Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में संपत्ति विवाद पर रिश्तेदारों का तांडव शिकायत के बाद फिर घर पहुंचकर किया हमला सीसीटीवी में कैद वारदात

    इंदौर में संपत्ति विवाद पर रिश्तेदारों का तांडव शिकायत के बाद फिर घर पहुंचकर किया हमला सीसीटीवी में कैद वारदात


    इंदौर । इंदौर में पुश्तैनी मकान के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। शहर के एमआईजी थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के बीच संपत्ति विवाद इतना बढ़ गया कि महिला और उसके परिजनों पर दो अलग अलग स्थानों पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के कुछ ही समय बाद आरोपी दोबारा उसके पुश्तैनी घर पहुंचे और लाठी डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान महिला के साथ मारपीट की गई और उसके कपड़े तक फट गए। बीच बचाव करने आए उसके भाई को भी गंभीर चोटें आई हैं।

    पुलिस के अनुसार 32 वर्षीय महिला ने शिकायत में बताया कि उसके चाचा के निधन के बाद नेहरू नगर स्थित पुश्तैनी मकान को लेकर परिवार के कुछ सदस्यों के बीच विवाद शुरू हो गया था। शनिवार दोपहर इसी विवाद के चलते हीरा नगर क्षेत्र में महिला और उसकी मां के साथ कथित रूप से मारपीट की गई जिसमें दोनों घायल हो गईं। घटना के बाद महिला ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई जबकि उसकी मां उपचार और चिकित्सीय परीक्षण के लिए अस्पताल चली गई।

    पीड़िता का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के कुछ ही समय बाद आरोपी अपने कई साथियों के साथ नेहरू नगर स्थित पुश्तैनी मकान पहुंच गए। वहां उन्होंने दोबारा विवाद शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर महिला अपने भाई के साथ घर पहुंची तो आरोपियों ने कथित रूप से लाठी डंडों से हमला कर दिया। महिला ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उसके कपड़े तक फट गए जबकि उसके भाई के हाथ में गंभीर चोट आई।

    घटना के दौरान आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। बताया जा रहा है कि पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। पुलिस अब इन फुटेज की जांच कर रही है ताकि घटना के क्रम और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    एमआईजी थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पारिवारिक संपत्ति से जुड़े विवाद कई बार गंभीर रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालना आवश्यक है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है।

  • इंदौर में फैली सनसनी घर की पहली मंजिल पर मिला कारोबारी का शव पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

    इंदौर में फैली सनसनी घर की पहली मंजिल पर मिला कारोबारी का शव पुलिस हर एंगल से कर रही जांच


    इंदौर । इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक कारोबारी का खून से सना शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान 50 वर्षीय कमल कुमावत के रूप में हुई है जो अलमारी बनाने का कारखाना संचालित करते थे। प्रारंभिक जांच में उनके शरीर पर चोट के कई निशान मिले हैं। कमरे में बिखरा सामान और शव के पास खून से सना चाकू मिलने के बाद पुलिस हत्या की आशंका को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार घटना का पता उस समय चला जब रविवार सुबह कमल कुमावत काफी देर तक अपने कमरे से नीचे नहीं आए। इस पर उनके भाई शेखर उन्हें देखने पहली मंजिल पर पहुंचे। कमरे का दरवाजा खोलते ही उन्होंने अंदर खून फैला हुआ देखा और कमल कुमावत का शव जमीन पर पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख पुकार मच गई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही चंदन नगर थाना पुलिस और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। प्रारंभिक जांच में कमरे का सामान अस्त व्यस्त मिला जिससे संघर्ष होने की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि वारदात से पहले मृतक और किसी व्यक्ति के बीच झड़प हुई हो सकती है।

    जांच के दौरान शव के पास खून से सना एक चाकू भी बरामद हुआ है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यही हथियार वारदात में इस्तेमाल किया गया या नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण और चोटों की प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।

    परिजनों ने बताया कि कमल कुमावत लंबे समय से अलमारी बनाने का कारखाना चला रहे थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। उनके दो बच्चे घटना के समय गांव गए हुए थे। परिवार में उनके तीन भाई भी हैं। पुलिस परिवार के सदस्यों रिश्तेदारों और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि किसी संभावित रंजिश या अन्य कारणों का पता लगाया जा सके।

    इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट पोस्टमार्टम और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह सुनियोजित हत्या थी या घटना के पीछे कोई अन्य वजह है।

  • तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह चाय की गुमटी में घुसी कार सीसीटीवी के आधार पर ड्राइवर की तलाश जारी

    तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह चाय की गुमटी में घुसी कार सीसीटीवी के आधार पर ड्राइवर की तलाश जारी


    इंदौर । इंदौर में तेज रफ्तार का एक और मामला सामने आया है जहां रविवार तड़के एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी चाय की गुमटी में जा घुसी। हादसे के बाद चालक ने कार को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन रिवर्स लेते समय वहां खड़ी दो बाइकों को भी टक्कर मार दी। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई और लोगों ने चालक को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वह कार लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वाहन और चालक की पहचान करने में जुटी है।

    यह हादसा लसूडिया थाना क्षेत्र के स्कीम नंबर 78 स्थित टेलीपरफॉर्मेंस कार्यालय के बाहर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार से आ रही एक अर्टिगा कार अचानक असंतुलित हो गई और सीधे सड़क किनारे स्थित चाय की गुमटी में जा घुसी। टक्कर इतनी तेज थी कि गुमटी को नुकसान पहुंचा और आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि चालक नशे की हालत में था। हादसे के बाद उसने कार को रिवर्स कर निकालने की कोशिश की लेकिन इस दौरान पास में खड़ी दो मोटरसाइकिलें उसकी चपेट में आ गईं। इतना ही नहीं कार सड़क किनारे खड़े लोगों की ओर भी बढ़ गई जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे। हालांकि इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने चालक को रोकने और पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह तेजी से कार लेकर वहां से भाग निकला। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज की मदद से कार के पंजीकरण नंबर और चालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दुर्घटना के कारण हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

    यह घटना एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों की याद दिलाती है। पुलिस ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने की अपील की है ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।

  • पत्नी की हत्या के बाद फरार आरोपी पति की संदिग्ध मौत गंजबासौदा रेलवे ट्रैक पर मिला धड़ सिर की तलाश जारी

    पत्नी की हत्या के बाद फरार आरोपी पति की संदिग्ध मौत गंजबासौदा रेलवे ट्रैक पर मिला धड़ सिर की तलाश जारी


    इंदौर । इंदौर में चर्चित पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पत्नी की हत्या के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी अखिलेश सैनी का संदिग्ध परिस्थितियों में गंजबासौदा के पास रेलवे ट्रैक पर शव मिलने की सूचना है। शव धड़ के रूप में मिला है जबकि सिर गायब है। पुलिस ने शव की जेब से मिले दस्तावेजों के आधार पर प्रारंभिक तौर पर उसकी पहचान अखिलेश सैनी के रूप में होने की बात कही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा पहचान की पुष्टि के बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार गंजबासौदा और पवई के बीच रेलवे ट्रैक पर एक शव पड़े होने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। जांच के दौरान रेलवे पटरी पर केवल धड़ मिला जबकि सिर घटनास्थल पर नहीं था। पुलिस ने आसपास के कई किलोमीटर क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया लेकिन सिर बरामद नहीं हो सका। शव की जेब से आधार कार्ड सहित कुछ दस्तावेज और एक कथित सुसाइड नोट मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब इस नोट की सत्यता और उसके विषय की भी जांच कर रही है।

    इधर सूचना मिलने के बाद इंदौर पुलिस की टीम और अखिलेश के परिजन गंजबासौदा के लिए रवाना हो गए हैं ताकि शव की पहचान की जा सके। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या के बाद फरार रहने के दौरान अखिलेश पिछले कई दिनों तक कहां रहा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    गौरतलब है कि 11 जुलाई को इंदौर स्थित सरकारी आवास में पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस वारदात का खुलासा उस समय हुआ जब उनके दोनों बच्चे स्कूल से लौटे और घर के भीतर मां को खून से लथपथ पड़ा पाया। घटना के बाद से ही पति अखिलेश सैनी फरार था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। उस पर घोषित इनाम भी बढ़ाकर बीस हजार रुपए कर दिया गया था।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार बेटी ने पुलिस को बताया था कि पिता लंबे समय से मां पर बेबुनियाद शक करते थे और पहले भी कई बार उनके साथ मारपीट कर चुके थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी ने कपड़े बदले और बच्चों के स्कूल जाकर उन्हें दूसरी जगह भेजने की कोशिश की थी। आरोप है कि वारदात के समय घर में टीवी की आवाज बहुत तेज कर दी गई थी ताकि शोर बाहर न जा सके।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उर्मिला सैनी की हत्या को बेहद क्रूर बताया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या में विशेष प्रकार के धारदार हथियार का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। पुलिस ने इस मामले में कई तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए थे तथा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चला रही थी।

    अब आरोपी की संदिग्ध मौत के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस आत्महत्या हत्या या किसी अन्य संभावना सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही कथित सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही अखिलेश की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

  • मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल

    मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं और हल्के फुल्के राजनीतिक प्रसंगों के कारण चर्चा में रहा। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर तक पहुंचने के लिए मंत्री दौड़ लगाते नजर आए तो कहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी को मुस्कुराते हुए हाईकमान बताया। वहीं एक महिला मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए मंच पर अनोखा प्रयोग कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    टीकमगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हेलिकॉप्टर से खजुराहो रवाना होना था। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे और उड़ान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार तेज कदमों से दौड़ते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और समय रहते उसमें सवार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे अपने अपने अंदाज में साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उनकी नजर चूड़ियों के स्टॉल पर पड़ी। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां खरीदीं और मुस्कुराते हुए कहा कि यह मेरी हाईकमान के लिए हैं। उनकी इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि वह सत्तर वर्ष के हो चुके हैं और अब सठिया गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जो भी कहते हैं सामने कहते हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने में विश्वास रखते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसके अलग अलग अर्थ निकाले जाने लगे।

    उधर मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद पर सफाई देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मंच पर तीन अलग अलग पेय पदार्थ रखे और उन्हें अलग प्रकार के ग्लासों में डालकर यह समझाने का प्रयास किया कि पात्र बदल जाने से किसी वस्तु की वास्तविक पहचान नहीं बदलती। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगा देने भर से उसकी वास्तविक पहचान या कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। उनका यह प्रयोग भी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति केवल गंभीर फैसलों और बहसों तक सीमित नहीं रहती बल्कि नेताओं के व्यवहार उनके अंदाज और छोटे छोटे प्रसंग भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दृश्य तेजी से वायरल होते हैं और आम लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे देते हैं।

  • एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक

    एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक 2026 के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप से नया चरण पार कर लिया है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा।

    यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और सरकार इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कैबिनेट बैठक भोपाल के समीप जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक चमन महल में आयोजित की गई जहां जनजातीय संस्कृति और विरासत को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति दी जबकि सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र लगाए गए थे। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राजा भोज परमार राजवंश और गोंड शासकों की समृद्ध विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने रानी कमलापति के साहस और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक विकास में विभिन्न शासकों और संस्कृतियों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    देश में समान नागरिक संहिता को लेकर पहले भी कई राज्यों ने पहल की है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना जहां विधेयक पारित होने के बाद जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने भी यूसीसी विधेयक पारित किया। वहीं असम विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है हालांकि वहां कुछ अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।

    अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है जबकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना भी है।

  • भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

    भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी


    भोपाल  भोपाल रविवार को जैन समाज की आस्था श्रद्धा और गुरु भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। चतुर्मास के पावन अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज का 20 मुनियों के संघ के साथ राजधानी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने पहुंचे। पूरे मार्ग पर गुरु भक्ति के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया।

    मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में नारायण नगर जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं युवा बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालु पूरे मार्ग पर आचार्य विद्यासागर महाराज और आचार्य समय सागर महाराज के जयकारे लगाते हुए भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे। धार्मिक उल्लास और अनुशासित वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

    यात्रा के दौरान नाके चौराहे पर एक भावुक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब मुनि निर्णय सागर महाराज उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज और निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज सहित पूरे मुनि संघ ने आचार्य समय सागर महाराज की परिक्रमा कर चरण वंदना की। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा और गुरु भक्ति के इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।

    शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जीव दया गोसेवा और हथकरघा को प्रोत्साहित करने वाले संदेशों के साथ निकाली गई झांकियों ने समाज को सेवा और करुणा का संदेश दिया। निर्माणाधीन रानी कमलापति जिनालय की प्रतिकृति ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विभिन्न मंदिर समितियों महिला मंडलों युवा मंडलों सामाजिक संगठनों पाठशाला परिवारों और दिव्य घोष दल ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

    इस आयोजन में केवल भोपाल ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र दिल्ली राजस्थान और आसपास के कई राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। शहर के अनेक सामाजिक व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर आचार्य संघ का अभिनंदन किया और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।

    शोभायात्रा के समापन पर रानी कमलापति जिनालय में धर्मसभा आयोजित की गई। यहां भगवान आदिनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री के गुणों का स्मरण और वंदन किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

    अपने संबोधन में आचार्य समय सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र निर्माण संस्कृति संरक्षण और आत्मकल्याण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्श केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सही दिशा देता रहेगा।

    चतुर्मास के शुभारंभ के साथ भोपाल में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का नया अध्याय शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में प्रवचन स्वाध्याय तप और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर प्राप्त होगा।

  • मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी

    मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर में शनिवार को एक पारिवारिक विवाद उस समय सार्वजनिक तमाशे में बदल गया जब एक युवक अपनी पत्नी के मायके चले जाने से नाराज होकर करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए।

    घटना विजयपुर नगर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। ऊंचाई पर बैठे युवक को देखकर स्थानीय लोग घबरा गए और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लगातार युवक से बातचीत कर उसे शांत करने की कोशिश करती रही।

    करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान युवक बार बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने की मांग करता रहा। वह मीडिया से बात कराने की भी जिद करता रहा ताकि अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सके। पुलिस अधिकारियों प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों ने धैर्य के साथ उससे बातचीत जारी रखी। काफी समझाइश और भरोसा दिलाने के बाद आखिरकार युवक सुरक्षित नीचे उतर आया जिससे सभी ने राहत की सांस ली।

    नीचे आने के बाद युवक ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी लगभग पंद्रह दिन पहले उसे छोड़कर मायके चली गई थी। उसका कहना था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी और मानसिक तनाव के चलते उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने जैसा कदम उठाया। युवक का कहना था कि वह चाहता था उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए।

    हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग है। विजयपुर थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस ने बताया कि पत्नी की शिकायत के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने संयम और सतर्कता के साथ स्थिति को संभाला जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। अधिकारियों ने युवक को उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। फिलहाल पुलिस पति पत्नी के बीच विवाद की वास्तविक वजह जानने में जुटी है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि पारिवारिक विवाद यदि समय रहते बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से नहीं सुलझाए जाएं तो वे सार्वजनिक घटनाओं का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में खतरनाक कदम उठाने के बजाय संवाद और कानून का सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और उचित रास्ता है।

  • MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित

    MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती का फैसला किया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए मितव्ययिता संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अगले दो वर्षों तक गैर-जरूरी सरकारी खर्चों (Non-Essential Government Expenditures) पर रोक रहेगी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा.

    नए आदेश के मुताबिक, अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों तक सीमित रहेंगी. देश के भीतर हवाई यात्रा भी आवश्यकता के आधार पर ही की जाएगी और सभी अधिकारी सरकारी खर्च पर केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर कर सकेंगे.


    होटल में बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं

    वित्त विभाग ने होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम अब सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे. जहां संभव होगा, वहां प्रशिक्षण और बैठकों को वर्चुअल माध्यम या वेबिनार के जरिए आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.


    किराए के वाहनों की संख्या घटेगी

    सरकार ने सभी विभागों को किराए के वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए व्हीकल पूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. दो या अधिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन उपलब्ध कराने के बजाय साझा वाहन व्यवस्था अपनाई जाएगी. यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार दिया जाता है तो उसे दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.


    दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी रोक

    आदेश में अधिकारियों के कार्यालयों और केबिन की सजावट तथा इंटीरियर पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगा दी गई है. विभागाध्यक्षों को इन खर्चों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.


    नई कंसल्टेंसी सेवाओं पर रोक

    राज्य सरकार ने फिलहाल नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है. साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके.

  • MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित

    MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand region) में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project) और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और परियोजना से प्रभावित परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला।

    इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं और पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर की केवल एक बार औपचारिक मेडिकल जांच की गई. प्रदर्शनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी शुरू किया है।

    बता दें कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

    हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है. मौजूदा आंदोलन में रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि अधिकारियों द्वारा किए गए पुनर्वास के वादों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

    छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में पड़ोसी पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित 176 लोग शामिल हैं और इनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजे की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

    एक बयान में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटने और पुनर्वास का लाभ उठाने के लिए वहां के जिला अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह किया. इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुनर्वास और पुनर्स्थापना के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और प्रति प्रभावित परिवार पुनर्वास सहायता को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया है।

    प्रशासन ने कहा कि अतिरिक्त आवंटन पात्र लाभार्थियों के समय पर पुनर्वास में मदद करेगा. इसमें कहा गया कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर विरोध स्थल पर पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया था. पास के एक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल स्टाफ और दवाइयां भी तैनात की गई थीं, जबकि स्थानीय अधिकारी इंतजामों पर नजर रखे हुए थे।

    प्रशासन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मना रहे थे. उसने दावा किया कि कुछ लोग प्रोजेक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे और जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

    प्रशासन का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।

    अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल संसाधन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ लोगों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूल तोड़ दिए गए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे और हर गांव में प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से दिखाए।

    बिजावर के SDM विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए आंदोलन के बारे में पता चला, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने न तो पहले से कोई जानकारी दी थी और न ही कोई औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी लंबित मांगों का जायजा लिया।

    द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के लोगों की शिकायतों का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर के निवासियों से जुड़े मुद्दों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की, खासकर मॉनसून को देखते हुए, और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि फ़ायदे चुनिंदा लोगों को दिए गए थे; उन्होंने कहा कि अगर कोई खास मामला प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।