Category: Madhya Pradesh

  • भिखारी बनकर घर की रेकी, डॉक्टर के घर दीवार लांघकर घुसा चोर और दिनदहाड़े मूर्ति लेकर हुआ फरार

    भिखारी बनकर घर की रेकी, डॉक्टर के घर दीवार लांघकर घुसा चोर और दिनदहाड़े मूर्ति लेकर हुआ फरार

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में दिनदहाड़े चोरी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बुढ़ार थाना क्षेत्र की आदर्श कॉलोनी में एक व्यक्ति कथित तौर पर भिखारी और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का भेष बनाकर कई दिनों तक इलाके में घूमता रहा। इसी दौरान उसने एक डॉक्टर के घर की रेकी की और मौका मिलते ही घर में घुसकर वहां रखी एक मूर्ति चोरी कर ली। चोरी की पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।

    आदर्श कॉलोनी निवासी डॉक्टर ए.के. लाला अपने घर में ही क्लिनिक संचालित करते हैं। बताया गया कि घटना के समय डॉक्टर क्लिनिक खोलकर किसी काम से बाहर गए हुए थे। घर के मुख्य गेट पर ताला लगा था और उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। इसी दौरान आरोपी डॉक्टर के घर के आसपास पहुंचा और मौका देखकर अंदर दाखिल हो गया।

    सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति पहले घर के आसपास घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। वह कुछ देर तक आसपास की स्थिति पर नजर रखता है और यह देखता है कि वहां कोई मौजूद है या नहीं। जब उसे आसपास कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दिया तो उसने घर में प्रवेश करने का फैसला किया।

    आरोपी ने गेट और दीवार को पार कर घर के अंदर प्रवेश किया। अंदर पहुंचने के बाद उसने घर में सामान तलाशने की कोशिश की। हालांकि, उसे कोई खास कीमती वस्तु हाथ नहीं लगी। इसके बाद उसने घर में रखी एक मूर्ति उठा ली और जिस रास्ते से अंदर आया था, उसी रास्ते से बाहर निकलकर फरार हो गया।

    घटना की खास बात यह है कि आरोपी की पूरी गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में उसके घर के आसपास घूमने से लेकर अंदर प्रवेश करने और मूर्ति लेकर बाहर निकलने तक की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। इससे यह भी सामने आया कि उसने घर में प्रवेश करने से पहले आसपास की स्थिति का जायजा लिया था।

    डॉक्टर ए.के. लाला के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति पिछले कुछ दिनों से इलाके में भिखारी के रूप में घूम रहा था। स्थानीय लोग उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ समझकर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। इसी वजह से उसके लगातार इलाके में घूमने पर किसी को विशेष संदेह नहीं हुआ। डॉक्टर का कहना है कि आरोपी को जब मौका मिला तो उसने घर में प्रवेश कर मूर्ति चोरी कर ली।

    डॉक्टर ने यह भी कहा कि अगर घर में कोई कीमती सामान रखा होता तो आरोपी उसे भी अपने साथ ले जा सकता था। घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज सामने आने से अब आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    वहीं, बुढ़ार थाना प्रभारी रजनीश तिवारी ने बताया कि घटना को लेकर थाने में फिलहाल कोई सूचना या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद आरोपी की पहचान और घटना की वास्तविकता की जांच की जा रही है।

    फिलहाल दिनदहाड़े हुई इस चोरी ने इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भिखारी के रूप में संदिग्ध व्यक्ति के कई दिनों तक क्षेत्र में घूमने और फिर मौका पाकर बंद घर में प्रवेश करने की घटना से लोगों में भी सतर्कता बढ़ गई है। पुलिस के स्तर पर आरोपी की पहचान और आगे की कार्रवाई के बाद ही घटना से जुड़ी पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल: के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए इस प्रारूप में संरक्षित वन क्षेत्रों से होकर कई सड़कों के निर्माण का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से जंगलों और बाघों के आवास क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

    ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।

    मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

    कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

    मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

    अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

  • जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा

    जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा


    मध्य प्रदेश:   में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच जबलपुर का बरगी बांध पानी से लबालब भर गया है। बांध के कैचमेंट क्षेत्र मंडला और डिंडोरी में लगातार बारिश होने से जलस्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति को देखते हुए बांध के 17 गेट खोलकर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में भी असर दिखाई देने लगा है।

    बरगी बांध के 17 गेट करीब 2.38 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों के जरिए लगभग 6,121 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बांध में पानी का भराव इतना अधिक है कि कई गेटों से पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल रहा है। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा है।

    नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जबलपुर और आसपास के प्रमुख घाटों में पानी भर गया है। नदी के बढ़ते बहाव के चलते घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। लगातार बारिश और बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

    नर्मदा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों के आवागमन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार बरगी नगर, बिजौरा, बांदरकोला, खापा, बसा, दुर्गा नगर और प्रेम नगर समेत आसपास के करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। पानी बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से डूब क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा नदी और घाटों के आसपास नहीं जाने की अपील की गई है।

    नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

    भारी बारिश का असर केवल बरगी बांध तक सीमित नहीं है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार पानी आने से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। 17 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के बहाव में भी तेजी आई है।

    प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलमग्न घाटों और नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचने को कहा गया है। लगातार बारिश के बीच बांध और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी है।

    फिलहाल बरगी बांध से पानी की निकासी जारी है और नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित होने तथा घाटों के जलमग्न होने के कारण स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के सीहोर नगर के जमशेदनगर इलाके में रविवार को छोटे पुल के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पानी के केन और कैंपर से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर नाले के किनारे पलट गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और ऑटो चालक समेत आसपास मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। हालांकि, इस घटना ने इलाके में स्थित जर्जर पुल की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास से पानी के केन और कैंपर लेकर गुजर रहा ऑटो अचानक अनियंत्रित हो गया। इसके बाद वाहन नाले के किनारे पलट गया। ऑटो में बड़ी संख्या में पानी के पीले केन और कैंपर रखे हुए थे। वाहन के पलटने से ये सभी सामान नाले के आसपास और गंदगी से भरे किनारे पर बिखर गए।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और चालक की मदद करने लगे। ऑटो चालक और आसपास मौजूद लोगों ने नाले के किनारे उतरकर बिखरे हुए पानी के केन और कैंपर को संभाला। पलटे हुए वाहन से सामान निकालने और उसे सुरक्षित जगह पर रखने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    इस हादसे के बाद जमशेदनगर के छोटे पुल की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों की चिंताएं फिर सामने आई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पुल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम भी हाल ही में चल रहा था, लेकिन पुल की मौजूदा हालत के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों और वाहनों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पुल की मरम्मत के दौरान पहले भी एक गंभीर घटना सामने आ चुकी है। निर्माण कार्य के समय पुल का एक बड़ा कंक्रीट का टुकड़ा नीचे गिर गया था। उस दौरान वहां काम कर रहे मजदूर बाल-बाल बच गए थे। इस घटना के बाद भी पुल की सुरक्षा और मरम्मत कार्य को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुल और संकरे रास्ते के कारण यहां से गुजरना जोखिम भरा बना हुआ है। दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को इस रास्ते से निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की बदहाल स्थिति के चलते कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। रविवार को पानी से भरे ऑटो के पलटने की घटना ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

    लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण स्थानीय निवासियों में नाराजगी भी है। लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुल का निर्माण और मरम्मत कार्य सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

    फिलहाल इस हादसे में किसी के घायल होने या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास हुई घटना ने जर्जर पुलों की मरम्मत और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर उजागर किया है।

  • सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    मध्य प्रदेश: के सतना जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। इसी बीच जैतवारा थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। तुर्री नदी का उफनता पुल पार करने की कोशिश में मोटरसाइकिल सवार चाचा-भतीजे तेज बहाव में बह गए। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए भतीजे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन 50 वर्षीय रामचेरे वर्मा पानी के तेज बहाव में लापता हो गए। उनकी तलाश के लिए रविवार सुबह से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक, सतना जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते क्षेत्र की नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई स्थानों पर पानी तेज गति से बह रहा है। इसी दौरान शनिवार शाम करीब छह बजे रामचेरे वर्मा अपने भतीजे के साथ मोटरसाइकिल से नयागांव-सभापुर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें तुर्री नदी का पुल पार करना था, जहां पानी पुल के काफी ऊपर से बह रहा था।

    पुल के पास मौजूद ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने चाचा-भतीजे को उफनती नदी पार करने से रोकने की कोशिश की। लोगों ने उन्हें तेज बहाव और पानी के बढ़े हुए स्तर को देखते हुए आगे नहीं बढ़ने की सलाह दी। इसके बावजूद दोनों मोटरसाइकिल लेकर पुल पार करने के लिए नदी में उतर गए।

    बताया जा रहा है कि जैसे ही वे आगे बढ़े, पानी के तेज बहाव के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद मोटरसाइकिल समेत दोनों नदी के बहाव में बहने लगे। घटना को देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मदद के लिए आगे आए। लोगों ने दोनों को बचाने का प्रयास किया और इस दौरान भतीजे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। हालांकि, रामचेरे वर्मा तेज बहाव की चपेट में आकर दूर तक बह गए और लापता हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही जैतवारा थाना प्रभारी पंकज शुक्ला पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने लापता व्यक्ति की तलाश के प्रयास किए, लेकिन शनिवार रात खराब मौसम और अत्यधिक अंधेरा होने के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। नदी में पानी का बहाव तेज होने के चलते रात के समय तलाशी अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण था।

    रविवार सुबह राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम ने नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। बचाव दल बोट और गोताखोरों की मदद से रामचेरे वर्मा की तलाश कर रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और बहाव भी तेज है, इसलिए टीम पूरी सावधानी के साथ अभियान चला रही है।

    घटनास्थल पर एसडीएम लोकेश कुमार जांगड़े, पुलिस प्रशासन की टीम, लापता व्यक्ति के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं। सभी की नजरें बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। फिलहाल रामचेरे वर्मा का पता नहीं चल पाया है और उनकी तलाश जारी है।

    लगातार बारिश के कारण सतना जिले में नदियों के उफान पर होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। तुर्री नदी की इस घटना ने तेज बहाव के बीच पुल पार करने के जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन और बचाव दल लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं।

  • खंडवा में ट्रेन की चपेट में आया युवक, एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार, मजबूरी में बाइक से पहुंचाया अस्पताल

    खंडवा में ट्रेन की चपेट में आया युवक, एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार, मजबूरी में बाइक से पहुंचाया अस्पताल

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में रेलवे ट्रैक के पास हुए हादसे के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे हैं। मूंदी थाना क्षेत्र के बीड़ गांव में ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बावजूद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। आखिरकार लोगों को घायल युवक को मोटरसाइकिल से जिला अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घायल युवक की पहचान कुलदीप के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, कुलदीप बीड़ गांव में रेलवे ट्रैक के पास घूम रहा था। इसी दौरान अचानक ट्रेन आ गई और वह उसकी चपेट में आ गया। ट्रेन की टक्कर लगने से युवक घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उसकी मदद की और तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास शुरू किया।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, ताकि घायल को बिना देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सके। रेलवे ट्रैक के पास दुर्घटना होने के कारण घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों को उम्मीद थी कि सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस जल्द पहुंच जाएगी और युवक को सुरक्षित तरीके से अस्पताल ले जाया जा सकेगा।

    हालांकि, बताया जा रहा है कि एंबुलेंस पहुंचने में करीब एक घंटे का समय बीत गया। इस दौरान घायल युवक को अस्पताल ले जाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ा। काफी समय गुजरने के बाद भी जब एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची, तो लोगों ने खुद ही घायल को अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया।

    इसके बाद स्थानीय लोगों ने घायल कुलदीप को मोटरसाइकिल पर बैठाया और खंडवा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आपात स्थिति में निजी वाहन के रूप में बाइक का सहारा लेकर घायल को अस्पताल पहुंचाने की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल चिकित्सा सहायता की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में घायल को चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार परेशानी का कारण बना।

    जिला अस्पताल पहुंचने के बाद कुलदीप को उपचार दिया गया। अस्पताल में इलाज मिलने के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया है। फिलहाल युवक खतरे से बाहर है और उसकी स्थिति ठीक बताई जा रही है। समय पर अस्पताल पहुंचने और उपचार मिलने के बाद उसकी हालत में सुधार होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, हादसे में उसे किस तरह की चोटें आईं और उपचार की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटना के बाद खंडवा जिले में एंबुलेंस सेवा और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में दुर्घटना या अन्य गंभीर चिकित्सा स्थिति के दौरान एंबुलेंस की तत्काल उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है। आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    बीड़ गांव में हुई इस घटना ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि दुर्घटना के समय जरूरतमंद मरीजों तक एंबुलेंस कितनी जल्दी पहुंच पा रही है। फिलहाल कुलदीप की हालत खतरे से बाहर बताई गई है, लेकिन एंबुलेंस के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार और फिर बाइक से अस्पताल पहुंचाने की परिस्थितियों ने जिले की आपातकालीन सेवाओं पर चर्चा तेज कर दी है।

  • सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद

    सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना रविवार, 27 सितंबर को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और सुबह आयोजित होने वाली दिव्य भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान रैना पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचान बनाने वाले रैना ने महाकाल के दरबार में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुरेश रैना रविवार तड़के अपनी पत्नी के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे। दोनों ने मंदिर में होने वाली प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल की आराधना की। इस दौरान उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर आरती के दर्शन किए। बताया गया कि रैना ने लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर इस धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और बाबा महाकाल की भक्ति में समय बिताया।

    महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल के भक्तों के लिए भस्म आरती के दर्शन को विशेष पुण्यदायी और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। सुरेश रैना भी अपनी पत्नी के साथ इसी धार्मिक आयोजन में शामिल हुए और भगवान के समक्ष पूजा-अर्चना की।

    आरती के दौरान रैना का पूरा ध्यान धार्मिक अनुष्ठान पर केंद्रित रहा। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। सुबह के समय मंदिर परिसर में होने वाले इस आयोजन में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं। रैना की उज्जैन यात्रा भी इसी धार्मिक आस्था और दर्शन से जुड़ी रही।

    भस्म आरती संपन्न होने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से सुरेश रैना का स्वागत और सम्मान किया गया। मंदिर में उनके आगमन के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस तरह उनकी मंदिर यात्रा का समापन भगवान महाकाल के दर्शन और मंदिर समिति की ओर से किए गए सम्मान के साथ हुआ।

    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों और विशेष आरतियों के दौरान मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल है, जिसमें भाग लेने के लिए श्रद्धालु पहले से दर्शन की व्यवस्था करते हैं।

    सुरेश रैना की उज्जैन यात्रा के दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने एक साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में हिस्सा लिया। क्रिकेट से जुड़े अपने सार्वजनिक जीवन के अलावा रैना की यह यात्रा धार्मिक आस्था से जुड़ी रही। भगवान महाकाल के दरबार में पहुंचकर उन्होंने पूजा-अर्चना की और आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया।

  • इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस

    इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस


    इंदौर  । इंदौर के नंदबाग इलाके में शनिवार देर रात पड़ोसियों के बीच हुआ विवाद मारपीट में बदल गया। इस घटना में वार्ड 16 बूथ की बीजेपी अध्यक्ष रिंकू उर्फ दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोग बाणगंगा थाने पहुंचे जहां पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने घटना के बाद संबंधित लोगों का मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
    बाणगंगा पुलिस के मुताबिक नंदबाग इलाके में रहने वाले पड़ोसियों के बीच किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई थी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि विजय राहुल शर्मा और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने बीजेपी नेत्री दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट की। बताया गया है कि इस दौरान दोनों को सड़क पर पटककर भी पीटा गया।

    घटना के बाद मौके पर काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान दोनों पक्ष एक दूसरे के वीडियो बनाते रहे। इसके बाद मामला शांत होने पर दोनों पक्ष अपने अपने लोगों के साथ थाने पहुंचे।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत को दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतों में दोनों तरफ से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों का मेडिकल कराया है ताकि चोटों की स्थिति का भी पता लगाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय रहवासियों की ओर से बीजेपी नेत्री को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। कुछ रहवासियों का कहना है कि दीक्षा स्थानीय पार्षद का नाम लेकर आए दिन उनके साथ बदसलूकी करती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर मारपीट से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो और शिकायतों के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। फिलहाल मामला दोनों पक्षों की शिकायत और एफआईआर के बाद जांच के चरण में है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • 150 छात्राएं सड़क पर क्यों उतरीं? बड़वानी गर्ल्स हॉस्टल में पानी से लेकर भोजन और सुरक्षा तक उठे बड़े सवाल

    150 छात्राएं सड़क पर क्यों उतरीं? बड़वानी गर्ल्स हॉस्टल में पानी से लेकर भोजन और सुरक्षा तक उठे बड़े सवाल


    बड़वानी  । बड़वानी के शासकीय संयुक्त बालिका छात्रावास में रहने वाली करीब 150 छात्राओं का शनिवार को गुस्सा सड़क पर नजर आया। छात्रावास में पानी भोजन सफाई और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों को लेकर छात्राएं हॉस्टल से बाहर निकलीं और पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। छात्राओं का कहना था कि लंबे समय से परेशानियों की शिकायत की जा रही थी लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो उन्हें खुद सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ी।

    छात्राओं ने सबसे बड़ी समस्या पानी की बताई। उनका दावा है कि छात्रावास में लगे बोरवेल और नलों से पूरे दिन में करीब एक घंटे ही पानी मिल पाता है। करीब 150 छात्राओं के लिए इतनी कम अवधि में मिलने वाला पानी पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। पानी की कमी के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    भोजन को लेकर भी छात्राओं ने गंभीर शिकायतें सामने रखीं। उनका कहना है कि एक दिन सब्जी में नमक ज्यादा होने की शिकायत की गई थी। इसके बाद कथित तौर पर अगले दिन खाने में नमक ही नहीं डाला गया। छात्राओं ने हॉस्टल में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि हरी सब्जियों में कई बार कीड़े मिलने की शिकायत के बाद उन्हें मेन्यू से ही हटा दिया गया।

    छात्राओं ने यह भी दावा किया कि सिकल सेल बीमारी से पीड़ित दो छात्राओं की तबीयत भोजन की गुणवत्ता के कारण खराब हुई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। छात्राओं ने अधिकारियों से भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने और निर्धारित मेन्यू के अनुसार खाना उपलब्ध कराने की मांग की।

    हॉस्टल की दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर भी छात्राओं ने नाराजगी जताई। उनके मुताबिक पानी का कूलर गीजर और सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन खराब पड़ी है। परिसर में जगह जगह कचरा जमा होने की शिकायत भी की गई। छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में सांप आने की बात कहते हुए सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कचरे और आसपास की स्थिति के कारण यह समस्या बार बार सामने आती है।

    प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग रंजना सिंह छात्राओं से मिलने पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिया। अधिकारी के अनुसार छात्रावास भवन का निर्माण वर्ष 2023 में हुआ था जबकि छात्राओं का रहना वर्ष 2025 से शुरू हुआ। भवन में निर्माण से जुड़ी कुछ कमियां सामने आई हैं जिन्हें दूर करने के लिए PIU को पत्र लिखा जाएगा।

    पानी की समस्या को लेकर अधिकारी ने बताया कि फिलहाल बोरवेल से सीमित मात्रा में पानी उपलब्ध हो रहा है। नगर पालिका की पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराने के लिए आवेदन किया गया है। तब तक छात्रावास में टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं सांप और कचरे की समस्या को छात्रावास के पास स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड से भी जोड़ा गया है।

    प्रशासन की ओर से छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराया गया था लेकिन छात्राओं ने वाहन लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे पैदल ही वापस छात्रावास चली गईं। अब छात्राओं की शिकायतों के बाद पानी भोजन सफाई सुरक्षा और भवन की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन: में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान तक पहुंच गई है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक घर के प्रभावित हिस्से पर खुद गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के काम की शुरुआत की। इस दौरान उनके बचपन से जुड़ा यह मकान भी विकास योजना के दायरे में आया।

    जिस घर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बचपन बीता, उसी मकान का हिस्सा अब प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए हटाया जा रहा है। यह घर उनके परिवार की पुरानी स्मृतियों से जुड़ा रहा है। ऐसे में मकान के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की शुरुआत करना इस पूरी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मार्गों के चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाले मार्ग को चौड़ा किया जाना है।

    करीब 730 मीटर लंबे इस मार्ग की प्रस्तावित चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। सड़क चौड़ीकरण और इससे जुड़े विकास कार्य पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इस मार्ग को चौड़ा करने की कार्रवाई सिंहस्थ के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

    प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में कई भवन आए हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल है। रविवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मकान के प्रभावित हिस्से पर गेती चलाकर इस काम की शुरुआत की। इस दौरान घर और उससे जुड़ी पुरानी स्मृतियों का भावनात्मक पक्ष भी सामने आया।

    पैतृक घर किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं होता। उसमें परिवार के साथ बिताया समय, बचपन की यादें और जीवन के शुरुआती दौर से जुड़ी कई स्मृतियां होती हैं। मुख्यमंत्री के मामले में भी यह मकान उनके बचपन से जुड़ा रहा है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके हिस्से को हटाने की प्रक्रिया सामान्य निर्माण कार्य से अलग भावनात्मक संदर्भ रखती है।

    हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम सार्वजनिक सुविधा और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ा है। इसी योजना के तहत खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक मार्ग को निर्धारित चौड़ाई में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित भवनों के हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रविवार की कार्रवाई में मुख्यमंत्री का अपने ही पैतृक मकान पर गेती चलाना इस बात को भी रेखांकित करता है कि प्रस्तावित सड़क परियोजना का असर उनके परिवार की संपत्ति पर भी पड़ा है। जिस घर से उनका बचपन जुड़ा रहा, उसी के हिस्से को उन्होंने स्वयं हटाने की शुरुआत की।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का यह काम शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है। 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान पर रविवार को गेती चलने के साथ इस हिस्से में चौड़ीकरण की कार्रवाई ने एक अलग मानवीय पहलू भी सामने रखा।