Category: Madhya Pradesh

  • मंत्री सारंग ने मप्र की बेटी भारतीय महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ का किया सम्मान

    मंत्री सारंग ने मप्र की बेटी भारतीय महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ का किया सम्मान


    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने राजधानी भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में मध्य प्रदेश एवं देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ से मुलाकात कर इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मंत्री सारंग ने कहा कि क्रांति गौड़ ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। उनकी उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहन दे रही है। आधुनिक खेल अधोसंरचना, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक खेल अवसरों के विस्तार का ही परिणाम है कि आज प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बता दें कि क्रांति गौड़ मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा की रहने वाली है।

    क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने कहा कि “लॉर्ड्स में भारत की जीत का हिस्सा बनना मेरे और मेरे परिवार के लिए जीवन का सबसे बड़ा पल था।” उन्होंने बताया कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज होते देख उन्होंने उसी समय परिवार को वीडियो कॉल कर वह ऐतिहासिक क्षण साझा किया। उन्होंने कहा कि “ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराना हर क्रिकेटर का सपना होता है। पहली भारतीय महिला क्रिकेटर के रूप में वहां अपना नाम दर्ज होना मेरे लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, बल्कि मेरे परिवार, मेरे कोचों, मध्यप्रदेश और पूरे देश की है।”

    मंत्री सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि क्रांति गौड़ की यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदेश की हजारों बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का गौरव इसी तरह बढ़ाते रहेंगे।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट में दोनों पारियों में कुल 7 विकेट चटकाए। मैच की पहली पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर 5 विकेट लिए। मैच की दूसरी पारी में 2 विकेट चटकाए। इस तरह मैच में 7 विकेट लेने पर उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। इसके साथ ही क्रांति गौड़ प्रतिष्ठित लॉर्ड्स के ‘ऑनर बोर्ड’ (सम्मान पट्टिका) पर अपना नाम दर्ज कराने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।

  • भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

    भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन पिछले लगभग तीन वर्षों से ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उपयोग शुरू न होने के कारण रेलवे की योजना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में तैयार किए गए इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों की सुविधा और भोपाल जंक्शन पर बढ़ते परिचालन दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। स्टेशन पर प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं। इसके बावजूद यहां न तो किसी यात्री ट्रेन का नियमित ठहराव शुरू हुआ है और न ही स्टेशन पर सामान्य रेल गतिविधियां दिखाई देती हैं।

    दिनभर स्टेशन परिसर लगभग सुनसान रहता है। विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजरती जरूर हैं, लेकिन उनका यहां ठहराव नहीं होता। परिणामस्वरूप स्टेशन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और तैयार बुनियादी ढांचा निष्क्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन का संचालन शुरू हो जाए तो आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।

    रेलवे की मूल योजना के अनुसार निशातपुरा स्टेशन को विकसित कर भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना था। इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, प्लेटफॉर्म उपलब्धता में सुधार करने और इंजन बदलने अथवा परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार की संभावना जताई गई थी।

    वर्तमान में पश्चिमी दिशा से आने वाली कई ट्रेनों को भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशातपुरा स्टेशन पूरी तरह चालू हो जाए तो कुछ परिचालन गतिविधियों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा और रेल संचालन अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।

    हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण पूरा होने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण औपचारिकताएं शेष हैं। इनमें सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां, अंतिम निरीक्षण, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्टेशन परिसर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्ग के कुछ कार्य भी अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।

    अधिकारियों के अनुसार इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को इस नए स्टेशन का लाभ मिल सके। हालांकि संचालन शुरू होने की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    फिलहाल निशातपुरा रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही से दूर है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों की उम्मीद है कि लंबित औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और यह स्टेशन अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप रेल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बनकर भोपाल जंक्शन का भार कम करने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।

  • मुख्यमंत्री के पास पहुंचा पशुपालन विभाग, जीतू पटवारी ने पत्र लिखकर गौशालाओं और पशुपालकों की स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल

    मुख्यमंत्री के पास पहुंचा पशुपालन विभाग, जीतू पटवारी ने पत्र लिखकर गौशालाओं और पशुपालकों की स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास आने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विभाग की कार्यप्रणाली, गौशालाओं की स्थिति, पशुपालकों की समस्याओं और बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल विभाग का प्रभार बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता अब व्यवस्था में वास्तविक सुधार और प्रभावी परिणाम देखना चाहती है।

    अपने पत्र में पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले से कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग को भी अपने पास रखने के फैसले के बाद प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और गौ-सेवा से जुड़े लोगों की अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विभाग में सुधार के लिए कौन-से नए कदम उठाए जाएंगे और किस प्रकार समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर चारे, पानी, उपचार और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन बढ़ती लागत, महंगे चारे और सीमित सरकारी सहायता के कारण यह क्षेत्र आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।

    पत्र में बेसहारा गोवंश से जुड़ी समस्या का भी उल्लेख किया गया है। पटवारी ने कहा कि सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में बेसहारा गोवंश से जुड़े 237 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 94 लोगों की मृत्यु हुई और 133 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखने वाले तथ्य हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि एक गौशाला में एक गोवंश के पालन-पोषण पर प्रतिदिन लगभग 70 रुपये का खर्च आता है, जबकि उपलब्ध अनुदान इससे काफी कम है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन और गोवंश की समुचित देखभाल दोनों प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होगी तो इस व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना कठिन होगा।

    मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में पटवारी ने आग्रह किया कि यदि सरकार ने वास्तव में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी गंभीरता से स्वीकार की है तो प्रदेश की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए राहत पैकेज घोषित किया जाए, छुट्टा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए तथा किसानों की फसलों और सड़क दुर्घटनाओं में हुए नुकसान के लिए प्रभावी मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि शासन की प्राथमिकता केवल विभागों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जनता को मिलने वाले परिणाम होने चाहिए। उनके अनुसार प्रदेश के किसान, पशुपालक और गौ-सेवा से जुड़े लोग अब ठोस फैसलों और जमीन पर दिखाई देने वाले बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं।

    इस घटनाक्रम के बाद पशुपालन विभाग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्ष सरकार से जवाबदेही और स्पष्ट कार्ययोजना की मांग कर रहा है, जबकि अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग का प्रभार संभालने के बाद सरकार पशुपालन, गौशालाओं और बेसहारा गोवंश से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

  • इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल

    इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल


    मध्य प्रदेश
    के इंदौर में एक शराब कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की विशेष चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही पहले मामला दर्ज हो गया, जबकि उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे कथित रूप से बड़ी धनराशि की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर और अधिक सामग्री सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई।

    कारोबारी का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से ब्लैकमेलिंग, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। कारोबारी का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले पुलिस को शिकायत दी थी और अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए मामले ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। वहीं दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण अब जांच का विषय बना हुआ है।

    मामले में दोनों पक्षों के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस आधार पर दूसरे पक्ष की शिकायत पर पहले प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    विवाद के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता को लेकर भी विभिन्न प्रकार के दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार उन पर पूर्व में भी सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों, शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

  • इंदौर के प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत में जांच तेज, भोपाल की युवती हिरासत में, कई एंगल से पड़ताल जारी

    इंदौर के प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत में जांच तेज, भोपाल की युवती हिरासत में, कई एंगल से पड़ताल जारी

    मध्य प्रदेश के इंदौर में एक प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जांच के सिलसिले में भोपाल की एक युवती को हिरासत में लिया है और मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जांच के दौरान हनी ट्रैप की आशंका भी सामने आई है, हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार, हिरासत में ली गई युवती का कारोबारी से करीबी संबंध होने की जानकारी जांच के दौरान सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां उनके बीच हुए आर्थिक लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संचार और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया है कि कारोबारी से बड़ी राशि, आभूषण और एक लग्जरी कार लिए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस संबंधित दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय विवरणों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों की विस्तार से जांच की जाएगी।

    घटना वाले दिन कारोबारी एक होटल में ठहरे हुए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार होटल की ऊंचाई से गिरने के कारण उनकी मौत हुई थी। पुलिस इस मामले में दुर्घटना, आत्महत्या और किसी संभावित आपराधिक साजिश सहित सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। होटल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, प्रवेश और निकास के विवरण तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    जांच के दौरान कारोबारी के परिवार से भी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई है। पुलिस को एक मोबाइल फोन से कथित रूप से ऐसा वीडियो मिलने की जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसके संदर्भ और उससे जुड़े सभी तथ्यों का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। साथ ही घटना के समय होटल में मौजूद अन्य लोगों से भी पूछताछ कर घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के अलावा मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य फॉरेंसिक सामग्री का भी विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि घटना से पहले और बाद में क्या परिस्थितियां बनीं तथा क्या किसी प्रकार का दबाव, विवाद या अन्य कारण इस मामले से जुड़े हुए थे।

    फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसे जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकीय रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जा रही है तथा किसी भी व्यक्ति की भूमिका केवल ठोस साक्ष्य मिलने के बाद ही निर्धारित की जाएगी।

  • बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल

    बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक छात्र की उच्च शिक्षा की तैयारी को गंभीर झटका पहुंचाया है। बीटेक की फीस जमा करने के लिए महीनों तक मेहनत और ओवरटाइम कर बचाए गए 48 हजार रुपये कुछ ही मिनटों में साइबर अपराधियों ने बैंक खाते से निकाल लिए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन समय पर राहत नहीं मिलने का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अशोकनगर निवासी केशव सैन इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्य करते हैं। वह नौकरी के साथ-साथ बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और आगामी शैक्षणिक सत्र की फीस जमा करने के लिए लगातार अतिरिक्त समय तक काम कर पैसे बचा रहे थे। उनके अनुसार, खाते में जमा पूरी राशि उनकी शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए रखी गई थी।

    पीड़ित ने बताया कि अचानक उनके मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार ऑनलाइन लेनदेन के संदेश आने लगे। कुछ ही मिनटों के भीतर खाते से कुल 48 हजार रुपये निकल गए। उनका दावा है कि राशि अमेज़न पे के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजैक्शन में स्थानांतरित की गई। जब तक वह स्थिति को समझ पाते, खाते की पूरी जमा पूंजी समाप्त हो चुकी थी।

    घटना के तुरंत बाद छात्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। पीड़ित का आरोप है कि तत्काल लेनदेन रोकने या तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें नजदीकी पुलिस थाने जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वह इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचे, जहां भी उन्हें तत्काल समाधान नहीं मिलने का दावा किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पीड़ित का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई होती तो संभवतः राशि को रोका या रिकवर किया जा सकता था। अब फीस जमा करने की समयसीमा नजदीक होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द से जल्द राशि वापस दिलाने की मांग की है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

    साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचित करना आवश्यक होता है। साथ ही अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और अविश्वसनीय मोबाइल एप्लिकेशन से सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है।

    यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ

    इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इंटरनेट पर डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजने के दौरान एक व्यक्ति ठगों के जाल में फंस गया। इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजे गए एक लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ गया। लिंक खुलते ही उसके बैंक खाते से कुल पांच लाख रुपये चार अलग-अलग लेनदेन में निकल गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र के हथिताल इलाके का निवासी है। उसने अपनी पत्नी के त्वचा संबंधी उपचार के लिए इंटरनेट पर डॉक्टर का मोबाइल नंबर तलाशा था। सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर उसने संपर्क किया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित चिकित्सा सेवा से जुड़ा बताते हुए इलाज से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही।

    आरोप है कि इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया और उसे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने के लिए कहा गया। जैसे ही उसने लिंक खोला और आगे की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से क्रमवार चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल पांच लाख रुपये निकल गए। बैंक खाते से राशि कटने के संदेश मिलने के बाद उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन से जुड़े तकनीकी पहलुओं, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस ने नागरिकों को इंटरनेट पर उपलब्ध किसी भी मोबाइल नंबर या लिंक की सत्यता जांचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर अस्पताल, डॉक्टर, बैंक या सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल नंबर तैयार कर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट या सत्यापन के बहाने लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी या डिवाइस तक पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है। यदि किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो तो संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक के माध्यम से वित्तीय जानकारी मांगी जाए तो सतर्क रहें और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतकर इस प्रकार की साइबर ठगी से बचा जा सकता है, जबकि किसी भी संदिग्ध घटना की स्थिति में तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है।

  • पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

    मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

    विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप

    MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में वाहन चेकिंग (Vehicle Checking) के दौरान पुलिस (Police) की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि चेकिंग के दौरान पुलिस की निगरानी में खड़ी एक स्कूटी (Scooty) को एक अज्ञात युवक लेकर फरार हो गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि स्कूटी की चाबी पुलिस के पास थी और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने वही चाबी अज्ञात युवक को सौंप दी. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, घटना 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर हुई. शिकायतकर्ता नदीम आलम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी सुजुकी बर्गमैन स्कूटी को रोक लिया था. उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने स्कूटी की चाबी अपने पास रख ली थी और वाहन वहीं खड़ा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर वही चाबी एक अज्ञात युवक को दे दी।


    चेकिंग के दौरान रोकी गई थी स्कूटी

    आरोप है कि युवक ने बिना किसी रोक-टोक के स्कूटी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गया. नदीम आलम के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी स्कूटी वापस मांगी, तब उन्हें पता चला कि वाहन वहां से गायब हो चुका है. उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    पीड़ित का कहना है कि यदि स्कूटी की चाबी पुलिस के कब्जे में थी, तो वाहन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ कैसे लग गया और वह वहां से कैसे निकल गया. घटना के बाद नदीम आलम ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से की है. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी स्कूटी जल्द से जल्द बरामद की जाए।

    शिकायत के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
    शिकायतकर्ता का दावा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है. इस मामले के सामने आने के बाद वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

  • MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?

    MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। लगातार कमजोर मानसूनी गतिविधियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां जबलपुर सहित 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी (10.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां औसतन 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

    19 जुलाई से बदलेगा मौसम, तेज बारिश के आसार
    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी नया मौसम तंत्र विकसित हो रहा है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।

    आज इन जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना
    मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश के साथ आंधी चलने का अनुमान है।

    वहीं मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राहत मिलने की उम्मीद
    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश स्तर पर मानसून की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी निम्न दाब प्रणाली की दिशा और उसकी तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होगा। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

    जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
    मौसम विभाग के अनुसार जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश के कारण वर्षा का आंकड़ा सुधरा था, लेकिन पिछले सात दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण लगातार तीसरे दिन प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य से नीचे बनी हुई है।