Category: Madhya Pradesh

  • मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में

    मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में


    भोपाल । स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी एक छोटी-सी आदत स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। खासकर टॉयलेट में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल स्क्रॉल करना अब सिर्फ समय बिताने की आदत नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनता जा रहा है। भोपाल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के अनुसार लगातार लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और बार-बार जोर लगाने से ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम (ODS) जैसी गंभीर समस्या विकसित हो सकती है। यही वजह है कि अब कब्ज के साथ-साथ पाइल्स, फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं।

    डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि हाल ही में उनके पास 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पहुंचे, जो करीब 35 वर्षों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। लगभग 20 साल तक उनका इलाज आईबीएस-सी (IBS-C) मानकर किया जाता रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। जब विशेष जांच और एनोरेक्टल मैनोमेट्री की गई तो पता चला कि असली समस्या ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम थी। बायोफीडबैक थेरेपी के आठ सत्रों के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां उन्हें शौचालय में लगभग एक घंटा लग जाता था, वहीं अब यह समय घटकर करीब पांच मिनट रह गया और कब्ज की दवाओं की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो गई।

    ऐसा ही एक अन्य मामला 40 वर्षीय महिला का सामने आया, जो दस वर्षों से कब्ज से जूझ रही थीं। लगातार जोर लगाने की आदत के कारण उनके मलाशय का हिस्सा बाहर आने लगा। जांच में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी और ODS की पुष्टि हुई। समय पर बायोफीडबैक थेरेपी मिलने से बिना सर्जरी ही उनकी स्थिति में 90 से 95 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मोबाइल फोन नहीं, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने की आदत है। पहले लोग शौचालय में अखबार पढ़ते थे, अब उसकी जगह मोबाइल ने ले ली है। जब व्यक्ति स्क्रीन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर लेता है तो मस्तिष्क और आंत के बीच का प्राकृतिक समन्वय प्रभावित होने लगता है। इससे मलत्याग का सामान्य रिफ्लेक्स कमजोर पड़ता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है।

    डॉ. रघुवंशी के अनुसार पहले कब्ज को मुख्य रूप से 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में कब्ज की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं। उनके क्लीनिकल अनुभव के मुताबिक पिछले दस वर्षों में कब्ज के मरीजों की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कब्ज के हर दस मरीजों में से तीन से चार ऐसे मिलते हैं, जो टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत स्वीकार करते हैं। हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह उनके चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है और इस विषय पर व्यापक भारतीय वैज्ञानिक अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    विशेषज्ञ स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सलाद शामिल करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें और रोज सुबह एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत विकसित करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टॉयलेट में अनावश्यक समय बिताने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

  • कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू

    कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू


    भोपाल । भोपाल के लोगों के लिए जुलाई का आखिरी सप्ताह हंसी और मनोरंजन से भरपूर होने वाला है। देश के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन रवि गुप्ता अपने चर्चित इंडिया टूर ‘कल की चिंता नहीं करता’ के तहत 26 जुलाई को राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका लाइव कॉमेडी शो शहर के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां वे अपने खास ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर और दमदार कॉमिक अंदाज से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करेंगे। शो को लेकर कॉमेडी प्रेमियों में उत्साह देखने को मिल रहा है और टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।

    पिछले कुछ वर्षों में रवि गुप्ता ने भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, पारिवारिक रिश्तों, छोटे शहरों की संस्कृति, कॉर्पोरेट लाइफ, सामाजिक व्यवहार और आम आदमी की परेशानियों को बेहद सहज और मजेदार अंदाज में मंच पर पेश करते हैं। उनकी कॉमेडी में न तो बनावटीपन होता है और न ही अनावश्यक शोर, बल्कि साधारण बातों को असाधारण तरीके से प्रस्तुत करने की उनकी कला ही उन्हें दर्शकों का पसंदीदा बनाती है।

    सोशल मीडिया पर भी रवि गुप्ता की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उनके स्टैंड-अप वीडियो करोड़ों बार देखे जा चुके हैं और यूट्यूब सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित उनके लाइव शो अक्सर हाउसफुल रहते हैं। अब भोपाल के दर्शकों को भी उन्हें मंच पर लाइव देखने का मौका मिलेगा।

    ‘कल की चिंता नहीं करता’ शो में रवि गुप्ता अपनी नई और चर्चित कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे। उनकी शानदार टाइमिंग, सहज संवाद शैली और दर्शकों से जुड़ने का अंदाज हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। युवा वर्ग के साथ-साथ परिवार भी उनकी कॉमेडी का भरपूर आनंद लेते हैं। यही कारण है कि उनके शो में हर आयु वर्ग के दर्शकों की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिलती है।

    आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम 26 जुलाई को रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य प्रायोजक मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी हैं, जबकि सेज ग्रुप और ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पावर्ड बाय पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं। शो का आर्टिस्ट मैनेजमेंट ओरियल एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है।

    शो के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुक माय शो पर शुरू हो चुकी है। आयोजकों का कहना है कि सीटों की संख्या सीमित है और रवि गुप्ता के बढ़ते क्रेज को देखते हुए टिकटें तेजी से बुक हो रही हैं। ऐसे में जो लोग इस लाइव कॉमेडी अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें समय रहते अपनी सीट सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।

    अगर आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ और तनाव से कुछ देर की राहत चाहते हैं, तो 26 जुलाई की शाम रविंद्र भवन में आयोजित यह स्टैंड-अप कॉमेडी शो आपके लिए यादगार अनुभव साबित हो सकता है। हंसी, मनोरंजन और बेहतरीन कॉमिक अंदाज से भरपूर यह शाम भोपाल के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए तैयार है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मध्य प्रदेश। झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों से ऑनलाइन संवाद करते हुए कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष” के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से हुई थी और आगामी दिनों में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगौन, बुरहानपुर तथा खंडवा सहित कई जिलों में भी महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इसे किसानों को नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और विशेषज्ञों की सलाह से जोड़ने का महत्वपूर्ण अभियान बताया।

    डॉ. यादव ने मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताए जाने का उल्लेख करते हुए प्रशासन को किसानों की हरसंभव सहायता के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन देने और डेयरी विकास योजनाओं में 40 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के प्राकृतिक खेती अभियान के तहत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। वर्तमान में जिले में तीन हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और किसानों की फसलों का प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत झाबुआ के कड़कनाथ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास जारी हैं। वर्ष 2025 के दौरान कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राहियों को जोड़ा गया। साथ ही पशुपालन, बकरी पालन, डेयरी और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में मत्स्य पालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 760 से अधिक तालाबों में लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। वहीं खरीफ-2026 सीजन में कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क के विकसित होने से झाबुआ के कपास उत्पादकों को खेत से उद्योग तक बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

    झाबुआ के टमाटर उत्पादन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है। यहां स्थापित प्रसंस्करण इकाई में टमाटर सॉस, केचअप और डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी आपूर्ति देश के कई राज्यों में की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूरी होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब 50 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बलराम कृषि महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, हितग्राहियों को लाभ वितरण और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के माध्यम से खेती को अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

  • ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश

    ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश


    मध्य प्रदेश।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्री परिषद की बैठक के लिए एक अलग और संदेशात्मक पहल करते हुए मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इलेक्ट्रिक बस से जगदीशपुर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अपना शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर ही छोड़ दिया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्य भी अपने व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग किए बिना सामूहिक रूप से ई-बसों में बैठक स्थल पहुंचे। इस पहल को शासन में सादगी, मितव्ययिता और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री निवास से सुबह निर्धारित समय पर तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और उनका स्टाफ बैठक के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान किसी भी मंत्री के व्यक्तिगत वाहन, पायलट वाहन या फॉलो वाहन का उपयोग नहीं किया गया। सरकार का उद्देश्य यह संदेश देना था कि शासकीय कार्यों में आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए।

    मंत्री परिषद की बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल में भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने अपने वाहनों को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में ही पार्क किया और वहां से इलेक्ट्रिक बसों के जरिए सामूहिक रूप से जगदीशपुर पहुंचे। शासन स्तर पर इस सामूहिक व्यवस्था को प्रशासनिक सादगी और बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर सहित कई स्थानों पर ई-बसों पर पुष्पवर्षा की गई। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। जगदीशपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और जनप्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन किया।

    बैठक स्थल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर दुर्ग में आयोजित धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जनजातीय कलाकारों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, राष्ट्रभक्तों, ऐतिहासिक शासकों तथा सुशासन और शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के चित्र और विरासत को प्रदर्शित किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से लोगों को जोड़ना बताया गया।

    राज्य सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में पर्यावरण अनुकूल साधनों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न केवल ईंधन की बचत में सहायक है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में भी प्रभावी कदम माना जाता है। मुख्यमंत्री की यह पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें शासन व्यवस्था को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और संसाधन-संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मंत्री परिषद की बैठक के लिए अपनाई गई यह व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली का सार्वजनिक संदेश भी मानी जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि शासकीय स्तर पर सादगी, सामूहिकता और संसाधनों के संतुलित उपयोग की संस्कृति विकसित होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ समाज में भी देखने को मिल सकता है।

  • राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल

    राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल


    भोपाल । भोपाल शहर में स्वच्छ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार से राजधानी की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू हो गया। बैरागढ़ स्थित डिपो से निकलीं ई-बसें शहर के तीन प्रमुख रूटों पर दौड़ती नजर आईं। फिलहाल यह पांच दिनों का ड्राय रन है, जिसमें यात्रियों को सफर करने की अनुमति नहीं होगी। यदि सभी तकनीकी और संचालन संबंधी परीक्षण सफल रहते हैं तो अगस्त से ये बसें आम लोगों के लिए नियमित रूप से संचालित की जाएंगी।

    रविवार को जगदीशपुर में आयोजित प्रदेश कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन्हीं इलेक्ट्रिक बसों में सफर कर नई व्यवस्था का अनुभव लिया था। इसके बाद सोमवार से ट्रायल रन की औपचारिक शुरुआत कर दी गई।

    ड्राय रन के दौरान बसों के संचालन, चार्जिंग सिस्टम, रूट की व्यवहारिकता, यातायात की स्थिति और तकनीकी प्रदर्शन का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमित संचालन शुरू होने पर यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान बसों का संचालन दो शिफ्टों में किया जा रहा है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित की गई है।

    ई-बसों का संचालन बैरागढ़ डिपो से शुरू होकर पुराने भोपाल, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-1 और कोलार के बैरागढ़-चीचली मार्ग तक किया जा रहा है। इन रूटों पर ट्रैफिक दबाव, बसों की आवाजाही और चार्जिंग क्षमता का आकलन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को भी बसों में बैठाकर फीडबैक लिया जाएगा, ताकि नियमित सेवा शुरू होने से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें।

    भोपाल नगर निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक शहर में 21 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई बसें आने की उम्मीद है। इसके बाद राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और मजबूत होगा तथा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

    बसों के संचालन को ध्यान में रखते हुए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया है। यहां 11 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं, ताकि बसों की नियमित चार्जिंग बिना किसी बाधा के हो सके। भविष्य में बसों की संख्या बढ़ने पर चार्जिंग सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में प्रदूषण कम करने, ईंधन की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक और कम शोर वाली परिवहन सुविधा मिलेगी। यदि ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है तो अगस्त से भोपालवासियों को राजधानी की सड़कों पर नई और पर्यावरण अनुकूल ई-बसों में सफर करने का अवसर मिलेगा।

  • विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसके साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम पूरी तरह विधानसभा और उससे जुड़ी बैठकों पर केंद्रित रहा। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की तैयारी है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विभिन्न विधायी कार्यों और चर्चा के एजेंडे पर विचार किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए, जहां पहले दिन की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रही।

    इस मॉनसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक को माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी कर चुकी है। यदि विधेयक पेश होता है तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण विधायी पहल के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

    मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम में दोपहर के समय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से मुलाकात का समय भी निर्धारित रहा। इसके बाद समिति कक्ष में गुरु पूर्णिमा महोत्सव से संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के निवास लौटने का कार्यक्रम तय रहा। शाम को समत्व भवन में विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी सदन की रणनीति और विभिन्न विधायी विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना प्रस्तावित है।

    विधानसभा का यह मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार विकास योजनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और नई नीतियों को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष राज्य से जुड़े अनेक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है।

    सत्र के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के मुआवजे, उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, नीट यूजी परीक्षा से संबंधित विवाद, सीबीएसई परीक्षा में कथित अनियमितताओं सहित कई अन्य विषयों के सदन में उठने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं का पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास करेगा।

    राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य सरकार की कई नीतियों और निर्णयों की परीक्षा भी होगी। सत्ता पक्ष जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की नजर बनी रहेगी।

  • बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट रुख सामने रख दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके इस जवाब के बाद पिछले कुछ महीनों से जारी अटकलों और राजनीतिक बहस पर फिलहाल विराम लग गया है।

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उस समय चर्चा में आया था, जब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजा गया था। प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिले और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।

    विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने इस विषय पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि क्या शासन ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है तो नया नाम क्या होगा और लगभग तीन दशक से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।

    विधायक ने अपने प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया कि डॉ. बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देती है और यदि ऐसा है तो उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना किस आधार पर उचित माना जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय का नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। डॉ. बरकतउल्ला भोपाली से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने के लिए उसे संचालित करने वाले अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक होता है, जो विधेयक के माध्यम से किया जाता है। अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी निर्धारित अभिलेखों में उपलब्ध है।

    सरकार के इस आधिकारिक जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई सरकारी योजना नहीं है। इससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगने की संभावना है। हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विमर्श भविष्य में भी जारी रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में सरकार के स्पष्ट बयान ने इस विषय पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।

  • मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को राजनीतिक गर्माहट के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस विधायक दल ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। खाद की कमी, सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं और किसानों को समय पर उचित मुआवजा नहीं मिलने के आरोपों के साथ विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरते हुए इन मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री के मुखौटे पहनकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रही है और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

    कांग्रेस विधायकों का कहना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं और उन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। साथ ही फसलों के उचित दाम, मुआवजे के भुगतान और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर भी किसानों में असंतोष है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह इन सभी मुद्दों को विधानसभा के भीतर मजबूती से उठाएगी और जरूरत पड़ने पर सदन के बाहर भी आंदोलन जारी रखेगी।

    विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की परेशानी के अलावा बेरोजगारी, युवाओं को रोजगार, अतिथि शिक्षकों की मांगें, पिछड़ा वर्ग से जुड़े विषय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष का कहना है कि राज्य के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ सदन में रखा जाएगा।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि केन-बेतवा परियोजना, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय और अन्य जनहित के मामलों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। विपक्ष का मानना है कि प्रदेश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिन पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विधायक दल ने सत्र के दौरान समन्वित रणनीति अपनाने का फैसला किया है।

    वहीं, विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर किसानों, कृषि, रोजगार, शिक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और लंबित मुआवजे के मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर सदन के भीतर क्या जवाब देती है और किसानों से जुड़े मुद्दों पर कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।

  • एमपी में आज दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट, 47 जिलों में हो सकती है हल्की बूंदाबांदी

    एमपी में आज दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट, 47 जिलों में हो सकती है हल्की बूंदाबांदी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में 23 जुलाई तक हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 4 से 5 जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने सोमवार को दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि भोपाल और इंदौर सहित 47 जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

    मौसम केंद्र भोपाल (IMD) के अनुसार, जुलाई में पिछले 12 दिनों से प्रदेश में व्यापक स्तर पर भारी बारिश नहीं हुई है। इसका असर प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    अब तक प्रदेश में 261.4 मिमी (10.3 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 311.8 मिमी (12.3 इंच) होनी चाहिए थी। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में भी वर्षा 10 प्रतिशत कम रही है।

    इन जिलों में बारिश का अलर्ट

    दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक, तेज हवा के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आगर-मालवा में बादल छाए रहने का अनुमान है, हालांकि इन जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 16 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

  • जौरा में दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट, पिता-पुत्री से लाखों के सोने के जेवर और नकदी लूटी

    जौरा में दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट, पिता-पुत्री से लाखों के सोने के जेवर और नकदी लूटी



    मुरैना। जिले के जौरा थाना क्षेत्र में शनिवार दोपहर दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई। पिता के साथ बाइक से घर लौट रही विवाहिता पुत्री को तीन अज्ञात बदमाशों ने रास्ते में रोककर सोने के जेवर, मोबाइल फोन और नकदी लूट ली। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

    जानकारी के अनुसार, धनेला निवासी राकेश सिंह गुर्जर शनिवार दोपहर करीब 1रू30 बजे अपनी विवाहिता पुत्री प्रवेश गुर्जर को चाचूल गांव से बाइक पर बैठाकर धनेला लौट रहे थे। जब वे पगारा रोड पर पुलिस चौकी से कुछ आगे पहुंचे, तभी एक बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवक उनके बराबर आ गए। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने चलते-चलते राकेश गुर्जर की बाइक की चाबी निकाल ली, जिससे उनकी बाइक बंद हो गई। इसके बाद दो बदमाश, जिन्होंने कपड़े से अपने चेहरे ढके हुए थे, बाइक से उतरे और पिता-पुत्री पर देशी कट्टा तान दिया। हथियार के बल पर दोनों को धमकाते हुए बदमाशों ने उनके पास मौजूद कीमती सामान लूट लिया।

    सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
    घटना के तुरंत बाद पीडि़त राकेश गुर्जर ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और मौके का निरीक्षण किया। आसपास के क्षेत्र में बदमाशों की तलाश भी की गई, लेकिन देर शाम तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका।

    अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मामला दर्ज
    पुलिस ने फरियादी की शिकायत के आधार पर तीन अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध लूट का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ संभावित मार्गों पर जांच कर रही है। बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

    दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत
    दिनदहाड़े हथियार के बल पर हुई इस लूट की घटना से पगारा रोड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

    ये सामान लूटकर फरार हुए बदमाश
    लुटेरे विवाहिता से सोने के आभूषण उतरवाकर ले गए, जिनमें सोने की 4 चूडि़यां,2 सोने की अंगूठियां,1 बड़ा मंगलसूत्र, 5 पुताई वाला एक मंगलसूत्र, कान का एक झाला व इसके अलावा बदमाश राकेश गुर्जर का मोबाइल फोन तथा 5,000 रूपए नकद भी लूटकर मौके से फरार हो गए।