Category: Madhya Pradesh

  • अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर

    अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, जिसके चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं।

    धरने के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित कर्मचारियों ने अप्रेजल आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

    कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित
    हड़ताल के कारण जिला अस्पताल की कई अहम सेवाएं ठप हो गई हैं। इनमें टीकाकरण, एसएनसीयू, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान, ओपीडी सेवाएं, सीएम हेल्पलाइन से जुड़े कार्य, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना और टीबी मरीजों को दवा वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।
    इसके अलावा ब्लड बैंक का अधिकांश कार्य भी प्रभावित हुआ है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण, स्वास्थ्य बीमा, वेतन वृद्धि और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।

    आंदोलन की चेतावनी, भोपाल घेराव की तैयारी
    संघ ने यह भी घोषणा की है कि उनका यह आंदोलन 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव के बाद समाप्त होगा। तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

    मरीजों पर बढ़ा असर
    हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें इलाज और जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सामान्य कामकाज बाधित होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

  • रजिस्ट्री की मांग लेकर पहुंचे लोग, तनाव में बिगड़ी महिला की तबीयत

    रजिस्ट्री की मांग लेकर पहुंचे लोग, तनाव में बिगड़ी महिला की तबीयत


    मध्य प्रदेश । देवास कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मकानों के मालिकाना हक की मांग को लेकर पहुंचे रहवासियों के बीच एक महिला अचानक बेसुध होकर गिर पड़ी। एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के लोग अपनी आवासीय समस्या के समाधान की मांग लेकर कलेक्टर से मिलने आए थे।

    महिला की पहचान विद्या शर्मा के रूप में हुई है। मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला, चेहरे पर पानी के छींटे मारे और हवा देकर होश में लाने का प्रयास किया। कुछ ही देर में महिला को होश आ गया।

    “टेंशन में खाना नहीं खाया” – भावुक हुई महिला
    होश में आने के बाद विद्या शर्मा भावुक हो गईं और रोते हुए कहा कि मकान के विवाद के तनाव में उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया था। उन्होंने कहा, “अगर मेरी मौत हो जाए तो मेरा शव कंपनी में ले जाना।” उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद अन्य लोग भी भावुक हो गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    रजिस्ट्री की मांग को लेकर लंबे समय से विवाद
    दरअसल, एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के रहवासी गजरा गियर्स लिमिटेड की हायर परचेज स्कीम के तहत दिए गए मकानों की रजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को मकान दिए गए थे और तय शर्तों के अनुसार 15 वर्षों तक वेतन से राशि काटकर भुगतान किया गया था। रहवासियों का आरोप है कि कई कर्मचारियों ने 15 वर्ष से अधिक सेवा दी, इसके बावजूद अब तक उनके नाम पर मकानों की रजिस्ट्री नहीं की गई है। साथ ही, मकानों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

    कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोप
    रहवासियों का कहना है कि पहले मकानों के बदले राशि काटी गई, लेकिन वह हाउसिंग बोर्ड में जमा नहीं कराई गई। अब कंपनी का कहना है कि ये मकान केवल सेवा अवधि तक रहने के लिए दिए गए थे और उन्हें खाली करना होगा। इस स्थिति ने रहवासियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

    कलेक्टर ने दिया आश्वासन
    मामले को लेकर कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने रहवासियों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन ने मामले की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

    दस्तावेजों और रजिस्ट्री की मांग पर अड़ा मामला
    रहवासियों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन्हें मकानों के वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं और उनके नाम पर रजिस्ट्री तत्काल की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो सके।

  • तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम

    तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम


    मध्य प्रदेश । इंदौर में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज धूलभरी आंधी ने शहर में काफी नुकसान पहुंचाया। आंधी के चलते शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 150 स्थानों पर पेड़ और डगाले गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई इलाकों में यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    जैसे ही सूचना नगर निगम को मिली, टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और पेड़ों व डगालों को हटाने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को भी शहर के कई हिस्सों में सफाई और मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी रहा।

    निगम की टीमें अलर्ट मोड पर, 24 घंटे निगरानी
    नगर निगम ने स्थिति को देखते हुए अपनी सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रख दिया है। अधिकारियों के अनुसार अब दिन या रात किसी भी समय सूचना मिलने पर टीम तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी।

    उद्यान विभाग के अधिकारी शांतिलाल यादव ने बताया कि आंधी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ और डगाले गिरे, जिनमें से कई को सोमवार को ही हटाकर सड़क किनारे कर दिया गया था, जबकि बाकी को मंगलवार को भी हटाया जा रहा है।

    वाहनों को नुकसान, लेकिन जनहानि नहीं
    प्रशासन के अनुसार आंधी के कारण कुछ स्थानों पर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द यातायात और सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।

    तेज हवाओं के बाद सतर्कता बढ़
    मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए नगर निगम ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

  • शिवपुरी में खेत में मिला युवक का शव: शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

    शिवपुरी में खेत में मिला युवक का शव: शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के गौचोनी गांव में मंगलवार सुबह एक 27 वर्षीय युवक का शव खेत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही हिम्मतपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पहचान पवन लोधी पुत्र रामेश्वर लोधी, निवासी गौचोनी के रूप में हुई है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।

    रखवाली करने गया था युवक, सुबह मिला शव
    परिजनों के अनुसार, सोमवार को गांव में रामायण पाठ के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन था। कार्यक्रम के बाद पवन लोधी खेत की रखवाली करने गया था। मंगलवार सुबह उसके मौत की सूचना मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।

    परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
    मृतक के रिश्तेदार उमेश लोधी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पवन के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही उसका मोबाइल फोन शव से करीब 50 मीटर दूर टूटी हुई हालत में मिला, जिससे मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। परिजनों का कहना है कि गांव में कुछ लोगों से पुरानी रंजिश चल रही थी, इसलिए उन्हें आशंका है कि यह हत्या का मामला हो सकता है।

    पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
    हिम्मतपुर चौकी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

    गांव में तनाव, जांच पर टिकी नजर
    घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और लोग अलग-अलग तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • 26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा

    26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिजिकल थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ग्वालियर जिले के एक कथित स्मैक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ, नकदी और वाहन बरामद किए गए हैं।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामनिवास उर्फ करुआ रावत (35) निवासी ग्राम पाटई, थाना आरोन, जिला ग्वालियर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 28 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।

    मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
    फिजिकल थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि करवला पुलिया के पास एक व्यक्ति स्मैक बेचने की फिराक में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।

    पूछताछ में बड़ा खुलासा: फैला था नेटवर्क
    पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने साथी राजेंद्र रावत के साथ मिलकर स्मैक तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, राजेंद्र बड़े सप्लायरों से नशीला पदार्थ लाकर दोनों मिलकर उसे ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं था, बल्कि शिवपुरी, करेरा, सुभाषपुरा और बैराड़ जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ था।

    युवाओं को बनाया जा रहा था निशाना
    पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कई गांवों में युवाओं को निशाना बनाकर स्मैक की सप्लाई शुरू कर दी थी, जिससे क्षेत्र में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा था।

    पहले से दर्ज हैं मामले, एनडीपीएस एक्ट में केस
    फिजिकल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और मुख्य सप्लायरों की तलाश में जुटी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रामनिवास के खिलाफ पहले भी बैराड़ थाना में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है।

    पुलिस का सख्त संदेश
    थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

  • विदिशा में अड़ीबाजी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, बदमाश का निकाला जुलूस

    विदिशा में अड़ीबाजी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, बदमाश का निकाला जुलूस


    मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में कोतवाली पुलिस ने अड़ीबाजी और अवैध वसूली के आरोपी राहुल अहिरवार (36) का सार्वजनिक जुलूस निकालकर कड़ा संदेश दिया है। आरोपी पर कृषि उपज मंडी के व्यापारियों से मारपीट, धमकी और पैसों की जबरन मांग करने के गंभीर आरोप थे। पुलिस ने आरोपी को मंडी क्षेत्र, बरईपुरा चौराहा और आसपास के इलाकों में घुमाया, जहां उसने लोगों के सामने अपने अपराधों के लिए माफी मांगते हुए तौबा करने की बात कही।

    मंडी में व्यापारियों से मारपीट और धमकी का मामला
    कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी राहुल अहिरवार कुछ समय पहले कृषि उपज मंडी क्षेत्र में शराब के नशे में व्यापारियों से पैसे मांग रहा था। विरोध करने पर उसने व्यापारियों के साथ मारपीट की और उन्हें धमकाया भी था। इस मामले में उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था।

    पुलिस की सख्त कार्रवाई, फरार आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देश पर जिले में फरार और आदतन अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी को बरईपुरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को उन स्थानों पर ले जाकर कार्रवाई दिखाई, जहां उसने पहले लोगों को डराने-धमकाने और अवैध वसूली की घटनाओं को अंजाम दिया था।

    सार्वजनिक संदेश: अपराधियों में डर, जनता में भरोसा
    पुलिस द्वारा निकाले गए इस जुलूस का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाना और अपराधियों में कानून का भय पैदा करना बताया गया। थाना प्रभारी आनंद राज ने कहा कि गुंडागर्दी, अड़ीबाजी और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि सार्वजनिक रूप से भी सख्त संदेश दिया जाएगा, ताकि शहर में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

  • विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग

    विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग


    मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जतरपुरा क्षेत्र स्थित गोकुलधाम फेस-1 और सूरज नगर कॉलोनी के रहवासी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए कॉलोनाइजर पर गंभीर आरोप लगाए।

    रहवासियों का कहना है कि प्लॉट बेचते समय उन्हें सड़क, बिजली, पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कॉलोनी में कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

    बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन मुश्किल
    कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोकुलधाम कॉलोनी के रहवासी पहले भी कई बार जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं और कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

    पूर्व में प्रशासन द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी और तहसीलदार ने रहवासियों के बयान दर्ज किए थे। जांच में कॉलोनी में सुविधाओं की गंभीर कमी की पुष्टि भी हुई थी, जिसके बाद कॉलोनाइजर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

    “वादे किए गए, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं”
    स्थानीय निवासी पूजा वर्मा ने बताया कि प्लॉट खरीदते समय सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं की गई हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाने और धमकाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे रहवासी डर के माहौल में रहने को मजबूर हैं।

    अवैध कॉलोनियों का बढ़ता जाल, प्रशासन पर सवाल
    विदिशा शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। आकर्षक दावों और विकास के वादों के नाम पर लोगों को प्लॉट बेच दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कॉलोनाइजर बेखौफ होकर ऐसे काम कर रहे हैं। समय पर कार्रवाई न होने से आम लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर भी परेशान हो रहे हैं।

    प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध कॉलोनियों का विस्तार हो रहा था, तब संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

    अब रहवासियों की मांग है कि कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कॉलोनियों में जल्द से जल्द सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

  • कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला

    कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित लगभग 25 एकड़ भूमि पर यह परियोजना अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या वीआईपी कार्यक्रम के आगे बढ़ाई जा रही है।

    यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की जा रही है। हालांकि, शुरुआत से ही इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

    लगातार विरोध के चलते टला भूमिपूजन
    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जिले में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। विरोध के कारण इस परियोजना का भूमिपूजन दो बार टालना पड़ा। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विरोध की आशंका के चलते उसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने बिना किसी वीआईपी आयोजन के सीधे निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया है।

    सरकार का तर्क: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा मजबूत आधार
    सरकारी पक्ष का मानना है कि यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही जिले में मिल सकेंगे। पीपीपी मॉडल को लेकर सरकार का दावा है कि इससे परियोजना तेजी से पूरी होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    जनता की चिंता: निजीकरण पर उठे सवाल
    हालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस मॉडल को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को निजी प्रबंधन के हवाले करने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि इलाज और मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए पहुंच कठिन हो जाएगी।

    “शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो वोट नहीं” का नारा
    स्थानीय समाजसेवी विंधेश्वरी पटेल ने कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन शासकीय नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा और इसका नारा होगा- “कटनी को शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।”

    आगे की राह पर नजर
    फिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें पहले चरण में बाउंड्री वॉल का निर्माण और भूमि की सुरक्षा शामिल है। प्रशासन का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक विकास परियोजना है, जबकि विरोधी इसे निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप लेता है या सरकार और जनता के बीच कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।

  • जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव

    जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले के कोतवाली थाने में दर्ज एक FIR को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि FIR में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज करते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठन भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने कटनी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने FIR से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की भी अपील की है।

    30 मई की घटना से शुरू हुआ मामला
    मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 30 मई का है। कोतवाली थाना क्षेत्र के खरहनी फाटक निवासी अशोक अहिरवार (42) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसियों मुरेरी चौधरी, उनकी पत्नी, अजुदन चौधरी और संजय चौधरी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पीड़ित जब रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो ड्यूटी पर मौजूद प्रधान आरक्षक नितिन जायसवाल ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इसी FIR के विवरण में मोहल्ले के नाम का उल्लेख करते समय अनुचित रूप से जातिसूचक शब्द शामिल कर दिए गए।

    सामाजिक संगठन का विरोध, कार्रवाई की मांग
    घटना सामने आने के बाद भीम आर्मी आजाद एकता मिशन ने इसे अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष रूप से पीड़ित की सहायता करना और समानता बनाए रखना है, लेकिन इस तरह के शब्दों का उपयोग गंभीर आपत्ति का विषय है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और FIR रिकॉर्ड को संशोधित कर आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं।

    पुलिस अधीक्षक का बयान, जांच के आदेश
    इस मामले पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः FIR में वही विवरण दर्ज किया गया होगा जो शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक ओर सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब

    भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वन विभाग द्वारा उनकी जमीनों के कथित अधिग्रहण की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने की मांग उठाई।

    प्रदर्शन का केंद्र रीठी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम ललितपुर रहा, जहां के कई आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। धरने में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके भू-अधिकार पट्टे वापस नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    1989 से काबिज जमीन पर अब विवाद, वन विभाग पर आरोप
    प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा उन्हें वर्ष 1989 में विधिवत भू-अधिकार पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों के आधार पर वे लगातार लगभग तीन दशकों से अधिक समय से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।आदिवासी परिवारों का आरोप है कि अब वन विभाग उनकी इसी जमीन को अपना बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ितों का दर्द: “रोजी-रोटी छीनी जा रही है”
    प्रदर्शन में शामिल पीड़ित बृजलाल ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस जमीन पर खून-पसीना बहाया है। शासन ने ही हमें पट्टा दिया था, अब वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है और हमारी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।”

    कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांग
    धरना प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर को दिया गया। ज्ञापन में वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने भू-अधिकार पट्टों को यथावत रखने और वन विभाग के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें उनकी जमीन पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार फिर से सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासन पर निगाहें, आंदोलन की चेतावनी
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।