Category: Madhya Pradesh

  • दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब

    दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब


    मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जवाब 23 जुलाई तक हर हाल में दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

    इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इलाज के लिए आवश्यक धनराशि का बड़ा हिस्सा जुटाए जाने के बावजूद उपचार शुरू नहीं हो सका है।

    इससे पहले भी अदालत केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जानकारी मांग चुकी है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राज्य सरकार बच्ची के उपचार में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक सहायता उपलब्ध करा सकती है। अदालत का मानना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामलों में संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

    याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिवार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुका है। इसमें केंद्र सरकार से स्वीकृत आर्थिक सहायता के अलावा सामाजिक संगठनों और विभिन्न दानदाताओं का सहयोग भी शामिल है। परिवार का कहना है कि उपचार में जितनी अधिक देरी होगी, बीमारी के बढ़ने का जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा।

    मामले में बताया गया है कि उपचार के लिए एक विशेष जीवनरक्षक इंजेक्शन विदेश से मंगाना आवश्यक है। यह दवा अमेरिका से आयात की जानी है और इसके बिना उपचार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एसएमए जैसी बीमारी में समय पर इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देरी होने पर मांसपेशियों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती जाती है और रोगी की स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और सांस लेने, निगलने तथा सामान्य गतिविधियां करने जैसी आवश्यक शारीरिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इस बीमारी में समय पर उपचार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अब सभी की निगाहें AIIMS की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद उपचार प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई तेज होगी।

  • दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने सियासी केंद्र, कांग्रेस मनाने में जुटी तो भाजपा भी बनाए हुए संपर्क; बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

    दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने सियासी केंद्र, कांग्रेस मनाने में जुटी तो भाजपा भी बनाए हुए संपर्क; बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

     मध्य प्रदेश: के दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता अवधेश नायक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें अपने साथ बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं। शुक्रवार को पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने उनके निवास पहुंचकर मुलाकात की, जिसके बाद दतिया की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपचुनाव के दौरान हुई इस बैठक ने कांग्रेस की रणनीति और अवधेश नायक के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट वितरण के बाद उत्पन्न असंतोष को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह वरिष्ठ नेताओं को साथ बनाए रखना चाहती है। इसी कारण पार्टी लगातार संवाद के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रही है। अवधेश नायक लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी प्रभावशाली मानी जाती है। ऐसे में उनका कोई भी राजनीतिक फैसला उपचुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    दूसरी ओर भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की भी अवधेश नायक से पहले मुलाकात हो चुकी है। हालांकि किसी भी दल की ओर से इन मुलाकातों को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद दोनों प्रमुख दलों की सक्रियता यह संकेत देती है कि अवधेश नायक का राजनीतिक रुख उपचुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अवधेश नायक ने फिलहाल अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक निर्णय से पहले अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों से व्यापक चर्चा करेंगे। उनका कहना है कि अंतिम फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक राय के आधार पर लिया जाएगा। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल उन्होंने अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखे हैं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले से ही प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल माना जा रहा है। ऐसे समय में किसी प्रभावशाली नेता का दल बदलना, चुनाव प्रचार से दूरी बनाना या किसी उम्मीदवार के समर्थन में खुलकर उतरना चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अवधेश नायक के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    फिलहाल दतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि अवधेश नायक आने वाले दिनों में कौन सा फैसला लेते हैं। उनके निर्णय का असर केवल एक नेता के राजनीतिक भविष्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधानसभा उपचुनाव की रणनीति, चुनावी माहौल और दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें उनके अगले आधिकारिक बयान और समर्थकों के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं, जिससे दतिया उपचुनाव की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • जहां हर मिनट फूटता था 25 हजार लीटर पानी, वहीं बनी देश की सबसे लंबी जल सुरंग, सीएम मोहन यादव ने किया ड्रीम प्रोजेक्ट का निरीक्षण

    जहां हर मिनट फूटता था 25 हजार लीटर पानी, वहीं बनी देश की सबसे लंबी जल सुरंग, सीएम मोहन यादव ने किया ड्रीम प्रोजेक्ट का निरीक्षण

    मध्य प्रदेश के कटनी जिले में लगभग तैयार हो चुकी स्लीमनाबाद जल सुरंग राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इस परियोजना का निरीक्षण करते हुए इसे प्रदेश के किसानों और विंध्य-महाकौशल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। करीब 17 वर्षों के लंबे निर्माण कार्य के बाद अंतिम चरण में पहुंची यह परियोजना नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचाएगी, जिससे हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    करीब 11.95 किलोमीटर लंबी यह जल सुरंग देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में गिनी जा रही है। इसके माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों के लगभग 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और जल संकट से प्रभावित इलाकों को स्थायी राहत मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना का निर्माण आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन बाद में आधुनिक तकनीक और विदेशी मशीनों की मदद से खुदाई का काम तेज किया गया। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, कठोर चट्टानों, भूमिगत गुफाओं और लगातार हो रहे जल रिसाव के बीच इंजीनियरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य को आगे बढ़ाया। कई स्थानों पर सुरंग जमीन की सतह से लगभग 120 फीट नीचे बनाई गई है।

    निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रति मिनट लगभग 25 हजार लीटर तक भूमिगत पानी का तेज प्रवाह था। इसके कारण सुरंग के भीतर लगातार जलभराव और मिट्टी धंसने जैसी परिस्थितियां पैदा होती रहीं। प्रारंभिक मशीनों को भी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद अत्याधुनिक जर्मन तकनीक और विशेष ग्राउटिंग पद्धति का उपयोग किया गया। इन तकनीकी उपायों की मदद से निर्माण कार्य को सुरक्षित ढंग से पूरा किया गया। सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे ट्रैक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से गुजरती है, लेकिन निर्माण के दौरान किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली।

    परियोजना की अनुमानित लागत समय के साथ बढ़ती गई। वर्ष 2008 में शुरू हुई इस योजना की शुरुआती लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, जो तकनीकी चुनौतियों और अतिरिक्त निर्माण कार्यों के कारण बढ़कर 1600 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और इससे जुड़ी नहरों का निर्माण भी लगभग समाप्ति पर है। आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से सिंचाई नेटवर्क को पूरी तरह क्रियाशील किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि परियोजना के पूर्ण रूप से शुरू होने के बाद विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य आगामी चरणों में सिंचाई क्षमता का लगातार विस्तार करते हुए अधिक से अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचाना है, जिससे प्रदेश का कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत हो सकें।

  • जबलपुर हाईकोर्ट का बेहद भावुक और ऐतिहासिक फैसला, 52 वर्ष की उम्र में महिला को मिली आईवीएफ के जरिए मां बनने की इजाजत

    जबलपुर हाईकोर्ट का बेहद भावुक और ऐतिहासिक फैसला, 52 वर्ष की उम्र में महिला को मिली आईवीएफ के जरिए मां बनने की इजाजत

    मध्यप्रदेश: उच्च न्यायालय ने मातृत्व की इच्छा रखने वाली एक अधेड़ उम्र की महिला के पक्ष में बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक 52 वर्षीय महिला को ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ यानी आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भधारण करने की कानूनी मंजूरी दे दी है। न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो उसे महज कानून में निर्धारित आयु सीमा पार कर लेने के आधार पर मां बनने के नैसर्गिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने जबलपुर में याचिकाकर्ता दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह याचिका एक ऐसे दंपत्ति द्वारा दायर की गई थी, जिनके इकलौते 21 वर्षीय बेटे की पीलिया की बीमारी के कारण असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस गहरे सदमे से उबरने और अपने जीवन में दोबारा खुशियां लाने के उद्देश्य से इस दंपत्ति ने फिर से संतान प्राप्ति का प्रयास शुरू किया था। हालांकि, बढ़ती उम्र और शारीरिक जटिलताओं के कारण महिला के लिए प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना संभव नहीं हो पा रहा था।

    स्वाभाविक रूप से गर्भधारण करने में असफल रहने के बाद इस पीड़ित दंपत्ति ने चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक आईवीएफ का सहारा लेने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने एक विशेषज्ञ अस्पताल से संपर्क किया, जहां शुरुआती चिकित्सकीय परीक्षणों में दोनों को शारीरिक रूप से इस प्रक्रिया के अनुकूल और पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए इस दंपत्ति का आईवीएफ उपचार करने से साफ इनकार कर दिया था।

    मौजूदा कानून के तहत भारत में आईवीएफ कराने वाली महिला की आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष तय की गई है, जबकि पुरुष के लिए यह सीमा 21 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित है। चूंकि महिला की आयु 52 वर्ष हो चुकी थी, इसलिए तकनीकी रूप से वह इस कानून के दायरे से बाहर हो रही थीं। इस कानूनी बाधा के खिलाफ दंपत्ति ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि कानून की बहुत ज्यादा कठोर व्याख्या करके उनसे माता-पिता बनने का आखिरी मौका नहीं छीना जाना चाहिए।

    न्यायालय में सुनवाई के दौरान दंपत्ति ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए एक औपचारिक हलफनामा भी प्रस्तुत किया। इस हलफनामे में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस उम्र में आईवीएफ प्रक्रिया से जुड़े सभी संभावित चिकित्सकीय जोखिमों और उनके परिणामों को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस भावुक और तार्किक पक्ष को देखने के बाद अदालत ने माना कि मातृत्व की राह में केवल तकनीकी नियम आड़े नहीं आने चाहिए।

    उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए अपने निर्णय में रेखांकित किया कि संबंधित कानून में दंपत्ति के लिए कोई संयुक्त आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दंपत्ति किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान में जाकर अपनी आईवीएफ प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में डॉक्टरों की विशेषज्ञता का सम्मान करते हुए अस्पताल को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वे महिला की तात्कालिक चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही उपचार का अंतिम निर्णय लें।

  • MP : हाईकोर्ट ने 350 करोड़ के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर लगाई रोक…. सरकार से मांगा जवाब

    MP : हाईकोर्ट ने 350 करोड़ के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर लगाई रोक…. सरकार से मांगा जवाब


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने राज्य के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों (Government Primary and Middle Schools) में पढ़ने वाले 52 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म (Uniform) सप्लाई करने के लिए जारी 350 करोड़ रुपए के टेंडर पर रोक लगा दी है। यह रोक एक लोकल अपैरल एसोसिएशन द्वारा निविदा प्रक्रिया (बिडिंग प्रोसेस) में योग्यता की शर्तों को चुनौती देने के बाद लगाई गई है।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजनल बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई की और राज्य सरकार को एक हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, ‘तब तक संबंधित टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।’

    यह याचिका जबलपुर अपैरल इनोवेशन एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (JAIMA) ने टेंडर डॉक्यूमेंट में ‘प्रतिबंधात्मक शर्तों’ को चुनौती देते हुए दायर की थी। JAIMA की ओर से पेश वकील विमल कांत जैन ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन द्वारा टेंडर के लिए तय किए गए योग्यता मानदंड असल में लोकल इंडस्ट्रीज को बाहर कर देते हैं।

    उन्होंने कहा यूनिफॉर्म सप्लाई करने के लिए निविदा प्रपत्र में जो शर्तें दी गई थीं, उसके अनुसार, ‘स्पिनिंग मिलों के लिए 700 करोड़ और गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए 233 करोड़ रुपए का अनिवार्य सालाना टर्नओवर, प्रति वर्ष 50 लाख यूनिफ़ॉर्म की प्रोडक्शन क्षमता, और पिछले तीन वर्षों में 105 करोड़ रुपए के समान काम का पिछला अनुभव जैसी शर्तें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs), पावरलूम यूनिट्स, बुनकरों, महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों और छोटे पैमाने की इंडस्ट्रीज को इस प्रक्रिया से बाहर कर देती हैं।’

    JAIMA के सेक्रेटरी अजीत मोदी ने कहा कि ये शर्तें ‘मध्य प्रदेश स्टोर परचेज एंड सर्विस प्रोक्योरमेंट रूल्स, 2023’ के खिलाफ हैं, जिन्हें MSMEs के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और लोकल इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इसके बजाय, ये मानदंड राज्य के बाहर की कुछ बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए लगते हैं।’

    इससे पहले 6 जुलाई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में, MSME मंत्री चेतन कश्यप ने कहा था कि सेंट्रलाइज्ड प्रोक्योरमेंट सिस्टम का मकसद उद्योगपतियों और MSME व्यापारियों को सपोर्ट करना था और वे MSME व्यापारियों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर गौर करेंगे।

    रिपोर्ट में स्वयं-सहायता समूहों के कई सदस्यों और MSME गारमेंट यूनिट मालिकों का भी जिक्र किया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि स्वयं-सहायता समूहों से स्कूल यूनिफॉर्म बनाने का काम छीनने के सरकारी फैसले से राज्य भर में हजारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

    उधर कुछ दिन पहले स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि नया सेंट्रलाइज्ड सिस्टम यूनिफॉर्म की एक जैसी क्वालिटी और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं को समय पर सप्लाई करने में दिक्कतें आ रही थीं और इस्तेमाल हो रहे कपड़े की क्वालिटी को लेकर भी समस्याएँ थीं।’

    मध्य प्रदेश में SHG (स्व-सहायता समूहों) की 1.4 लाख से ज्यादा महिलाओं को IIM इंदौर ने यूनिफॉर्म की सिलाई और सप्लाई के मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी थी। यह प्रोग्राम 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया था।

  • MP Weather: 9 दिन बाद फिर सक्रिय होगा मानसून, बालाघाट-डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट

    MP Weather: 9 दिन बाद फिर सक्रिय होगा मानसून, बालाघाट-डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब नौ दिनों के अंतराल के बाद एक बार फिर भारी बारिश की संभावना बनी है। मौसम विभाग (IMD) भोपाल ने शुक्रवार को बालाघाट और डिंडौरी जिलों के लिए भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा प्रदेश के 31 से अधिक जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) विकसित हो रहा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के ऊपर तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से आगामी दिनों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं।

    मौसम विभाग ने बताया कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से प्रदेश में फिर से तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    प्रदेश में पिछले नौ दिनों से कहीं भी उल्लेखनीय भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। इसका असर मानसून के कुल वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक मध्य प्रदेश में 243.3 मिमी (9.6 इंच) वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 281.3 मिमी (11.1 इंच) होना चाहिए था। यानी प्रदेश में अब तक 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    यदि क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 26 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश सामान्य से 2 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।

    इन जिलों में बारिश की संभावना
    मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, अनूपपुर और उमरिया में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

    वहीं ग्वालियर, भोपाल, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में फिलहाल उमस और गर्मी का असर बना रहने की संभावना है।

    मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में मानसून की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आगामी दिनों में सक्रिय हो रही निम्न दाब प्रणाली की दिशा और तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होता है। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तकनीकी समिति में मध्यप्रदेश को मिला महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व : ऊर्जा मंत्री तोमर

    राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तकनीकी समिति में मध्यप्रदेश को मिला महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व : ऊर्जा मंत्री तोमर


    भोपाल । ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश ने विद्युत क्षेत्र की साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) तथा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) द्वारा विद्युत क्षेत्र की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर-सीआईआई) के संरक्षण एवं सुरक्षा मूल्यांकन के लिए अनुरूपता मूल्यांकन ढांचा (कॉनफॉर्मिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क-सीएएफ) विकसित करने के लिये राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति का गठन किया गया है।

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी), जबलपुर में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता को इस प्रतिष्ठित तकनीकी समिति का सदस्य नामित किया गया है। देश के सभी भार प्रेषण केंद्रों तथा राज्य स्तरीय विद्युत संस्थाओं में से चयनित होने वाले वे एकमात्र विशेषज्ञ अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि यह समिति अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ऐसी रूपरेखा तैयार करेगी, जिससे विद्युत क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की साइबर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके तथा बढ़ते साइबर खतरों एवं चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    विद्युत मंत्रालय के दिशा निर्देशों के तहत विकसित हुआ है प्रदेश का एसएलडीसी
    राजेश कुमार गुप्ता वर्तमान में एसएलडीसी, जबलपुर में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में एमपी-एसएलडीसी की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुदृढ़ एवं प्रभावी रूप से विकसित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप एमपी-एसएलडीसी की साइबर सुरक्षा प्रणाली को देश के अग्रणी मॉडलों में स्थान प्राप्त हुआ है, जो महत्वपूर्ण विद्युत अवसंरचना की सुरक्षा के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता और तकनीकी उत्कृष्टता का परिचायक है।

    गुप्ता विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित उस राष्ट्रीय कार्य समूह के भी सदस्य हैं, जो देश के लोड डिस्पैच केंद्रों के लिए आईटी-ओटी (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी) अभिसरण आर्किटेक्चर की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस तकनीकी समिति में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) तथा अन्य अग्रणी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

    ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने राजेश कुमार गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समिति में उनका चयन मध्यप्रदेश की तकनीकी दक्षता, साइबर सुरक्षा क्षमता तथा विद्युत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य संस्कृति की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुप्ता का अनुभव और विशेषज्ञता देश की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचनाओं की सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

  • 15 साल का साथ एक ही दिन हुआ खत्म, मालिक के निधन के बाद अंतिम यात्रा में डॉग ने भी तोड़ा दम, भावुक विदाई की अनोखी मिसाल

    15 साल का साथ एक ही दिन हुआ खत्म, मालिक के निधन के बाद अंतिम यात्रा में डॉग ने भी तोड़ा दम, भावुक विदाई की अनोखी मिसाल

    मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से इंसान और उसके पालतू साथी के बीच अटूट प्रेम और वफादारी की एक ऐसी भावुक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र निवासी 67 वर्षीय प्रदीप जैन का बीमारी के दौरान निधन हो गया। उनके निधन के बाद परिवार के 15 साल पुराने पालतू डॉग ‘डुग्गू’ ने जिस तरह अपने मालिक का अंतिम समय तक साथ निभाया, उसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम यात्रा के दौरान मालिक की अर्थी के पीछे-पीछे चल रहे डुग्गू ने भी कुछ दूरी तय करने के बाद दम तोड़ दिया।

    जानकारी के अनुसार, प्रदीप जैन पिछले कई दिनों से बीमार थे और उनका उपचार भोपाल स्थित एम्स अस्पताल में चल रहा था। करीब आठ दिनों तक इलाज के बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए बैतूल लाया गया, जहां परिजन, रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान डुग्गू लगातार अपने मालिक के पार्थिव शरीर के पास जाने की कोशिश करता रहा। परिवार के सदस्यों ने उसे अलग कमरे में रखा, लेकिन वह पूरी रात बेचैन रहा और लगातार आवाजें निकालता रहा, मानो उसे अपने प्रिय मालिक के बिछड़ने का एहसास हो गया हो।

    अगले दिन जब प्रदीप जैन की अंतिम यात्रा निकाली गई तो डुग्गू भी अर्थी के पीछे-पीछे चल पड़ा। वह पूरी श्रद्धा और लगाव के साथ अपने मालिक की अंतिम विदाई में शामिल रहा। कुछ दूरी तक चलने के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वहीं उसकी सांसें थम गईं। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल सभी लोग भावुक हो गए। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े और हर कोई इस अनोखे रिश्ते की चर्चा करता नजर आया।

    परिजनों ने प्रदीप जैन का अंतिम संस्कार पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ किया। वहीं डुग्गू को भी सम्मानपूर्वक गंज मोक्षधाम परिसर के समीप दफनाया गया। परिवार का कहना है कि डुग्गू केवल एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि घर का सदस्य था। उसने अपने पूरे जीवन में परिवार के साथ गहरा जुड़ाव बनाए रखा और विशेष रूप से प्रदीप जैन के प्रति उसका लगाव बेहद खास था।

    प्रदीप जैन के छोटे भाई दिलीप जैन ने बताया कि डुग्गू पिछले 15 वर्षों से परिवार के साथ रह रहा था। जैसे ही प्रदीप जैन घर लौटते, वह दौड़कर उनका स्वागत करता था। जब भी उनकी तबीयत खराब होती, डुग्गू भी उदास रहने लगता था और उनके आसपास ही बना रहता था। परिवार का मानना है कि मालिक के बिछड़ने का दुख वह सहन नहीं कर सका और आखिर तक उनका साथ निभाते हुए उसने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

    यह घटना केवल एक पालतू जानवर की वफादारी की कहानी नहीं, बल्कि इंसान और बेजुबान के बीच विश्वास, अपनापन और निस्वार्थ प्रेम के उस रिश्ते की मिसाल बन गई है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठा।

  • भारत टैक्स-2026 में CM मोहन यादव का निवेशकों को न्योता, बोले- MP बनेगा देश का टेक्सटाइल हब

    भारत टैक्स-2026 में CM मोहन यादव का निवेशकों को न्योता, बोले- MP बनेगा देश का टेक्सटाइल हब


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्य प्रदेश टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कपड़ा उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ा रहा है। टैक्सटाइल इंडस्ट्री से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में भारत टैक्स-2026 के अंतर्गत आयोजित राउंड टेबल संवाद कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर केंद्रीय टैक्टाइल मंत्री गिरिराज किशोर, प्रमुख टैक्टाइल उद्योग प्रतिनिधि, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधिकारी तथा राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और मालवा-निमाड़ अंचल के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीएम मित्र पार्क से खेत से लेकर गारमेंट इंडस्ट्री और इंडस्ट्री से वैश्विक बाजार तक प्रदेश के उत्पादों की पहुंच आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में अपना उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है वहीं का होकर रह जाता है। हृदय प्रदेश सभी उद्योगपतियों का स्वागत कर रहा है।

    महेश्वरी और चंदेरी साड़ियां वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भारत मंडपम् में वस्त्र उद्योग का कुंभ आयोजित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार, सभी वैश्विक ब्रांड्स के प्रतिनिधि, निवेशक, उद्योगपति, पॉलिसी मेकर और फैशन डिजाइनर भारत सरकार के संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। वर्तमान समय ब्रांडिंग और पैकेजिंग का है। प्राचीन समय में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने स्थानीय बुनकरों को रोजगार से जोड़ने के लिए महेश्वरी साड़ियां तैयार करने की शुरुआत करवाई थी। महेश्वरी साड़ियां वर्तमान में भी देश-विदेश मे लोकप्रिय है। चंदेरी की साड़ियां भी वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान रखती हैं। आज भी स्वावलंबन और रोजगार परक उद्योग हमारी पहचान हैं।

    राज्य सरकार ने उद्योगपतियों और निवेशकों से किए पूरे किए सभी वादे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब जरी स्टेट, रेशम स्टेट, मैनमेड फाइबर स्टेट, कॉटन कैपिटल बन चुका है। राज्य में टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, कुशल कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता और श्रमिकों के साथ आत्मीय संबंध बेहतर औद्योगिक वातावरण प्रदान करते है। राज्य सरकार ने उद्योगपति और निवेशकों से किए अपने सभी वायदे पूरे किए हैं। सभी सेक्टर्स में उद्योगपतियों और निवेशकों को सब्सिडी के रूप में उनके हक की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। राज्य सरकार ने मई 2026 तक की सभी देनदारियां चूकता कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने डेढ़ साल में लगभग 5500 करोड़ रुपए की राशि उद्योगपतियों को सब्सिडी के रूप में उपलब्ध करायी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। राज्य में सोलर और पंप स्टोरेज से निर्मित बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है।

    राउंड टेबल चर्चा का शुभारंभ उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के प्रतिनिधियों के स्वागत से हुआ। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने मध्यप्रदेश के टेक्सटाइल एवं गारमेंट इको सिस्टम, निवेश अवसरों, औद्योगिक नीतियों तथा उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती कंवर ने भी विशेष संबोधन में वस्त्र क्षेत्र में राज्यों और उद्योगों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिंटेक्स के प्रबंध निदेशक श्रेयस्कर चौधरी ने किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेक्सटाइल उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल तथा द कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ सहयोग संबंधी एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए।

    मुख्यमंत्री ने भारत टैक्स-2026 में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देश के प्रमुख टेक्सटाइल उद्योग प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र सचिव नीलम शम्मी राव और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह सहित केंद्र और राज्य के अधिकारी मौजूद थे।

  • अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को राजधानी भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाली अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर सेना भर्ती कार्यालय (एआरओ), जिला प्रशासन एवं खेल और युवा कल्याण विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली।

    मंत्री सारंग ने बैठक में भर्ती रैली के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री सारंग ने कहा कि अग्निवीर भर्ती रैली केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का स्वर्णिम अवसर है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं अभ्यर्थी हितैषी वातावरण में संपन्न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेना भर्ती कार्यालय एवं जिला प्रशासन के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर प्रत्येक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भर्ती रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल आएंगे। ऐसे में यातायात, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास एवं संयुक्त निरीक्षण समय रहते कर लिया जाए ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न नहीं हो।

    बैठक में सेना भर्ती कार्यालय द्वारा विभिन्न विभागों को सौंपे गए दायित्वों की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, परीक्षण क्षेत्र, खेल मैदान एवं अन्य खेल अधोसंरचना पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर सेना एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को भर्ती रैली की संपूर्ण अवधि में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा सुचारु यातायात संचालन के निर्देश दिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल टीम, चिकित्सकों, एम्बुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

    मंत्री सारंग ने नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग को परीक्षण क्षेत्र में आवश्यक बैरिकेडिंग, स्वच्छता, मोबाइल शौचालय, कचरा प्रबंधन तथा परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आयोजन स्थल पर पर्याप्त पेयजल, टेंट, शेड, बैठने की व्यवस्था, मौसम के अनुरूप पंखे, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) तथा अग्निशमन वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में सेना के अधिकारियों एवं जवानों के आवास, परिवहन एवं पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि सेना के अधिकारियों एवं जवानों के ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाए तथा उनके आवागमन के लिये आवश्यक वाहन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही अभ्यर्थियों के रात्रि विश्राम एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोजन स्थल पर अस्थायी विद्युत कनेक्शन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए जनरेटर बैकअप, इंटरनेट कनेक्शन, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर आवश्यक सहायता व्यवस्था तथा दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कंप्यूटर एवं ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए न्यूनतम दरों पर भोजन एवं नाश्ते के स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

    मंत्री सारंग ने निर्देशित किया कि भर्ती रैली प्रारंभ होने से पूर्व सेना भर्ती कार्यालय, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक एवं स्थल निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का अंतिम परीक्षण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल सफल आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक अभ्यर्थी को सम्मानजनक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उल्लेखनीय है कि सेना भर्ती कार्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित यह अग्निवीर भर्ती रैली 28 जुलाई से 8 अगस्त तक अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा, भोपाल में होगी। भर्ती रैली में मध्यप्रदेश के 15 जिले—भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, गुना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह एवं पन्ना के अभ्यर्थी अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन श्रेणियों में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए धर्म गुरु एवं एजुकेशन हवलदार श्रेणी की भर्ती भी की जाएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और राज्य सरकार भर्ती रैली को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।