Category: Madhya Pradesh

  • शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल

    शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल


    शिवपुरी । शिवपुरी में सोमवार को मध्यप्रदेश राशन विक्रेता संघ के बैनर तले जिलेभर के राशन विक्रेता कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां विक्रेताओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। राशन विक्रेताओं ने सरकार से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कमीशन बढ़ाने और न्यूनतम मासिक आय की गारंटी देने की मांग की है। संघ ने साफ किया है कि अगर तय समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राशन दुकानों की हड़ताल भी की जा सकती है।

    राशन विक्रेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में करीब 28 हजार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में राशन दुकानदारों की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन बढ़ती महंगाई और दुकान संचालन से जुड़े खर्च के मुकाबले उन्हें मिलने वाला कमीशन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि कम आमदनी में दुकान का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ की सबसे प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन को बढ़ाकर कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल करना है। इसके साथ ही प्रत्येक राशन विक्रेता के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम गारंटीड आय तय करने की मांग रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में इतनी आय के बिना राशन दुकान चलाना कठिन हो रहा है।

    राशन विक्रेताओं ने खाद्यान्न में होने वाली शॉर्टेज को लेकर भी राहत की मांग की है। संघ ने प्रति क्विंटल एक किलो तक की शॉर्टेज की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अलावा हर महीने मिलने वाले कमीशन का भुगतान अधिकतम महीने की पांच तारीख तक अनिवार्य रूप से किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। विक्रेताओं का कहना है कि कमीशन मिलने में देरी होने से रोजमर्रा के खर्च और दुकान संचालन की व्यवस्था प्रभावित होती है।

    संघ ने सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों के अधीन काम करने वाले राशन विक्रेताओं के कमीशन भुगतान को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। विक्रेताओं का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया होने के कारण कई बार कमीशन समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे में शासन को भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनानी चाहिए।

    राशन विक्रेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। संघ के सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार बिहार में 258 रुपये प्रति क्विंटल केरल में 270 रुपये हरियाणा और दिल्ली में 200 रुपये तथा महाराष्ट्र में 170 रुपये तक कमीशन दिए जाने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला कमीशन इन राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में यहां भी कमीशन को बढ़ाकर दुकानदारों को आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।

    संघ ने शासन को सात दिवसीय आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से एक अक्टूबर 2026 से आंदोलन और हड़ताल की सूचना दी गई है। हालांकि राशन विक्रेताओं को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री खाद्य विभाग और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालेंगे। विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इसलिए उनकी आर्थिक मांगों पर सरकार को सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। अब सभी की नजर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।

  • जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील

    जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 कनाडा से भारत पहुंचने की तैयारी में है। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के इस्तेमाल के लिए खरीदा है। लेकिन करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह विमान आने के बाद तुरंत नियमित उड़ान भरने की स्थिति में नहीं होगा। इसे भारत में जरूरी औपचारिकताओं से गुजरना होगा और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित पायलटों से लेकर हैंगर और रखरखाव तक की व्यवस्था करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि यह जेट प्रदेश के हर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी पर उतर भी नहीं सकेगा।

    सरकार के अपने विमान की जरूरत उस समय ज्यादा महसूस हुई जब 6 मई 2021 को राज्य का बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी ग्वालियर एयरबेस पर क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया था। यह विमान करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा गया था लेकिन बीमा नहीं होने के कारण सरकार को नुकसान की भरपाई नहीं मिल सकी। अब इसे करीब 7 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर बेचने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद से मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी के लिए सरकार को निजी विमान किराए पर लेने पड़ रहे हैं।

    विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025 में नवंबर तक ही यह खर्च 90 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया था। विमानन विभाग का तर्क है कि लगातार बढ़ रहे किराये के खर्च को कम करने के लिए अपना जेट खरीदना जरूरी है। हालांकि जेट खरीदने के बाद भी सरकार को इसके संचालन पर हर साल बड़ी रकम खर्च करनी होगी।

    चैलेंजर 3500 की खरीद को लेकर अलग अलग समय पर अलग कीमतें सामने आई हैं। वर्ष 2022 में सरकार करीब 120 करोड़ रुपये के जेट पर विचार कर रही थी। बाद में कीमत और डिलीवरी से जुड़े कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मार्च 2024 में नए टेंडर में बॉम्बार्डियर और एम्ब्रेयर ने हिस्सा लिया। जुलाई 2024 में कैबिनेट ने बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 खरीदने की मंजूरी दी और उस समय कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई। अब टैक्स ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्च जोड़ने के बाद कुल अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

    सिर्फ खरीद कीमत ही पूरी तस्वीर नहीं है। विमान को चलाने में क्रू हैंगर बीमा मेंटेनेंस और ईंधन समेत कई खर्च होते हैं। अनुमान के मुताबिक 450 घंटे सालाना उड़ान पर इसका कुल खर्च करीब 30 से 33 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी प्रति उड़ान घंटे लागत किराए के विमान की तुलना में ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि यदि किराए के विमान पर लगने वाला स्टैंडिंग चार्ज पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो सरकार के कुल खर्च में कुछ राहत मिल सकती है।

    जेट के साथ सरकार ने एयरबस ACH160 हेलिकॉप्टर भी खरीदा है। हेलिकॉप्टर की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी जबकि टैक्स और अन्य शुल्क जोड़ने पर खर्च करीब 225 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह जेट और हेलिकॉप्टर के बाद हवाई ढांचे को तैयार करने का खर्च भी सरकार के सामने है।

    चैलेंजर 3500 को चलाने के लिए सरकार को पायलटों की ट्रेनिंग और जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विदेश में प्रशिक्षण लेने गए प्रदेश के दो पायलट पहली कोशिश में टेस्ट पास नहीं कर सके। फिलहाल उन्हें को पायलट का प्रमाणपत्र मिला है। इसलिए शुरुआत में बॉम्बार्डियर का एक प्रशिक्षित पायलट विमान उड़ाएगा। सरकारी पायलटों को उसके साथ निर्धारित उड़ान अनुभव पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से जेट उड़ाने की अनुमति मिल सकेगी।

    सबसे बड़ी चुनौती रनवे को लेकर है। विभाग के आकलन के अनुसार जेट के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए लगभग 2100 मीटर लंबा रनवे जरूरी माना जा रहा है। प्रदेश के सभी एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां इस जरूरत को पूरा नहीं करतीं। मौजूदा आकलन के अनुसार करीब 10 स्थानों पर यह जेट उतर सकता है। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर खजुराहो रीवा और दतिया के एयरपोर्ट के अलावा मंदसौर सिवनी और मंडला की हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    सरकार कई अन्य हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए जिलों से जमीन की जानकारी मांगी गई है। सरकारी जमीन मिलने पर एक पट्टी के विस्तार में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये जबकि निजी जमीन अधिग्रहण की स्थिति में 30 से 40 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर हवाई पट्टियों के विस्तार पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

    ऐसे में जेट हेलिकॉप्टर और रनवे विस्तार को जोड़कर पूरी योजना का अनुमानित खर्च करीब 875 से 975 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें हेलिपैड नेटवर्क का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए सरकार के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अपना जेट खरीदने से किराए का खर्च कितना बचेगा बल्कि यह भी है कि विमान को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए अगले कई वर्षों में कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। अंतिम फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जेट का कितना नियमित इस्तेमाल करती है और मौजूदा किराये तथा स्टैंडिंग चार्ज में वास्तविक रूप से कितनी कमी आती है।

  • राकेश अग्रवाल हत्याकांड में फरार वरुण की तलाश तेज, आगरा से वृंदावन पहुंचा आरोपी, 50 हजार का इनाम और 12 टीमें पीछे

    राकेश अग्रवाल हत्याकांड में फरार वरुण की तलाश तेज, आगरा से वृंदावन पहुंचा आरोपी, 50 हजार का इनाम और 12 टीमें पीछे


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में फरार केयरटेकर वरुण कुमार की तलाश लगातार तेज होती जा रही है। पुलिस की जांच में वरुण की ताजा लोकेशन उत्तर प्रदेश के वृंदावन में मिली है। यह जगह भोपाल से करीब 612 किलोमीटर दूर है। इससे पहले उसकी लोकेशन आगरा और आगरा से वृंदावन जाने वाले रास्ते पर ट्रेस हुई थी। पुलिस अब CCTV फुटेज और तकनीकी लोकेशन के आधार पर उसके पूरे रूट को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

    जांच में सामने आए नए CCTV फुटेज में वरुण बाइक से स्टेशन के आसपास जाता दिखाई दे रहा है। पुलिस के मुताबिक स्टेशन तक पहुंचने के लिए उसने दो अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया था। इससे पहले सामने आए फुटेज में वह पैदल जाता हुआ भी दिखाई दिया था। पुलिस को शक है कि वारदात के बाद वरुण लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है ताकि पुलिस की पकड़ से बच सके।

    पुलिस के अनुसार पिछले 24 घंटे में वरुण की गतिविधियां आगरा वृंदावन रोड और आसपास के इलाकों में सामने आई हैं। टीमों ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी लेकिन वह पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से निकल गया। वह किसी एक स्थान पर ज्यादा देर नहीं रुक रहा है और यात्री वाहनों का इस्तेमाल कर लगातार जगह बदल रहा है। यही वजह है कि उसकी सटीक लोकेशन तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

    वरुण की तलाश के लिए मध्यप्रदेश समेत पांच राज्यों में पुलिस की 12 टीमें लगाई गई हैं। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस उसके पुराने संपर्कों और संभावित मददगारों की जानकारी भी जुटा रही है। इसी सिलसिले में भोपाल पुलिस की एक टीम पटियाला पहुंची थी। वहां वरुण की बहन से पूछताछ कर उसके संपर्क और संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पुलिस के मुताबिक परिवार से भी लंबे समय से उसका संपर्क नहीं था।

    जांच में एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि हत्या के बाद वरुण राकेश अग्रवाल का मोबाइल अपने साथ लेकर गया था। आगरा पहुंचने के बाद उसने यह मोबाइल एक परिचित को दे दिया था। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल की गतिविधियों और वरुण से जुड़ी तकनीकी जानकारी खंगाली। इसी आधार पर उसकी गतिविधियों का ट्रेल आगरा और मथुरा क्षेत्र तक पहुंचा।

    राकेश अग्रवाल की 30 सितंबर की रात भोपाल के सूरज नगर स्थित घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जांच में सामने आया था कि हत्या धारदार सर्जिकल ब्लेड से की गई। वारदात के बाद से ही उनका केयरटेकर वरुण फरार है। अब पुलिस CCTV फुटेज तकनीकी लोकेशन और उसके संपर्कों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि वृंदावन से आगे वह किस दिशा में गया है। पुलिस का फोकस उसे जल्द पकड़ने के साथ हत्या के पीछे की पूरी वजह सामने लाने पर भी है।

  • लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी

    लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी


    भोपाल । भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। इसी दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से महिलाओं और बेटियों को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि इस योजना की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

    बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होंने अपनी जिज्जियों यानी बहनों के लिए तो काफी कुछ किया है लेकिन उनकी बिन्नुओं यानी बेटियों के लिए वह क्या करना चाहते हैं। सवाल सुनकर मुख्यमंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंजने लगे।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी बहनों के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि का जिक्र किया। साथ ही बताया कि अब यह सहायता बढ़कर डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिन्नू रानी से मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी वह लाड़ली बहना योजना के लिए छोटी हैं और जब बड़ी हो जाएंगी तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड के विकास और युवाओं से जुड़े सवाल भी किए गए। एक युवा ने उनसे पूछा कि अगर बुंदेलखंड के युवाओं की कोई एक समस्या 24 घंटे में हल करनी हो तो वह क्या करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड जैसी बड़ी समस्या को 24 घंटे में हल करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों में क्षमता योग्यता और बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। सरकार का काम उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड से होने वाले पलायन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार और पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण क्षेत्र से पलायन की स्थिति बनती थी। अब सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में केन बेतवा जैसी बड़ी परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र के कई सेक्टर में बदलाव आने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी के साथ बड़ी संख्या में बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और क्षेत्र की समस्याओं के साथ सरकार की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

    लाड़ली बहना योजना की बात करें तो इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने की थी। योजना का औपचारिक शुभारंभ 5 मार्च 2023 को हुआ था। शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान था। जून 2023 में योजना की पहली किस्त जारी की गई थी।

    शुरुआती चरण में करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाएं योजना के लिए पात्र थीं। पहली किस्त के दौरान एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को भुगतान किया गया था। इसके बाद समय के साथ योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। सितंबर 2026 में जारी 40वीं किस्त के दौरान करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। मौजूदा समय में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि मिल रही है।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना पर की गई टिप्पणी भले ही मजाकिया अंदाज में रही हो लेकिन इसके जरिए उन्होंने योजना की जिम्मेदारी और महिलाओं के लिए सरकार की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाओं और सवाल जवाब के बीच मुख्यमंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा।

  • आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना

    आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना


    नई दिल्ली। महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरि का बयान सामने आया है। उन्होंने आश्रमों में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। साध्वी ने अपने बयान में किसी विशेष संत या आश्रम का नाम नहीं लिया है लेकिन उनकी टिप्पणी को हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से श्रद्धालुओं को दी गई सुरक्षा संबंधी सलाह से जोड़कर देखा जा रहा है।

    साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि किसी आश्रम में रहने वाले सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो ऐसे स्थान पर अपने बच्चों और परिवार को भेजने को लेकर लोगों को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर आश्रम को गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन जब किसी जगह की सुरक्षा को लेकर मन में दुविधा हो तो ऐसी स्थिति में वहां जाने से बचना भी एक विकल्प हो सकता है।

    उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्हें सुरक्षित रहना है तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक आस्था के लिए किसी आश्रम में लंबे समय तक रुकना जरूरी नहीं है। लोग मंदिर में दर्शन करें और इसके बाद अपने घर लौट सकते हैं।

    साध्वी ने आश्रमों की व्यवस्था और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्रम की राजनीति और विवादों में पड़ने के बजाय अपनी धार्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने आश्रम बनाए हैं अगर वे ही वहां की पूरी व्यवस्था को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर की रात श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम पर न आएं। अगर किसी महिला को अकेले आना पड़े तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा था कि मंदिर परिसर और निर्धारित हॉल के अलावा दूसरी जगहों पर जाने से बचें। उन्होंने बताया था कि बागेश्वर धाम के करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उनके मुताबिक वह मंदिर और हॉल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन पूरे क्षेत्र को लेकर ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम में लंबे समय तक रुकने से बचने और अपने सामान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने की अपील भी की थी। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आने वाली कुछ घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना के कारण बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।

    धीरेंद्र शास्त्री की अपील और साध्वी हर्षानंद की प्रतिक्रिया के बीच मुख्य मुद्दा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सामने आया है। दोनों बयानों में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की बात कही गई है हालांकि साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में जाने को लेकर व्यापक सवाल उठाए हैं।

    ऐसे मामलों में किसी भी घटना या आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल दोनों संतों की ओर से सामने आए बयानों ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना महत्वपूर्ण सावधानी मानी जा सकती है।

  • भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

    भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन


    नई दिल्ली। भोपाल के मिसरोद इलाके में सरकारी स्कूल की एक टीचर के खिलाफ छात्र छात्राओं का विरोध प्रदर्शन चर्चा में है। विद्यार्थियों ने टीचर पर गंभीर आरोप लगाते हुए करीब चार घंटे तक सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनसे पढ़ाई कराने के बजाय घर के काम कराए जाते हैं और ऐसा नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी जाती है। विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने और विरोध करने पर मारपीट करने जैसे आरोप भी लगाए हैं। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित टीचर का ट्रांसफर कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

    यह मामला मिसरोद स्थित नवीन हायर सेकंडरी स्कूल का है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं स्कूल के बाहर सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर टीचर के खिलाफ नारे लगाए। सूचना मिलने पर मिसरोद थाने के प्रभारी विमलेश कुमार राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्राचार्य के साथ मिलकर विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि आरोपी टीचर को स्कूल से हटाए जाने के बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा।

    बताया गया कि 11वीं कक्षा के गणित और जीव विज्ञान विषय के विद्यार्थियों ने इससे पहले 3 अक्टूबर को प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि यूपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे बेंच लगाने सफाई करने और रोल नंबर लिखने जैसे काम कराए जाते हैं। विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि कई बार उन्हें रविवार को भी स्कूल बुलाया जाता है। छात्रों ने कहा कि वे पढ़ाई करने के लिए स्कूल आते हैं और उनसे कर्मचारियों की तरह काम नहीं कराया जाना चाहिए।

    विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने का आरोप भी लगाया। शिकायत में दावा किया गया कि हर महीने प्रोजेक्ट के नाम पर 2500 रुपये मांगे जाते हैं। छात्रों के अनुसार पैसे नहीं देने पर पढ़ाई को लेकर दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि इसी तरह की स्थिति के कारण कुछ विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय तक छोड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर क्लास में पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और सीनियर छात्रों के साथ मारपीट की जाती है।

    इस मामले में छात्रों ने टीचर से एक विद्यार्थी की कथित बातचीत का ऑडियो भी सुनाया। इसमें पास या फेल कराने अभिभावकों से बातचीत और पैसे खर्च होने जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया गया। हालांकि ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत किस वास्तविक संदर्भ में हुई थी इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    दूसरी ओर टीचर बबीता कुशवाह ने छात्रों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह वर्ष 1999 से अध्यापन कर रही हैं और उनके पास लंबे समय का शिक्षण अनुभव है। उन्होंने कहा कि अच्छे परिणाम के लिए वह विद्यार्थियों के साथ सख्ती करती हैं लेकिन पैसे लेकर पास कराने या फेल करने का आरोप पूरी तरह गलत है।

    टीचर ने छात्रों से सफाई कराने के आरोप से भी इनकार किया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को केवल अपना बैग साफ रखने के लिए कपड़ा रखने के लिए कहा जाता है। प्रैक्टिकल के दौरान इंस्ट्रूमेंट को व्यवस्थित करना और उनकी सफाई करना पढ़ाई की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने कहा कि विद्यार्थियों की शिकायत के आधार पर बबीता कुशवाह का ट्रांसफर बागरोदा हायर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और यहां करीब 37 लोगों का स्टाफ बताया गया है। बबीता कुशवाह वर्ष 2010 से इस स्कूल में पढ़ा रही थीं। फिलहाल ट्रांसफर और जांच की कार्रवाई के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब पूरे मामले में विभागीय जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी क्योंकि छात्रों और टीचर की ओर से आरोपों को लेकर अलग अलग दावे सामने आए हैं।

  • सिवनी में 22 वर्षीय मुस्कान की हत्या का खुलासा, मां-मामा पर गला दबाने और हादसा दिखाने के लिए करंट लगाने का आरोप

    सिवनी में 22 वर्षीय मुस्कान की हत्या का खुलासा, मां-मामा पर गला दबाने और हादसा दिखाने के लिए करंट लगाने का आरोप


    मध्य प्रदेश: के सिवनी जिले में 22 वर्षीय युवती मुस्कान उईके की हत्या का मामला सामने आया है। कुरई थाना क्षेत्र के सतोसा गांव में 30 सितंबर को मक्के के खेत से एक अज्ञात युवती का शव मिला था। पुलिस जांच में शव की पहचान मुस्कान उईके के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, मुस्कान आवरघनी स्थित एक रिजॉर्ट में काम करती थी और 28 सितंबर की शाम काम से लौटने के बाद घर वापस आई थी। इसके बाद वह मोबाइल पर काफी देर तक किसी से बात कर रही थी। इसी बात को लेकर उसकी मां सुनीता उईके से विवाद हुआ था। पुलिस का आरोप है कि विवाद के दौरान मां और मामा अनिल धुर्वे ने उसके साथ मारपीट की और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

    पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर को खेत में मिले शव पर चोटों के साथ बिजली के करंट से झुलसने के निशान भी थे। शव की पहचान शुरू में नहीं हो सकी थी। इसके बाद पुलिस ने आसपास के गांवों और रिजॉर्ट में पूछताछ शुरू की तथा वहां आने-जाने वाले लोगों की जानकारी और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के दौरान पता चला कि मुस्कान 28 सितंबर की शाम से घर नहीं लौटी थी। कपड़ों, हुलिए और अन्य जानकारी के आधार पर शव की पहचान मुस्कान के रूप में की गई। इसके बाद पुलिस ने उसके परिजनों से पूछताछ शुरू की और मामले की जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान की मां सुनीता उईके और मामा अनिल धुर्वे को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की। आरोप है कि 28 सितंबर की रात मोबाइल पर किसी से बात करने को लेकर मुस्कान को टोका गया था। विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने उसके साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उसकी जान ले ली। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने घटना को छिपाने के लिए शव पर बिजली का करंट लगाया। इसके बाद शव को पास के मक्के के खेत में ले जाकर फेंक दिया गया।

    पुलिस का कहना है कि शव पर करंट के निशान इस तरह बनाए गए थे कि मौत को दुर्घटना का रूप दिया जा सके। जांच के दौरान घटनास्थल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में मुस्कान की मां ने शव को पहचानने से इनकार किया था, लेकिन पूछताछ और सामने आए साक्ष्यों के बाद उसने हत्या से जुड़ी जानकारी स्वीकार की। मामले की जांच में पुलिस ने मृतका के रिजॉर्ट में काम करने की जानकारी और उसके घर से गायब होने की समय-सीमा को भी महत्वपूर्ण माना।

    पुलिस ने इस मामले में सुनीता उईके और अनिल धुर्वे को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में कुरई और बरघाट पुलिस के साथ साइबर सेल की टीम ने भी काम किया। 30 सितंबर को अज्ञात युवती के शव से शुरू हुई जांच में पुलिस ने उसकी पहचान मुस्कान के रूप में की और इसके बाद पूछताछ तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी मां और मामा को आरोपी बनाया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत

    MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर (Assembly Speaker Narendra Singh Tomar) ने ‘Gen-Z’ के बजाय ‘तरुण भारत’ (‘Tarun Bharat’) शब्द का इस्तेमाल करने की वकालत की. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का खुले मन से स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

    इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भारतीय पत्रकारिता से जुड़े एक कार्यक्रम में तोमर ने कहा, “आज हर जगह ‘Gen-Z’ की चर्चा हो रही है, लेकिन मेरा आग्रह है कि ‘Gen-Z’ शब्द के बजाय अगर हम ‘तरुण भारत’ शब्द का इस्तेमाल करें, तो यह कहीं बेहतर होगा.”

    उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश और विदेश में उल्लेखनीय काम कर रही है, जिससे हर कोई हैरान है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मौजूदा समय पीढ़ियों के बदलाव का दौर है. ऐसे में हम सभी को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए, नए पहलुओं पर गौर करना चाहिए और उस पीढ़ी का स्वागत और सम्मान करना चाहिए जो भविष्य में हमसे कमान संभालेगी.”

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीढ़ीगत अंतर हो सकता है, लेकिन ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि युवा पीढ़ी हमेशा गलत दिशा में ही सोचेगी. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं बदलाव को प्रकृति का नियम मानती हैं और हर दौर में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है।

    पुराने मुगल शासकों का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा कि ऐसी संस्कृतियां भी रही हैं जिनमें बेटा साम्राज्य पाने के लिए अपने ही पिता को कैद कर लेता था. उन्होंने कहा, “कुछ लोग जनता को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि देश के युवाओं ने पिछले 10-15 सालों में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रयोग किए हैं. युवाओं की इस उपलब्धि पर हम जितना भी गर्व करें, कम है।

    तोमर ने पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि भारत को वैश्विक पहचान मिली है, जबकि भारतीय युवा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले भारतीय मूल के बड़ी संख्या में युवा सदस्य, विकसित देशों की तरक्की में भारतीयों के योगदान को दिखाते हैं।


    स्टार्ट-अप क्रांति में युवाओं का योगदान

    पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मोदी के नेतृत्व में भारत की स्टार्ट-अप यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने आगे कहा, “जब हम सरकार में आए थे, तब देश में सिर्फ 300-400 स्टार्ट-अप हुआ करते थे. आज कॉम्पिटिशन की वजह से हजारों स्टार्ट-अप हैं. इन स्टार्ट-अप्स में वही युवा हैं जिन्हें आप ‘जेन-जी’ कहते हैं, जबकि मैं उन्हें ‘तरुण भारत’ कहता हूं।

    बता दें कि ‘Gen-Z’ का मतलब उस पीढ़ी से है जो मुख्य रूप से 1997 और 2012 के बीच पैदा हुई थी. देश में अलग-अलग मुद्दों पर बढ़ते युवा आंदोलनों के बीच राजनीतिक चर्चाओं में इस शब्द का इस्तेमाल बढ़ा है।

  • MP के डिंडोरी और मंडला जिले में काटे जा रहे 1.47 लाख साल के पेड़, जानिए क्या है वजह?

    MP के डिंडोरी और मंडला जिले में काटे जा रहे 1.47 लाख साल के पेड़, जानिए क्या है वजह?


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के डिंडोरी-मंडला (Dindori-Mandla) में एक कीड़ा साल के जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। यह कीड़ा (Worm) पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है। अब जंगलों के अस्तीत्व को बचाने और कीड़े के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार अभियान चला रही है। इसके लिए प्रभावित पेड़ों को काटा जा रहा है। साथ ही कीड़ों को पकड़ा भी जा रहा है। ग्रामीण कीड़ों को हाथों से पकड़कर प्रति कीड़ा 2 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 1.47 लाख प्रभावित पेड़ों को काटने के लिए मंजूरी दी है।


    साल के पेड़ों के लिए मुसीबत बना ‘साल हार्टवुड बोरर’

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में डिंडोरी-मंडला रोड के पास साल के जंगलों में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। इन पेड़ों की छाल हटा ली जाती है। गांव के लोग इन कटे पेड़ों के तनों पर नजर डालते हें और एक कीड़े को पकड़ते हैं। इस कीड़े का नाम ‘होप्लोसेरामबिक्स स्पिनिकॉर्निस’ है जिसे ‘साल हार्टवुड बोरर’ के नाम से जाना जाता है। यह एक लॉन्गहॉर्न बीटल है।


    कीड़ों का हार बनाते हैं ग्रामीण

    यह कीड़ा एक सदी से भी ज्यादा समय से साल के पेड़ों के लिए मुसीबत बना हुआ है। गांव के लोग इन कीड़ों को हाथों से पकड़ते हैं और बैग में डाल लेते हैं। गांव के लोग इन कीड़ों का हार बनाते हैं। इन बीटल के लंबे एंटीना हार बनाने के लिए गूंथने में मददगार साबित होते हैं। ग्रामीण इन कीड़ों को जिले के 8 कलेक्शन सेंटरों तक ले जाते हैं। गांव के लोगों को प्रति बीटल 2 रुपये मिलते हैं। इस सीजन में अब तक 19,25,118 बीटल जमा किए गए हैं। इससे राज्य के वन विभाग पर 38.5 लाख रुपये का बोझ पड़ा है।


    1.47 लाख पेड़ों को काटने की मंजूरी

    साल के पेड़ों के लिए खतरा बने इस कीड़े को पहली बार 1897 में दर्ज किया गया था। अब इस कीड़े का प्रकोप बड़े पैमाने पर फैल गया है। इस कारण डिंडोरी में एक बड़ा साल पेड़ कटाई अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने संक्रमण से प्रभावित 1.47 लाख पेड़ों को काटने की मंजूरी दी है। साल या ‘शोरिया रोबस्टा’ मध्य भारत के जंगलों में पाई जाने वाली प्रमुख पेड़ प्रजातियों में शुमार है। साल के पेड़ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैले जंगलों में पाए जाते हैं।


    आदिवासी समुदाय में साल के वृक्ष की अहमियत

    साल की लकड़ी अपनी मजबूती और सड़न-रोधी क्षमता के कारण बहुत कीमती होती है। आदिवासी समुदाय साल के पेड़ों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है। साल के बीज से तेल निकाला जाता है। इसका इस्तेमाल खाना पकाने, साबुन और मिठाई बनाने में होता है। साल के पत्तों से दोने भी बनाए जाते हैं। यही नहीं तने से निकलने वाली राल का इस्तेमाल धूप के तौर पर भी होता है। यही कारण है कि आदिवासी समुदाय के लिए साल के जंगलों का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है।


    साल बोरर के 21 से ज्यादा प्रकोप

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘साल हार्टवुड बोरर’ शाल के पेड़ों को निशाना बनाता है। अब तक पूरे भारत में साल बोरर के 21 से ज्यादा प्रकोप देखे जा चुके हैं। मध्य प्रदेश और पड़ोसी छत्तीसगढ़ में 1997 और 2000 के बीच इसका तगड़ा प्रकोप सामने आया था। डिंडोरी से सटे मंडला जिले में पेड़ काटने के आदेश दिए गए हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रकोप से निपटने के लिए कीड़ों को पकड़ना और पेड़ काटना दोनों उपाय चल रहे हैं।


    संक्रमण के खिलाफ ऐसे चलता है अभियान

    संक्रमित खड़े पेड़ों को काटना भी प्रकोप से बचने का एक उपाय है। बारिश के मौसम में कीड़ों को पकड़ने का अभियान चलाया जाता है। संक्रमित और बेकार हो चुके पेड़ों को काटा जाता है। उनकी छाल हटाई जाती है ताकि कीड़े बाहर आ जाएं। कीड़े बाहर आकर पेड़ का रस पीते हैं। ये रात में दिखाई देते हैं। पेड़ों को काटने और छाल हटाने के बाद तीन दिन के लिए तने को छोड़ दिया जाता है। इससे कीड़े बाहर निकल आते हैं। सुबह बाहर आ चुके कीड़ों को ग्रामीण हाथ से पकड़कर एक बैग में डाल लेते हैं।

  • MP में रातें ठंडी, दिन में गर्मी, 7-8 अक्टूबर को 14 जिलों में बारिश की संभावना

    MP में रातें ठंडी, दिन में गर्मी, 7-8 अक्टूबर को 14 जिलों में बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद मौसम ने करवट लेना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप से गर्मी और उमस बनी हुई है, जबकि रात के तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री और इंदौर में 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 14 शहरों में गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है।

    पिछली तीन रातों में प्रदेश के कई शहरों के न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। अनूपपुर के अमरकंटक में पारा 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इंदौर में भी न्यूनतम तापमान 18 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल, उज्जैन और पचमढ़ी में भी रात के तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, दिन में तेज धूप निकलने से गर्मी और उमस का असर बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 साल के अक्टूबर के आंकड़ों में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता रहा है। इस बार भी अक्टूबर में इसी तरह मौसम में बदलाव का ट्रेंड रहने का अनुमान है। महीने की शुरुआत में मौसम साफ हो गया है और दिन में धूप निकल रही है, जबकि रात के समय ठंडक बढ़ने लगी है।

    7-8 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम बदलने का अनुमान जताया है। इस दौरान गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

    छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    5 और 6 अक्टूबर को मौसम रहेगा साफ

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन यानी 5 और 6 अक्टूबर को प्रदेश में कहीं भी बारिश होने की संभावना नहीं है। इन दोनों दिनों में ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ रहेगा और दिन में धूप खिली रहेगी। इसके बाद 7 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    100 दिन सक्रिय रहा मानसून

    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। मानसून ने 24 जून को प्रदेश में दस्तक दी थी और 3 अक्टूबर को पूरे मध्य प्रदेश से विदा हो गया।

    मानसून सीजन में प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच की तुलना में 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच भी अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, फिर भी 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत के मुकाबले 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि, इन क्षेत्रों के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज हुई।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में 9 से 51% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 9% से 51% तक कम बारिश हुई है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    इस बार प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।