Category: Madhya Pradesh

  • MP में 10 अक्टूबर तक मानसून की विदाई, 3 दिन तेज धूप, फिर पूर्वी हिस्से में बारिश के आसार

    MP में 10 अक्टूबर तक मानसून की विदाई, 3 दिन तेज धूप, फिर पूर्वी हिस्से में बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 10 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना है। इससे पहले अगले तीन दिन प्रदेशभर में तेज धूप रहेगी, जबकि 5 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में दिन के तापमान में बढ़ोतरी के साथ रात में ठंडक का दौर रहेगा।

    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक पीरियड 30 सितंबर को खत्म हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी जिले से मानसून की विदाई नहीं हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की वापसी रेखा फिलहाल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से गुजर रही है। मध्य प्रदेश में यह ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के ऊपर बनी हुई है।

    ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से होगी शुरुआत

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी मध्य प्रदेश में सबसे पहले ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग से शुरू हो सकती है। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा होगा।

    मानसून की वापसी की शुरुआत शुक्रवार-शनिवार से होने की संभावना है और पूरी प्रक्रिया 10 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। यानी प्रदेश में मानसून की विदाई का दौर अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाला है।

    अक्टूबर में दिन गर्म, रात में ठंडक

    अक्टूबर मध्य प्रदेश में मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। इस दौरान मानसून की विदाई के साथ आसमान धीरे-धीरे साफ होने लगता है। इसका असर तापमान पर भी दिखाई देता है। दिन में धूप तेज होने से गर्मी का अहसास बढ़ता है, जबकि रात में तापमान गिरने से ठंडक महसूस होने लगती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भी अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। अक्टूबर के पहले दिन ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा रहेगा दिन का तापमान

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप खिलने की संभावना है।

    इस बार 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड

    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच की तुलना में करीब 1.5 इंच कम है। ओवरऑल प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में बारिश कम

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रही है। हालांकि, इसी क्षेत्र के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे भी रहा।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP में 9 से 51% तक कम बारिश

    पश्चिमी हिस्से के कई जिले इस बार बारिश की कमी से प्रभावित रहे। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा है। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

    अब मानसून की वापसी के साथ प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। अगले कुछ दिनों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी और रात में ठंडक का असर बढ़ सकता है, जबकि पूर्वी हिस्से में कहीं-कहीं हल्की बारिश देखने को मिलेगी।

  • राशन के चावल की गड़बड़ी का खुलासा, लोडिंग वाहन से 30 बोरी जब्त, खाद्य विभाग की कार्रवाई तेज

    राशन के चावल की गड़बड़ी का खुलासा, लोडिंग वाहन से 30 बोरी जब्त, खाद्य विभाग की कार्रवाई तेज


    ग्वालियर । ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सरकारी उचित मूल्य दुकान से चावल की बोरियां लोडिंग वाहन में भरे जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद खाद्य विभाग की टीम ने रात के समय मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। टीम ने चावल से भरे लोडिंग वाहन को जब्त कर लिया है। वाहन में करीब 30 बोरी चावल मिला है। मामले में वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। फिलहाल खाद्य विभाग पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाने में जुटा है कि चावल दुकान से किस उद्देश्य से बाहर ले जाया जा रहा था।

    जानकारी के मुताबिक यह मामला बंसीपुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में स्थित वार्ड 16 की सरकारी उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। इस दुकान का संचालन नीरज शर्मा द्वारा किया जाता है। बताया गया है कि दुकान से चावल के कट्टे एक लोडिंग वाहन में भरे जा रहे थे। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी। सूचना मिलने के बाद खाद्य विभाग के फूड इंस्पेक्टर अरविंद सिंह भदौरिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    खाद्य विभाग की टीम ने वहां पहुंचकर लोडिंग वाहन की जांच की। प्राथमिक जांच के दौरान वाहन में सरकारी चावल की करीब 30 बोरियां मिलीं। इसके बाद अधिकारियों ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। चावल की बोरियों को लेकर दस्तावेज और परिवहन से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। चालक से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उसे चावल कहां ले जाने के लिए कहा गया था और वाहन में सरकारी राशन लोड करने की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।

    इस मामले में मुरार थाना पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना के बाद पुलिस ने वाहन को पकड़ा था लेकिन बाद में वाहन को छोड़ दिए जाने की बात सामने आई। मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद खाद्य विभाग और पुलिस की टीम ने दोबारा कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त किया और चालक को हिरासत में लिया।

    अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि उचित मूल्य दुकान से निकाला जा रहा चावल आखिर कहां ले जाया जा रहा था। खाद्य विभाग दुकान संचालक और वाहन चालक से पूछताछ कर रहा है। अधिकारियों द्वारा यह भी जांच की जा रही है कि चावल का परिवहन किसी वैध प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था या फिर इसमें सरकारी राशन की अनियमितता अथवा कालाबाजारी से जुड़ा कोई मामला है।

    फूड इंस्पेक्टर अरविंद सिंह भदौरिया के अनुसार सूचना मिलने पर विभाग की टीम ने लोडिंग वाहन को जब्त किया है। वाहन में करीब 30 बोरी चावल मिला है और चालक से पूछताछ की जा रही है। अधिकारी के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल वाहन जब्त होने और चालक के हिरासत में लिए जाने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। खाद्य विभाग चावल के रिकॉर्ड और उसके परिवहन से जुड़ी जानकारी की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी राशन का चावल नियमों के तहत भेजा जा रहा था या फिर इस मामले में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है।

  • पिछोर में शराब तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई 27 पेटी देशी प्लेन शराब के साथ 4.50 लाख की बलेनो जब्त

    पिछोर में शराब तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई 27 पेटी देशी प्लेन शराब के साथ 4.50 लाख की बलेनो जब्त


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पिछोर में पुलिस ने शराब के अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक बलेनो कार से 27 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की है। पुलिस के अनुसार जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 8 हजार रुपए है। कार्रवाई के दौरान कार चालक पुलिस को देखकर वाहन लेकर भागने लगा। पुलिस टीम ने उसका पीछा किया तो वह कच्चे रास्ते की ओर चला गया। आगे रास्ता बंद मिलने के बाद चालक कार छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शराब और कार को कब्जे में लेकर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर की रात पिछोर पुलिस क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि नीले रंग की मारुति सुजुकी बलेनो कार के जरिए देशी शराब को मायापुर की तरफ से पिछोर लाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने वाहन की पहचान और संभावित रास्ते पर नजर रखते हुए लभेड़ा तिराहे के पास चेकिंग शुरू कर दी।

    कुछ समय बाद मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए से मिलती जुलती बलेनो कार वहां से गुजरती दिखाई दी। पुलिस ने वाहन को रोकने का प्रयास किया लेकिन चालक ने रुकने के बजाय कार की रफ्तार बढ़ा दी और उसे लभेड़ा रोड की तरफ तेजी से ले जाने लगा। पुलिस टीम ने तत्काल वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा किए जाने के दौरान चालक कार को मुख्य सड़क से हटाकर कच्चे रास्ते की ओर ले गया।

    पुलिस के मुताबिक कच्चे रास्ते पर आगे जाने के बाद चालक को रास्ता बंद मिला। इसके बाद उसने वाहन को वहीं छोड़ दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकला। पुलिस ने आसपास के इलाके में आरोपी की तलाश की लेकिन चालक तत्काल हाथ नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने लावारिस हालत में खड़ी बलेनो कार की तलाशी ली।

    तलाशी के दौरान कार के अंदर देशी प्लेन शराब की 27 पेटियां बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 8 हजार रुपए है। शराब के साथ पुलिस ने उस बलेनो कार को भी जब्त कर लिया जिसका इस्तेमाल परिवहन के लिए किया जा रहा था। जब्त वाहन की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख 50 हजार रुपए बताई गई है।

    पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब पुलिस जब्त वाहन के आधार पर उसके मालिक और फरार चालक की पहचान करने में जुटी है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतनी मात्रा में शराब कहां से लाई जा रही थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।

    पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शराब के अवैध परिवहन से जुड़े नेटवर्क को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। वाहन के दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल मामले में आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान शराब के स्रोत और इसके परिवहन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आने की संभावना है।

  • IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त

    IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त


    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस बदलाव के तहत 1992 बैच के IAS अधिकारी नरेंद्र भूषण को पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं 1995 बैच के अधिकारी दिलीप कुमार को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना के साथ केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण विभागों में प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है।
    नरेंद्र भूषण इससे पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव तन्मय कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद किया गया है। तन्मय कुमार 1993 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी थे और 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उनके कार्यकाल के बाद पर्यावरण मंत्रालय में सचिव के पद पर नरेंद्र भूषण की नियुक्ति की गई है।

    नरेंद्र भूषण के पास प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में काम करने का अनुभव है। भूमि संसाधन विभाग में सचिव के तौर पर उनकी जिम्मेदारी के दौरान भूमि प्रबंधन और उससे जुड़े प्रशासनिक विषयों से संबंधित कामकाज उनके अधीन रहा। अब नई भूमिका में उनके सामने पर्यावरण संरक्षण वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर मंत्रालय के प्रशासनिक कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    इसी प्रशासनिक फेरबदल में दिलीप कुमार को भी नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। 1995 बैच के IAS अधिकारी दिलीप कुमार फिलहाल कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में महानिदेशक प्रशिक्षण के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वह नरेंद्र भूषण का स्थान लेंगे और विभाग के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    भूमि संसाधन विभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। भूमि से संबंधित नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ भूमि रिकॉर्ड में सुधार और भूमि संसाधन प्रबंधन जैसे विषय इसके कामकाज का हिस्सा हैं। ऐसे में दिलीप कुमार की नई नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। उनके सामने विभाग की मौजूदा योजनाओं और कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    केंद्र सरकार में वरिष्ठ IAS अधिकारियों की नियुक्तियां प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होती हैं। अलग अलग मंत्रालयों और विभागों में अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर सरकार अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है। इस ताजा बदलाव में भी दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अनुभव के अनुरूप महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

    एक ओर नरेंद्र भूषण अब पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के रूप में काम करेंगे तो दूसरी ओर दिलीप कुमार भूमि संसाधन विभाग में सचिव की भूमिका संभालेंगे। दोनों नियुक्तियों के साथ संबंधित मंत्रालयों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया क्रम प्रभावी हो गया है। यह बदलाव 30 सितंबर को तन्मय कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद सामने आया है और केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर इसे महत्वपूर्ण पदस्थापना के तौर पर देखा जा रहा है।

  • बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश

    बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश


    भोपाल । सोशल मीडिया पर इन दिनों बैंकों में हर शनिवार छुट्टी होने को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में भारत सरकार के राजपत्र यानी Gazette of India का हवाला देते हुए दावा किया जा रहा है कि 30 सितंबर 2026 से भारतीय स्टेट बैंक समेत देश के सभी सरकारी बैंकों में हर शनिवार अवकाश रहेगा। इस खबर के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया गया है।

    PIB Fact Check ने वायरल दावे की जांच करते हुए स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय की ओर से बैंकों में हर शनिवार छुट्टी घोषित करने के संबंध में ऐसा कोई गजट नोटिफिकेशन या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा कथित भारत सरकार का राजपत्र वास्तविक सरकारी दस्तावेज नहीं है। ऐसे में बैंक ग्राहकों को इस तरह की पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचनी चाहिए।

    मौजूदा व्यवस्था की बात करें तो देश के बैंकों में फिलहाल हर शनिवार छुट्टी नहीं होती है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में अवकाश रहता है। इसके अलावा पहले और तीसरे शनिवार को बैंक सामान्य रूप से काम करते हैं। यदि किसी महीने में पांचवां शनिवार आता है तो उस दिन भी बैंक खुले रहते हैं। इसलिए हर शनिवार बैंक बंद रहने की बात फिलहाल लागू नहीं हुई है।

    बैंकों में पांच दिन कामकाज यानी 5 Days Banking की मांग हालांकि काफी समय से चर्चा में है। बैंक कर्मचारी संगठनों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संगठनों की ओर से सभी शनिवार को अवकाश देने की मांग उठाई जाती रही है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA के बीच इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई है। इसी मांग को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन समिति के गठन या मांग पर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार ने पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था को मंजूरी दे दी है।

    फिलहाल इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में 30 सितंबर 2026 से सभी शनिवार को बैंकों में छुट्टी होने का दावा सही नहीं है। ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी छुट्टियों और कामकाज के समय की जानकारी के लिए आधिकारिक बैंक वेबसाइट या संबंधित बैंक की सूचना को ही आधार बनाना चाहिए।

    सोशल मीडिया पर सरकारी दस्तावेज जैसी दिखने वाली तस्वीरें और नोटिफिकेशन अक्सर लोगों के बीच तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी जानकारी को आगे साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच करना जरूरी है। खासकर बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी सूचना का असर सीधे ग्राहकों के लेनदेन और जरूरी कामों पर पड़ सकता है। इसलिए वायरल पोस्ट के आधार पर बैंक जाने या अपना जरूरी काम टालने के बजाय आधिकारिक सूचना की पुष्टि करना ज्यादा उचित है।

    फिलहाल देश के बैंकिंग नियमों में हर शनिवार छुट्टी की व्यवस्था लागू नहीं हुई है। दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक अवकाश की मौजूदा व्यवस्था ही प्रभावी है। यदि भविष्य में पांच दिन बैंकिंग को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला लिया जाता है तो उसकी जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए ही सामने आएगी।

  • मनिहारी दुकानें हटने से संकट में महिलाएं, कर्ज लेकर लाया दीपावली का सामान, अब बिक्री की चिंता

    मनिहारी दुकानें हटने से संकट में महिलाएं, कर्ज लेकर लाया दीपावली का सामान, अब बिक्री की चिंता


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद मनिहारी का सामान बेचकर परिवार चलाने वाली महिलाओं के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांधी चौक की सड़क पर लंबे समय से दुकानें लगाने वाली महिलाओं ने दुकान हटाए जाने के विरोध में बुधवार रात धरना शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना है कि वे कई वर्षों से इसी जगह पर छोटी दुकानें लगाकर अपना और परिवार का खर्च चलाती आ रही हैं। त्योहार का सीजन शुरू होने से पहले अचानक दुकान हट जाने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

    बुधवार को नगरीय प्रशासन की टीम ने अस्पताल चौराहा से माधव चौक तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इसी अभियान के दौरान गांधी चौक पर सड़क किनारे लगने वाली मनिहारी की दुकानों को भी हटा दिया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित महिलाओं ने गांधी चौक पर ही बैठकर विरोध जताया। उनका कहना है कि प्रशासन को दुकान हटाने से पहले उन्हें पर्याप्त समय देना चाहिए था ताकि वे अपना सामान व्यवस्थित कर सकें और वैकल्पिक जगह पर कारोबार शुरू करने की तैयारी कर सकें।

    महिलाओं के मुताबिक दीपावली का त्योहार नजदीक है और इसी उम्मीद में उन्होंने बड़ी मात्रा में सामान खरीदकर रखा था। कई दुकानदारों ने इसके लिए उधार लिया है। अब दुकान नहीं लग पा रही है तो सामान बिक नहीं रहा है और कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि त्योहार के दौरान मनिहारी के सामान की मांग बढ़ती है और इसी समय होने वाली बिक्री से उन्हें पूरे परिवार के खर्च में मदद मिलती है।

    धरने पर बैठी बसंती ने बताया कि वह वर्ष 1980 से गांधी चौक पर दुकान लगाती आ रही हैं। इतने लंबे समय से इसी छोटे कारोबार के जरिए उनका परिवार चलता रहा है। उनका कहना है कि अब उम्र अधिक हो चुकी है और उनके लिए दूसरा काम करना आसान नहीं है। दुकान हटने के बाद उनके सामने आय का कोई स्पष्ट साधन नहीं बचा है। इसलिए वह चाहती हैं कि प्रशासन उनकी स्थिति को देखते हुए दुकान लगाने के लिए कोई स्थायी और सुविधाजनक व्यवस्था करे।

    एक अन्य बुजुर्ग महिला मुन्नी ने बताया कि दीपावली के लिए उन्होंने कर्ज लेकर दुकान का सामान खरीदा है। इस कर्ज पर उन्हें ब्याज भी देना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से दुकान नहीं लगा पाने के कारण बिक्री पूरी तरह प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि यदि त्योहार तक उन्हें दुकान लगाने की अनुमति मिल जाए तो वे अपना खरीदा हुआ सामान बेचकर कर्ज चुका सकेंगी और परिवार का खर्च भी चला सकेंगी।

    वहीं प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ दुकानदारों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक स्थान भी चिन्हित किए गए हैं। यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव के मुताबिक हाथ ठेला संचालकों के लिए मंडी के पीछे ठंडी सड़क पर जगह तय की गई है। गांधी चौक की मनिहारी दुकानों के लिए मंडी के सामने टेकरी बाजार के मुख्य रास्ते पर स्थान चिन्हित किया गया है।

    प्रशासन का कहना है कि सड़क से अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है और साथ ही दुकानदारों के रोजगार को पूरी तरह खत्म करना नहीं है। दूसरी ओर महिलाओं की मांग है कि वैकल्पिक जगह ऐसी हो जहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहे और उनका कारोबार प्रभावित न हो। फिलहाल गांधी चौक पर महिलाओं का विरोध दुकान हटाने की कार्रवाई के बाद प्रशासन और छोटे दुकानदारों के बीच खड़े हुए रोजगार से जुड़े सवाल को सामने ला रहा है।

  • नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में नदी के अंदर मानव शरीर का निचला हिस्सा मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मामला रन्नौद थाना क्षेत्र का है जहां अकाझिरी और गुरुकुदवाया गांव के बीच बहने वाली नदी में ग्रामीणों की नजर मानव शरीर के अवशेष पर पड़ी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नदी से मिले अवशेष को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि अवशेष किसी महिला के हैं या पुरुष के।

    पुलिस के मुताबिक नदी में कमर से नीचे का हिस्सा मिला है। शरीर का पेट वाला हिस्सा धड़ और सिर मौके पर मौजूद नहीं था। शरीर के अन्य हिस्से नहीं मिलने के कारण मामला और भी उलझ गया है। पुलिस अब नदी के आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चला रही है। टीम का प्रयास है कि शरीर के बाकी हिस्सों का पता लगाया जा सके ताकि मृतक की पहचान करने में मदद मिल सके और मौत की परिस्थितियों को समझने के लिए जरूरी सुराग हासिल किए जा सकें।

    मानव शरीर का हिस्सा मिलने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी नदी के पास पहुंचने लगे। घटना को लेकर ग्रामीणों में चर्चा का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और अवशेष को सुरक्षित तरीके से पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़े दूसरे तथ्यों के सामने आने के बाद ही मौत की वास्तविक स्थिति के बारे में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

    प्रारंभिक जांच में नदी में मौजूद मगरमच्छ को लेकर भी एक संभावना सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि नदी में मौजूद मगरमच्छ ने शव के कुछ हिस्सों को खा लिया हो सकता है। इसी वजह से शरीर का बाकी हिस्सा मौके पर नहीं मिला हो ऐसी संभावना जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। इसे केवल शुरुआती जांच के दौरान सामने आया एक संभावित कारण माना जा रहा है। शरीर के अन्य हिस्से मिलने और जांच आगे बढ़ने के बाद ही इस पहलू की सच्चाई स्पष्ट होगी।

    पुलिस मौत की वजह को लेकर भी कई एंगल से जांच कर रही है। यह किसी हादसे का मामला है या व्यक्ति की किसी अन्य कारण से मौत हुई है या फिर मामला आपराधिक घटना से जुड़ा है इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान लापता हुए लोगों की जानकारी जुटा रही है। गांवों में ऐसे परिवारों से संपर्क किया जा रहा है जिनके किसी सदस्य के लापता होने की सूचना हो सकती है।

    मृतक की पहचान के लिए पुलिस को शरीर के अन्य हिस्सों के मिलने का इंतजार है। इसके साथ ही पोस्टमार्टम जांच और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से भी पहचान की दिशा में काम किया जाएगा। पुलिस नदी और आसपास के इलाकों में लगातार तलाश कर रही है। फिलहाल महिला या पुरुष की पहचान नहीं होने और शरीर के कई हिस्से गायब होने के कारण यह मामला रहस्य बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • रात में सो रहे 8 साल के बच्चे के साथ दर्दनाक हादसा सांप ने दो बार डसा अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत

    रात में सो रहे 8 साल के बच्चे के साथ दर्दनाक हादसा सांप ने दो बार डसा अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। बिजरौनी गांव में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात 8 साल के बच्चे को जहरीले सांप ने दो बार डस लिया। बताया जा रहा है कि पहली बार डसने के बाद सांप बच्चे के बिस्तर में ही छिपा रहा और कुछ देर बाद उसने दोबारा बच्चे को डस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद बच्चे की जान नहीं बच सकी।

    जानकारी के अनुसार 8 वर्षीय पुरुषोत्तम आदिवासी अपने परिवार के साथ बिजरौनी गांव में रहता था। उसके पिता अशोक आदिवासी मूल रूप से शिवपुरी जिले के धपोरा गांव के रहने वाले हैं। परिवार पिछले करीब तीन साल से बिजरौनी में रहकर हलवाई का काम करता है। बुधवार रात परिवार के बाकी सदस्यों की तरह पुरुषोत्तम भी तखत पर सो रहा था। रात करीब 12 बजे के आसपास वह हादसे का शिकार हो गया।

    परिजनों के मुताबिक सोते समय एक जहरीला कोबरा सांप बिस्तर में पहुंच गया। सांप ने पहले बच्चे के हाथ में डस लिया। पहली बार डसने के बाद परिवार को इसकी जानकारी हुई और उन्होंने बच्चे को संभालने की कोशिश की। इसी दौरान बताया जा रहा है कि सांप कंबल में ही छिपा रहा। कुछ समय बाद उसने बच्चे को दूसरी बार डस लिया। दो बार सांप के काटने के बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

    बच्चे की स्थिति गंभीर होती देख परिवार के लोग उसे तत्काल बदरवास अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे गुना जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन बिना देर किए बच्चे को लेकर गुना पहुंचे लेकिन उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। जानकारी के मुताबिक रात करीब 2 बजे इलाज के दौरान पुरुषोत्तम ने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक सामान्य माहौल था वहां अचानक चीख पुकार मच गई। परिजन बच्चे को बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।

    गुरुवार सुबह गुना जिला अस्पताल में बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजन शव को लेकर अपने गांव रवाना हुए।

    ग्रामीण इलाकों में रात के समय सांपों के घरों और बिस्तरों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बारिश और बदलते मौसम के दौरान सांप सुरक्षित जगह की तलाश में घरों में घुस सकते हैं। ऐसे में बिस्तर और कंबल इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचना जरूरी माना जाता है। इस घटना ने भी परिवारों को रात में सोने की जगह और आसपास के हिस्से को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। हालांकि इस मामले में बच्चे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में भी घटना को लेकर शोक का माहौल बना हुआ है।

  • आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बालाघाट पहुंचे राहुल गांधी जगला में पीड़ित परिवारों से मुलाकात पर सबकी नजर

    आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बालाघाट पहुंचे राहुल गांधी जगला में पीड़ित परिवारों से मुलाकात पर सबकी नजर


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक अक्टूबर को बालाघाट के बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचे हैं जहां वे बीमारी से जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं। राहुल गांधी गोंदिया से सड़क मार्ग के जरिए बालाघाट पहुंचे। उनके कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले लोगों की जांच के बाद प्रवेश दिया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद हैं।

    बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य व्यवस्था और पोषण से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से 32 बच्चों की मौत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कांग्रेस की ओर से इससे अधिक मौतों का दावा किया गया है। बैहर विधायक संजय उइके ने 43 बच्चों की मौत की बात कही है। ऐसे में सरकारी आंकड़े और विपक्ष की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों में अंतर भी इस पूरे मामले का अहम पहलू बन गया है। इन अलग अलग आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्थिति को अलग से देखना जरूरी है।

    राहुल गांधी के दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों से सीधे मुलाकात करना और उनकी स्थिति को समझना बताया गया है। वे जगला गांव में उन परिवारों से मिलेंगे जिन्होंने बीमारी के दौरान अपने बच्चों को खोया है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की मौत के पीछे एक ही कारण सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य जांच में मलेरिया खसरा कुपोषण एनीमिया डिहाइड्रेशन और सांस से जुड़ी परेशानियों जैसे कई स्वास्थ्य कारकों की जानकारी सामने आई है। इसलिए पूरे मामले को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

    इस मामले में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात भी सामने आई है। वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।

    बालाघाट का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी का हिस्सा काफी बड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत थी। विधानसभा की 230 सीटों में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है। लोकसभा में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

    विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2018 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में कांग्रेस ने 30 सीटें जीती थीं जबकि बीजेपी को 16 सीटें मिली थीं। 2023 के चुनाव में बीजेपी ने 24 एसटी आरक्षित सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 22 और भारत आदिवासी पार्टी को एक सीट मिली। ये आंकड़े बताते हैं कि आदिवासी क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व लगातार बना हुआ है।

    राहुल गांधी का बालाघाट दौरा ऐसे समय हो रहा है जब बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। बीजेपी ने इस दौरे को राजनीतिक लाभ से जोड़कर सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस प्रभावित परिवारों से मुलाकात को जमीनी स्थिति समझने का माध्यम बता रही है। अब राहुल गांधी की परिवारों से मुलाकात और उनके बाद सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

  • अमित शाह का भोपाल दौरा आज, 35 हजार गोपालकों से संवाद, 16.80 करोड़ के डेयरी प्लांट का शुभारंभ

    अमित शाह का भोपाल दौरा आज, 35 हजार गोपालकों से संवाद, 16.80 करोड़ के डेयरी प्लांट का शुभारंभ


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का मध्य प्रदेश दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के साथ होने जा रहा है। 3 अक्टूबर को भोपाल में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्य शामिल होने की जानकारी दी गई है। शाह के दौरे में पशुपालन और डेयरी के साथ सहकारिता शिक्षा बुनियादी ढांचे और नए आपराधिक कानूनों से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की है।
    शाह का मुख्य कार्यक्रम भेल दशहरा मैदान में होने वाला राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन रहेगा। इसमें प्रदेश के अलग अलग जिलों से पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों के पहुंचने की योजना है। कार्यक्रम में पशुपालकों को बोनस राशि देने के साथ गौशालाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराने और गोपालक दीदियों को सम्मानित करने की जानकारी सामने आई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना से जुड़े स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य में कृषक कल्याण वर्ष के तहत हुए काम और बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ी गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।

    अमित शाह के दौरे में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं भी प्रमुख रहेंगी। भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में 16.80 करोड़ रुपए की लागत से तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ प्रस्तावित है। इस परियोजना में केंद्र सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है जबकि भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने 10.80 करोड़ रुपए का योगदान किया है। प्लांट की कुल प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन 40 हजार लीटर बताई गई है। यहां दूध से दही छाछ लस्सी श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।

    इस प्लांट के जरिए सांची के दुग्ध कारोबार में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। परियोजना के तहत प्रतिदिन 10 हजार लीटर दूध और 10 हजार लीटर दही तैयार करने की क्षमता बताई गई है। इसके अलावा 30 हजार लीटर छाछ 1 हजार लीटर लस्सी 800 किलो श्रीखंड और 1 हजार किलो मावा तैयार करने की क्षमता भी प्रस्तावित है। इससे दुग्ध प्रसंस्करण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उत्पादों की विविधता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

    दौरे के दौरान उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित डेयरी प्लांट समेत प्रदेश की अन्य डेयरी प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस राशि देने तथा गौशालाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी कार्यक्रम का हिस्सा है। इससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन से जुड़े सहकारी नेटवर्क और प्रसंस्करण व्यवस्था को विस्तार देने पर फोकस दिखाई देता है।

    भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों से संबंधित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेगी। इसके बाद शाह भोपाल बायपास के पास भौरी स्थित IISER परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे। परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इस तरह उनका भोपाल दौरा डेयरी और पशुपालन से लेकर शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े कई क्षेत्रों को कवर करेगा।

    उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार शाह 2 अक्टूबर की रात भोपाल पहुंचेंगे और 3 अक्टूबर को दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद दिल्ली रवाना होंगे। पूरे दौरे में गोपालक सम्मेलन और डेयरी परियोजनाएं प्रमुख केंद्र में रहेंगी। प्रदेश सरकार की ओर से कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।