Category: Madhya Pradesh

  • अक्टूबर की शुरुआत में बड़ा झटका कमर्शियल गैस सिलेंडर 65 रुपए तक महंगा रीवा में सबसे ज्यादा रेट

    अक्टूबर की शुरुआत में बड़ा झटका कमर्शियल गैस सिलेंडर 65 रुपए तक महंगा रीवा में सबसे ज्यादा रेट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़े हुए दामों के साथ हुई है। तेल कंपनियों ने एक अक्टूबर से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। प्रदेश के अलग अलग शहरों में इसके दाम करीब 62.50 रुपए से लेकर 65 रुपए तक बढ़े हैं। नई कीमत लागू होने के बाद होटल रेस्टोरेंट ढाबे कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के लिए रसोई गैस का खर्च बढ़ गया है। इसका असर आने वाले दिनों में खाने पीने की चीजों और खासकर शादी समारोह की कैटरिंग के बजट पर भी दिखाई दे सकता है।

    राजधानी भोपाल में अब कमर्शियल सिलेंडर 2815 रुपए में मिलेगा। इंदौर में इसकी कीमत 2919 रुपए पहुंच गई है। जबलपुर में नया रेट 3030 रुपए है जबकि ग्वालियर में 3037 रुपए चुकाने होंगे। उज्जैन में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2980 रुपए हो गई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा कीमत रीवा में दर्ज की गई है जहां 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के लिए अब 3066 रुपए देने होंगे। यानी शहरों के बीच कीमत में अच्छा खासा अंतर देखने को मिल रहा है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी कमर्शियल गैस के दाम तीन हजार रुपए के पार पहुंच चुके हैं। रीवा के बाद सिंगरौली में कीमत 3064 रुपए है। सतना और नरसिंहपुर में सिलेंडर 3063.50 रुपए में मिलेगा। कटनी में नया रेट 3062.50 रुपए और पन्ना में 3061 रुपए हो गया है। जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के 26 जिलों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत तीन हजार रुपए या उससे अधिक है। वहीं शाजापुर और सीहोर में यह करीब 2822 रुपए में उपलब्ध होगा।

    कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ता है जो रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करते हैं। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए सिलेंडर की कीमत पहले से ही बड़ा खर्च बनी हुई है। रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि और कैफे संचालक अभिषेक बाहेती के मुताबिक गैस संकट से पहले कमर्शियल सिलेंडर करीब 1800 रुपए में मिलता था। बाद में इसकी कीमत बढ़ते हुए करीब 3300 रुपए तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में कमी आई लेकिन पिछले दो महीनों से फिर बढ़ोतरी का सिलसिला देखा जा रहा है।

    शादी समारोह के कारोबार से जुड़े कैटरर्स पर भी बढ़ी कीमत का असर पड़ सकता है। दीवाली के बाद प्रदेश में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है और इस दौरान बड़े स्तर पर कैटरिंग का काम होता है। खाना तैयार करने में बड़ी मात्रा में एलपीजी की खपत होने के कारण सिलेंडर की कीमत बढ़ने से आयोजन का कुल बजट प्रभावित हो सकता है। कैटरिंग संचालकों के अनुसार बढ़ी हुई लागत का असर अंततः ग्राहकों के पैकेज पर भी पड़ सकता है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14 किलो वाला घरेलू सिलेंडर पुराने दाम पर ही मिल रहा है। भोपाल में इसकी कीमत 947.50 रुपए है। इंदौर में 970 रुपए और जबलपुर में 948.50 रुपए में घरेलू सिलेंडर उपलब्ध है। ग्वालियर में इसका दाम 1025.50 रुपए जबकि उज्जैन में 1001.50 रुपए है। इस तरह अक्टूबर में बढ़ोतरी का असर फिलहाल कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर ही पड़ा है।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से ज्यादा वसूली का आरोप ₹2 का टॉयलेट ₹10 में और दो लोगों से ₹40 लेने का दावा

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से ज्यादा वसूली का आरोप ₹2 का टॉयलेट ₹10 में और दो लोगों से ₹40 लेने का दावा


    भोपाल । भोपाल रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह स्वच्छता कार्यक्रम के दौरान पे एंड यूज टॉयलेट को लेकर यात्रियों की शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। खास बात यह रही कि जिस समय स्टेशन परिसर में स्वच्छता कार्यक्रम चल रहा था उसी दौरान भोपाल रेल मंडल के DRM पंकज त्यागी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे। इसी दौरान कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि फ्री यूरिनल के लिए भी पैसे मांगे जा रहे हैं जबकि तय शुल्क से ज्यादा रकम लेकर टॉयलेट इस्तेमाल करने दिया जा रहा है। यात्रियों की ओर से मौके के वीडियो भी बनाए गए हैं जिनमें काउंटर पर शुल्क को लेकर बातचीत होती दिखाई दे रही है।

    रेलवे की निर्धारित दरों के अनुसार भोपाल स्टेशन पर यूरिनल की सुविधा नि:शुल्क बताई गई है। वहीं टॉयलेट के लिए 2 रुपए और टॉयलेट के साथ स्नान की सुविधा के लिए 5 रुपए शुल्क निर्धारित है। सामने आए वीडियो में एक यात्री काउंटर पर मौजूद कर्मचारी से शुल्क के बारे में पूछता नजर आता है। यात्री बोर्ड पर फ्री लिखा होने की बात कहता है और इसके बावजूद पैसे मांगे जाने पर सवाल करता है। वीडियो में कर्मचारी की ओर से रकम लेने की स्थिति दिखाई देती है।

    यात्री संतोष यादव ने आरोप लगाया कि वह स्टेशन के टॉयलेट का इस्तेमाल करने गए थे। वहां निर्धारित शुल्क 2 रुपए लिखा होने के बावजूद उनसे 10 रुपए मांगे गए और उन्होंने 10 रुपए दिए। इसी तरह यात्री गगन गौर ने दावा किया कि दो लोग टॉयलेट और स्नान के लिए गए थे और उनसे कुल 40 रुपए लिए गए। हालांकि इन यात्रियों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि स्टेशन प्रबंधन के रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसी के जवाब से होना बाकी है।

    मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि आरोप उस समय सामने आए जब स्टेशन परिसर में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इससे पे एंड यूज सुविधा की निगरानी और निर्धारित दरों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि अगर शुल्क तय है तो काउंटर पर उसी के अनुसार राशि ली जानी चाहिए और फ्री सुविधा के लिए किसी यात्री से पैसे नहीं मांगे जाने चाहिए।

    इस मामले में DRM पंकज त्यागी से भी पक्ष जानने की कोशिश की गई। उनसे फ्री यूरिनल के लिए पैसे मांगे जाने और निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लेने की शिकायतों को लेकर सवाल किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया था। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे प्रशासन वीडियो और यात्रियों की शिकायतों के आधार पर क्या कार्रवाई करता है।

    मामला सिर्फ भोपाल रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है। सामने आई जानकारी के अनुसार रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को यूरिनल के लिए शुल्क देना पड़ रहा है। वहां पे एंड यूज व्यवस्था के तहत यूरिनल के लिए 5 रुपए टॉयलेट के लिए 10 रुपए और स्नान के लिए 15 रुपए लिए जाने की बात सामने आई है। यह व्यवस्था भोपाल स्टेशन पर बताई गई निर्धारित दरों से अलग है।

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में शुल्क को लेकर स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों का पालन यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल भोपाल स्टेशन पर सामने आए वीडियो और यात्रियों के आरोपों के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। अब रेलवे प्रशासन की जांच और आधिकारिक जवाब से ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली हुई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

  • अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा

    अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा


    भोपाल ।  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में दौरे से जुड़े इंतजामों के साथ ही सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों से पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में संभावित बदलावों को लेकर जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने आने वाले समय में फिर से शुरू की जाने वाली पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुझावों और प्रक्रिया में किए जाने वाले संभावित बदलावों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि विभागीय स्तर पर लंबित मामलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए और संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाए।

    बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह समेत अन्य मंत्री भी मौजूद रहे। मंत्रियों ने अपने अपने विभागों से संबंधित विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखी। विभागीय योजनाओं की प्रगति और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। पशुपालन विभाग से जुड़े मामलों को भी बैठक में विशेष रूप से शामिल किया गया क्योंकि अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान इस विभाग से संबंधित योजनाओं का शुभारंभ प्रस्तावित है।

    अमित शाह मध्यप्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके कार्यक्रम में भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार किए गए फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर को इस संयंत्र का उद्घाटन किया जाएगा। इस प्लांट को मध्यप्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर तैयार किया गया है।

    फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट की कुल परियोजना लागत 16.80 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें भारत सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है जबकि भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने 10.80 करोड़ रुपए का अंशदान किया है। प्लांट की दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 40 हजार लीटर प्रतिदिन है। इसके जरिए दूध से जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाने की योजना है।

    अमित शाह के दौरे को लेकर सरकार और प्रशासन की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री की बैठक में कार्यक्रमों से जुड़े विभागों को लेकर अलग अलग स्तर पर चर्चा हुई। साथ ही शासन के स्तर पर चल रही पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया भी बैठक के प्रमुख विषयों में रही। ऐसे में एक ही बैठक में प्रशासनिक मामलों और केंद्रीय मंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों पर चर्चा हुई।

    अब अमित शाह के दौरे से जुड़े कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने के साथ ही संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां तय करने पर फोकस है। वहीं पदोन्नति प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए सुझावों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन मामलों से जुड़े फैसलों और कार्यक्रमों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • भोपाल IAS मर्डर केस: घर में गला रेती लाश और फरार केयरटेकर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती लूट से लेकर पुराने विवाद तक जांच

    भोपाल IAS मर्डर केस: घर में गला रेती लाश और फरार केयरटेकर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती लूट से लेकर पुराने विवाद तक जांच


    नई दिल्ली। भोपाल के रातीबड़ इलाके के सूरज नगर में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच कई एंगल पर आगे बढ़ रही है। 30 सितंबर की सुबह अग्रवाल अपने घर में मृत मिले थे। उनके गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के निशान थे। घटना के बाद पुलिस ने घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ ही उनके पुराने विवादों और हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच में करीब 11 महीने पुराने एक करोड़ रुपए से अधिक के कथित धोखाधड़ी मामले का एंगल भी सामने आया है। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुराने मामले का हत्या से सीधा संबंध है।

    जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत की थी। आरोप था कि कंपनी में निवेश कराने और बेहतर रिटर्न दिलाने का भरोसा देकर उनसे एक करोड़ रुपए से अधिक की रकम अलग अलग किस्तों में ली गई थी। रकम वापस नहीं मिलने के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में पुलिस ने अजीत पाटनी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था और उसे गिरफ्तार किया गया था। अब इसी मामले में अग्रवाल की गवाही और अदालत में चल रही कार्रवाई को भी पुलिस जांच के दायरे में रख रही है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या गवाही या कोर्ट की कार्रवाई को लेकर राकेश अग्रवाल पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था। हालांकि अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि पुराने धोखाधड़ी मामले के कारण ही हत्या हुई। पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।

    इस बीच हत्या की जांच में घर के केयरटेकर अरुण का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस के अनुसार वारदात रात करीब 12 बजे से 2 बजे के बीच होने की आशंका है। इसके बाद करीब 2 बजकर 15 मिनट पर अरुण सीसीटीवी कैमरे में सूरज नगर से भदभदा की तरफ जाता दिखाई दिया। फुटेज में उसके पास पिट्ठू बैग भी नजर आने की बात सामने आई है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस की पांच टीमें और क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में जुटी हैं। उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई बीना रोड की ओर मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

    पुलिस लूट के एंगल की भी जांच कर रही है। घर में सामान और अलमारी की स्थिति को देखते हुए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हत्या के पीछे चोरी या लूट का मकसद था। इसके साथ ही मृतक के पुराने मामलों कोर्ट से जुड़े दस्तावेज परिचितों और हाल के संपर्कों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

    पुलिस को यह भी पता चला है कि केयरटेकर को एक होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। पुलिस एजेंसी के कार्यालय पहुंचकर उसके दस्तावेज नौकरी से जुड़ी जानकारी और पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित रिकॉर्ड जुटा रही है। इन दस्तावेजों के आधार पर उसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस केयरटेकर की गिरफ्तारी को अहम मान रही है। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के बाद हत्या की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। मुख्यमंत्री ने भी डीजीपी को मामले की निगरानी करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस पुराने धोखाधड़ी विवाद लूट और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।

  • MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

    MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले 2 से 3 दिन में हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन नमी के असर से कुछ जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। मानसून की विदाई के साथ ही बारिश का यह दौर भी खत्म हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस बार मानसूनी सीजन के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई। इसका असर सीजन के कुल बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में अब तक सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी रिकॉर्ड नहीं हुई, जबकि निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश हुई है।

    अब जो बारिश होगी, वह ‘बोनस’ जैसी

    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की आधिकारिक विदाई होने तक नमी के कारण बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। इसे मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश के आंकड़े में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी विदाई से पहले होने वाली यह बारिश सीजन के आंकड़ों के लिहाज से एक तरह से अतिरिक्त यानी ‘बोनस’ बारिश होगी।

    आज इन जिलों में बूंदाबांदी-गरज चमक

    मौसम विभाग ने गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक का अनुमान जताया है।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा और तेज धूप खिलने के आसार हैं।

    प्रदेश में अब तक 35.8 इंच बारिश

    IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से 4% कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में सामान्य कोटा पूरा हो चुका है। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इनमें आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की विदाई के साथ अब प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। अगले कुछ दिनों तक जहां कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज-चमक हो सकती है, वहीं ज्यादातर हिस्सों में धूप बढ़ने के आसार हैं।

  • रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    मध्य प्रदेश: के रायसेन जिले से वन्यजीवों से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई है। ओबेदुल्लागंज तहसील के दाहोद फॉरेस्ट रेंज के कागवान इलाके में एक किसान के खेत में 6 से 7 साल की वयस्क बाघिन मृत अवस्था में मिली। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि खेत में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघिन की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार ने बताया कि बाघिन का शव सोमवार शाम जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर कागवान इलाके में किसान के खेत से बरामद किया गया। शुरुआती जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बिजली का झटका लगने की आशंका सामने आई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों की टीम मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

    वन विभाग के अनुसार, बाघिन के शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के तहत कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का नियमानुसार निस्तारण कर दिया गया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और खेत में मौजूद बिजली के तार की इसमें क्या भूमिका रही।

    मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट कहा जाता है। साल 2022 की राष्ट्रीय बाघ जनगणना में राज्य में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या थी। प्रदेश में वर्तमान में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं। ऐसे में किसी बाघ या बाघिन की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

    खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार बिछाए जाने से वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती है। रायसेन की इस घटना में भी बिजली के तार से करंट लगने की आशंका सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क है। हालांकि, बाघिन की मौत का सटीक कारण जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर

    MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर


    भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस में सितंबर के बड़े फेरबदल के बाद एक बार फिर नई पोस्टिंग को लेकर हलचल तेज होने की चर्चा है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक संभावित बदलाव को लेकर अलग अलग स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। 13 सितंबर को गृह विभाग ने 137 पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया था। इसमें 10 IPS और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल थे। अब एक बार फिर करीब 15 जिलों में SP स्तर पर बदलाव की संभावना की चर्चा सामने आ रही है। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में DCP स्तर की जिम्मेदारियों पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि इन सभी संभावित बदलावों की अंतिम तस्वीर गृह विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नई पोस्टिंग की चर्चा के पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। IPS अधिकारियों के प्रमोशन के बाद कुछ मौजूदा पद खाली हो सकते हैं। ऐसे में उन रिक्तियों को भरने के लिए नई पदस्थापनाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इस संभावित सूची को केवल सामान्य तबादला प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है बल्कि प्रमोशन के बाद बनने वाले नए प्रशासनिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

    जिला पुलिस अधीक्षक स्तर पर जबलपुर निवाड़ी सीधी ग्वालियर रतलाम छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों को लेकर बदलाव की चर्चा है। हालांकि अभी किसी अधिकारी का नाम या पदस्थापना तय नहीं मानी जा सकती। सरकारी आदेश जारी होने तक संभावित नाम और जिलों को लेकर सामने आ रही जानकारी को सिर्फ चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।

    संभावित फेरबदल का असर केवल जिलों तक सीमित रहने की बात नहीं है। ग्वालियर और जबलपुर रेंज की वरिष्ठ कमान में भी बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय बटालियन और रेडियो जैसे महत्वपूर्ण विभागों में तैनात अधिकारियों को लेकर भी नई जिम्मेदारियों के विकल्प सामने आ सकते हैं। यदि फील्ड और मुख्यालय स्तर पर एक साथ बदलाव होता है तो पुलिस महकमे में कई स्तरों पर नई प्रशासनिक जमावट देखने को मिल सकती है।

    भोपाल और इंदौर पर इसलिए भी विशेष नजर है क्योंकि दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है और DCP स्तर के पद फील्ड पुलिसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिक्त पदों या प्रमोशन के कारण बनने वाली नई जगहों पर किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है यह आने वाले आदेशों से साफ हो सकता है। फिलहाल इन पदों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    इस संभावित फेरबदल में कुछ अपेक्षाकृत जूनियर IPS अधिकारियों को फील्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना की चर्चा भी है। यदि ऐसा होता है तो जिलों और कमिश्नरेट में नई पीढ़ी के अधिकारियों को कमांड की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर प्रमोशन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की नई भूमिका तय होने से कई मौजूदा पदों पर बदलाव की जरूरत भी बन सकती है।

    इस बीच पुलिस महकाने में DGP पद से जुड़ा भविष्य का समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेगा। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक बताया गया है। इसलिए आने वाले महीनों में होने वाली वरिष्ठ IPS अधिकारियों की पदस्थापनाओं को केवल तत्काल जिला स्तर के बदलाव के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। शीर्ष पुलिस नेतृत्व से जुड़ी आगामी प्रक्रिया का असर भी प्रशासनिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सितंबर में 137 अधिकारियों की पोस्टिंग के कुछ ही समय बाद नई सूची की चर्चा क्यों शुरू हुई है। इसके पीछे प्रमोशन रिक्त पद और प्रशासनिक जरूरत जैसे सामान्य कारण हो सकते हैं। बार बार तबादला होना अपने आप में किसी प्रशासनिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब निगाह गृह विभाग के अगले आदेश पर है। आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बदलाव कितने जिलों तक सीमित रहता है और क्या इसका असर SP से लेकर IG और DCP स्तर तक दिखाई देता है।

  • MP: स्वामित्व योजना पर गतिरोध जारी….सरकार ने शुरू की पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी

    MP: स्वामित्व योजना पर गतिरोध जारी….सरकार ने शुरू की पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी


    भोपाल।
    स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत रजिस्ट्री से जुड़े काम को लेकर सरकार और पटवारियों (Government and Patwaris) के बीच गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। सरकार के निर्देश के बावजूद पटवारी इस काम को करने के लिए तैयार नहीं हैं। अब सरकार ने पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जिलों से उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और शिकायतों की जानकारी मांगी गई है।

    राजस्व विभाग (Department of Revenue) ने सभी जिलों को एक प्रारूप भेजकर पटवारियों के खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के साथ लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच और प्रकरणों की जानकारी भी मांगी गई है। सरकार ने ऐसे मामलों का भी ब्योरा मांगा है, जिनमें पटवारियों की आय से अधिक संपत्ति की शिकायत या प्रकरण सामने आए हों। इसके अलावा लंबे समय से अभियोजन की मंजूरी लंबित मामलों और जांच एजेंसियों की जांच में दोषी पाए गए पटवारियों की जानकारी भी मांगी गई है। जिलों से यह भी पूछा गया है कि संबंधित मामलों में आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।


    रजिस्ट्री के काम को लेकर नहीं बनी सहमति

    स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री के काम से पटवारियों ने दूरी बना रखी है। पटवारी संघ का कहना है कि वे योजना से जुड़े काम के अलावा दूसरे राजस्व कार्य कर रहे हैं। संघ का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद अभी तक इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बनी है। पटवारियों की आपत्ति को दूर करने के लिए सरकार की ओर से उन्हें कुछ आश्वासन भी दिए गए थे। इनमें रजिस्ट्री के दस्तावेजों में पटवारियों के नाम नहीं लिखे जाने और विवादित मामलों की रजिस्ट्री का काम नहीं सौंपे जाने की बात शामिल थी। चार मंत्रियों की समिति ने भी पटवारियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी। इसके बावजूद पटवारियों ने स्वामित्व योजना से जुड़े रजिस्ट्री कार्य से दूरी बनाए रखी है।


    अब पुराने प्रकरणों पर कार्रवाई की तैयारी

    पटवारियों के काम नहीं करने के रुख के बाद मुख्य सचिव ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम गुरुवार से शनिवार तक करने के निर्देश दिए थे। साथ ही काम से इनकार करने वाले पटवारियों पर कार्रवाई की बात भी कही गई थी। अब सरकार ने जिलों से पुराने प्रकरणों की जानकारी मांगकर अगला कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि पटवारी संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के काम को लेकर उनका रुख अभी नहीं बदला है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पटवारियों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।

  • MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था

    MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के करैरा (Karera) में पुलिस लाइन के नीचे बने ‘पीपल वाले कुएं’ में एक महिला और उसके बेटे का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. घटना की सूचना मिलते ही करैरा थाना प्रभारी (टीआई) विनोद छाबई पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. पुलिस ने नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की मदद से दोनों शवों को कुएं से बाहर निकाला और पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

    मृतका की पहचान शिवानी विश्वकर्मा पत्नी भूपेंद्र विश्वकर्मा निवासी करैरा के रूप में हुई है. दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई है कि महिला ने अपने 7 साल के मासूम बेटे को अपने दुपट्टे से बांधकर कुएं में छलांग लगाई थी.


    पति से विवाद के बाद दिल्ली से आई थी मायके

    परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, शिवानी का अपने पति भूपेंद्र से विवाद चल रहा था. इसी अनबन के कारण वह करीब एक से डेढ़ महीने पहले दिल्ली से अपने 7 वर्षीय बेटे को लेकर करैरा स्थित अपने मायके आई हुई थी।


    ‘वोट चोरी नहीं हो रहे, जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया…
    ‘
    मंगलवार को महिला और उसका बेटा अचानक घर से लापता हो गए थे. परिजनों ने उस वक्त ज्यादा खोजबीन नहीं की, क्योंकि उन्हें लगा कि शिवानी अपने पति से बात करके वापस दिल्ली लौट गई होगी. लेकिन बुधवार को जब कुएं में दोनों के शव मिलने की खबर फैली, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

    पूरे मामले पर करैरा टीआई विनोद छाबई ने बताया, ”पुलिस लाइन के नीचे स्थित कुएं में महिला और उसके बच्चे का शव बरामद किया गया है. प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. मौत के सटीक कारणों और समय का वास्तविक खुलासा पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

  • गांव में शराब लेकर पहुंचना पड़ा भारी, महिलाओं ने युवक को पकड़ा, खंभे से बांधा और पेटियों में लगाई आग

    गांव में शराब लेकर पहुंचना पड़ा भारी, महिलाओं ने युवक को पकड़ा, खंभे से बांधा और पेटियों में लगाई आग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला। मंगलवार को समोहा गांव में शराब की पेटियां लेकर पहुंचे दो बाइक सवारों को महिलाओं ने घेर लिया। दोनों युवकों ने मौके से भागने की कोशिश की लेकिन महिलाओं ने उनका पीछा कर लिया और पीछे बैठे एक व्यक्ति को पकड़ लिया। इसके बाद महिलाओं ने शराब की पेटियां अपने कब्जे में लेकर उन्हें सड़क पर फेंक दिया और आग लगा दी। पकड़े गए युवक को रस्सी से एक खंभे में बांध दिया गया और पुलिस को पूरे मामले की सूचना दी गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें महिलाओं का विरोध और शराब की पेटियों को जलाने का दृश्य दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को दो बाइक सवार समोहा गांव में शराब की पेटियां लेकर पहुंचे थे। गांव में उनकी गतिविधियों को देखकर महिलाओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की। बाइक सवारों ने वहां से निकलने का प्रयास किया लेकिन महिलाएं उनके पीछे दौड़ पड़ीं। इस दौरान एक व्यक्ति महिलाओं के हाथ लग गया जबकि दूसरा मौके से निकल गया। महिलाओं ने पकड़े गए युवक को रस्सी से खंभे से बांध दिया। इसके बाद शराब की पेटियों को सड़क पर रखकर उनमें आग लगा दी गई। मामले की सूचना मिलने के बाद करैरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अपने साथ थाने ले गई।

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान सुरेंद्र राय के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और गांव में इसकी सप्लाई कौन कर रहा था। साथ ही दूसरे बाइक सवार और शराब की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

    वहीं गांव की महिलाओं का आरोप है कि समोहा में कई जगहों पर अवैध तरीके से शराब बेची जा रही है। महिलाओं का दावा है कि गांव में करीब तीन स्थानों पर शराब की बिक्री होती है और कुछ लोग परचून की दुकानों की आड़ में शराब बेच रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में आसानी से शराब उपलब्ध होने के कारण परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। महिलाओं ने प्रशासन और पुलिस से अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।

    महिलाओं के इस विरोध को हाल में सागर में शराब से हुई मौतों के बाद शराब की अवैध बिक्री को लेकर बढ़ी चिंता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि शिवपुरी की इस घटना में पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शराब की सप्लाई का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है। फिलहाल गांव में महिलाओं के इस तरह सड़क पर उतरकर विरोध करने की घटना चर्चा में है। पुलिस ने पकड़े गए युवक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और अवैध शराब की बिक्री से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।