Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश पंचायत उपचुनाव में सुबह से मतदान का दौर, 103 पदों पर वोटिंग, सुसनेर में EVM के नंबर को लेकर हंगामा

    मध्य प्रदेश पंचायत उपचुनाव में सुबह से मतदान का दौर, 103 पदों पर वोटिंग, सुसनेर में EVM के नंबर को लेकर हंगामा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में पंचायत उपचुनाव के लिए मंगलवार को मतदान जारी है। प्रदेश के अलग अलग इलाकों में पंच सरपंच जनपद पंचायत और जिला पंचायत सदस्य के रिक्त पदों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी दौरान आगर मालवा जिले के सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव को लेकर भी मतदान हो रहा है। सुसनेर के वार्ड 7 में EVM के सीरियल नंबर को लेकर विवाद की स्थिति बनी और करीब 15 मिनट तक मतदान प्रभावित रहा। बाद में स्थिति स्पष्ट होने के बाद मतदान दोबारा शुरू कराया गया।

    मिली जानकारी के अनुसार वार्ड 7 के मतदान केंद्र पर स्थानीय विधायक भैरोसिंह परिहार ने EVM के सीरियल नंबर में अंतर को लेकर आपत्ति जताई। विधायक के पास मौजूद पुरानी सूची और मतदान केंद्र पर मौजूद EVM के सीरियल नंबर में अंतर बताया गया। इसके बाद दोनों दलों के समर्थक मतदान केंद्र के आसपास पहुंच गए। मामले की जानकारी मिलने पर अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। बताया गया कि रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया के बाद EVM बदले जाने के कारण नंबर में अंतर की स्थिति बनी थी। दोनों प्रत्याशियों के मौके पर पहुंचने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद मतदान फिर शुरू हो गया।

    सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी की ओर से प्रदीप सोनी और कांग्रेस की ओर से विष्णु पाटीदार मैदान में हैं। मतदान को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 13 वार्डों के 17 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    पंचायत उपचुनाव की बात करें तो प्रदेश में अलग अलग रिक्त पदों के लिए मतदान कराया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले जिला पंचायत सदस्य के 7 जनपद पंचायत सदस्य के 28 सरपंच के 110 और पंच के 4090 पदों के लिए उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। हालांकि बाद में विभिन्न परिस्थितियों के चलते वास्तविक मतदान वाले पदों की संख्या घटकर 103 रह गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कई पदों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए जबकि कुछ पदों पर नामांकन नहीं होने और अन्य कारणों से मतदान नहीं हुआ।

    मतदान के दौरान कई जिलों से वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े भी सामने आए। शाजापुर की पतोली पंचायत में सुबह 11 बजे तक 75 प्रतिशत और पनवाड़ी में 55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सारंगपुर की सुल्तानिया पंचायत में सुबह 11 बजे तक करीब 48 प्रतिशत वोटिंग हुई। आलीराजपुर के सोण्डवा में 35.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। झाबुआ जिला पंचायत वार्ड 6 में 31.89 प्रतिशत और पलासड़ोर पंचायत में 63.98 प्रतिशत मतदान हुआ। नलखेड़ा में 39.76 प्रतिशत तथा मऊगंज जिले में कुल 36.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    कुछ स्थानों पर मतदाताओं में खास उत्साह भी दिखाई दिया। सुसनेर में पैर में प्लास्टर होने के बावजूद एक युवक मतदान केंद्र पहुंचा। वहीं कई मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे। डिंडौरी में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    पंचायत उपचुनाव के लिए मतदान 29 सितंबर को कराया जा रहा है। सरपंच और जनपद पंचायत सदस्य के परिणाम 3 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं जबकि जिला पंचायत सदस्य और पंच पदों के परिणाम 5 अक्टूबर को जारी होंगे।

    इस तरह मध्यप्रदेश में स्थानीय स्तर के इन उपचुनावों के दौरान जहां कई इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान जारी है वहीं सुसनेर में EVM के सीरियल नंबर को लेकर सामने आया विवाद कुछ समय के लिए चर्चा का विषय बना। अधिकारियों द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद वहां मतदान फिर से शुरू हो गया।

  • रानी कमलापति स्टेशन पर यात्रियों की जेब पर बोझ, मुफ्त यूरिन की सुविधा भी नहीं, टॉयलेट और स्नान के लिए देने पड़ रहे पैसे

    रानी कमलापति स्टेशन पर यात्रियों की जेब पर बोझ, मुफ्त यूरिन की सुविधा भी नहीं, टॉयलेट और स्नान के लिए देने पड़ रहे पैसे


    भोपाल । भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन यानी RKMP पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी भुगतान करना पड़ रहा है। स्टेशन पर पे एंड यूज व्यवस्था के तहत यूरिनल के लिए 5 रुपए टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए 10 रुपए और स्नान करने के लिए 15 रुपए शुल्क लिया जा रहा है। शुल्क व्यवस्था को लेकर यात्रियों के बीच चर्चा है वहीं राष्ट्रीय रेल उपयोगकर्ता सलाहकार परिषद के सदस्य नितेश लाल ने इसे लेकर भोपाल मंडल के DRM को पत्र लिखा है। उन्होंने यूरिनल की सुविधा निशुल्क करने के साथ पे एंड यूज शौचालयों की सफाई व्यवस्था बेहतर कराने की मांग की है।

    रानी कमलापति स्टेशन पर ऐसे पांच पे एंड यूज टॉयलेट बताए गए हैं जिनका रोजाना 2500 से अधिक यात्री इस्तेमाल करते हैं। यात्रियों का कहना है कि रेलवे यात्रा के दौरान टिकट के लिए पहले ही भुगतान किया जाता है ऐसे में यूरिन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए अलग से शुल्क लिया जाना अतिरिक्त बोझ हो सकता है। NRUCC सदस्य नितेश लाल ने भी अपने पत्र में इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उचित तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

    उन्होंने पे एंड यूज टॉयलेट की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार शुल्क लेने के बावजूद कई बार शौचालयों में गंदगी और बदबू की शिकायत सामने आती है। ऐसे में केवल शुल्क निर्धारित करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि यात्रियों को साफ और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने संबंधित संचालन एजेंसी को नियमित सफाई और बेहतर रखरखाव के निर्देश देने की मांग की है।

    हालांकि रेलवे की ओर से इस मामले में अलग स्थिति बताई गई है। बंसल की ओर से महाप्रबंधक मोहित समैया ने कहा है कि प्लेटफॉर्म पर यूरिनल की सुविधा निशुल्क है। वहीं पे एंड यूज सुविधा के लिए लिया जा रहा शुल्क रेलवे के निर्धारित नियमों के अनुसार है। यानी स्टेशन पर उपलब्ध सभी यूरिनल के लिए शुल्क नहीं लिया जा रहा है बल्कि पे एंड यूज व्यवस्था वाले स्थानों पर निर्धारित राशि ली जाती है।

    जबलपुर से रानी कमलापति स्टेशन पहुंचे यात्री शैलेश ने यूरिनल के लिए 5 रुपए भुगतान किया। उन्होंने कहा कि यात्रियों पर पहले से कई तरह के खर्च होते हैं और छोटी छोटी सुविधाओं के लिए अलग शुल्क लगने से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने जबलपुर और सतना की व्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यूरिनल के इस्तेमाल के लिए इस तरह का शुल्क नहीं लिया जाता।

    RKMP पर शुल्क की व्यवस्था को समझने के लिए स्टेशन के विकास मॉडल को भी देखना जरूरी है। रेलवे अधिकारी के अनुसार स्टेशन का टेंडर भोपाल रेल मंडल ने नहीं बल्कि रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी RLDA ने अवॉर्ड किया है। रेलवे बोर्ड ने कई स्टेशनों को विकास के लिए RLDA के अधीन किया है। ऐसे स्टेशनों के विकास और कमर्शियल गतिविधियों के लिए टेंडर की शर्तें लागू होती हैं।

    RKMP के विकास में बंसल समूह ने निवेश किया है। इसके बदले तय अवधि तक उसे कुछ कमर्शियल गतिविधियों के संचालन के अधिकार दिए गए हैं। इनमें कैटरिंग विज्ञापन पार्किंग और पे एंड यूज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रेलवे अधिकारी के मुताबिक पे एंड यूज की दरें भी RLDA की स्वीकृत व्यवस्था के तहत आती हैं। भोपाल रेल मंडल की मुख्य जिम्मेदारियां ट्रेन संचालन और टिकट से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं जबकि स्टेशन की कई कमर्शियल गतिविधियां RLDA के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।

    इस पूरे मामले में एक तरफ यात्रियों की निशुल्क मूलभूत सुविधा की मांग है तो दूसरी ओर स्टेशन के विकास और संचालन से जुड़ी कमर्शियल व्यवस्था है। अब देखने वाली बात होगी कि यात्रियों की शिकायत और NRUCC की मांग के बाद पे एंड यूज शुल्क को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

  • MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल

    MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत (Rich Historical and Cultural Heritage) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है. प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है. इनमें धार की बाघ गुफाओं के भित्ति चित्र, सीहोर की गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इन चारों स्थलों को 8 जुलाई 2026 को भारत की ओर से Tentative List के लिए प्रस्तुत किया गया. भारत की Tentative List में फिलहाल 78 स्थल दर्ज हैं. हालांकि, Tentative List में शामिल होना अभी UNESCO की World Heritage List में शामिल होने के बराबर नहीं है. यह किसी स्थल के संभावित विश्व धरोहर नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है।


    चारों धरोहरों में क्या है खास?

    मध्य प्रदेश के इन चारों स्थलों की खासियत अलग-अलग है. कहीं हजारों साल पुरानी कला और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं तो कहीं मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला और गोंड शासन की स्थापत्य विरासत दिखाई देती है.


    1. बाघ गुफाएं: पत्थरों पर दर्ज बौद्ध कला की कहानी

    धार जिले में बाघ नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित बाघ गुफाएं नौ रॉक-कट बौद्ध गुफाओं का समूह हैं. UNESCO के अनुसार इनका विकास लगभग चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ. इन गुफाओं की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं. खासतौर पर गुफा संख्या-4, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, अपने म्यूरल्स के लिए प्रसिद्ध है.

    इन चित्रों में तत्कालीन जीवन, धार्मिक विषयों, संगीत, नृत्य और सामाजिक गतिविधियों की झलक मिलती है. UNESCO के रिकॉर्ड के अनुसार यहां बड़ी संख्या में प्राचीन अभिलेख भी मिले हैं, जो गुप्तकालीन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों से इसके संबंध की ओर संकेत करते हैं.


    2. गिन्नौरगढ़ किला: गोंड विरासत की मजबूत पहचान

    सीहोर जिले में रातापानी क्षेत्र के वन परिदृश्य के बीच स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश की गोंड विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. यह किला केवल सैन्य सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके आसपास की प्राकृतिक भौगोलिक संरचना और जल प्रबंधन व्यवस्था भी इसे खास बनाती है. किले की संरचना और आसपास के ऐतिहासिक अवशेष मध्य भारत में गोंड शासन की राजनीतिक व्यवस्था, वास्तुकला और जल प्रबंधन की परंपराओं को समझने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं. UNESCO की Tentative List में गिन्नौरगढ़ किले की प्रविष्टि भी 8 जुलाई 2026 की है।


    3. बटेश्वर-पदावली-ककरामठ: एक जगह तीन ऐतिहासिक मंदिर समूह

    मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह को एक संयुक्त विरासत स्थल के रूप में Tentative List में शामिल किया गया है. UNESCO के मुताबिक ये मंदिर मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित हुए और मध्य भारत में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के विकास को दर्शाते हैं। बटेश्वर अपने बड़े मंदिर समूह के लिए जाना जाता है, जबकि पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य विशेषताएं इस पूरे क्षेत्र की मंदिर निर्माण परंपरा को समझने में मदद करती हैं।

    UNESCO के अनुसार इन तीनों स्थलों को एक साथ देखने पर चंबल घाटी में विकसित क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य और कलात्मक परंपरा की तस्वीर सामने आती है.


    4. उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकाल की धार्मिक और राजनीतिक विरासत

    विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन भारत की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल हैं. यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, मूर्तियां और अभिलेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं के साथ तत्कालीन राजसत्ता के संबंध को भी सामने रखते हैं. उदयगिरि की सबसे चर्चित प्रतिमाओं में विशाल वराह प्रतिमा शामिल है. यह वैष्णव परंपरा और गुप्तकालीन राजकीय विचारधारा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. UNESCO की एक अलग 2025 की Tentative List प्रविष्टि में उदयगिरि की गुफा संख्या-1 को उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिरों की एक Serial Nomination का हिस्सा भी बनाया गया है।


    मध्य प्रदेश में अब 19 Tentative List entries?

    मध्य प्रदेश की ये चार नई प्रविष्टियां राज्य की विरासत को UNESCO के मंच पर और विस्तार देती हैं. UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य से जुड़ी कई अन्य प्रविष्टियां भी दर्ज हैं, जिनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, धामनार का ऐतिहासिक समूह, खूनी भंडारा और रामनगर के गोंड स्मारक जैसी धरोहरें शामिल हैं। प्रदेश की विरासत सूची में प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के स्थल शामिल हैं. भेड़ाघाट-लामेताघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी UNESCO की Tentative List में दर्ज हैं।


    Tentative List में शामिल होने का क्या मतलब है?

    किसी स्थल का UNESCO की Tentative List में शामिल होना यह बताता है कि संबंधित देश उसे भविष्य में World Heritage List के लिए नामांकित करने पर विचार कर रहा है. इसके बाद नामांकन, मूल्यांकन और UNESCO की निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई होती है. इसलिए इन चारों स्थलों का Tentative List में आना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं, बल्कि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मध्य प्रदेश की विरासत को मिलेगा नया मंच
    बाघ की भित्ति चित्रकारी से लेकर गिन्नौरगढ़ की गोंड स्थापत्य विरासत, चंबल के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं तक इन चार स्थलों की विशेषताएं मध्य प्रदेश के इतिहास की अलग-अलग परतों को सामने लाती हैं। UNESCO की आधिकारिक सूची में चारों स्थलों का शामिल होना प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • MP: निधि तिवारी केस में नया मोड….2 बच्चों के इंजीनियर पिता से कैसे बढ़ी नजदीकी…मां ने किए कई खुलासे

    MP: निधि तिवारी केस में नया मोड….2 बच्चों के इंजीनियर पिता से कैसे बढ़ी नजदीकी…मां ने किए कई खुलासे


    सिंगरौली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिंगरौली (Singrauli) के मोरवा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर (Social Media Influencer) निधि तिवारी (Nidhi Tiwari) की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. निधि की मौत के बाद अब उसकी मां हेमलता तिवारी (Hemlata Tiwari) ने बेटी की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मां के मुताबिक निधि परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी और घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ बैढ़न में एक आलीशान मकान भी बनवा रही थी. इसी दौरान उसकी नजदीकी एक शादीशुदा इंजीनियर से बढ़ी, जो दो बच्चों का पिता था।


    होटल में हुई थी सोनू से मुलाकात

    हेमलता तिवारी के मुताबिक निधि मोरवा के जीएस ग्रैंड होटल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी. इसी होटल में एनसीएल से जुड़े आउटसोर्सिंग काम के सिलसिले में आने वाला सोनू सिंह अक्सर ठहरता था. सोनू पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है और इंजीनियर के पद पर काम करता था।

    मां का दावा है कि होटल में काम करने के दौरान दोनों की जान-पहचान हुई और धीरे-धीरे यह दोस्ती कथित तौर पर रिश्ते में बदल गई. परिवार को बाद में पता चला कि सोनू शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं. इसके बाद परिवार ने निधि को उससे दूरी बनाने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन मां के मुताबिक दोनों का संपर्क बना रहा।


    ‘हर वक्त रखता था नजर’

    निधि की मां ने सोनू पर बेटी की लगातार निगरानी करने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि निधि के कान में अक्सर ब्लूटूथ लगा रहता था और वह सोनू के संपर्क में रहती थी. मां के मुताबिक, सोनू यह जानना चाहता था कि निधि कहां है और उसके आसपास कौन है. घर में कोई रिश्तेदार आने पर भी निधि से सवाल किए जाते थे।

    हेमलता तिवारी का दावा है कि इस वजह से निधि काफी समय तक ऑनलाइन रहती थी और ब्लूटूथ के जरिए सोनू से संपर्क में बनी रहती थी. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.


    परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी निधि

    मां के मुताबिक निधि घर की सबसे बड़ी बेटी थी और परिवार की जिम्मेदारियों में उसका बड़ा योगदान था. पिता अशोक तिवारी एक कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन बाद में ट्रांसफर के बाद परिवार से अलग हो गए. हेमलता का कहना है कि इसके बाद उन्होंने ही बच्चों का पालन-पोषण किया।

    निधि बैढ़न में अपने लिए एक आलीशान घर बनवा रही थी. मां के मुताबिक, वह घर और परिवार के भविष्य को लेकर लगातार मेहनत कर रही थी, लेकिन निजी जिंदगी में चल रही उथल-पुथल के कारण तनाव में भी रहती थी।


    घटना वाले दिन क्या हुआ था?

    हेमलता तिवारी के मुताबिक, घटना वाले दिन निधि ने नीचे पूजा-पाठ किया और इसके बाद ऊपर अपने कमरे में चली गई. उस समय भी उसके कान में ब्लूटूथ लगा हुआ था. इसके बाद सोनू सिंह का फोन आया। कुछ देर बाद जब परिवार के लोगों ने कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया. परिवार के मुताबिक, निधि कमरे में पंखे से दुपट्टे के सहारे लटकी हुई मिली।

    निधि की मौत के बाद उसकी मां के इन दावों ने सोनू सिंह के साथ उसके रिश्ते, निधि की मानसिक स्थिति और घटना से पहले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब इन दावों की सच्चाई और निधि की मौत की असल वजह पुलिस जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी.

  • MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू

    MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 4 दिन प्रदेश में कोई मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहेगा, जिससे कई हिस्सों में तेज धूप निकलने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा।

    इधर, बुधवार-गुरुवार से प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के आसार हैं। राजस्थान और पंजाब के कई जिलों से मानसून लौट चुका है, जबकि इसकी वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंच गई है। ऐसे में सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून विदा होने के संकेत हैं।

    आज 4 जिलों में तेज धूप, बाकी जगह बादल-बूंदाबांदी

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में तेज धूप खिल सकती है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में बादल छाए रहने और कहीं-कहीं बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

    बुधवार से मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के करीब आधे हिस्से में तीखी धूप रहने का अनुमान है। 2 अक्टूबर तक अधिकांश हिस्सों में धूप खिलने की संभावना है। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के साथ दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    मानसून की सामान्य अवधि खत्म होने में 2 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक रहती है। यानी प्रदेश में मानसून की सामान्य अवधि पूरी होने में अब दो दिन बाकी हैं। इसके बाद अलग-अलग हिस्सों से मानसून की वापसी का सिलसिला तेज होने लगेगा।

    राजस्थान और पंजाब के कई हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है। मानसून की वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंचने के कारण अब प्रदेश में भी इसके लौटने के संकेत मिलने लगे हैं।

    पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे के आसपास या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    हालांकि, कुछ जिलों में अभी भी बारिश औसत से कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 20% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके चलते मानसून सीजन के अंत तक प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना बनी हुई है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    सामान्य बारिश का आंकड़ा छूना मुश्किल

    मानसून की विदाई का समय नजदीक आने के साथ अब प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100% तक पहुंचने की संभावना कम नजर आ रही है। अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहने के कारण बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में अब मौसम का रुख मानसून की वापसी और धूप बढ़ने की ओर रहने की संभावना है।

  • MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव

    MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव


    मध्य प्रदेश: में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को राजधानी भोपाल में तेज हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने अरेरा हिल्स स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

    प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग के कार्यालय तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने पार्टी कार्यालय के सामने सभा भी की। इसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ कई विधायक और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता शामिल हुए।

    कांग्रेस का यह आंदोलन SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। कांग्रेस इन बदलावों को लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रही है।

    विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मामलों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े विषय शामिल थे।

    इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई। कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में अपना प्रदर्शन आयोजित किया और स्वतंत्र जांच की मांग सामने रखी।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयुक्तों द्वारा किसी विषय पर व्यक्तिगत टिप्पणी, सुझाव या आपत्ति दर्ज करना निर्णय में असहमति के समान नहीं है। आयोग के मुताबिक SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    इस पूरे विवाद पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट, लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के आरोप संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

    भोपाल में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने SIR से जुड़े अपने सवालों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    इस बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR और अन्य फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब आमने-सामने हैं, जबकि भोपाल में हुआ प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद के और तेज होने का संकेत देता है।

  • भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    मध्य प्रदेश, 28 सितंबर। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 के अवसर पर फार्मेसी विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सुरक्षित और जिम्मेदार दवा उपयोग का संदेश दिया। भोपाल स्थित एक विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

    कार्यक्रम का आयोजन शारदा सभागार में किया गया। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering Pharmacists for Healthier Futures” रखी गई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल, मरीजों को उचित परामर्श, दवा सुरक्षा तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता में फार्मासिस्ट की भूमिका को सामने लाना रहा।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने फार्मासिस्टों की भूमिका को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में फार्मासिस्टों की अहम भूमिका होती है।उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई। उनका कहना था कि इन क्षमताओं के जरिए विद्यार्थी जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर बनकर समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं।

    विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय सिंह ने कहा कि विश्व फार्मासिस्ट दिवस स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण में फार्मासिस्टों के योगदान को पहचानने का अवसर देता है। उन्होंने शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को विद्यार्थियों के व्यावसायिक ज्ञान, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करने वाला माध्यम बताया। कुलसचिव डॉ. साईटेश कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को फार्मेसी के प्रति उनके उत्साह, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि फार्मेसी जागरूकता रैली जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान को समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे ने विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक ज्ञान और संवाद कौशल को लगातार मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मरीजों और समाज के प्रति फार्मेसी पेशेवरों की जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।विश्व फार्मासिस्ट दिवस के तहत विद्यार्थियों के लिए फार्मेसी क्विज, रंगोली प्रतियोगिता, फार्मेसी डांस एक्ट और फार्मेसी अवेयरनेस रैली का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों ने अपनी ज्ञान क्षमता, रचनात्मकता, टीमवर्क और पेशेवर भावना का प्रदर्शन किया।

    जागरूकता रैली के जरिए लोगों को दवाओं के तर्कसंगत और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों की गतिविधियों का उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए दवा इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स डॉ. वी. के. गुप्ता, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. विनोद कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।आयोजन का संचालन स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रमों को जोड़कर फार्मासिस्टों की सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भूमिका को रेखांकित किया गया।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

    विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप रहे। विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन आयोग में महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में विरोध दर्ज कराया।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ी संख्या में बल तैनात किया और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ने का प्रयास करते दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देश में चिंता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने युवाओं, किसानों और नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।

    बिहार की राजधानी पटना में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां वामपंथी दलों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    पटना में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन भी जारी था। छात्र अपनी अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।

    नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।

    हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जताया।

    इस तरह अलग-अलग राज्यों में हुए प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। वहीं, पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए।

  • उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    मध्य प्रदेश 28 सितंबर। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का एक हिस्सा समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। उज्जैन प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं के लिए मास्टर प्लान के तहत मार्गों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है और इसमें सभी समुदायों की भागीदारी सामने आ रही है।

    सिंहस्थ-2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए शहर में विभिन्न विकास और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, इन कार्यों के तहत ऐसे मकान और धर्मस्थल जो प्रस्तावित मार्गों के बीच आ रहे हैं, उन्हें संबंधित लोग स्वयं हटाने के लिए आगे आ रहे हैं।

    इसी क्रम में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। इस संबंध में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अनुसार मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है और इसमें अलग-अलग धर्म एवं समुदाय के लोग अपना सहयोग दे रहे हैं।

    कलेक्टर के अनुसार, जिन लोगों के मकान या धर्मस्थल विकास कार्यों के बीच आ रहे हैं, वे स्वयं आगे आकर उन्हें हटाने में सहयोग कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है।

    प्रशासन ने इस मामले को लेकर लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाहों से बचना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों के बीच शहर में किसी प्रकार की अनावश्यक स्थिति उत्पन्न न हो।

    उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़ा मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। उनके अनुसार, ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसके कारण किसी व्यक्ति को मौके पर जाने की आवश्यकता हो।

    शहर काजी ने कहा कि जिस कार्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है, उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं।

    सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में सड़क, मार्ग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़े काम लगातार आगे बढ़ाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन विकास कार्यों में लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण है। छत्री चौक पर शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया भी इसी क्रम में बताई गई है।

    मामले को लेकर प्रशासन और शहर काजी दोनों ने लोगों से संयम बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि वे अनावश्यक रूप से मौके पर पहुंचने के बजाय शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

  • उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के अनुसार सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत सड़क की सीमा में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम की ओर से की जा रही है। शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने का मामला भी इसी कार्रवाई से जुड़ा है। इस मामले में दायर रिट अपील पर सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

    मस्जिद के निर्माण से जुड़े विवाद में पहले 9 सितंबर को एक याचिका दायर की गई थी। मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद एडवोकेट अशहर वारसी की ओर से अदालत के फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर की गई। सोमवार को इसी अपील पर सुनवाई के दौरान मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने और नगर निगम की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों के पालन का मुद्दा उठाया गया।

    सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शाही मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा ही हटाया जाए। बताया गया कि इस सीमित हिस्से को हटाने को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी थी। अपीलकर्ता की ओर से मांग रखी गई कि मस्जिद के बाकी हिस्से के संबंध में पहले हुई बातचीत और दिए गए आश्वासनों को ध्यान में रखा जाए।

    इसके साथ ही नगर निगम की ओर से पूर्व में दिए गए टीडीआर और एफएआर से संबंधित आश्वासनों का पूरी तरह पालन कराने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई। अपीलकर्ता ने अदालत से इन आश्वासनों के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान मामला मुख्य रूप से मस्जिद के कितने हिस्से को हटाया जाना है और नगर निगम के पूर्व आश्वासनों का पालन किस तरह सुनिश्चित होगा, इन मुद्दों पर केंद्रित रहा।

    इसी सुनवाई के दौरान नई कमिटी की ओर से भी एक अलग याचिका दायर की गई थी। हालांकि, प्रशासन के साथ बातचीत होने के बाद कमिटी ने अपनी याचिका वापस ले ली। इस तरह नई कमिटी की ओर से दायर याचिका पर आगे कार्यवाही नहीं की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका वापस लेने का फैसला प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान की सड़क चौड़ीकरण योजना पर काम जारी है। इस योजना के तहत सड़क के विस्तार में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। शाही मस्जिद का मामला भी इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आया है और अब इससे संबंधित विवाद हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।

    इससे पहले इसी मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक घर का बाधक हिस्सा भी हटाया गया था। यह कार्रवाई रविवार को हुई थी। शाही मस्जिद मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर से जुड़े आश्वासनों के पालन की मांग रखी। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में जारी है।