Category: Madhya Pradesh

  • छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    मध्य प्रदेश: के छतरपुर जिले में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। चौका गांव के पास बोलेरो और ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना में तीन महिलाओं समेत पांच लोगों की जान चली गई, जबकि बोलेरो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। परिवार के पांच सदस्यों की एक साथ मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, बोलेरो में चालक समेत कुल छह लोग सवार थे। सभी लोग एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान चौका गांव के नजदीक बोलेरो की ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के भीतर फंस गए। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव का प्रयास शुरू किया।

    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान बिजावर निवासी दौलत रैकवार, उनकी पत्नी बीना रैकवार, श्याम बाई रैकवार, संजय रैकवार और कौशल्या रैकवार के रूप में हुई है। दुर्घटना में बोलेरो चालक छोटू रैकवार की जान बच गई, लेकिन उसे गंभीर चोटें आई हैं। घायल चालक को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे आगे के इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही मातगुवां पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि परिवार के लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। मृतक दौलत रैकवार की बेटी अलका का विवाह पिछले वर्ष छतरपुर जिले के बगौता गांव में हुआ था। हाल ही में अलका के ससुर का निधन हो गया था। इसी वजह से परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। लेकिन रास्ते में चौका गांव के पास हुए हादसे ने परिवार की खुशियों और उम्मीदों को गहरे दुख में बदल दिया।

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले पांचों लोग एक ही परिवार से जुड़े थे। हादसे की खबर मिलते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार के सदस्य राजू रैकवार ने बताया कि दुर्घटना में उनकी मां श्यामबाई, भाई दौलत, भाभी बीना, बहू कौशल्या और भतीजे संजय की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद उनके भाई और भाभी के बच्चे अनाथ हो गए हैं।

    परिवार के पांच सदस्यों को एक साथ खोने का दर्द बयान करते हुए राजू रैकवार फूट-फूटकर रो पड़े। हादसे में बच्चों के माता-पिता और अन्य परिजनों की मौत से परिवार के सामने अब उनके पालन-पोषण और भविष्य की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    छतरपुर में हुई इस दुर्घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे परिजनों को रास्ते में ही अपनी जान गंवानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच में जुटे हैं।

  • उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 27 सितंबर को उज्जैन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का भूमिपूजन, लोकार्पण और अन्य गतिविधियां निर्धारित हैं। इसके साथ ही वे सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों की सौगात देंगे। उज्जैन में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना होंगे, जहां शाम को भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा सुबह से ही शुरू हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 7 बजे दशहरा मैदान पहुंचे। यहां सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 7:55 बजे मुख्यमंत्री वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सुबह के कार्यक्रम पूरे होने के बाद दिन के अन्य आयोजनों की तैयारियां की गईं।

    मुख्यमंत्री का अगला प्रमुख कार्यक्रम महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार, वे सुबह 10:45 बजे महाकाल मंदिर के पार्किंग परिसर में अन्न क्षेत्र के सामने पहुंचेंगे। इसके बाद सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़े भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन करेंगे और तैयार कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इसके अलावा, सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनने का कार्यक्रम भी शामिल है। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    महाकाल मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:40 बजे वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां से आगे के कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाजापुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन सहभागिता निर्धारित है।

    दोपहर 2:20 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उज्जैन हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे के बीच हेलीकॉप्टर से भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। राजधानी पहुंचने के बाद उनका अगला कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में निर्धारित है। दोपहर 3:25 बजे वे कार से पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे और 3:30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां का कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री का दिन का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। शाम 6:30 बजे वे भोपाल के रविंद्र भवन पहुंचेंगे। यहां निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे कार से वापस अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 सितंबर का कार्यक्रम उज्जैन और भोपाल के बीच निर्धारित है। उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और धार्मिक नगरी से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के बाद वे राजधानी में शाम के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पूरे दिन के दौरे में धार्मिक, विकासात्मक, कृषि और संगठनात्मक गतिविधियां उनके कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर तेज बारिश, आज 7 जिलों में अलर्ट

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर तेज बारिश, आज 7 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का दौर तेज हो गया है। जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में पिछले 72 घंटे से लगातार बारिश हो रही है, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं और कई बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी है। रविवार को मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 35.6 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 95% से ज्यादा है। मानसून के बचे चार दिनों में भी बारिश जारी रहती है तो कुल बारिश का आंकड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि अभी प्रदेश के 25 जिलों में ही सामान्य बारिश का कोटा पूरा हुआ है, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    रविवार को 7 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    रविवार को मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास और रतलाम में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है।

    वहीं नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह में भी बारिश होने का अनुमान है।

    डिंडौरी-उमरिया में तीन दिन से मूसलाधार बारिश

    शनिवार को डिंडौरी और उमरिया में तेज बारिश का दौर जारी रहा। दोनों जिलों में पिछले तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। इससे नर्मदा समेत उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

    डिंडौरी के जोगी टिकरिया पुल के डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे-45 पर भी ट्रैफिक प्रभावित रहा।

    शहपुरा स्थित बिलगांव बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। दूसरी ओर उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के चार गेट दो-दो मीटर खोलकर पानी की निकासी की गई।

    बरगी बांध के 9 गेट खोले गए

    जबलपुर के बरगी बांध में लगातार बढ़ रही पानी की आवक को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार को पांच गेट खोले गए थे। इसके बावजूद बांध में पानी की आवक जारी रही। इसके बाद शनिवार को चार और गेट खोल दिए गए।

    इस तरह बरगी बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। लगातार बारिश के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में नदी-नालों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 4 दिन

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, गहरे अवदाब के कारण मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना हुआ है। इसका असर अगले 24 घंटे तक रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। यानी अब मानसून की विदाई में चार दिन बाकी हैं। राजस्थान के कई जिलों से मानसून पहले ही लौट चुका है।

    ऐसे में मानसून की विदाई से ठीक पहले हुई बारिश प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े को और ऊपर ले जा सकती है।

  • ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती

    ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती


    ग्वालियर। ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन की शुरुआत हुई। दो दिवसीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान से न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा और बदलती तकनीक के बीच तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायदान सिर्फ कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है बल्कि अदालत में न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

    उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि वर्तमान दौर में न्यायपालिका के सामने कई ऐसी परिस्थितियां सामने आ रही हैं जिनका सामना न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर के शुरुआती दौर में नहीं किया होगा। सोशल मीडिया यूट्यूब और डीपफेक जैसी तकनीकों ने वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करने की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में अदालतों के सामने पेश किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को समझना और उनकी जांच की प्रक्रिया से परिचित होना महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल अपराधों में भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या कृत्रिम सामग्री तैयार करने की संभावनाओं को समझना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। न्यायमूर्ति मिश्रा के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं और आधुनिक तकनीक के प्रभाव को समझने के लिए लगातार सीखते रहना होगा।

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा को किसी निश्चित पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुभव से यह पता चलता है कि अतीत में क्या हुआ है लेकिन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है जो पहले सामने नहीं आई हैं। बदलते समाज के साथ न्यायपालिका को भी अपनी सोच और समझ का दायरा लगातार बढ़ाना होगा।

    सम्मेलन में पुराने कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या और नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा DNA रिपोर्ट वॉयस सैंपल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट जैसे साक्ष्यों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। फॉरेंसिक लैब पुलिस जांच और जेल व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने के लिए फील्ड ट्रेनिंग की जरूरत पर भी विचार किया गया।

    न्यायिक प्रशिक्षण में Ethics Logic और Psychology जैसे विषयों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखने की जरूरत बताई गई। सम्मेलन में निष्पक्षता समानता और संवेदनशीलता को न्यायिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाने पर भी मंथन किया गया।

    मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का भी उल्लेख किया गया। न्यायिक अकादमी में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर देने की बात सामने आई। इसके साथ ही ADR और Mediation को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

    सम्मेलन में मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक रजिस्ट्री अधिकारी और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। सम्मेलन का मुख्य फोकस बदलती तकनीक नए कानून और आधुनिक दौर की न्यायिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों को तैयार करने पर रहा।

  • खुरैरी चौराहे पर दर्दनाक हादसा ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर छात्र की मौके पर मौत चालक फरार

    खुरैरी चौराहे पर दर्दनाक हादसा ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर छात्र की मौके पर मौत चालक फरार

    ग्वालियर । ग्वालियर में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में 17 वर्षीय छात्र की जान चली गई। मुरार थाना क्षेत्र के खुरैरी चौराहे के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो छात्रों को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों छात्र बाइक से उछलकर हाईवे पर जा गिरे। इसी दौरान ट्रक का पहिया एक छात्र के सिर के ऊपर से गुजर गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उसका साथी भी बुरी तरह घायल हुआ है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

    मृतक छात्र की पहचान भिंड जिले के गोहद स्थित संतोष नगर निवासी लवकुश धवल के रूप में हुई है। लवकुश बालकृष्ण धवल का 17 वर्षीय बेटा था और कक्षा 12वीं में पढ़ाई कर रहा था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी एक छोटी बहन है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार को लवकुश अपने दोस्त प्रशांत कुमार के साथ बाइक से बड़ागांव के पास खुरैरी में रहने वाले एक अन्य दोस्त से मिलने गया था। शाम को दोनों दोस्त से मिलकर बाइक से अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे खुरैरी चौराहे के पास पहुंचे तभी पीछे से आए ट्रक क्रमांक RJ 11-GB 2235 के चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी बाइक में टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद दोनों छात्र सड़क पर गिर गए। लवकुश ट्रक के पहिए की चपेट में आ गया जबकि प्रशांत के सिर और दाहिने पैर में गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों घायलों को जिला अस्पताल मुरार पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद लवकुश को मृत घोषित कर दिया। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शनिवार दोपहर जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

    हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से भागने लगा। पुलिस ने अन्य वाहन चालकों की मदद से ट्रक का पीछा किया। पुलिस को पीछे आता देखकर चालक ट्रक को रास्ते में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने दुर्घटनाकारित ट्रक जब्त कर लिया है। अब आरोपी चालक की तलाश की जा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और ट्रक से जुड़े दस्तावेजों की मदद से चालक तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    मुरार थाना टीआई मैना पटेल ने बताया कि सड़क हादसे में 17 वर्षीय छात्र की मौत हुई है जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल है। ट्रक को जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की तलाश जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया जबकि दूसरे परिवार में घायल छात्र के जल्द स्वस्थ होने की चिंता बनी हुई है।

  • भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

    भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर


    उज्जैन । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। पंडे और पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती की विशेष परंपरा के तहत होने वाले पूजन के बीच गर्भगृह में मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां जारी रहीं।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रजत ओम और बिल्वपत्र से सजा मुकुट धारण कराया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट भी अर्पित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया जबकि डमरू से भी विशेष शृंगार किया गया।

    बाबा महाकाल को रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का भी विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और नैवेद्य चढ़ाया गया। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। जैसे ही पूजन और आरती की प्रक्रिया आगे बढ़ी वैसे ही पूरा परिसर भगवान महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन की धार्मिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान होने वाले अभिषेक पूजन भस्म अर्पण और विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल के अलग अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं। शनिवार की भस्म आरती में भी बाबा महाकाल का रजत ओम बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष से किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।

  • देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण

    देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण


    देवास । देवास में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार रात गणेश विसर्जन चल समारोह निकाला गया। शहर की सड़कों पर देर रात तक गणपति बप्पा की भक्ति और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। अलग अलग क्षेत्रों से निकली गणेश प्रतिमाओं और झांकियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। समारोह में धार्मिक और सामाजिक संदेशों के साथ देशभक्ति से जुड़ी झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

    इस बार गणेश विसर्जन चल समारोह में ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के शौर्य पर आधारित झांकी विशेष रूप से चर्चा में रही। झांकी के जरिए सेना के साहस और देश के प्रति समर्पण को दर्शाने का प्रयास किया गया। इसे देखने के लिए रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। जैसे ही झांकी जुलूस के बीच से गुजरी लोगों ने उत्सुकता के साथ इसे देखा।

    समारोह में 80 से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं और झांकियां शामिल हुईं। इनमें अलग अलग सामाजिक धार्मिक और देशभक्ति से जुड़े विषयों को प्रदर्शित किया गया। कई प्रतिमाओं को आकर्षक रोशनी और विशेष सजावट से तैयार किया गया था। रंग बिरंगी लाइटों से सजी झांकियां रात के अंधेरे में और भी आकर्षक नजर आ रही थीं।

    गणेश विसर्जन चल समारोह को देखने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे। जुलूस जिस मार्ग से गुजर रहा था वहां श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। परिवारों के साथ लोग प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए देर रात तक सड़कों पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और गणेश प्रतिमाओं पर फूल बरसाए।

    धार्मिक आस्था के इस आयोजन में देशभक्ति से जुड़ी झांकियों ने समारोह को अलग पहचान दी। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर झांकी को देखा और इसके जरिए दिए जा रहे संदेश को समझने की कोशिश की।

    गणेश विसर्जन के दौरान प्रशासन ने भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात और भीड़ नियंत्रण की स्थिति का जायजा लिया। जुलूस के दौरान पुलिस बल को अलग अलग स्थानों पर तैनात किया गया था।

    प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई। भीड़ वाले स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा। जुलूस के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए मार्ग और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई।

    देर रात तक देवास की सड़कों पर गणेश प्रतिमाओं और झांकियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु गणपति बप्पा के दर्शन करते रहे और विसर्जन के लिए आगे बढ़ती प्रतिमाओं को देखते रहे। धार्मिक उत्साह के साथ सेना के शौर्य को दर्शाती झांकी ने इस बार के गणेश विसर्जन समारोह को खास बना दिया।

  • MP में पटवारियों को मिलेगा प्रमोशन का मौका 1050 नामों की सूची जारी जून 2007 तक नियुक्त कर्मचारियों पर नजर

    MP में पटवारियों को मिलेगा प्रमोशन का मौका 1050 नामों की सूची जारी जून 2007 तक नियुक्त कर्मचारियों पर नजर


    भोपाल। मध्यप्रदेश में पटवारियों के प्रमोशन को लेकर सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। राजस्व विभाग की ओर से 1050 पटवारियों को राजस्व निरीक्षक यानी RI के पद पर पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टरों से संबंधित पटवारियों की सेवा संबंधी जानकारी और सर्विस रिकॉर्ड मांगा गया है। विभाग की ओर से पात्रता से जुड़े नामों की सूची भी जारी की गई है।

    जानकारी के मुताबिक यह पदोन्नति प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित कार्यपालिक एवं तकनीकी सेवा भर्ती नियम 2012 में किए गए संशोधन के प्रावधानों को भी आधार बनाया जा रहा है। विभाग ने पात्र पटवारियों की जानकारी जुटाने के लिए जिलों को निर्देश जारी किए हैं।

    इस प्रक्रिया में उम्र और नियुक्ति की तारीख को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। विभाग की ओर से 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 50 साल से कम उम्र वाले पटवारियों की सूची तैयार की गई है। इसके साथ ही ऐसे पटवारियों को भी सूची में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं जिनकी पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले हुई है।

    राजस्व विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि यदि किसी ऐसे पटवारी का नाम मौजूदा सूची में नहीं है जो निर्धारित उम्र और नियुक्ति संबंधी शर्तों को पूरा करता है तो उसका नाम भी शामिल किया जाए। इसके लिए सेवा से संबंधित रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। यह जानकारी संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार के माध्यम से तैयार कराई जाएगी।

    विभाग ने जानकारी जमा करने के लिए 30 सितंबर 2026 की समय सीमा तय की है। निर्देश के मुताबिक संबंधित जानकारी 30 सितंबर को सुबह 10 बजे तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    पटवारियों के प्रमोशन की यह प्रक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के काम को लेकर पटवारियों की ओर से आपत्तियां भी जताई गई हैं। योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता की भूमिका दिए जाने पर कर्मचारी संगठन और पटवारियों ने भविष्य की कानूनी जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं।

    पटवारियों का कहना है कि जमीन का स्वामित्व लाभार्थी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है। ऐसे में पटवारी को रजिस्ट्री का निष्पादक बनाए जाने से भविष्य में विवाद की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का सवाल खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शे और खसरे के आधार पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

    पटवारियों के अनुसार वास्तविक कब्जा वारिस सह स्वामित्व चतुर्सीमा पुराने दावे और न्यायालय में लंबित विवाद जैसे कई पहलू भी सामने आ सकते हैं। भविष्य में यदि किसी व्यक्ति की ओर से स्वामित्व को चुनौती दी जाती है तो रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल पटवारी भी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा बन सकता है। इसी वजह से इस जिम्मेदारी को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।

    अब विभाग की ओर से 1050 पटवारियों के सेवा रिकॉर्ड जुटाए जाने के बाद प्रमोशन प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई होगी। जिलों से जानकारी मिलने के बाद पात्रता और सेवा संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

  • रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी

    रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी


    जबलपुर । ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने पेयजल व्यवस्था को लेकर विशेष अभियान शुरू किया है। जबलपुर भोपाल और कोटा मंडल के स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। रेलवे की विशेष टीमें पानी के स्रोत से लेकर यात्रियों तक पहुंचने वाले नलों और वाटर बूथों की जांच कर रही हैं।

    पश्चिम मध्य रेलवे के मुताबिक पिछले एक महीने के दौरान 284 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था की सघन निगरानी की गई। इस दौरान 9850 नलों और वाटर बूथों की सफाई कराई गई। इसके अलावा 893 पानी के नमूने जांच के लिए लिए गए। रेलवे के अनुसार जांच किए गए सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए और कोई भी नमूना अनुपयुक्त नहीं मिला।

    पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए रेलवे केवल नलों की सफाई तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर पुरानी या खराब पाइपलाइन की मरम्मत और बदलाव भी कराया गया है। अब तक 130 स्थानों पर पाइपलाइन से जुड़ा काम पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 1086 पानी की टंकियों की सफाई कराई गई है। रेलवे स्टेशनों के अलावा रेलवे की आवासीय कॉलोनियों और चिकित्सालयों में भी पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है।

    रेलवे की ओर से पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग अलग स्तर पर व्यवस्था की गई है। सबसे पहले पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की रोजाना जांच की जाती है। कीटाणुशोधन के बाद पानी में क्लोरीन की निर्धारित मात्रा मौजूद है या नहीं इसकी जांच जल स्रोत से लेकर सप्लाई के अंतिम छोर तक की जाती है। अगर किसी स्थान पर पानी निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं मिलता है तो संबंधित विभाग को सूचना देकर आवश्यक क्लोरीनीकरण की प्रक्रिया कराई जाती है।

    इसके बाद पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच होती है। इसमें ई कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी का परीक्षण किया जाता है। बड़े स्टेशनों के साथ रेलवे कॉलोनियों और चिकित्सालयों में यह जांच महीने में एक बार की जाती है। वहीं छोटे स्टेशनों और कॉलोनियों में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच महीने में दो बार किए जाने का प्रावधान है।

    पानी की रासायनिक गुणवत्ता की जांच भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा जल स्रोतों से हर छह महीने में नमूने लेकर रासायनिक परीक्षण किया जाता है। नए जल स्रोत को उपयोग में लेने से पहले भी पानी का नमूना लिया जाता है और आवश्यक रासायनिक जांच पूरी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप रहे।

    पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार जल स्रोत से लेकर पाइपलाइन टंकियों और वाटर बूथ तक नियमित सफाई और निगरानी की जा रही है। जहां भी पानी की गुणवत्ता में कमी सामने आती है वहां संबंधित विभाग को जानकारी देकर सुधारात्मक कार्रवाई कराई जाती है।

    मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों को दूषित पानी पीने की स्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पानी की आपूर्ति करने वाले प्लांट से लेकर पाइपलाइन और नलों के जरिए यात्रियों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। रेलवे का उद्देश्य पूरे सप्लाई सिस्टम पर नजर रखते हुए यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

  • RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ

    RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय यानी आरडीवीवी में कुलसचिव की सुरक्षा को लेकर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने निलंबित चौकीदार रविंद्र तिवारी से खुद को खतरा बताते हुए कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा को दो पत्र लिखे हैं। कुलसचिव ने 21 सितंबर और फिर 24 सितंबर को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों पत्रों की प्रतियां सिविल लाइन थाना प्रभारी अपर सचिव उच्च शिक्षा विभाग और कुलगुरु के निज सचिव को भी भेजी गई हैं।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में बताया कि रविंद्र तिवारी को कार्य में कथित कदाचरण के मामले में उनके स्तर से निलंबित किया गया है। पत्र के अनुसार कुलसचिव को आशंका है कि निलंबन के बाद उनके खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र रचा जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की जा सकती है या उन्हें किसी तरह नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में चौकीदार के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रविंद्र तिवारी स्वभाव से उग्र है और कई बार नशे की हालत में रहता है। पत्र के मुताबिक वह पहले भी कुलसचिव कार्यालय में नशे की हालत में आया था। उस समय कर्मचारियों ने उसे समझाइश देकर वापस भेज दिया था।

    21 सितंबर को लिखे पत्र में कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के पूर्व सहायक कुलसचिव पवन साहू के साथ हुए कथित विवाद का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रविंद्र तिवारी का पवन साहू के साथ झूमाझटकी गाली गलौज और अभद्र व्यवहार का विवाद हुआ था। पत्र में यह भी आरोप है कि पवन साहू के घर जाकर गाली गलौज करने और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था।

    कुलसचिव के पत्र के मुताबिक रविंद्र तिवारी ने पवन साहू पर महिला उत्पीड़न से जुड़े आरोप भी लगाए थे। कुलसचिव ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और पवन साहू ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सिविल लाइन थाना पुलिस को भी आवेदन दिया था। इन घटनाओं का हवाला देते हुए कुलसचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।

    कुलसचिव ने यह भी बताया कि वह वर्तमान में जबलपुर में अकेले रह रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह भयग्रस्त हैं और इस वजह से कार्यालयीन कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कुलगुरु से कार्यालय और निवास दोनों जगह सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    24 सितंबर को लिखे दूसरे पत्र में कुलसचिव ने कहा कि 21 सितंबर को दिए गए आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने दोबारा अपनी सुरक्षा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह लगातार डर और तनाव की स्थिति में हैं।

    इसी बीच कुलसचिव ने कर्मचारी नेता और पूर्व महासचिव राजेंद्र शुक्ला को भी 25 सितंबर को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने समाचारों की कटिंग एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट की जिससे कुलसचिव की छवि प्रभावित हुई। नोटिस में उनसे इस संबंध में दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    मामले में कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल कुलसचिव की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद विश्वविद्यालय का यह मामला चर्चा में है।