Category: Madhya Pradesh

  • ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम

    ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम


    जबलपुर । जबलपुर के परसवाड़ा निवासी 27 वर्षीय दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने घटना को लेकर कई सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दीपक की मां उमा पटेल का कहना है कि उनका बेटा करीब दो साल पहले वृंदावन गया था और उसके बाद परिवार उसकी एक झलक के लिए भी तरसता रहा। परिवार का दावा है कि वे कई बार वृंदावन पहुंचे लेकिन उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया। अब उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।

    परिवार के मुताबिक दीपक पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसने लिखित परीक्षा और दौड़ में सफलता हासिल की थी लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। वह गांव में भजन और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहने लगा था। साल 2023 में वह भय्याजी सरकार दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा सेवा टोली से भी जुड़ा था।

    करीब आठ महीने बाद जब दीपक जबलपुर लौटा तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह बार बार वृंदावन जाने की इच्छा जताता था। परिवार की ओर से आपत्ति के बावजूद फरवरी 2024 में वह वृंदावन चला गया और वहां आश्रम में सेवा करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने माता पिता को फोन कर गुरु दीक्षा लेने की जानकारी दी। उसने परिवार से कहा था कि उसका जबलपुर में मन नहीं लगता और वह आश्रम में रहकर सेवा करना चाहता है।

    परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे की इच्छा का सम्मान किया। बाद में दीपक कुछ समय के लिए जबलपुर भी आया लेकिन धीरे धीरे परिवार से उसका संपर्क कम होता गया। उसके पास मोबाइल नहीं रहता था और करीब चार महीने बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। जुलाई 2024 में माता पिता और उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचे लेकिन परिवार के अनुसार उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया।

    परिजनों का दावा है कि इसके बाद वे कई बार वृंदावन गए। परिवार के मुताबिक 10 से ज्यादा बार आश्रम पहुंचने के बावजूद उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा। जून 2026 में 17 से अधिक परिजन एक साथ वृंदावन पहुंचे थे लेकिन तब भी दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान परिवार को जानकारी मिली कि आश्रम में दीपक का नाम रसिक दुलारी शरण हो गया है। परिवार का कहना है कि यह नाम कब बदला गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

    दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार की परेशानी और बढ़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक के साथ हादसा हुआ है और वह इमारत से गिर गया है। इसके बाद परिवार वृंदावन के लिए रवाना हुआ। परिवार का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें यह पता लगाने में भी काफी परेशानी हुई कि दीपक को किस अस्पताल में ले जाया गया है और उसका शव कहां रखा है।

    काफी तलाश के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक का शव मिला। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल हादसे और उपचार की जानकारी दी गई थी। बाद में सामने आई मौत की जानकारी ने परिवार को झकझोर दिया। दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन बाद में भक्ति की राह पर चला गया और अब परिवार के पास उसकी यादें ही बची हैं।

    परिवार ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक दो साल से परिवार से दूर था और कई बार वृंदावन जाने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अब वे यह जानना चाहते हैं कि उसके साथ आखिर क्या हुआ और उसकी मौत से पहले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। मामले में जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मरीजों की आवाजाही शुरू होने से पहले न्यू OPD में पहुंचा सांप, खिड़की से फर्श तक घूमता रहा, महिला गार्ड ने संभाला मोर्चा

    मरीजों की आवाजाही शुरू होने से पहले न्यू OPD में पहुंचा सांप, खिड़की से फर्श तक घूमता रहा, महिला गार्ड ने संभाला मोर्चा


    इंदौर । इंदौर के एमवाय अस्पताल की न्यू ओपीडी में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब परिसर के अंदर एक सांप दिखाई दिया। सुबह करीब 8 बजे ओपीडी शुरू होने के समय खिड़की के पास सांप नजर आने के बाद वहां मौजूद कर्मचारियों ने इसकी जानकारी सुरक्षा गार्ड को दी। इसके बाद सांप को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। कुछ देर तक सांप ओपीडी के अंदर ही फर्श और दरवाजे के आसपास घूमता रहा जिसके कारण वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक सुबह न्यू ओपीडी में कर्मचारी अपने काम में जुटे थे। इसी दौरान एक कर्मचारी की नजर खिड़की के पास मौजूद सांप पर पड़ी। अचानक सांप दिखाई देने से वहां मौजूद स्टाफ सतर्क हो गया। मामले की जानकारी तत्काल सुरक्षा गार्ड को दी गई। इसके बाद गार्ड ने सांप को परिसर से बाहर निकालने का प्रयास किया।

    शुरुआती कोशिश में सांप बाहर नहीं निकला और वह ओपीडी के अंदर ही इधर उधर घूमता रहा। कभी वह दरवाजे के आसपास पहुंचा तो कभी फर्श पर दिखाई दिया। इस दौरान कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड उससे दूरी बनाकर उसे बाहर की तरफ करने का प्रयास करते रहे। बाद में महिला गार्ड और अन्य सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से सांप को ओपीडी से बाहर निकालकर झाड़ियों की तरफ कर दिया गया।

    घटना जिस समय हुई उस वक्त न्यू ओपीडी में मरीजों और डॉक्टरों की आवाजाही शुरू होने वाली थी। ऐसे में यदि सांप कुछ देर और परिसर के अंदर रहता तो मरीजों के साथ अस्पताल के कर्मचारियों के लिए भी परेशानी की स्थिति बन सकती थी। गनीमत रही कि सांप को समय रहते बाहर कर दिया गया और किसी के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई।

    इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें अस्पताल परिसर के अंदर सांप दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सांप का पहुंचना केवल एक सामान्य घटना नहीं माना जा सकता क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन आते हैं।

    एमवाय अस्पताल में इससे पहले भी सांप और दूसरे जहरीले जीव दिखाई देने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अस्पताल की मर्चुरी सहित कुछ अन्य हिस्सों में भी सांप निकलने की जानकारी सामने आ चुकी है। इससे अस्पताल परिसर में साफ सफाई और आसपास की झाड़ियों की नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

    कुछ दिन पहले अस्पताल के बच्चों के वार्ड में चूहों को लेकर भी मामला सामने आया था। इस घटना के बाद अस्पताल में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे और संबंधित स्टाफ के साथ निजी कंपनी पर कार्रवाई की बात सामने आई थी। अब न्यू ओपीडी में सांप मिलने की घटना ने एक बार फिर अस्पताल परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।

    न्यू ओपीडी में सांप मिलने के बाद कर्मचारियों ने तत्काल उसे बाहर कर दिया। फिलहाल इस घटना में किसी मरीज या कर्मचारी को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। हालांकि घटना ने यह जरूर दिखाया है कि अस्पताल के ऐसे हिस्सों में नियमित निगरानी और साफ सफाई जरूरी है जहां झाड़ियों या खुले स्थानों से जीव परिसर में प्रवेश कर सकते हैं।

  • MGM में फिर रैगिंग की शिकायत से मचा हड़कंप, 10 दिन में दूसरी घटना का आरोप, जूनियर छात्रों की शिकायत पर जांच शुरू

    MGM में फिर रैगिंग की शिकायत से मचा हड़कंप, 10 दिन में दूसरी घटना का आरोप, जूनियर छात्रों की शिकायत पर जांच शुरू


    इंदौर । इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर MBBS छात्रों से कथित रैगिंग का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल बढ़ गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन के एंटी रैगिंग सेल को की गई शिकायत के बाद कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। शिकायत प्रथम वर्ष के छात्रों की ओर से की गई है जिसमें रात के समय सीनियर छात्रों के हॉस्टल में पहुंचने और जूनियर विद्यार्थियों को कमरे से बाहर बुलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

    शिकायत के मुताबिक घटना रात करीब 1 बजे से 3 बजे के बीच की बताई गई है। छात्रों का आरोप है कि कुछ सीनियर विद्यार्थी हॉस्टल के ब्लॉक नंबर छह में पहुंचे और कमरों के दरवाजे लगातार खटखटाते रहे। डर की वजह से छात्रों ने अपने कमरे के दरवाजे नहीं खोले। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सीनियर छात्रों की ओर से जूनियर विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर आने के लिए कहा गया था।

    छात्रों ने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि घटना के दौरान हॉस्टल में सुरक्षाकर्मी मौजूद था लेकिन कथित तौर पर उसने सीनियर छात्रों को अंदर आने से नहीं रोका। अब कॉलेज प्रबंधन घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रहा है।

    मामले की शिकायत सामने आने के बाद कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक भी बुलाई गई। इसमें फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। प्रबंधन ब्लॉक नंबर छह की उस रात की CCTV फुटेज खंगालेगा। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित छात्रों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फर्स्ट ईयर के छात्र जिस ब्लॉक नंबर छह में रहते हैं वहां सीनियर छात्रों का प्रवेश नियमों के अनुसार प्रतिबंधित बताया गया है। ऐसे में कथित तौर पर सीनियर छात्रों के वहां पहुंचने का मामला हॉस्टल सुरक्षा और नियमों के पालन से भी जुड़ा हुआ है।

    शिकायत में गणपति उत्सव के दौरान हुई एक मीटिंग का भी जिक्र किया गया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें बैठक के लिए बुलाया गया था और इस दौरान उनके मोबाइल फोन ले लिए गए थे। विद्यार्थियों ने रैगिंग से जुड़े नियमों और न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज में करीब 10 दिन के भीतर रैगिंग से जुड़ी यह दूसरी शिकायत बताई जा रही है। इससे पहले एमटीएच अस्पताल में एक पीजी छात्र की ओर से रैगिंग की शिकायत सामने आई थी। उस मामले में जांच कमेटी बनाई गई थी और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी।

    कॉलेज में पहले भी रैगिंग से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। सितंबर में 2024 बैच के करीब 50 विद्यार्थियों के रैगिंग से परेशान होकर हॉस्टल छोड़ने की बात सामने आई थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में पीजी छात्रा ने सीनियर डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। नवंबर 2025 में भी MBBS प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की ओर से सीनियर छात्रों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। उस मामले की जांच के बाद चार सीनियर छात्रों को निलंबित किया गया था।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि कॉलेज को शिकायत मिली है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। अब छात्रों के बयान और CCTV फुटेज सहित उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी।

  • भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल

    भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल


    उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन शुरू हुए श्रद्धालुओं के बीच भक्ति का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और जयकारों के साथ बाबा का आशीर्वाद लिया।

    भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। अभिषेक और पूजन की धार्मिक परंपराएं पूरी होने के बाद बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया।

    इस अवसर पर भगवान महाकाल को रजत चंद्र त्रिशूल और त्रिपुंड धारण कराया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट से बाबा का राजा स्वरूप शृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर शेषनाग का रजत मुकुट सुशोभित किया गया। रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला से बाबा का दिव्य स्वरूप सजाया गया। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। शृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण नजर आया। नंदी हॉल में भगवान नंदी का स्नान ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद झांझ मंजीरे और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच भस्म आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए। भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।

    भगवान महाकाल की भस्म आरती को मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में माना जाता है। इस दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    मंगलवार की भस्म आरती में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। राजा स्वरूप में सजे भगवान महाकाल के दर्शन ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। रजत आभूषणों से सजा स्वरूप और पुष्पों से किया गया शृंगार मंदिर की धार्मिक आभा को और खास बना रहा था।

    महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन तड़के संपन्न होने वाली प्रमुख पूजा परंपरा है। इसमें अभिषेक पूजन शृंगार भोग और आरती की अलग-अलग धार्मिक विधियां पूरी की जाती हैं। मंगलवार को भी इन सभी परंपराओं के बीच बाबा महाकाल का विशेष राजा स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।

  • देवास में ऑपरेशन प्रहार की बड़ी कार्रवाई, कॉलेज मैदान में हथियार लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, रिवॉल्वर और कारतूस जब्त

    देवास में ऑपरेशन प्रहार की बड़ी कार्रवाई, कॉलेज मैदान में हथियार लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, रिवॉल्वर और कारतूस जब्त


    देवास । देवास जिले के बागली में पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत कार्रवाई करते हुए एक युवक को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक युवक गांधी कॉलोनी स्थित कॉलेज ग्राउंड में रिवॉल्वर लेकर घूम रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और युवक को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक देशी रिवॉल्वर और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया है।

    पुलिस के अनुसार 27 सितंबर को सूचना मिली थी कि कॉलेज ग्राउंड में एक युवक हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए बागली पुलिस ने तत्काल टीम तैयार की और बताए गए स्थान पर पहुंचकर निगरानी शुरू की। टीम ने इलाके में घेराबंदी की ताकि युवक पुलिस को देखकर भाग न सके। कुछ देर बाद पुलिस ने चापड़ा निवासी रवि उर्फ बदिया उम्र 29 वर्ष को पकड़ लिया।

    पुलिस ने युवक की तलाशी ली तो उसके पास से देशी रिवॉल्वर बरामद हुई। इसके साथ ही एक जिंदा कारतूस भी मिला। हथियार और कारतूस मिलने के बाद पुलिस ने दोनों को जब्त कर लिया और युवक को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि युवक के पास अवैध हथियार कहां से आया और वह इसे लेकर कॉलेज ग्राउंड में किस उद्देश्य से घूम रहा था।

    बागली थाने में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। प्रकरण अपराध क्रमांक 401/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान हथियार की सप्लाई से जुड़े संभावित संपर्कों और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड सहित अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा सकती है।

    कॉलेज ग्राउंड जैसे सार्वजनिक स्थान पर हथियार के साथ युवक के पकड़े जाने की घटना के बाद इलाके में पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा है। ऑपरेशन प्रहार के तहत पुलिस अवैध हथियार रखने और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कार्रवाई कर रही है। इस कार्रवाई में सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक को पकड़ा और उसके पास मौजूद हथियार को जब्त किया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर अवैध हथियार लेकर घूमने वाले लोगों की पहचान करना और कानून के तहत कार्रवाई करना है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि रिवॉल्वर और कारतूस उसके पास कैसे पहुंचे।

    इस कार्रवाई में बागली थाना प्रभारी जीवन भिडोरे उप निरीक्षक गब्रिएल एक्का प्रधान आरक्षक रामप्रताप सिंह चौहान आरक्षक अनिल सिंह और विशाल चन्द्रवंशी की भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही हथियार के स्रोत और युवक के उद्देश्य से जुड़े अन्य तथ्य सामने आ सकेंगे।

  • तेंदुआ शिकार मामले में दिनभर चली पूछताछ, 9 घंटे से ज्यादा जांच के घेरे में रहे कार्तिक, बोले- हमारे खिलाफ रची गई साजिश

    तेंदुआ शिकार मामले में दिनभर चली पूछताछ, 9 घंटे से ज्यादा जांच के घेरे में रहे कार्तिक, बोले- हमारे खिलाफ रची गई साजिश


    शिवपुरी । तेंदुआ शिकार से जुड़े मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के संचालक कार्तिक सत्यनारायण से शिवपुरी में करीब साढ़े नौ घंटे तक पूछताछ की गई। सोमवार को वह वन प्रशासन की विशेष कार्य बल यानी एसटीएसएफ के कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और रात लगभग साढ़े आठ बजे तक चली। लंबी पूछताछ के बाद बाहर आए कार्तिक सत्यनारायण ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया और पूरे मामले को गहरी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि वह खुद भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले के पीछे किसका हाथ है।

    एसटीएसएफ की टीम ने पूछताछ के दौरान वन्यजीव संरक्षण तेंदुआ शिकार और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं पर कार्तिक से सवाल किए। हालांकि जांच एजेंसी की ओर से अभी यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि पूछताछ के दौरान उनसे किन बिंदुओं पर सवाल किए गए और उन्होंने उनका क्या जवाब दिया। ऐसे में जांच के अंदरूनी पहलुओं को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कार्तिक सत्यनारायण ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उनके और उनके संगठन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। कार्तिक के मुताबिक उनका संगठन लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहा है और उनकी टीम कानून के खिलाफ कोई गतिविधि नहीं कर सकती। उन्होंने अपने कर्मचारियों का भी बचाव किया और कहा कि सभी लोग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं।

    कार्तिक ने दावा किया कि उनके खिलाफ चल रहा मामला किसी गहरी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह अपने स्तर पर भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन है। हालांकि उनके इस दावे को लेकर जांच एजेंसी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    पूछताछ के दौरान कार्तिक के साथ उनके वकील भी मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रोहित भारद्वाज ने कहा कि कार्तिक जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनके मुताबिक जांच एजेंसी जब भी कार्तिक को बुलाएगी वह पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे। वकील के इस बयान के बाद अब जांच के अगले चरण पर नजर है।

    सोमवार को हुई लंबी पूछताछ के बाद कार्तिक सत्यनारायण को मंगलवार को भी एसटीएसएफ के सामने पेश होना है। इसका मतलब है कि मामले में जांच अभी जारी है और एजेंसी उनसे दोबारा सवाल-जवाब कर सकती है। फिलहाल एसटीएसएफ की ओर से पूछताछ को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    तेंदुआ शिकार से जुड़े इस मामले में आगे की जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज साक्ष्य और बयानों से कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल एक तरफ जांच एजेंसी मामले की पड़ताल कर रही है तो दूसरी तरफ कार्तिक सत्यनारायण अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए इसे साजिश बता रहे हैं। अब एसटीएसएफ की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

  • राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल

    राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल


    भोपाल । राजस्थान की आबादी के आनुवंशिक इतिहास को लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। शोध के अनुसार राजस्थान की अध्ययनित आबादी के डीएनए पैटर्न पाकिस्तान की आबादी की तुलना में मध्य प्रदेश गुजरात और उत्तर-मध्य भारत की आबादियों से अधिक समान पाए गए। यह निष्कर्ष अलग-अलग आबादी समूहों में मौजूद आनुवंशिक संकेतों की तुलना पर आधारित है। अध्ययन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आनुवंशिक समानता का मतलब यह नहीं है कि किसी आबादी ने हाल के समय में किसी दूसरे राज्य से आकर वहां बसावट की है।

    शोधकर्ताओं ने करीब दो हजार असंबंधित और स्वस्थ लोगों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इनमें मीणा गुर्जर और राजस्थान की मिश्रित आबादी के लोग शामिल थे। वैज्ञानिकों ने डीएनए के 20 बहुरूपी ऑटोसोमल एसटीआर स्थानों का अध्ययन किया। इसके बाद इन आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना पाकिस्तान के साथ ही भारत के अलग-अलग आबादी समूहों के उपलब्ध आंकड़ों से की गई। विभिन्न सांख्यिकीय तरीकों से किए गए विश्लेषण में राजस्थान के इन समूहों की आनुवंशिक समानता उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ अधिक दिखाई दी।

    इस अध्ययन की खास बात यह है कि इससे पहले हुए कुछ शोधों में राजस्थान और वर्तमान पाकिस्तान क्षेत्र की आबादियों के बीच आनुवंशिक संबंधों के संकेत मिले थे। वर्ष 2005 में हुए एक अध्ययन में 669 लोगों के नमूनों के आधार पर मातृवंशीय डीएनए और वाई क्रोमोसोम जैसे आनुवंशिक संकेतकों का विश्लेषण किया गया था। उस अध्ययन में सिंधु घाटी और आसपास की आबादियों के बीच लंबे समय तक हुए जीन प्रवाह के संकेत बताए गए थे। नए अध्ययन में राजस्थान की आनुवंशिक तस्वीर को केवल पश्चिमी दिशा से जोड़कर देखने के बजाय उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से एमपी और गुजरात से आनुवंशिक समानता का अर्थ सीधा यह नहीं है कि राजस्थान के लोग इन राज्यों से आकर बसे हैं। डीएनए में मौजूद कुछ आनुवंशिक संकेत जब अलग-अलग आबादी समूहों में समान दिखाई देते हैं तो वैज्ञानिक उन आबादियों के बीच आनुवंशिक निकटता का अध्ययन करते हैं। इसके पीछे हजारों वर्षों में हुए आबादी के आवागमन मिश्रण और साझा पूर्वजों जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।

    अध्ययन में राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र में रहने वाली भील आबादी के आनुवंशिक आंकड़ों पर भी चर्चा की गई है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले भील समूहों के बीच साझा पुरानी आनुवंशिक विरासत के संकेत मिलने की बात कही गई है। शोध के अनुसार गुजरात के भीलों में आसपास की आबादियों के साथ मिश्रण अपेक्षाकृत कम जबकि राजस्थान के भीलों में आसपास के जातीय और जनजातीय समूहों के साथ अधिक आनुवंशिक विविधता दिखाई देती है।

    प्रोफेसर चौबे के अनुसार राजस्थान की विभिन्न जातियों और जनजातियों के आनुवंशिक इतिहास में भी कई पीढ़ियों पीछे जाने पर साझा विरासत के संकेत दिखाई देते हैं। अध्ययन में करीब 52 हजार वर्ष पुराने मातृवंशीय डीएनए संकेतों का भी उल्लेख किया गया है। एम आर5 और यू2आई जैसे मातृवंशीय समूहों को दक्षिण एशिया में आधुनिक मानव के शुरुआती इतिहास से जोड़ा जाता है। इस तरह अध्ययन राजस्थान की आबादी को लंबे समय से चली आ रही स्थानीय आनुवंशिक निरंतरता और अलग-अलग दिशाओं से हुए आबादी के मिश्रण के व्यापक संदर्भ में देखने की बात करता है।

  • BJP नेता की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी, हादसे वाले पोल पर लगाया त्रिपाल, 500 मीटर इलाके में खुले तारों का जाल

    BJP नेता की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी, हादसे वाले पोल पर लगाया त्रिपाल, 500 मीटर इलाके में खुले तारों का जाल


    भोपाल । भोपाल के एमपी नगर इलाके में डीबी मॉल के सामने करंट लगने से भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत के बाद बिजली व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं। रविवार रात हुए इस हादसे में दिव्यऋषि सड़क पार करने के बाद डिवाइडर के पास पहुंचे और जैसे ही उन्होंने बिजली के पोल को छुआ उन्हें जोरदार करंट लगा और वह जमीन पर गिर गए। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    इस हादसे के बाद सामने आई जानकारी ने चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस के मुताबिक इसी स्थान पर पिछले कुछ दिनों के दौरान सात से ज्यादा लोगों को करंट लग चुका था। वहीं नगर निगम का कहना है कि उसे इस पोल से जुड़ी किसी शिकायत की जानकारी नहीं मिली थी। दोनों विभागों के दावों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि अगर लोगों को पहले भी करंट के झटके लग रहे थे तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग तक क्यों नहीं पहुंची और अगर शिकायत हुई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    मॉल के एक कर्मचारी दिनेश ने बताया कि अगस्त में उन्हें भी इसी जगह करंट लगा था। उनका कहना है कि वह स्मार्ट पार्किंग में बाइक खड़ी करने के बाद इसी रास्ते से आते जाते थे। करंट लगने के बाद उन्होंने इस रास्ते का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। हालांकि उन्होंने इस घटना की शिकायत पुलिस या नगर निगम में नहीं की थी। उनके मुताबिक आसपास से गुजरने वाले लोगों के बीच भी इस पोल को लेकर खतरे की चर्चा होती थी।

    प्रत्यक्षदर्शी ऑटो चालक आशीष कुर्मी के मुताबिक दिव्यऋषि सड़क पार करके डिवाइडर की तरफ पहुंचे थे। पोल को छूते ही उन्हें करंट लगा और वह गिर पड़े। पीछे से आ रही एक महिला ने मदद करने की कोशिश की तो उसे भी करंट का झटका लगा और वह पीछे हट गई। पुलिसकर्मियों ने मौके पर प्राथमिक मदद दी और दिव्यऋषि को अस्पताल पहुंचाया लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

    हादसे के बाद संबंधित पोल को त्रिपाल से ढक दिया गया है। उसके आसपास बैरिकेडिंग की गई और चेतावनी वाले पोस्टर लगाए गए हैं। हालांकि इलाके में आवाजाही को देखते हुए केवल बैरिकेडिंग और चेतावनी पोस्टर से सुरक्षा को लेकर सवाल खत्म नहीं होते। बिजली की सप्लाई वायरिंग कनेक्शन और अर्थिंग की जांच करना भी जरूरी माना जा रहा है।

    ग्राउंड पड़ताल में हादसे वाली जगह से करीब 500 मीटर के दायरे में कई स्ट्रीट लाइट पोल पर खुले तार और कनेक्शन दिखाई दिए। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं दूसरे पोल भी लोगों के लिए खतरा तो नहीं बने हुए हैं। खराब इंसुलेशन खुले कनेक्शन अर्थिंग की समस्या या बारिश के पानी के संपर्क जैसी वजहों से बिजली का करंट फैलने का खतरा हो सकता है।

    इस मामले में एमपी नगर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने कहा है कि इलेक्ट्रिकल टीम को शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश हैं। हालांकि उनका कहना है कि हादसे से पहले संबंधित पोल को लेकर निगम के पास कोई शिकायत नहीं आई थी। अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि पोल में करंट कैसे आया और पहले किसी स्तर पर इसकी जानकारी थी या नहीं।

  • 10 लाख के लेनदेन से लेकर पारिवारिक विवाद तक, भोपाल में कारोबारी की आत्महत्या से हड़कंप, सुसाइड नोट खंगाल रही पुलिस

    10 लाख के लेनदेन से लेकर पारिवारिक विवाद तक, भोपाल में कारोबारी की आत्महत्या से हड़कंप, सुसाइड नोट खंगाल रही पुलिस


    भोपाल । भोपाल के गांधी नगर थाना क्षेत्र के अब्बास नगर स्थित फाइन अपार्टमेंट में एक कारोबारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना 28 सितंबर की दोपहर करीब डेढ़ बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान भूपेंद्र शर्मा के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। इस मामले में सुसाइड नोट को लेकर पुलिस और परिवार के दावों में अंतर सामने आया है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला जबकि परिजनों का दावा है कि उन्होंने एक सुसाइड नोट पुलिस को सौंपा है।

    मृतक के बेटे दीप शर्मा के मुताबिक उनके पिता के अमर अदानी नाम के व्यक्ति से दोस्ताना संबंध थे। बेटे का दावा है कि काम छूटने के बाद पिता ने अमर को करीब एक लाख रुपए दिए थे। इसके बाद उन्हें सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की राइस एंड रोड स्थित कैंटीन का काम दिलाने की बात कही गई। आरोप है कि कैंटीन में मौजूद सामान सहित पूरा काम करीब 10 लाख रुपए में देने की बात हुई थी। परिवार के अनुसार भूपेंद्र को पहले कुछ समय कैंटीन चलाने और बाद में एग्रीमेंट करने की बात कही गई थी लेकिन बाद में इसी एग्रीमेंट और पैसों को लेकर विवाद बढ़ गया।

    दीप के अनुसार जब भूपेंद्र ने अपने पैसे वापस करने और कैंटीन के काम को लेकर बातचीत की तो कथित तौर पर उनसे पैसे लौटाने के बजाय दो लाख रुपए और देने की मांग की गई। बेटे का दावा है कि कैंटीन में दूसरे पक्ष का सामान भी मौजूद था और इसको लेकर उनके पिता के मोबाइल पर संदेश आते थे। परिवार का कहना है कि लगातार चल रहे पैसों के विवाद के कारण भूपेंद्र मानसिक रूप से परेशान थे।

    परिजनों द्वारा पुलिस को सौंपे गए बताए जा रहे सुसाइड नोट में भी पैसों के लेनदेन और कैंटीन के काम का उल्लेख होने की बात कही गई है। नोट में अमर अदानी पर पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर टालने और धमकाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही भूपेंद्र ने अपने ससुर शिवनारायण शर्मा पर भी परिवार को परेशान करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने परिवार के लिए न्याय की मांग किए जाने की बात भी लिखी है।

    सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने पत्नी और दोनों बच्चों को लेकर भावुक संदेश भी लिखा है। उन्होंने पत्नी से माफी मांगते हुए बच्चों का ध्यान रखने की बात कही। साथ ही उन्होंने लिखा कि उन्होंने किसी का बुरा नहीं किया फिर भी वह और उनका परिवार लगातार परेशान रहा।

    हालांकि पुलिस ने अभी सुसाइड नोट की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। गांधीनगर थाने के एएसआई जेएस पाटिल के मुताबिक भूपेंद्र ने घर में फांसी लगाई थी। पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और एफएसएल टीम ने कमरे का निरीक्षण किया है। पुलिस के अनुसार मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। दूसरी ओर परिवार का कहना है कि उनके पास मौजूद नोट पुलिस को सौंप दिया गया है। ऐसे में अब पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • MP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, बिल पर अब 5.063% सरचार्ज, खपत बढ़ते ही बढ़ेगा अतिरिक्त भुगतान

    MP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, बिल पर अब 5.063% सरचार्ज, खपत बढ़ते ही बढ़ेगा अतिरिक्त भुगतान


    भोपाल । मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिल से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। 24 सितंबर से 23 अक्टूबर तक जारी होने वाले बिजली बिलों में ईंधन एवं बिजली खरीदी समायोजन सरचार्ज यानी FPPAS की नई दर लागू होगी। यह सरचार्ज अब 5.063 प्रतिशत की दर से लगाया जाएगा जबकि इससे पहले इसकी दर 4.59 प्रतिशत थी। यानी इसमें 0.473 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। नई दर का असर बिजली की खपत के अनुसार अलग अलग होगा और ज्यादा यूनिट इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त राशि अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।

    FPPAS को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यह पूरे बिजली बिल पर नहीं लगाया जाता। यह केवल ऊर्जा शुल्क पर लागू होता है। इसलिए किसी उपभोक्ता के बिल में दिखाई देने वाली कुल राशि में सरचार्ज की गणना सीधे 5.063 प्रतिशत के हिसाब से नहीं की जानी चाहिए। बिल में फिक्स्ड चार्ज मीटर से जुड़े शुल्क सब्सिडी और अन्य मद भी शामिल हो सकते हैं जिससे अंतिम भुगतान अलग हो सकता है।

    बिजली मामलों के जानकार और रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार पिछली 4.59 प्रतिशत दर की तुलना में 100 यूनिट बिजली खपत पर करीब 2.46 रुपए अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसी तरह 200 यूनिट पर करीब 4.12 रुपए 300 यूनिट पर लगभग 7.46 रुपए और 500 यूनिट पर करीब 14.31 रुपए अतिरिक्त राशि बन सकती है। यानी बिजली की खपत बढ़ने के साथ सरचार्ज के रूप में भुगतान भी बढ़ेगा।

    इसे एक उदाहरण से समझें तो 300 यूनिट बिजली की खपत पर यदि ऊर्जा शुल्क 1576.50 रुपए है तो नई 5.063 प्रतिशत दर के हिसाब से FPPAS करीब 79.82 रुपए बनता है। वहीं 500 यूनिट की खपत पर यदि ऊर्जा शुल्क 3024.50 रुपए है तो सरचार्ज करीब 153.23 रुपए होगा। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ता को पूरे बिल की रकम पर 5.063 प्रतिशत भुगतान नहीं करना है।

    बिजली बिल में अलग अलग खपत स्लैब के हिसाब से ऊर्जा शुल्क तय होता है। मौजूदा दरों के अनुसार शुरुआती 50 यूनिट के लिए अलग दर है जबकि 51 से 150 यूनिट 151 से 300 यूनिट और 300 यूनिट से अधिक खपत के लिए अलग ऊर्जा शुल्क निर्धारित है। इसी वजह से FPPAS का वास्तविक असर हर उपभोक्ता के लिए समान नहीं होगा। ऊर्जा शुल्क के आधार पर इसका प्रभाव करीब 24 से 37 पैसे प्रति यूनिट के बीच दिखाई दे सकता है।

    अब सवाल यह है कि यह सरचार्ज बढ़ता क्यों है। बिजली बनाने और खरीदने की लागत हर महीने एक जैसी नहीं रहती। कोयले ईंधन और बाजार से बिजली खरीदने की कीमत में बदलाव होता रहता है। जब बिजली उत्पादन या खरीदी की लागत बढ़ती है तो उस अंतर की भरपाई के लिए FPPAS लगाया जाता है। इसलिए इसे बिजली की मूल दर में स्थायी बढ़ोतरी नहीं माना जाता बल्कि लागत के आधार पर होने वाला मासिक समायोजन माना जाता है।

    उपभोक्ताओं को अपने बिल में ऊर्जा शुल्क और FPPAS की राशि अलग अलग देखकर वास्तविक अतिरिक्त भार समझना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक बाद में लागत का ट्रू अप भी हो सकता है। यानी मौजूदा सरचार्ज को बिजली की दर में स्थायी वृद्धि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। खपत जितनी अधिक होगी ऊर्जा शुल्क उतना अधिक होगा और उसी आधार पर FPPAS की राशि भी बढ़ सकती है।