Category: Madhya Pradesh

  • GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा

    GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा


    इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के दौरान गंभीर रूप से बीमार हुईं 67 वर्षीय पार्वती कोंडला की बुधवार रात मौत हो गई। पार्वती करीब 72 दिन तक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रही थीं। उन्हें गिलियन बैरे सिंड्रोम यानी GBS की पुष्टि हुई थी। इलाज के दौरान उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना महज 3 से 4 फीसदी बताई थी। इसके बावजूद लंबे इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया और मार्च में उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया था। हालांकि अब उनकी मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई और इसका भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना से सीधा संबंध है या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    पार्वती के बेटे नीलेश के मुताबिक उनकी मां की तबीयत अगस्त में दोबारा बिगड़ने लगी थी। इसके बाद 17 अगस्त से उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार लगातार उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद कर रहा था लेकिन बुधवार रात उनकी मौत हो गई। इससे परिवार को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कुछ महीने पहले ही पार्वती ने बेहद गंभीर स्थिति से बाहर निकलकर जिंदगी की जंग जीती थी।

    पार्वती की तबीयत दिसंबर 2025 में उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद बिगड़ी थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन हालत गंभीर होने पर अलग अलग अस्पतालों में इलाज के बाद बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। जांच में GBS की पुष्टि हुई। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है और गंभीर मामलों में मरीज के लिए चलना फिरना और सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।

    पार्वती की हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें 16 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था जबकि 22 दिन ICU में इलाज चला। फेफड़ों की स्थिति खराब होने पर ट्रेकोस्टोमी भी की गई थी। वे करीब 18 दिन तक बेहोश रहीं। लंबे इलाज के बाद मार्च में उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार शुरू हुआ। वे परिजनों को पहचानने लगी थीं और जवाब देने का प्रयास भी करने लगी थीं। 9 मार्च को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।

    घर लौटने के बाद भी पार्वती की पूरी तरह रिकवरी के लिए लगातार देखभाल की जरूरत थी। परिवार उन्हें नली के जरिए दिन में कई बार लिक्विड डाइट और प्रोटीन देता था। फिजियोथेरेपी और दवाओं के साथ उनकी देखभाल जारी थी। परिजनों के अनुसार घर पर इलाज और देखभाल में हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे।

    भागीरथपुरा दूषित पानी मामले के दौरान पार्वती के इलाज पर शासन स्तर से भी नजर रखी गई थी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पताल पहुंचकर उनकी तबीयत की जानकारी ली थी। परिवार के अनुसार उस समय करीब 19.50 लाख रुपए के इलाज का खर्च शासन की ओर से उठाने का आश्वासन दिया गया था। अब पार्वती की मौत के बाद उनके परिवार के सामने एक बार फिर इलाज और देखभाल से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि उनकी मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसका पहले हुई बीमारी या भागीरथपुरा की दूषित पानी की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

  • इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत

    इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत


    इंदौर। शहर में बीती रात हुई दो अलग अलग घटनाओं में दो युवकों की मौत हो गई। आजाद नगर इलाके में 35 वर्षीय युवक घर के बाहर बने कमरे में फंदे पर मिला। वहीं तेजाजी नगर क्षेत्र में तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एक मामले में पुलिस युवक के इस कदम के पीछे की वजह पता कर रही है जबकि दूसरे मामले में दुर्घटना के बाद मौके से भागे कार सवारों की तलाश की जा रही है।

    आजाद नगर थाना पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान मनोज 35 वर्ष पिता मोहर सिंह ठाकुर निवासी मूसाखेड़ी के रूप में हुई है। वह गैस सिलेंडर की डिलीवरी और रिपेयरिंग का काम करता था। पुलिस के अनुसार रात करीब साढ़े 12 बजे उसने घर के बाहर वाले कमरे में फांसी लगा ली। घटना का पता उस समय चला जब उसकी पत्नी देर रात उसे देखने के लिए बाहर गई। वहां मनोज को फंदे पर लटका देखकर उसने परिजनों और पड़ोसियों को जानकारी दी।

    मनोज के भाई विनोद के अनुसार वह रात करीब 11 बजे घर से कुछ रुपए लेकर निकला था। उसने अपनी पत्नी से कुछ देर में लौटने की बात कही थी। इसके बाद वह वापस घर पहुंचा लेकिन तब तक पत्नी और बच्चे सो चुके थे। कुछ समय बाद जब पत्नी बाहर के कमरे में पहुंची तो घटना का पता चला। परिवार के मुताबिक घटना से पहले मनोज ने विदिशा में रहने वाले अपने साले से फोन पर बातचीत भी की थी। हालांकि उसके भाई ने किसी तरह के कर्ज की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस फिलहाल घटना के कारणों और उससे पहले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    दूसरी घटना तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में हुई जहां सड़क दुर्घटना में युवक दीपक मनासिया की मौत हो गई। वह कुशलगढ़ महू का रहने वाला था और खेती किसानी से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार रात करीब 12 बजे डी मार्ट के पास तेज रफ्तार कार ने दीपक की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दीपक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

    बताया गया कि हादसे के बाद कार में सवार युवक वाहन को मौके पर छोड़कर दूसरी कार से वहां से चले गए। इसी दौरान पीछे से आ रहे दीपक के दोस्तों ने उसे सड़क पर घायल हालत में देखा। दोस्तों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को कब्जे में ले लिया है और उसके चालक तथा अन्य लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

    परिजनों के मुताबिक दीपक काम के सिलसिले में चापड़ा गया था। उसके साथ कुछ दोस्त भी अलग अलग बाइक से गए थे। वह खेती का काम करता था। परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम का माहौल है।

    दोनों मामलों में पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आजाद नगर मामले में युवक के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है जबकि तेजाजी नगर हादसे में पुलिस वाहन और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटनाओं की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें

    भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें


    इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर के रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में हुई 36 मौतों की परिस्थितियों की जांच की है। रिपोर्ट में दूषित पानी से जुड़ी मौतों को लेकर अलग अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। सार्वजनिक हुई रिपोर्ट के अनुसार कई प्रशासनिक और तकनीकी कमियों को भी गंभीरता से दर्ज किया गया है।

    जांच रिपोर्ट में पुराने पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के सामने पुराने जल और सीवर नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इनमें नक्शे अलाइनमेंट प्लान इंजीनियरिंग डिजाइन वर्क ऑर्डर और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। आयोग ने इन रिकॉर्ड के गायब होने के कारणों की अलग से जांच की जरूरत भी बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुराने नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव में कमियां थीं और संवेदनशील पाइपलाइन को समय पर बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।

    सिंघार ने फाइल मूवमेंट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पाइपलाइन बदलने से जुड़ी फाइल लंबे समय तक लंबित रही। उन्होंने सवाल किया कि जरूरी काम से जुड़ी फाइल इतनी लंबी अवधि तक क्यों रुकी रही। हालांकि न्यायिक जांच की रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने का आधार केवल किसी फाइल के मेयर के पास लंबित रहने को नहीं बनाया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में एक चरण पर 10 दिन की अस्पष्ट देरी हुई थी और इस देरी के लिए कुछ अधिकारियों की भूमिका पर जिम्मेदारी तय की गई।

    आयोग ने पूर्व नगर निगम आयुक्तों में से कुछ अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त किया है जबकि तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्तों और कार्यपालन यंत्री से जुड़े स्तर पर प्रशासनिक चूक को लेकर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर की अंतिम स्वीकृति से जुड़े अधिकार संबंधित अतिरिक्त आयुक्त के स्तर पर थे। इसी आधार पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त को उस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया। यह निष्कर्ष उन राजनीतिक आरोपों से अलग है जिनमें जनप्रतिनिधियों या शीर्ष प्रशासनिक पदों की जवाबदेही का सवाल उठाया गया है।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या सामने आने के बाद पुराने पाइप नेटवर्क को बदलने का काम शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से मौतों की संख्या को लेकर अलग अलग आंकड़े सामने आए थे। फरवरी में विधानसभा में सरकार की ओर से भी मौतों के आंकड़े को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई थी जबकि विपक्ष और स्थानीय लोगों ने इससे अधिक मौतों का दावा किया था। बाद में न्यायिक जांच ने 36 मौतों के मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा की।

    जांच रिपोर्ट का व्यापक संकेत यह है कि त्रासदी को किसी एक दिन की घटना के बजाय लंबे समय से चली आ रही तकनीकी कमियों पाइपलाइन की स्थिति रखरखाव निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को राहत देने से जुड़े सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि सरकार आयोग की सिफारिशों पर किस तरह आगे बढ़ती है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलती है।

    सिंघार ने सरकार से इसी आधार पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उपलब्ध न्यायिक जांच रिपोर्ट में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय मुख्य टिप्पणियां अधिकारियों तकनीकी व्यवस्था पाइपलाइन रखरखाव और प्रक्रिया में हुई देरी से संबंधित हैं।

  • बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान

    बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान


    इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपए के बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की विशेष PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट यानी चालान दाखिल किया है। इसके बाद कोर्ट ने मामले से जुड़े 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए प्री कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है। कंपनी का मौजूदा नाम एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड बताया गया है। मामले में ED की जांच अभी जारी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत CBI भोपाल की FIR से हुई थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ उमेश शाहरा साकेत बरोडिया आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम दर्ज किए गए थे। इसके बाद ED ने बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।

    ED की जांच के अनुसार रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर किया गया।

    जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से बिल डिस्काउंट कराए गए और रकम संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंची। ED का दावा है कि इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और महज एक से तीन दिन के भीतर फिर रुचि ग्लोबल के खातों में वापस पहुंचा दिया गया। एजेंसी ने इसे बैंक से हासिल क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और रकम को लेयर करने की प्रक्रिया बताया है।

    मामले में ED ने दिसंबर 2025 में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 23 दिसंबर को PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान 23.50 लाख रुपए की कथित बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में ED ने करीब 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों के संबंध में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।

    ED के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त कथित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि संपत्ति कुर्की और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।

    CBI की FIR में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। वहीं ED की मौजूदा जांच में करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग पर फोकस है। चालान दाखिल होने के बाद अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को जारी नोटिस के आधार पर कोर्ट में आगे की कार्यवाही होगी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और लेनदेन से जुड़ी अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।

  • छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप

    छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप


    इंदौर। मास्टर प्लान के तहत रोड चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम की टीम शुक्रवार सुबह एक बार फिर छावनी क्षेत्र पहुंची। निगम के अमले ने छावनी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण में बाधक मकानों और प्रतिष्ठानों के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान मथुरावाला प्रतिष्ठान की पुरानी बिल्डिंग के बाधक हिस्से भी तोड़े गए। कार्रवाई के लिए नगर निगम की टीम तीन पोकलेन और दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

    सुबह निगम का अमला मशीनों के साथ छावनी चौराहे पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक पहले कुछ हिस्सों को मैन्युअल तरीके से हटाने का काम किया गया। इसके बाद भारी मशीनों की मदद से सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बनी रही। फिलहाल कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विवाद या विरोध की सूचना सामने नहीं आई है।

    नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर प्रखर सिंह के मुताबिक मास्टर प्लान में शामिल छावनी रोड के चौड़ीकरण के लिए जिन हिस्सों को हटाया जाना बाकी था उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मकानों के छज्जे और अन्य बाधक हिस्से हटाए गए हैं। निगम का कहना है कि पहले से लंबित कार्रवाई को पूरा करने के बाद रोड चौड़ीकरण के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।

    छावनी क्षेत्र में रोड चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम पहले भी कार्रवाई कर चुका है। मई में भी निगम का अमला क्षेत्र में पहुंचा था और सड़क के लिए जरूरी बाधक हिस्सों को हटाया गया था। इसके बाद रोड निर्माण और चौड़ीकरण से जुड़े काम को आगे बढ़ाया गया। उस समय कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से क्षेत्र में जन अधिकार यात्रा निकालकर कार्रवाई का विरोध किया गया था। अब कई महीने बाद निगम ने एक बार फिर लंबित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है।

    छावनी क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई के दौरान पहले हादसा भी हो चुका है। पिछली कार्रवाई के दौरान मशीन में बिजली के तार उलझ गए थे। तार हटाने के प्रयास में जेसीबी चालक ने जोर लगाया था जिसके बाद बिजली का खंभा उखड़कर नीचे गिर गया। हादसे में होम्योपैथिक डॉक्टर कपिल दीक्षित घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिजली लाइनों और मशीनों से जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी सावधानी जरूरी मानी गई थी।

    छावनी की खास बात यह है कि यहां कई मकान और प्रतिष्ठान सौ साल से भी अधिक पुराने बताए जाते हैं। पुराने निर्माण और घनी आबादी वाले इलाके में रोड चौड़ीकरण की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। शुक्रवार को जिन हिस्सों पर निगम ने कार्रवाई की उनमें मथुरावाला बिल्डिंग भी शामिल रही। यह पुरानी इमारत पांच मंजिला बताई जा रही है और इसमें बेसमेंट भी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके बाधक हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब छावनी रोड चौड़ीकरण के काम में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में शेष बाधक हिस्सों को हटाने और सड़क से जुड़े निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

  • MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान

    MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन से लेकर सरकार और विपक्ष तक कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के पहले दौरे के दौरान संगठन में बेहतर तालमेल और मतभेदों को लेकर दिए गए संदेश ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। देब ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही पार्टी के अलग अलग स्तरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर काम करने की नसीहत दी है।

    बिप्लब देब के दौरे के दौरान पार्टी की संगठनात्मक बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नेताओं से सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने नहीं लाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संगठन में मतभेद हो सकते हैं लेकिन इन्हें पार्टी के कामकाज पर हावी नहीं होना चाहिए। इस दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया।

    दरअसल बिप्लब देब को हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया गया है। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चुनौती बताई जा रही है। उनके पहले दौरे में ही सरकार और संगठन के बीच समन्वय का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। हालांकि भाजपा नेताओं की ओर से सार्वजनिक तौर पर संगठन में एकजुटता और बेहतर तालमेल पर ही जोर दिया गया है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर भी मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई रही। राहुल गांधी ने आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखे आरोप लगाए।

    राहुल गांधी के दौरे के जवाब में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पुराने शासन और मौजूदा दौरे को लेकर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कहा कि अगर राहुल गांधी मौजूदा समस्याओं पर सवाल उठा रहे हैं तो कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी उन्हें देना चाहिए।

    इसी राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे मामलों में राजनीतिक पलटवार के दौरान नेताओं के बयानों और नामों को लेकर हुई चूक भी चर्चा का विषय बन जाती है।

    दूसरी ओर सीधी से भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के एक स्थानीय दुकान पर समोसे तलने का वीडियो भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट के अनुसार सांसद ने दुकानदार से बातचीत की और उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान सरकारी सहायता और पीएम स्वनिधि योजना का भी जिक्र हुआ। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर संगठनात्मक बैठकों और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी संगठनात्मक फोकस बढ़ाने की बात कही है जहां उसे 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी के सामने संगठन में तालमेल मजबूत करना और जमीनी नेटवर्क को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण एजेंडा बना हुआ है।

  • अमित शाह के भोपाल दौरे में कई बड़े कार्यक्रम गोपालक सम्मेलन से डेयरी प्लांट तक जानिए 3 अक्टूबर का पूरा एजेंडा

    अमित शाह के भोपाल दौरे में कई बड़े कार्यक्रम गोपालक सम्मेलन से डेयरी प्लांट तक जानिए 3 अक्टूबर का पूरा एजेंडा


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 2 अक्टूबर की रात भोपाल पहुंचेंगे और 3 अक्टूबर को राजधानी में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनके दौरे का प्रमुख कार्यक्रम भेल दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन है। इसमें मध्यप्रदेश के अलग अलग जिलों से 35 हजार से अधिक गोपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। शाह के दौरे में पशुपालन और डेयरी के साथ सहकारिता पुलिसिंग उच्च शिक्षा और सड़क अधोसंरचना से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं।

    गोपालक सम्मेलन में भोपाल के अलावा सीहोर बैतूल राजगढ़ हरदा गुना अशोकनगर शाजापुर विदिशा रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से प्रतिभागियों के पहुंचने की तैयारी है। कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किए गए कामों और बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ी गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। गृह पशुपालन एवं डेयरी सहकारिता लोक निर्माण और परिवहन विभाग भी अपनी योजनाओं और कार्यों की जानकारी देंगे।

    सम्मेलन में पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े लोगों के लिए कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस राशि वितरित की जाएगी। गौशालाओं को सहायता देने के साथ गोपालक दीदियों का सम्मान किया जाएगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाने की जानकारी है।

    शाह के दौरे में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं पर भी विशेष फोकस रहेगा। उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसकी शुरुआती क्षमता रोजाना 3 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी जिसे भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यहां दूध के साथ दही छाछ घी और अन्य डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण की क्षमता विकसित की जाएगी।

    भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का उद्घाटन भी प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल है। करीब 16.80 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस प्लांट में रोजाना 40 हजार लीटर दूध के प्रसंस्करण की क्षमता बताई गई है। इससे दही छाछ लस्सी श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना है।

    अमित शाह के कार्यक्रम में नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा भौंरी स्थित IISER परिसर से जुड़ा कार्यक्रम और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण की जानकारी भी सामने आई है। सड़क अधोसंरचना से जुड़े कार्यक्रम भी दौरे का हिस्सा बताए गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाह के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की है। प्रशासन को बैठक व्यवस्था पेयजल स्वच्छता सुरक्षा यातायात और अन्य व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह 3 अक्टूबर को भोपाल में होने वाला कार्यक्रम केवल गोपालक सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि डेयरी सहकारिता पुलिसिंग उच्च शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़े कई कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ेगा।

  • MP Sub Engineer भर्ती में नया नियम लागू, संविदाकर्मियों के लिए 50% आरक्षण, 13 अक्टूबर से दोबारा आवेदन शुरू

    MP Sub Engineer भर्ती में नया नियम लागू, संविदाकर्मियों के लिए 50% आरक्षण, 13 अक्टूबर से दोबारा आवेदन शुरू


    भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सब इंजीनियर ड्राफ्ट्समैन लैब टेक्नीशियन समेत अन्य समकक्ष पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद भर्ती नियमों में बदलाव किया गया है। अब पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अलग अलग विभागों से अतिरिक्त रिक्त पदों की मांग भी प्राप्त हुई है। इन बदलावों के बाद मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी MPESB ने समूह 3 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2026 के आवेदन दोबारा लेने का फैसला किया है।

    नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थी 13 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं आवेदन पत्र में संशोधन की सुविधा 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी। भर्ती परीक्षा दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है। संशोधित नियम पुस्तिका भी जल्द जारी की जाएगी। ऐसे में पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के साथ नए उम्मीदवारों को भी संशोधित भर्ती प्रक्रिया और पदों की संख्या से जुड़ी जानकारी पर नजर रखनी होगी।

    दरअसल जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ओर से 29 अगस्त 2026 को उपयंत्री पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। उस समय पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया था। इसके बाद जबलपुर के आधारताल निवासी राजू यादव समेत 24 संविदाकर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नवीन सैनी ने वर्ष 2023 की संशोधित नीति का हवाला देते हुए पात्र संविदाकर्मियों को सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग रखी थी।

    इस मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की कोर्ट में होनी थी। सुनवाई से पहले ही जल संसाधन और पीएचई विभाग ने भर्ती नियम में संशोधन कर दिया। संशोधित आदेश में उपयंत्री भर्ती में पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान शामिल किया गया। इसके बाद MPESB ने भी भर्ती प्रक्रिया को संशोधित करते हुए आवेदन दोबारा लेने का निर्णय किया है।

    इससे पहले MPESB ने 18 अगस्त को समूह 3 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2026 का विज्ञापन जारी किया था। इसमें कुल 1040 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी और 29 अगस्त से 12 सितंबर तक आवेदन लिए गए थे। बाद में विभिन्न विभागों और शासकीय उपक्रमों की ओर से उपयंत्री के अतिरिक्त रिक्त पदों के मांगपत्र मंडल को प्राप्त हुए। दूसरी ओर आरक्षण से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    अब अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख 13 अक्टूबर है। इसी दिन से आवेदन की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। संशोधित नियम पुस्तिका जारी होने के बाद पदों की संख्या आरक्षण व्यवस्था और पात्रता से जुड़ी शर्तों की पूरी जानकारी स्पष्ट होगी। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले नए नियमों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जाएगी ताकि किसी तरह की गलती से बचा जा सके।

  • MP: HC का बड़ा फैसला….कहा- OBC क्रीमी लेयर में शामिल होने का आधार सिर्फ वेतन नहीं

    MP: HC का बड़ा फैसला….कहा- OBC क्रीमी लेयर में शामिल होने का आधार सिर्फ वेतन नहीं


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में हाईकोर्ट (High Court) की ग्वालियर बेंच (Gwalior Bench) ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) क्रीमी लेयर (Creamy layer) को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को OBC क्रीमी लेयर में शामिल करने के लिए सिर्फ वेतन से होने वाली आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। क्रीमी लेयर निर्धारित करते समय माता-पिता का पद, उनकी सेवा की प्रकृति, सेवा काल और सामाजिक परिस्थितियों समेत अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी विचार करना होगा।

    यह मामला सिविल जज की बेटी रागिनी राठौर की याचिका से जुड़ा है। रागिनी ने OBC प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। स्थानीय सक्षम अधिकारियों ने उनके आवेदन को निरस्त कर दिया था। आवेदन खारिज करने के पीछे उनके पिता की करीब 16 लाख रुपए सालाना आय को आधार बनाया गया था। अधिकारियों की ओर से OBC क्रीमी लेयर के लिए निर्धारित 8 लाख रुपए की आय सीमा का हवाला दिया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


    कोर्ट बोला- तय करते वक्त यह देखना जरूरी

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर तय करने के लिए आय का आकलन करते समय यह देखना जरूरी है कि आय किस स्रोत से प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही माता-पिता का पद, सेवा की स्थिति और अन्य परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें केवल वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर निर्धारित करने को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

    ‘छह सप्ताह के भीतर दोबारा विचार करें’
    फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया है कि रागिनी राठौर के OBC प्रमाणपत्र के आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर दोबारा विचार किया जाए। अधिकारी को सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच करने के बाद स्पष्ट और कारणयुक्त आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।


    ‘क्रीमी लेयर की मौजूदा आय सीमा में कोई बदलाव नहीं’

    इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के आदेश से OBC आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था या क्रीमी लेयर की आय सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कोर्ट ने किसी नई आय सीमा को लागू नहीं किया है, बल्कि क्रीमी लेयर के निर्धारण की प्रक्रिया में सभी जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखने की बात कही है।

    फैसले के बाद अब OBC प्रमाणपत्र और क्रीमी लेयर से जुड़े मामलों में केवल आय का आंकड़ा देखने के बजाय संबंधित व्यक्ति की सामाजिक और सेवा संबंधी परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा।

  • भोपाल IAS मर्डर केस में बड़ा खुलासा, बैग और झोला लेकर निकला आरोपी, दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर हुआ गायब

    भोपाल IAS मर्डर केस में बड़ा खुलासा, बैग और झोला लेकर निकला आरोपी, दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर हुआ गायब


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर स्थित उनके घर में हुई इस वारदात के बाद से केयरटेकर वरुण कुमार फरार है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उसके भागने का संभावित रास्ता पता लगाया है। आरोपी की तलाश में मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश दिल्ली और पंजाब में पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं। खबर के मुताबिक इस अभियान में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया गया है।

    पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार 30 सितंबर की रात करीब 12:30 बजे से सुबह 2 बजे के बीच राकेश अग्रवाल की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या की गई। वारदात के समय वह अपने कमरे में सो रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या के बाद घर की रसोई में गैस सिलेंडर का पाइप निकाल दिया गया था और आग लगाने की कोशिश की गई थी। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि ऐसा किस उद्देश्य से किया गया।

    घटना का पता सुबह करीब 4:40 बजे चला जब राकेश अग्रवाल की पत्नी निशी अग्रवाल की नींद खुली। उनका कमरा बाहर से बंद था। घर के कर्मचारी अमर की मदद से दरवाजा खुलवाया गया। इसके बाद राकेश अग्रवाल की हत्या की जानकारी सामने आई और पुलिस को सूचना दी गई।

    जांच में आरोपी के भागने का घटनाक्रम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार वरुण रात करीब 2:40 बजे घर से निकला था। घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर लगे सीसीटीवी कैमरों में वह पीठ पर बैग और हाथ में झोला लेकर जाता दिखाई दिया। इसके बाद वह करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर भदभदा चौराहे पहुंचा जहां से उसने ऑटोरिक्शा लिया।

    बताया जा रहा है कि ऑटो पॉलीटेक्निक चौराहे और कमला पार्क की ओर से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा। स्टेशन से कुछ दूरी पहले उतरने के बाद आरोपी पैदल ही भोपाल जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 से होते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 2 तक पहुंचा। पुलिस के अनुसार वह रात करीब 3:30 बजे दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर रवाना हुआ। अब झांसी ग्वालियर और आगरा रूट के विभिन्न स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सके।

    इस मामले में केयरटेकर की नियुक्ति करने वाली एजेंसी भी जांच के दायरे में है। जानकारी के मुताबिक वरुण को बाग सेवनिया के विश्वकर्मा नगर स्थित वर्मा होम हेल्थ केयर के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। पुलिस यह पता लगा रही है कि नियुक्ति से पहले उसका अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था या नहीं। नियमों की अनदेखी मिलने पर एजेंसी संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। आरोपी का पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी सामने आया है। इस संबंध में पंजाब पुलिस से उसके पुराने रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई है।

    पुलिस हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए लूट और आर्थिक लेन-देन समेत कई पहलुओं पर जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी घर से नकदी या कीमती सामान लेकर फरार हुआ हो सकता है। इसके अलावा राकेश अग्रवाल के कुछ लोगों के साथ हुए आर्थिक लेन-देन की जानकारी भी जांच का हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 11 महीने पहले एक पूर्व परिचित के खिलाफ एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायत किए जाने का पहलू भी सामने आया है। पुलिस इन घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की जांच कर रही है। फिलहाल हत्या का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। आरोपी की गिरफ्तारी और आगे की जांच के बाद ही वारदात की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।