Category: Madhya Pradesh

  • हेमंत खंडेलवाल ने कहा- अमित शाह ने सहकारिता को दी नई दिशा, मध्यप्रदेश में 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य

    हेमंत खंडेलवाल ने कहा- अमित शाह ने सहकारिता को दी नई दिशा, मध्यप्रदेश में 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य


    मध्यप्रदेश:
    की राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारिता को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र की दिशा बदली है और प्रदेश में दुग्ध क्रांति की शुरुआत की गई है। खंडेलवाल ने राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में अमित शाह की मौजूदगी को प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    खंडेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब तक 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं। सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद प्रदेश में दूध का कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक प्रदेश के गौपालकों को अब दूध के लिए 8.50 रुपये प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। इससे दूध उत्पादन से जुड़े कृषकों की आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि दूध से किसानों की आय बढ़े, गोबर से खाद बने और सरकार के सहयोग से समृद्धि आए। सहकारिता के जरिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। उन्होंने आगामी वर्षों में दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का संकल्प जताया। खंडेलवाल के अनुसार मध्यप्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस लक्ष्य के लिए दुग्ध सहकारी समितियों और दूध उत्पादन से जुड़े किसानों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की बात भी सामने रखी गई।

    भोपाल में आयोजित इस राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में सहकारिता और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश में दूध कलेक्शन बढ़ाने और दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि के लिए सहकारी मॉडल को मजबूत करने की बात कही गई। खंडेलवाल ने सहकारिता, दुग्ध उत्पादन और गोपालकों की आय को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उनके बयान के अनुसार, मौजूदा 12 लाख लीटर प्रतिदिन के दूध कलेक्शन को आने वाले वर्षों में 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही गोबर से खाद तैयार करने और सरकार के सहयोग से समृद्धि लाने की दिशा में काम करने की बात उन्होंने कही। उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में हुए काम को आगे बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया। सम्मेलन में कही गई बातों के अनुसार, आने वाले वर्षों में दूध कलेक्शन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना इस दिशा में प्रमुख लक्ष्य हैं।

  • ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार

    ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार


    जबलपुर । गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को देशभर में ड्राई डे रहा लेकिन जबलपुर में इस दौरान शराब बिक्री के कथित मामले सामने आने से सवाल खड़े हो गए हैं। रांझी क्षेत्र में शराब दुकान बंद होने के बाद भी अंदर से शराब बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दुकान के भीतर बनी कथित गुप्त खिड़की के जरिए ग्राहकों को शराब दिए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान शराब निर्धारित कीमत से अधिक यानी ओवररेट में बेची गई। हालांकि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामला रांझी के बड़ा पत्थर स्थित शराब दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 2 अक्टूबर को दुकान बंद रहने के बावजूद यहां दिन से लेकर देर रात तक शराब की कथित बिक्री की गई। दुकान नय्यर एंड कोहली ग्रुप की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ड्राई डे के दौरान शराब दुकानों को बंद रखने के नियम के बावजूद यदि बिक्री हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

    वायरल वीडियो में दुकान के अंदर से एक छोटे रास्ते या कथित गुप्त खिड़की के जरिए शराब दिए जाने का दावा किया गया है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राहकों से शराब की एमआरपी से ज्यादा रकम ली गई। हालांकि इस पूरे मामले में वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चा तेज है और लोग ड्राई डे के दौरान दुकानों की निगरानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    इसी बीच जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्र बरगी में भी शराब बिक्री से जुड़ा एक मामला सामने आया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष संजू लाल ने कथित तौर पर शराब बेच रहे दो युवकों को पकड़े जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर बरगी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को शराब के साथ थाने ले जाया गया। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी और किस उद्देश्य से बेची जा रही थी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नगर चौकी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्राई डे के दिन सामने आए इस मामले ने एक बार फिर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित दिन पर शराब बिक्री रोकने के लिए प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद यदि शराब बिक्री के मामले सामने आते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल रांझी में वायरल वीडियो और बरगी में पकड़े गए दोनों युवकों के मामले में जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं और शराब बिक्री किस स्तर पर हुई इसकी पुष्टि जांच के आधार पर होगी। इस घटना ने ड्राई डे पर शराब दुकानों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन के सामने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

  • शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    जबलपुर । जबलपुर जिले के पाटन में गर्भवती कविता चौधरी की मौत के 28 दिन बाद पुलिस ने मामले का चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस घटना को शुरुआत में सड़क हादसा माना जा रहा था वह पुलिस जांच में सुनियोजित हत्या निकली। आरोप है कि कविता के पति प्रयास पांडे ने करीब 70 लाख रुपए की बीमा राशि हासिल करने के लिए उसकी हत्या की साजिश रची और पांच लाख रुपए में सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलवाया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि कथित मास्टरमाइंड पति और उसका साथी अभी फरार बताए जा रहे हैं।

    पुलिस जांच के मुताबिक प्रयास पांडे ने वर्ष 2022 में कविता चौधरी से प्रेम विवाह किया था। दोनों की शादी अलग समाज में होने के कारण परिवार में इस रिश्ते को लेकर विरोध और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इसी बीच प्रयास को जानकारी हुई कि कविता के नाम करीब 70 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी है। पुलिस के अनुसार इसके बाद उसने पत्नी से छुटकारा पाने और बीमा राशि हासिल करने की योजना बनाई। हत्या की साजिश कथित तौर पर घटना से करीब दो महीने पहले शुरू की गई थी।

    बताया गया कि प्रयास ने सबसे पहले पाटन की शराब दुकान के पास दो युवकों से संपर्क कर पत्नी की हत्या के लिए रकम की पेशकश की लेकिन दोनों ने इस काम से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके दोस्त मान सिंह के जरिए चौधरी मोहल्ले के धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार से संपर्क हुआ। पुलिस के अनुसार पांच लाख रुपए में हत्या का सौदा तय हुआ और प्रयास ने एक लाख रुपए एडवांस के तौर पर दिए।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने घटना को सड़क हादसा दिखाने के लिए पहले से तैयारी की थी। इसके लिए उन्होंने तीन से चार बार घटनास्थल के आसपास जाकर पूरी योजना की प्रैक्टिस की। वारदात में इस्तेमाल करने के लिए करीब 20 हजार रुपए देकर एक पिकअप वाहन किराए पर लिया गया था। घटना वाले दिन प्रयास फोन पर कविता से लगातार बात करता रहा और उसकी लोकेशन अपने साथियों तक पहुंचाता रहा।

    4 सितंबर की रात करीब 9 बजे कविता एक्टिवा से रानीताल पुलिया के पास पहुंची। पुलिस के अनुसार इसी दौरान विक्रम ने पिकअप से पीछे से एक्टिवा को टक्कर मारी। टक्कर लगने के बाद कविता सड़क पर गिर गई और आरोप है कि उसके ऊपर वाहन चढ़ा दिया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी पिकअप को नहर में ले जाकर धोने के बाद वापस कर आए।

    घटना के बाद प्रयास मौके पर पहुंचा और पुलिस तथा परिजनों के सामने पत्नी की मौत पर शोक जताता रहा। वह अंतिम संस्कार तक पुलिस के साथ मौजूद रहा। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे अज्ञात वाहन से हुआ सड़क हादसा माना था लेकिन बाद में एक मुखबिर से मिली सूचना ने जांच की दिशा बदल दी। पुलिस को जानकारी मिली कि प्रयास कुछ दिन पहले शराब दुकान के पास पत्नी की हत्या को लेकर बातचीत कर रहा था।

    इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की साजिश और वारदात से जुड़ी जानकारी दी। इसके आधार पर धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस फरार प्रयास पांडे और उसके साथी मान सिंह की तलाश कर रही है। मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बीमा पॉलिसी से जुड़ी जानकारी और हत्या की साजिश के बीच क्या पूरा संबंध था।

  • इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा

    इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा


    इंदौर । इंदौर के कई वार्डों में लंबे समय से अलग अलग तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। रहवासी अपनी शिकायतों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचते हैं लेकिन कई मामलों में समय पर समाधान नहीं हो पाता। अब इन समस्याओं की वास्तविक स्थिति जानने और उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने जोन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वे खुद उन वार्डों में पहुंच रही हैं जहां समस्याएं अधिक हैं। वहां वार्ड अध्यक्षों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर मैदानी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से मुलाकात कर समस्याओं पर सीधे जवाब मांगा जा रहा है।

    अभियान की शुरुआत जोन 22 से की गई है। यहां नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारी से मुलाकात कर वार्डों में सामने आ रही समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान ड्रेनेज लाइन पानी बिजली सड़क और नगर निगम की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतों को सामने रखा गया। अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की गई कि इन समस्याओं का समाधान कब तक किया जाएगा और इसके लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

    सोनिला मिमरोट के अनुसार वार्डों में कई स्थानों पर अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। कुछ जगहों पर लोगों की शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में केवल कार्यालय में बैठकर शिकायतों की जानकारी लेने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति समझने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से जोन कार्यालयों तक पहुंचने का अभियान शुरू किया गया है।

    जोन 22 के अंतर्गत आने वाले कुछ वार्डों की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों के सामने सवाल रखे गए। बताया गया कि इस क्षेत्र में दो वार्ड ऐसे हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं और बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हुए। इन इलाकों में अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा है तो कहीं सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं। इन समस्याओं को बिंदुवार अधिकारियों के सामने रखा गया और इनके समाधान की समयसीमा को लेकर जवाब मांगा गया।

    नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जोन अभियान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। आगे भी अलग अलग वार्डों में जाकर स्थानीय लोगों और वार्ड अध्यक्षों से समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से सीधे चर्चा कर शिकायतों के निराकरण की स्थिति जानी जाएगी। इस दौरान अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि किसी समस्या के समाधान में देरी क्यों हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    अभियान के जरिए नगर निगम के स्तर पर वार्डों की समस्याओं को सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब जोन 22 के बाद अन्य जोनों में भी इसी तरह का अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आने और उनके समाधान को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल

    सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर नगर निगम की जांच में चिंताजनक स्थिति सामने आई है। नगर निगम की वाटर टेस्टिंग लैब ने अलग अलग सरकारी अस्पतालों और उनके परिसरों से पानी के 15 सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में 6 सैंपल में Coliform Bacteria और 5 सैंपल में E. coli पाए गए हैं। रिपोर्ट को नेता प्रतिपक्ष की ओर से सार्वजनिक किए जाने के बाद अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    पानी की जांच के लिए निर्धारित मानकों के मुताबिक 100 एमएल पानी में Coliform और E. coli की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में जिन सैंपल में इन बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। खासतौर पर अस्पतालों में यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पहले से बीमार मरीजों के अलावा बच्चे बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भी इलाज के लिए आते हैं।

    जांच में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल के पानी में पाया गया। यहां Coliform की मात्रा 118 MPN प्रति 100 एमएल और E. coli की मात्रा 24 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज की गई। इसी अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित RO यूनिट के पानी में भी दोनों बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के इस्तेमाल वाले पानी की गुणवत्ता को देखते हुए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    गोविंद बल्लभ पंत जिला अस्पताल के वाटर कूलर से लिए गए सैंपल में भी Coliform और E. coli मिला। जांच में Coliform 64 और E. coli 5 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज हुआ। वाटर कूलर का पानी मरीजों और उनके परिजन पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाती है।

    चाचा नेहरू अस्पताल में भी पानी के अलग अलग स्रोतों में बैक्टीरिया पाए गए। अस्पताल की बिल्डिंग में स्थित बोरवेल के पानी में Coliform 10 और E. coli 4 मिला। मुख्य गेट के पास स्थित RO यूनिट के पानी में Coliform 26 और E. coli 16 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज किया गया। इससे साफ है कि केवल बोरवेल ही नहीं बल्कि कुछ RO यूनिट के पानी के सैंपल भी जांच में मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

    एमवाय अस्पताल के पास लिए गए बोरवेल के पानी के सैंपल में भी Coliform 9 और E. coli 7 MPN प्रति 100 एमएल पाया गया। हालांकि नर्मदा बल्क कनेक्शन और छठी मंजिल के टैप से लिए गए पानी के सैंपल में इन बैक्टीरिया की मात्रा नहीं मिली। मानसिक अस्पताल बाणगंगा के बोरिंग के पानी में भी Coliform पाया गया जबकि वहां के कुछ RO सैंपल में भी बैक्टीरिया की मौजूदगी दर्ज हुई।

    विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पहुंचने पर दस्त पेट दर्द उल्टी मरोड़ और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ज्यादा संक्रमण या पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन सकती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ऐसी समस्या अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है क्योंकि वे पहले से ही किसी बीमारी का इलाज करा रहे होते हैं।

    जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब अस्पतालों में पानी के स्रोतों की सफाई और गुणवत्ता सुधारने की जरूरत पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। खासतौर पर जिन स्थानों के सैंपल में E. coli और Coliform मिले हैं वहां पानी के स्रोतों की दोबारा जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • इंदौर में निगम ड्राइवर ने जहर पीने से पहले बनाया VIDEO बोला पैसों के लिए चार लोग कर रहे परेशान अस्पताल में भर्ती

    इंदौर में निगम ड्राइवर ने जहर पीने से पहले बनाया VIDEO बोला पैसों के लिए चार लोग कर रहे परेशान अस्पताल में भर्ती



    इंदौर । इंदौर में नगर निगम के एक ड्राइवर ने शनिवार को जहर पीकर जान देने की कोशिश की। घटना से पहले उसने एक वीडियो बनाया जिसमें उसने उधारी और ब्याज के पैसों को लेकर चार लोगों पर परेशान करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया है। जहर पीने के बाद हालत बिगड़ने पर परिजन धर्मेंद्र धारू को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उनका इलाज चल रहा है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संयोगितागंज पुलिस ने वीडियो और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

    धर्मेंद्र धारू पिछले करीब 10 साल से इंदौर नगर निगम में ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं। जहर पीने से पहले बनाए गए वीडियो में उन्होंने पैसों की मांग किए जाने और लगातार परेशान किए जाने की बात कही है। वीडियो में धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की ओर से उनसे उधारी और ब्याज की रकम को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दिनों से उन्हें गाड़ी नहीं दी जा रही थी और उन्हें गाड़ी से हटा दिया गया था।

    धर्मेंद्र ने अपने वीडियो में चार लोगों के नाम भी लिए हैं। उन्होंने दुर्गेश शुक्ला योगेश राठौर सहायक सीएस भंवर धावरे और बंटी नाम के व्यक्ति को जिम्मेदार बताया है। बंटी के बारे में उन्होंने कहा कि वह साहब का ड्राइवर है। वीडियो में धर्मेंद्र ने दावा किया कि इन लोगों की ओर से पैसों की मांग की जा रही थी और इसी दबाव के चलते वह यह कदम उठा रहे हैं।

    वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। प्रारंभिक जानकारी में मामला उधारी और ब्याज की रकम से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि धर्मेंद्र की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पैसों के लेनदेन की वास्तविक स्थिति क्या थी और निगम में गाड़ी नहीं दिए जाने का इस पूरे विवाद से क्या संबंध था। इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।

    जहर पीने के बाद धर्मेंद्र की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया है।

    संयोगितागंज पुलिस वायरल वीडियो की जांच कर रही है। पुलिस धर्मेंद्र के होश में आने और बयान दर्ज होने के बाद घटना से जुड़े तथ्यों को और स्पष्ट करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पैसों के विवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी और वीडियो में जिन चार लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी इस मामले में क्या भूमिका है। पुलिस वीडियो के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयान भी देखेगी।

    फिलहाल धर्मेंद्र का अस्पताल में इलाज जारी है और पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। इस मामले में धर्मेंद्र के बयान और जांच के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

  • ग्वालियर में ट्रैफिक पर सख्ती, 315 चालान कटे, फर्जी नंबर प्लेट और मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई

    ग्वालियर में ट्रैफिक पर सख्ती, 315 चालान कटे, फर्जी नंबर प्लेट और मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर में शुक्रवार रात पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ दो घंटे का विशेष चेकिंग अभियान चलाया। शहर के अलग अलग इलाकों में एक साथ हुई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 315 वाहनों के चालान काटे और करीब 1 लाख 45 हजार रुपए का जुर्माना वसूला। लगातार नियम तोड़ने वाले 61 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने के लिए यातायात पुलिस ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ को पत्र भेजने की तैयारी की है। चेकिंग के दौरान कुछ वाहन चालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए पूर्व विधायक और पुलिसकर्मियों से सिफारिश भी लगवाई लेकिन अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रखी।

    अभियान के दौरान मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट भी पुलिस की नजर में आई। एक युवक को जब पुलिस ने रोका तो उसने कार्रवाई से बचने के लिए पूर्व विधायक को फोन किया। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यातायात नियम तोड़ने पर निर्धारित कार्रवाई होगी और जुर्माना भरना पड़ेगा। कुछ अन्य वाहन चालकों ने अपने पुलिसकर्मी रिश्तेदारों के जरिए भी सिफारिश कराने का प्रयास किया लेकिन चेकिंग टीम ने किसी तरह की रियायत नहीं दी।

    तानसेन तिराहे पर चेकिंग के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध मोटरसाइकिल मिली। एएसआई सुदेश भिलावी और आरक्षक राजवीर ने बाइक को रोककर प्राथमिक जांच की तो उसके चोरी की होने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब बाइक से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारी का सत्यापन कर रही है। कानूनी कार्रवाई के लिए मोटरसाइकिल को पड़ाव थाना भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद चेकिंग अभियान में केवल यातायात उल्लंघन ही नहीं बल्कि संदिग्ध वाहनों की जांच पर भी पुलिस का फोकस सामने आया।

    यातायात पुलिस ने एक ऐसी कार को भी पकड़ा जिसके चारों शीशों पर काली फिल्म लगी हुई थी। जांच के दौरान कार की आगे की नंबर प्लेट गायब मिली जबकि पीछे की नंबर प्लेट पर जानबूझकर टेप चिपकाया गया था। पुलिस ने कार को जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी। इसके अलावा तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगी बुलेट मोटरसाइकिलों पर भी कार्रवाई की गई।

    पुलिस के मुताबिक बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहनों की जांच केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है बल्कि अपराध की रोकथाम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। चोरी और लूट जैसी घटनाओं में अपराधी पहचान छिपाने के लिए बिना नंबर प्लेट या बदली हुई नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे वाहनों की जांच से पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और चोरी के वाहनों को ट्रेस करने में मदद मिलती है।

    वहीं कार के शीशों पर काली फिल्म के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस ने सख्ती दिखाई। ऐसे वाहनों में अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं देतीं जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। पुलिस का कहना है कि नियमों के अनुरूप वाहन चलाने से सड़क सुरक्षा बेहतर होती है और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना भी आसान होता है।

    ग्वालियर पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें। पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि आगे भी इस तरह के चेकिंग अभियान जारी रह सकते हैं और बार बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • पूर्व नेता का नया भेष देख पुलिस भी हैरान, भंते बनकर मठ में रहा, विदेश यात्रा के बाद गिरफ्तारी

    पूर्व नेता का नया भेष देख पुलिस भी हैरान, भंते बनकर मठ में रहा, विदेश यात्रा के बाद गिरफ्तारी


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश में सामने आए फर्जी पासपोर्ट कांड की जांच के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ को एक और अहम सुराग मिला है। शुक्रवार रात एसटीएफ ने भिंड निवासी राहुल प्रकाश उर्फ नृत्या भंते को रायसेन से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। राहुल प्रकाश बहुजन संघर्ष दल का पूर्व प्रदेश महासचिव बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपनी पहचान छिपाकर भोपाल के गोविंदपुरा स्थित एक बौद्ध मठ में भंते के रूप में रहते हुए नए पते के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था। इसी पासपोर्ट से उसके थाईलैंड और म्यांमार जाने की बात जांच में सामने आई है। हालांकि फिलहाल एसटीएफ की ओर से राहुल प्रकाश की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    पूछताछ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक राहुल प्रकाश मूल रूप से भिंड जिले के एक गांव का रहने वाला है। वह दलित समाज की राजनीति में सक्रिय था और बहुजन संघर्ष दल से जुड़कर प्रदेश स्तर पर संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुका है। बताया जा रहा है कि वह भविष्य में चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था। इसी दौरान करीब साढ़े तीन साल पहले उसने अपनी पहचान छिपाकर भोपाल के एक बौद्ध विहार में भंते के रूप में रहना शुरू किया।

    जांच के अनुसार वर्ष 2025 की शुरुआत में राहुल प्रकाश ने नए पते का इस्तेमाल करते हुए पासपोर्ट बनवाया। आरोप है कि पासपोर्ट के लिए दिए गए पते और पहचान से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी की गई थी। पासपोर्ट बनने के बाद उसने विदेश यात्रा भी की। एसटीएफ को उसके इसी पासपोर्ट से थाईलैंड और म्यांमार जाने के संबंध में जानकारी मिली है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उसने नेता से भंते बनने का फैसला क्यों किया और पासपोर्ट तैयार कराने में उसकी मदद किसने की।

    एसटीएफ इस पूरे मामले में कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। राहुल प्रकाश से उसके फर्जी पते पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया विदेश यात्राओं और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वह किसी ऐसे नेटवर्क के संपर्क में था जो दूसरे लोगों के लिए भी इसी तरह फर्जी दस्तावेज तैयार कराता था।

    जांच में अब तक मध्य प्रदेश के सात जिलों में 75 से अधिक फर्जी पासपोर्ट सामने आने की जानकारी दी गई है। इन पासपोर्ट के जरिए 100 से ज्यादा विदेश यात्राओं के सबूत मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में भी इसी तरह के फर्जी पासपोर्ट तैयार किए जाने के संकेत जांच एजेंसी को मिले हैं। एसटीएफ को इस मामले में आठ भंतों की तलाश होने की जानकारी भी सामने आई है।

    अब राहुल प्रकाश से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने में कौन लोग शामिल थे और इन दस्तावेजों का इस्तेमाल विदेश यात्रा के लिए किस तरह किया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।

  • राशन कार्ड में नाम जुड़वाने गई महिला, सरकारी रिकॉर्ड में निकली मृत, पति लगा रहा दफ्तरों के चक्कर

    राशन कार्ड में नाम जुड़वाने गई महिला, सरकारी रिकॉर्ड में निकली मृत, पति लगा रहा दफ्तरों के चक्कर


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की बैराड़ तहसील के जरियाकला गांव में सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी एक ऐसी गलती सामने आई है जिसने एक परिवार की परेशानी बढ़ा दी है। यहां जीवित महिला शुक्रवती जाटव को पंचायत के रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया। मामला तब सामने आया जब उसके पति भारत जाटव ने पत्नी का नाम अपने परिवार के राशन कार्ड में जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में शुक्रवती को मृत घोषित किया जा चुका है। इसके बाद पति पत्नी अपनी पहचान और दस्तावेजों को दुरुस्त कराने के लिए अलग अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

    भारत जाटव जरियाकला गांव के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि करीब पांच साल पहले उनकी शादी दुल्हारा गांव की रहने वाली शुक्रवती जाटव से हुई थी। शादी के बाद कुछ समय तक शुक्रवती का नाम मायके के राशन कार्ड में दर्ज रहा और इसी आधार पर उन्हें खाद्यान्न मिलता रहा। शादी के बाद जब भारत ने पत्नी का नाम अपने परिवार के राशन कार्ड में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू की तो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी ने पूरे परिवार को हैरान कर दिया।

    दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि शुक्रवती का नाम रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति के तौर पर दर्ज है। भारत के मुताबिक समग्र आईडी और खाद्यान्न पर्ची को जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान उनकी पत्नी का नाम रिकॉर्ड से हटाया गया था। इसी प्रक्रिया में गलती से उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। इसके बाद समग्र आईडी और आधार से संबंधित रिकॉर्ड में भी दिक्कत सामने आने लगी।

    भारत का कहना है कि पत्नी पूरी तरह जीवित है और उसके साथ रह रही है लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण राशन कार्ड में उसका नाम नहीं जुड़ पा रहा है। परिवार को सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या ठीक कराने के लिए भारत बैराड़ तहसील जनपद पंचायत और थाने तक के चक्कर लगा चुके हैं। इसके बावजूद वह स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं।

    इस मामले में दुल्हारा पंचायत के सचिव मलखान सिंह बघेल ने रिकॉर्ड में हुई गलती को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि समग्र आईडी और खाद्यान्न पर्ची को जोड़ने के अभियान के दौरान गांव से बाहर रहने वाले लोगों मृत व्यक्तियों और शादी के बाद दूसरे स्थान पर चली गई महिलाओं के नाम हटाए जा रहे थे। इसी प्रक्रिया में शुक्रवती का नाम हटाते समय गलती से उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया।

    सचिव के मुताबिक करीब एक महीने पहले इस गलती की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद शुक्रवती की आईडी रिकवर कर ली गई है। अब जरियाकला पंचायत में उनके पति के परिवार के राशन कार्ड में नाम जोड़ने की प्रक्रिया बाकी है। परिवार को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी दस्तावेजों में हुई गलती पूरी तरह ठीक हो जाएगी और शुक्रवती को राशन कार्ड समेत अन्य जरूरी सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • MP के श्रमिकों के लिए बड़ा अपडेट, रोजाना 6 रुपए बढ़ा वेतन, मार्च 2027 तक फायदा

    MP के श्रमिकों के लिए बड़ा अपडेट, रोजाना 6 रुपए बढ़ा वेतन, मार्च 2027 तक फायदा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले करीब 50 लाख श्रमिकों के लिए नई वेतन दरें लागू कर दी गई हैं। श्रम विभाग के आदेश के मुताबिक एक अक्टूबर 2026 से श्रमिकों को परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के रूप में रोजाना 6 रुपए की बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। नई न्यूनतम वेतन दरें 27 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी। इस फैसले का लाभ प्रदेश के सरकारी विभागों में काम करने वाले करीब 10 लाख और निजी क्षेत्र तथा उद्योगों से जुड़े करीब 40 लाख श्रमिकों को मिलने की बात कही गई है।

    श्रम विभाग ने महंगाई सूचकांक के आधार पर न्यूनतम वेतन दरों में संशोधन किया है। श्रमायुक्त शीतला पटले की ओर से जारी आदेश में अलग अलग नियोजन में काम करने वाले श्रमिकों के लिए दैनिक श्रम के आधार पर नई दरें तय की गई हैं। सामान्य नियोजन की 67 श्रेणियों में आने वाले श्रमिकों का वेतन 26 कार्य दिवस के आधार पर निर्धारित किया गया है। इसके तहत अकुशल श्रमिक को 12575 रुपए प्रतिमाह अर्द्धकुशल श्रमिक को 13571 रुपए कुशल श्रमिक को 15294 रुपए और उच्च कुशल श्रमिक को 16919 रुपए मासिक न्यूनतम वेतन मिलेगा।

    इस बदलाव में परिवर्तनशील महंगाई भत्ता भी शामिल है। इसका उद्देश्य महंगाई के असर के बीच श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में समय समय पर बदलाव करना है। अलग अलग श्रेणियों और काम के आधार पर दैनिक वेतन दरें निर्धारित की गई हैं। इससे उद्योगों सरकारी विभागों और अन्य नियोजनों में न्यूनतम वेतन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के भुगतान में बदलाव होगा।

    मुद्रणालय यानी प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं। लिपिकीय वर्ग में अकुशल श्रमिक के लिए 484 रुपए प्रतिदिन जबकि अलग अलग श्रेणियों में 522 रुपए से लेकर 651 रुपए प्रतिदिन तक की दरें तय की गई हैं। अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए श्रेणी के हिसाब से 522 रुपए और 588 रुपए प्रतिदिन की दर लागू होगी। उच्च कुशल श्रमिकों के लिए भी अलग अलग श्रेणी के अनुसार भुगतान तय किया गया है।

    कृषि और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी संशोधित न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू होगी। अगरबत्ती बनाने वाले श्रमिकों के लिए भी अलग दरें निर्धारित की गई हैं। अगरबत्ती रोलिंग में एक हजार अगरबत्ती तैयार करने पर कुल 74.75 रुपए और सुगंधित स्टिक के लिए कुल 75 रुपए की दर निर्धारित की गई है।

    मध्य प्रदेश में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में यह इस साल का दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम वेतन दरें लागू की गई थीं। उस समय परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के कारण श्रमिकों के वेतन में औसतन 9 रुपए प्रतिदिन यानी करीब 234 रुपए मासिक की बढ़ोतरी हुई थी। उस वृद्धि का लाभ भी सरकारी विभागों के करीब 10 लाख और निजी क्षेत्र तथा उद्योगों में काम करने वाले लगभग 40 लाख श्रमिकों को मिला था। अब अक्टूबर से लागू नई दरों के बाद श्रमिकों के भुगतान में एक बार फिर संशोधन किया गया है।