Category: Madhya Pradesh

  • हरित परिवहन की ओर कदम, 500 किमी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार काफिले में शामिल

    हरित परिवहन की ओर कदम, 500 किमी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार काफिले में शामिल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब मुख्यमंत्री अपने आधिकारिक दौरे और आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री के काफिले में पहली बार एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है।

    मुख्यमंत्री के लिए खरीदी गई नई इलेक्ट्रिक कार Mahindra XEV 9e बुधवार से आधिकारिक तौर पर उनके काफिले का हिस्सा बन जाएगी। मुख्यमंत्री आज शाम भोपाल से दिल्ली रवाना होते समय मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक इसी इलेक्ट्रिक वाहन से यात्रा करेंगे। इस पहल को हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

    इस नई कार को विशेष वीआईपी नंबर MP 02 VB 2047 आवंटित किया गया है। यहां ‘VB’ का अर्थ ‘विकसित भारत’ है, जबकि ‘2047’ भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर संकेत करता है। इस नंबर के माध्यम से सरकार ने विकसित भारत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री इससे पहले भी ईंधन की खपत कम करने के लिए अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा चुके हैं। जहां पहले उनके काफिले में 13 वाहन शामिल रहते थे, वहीं बाद में इसे घटाकर 7 वाहन कर दिया गया। उनकी इस पहल के बाद कई मंत्रियों और अधिकारियों ने भी कम वाहनों के उपयोग और कार पूलिंग को अपनाया।

    नई इलेक्ट्रिक कार आधुनिक तकनीक और उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। इसमें 79kWh क्षमता का बैटरी पैक दिया गया है, जो एक बार चार्ज होने पर 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम बताया गया है। वाहन में 286 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो बेहतरीन प्रदर्शन और तेज रफ्तार प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार यह कार महज 7.45 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है।

    इंटीरियर की बात करें तो वाहन में 16-स्पीकर प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, ऑगमेंटेड रियलिटी हेड-अप डिस्प्ले, पैनोरमिक ग्लास रूफ, वायरलेस चार्जिंग और मल्टीकलर एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा ‘पेट मोड’ और ‘कैंपिंग मोड’ जैसे विशेष फीचर भी दिए गए हैं।

    सुरक्षा के लिहाज से कार में 360 डिग्री कैमरा, सर्विलांस मोड, मल्टीपल एयरबैग्स, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और अन्य आधुनिक सुरक्षा तकनीकें मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा वाहन की जांच पूरी कर ली गई है और ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।

    मुख्यमंत्री के काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन की एंट्री को सरकारी स्तर पर ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी जाएगा।

  • साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी

    साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने एक युवती को निशाना बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.48 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर पहले क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया और बाद में राशि वापस दिलाने के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा।

    कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला।

    करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा।

    पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।

  • 7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

    7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी



    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने न केवल नाबालिग को शादी का झूंठा दिलासा दिया, बल्कि समाज की नजरों से बचने के लिए उसे सात महीने तक एक किराए के कमरे में अपनी पत्नी बताकर रखा। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अचानक उसे बेसहारा छोड़कर गायब हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।

    घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी। पीड़ित 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने हजीरा थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, उसका भाई डीजे (DJ) संचालन का काम करता है। इसी काम के सिलसिले में हजीरा थाना क्षेत्र के यादव धर्मकांटा का रहने वाला राहुल राठौर नाम का युवक उसके भाई के साथ काम करता था। भाई के साथ दोस्ती होने के कारण राहुल का पीड़िता के घर पर अक्सर आना-जाना होने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी पहचान और फिर दोस्ती में बदल गई। समय बीतने के साथ ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई, जिसका फायदा उठाने की साजिश आरोपी ने पहले ही रच ली थी।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी राहुल राठौर ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का पक्का वादा किया। इसके बाद वह उसे बहला-फुसलाकर धर्मकांटा इलाके के पास एक किराए के मकान में ले गया। बीते 2 अक्टूबर 2025 से वह नाबालिग को उसी कमरे में रखकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। शातिर आरोपी ने मकान मालिक को शक न हो, इसलिए नाबालिग का परिचय अपनी ‘पत्नी’ के रूप में कराया था। इस दौरान जब भी नाबालिग उस पर सामाजिक रीति-रिवाज से शादी करने का दबाव बनाती या शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करती, तो आरोपी राहुल जल्द ही शादी का मंडप सजाने की बात कहकर उसे चुप करा देता था। इसी बीच आरोपी ने डीजे का काम छोड़कर टमटम (ई-रिक्शा) चलाना भी शुरू कर दिया था ताकि वह गुजारा कर सके।

    विश्वासघात की पराकाष्ठा तब हुई जब बीते दिनों आरोपी राहुल अचानक नाबालिग को कमरे पर ही छोड़कर लापता हो गया। पीड़िता ने जब उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा। खुद को ठगा और अकेला पाकर पीड़िता न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण तुरंत ऐक्शन लिया। पुलिस ने आरोपी राहुल राठौर के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

  • कार की टक्कर से युवक की मौत, बेहट रोड पर छात्र भी हादसे का शिकार

    कार की टक्कर से युवक की मौत, बेहट रोड पर छात्र भी हादसे का शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के उटीला थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम कुछ घंटों के भीतर हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने इलाके में सनसनी फैला दी। एक हादसे में शोक सभा में शामिल होने जा रहे युवक की तेज रफ्तार कार की टक्कर से मौत हो गई, जबकि दूसरे हादसे में कोचिंग के लिए जा रहे एक छात्र को एम्बुलेंस ने टक्कर मार दी। दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला हादसा टांकोली गांव के पास हुआ, जहां गोल पहाड़िया निवासी प्रीतम सिंह सोलंकी रिश्तेदारी में आयोजित शोक सभा में शामिल होने पहुंचे थे। वह बस से उतरने के बाद सड़क पार कर रहे थे, तभी सामने से तेज गति से आ रही एक सफेद वैगनआर कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रीतम सिंह कई फीट दूर जा गिरे और उनके सिर तथा सीने में गंभीर चोटें आईं।

    घटना की सूचना मिलते ही उटीला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में अज्ञात वैगनआर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है।

    इसी क्षेत्र में दूसरा हादसा मुरार-भेहट रोड पर सामने आया। टिहोली गांव निवासी छात्र संदीप पाल अपनी साइकिल से कोचिंग जाने के लिए निकला था। मुख्य सड़क पार करते समय ग्वालियर की ओर से आ रही 108 एम्बुलेंस ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और सड़क किनारे जा गिरा।

    स्थानीय लोगों और राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्र को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है और चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है।

    दोनों घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है। टांकोली हादसे में फरार कार चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, जबकि एम्बुलेंस चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों के बीच प्रशासन और पुलिस लोगों से यातायात नियमों का पालन करने तथा वाहन चालकों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील कर रही है।

  • केबल कारोबार के विवाद ने लिया हिंसक रूप, गोलीकांड का आरोपी गिरफ्तार

    केबल कारोबार के विवाद ने लिया हिंसक रूप, गोलीकांड का आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर । ग्वालियर में केबल नेटवर्क कारोबार को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। कोटेश्वर कॉलोनी निवासी केबल संचालक विक्की यादव का अपहरण कर उसे गोली मारने वाले 10 हजार रुपए के इनामी बदमाश छोटू कमरिया को पुलिस ने मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पिछले कई दिनों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।

    पुलिस के अनुसार, इस सनसनीखेज वारदात के पीछे केबल नेटवर्क कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर चल रहा विवाद मुख्य कारण है। घायल विक्की यादव शहर में डिस्क और केबल नेटवर्क व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि छोटू कमरिया और उसके साथी विक्की के कारोबार में जबरन साझेदारी चाहते थे। जब विक्की ने उनकी मांग ठुकरा दी तो आरोपियों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

    घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। आरोपियों ने विक्की यादव को बातचीत और समझौते का झांसा देकर बुलाया और उसे जबरन कार में बैठा लिया। इसके बाद उसे सिटी सेंटर क्षेत्र की ओर ले जाया गया। रास्ते में और सुनसान स्थान पर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। जब वह गंभीर रूप से घायल हो गया तो उस पर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने के बाद आरोपी उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर फरार हो गए।

    घटना के बाद पुलिस ने अपहरण और हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहे थे, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस अधीक्षक ने मुख्य आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।

    मंगलवार रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि इनामी बदमाश छोटू कमरिया बेहटा चौकी के पास हाईवे पर किसी वाहन का इंतजार कर रहा है और शहर छोड़ने की तैयारी में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी। सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई।

    जैसे ही छोटू कमरिया ने पुलिस को देखा, उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उसे पीछा कर दबोच लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि इस मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है। पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा होने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल घायल विक्की यादव का उपचार जारी है और पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

  • इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद

    इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने शहर में सक्रिय एक हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। इंदरगंज थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 94 लाख 25 हजार रुपए मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। बरामदगी में सोना, चांदी, नकदी और चोरी के पैसों से खरीदी गई एक कार शामिल है। पुलिस इसे वर्ष 2026 की सबसे बड़ी रिकवरी मान रही है।

    इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से सूने मकानों को निशाना बनाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे।

    मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज क्षेत्र निवासी अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की बड़ी वारदात हुई। मकान सूना होने का फायदा उठाकर चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपए के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह का सरगना विवेक प्रजापति अपने साथियों और परिजनों से संपर्क करने के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नहीं करता था। वह इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करता था, ताकि उसकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। गिरफ्तारी के बाद भी उसने करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।

    आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। यहां से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद की गई। पुलिस ने चोरी के गहने खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी विवेक सोनी को भी गिरफ्तार किया है।

    सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक अब तक गिरोह के कई सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति, फरहान खान, आकाश माहौर, मयूर राठौर, एक नाबालिग आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाला सुनार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी तथा चोरी की रकम से खरीदी गई आई-20 कार जब्त की है।

    पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित अपराधों और नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है।

  • देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत

    देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत


    देवास । देवास जिले के विजयागंज मंडी क्षेत्र स्थित बरखेड़ा गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। खेत में चरी काटने गए 22 वर्षीय युवक की टूटे हुए बिजली तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, वहीं परिजनों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    मृतक की पहचान अरुण मालवीय (22) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार शाम अरुण अपने खेत पर चरी काटने गया था। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन का तार अचानक टूटकर नीचे आ गिरा और वह उसकी चपेट में आ गया। करंट लगने से अरुण की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिजनों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजरने वाली बिजली लाइन के तार लंबे समय से नीचे झूल रहे थे और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। इस संबंध में कई बार बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई थी, लेकिन डेढ़ से दो वर्षों के दौरान समस्या का समाधान नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते तारों की मरम्मत कर दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

    घटना का पता तब चला जब काफी देर तक अरुण का मोबाइल फोन नहीं उठा। चिंतित परिजन और ग्रामीण उसे तलाशते हुए खेत पहुंचे, जहां वह बिजली तार की चपेट में आने के बाद जमीन पर पड़ा मिला। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    युवक की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों में भी बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर और झूलते बिजली तारों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की शवगृह में रखवाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।

    यह घटना एक बार फिर बिजली लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में झूल रहे बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

    देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप


    देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

  • लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

    लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज


    जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं।

    भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया।

    स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई।

    सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही।

    वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही।

    यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।