Category: Madhya Pradesh

  • अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी

    अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी


    मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल परिसर, वार्डों और गलियारों में अंधेरा छा गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे कई मरीज बेचैन हो गए। जनरल वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकलते भी देखा गया। हालांकि, यह स्थिति करीब 15 से 20 मिनट तक बनी रही, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई।

    गर्मी और अंधेरे से परेशान हुए मरीज, परिजनों में चिंता
    अस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर स्थिति वाले मरीज भी शामिल हैं जो जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर थे। अचानक बिजली गुल होने से परिजनों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इलाज प्रभावित न हो जाए। कुछ लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली कटौती जैसी स्थिति में तुरंत और सुचारू बैकअप सिस्टम का प्रभावी होना जरूरी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

    बिजली विभाग ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन का दावा- जनरेटर तुरंत चालू हुए
    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के अधिकारियों ने भी जानकारी ली है। अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के बड़े जनरेटर सिस्टम के बावजूद स्थिति कैसे प्रभावित हुई।

    वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बिजली गुल होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शहर में उस समय बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में बैकअप के लिए सात बड़े जनरेटर लगे हुए हैं, जिनमें पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध था। जैसे ही बिजली गई, जनरेटर सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया।

    डीन के अनुसार, अस्पताल में किसी भी मरीज को गंभीर परेशानी नहीं हुई और न ही किसी को वार्ड से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं।

    प्रशासनिक दावे बनाम हकीकत, जांच की मांग उठी
    इस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर बिजली विभाग इसकी जानकारी जुटा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बता रहा है। अब देखना होगा कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

  • फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा

    फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा


    मध्य प्रदेश । Ujjain स्थित Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में गुरुवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत और भस्म से हुआ अभिषेक
    आरती के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

    भांग, चंदन और फूलों से राजा स्वरूप श्रृंगार
    भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग, चंदन, गुलाब के फूलों की माला, रजत चंद्र, रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजाया गया। इसके अलावा शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प मालाएं भी अर्पित की गईं। भगवान को भव्य “राजा स्वरूप” में सजाया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

    ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग 
    श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल, ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग लगाया गया। पूरे गर्भगृह में फूलों और सुगंधित मालाओं से अलौकिक वातावरण बना रहा।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़
    भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई दी।

    भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है, जो हर दिन Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple को दिव्यता से भर देता है।

  • सूक्ष्म कला का अद्भुत उदाहरण, छात्रा ने दाल पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग और दर्ज कराया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    सूक्ष्म कला का अद्भुत उदाहरण, छात्रा ने दाल पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग और दर्ज कराया वर्ल्ड रिकॉर्ड


    मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर अपनी प्रतिभा के कारण चर्चा में है। यहां के उत्कृष्ट विद्यालय की 12वीं की छात्रा दीक्षा कुशवाह ने ऐसी सूक्ष्म कला प्रस्तुत की है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। दीक्षा ने केवल 8 मिलीमीटर आकार की चने की दाल पर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की बेहद बारीक पेंटिंग बनाई। खास बात यह है कि उन्होंने यह पूरा कार्य सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया।

    वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
    दीक्षा की इस असाधारण उपलब्धि को World Wide Book of Records में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि सूक्ष्म कला (micro art) के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।

    एक साल की मेहनत और कला का सफर
    ऋषि नगर निवासी दीक्षा कुशवाह फ्रीगंज स्थित आर्ट क्लास में सूक्ष्म चित्रकला सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस कला को निखारा और लगातार अभ्यास किया। इस कार्य के लिए उन्हें विशेष उपकरणों, धैर्य और अत्यधिक एकाग्रता की जरूरत पड़ी। इतने छोटे आकार में सटीक आकृतियां बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।

    आस्था और प्रेरणा से मिली दिशा
    दीक्षा ने बताया कि उन्हें 12 ज्योतिर्लिंग बनाने की प्रेरणा केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मिली। साथ ही कॉलेज के अन्य छात्रों की वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धियों ने भी उन्हें प्रेरित किया।

    स्थानीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान
    दीक्षा की यह उपलब्धि न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और लगन से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

    छोटी सी दाल पर इतनी सूक्ष्म कला बनाकर दीक्षा कुशवाह ने साबित कर दिया कि प्रतिभा आकार नहीं, समर्पण और अभ्यास से बनती है। उनकी यह उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान

    सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान


    मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में है। यहां स्थित Sandipani Ashram को अब भव्य ‘सांदीपनि लोक’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 139 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली को आधुनिक और भव्य स्वरूप देना है।

    108 फीट ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षण
    इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण होगी भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा। इसे प्रदेश की सबसे ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है। इस प्रतिमा का डिजाइन तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार किया जाएगा, ताकि इसकी संरचना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ हो।

    महर्षि सांदीपनि और गुरुकुल परंपरा का भव्य प्रदर्शन
    परियोजना के तहत आश्रम परिसर में महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा, गुरुकुल परंपरा से जुड़े थीम आधारित क्षेत्र, मंदिर परिसर और जल फाउंटेन विकसित किए जाएंगे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

    डिजिटल अनुभव से जुड़ेगा इतिहास और आस्था
    सांदीपनि लोक को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए AR/VR आधारित अनुभव, डिजिटल प्रदर्शनी और मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो-विजुअल सिस्टम उपलब्ध होगा। पर्यटक हेडफोन या VR डिवाइस के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, 64 कलाओं और गुरुकुल परंपरा को इंटरैक्टिव तरीके से समझ सकेंगे।

    लाइट एंड साउंड शो से जीवंत होगी श्रीकृष्ण कथा
    परिसर में इमर्सिव लाइट एंड साउंड शो भी विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रीकृष्ण की जीवनगाथा और उज्जैन से उनका ऐतिहासिक संबंध दर्शाया जाएगा।

    सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारी
    यह पूरी योजना आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे Ujjain को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। महाकाल लोक के बाद अब सांदीपनि लोक को भी उसी स्तर का बड़ा आध्यात्मिक और पर्यटन प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    महाकाल लोक के बाद बढ़ा धार्मिक पर्यटन
    महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। अब प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है।

    सांदीपनि लोक परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि यह उज्जैन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

  • दर्दनाक हादसा उज्जैन में, टवेरा वाहन पलटने से 9 श्रद्धालु घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी

    दर्दनाक हादसा उज्जैन में, टवेरा वाहन पलटने से 9 श्रद्धालु घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी


    मध्य प्रदेश । Ujjain में गुरुवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया, जब ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से Bhartrihari Gufa की ओर जा रही श्रद्धालुओं से भरी टवेरा गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। वाहन में आंध्र प्रदेश से आए 9 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। हादसा इतना अचानक हुआ कि कई यात्री वाहन के अंदर ही फंस गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    स्थानीय लोगों और महंत ने दिखाया साहस
    घटना के तुरंत बाद Rinmukteshwar Mahadev Temple के महंत महावीरनाथ महाराज और स्थानीय लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की और घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। स्थानीय लोगों की मदद से कई यात्रियों को तुरंत बाहर निकाला गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।

    घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
    सूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ श्रद्धालु वाहन के नीचे दब गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

    निर्माण कार्य और संकरी सड़क बनी वजह?
    स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा उस क्षेत्र में चल रहे घाट निर्माण कार्य के कारण हुआ, जहां एक तरफ निर्माण कार्य और दूसरी तरफ दीवार होने से रास्ता संकरा हो गया था। इसी वजह से वाहन असंतुलित होकर पलट गया।

    पुलिस जांच जारी, ड्राइवर पर शक
    Madhya Pradesh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर ड्राइवर के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हादसा तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति या मानवीय गलती किस वजह से हुआ।

    धार्मिक यात्रा के दौरान हुआ यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर सावधानी की जरूरत को उजागर करता है। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन की तत्परता ने कई जानें बचाने में अहम भूमिका निभाई।

  • घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार

    घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार


    मध्य प्रदेश । उज्जैन के राज रॉयल कॉलोनी निवासी मंजूर अहमद (50) की मौत की खबर ने पूरे परिवार और इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में उनकी जान चली गई। घटना में 63 अन्य लोग घायल हुए हैं और एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा है।

    परिजनों के अनुसार मंजूर अहमद अपने भांजे की शादी में शामिल होने भारत आने वाले थे। उनकी 3 जून को कुवैत से मुंबई की फ्लाइट थी और 4 जून की सुबह उन्हें उज्जैन पहुंचना था। परिवार के सदस्य उनकी अगवानी के लिए तैयारियां कर रहे थे, लेकिन इसी बीच यह दुखद खबर आ गई।

    मंजूर अहमद के बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि मंगलवार शाम उनकी पिता से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए नागदा आएंगे। परिवार के लोग उन्हें लेने जाने वाले थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

    बताया जाता है कि मंजूर अहमद फ्लाइट पकड़ने के लिए कुवैत एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर मौजूद थे। इसी दौरान एयरपोर्ट पर ड्रोन और मिसाइल हमला हुआ। हमले में टर्मिनल को गंभीर नुकसान पहुंचा और मंजूर अहमद की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिवार के इकलौते कमाने वाले थे
    मंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से खाड़ी देश में रहकर काम कर रहे थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं के कंधों पर थी। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। बेहतर भविष्य और बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने वर्षों तक घर से दूर रहकर मेहनत की।

    परिजनों के मुताबिक वे आखिरी बार अक्टूबर 2025 में उज्जैन आए थे। उस समय उन्होंने परिवार से कहा था कि अब वे पहले की तुलना में अधिक बार घर आया करेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
    परिवार के सदस्य मोहम्मद सलीम ने बताया कि मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि शव कुवैत से अहमदाबाद पहुंचेगा, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उज्जैन लाया जाएगा। सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जा सकता है।

    भारत ने हमले की निंदा की
    भारत सरकार और भारतीय दूतावास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अस्वीकार्य है तथा सभी पक्षों से ऐसे हमले रोकने की अपील की है। भारतीय दूतावास भी पीड़ित परिवार के संपर्क में है और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर

    क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच प्रभावित करने, क्लीनचिट दिलाने और मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे ने प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय के एक टेक्नीशियन ने कथित तौर पर दावा किया कि डीएसपी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच में राहत दिलाई जा सकती है। आरोप है कि एक मामले में क्लीनचिट दिलाने के लिए 3 लाख रुपये और अन्य स्तरों पर अलग-अलग रकम की मांग की गई। स्टिंग में शामिल बातचीत में एक महिला डीएसपी द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि “चोरी सब करते हैं, जो पकड़ाया वही चोर होता है”, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

    कथित बातचीत के दौरान अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया, नोटिस, वॉयस सैंपल और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा की। आरोप है कि जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी और ट्रांसक्रिप्ट तक उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर पैसे नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष पर दबाव बनाने और जांच प्रभावित करने जैसी बातें भी सामने आईं।

    मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच विशेष अदालत ने लोकायुक्त की ओर से पेश की गई कई खात्मा रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने जांच में कमियां, अधूरे साक्ष्य और आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज न किए जाने जैसी खामियों की ओर संकेत किया।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में ट्रैप कार्रवाई की संख्या बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था पर ही ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

    हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या लोकायुक्त संगठन की ओर से अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

  • भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता

    भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता


    भोपाल । भोपाल नगर निगम की नई मुख्यालय बिल्डिंग में बुधवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला कर्मचारी लिफ्ट के अंदर फंस गईं। लिंक रोड नंबर-2 स्थित 73 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक भवन में बिजली गुल होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और महिला करीब 20 मिनट तक उसमें कैद रहीं। घटना ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुई थीं। जैसे ही लिफ्ट ऊपर बढ़ी, अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट सेकंड फ्लोर के पास अटक गई। अंदर फंसी महिला घबरा गईं, जबकि घटना की जानकारी मिलते ही भवन में मौजूद कर्मचारियों और नागरिकों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तकनीकी टीम के पहुंचने से पहले कुछ लोगों ने चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। हालांकि बाद में पहुंचे तकनीकी कर्मचारियों ने लोगों को ऐसा करने से रोका और लिफ्ट सिस्टम को रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की। करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकलते समय वह काफी घबराई हुई नजर आईं।

    नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली बाधित होने के कारण यह बीच में रुक गई थी। हालांकि घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि करोड़ों रुपए की लागत से बने नए भवन में ऑटो रेस्क्यू सिस्टम और पावर बैकअप जैसी जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं हैं।

    कर्मचारियों और आम नागरिकों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस भवन में आते हैं। ऐसे में लिफ्ट में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस और बैकअप पावर सिस्टम होना अनिवार्य है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में यात्री सुरक्षित बाहर निकल सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक लिफ्टों में सुरक्षा के लिए कई स्वचालित सिस्टम लगे होते हैं। बिजली जाने पर लिफ्ट निकटतम फ्लोर तक पहुंचने का प्रयास करती है। ऐसे समय में दरवाजा जबरन खोलने या छेड़छाड़ करने से सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है और राहत कार्य में देरी हो सकती है।

    उल्लेखनीय है कि इस नई निगम बिल्डिंग का लोकार्पण 6 मई को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किया था। भवन में निगम के अधिकांश विभागों को एक छत के नीचे लाने की योजना बनाई गई है। हालांकि उद्घाटन के एक महीने के भीतर सामने आई इस घटना ने भवन की तकनीकी तैयारियों और सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।