, टिकट और उपलब्ध होने पर कंडक्टर की जानकारी रखना उपयोगी होगा। इससे मामले की जांच में सहायता मिल सकती है।

    भोपाल आरटीओ के अनुसार दिव्यांग यात्रियों को बस यात्रा के दौरान अपना वैध दिव्यांगता कार्ड साथ रखना चाहिए। यदि 50 प्रतिशत किराए की सुविधा देने से इनकार किया जाता है या पूरा किराया लिया जाता है तो टिकट और बस से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। इसके बाद संबंधित परिवहन अधिकारी या आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में शिकायत की जा सकती है। आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय को दिव्यांगजनों के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करने और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश या सिफारिश करने का अधिकार है।

  • बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान

    बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार रात मंडला से सड़क मार्ग के जरिए जबलपुर लौट रहे थे। इसी दौरान बरेला में उनका काफिला अचानक रुक गया। मुख्यमंत्री ने सड़क किनारे स्थित चाय की दुकान पर पहुंचकर चाय पी और स्थानीय लोगों से बातचीत की। करीब रात 10 बजे हुए इस अचानक चाय स्टॉप के दौरान मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को निशुल्क कोचिंग देने वाले युवा मयंक साहू का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया और उसके प्रयास की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंडला में आयोजित तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कार से डुमना विमानतल की ओर जा रहे थे। बरेला में शारदा माता मंदिर के सामने बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए जमा थे। जब मुख्यमंत्री की नजर लोगों पर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। इसके बाद वे सड़क किनारे स्थित अग्रवाल होटल नाम की चाय की दुकान पर पहुंचे और वहां बैठकर चाय पी।

    मुख्यमंत्री के अचानक दुकान पर पहुंचने से वहां मौजूद लोग भी उत्साहित नजर आए। मुख्यमंत्री ने दुकान संचालक से बातचीत की और चाय के पैसे भी खुद चुकाए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मौके पर भाजपा के जबलपुर नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और भाजपा दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप रजक सहित अन्य नेता और अधिकारी मौजूद थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला बरेला के सनराइज फैमिली ढाबे पर भी रुका। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने ढाबे पर भी चाय पी और संचालक परिवार से बातचीत की। यह ढाबा सास और बहू द्वारा मिलकर संचालित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने ढाबा संचालक आरती दुबे और उनकी बहू सुरभि दुबे से मुलाकात कर परिवार के सदस्यों का हालचाल जाना।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने बरेला के बच्चों के लिए निशुल्क कोचिंग चलाने वाले युवा मयंक साहू को भी सम्मानित किया। डॉ. मोहन यादव ने मयंक को शॉल ओढ़ाया और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के उसके प्रयास की तारीफ की। मयंक स्थानीय बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाने का काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उसके इस प्रयास को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए प्रोत्साहित किया।

    मुख्यमंत्री के इस अचानक रुकने से बरेला में मौजूद लोगों के लिए यह रात खास बन गई। आमतौर पर सुरक्षा घेरे और निर्धारित कार्यक्रमों के बीच चलने वाले मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों के बीच रुककर चाय पी और उनसे बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे युवा को सम्मान देकर उसका उत्साह भी बढ़ाया। मुख्यमंत्री का यह दौरा किसी निर्धारित कार्यक्रम के बजाय रास्ते में अचानक लिए गए इन छोटे पड़ावों के कारण चर्चा में रहा।

  • वेंटिलेटर पर थी 23 साल की दीक्षा, बोल नहीं पाई तो भाई के हाथ पर लिखे तीन नामों के संकेत, ससुराल पर गंभीर आरोप

    वेंटिलेटर पर थी 23 साल की दीक्षा, बोल नहीं पाई तो भाई के हाथ पर लिखे तीन नामों के संकेत, ससुराल पर गंभीर आरोप


    जबलपुर ।जबलपुर में 23 वर्षीय नवविवाहिता की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मायके वालों ने दीक्षा पांडे की मौत को लेकर उसके पति अक्षय उर्फ सतीष मिश्रा सास उमा मिश्रा और ननद सोनम पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि शादी के करीब डेढ़ साल बाद भी बच्चा नहीं होने को लेकर दीक्षा को लगातार ताने दिए जा रहे थे। हालत बिगड़ने के बाद उसे जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां वह वेंटिलेटर पर थी। बोलने की स्थिति में नहीं होने के कारण उसने भाई से लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

    दीक्षा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर की रहने वाली थी। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी छतरपुर निवासी अक्षय से हुई थी। अक्षय सीआरपीएफ में नागपुर में पदस्थ है। परिवार के मुताबिक 24 सितंबर को अक्षय दीक्षा को लेकर छतरपुर आया था। इसके बाद 27 सितंबर को परिवार के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दोनों हटा थाना क्षेत्र के ग्राम पाटन स्थित चाचा ससुर के घर पहुंचे थे।

    मायके पक्ष के अनुसार 29 सितंबर की दोपहर दीक्षा अपनी मां से फोन पर बातचीत कर रही थी। इसी दौरान उसकी ननद सोनम से विवाद होने की बात सामने आई। भाई भूपेंद्र का आरोप है कि सोनम दीक्षा को जबरन घर से बाहर ले जाने लगी। परिवार का दावा है कि फोन पर बातचीत के दौरान उसकी मां ने दीक्षा की आवाज सुनी थी। इसके बाद कथित तौर पर उसका मुंह दबाने और गला दबाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    घटना के बाद दीक्षा की हालत गंभीर बताई गई और उसे जबलपुर के बड़ेरिया प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने स्थिति नाजुक होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा। जानकारी मिलने के बाद उसका भाई भूपेंद्र झांसी से जबलपुर पहुंचा। दीक्षा बोल नहीं पा रही थी इसलिए भाई ने उससे लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

    भूपेंद्र के मुताबिक इसी दौरान दीक्षा ने अपनी हथेली पर पेन से S U और A अक्षर लिखे। मायके वालों ने इन अक्षरों को सोनम उमा और अक्षय के नाम से जोड़ते हुए दावा किया कि दीक्षा ने अपनी हालत के बावजूद आरोपियों की ओर संकेत करने की कोशिश की थी। परिवार ने इसे घटना से जुड़ा अहम संकेत बताया है। हालांकि इन अक्षरों का वास्तविक अर्थ क्या था और इन्हें किस संदर्भ में लिखा गया था यह जांच का विषय है।

    मायके पक्ष ने दीक्षा के गले पर निशान होने का भी दावा किया है। परिवार का आरोप है कि बच्चा नहीं होने की वजह से उसे ससुराल में मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। परिजनों के मुताबिक लगातार तनाव के कारण दीक्षा कुछ समय अपने पति के साथ नागपुर में रहने लगी थी। उनका आरोप है कि वहां रहने के दौरान भी उसे फोन के जरिए परेशान किया जाता था।

    दीक्षा को 30 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार सोमवार को झांसी में अंतिम संस्कार करेगा।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गोहलपुर थाना प्रभारी रीतेश पांडे के अनुसार घटनास्थल हटा थाना क्षेत्र में आता है। गोहलपुर पुलिस ने जीरो पर मर्ग कायम किया है और मर्ग डायरी जांच के लिए हटा थाने भेजी जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब परिवार के आरोपों के साथ घटनास्थल और मेडिकल साक्ष्यों की भी जांच करेगी।

  • NH-46 पर अचानक पलटा गुड़ से भरा मिनी ट्रक, 35 साल के हेल्पर की मौत, नींद का झोंका बना हादसे की वजह

    NH-46 पर अचानक पलटा गुड़ से भरा मिनी ट्रक, 35 साल के हेल्पर की मौत, नींद का झोंका बना हादसे की वजह


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में रविवार दोपहर नेशनल हाईवे 46 पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के कलोथरा गांव के पास गुड़ से भरा एक मिनी ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया और पलट गया। हादसे में वाहन में सवार हेल्पर की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद मिनी ट्रक का चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार मिनी ट्रक क्रमांक MP 33 G 7642 गुड़ लेकर मुरैना से शिवपुरी की ओर आ रहा था। रविवार दोपहर कलोथरा गांव के पास अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। इसके बाद मिनी ट्रक सड़क से नीचे उतरकर पलट गया। हादसा इतना जोरदार था कि वाहन का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठा हेल्पर अंदर फंस गया।

    दुर्घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में सुभाषपुरा थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों की मदद से क्षतिग्रस्त केबिन में फंसे हेल्पर को बाहर निकाला गया। गंभीर हालत में उसे मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक की पहचान 35 वर्षीय पूरन जाटव के रूप में हुई है। वह करमाज कला गांव का रहने वाला था और मिनी ट्रक पर हेल्पर का काम करता था। बताया गया है कि यह वाहन इंद्रजीत चावला के नाम पर है। हादसे के बाद परिवार में मातम का माहौल है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह चालक को नींद का झोंका आना हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है। दुर्घटना की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए पुलिस घटनास्थल की जांच कर रही है। वाहन की स्थिति और सड़क से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है।

    हादसे के बाद चालक के मौके से फरार होने के कारण पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुर्घटना के समय वाहन की गति कितनी थी और चालक की लापरवाही या किसी अन्य वजह से वाहन अनियंत्रित हुआ था या नहीं। इसके साथ ही पुलिस आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।

    NH-46 पर लगातार वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में मिनी ट्रक के पलटने से कुछ समय के लिए मौके पर भी अफरा तफरी की स्थिति बन गई। राहत और बचाव के बाद पुलिस ने वाहन को सुरक्षित करवाया। फिलहाल सुभाषपुरा पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है और हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।