Category: Madhya Pradesh

  • काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर

    काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर


    सागर। सागर जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले 24 घंटे से जिले के कई इलाकों में रिमझिम बारिश का दौर जारी है। शनिवार सुबह से आसमान में काले और घने बादल छाए रहे और रुक रुककर बारिश होती रही। लगातार हो रही बारिश के कारण वातावरण में ठंडक बढ़ गई है। दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान करीब 5 डिग्री तक नीचे आया है जबकि न्यूनतम तापमान में भी करीब 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई है।

    फिलहाल जिले में अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बारिश के चलते मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह से बादल छाए रहने के कारण धूप का असर भी कम रहा। कई इलाकों में रुक रुककर बारिश होती रही जिससे सड़कों और खुले इलाकों में भी नमी बनी रही।

    मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण छत्तीसगढ़ में बना डिप्रेशन सागर जिले से दक्षिण पूर्व दिशा में सक्रिय है और उत्तर उत्तर पश्चिम की ओर आगे बढ़ रहा है। इसके अगले करीब 12 घंटे में कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई है। हालांकि सिस्टम कमजोर होने के बाद भी इसकी नमी का असर मध्यप्रदेश में बना रह सकता है। यही वजह है कि शनिवार को भी जिले में बादल छाए रहने और दोपहर के बाद कुछ स्थानों पर गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 27 सितंबर से सिस्टम के कमजोर होने के बाद मौसम में धीरे धीरे सुधार आ सकता है। इसके साथ ही बारिश का दौर भी कम होने के आसार हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर नमी बनी रहने के कारण कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे के दौरान सागर जिले में औसतन 9.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। सागर शहर में 8.8 मिलीमीटर बारिश हुई। जैसीनगर और राहतगढ़ में 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। खुरई में 11 मिलीमीटर और मालथौन में 8 मिलीमीटर बारिश हुई। बंडा में 9 मिलीमीटर जबकि शाहगढ़ में सबसे अधिक 14 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। गढ़ाकोटा और केसली में भी 11 11 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

    बारिश के बावजूद जिले में इस मानसून सीजन की कुल औसत बारिश सामान्य आंकड़े से अभी पीछे है। अब तक सागर जिले में 36.7 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है जबकि जिले की सामान्य बारिश 48.4 इंच मानी जाती है। सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा करने के लिए अभी करीब 12 इंच औसत बारिश की जरूरत है।

    पिछले साल 26 सितंबर तक जिले में 44.3 इंच औसत बारिश दर्ज हो चुकी थी। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक बारिश का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 17.09 प्रतिशत कम है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख और बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि जिले का बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के कितने करीब पहुंचता है।

  • शिवपुरी में गणेश विसर्जन शोभायात्रा का भव्य नजारा, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और सुबह तक चला उत्सव

    शिवपुरी में गणेश विसर्जन शोभायात्रा का भव्य नजारा, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और सुबह तक चला उत्सव


    शिवपुरी। शिवपुरी में गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार रात बेहद भव्य अंदाज में हुआ। भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विदाई देने के लिए शहर में निकली विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आयोजकों के अनुसार इस भव्य आयोजन में करीब 2 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। रात करीब 8 बजे शुरू हुई शोभायात्रा का सिलसिला सुबह 6 बजे तक चलता रहा। इस दौरान शहर की प्रमुख सड़कों पर गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल होते रहे।

    शोभायात्रा के दौरान कस्टम गेट और हंस बिल्डिंग चौराहे पर विशेष मंच बनाए गए थे। इन मंचों से होकर गणेश प्रतिमाएं और आकर्षक झांकियां गुजरीं। अलग अलग रूपों में सजाई गई झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन्हें देखने के लिए सड़कों के किनारे जमा रहे। शोभायात्रा में शामिल युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

    इस बार शोभायात्रा में डीजे भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहे। ट्रकों पर बड़े बड़े डीजे सिस्टम लगाए गए थे। रातभर तेज संगीत और प्रस्तुतियों का दौर चलता रहा। युवा डीजे की धुन पर नाचते नजर आए। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमाओं के सामने भक्ति गीतों पर उत्साह जताया। पूरा शहर देर रात तक गणेशमय नजर आया।

    शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए सामाजिक संगठनों और आयोजकों की ओर से जगह जगह भंडारे लगाए गए। लोगों को प्रसादी वितरित की गई। इसके अलावा पानी और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं भी की गई थीं। लंबी दूरी तक चलने वाली शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए इन व्यवस्थाओं से काफी सहूलियत मिली।

    आधी रात के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। बड़ी प्रतिमाओं को अमोला पुल के पास सिंध नदी में विसर्जित किया गया। वहीं छोटी प्रतिमाओं के लिए मझेरा तालाब और गणेश कुंड में व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच भगवान गणेश को विदाई दी। विसर्जन के दौरान कई जगह श्रद्धालु भावुक भी नजर आए।

    इतने बड़े आयोजन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रमुख मार्गों के साथ विसर्जन स्थलों पर पुलिस बल तैनात रहा। नदी और अन्य जल स्रोतों पर गोताखोरों को भी अलर्ट रखा गया था। अधिकारियों ने देर रात तक मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी की।

    शोभायात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और विसर्जन प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा कराने के लिए प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए। रातभर चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही लेकिन पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

    सुबह होते होते अधिकांश गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन पूरा हो चुका था। इसके साथ ही कई दिनों से चल रहे गणेशोत्सव का समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर जल्दी आने की कामना के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी। शिवपुरी में गणेश विसर्जन की यह शोभायात्रा शहर में आस्था और उत्साह से भरे यादगार आयोजनों में शामिल रही।

  • शिवपुरी में पितृपक्ष शुरू होते ही बाणगंगा और भदैयाकुंड पर उमड़ी भीड़, पूर्वजों के लिए हुआ तर्पण-पिंडदान

    शिवपुरी में पितृपक्ष शुरू होते ही बाणगंगा और भदैयाकुंड पर उमड़ी भीड़, पूर्वजों के लिए हुआ तर्पण-पिंडदान


    शिवपुरी । शिवपुरी में पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही शनिवार को धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। शहर के प्रमुख बाणगंगा और भदैयाकुंड घाट पर सुबह से ही लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचने लगे। सुबह करीब 7 बजे से दोनों स्थानों पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। परिवार के लोग पूजा सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचे और पंडितों की देखरेख में तर्पण श्राद्ध और पिंडदान की विधि पूरी की।

    पितृपक्ष को हिंदू परंपरा में पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक कर्मकांड करने का विशेष समय माना जाता है। इसी मान्यता के चलते शिवपुरी में भी कई परिवार अपने पितरों के लिए निर्धारित तिथि के अनुसार अनुष्ठान करने पहुंचे। घाटों पर लोगों ने स्नान और पूजा के बाद पितरों को जल अर्पित किया। इसके साथ ही पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी किए गए।

    सुबह के समय बाणगंगा और भदैयाकुंड दोनों स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। अलग अलग क्षेत्रों से परिवारों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। कई लोग अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे थे। घाटों पर पंडितों की मौजूदगी में मंत्रोच्चार के साथ कर्मकांड संपन्न कराया गया। परिवार के सदस्यों ने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।

    पंडित शिव नारायण शर्मा के अनुसार पितृपक्ष में अपनी परंपरा और पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करने की धार्मिक मान्यता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के निमित्त जल अर्पित करते हैं और निर्धारित विधि से पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान अलग अलग तिथियों पर पूर्वजों के लिए कर्मकांड किए जाते हैं।

    इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार संबंधित श्राद्ध तिथि पर तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। कई परिवारों के लिए पितृपक्ष का पहला दिन विशेष महत्व रखता है और इसी वजह से पहले दिन भी घाटों पर अच्छी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

    शिवपुरी के बाणगंगा और भदैयाकुंड पर सुबह से बढ़ती भीड़ के बीच धार्मिक वातावरण बना रहा। घाटों पर परिवारों के समूह दिखाई दिए जो अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा करते नजर आए। जैसे जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे वैसे दोनों स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ती गई।

    पितृपक्ष के दौरान शिवपुरी में आने वाले दिनों में भी इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। अलग अलग तिथियों पर लोग अपने पूर्वजों के लिए निर्धारित श्राद्ध कर्म करेंगे। इस दौरान तर्पण पिंडदान और श्राद्ध जैसे अनुष्ठानों के जरिए परिवार अपने पितरों का स्मरण करेंगे और उनकी आत्मा की शांति की कामना करेंगे।

  • 40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह

    40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह


    भोपाल । आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना और घंटों एक ही मुद्रा में रहना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठे रहना हो या घर में लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठना हो इन आदतों का असर शरीर के जोड़ों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक घुटनों को लंबे समय तक मोड़कर रखने और उसके बाद गलत तरीके से चलने की आदत से घुटने के जोड़ पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ सकता है। समय के साथ यह समस्या दर्द और जोड़ से जुड़ी दूसरी परेशानियों का कारण बन सकती है।

    ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना के अनुसार लंबे समय तक घुटने मोड़कर रहने के बाद चलने के तरीके में बदलाव दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों में घुटना हल्का मुड़ा रहता है और पैर के पंजे बाहर की ओर निकल जाते हैं। इस तरह के वॉकिंग पैटर्न को आमतौर पर डक वॉकिंग कहा जाता है। लगातार ऐसा होने पर घुटने के जोड़ पर दबाव का वितरण सामान्य नहीं रहता और इससे लंबे समय में परेशानी बढ़ सकती है।

    घुटने की संरचना शरीर का वजन संभालने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब पैर सामान्य स्थिति में सीधा रहता है तो घुटने का लॉकिंग मैकेनिज्म शरीर का भार संभालने में मदद करता है। लेकिन घुटना लगातार मुड़ी हुई स्थिति में रहने पर यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक इससे जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना रहती है। कार्टिलेज कमजोर होने पर दर्द और चलने फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    अर्थराइटिस की समस्या बढ़ने पर इसे अलग अलग ग्रेड में देखा जाता है। गंभीर अवस्था में घुटने के जोड़ को काफी नुकसान हो सकता है और कुछ मरीजों में डॉक्टर नी रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में बीमारी का कारण और उसकी गंभीरता अलग हो सकती है इसलिए केवल किसी एक आदत को इसका सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    डॉ. सक्सेना के मुताबिक पहले घुटनों के अर्थराइटिस के मरीज अधिकतर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में देखने को मिलते थे। अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी घुटने से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने करीब 40 वर्ष की उम्र में अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही है। उनके अनुसार गलत लाइफस्टाइल शारीरिक गतिविधि की कमी लंबे समय तक बैठे रहना और गलत वॉकिंग पैटर्न इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं।

    घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचना जरूरी है। यदि काम के कारण लगातार बैठना पड़ता है तो बीच बीच में उठकर पैर सीधा करना और कुछ देर चलना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर ने हर दो घंटे के अंतराल में कुछ समय पैर सीधा रखने की एक्सरसाइज करने की सलाह दी है।

    चलते समय हील टो पैटर्न अपनाना भी मददगार हो सकता है। इसमें कदम रखते समय पहले एड़ी जमीन पर आती है और इसके बाद पंजा आगे बढ़ता है। शुरुआत में थोड़े कदमों के साथ इसका अभ्यास किया जा सकता है। इसके अलावा बैठकर पैर को सीधा उठाने वाली एक्सरसाइज घुटने के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि अगर घुटने में लगातार दर्द सूजन जकड़न या चलने में परेशानी हो रही है तो इसे केवल गलत बैठने या चलने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। सही समय पर कारण पता चलने और उचित सलाह मिलने से घुटनों की समस्या को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार

    गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सियासी गलियारों में कई दिलचस्प तस्वीरें और बयान चर्चा में हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों की फिटनेस और RTO व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। वहीं सीहोर में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने अपने भाषण में अच्छे कर्म करने और किसी का बुरा नहीं चाहने की सीख देते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को अगले जन्म में नाग बनना पड़ सकता है। इसी बीच सीधी जिले में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहे धरने में पहुंचीं सिंगरौली की महापौर रानी अग्रवाल की गाड़ी कीचड़ में फंस गई और उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक पहुंचना पड़ा।

    भोपाल में सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बसों की गुणवत्ता और फिटनेस को लेकर RTO अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने अपने संबोधन में व्यंग्य करते हुए कुछ अधिकारियों को गांधीवादी बताया और कहा कि गांधी की नोट दिखाई देने पर तुरंत ठप्पा लगाने की बात कही। गडकरी का यह बयान RTO व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके सख्त रुख के तौर पर देखा गया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसी ऐसी बस को मंजूरी दी जाती है जो निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।

    गडकरी का जोर बसों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर था। उन्होंने कहा कि बसों को सड़क पर उतारने से पहले कड़ी जांच और परीक्षण जरूरी है। फिटनेस मानकों पर खरी उतरने के बाद ही किसी बस को सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई परिवहन सेवा के तहत 351 बसें उतारी गई हैं जिनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं।

    इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई बसों के भगवा रंग को लेकर कांग्रेस पर तंज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों पर भगवा रंग की बसें चलना उनके लिए खुशी की बात है और विपक्ष को यह पसंद नहीं आएगा। सरकारी बस सेवा के दोबारा शुरू होने के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उधर सीहोर जिले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान भी चर्चा में आ गया। एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को किसी का बुरा नहीं करने और बदले की भावना से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को सुधर जाना चाहिए वरना अगले जन्म में नाग बनना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम का यह हिस्सा सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सुर्खियों में रहा।

    अब बात सीधी की जहां सड़क की बदहाली ने एक जनप्रतिनिधि को भी रास्ते में रोक दिया। खड्डी खुर्द के बगैहा टोला में सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ग्रामीणों के साथ 11 दिनों से धरने पर थीं। इसी आंदोलन को समर्थन देने सिंगरौली की महापौर और आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल पहुंचीं। लेकिन धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही उनकी गाड़ी कच्ची और कीचड़ भरी सड़क में फंस गई। ग्रामीणों ने धक्का देकर वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद महापौर को करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक जाना पड़ा।

    महापौर रानी अग्रवाल ने मौके पर सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों की परेशानी को लेकर सरकार को पत्र लिखने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता आसपास के कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है और बारिश के दौरान कीचड़ के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है।

    इस तरह एक ही दिन मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को लेकर गडकरी की सख्त चेतावनी से लेकर मंत्री के धार्मिक संदर्भ वाले बयान और खराब सड़क में फंसी महापौर की गाड़ी तक कई घटनाएं चर्चा में रहीं। इन घटनाओं ने सरकारी परिवहन व्यवस्था से लेकर सड़क और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अलग-अलग सवालों को सामने ला दिया है।

  • भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग

    भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग


    भोपाल । भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब अगले चरण में पहुंच गई है। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को इसे प्रकाशित करने और लोगों से दावे आपत्तियां लेने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां तत्काल वैध हो जाएंगी या सीलिंग की कार्रवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

    22 सितंबर को हुई सुनवाई के आदेश में भोपाल का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनुमति चाहिए। अदालत ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है लेकिन अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी रहेगा। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम प्लान पर अभी अदालत की निगरानी बनी रहेगी।

    सीलिंग के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल किसी जमीन या भवन में चल रही गतिविधि की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित बिल्डिंग नियमों के आधार पर जांची जाएगी। यदि कोई क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में केवल नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में संभावित लैंडयूज बदलाव का प्रस्ताव तत्काल राहत का आधार नहीं बनेगा।

    अदालत ने उन इलाकों को अलग माना है जहां मौजूदा मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे स्थानों पर मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार किया जा सकता है लेकिन फिलहाल वहां यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अगर कोई निर्माण पूरी तरह बिना अनुमति के हुआ है तो कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

    भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले से ही कार्रवाई चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है और कई मामलों में नोटिस तथा कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतें भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थीं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

    अब कारोबारियों और रहवासियों की नजर नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सरकार को अंतिम प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ड्राफ्ट में किसी क्षेत्र के लैंडयूज में बदलाव प्रस्तावित होने मात्र से वहां चल रही मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि स्वतः वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

  • 351 बसों को मिली हरी झंडी तो सामने आईं पुरानी तस्वीरें, सीट से लेकर रेडियम तक पर उठे सवाल

    351 बसों को मिली हरी झंडी तो सामने आईं पुरानी तस्वीरें, सीट से लेकर रेडियम तक पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी के साथ ही सुगम परिवहन सेवा को लेकर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर इस सेवा की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत भोपाल समेत इंदौर जबलपुर रीवा देवास कटनी और भिंड में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार की योजना सार्वजनिक परिवहन को बेहतर और सुविधाजनक बनाने की है लेकिन सेवा शुरू होते ही पुरानी बसों की हालत चर्चा का विषय बन गई है।

    सुगम परिवहन सेवा में शामिल 351 बसों में 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस और एयर कंडीशन बताया गया है। इसके अलावा 171 बसें पहले से अलग अलग शहरों में सिटी बस सेवा के रूप में चल रही थीं। भोपाल में ऐसी 58 बसें शामिल हैं। पहले ये बसें लाल रंग में संचालित होती थीं और भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के तहत आती थीं। नई व्यवस्था में इन्हें मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन किया गया है। इसके बाद बसों को एकरूपता देने के लिए इनका रंग बदला गया और उन पर रेडियम लगाया गया।

    यहीं से विवाद शुरू हुआ। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कुछ बसों के अंदर सीटों और हैंडल की स्थिति खराब दिखाई गई है। एक बस के ड्राइवर की सीट उखड़ी हुई नजर आई जबकि कुछ हिस्सों में फर्श की हालत भी ठीक नहीं बताई गई। कांग्रेस ने इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुरानी बसों को केवल बाहर से नया रूप देकर सेवा में उतारा गया है।

    कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया जिसमें बस की बॉडी पर लगाया गया रेडियम उखड़ता हुआ दिखाई देता है। कांग्रेस नेताओं ने रंगरोगन और रेडियम लगाने के काम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने दावा किया कि बसों की रंगाई पुताई और रेडियम लगाने से जुड़ा टेंडर अभी प्रक्रिया में था और एजेंसी के चयन को लेकर सवाल खड़े किए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।

    भोपाल में चल रही कई पुरानी डीजल बसें 2018 और 2019 मॉडल की बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन बसों में पहले भी खराबी और धुआं निकलने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। करीब दस महीने पहले लिंक रोड नंबर एक पर एक सिटी बस में शॉर्ट सर्किट के बाद धुआं उठने की घटना भी हुई थी। हालांकि उस समय यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया था।

    अधिकारियों के मुताबिक पुरानी और नई दोनों तरह की बसों को एक ही व्यवस्था के तहत लाने के कारण सभी बसों को एक जैसा स्वरूप दिया गया है। स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि एकरूपता के लिए संबंधित कंपनी की ओर से बसों पर रंग किया गया है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भी बताया कि बसें अब मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन आ गई हैं।

    सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ाना है। पहले साल में 1500 बसें और वर्ष 2031 तक 15 हजार बसें चलाने की योजना बताई गई है। ऐसे में नई सेवा की शुरुआत के साथ उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि बसों के बाहरी स्वरूप के साथ उनकी तकनीकी और अंदरूनी स्थिति पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा। यात्रियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुनिश्चित करने के लिए बसों की नियमित जांच और रखरखाव व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।

  • MP: खंडवा में पटवारी का बड़ा कारनामा…. अपने और पत्नी के नाम करा लीं गांव की 51 जमीनें!

    MP: खंडवा में पटवारी का बड़ा कारनामा…. अपने और पत्नी के नाम करा लीं गांव की 51 जमीनें!


    खंडवा।
    17 सितंबर से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ‘स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ (‘Swamitva Land Rights Execution and Registration Scheme-2026’) लागू हुई है, जिसका मकसद ग्रामीण आबादी को निशुल्क रजिस्ट्री और भू-अधिकार दिलाना है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले (Khandwa district) से जो खबर आई है, उसने प्रशासनिक तंत्र की नीयत और निष्ठा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस पटवारी के कंधों पर ग्रामीणों की जमीन का रिकॉर्ड सहेजने की जिम्मेदारी थी, उसी ने पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए सरकारी चबूतरों, सार्वजनिक बावड़ियों और गरीबों के मकानों के पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम लिखवा लिए. एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 51 पट्टे।

    यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ग्राम कोलगांव का है. सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत गांव में कुल 935 आवासीय पट्टे जारी किए जाने थे. ग्रामीणों को आस थी कि बरसों से जिस जमीन पर वे रह रहे हैं, उसका मालिकाना हक उन्हें मिलेगा. लेकिन योजना के क्रियान्वयन से पहले ही तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई ने सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की।

    पटवारी राजेश मंडलोई ने गांव के रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपने नाम 48 और अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम 3 पट्टे दर्ज करा लिए. यानी गांव के कुल पट्टों में से 51 पट्टे अकेले पटवारी के परिवार के नाम दर्ज हो गए।

    डॉगी बनकर प्रदर्शन करने वाले दीपक राठौर बोले…
    इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब ग्रामीण शुभम तोमर ने इसकी शिकायत की और कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने दस्तावेजों के साथ पूरे मामले को सामने रखा. ग्रामीणों के मुताबिक, दो-तीन साल पहले पटवारी राजेश मंडलोई सर्वे के नाम पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने आए थे. लेकिन उन्होंने चुपके से सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर अपना नाम चढ़ा दिया।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि शुभम तोमर के घर के पीछे स्थित सार्वजनिक बावड़ी, जिससे पूरा गांव पानी पीता है, उसे पटवारी ने अपने नाम कर लिया. हद तो तब हो गई, जब गांव के बस स्टैंड पर बना RCC का सार्वजनिक चबूतरा और ग्रामीण बलिराम का मकान यानी खसरा नंबर 530 भी पटवारी के रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया. जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की तो उन्होंने भी इसे देखकर गंभीरता से लिया।

    शासन ने ‘स्वामित्व योजना’ के तहत पटवारियों को जमीन की रजिस्ट्री करने के अधिकार दिए हैं. कोलगांव पंचायत में पूर्व पटवारी ने 51 पट्टे अपने और अपने परिवार के नाम करा लिए हैं. यह योजना शुरू होने के पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यह सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश में भी कई मामले हो सकते हैं. तत्काल इसकी जांच कमेटी बनाकर जांच की जाए, इससे और भी कई मामले उजागर हो सकते हैं. इससे वाजिब लोग अपने हक से वंचित हो रहे हैं. दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान पटवारी राकेश पटेल को मौके पर भेजकर स्थलीय जांच कराई गई. ग्रामीणों की मौजूदगी में जब खसरों का मिलान हुआ, तो गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

    जांच रिपोर्ट सामने आते ही खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया और आरोपी पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. इसके साथ ही कोलगांव के सभी 935 खसरों और पट्टों की दोबारा जांच कर रिकॉर्ड को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं।

  • एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट

    एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विभाग ने शनिवार को जबलपुर और रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट है। तेज बारिश की आशंका को देखते हुए सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूल शनिवार को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

    18 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अगले 48 घंटे बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सतना-मैहर में स्कूलों की छुट्टी

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए सतना जिले में शनिवार को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसी तरह मैहर जिले में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे।

    इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा और मंदसौर में बूंदाबांदी का अनुमान है।

    इसके अलावा शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी हो सकती है।

    अगले 48 घंटे अहम, निचले इलाकों में सावधानी

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम फिर सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता लगातार कम हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि अगले 48 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

    मानसून की विदाई में अब 5 दिन बाकी

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब पांच दिन बाकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 937.9 मिमी यानी 36.9 इंच से 2.2 इंच कम है।

    प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 6% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर पहुंच गया है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। शुक्रवार को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के बराबर आ गया।

    पश्चिमी हिस्से में 8 से 50% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर नगर निगम की ओर से इस बार विशेष और हाईटेक व्यवस्था की गई है। विसर्जन के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से जवाहर टेकरी पर मानव रहित मशीनों के जरिए प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा है। इसके लिए पोकलेन मशीन, बड़ी नाव और लिफ्ट सहित पांच प्रकार की मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    नगर निगम ने इस व्यवस्था के तहत 15 से 20 लाख गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का लक्ष्य रखा है। प्रतिमाओं को तालाब में विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं को सीधे पानी में जाने की जरूरत नहीं होगी। मशीनों और अन्य साधनों की मदद से प्रतिमाओं को तालाब में सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया जा रहा है।

    विसर्जन के दौरान लोगों के पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जवाहर टेकरी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें श्रद्धालु तालाब के पानी से दूरी बनाए रखते हुए पूजा और विधि-विधान पूरा कर सकेंगे। इसके बाद प्रतिमा को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से विसर्जित किया जाएगा।

    शहर के अलग-अलग कॉलोनियों और वार्ड स्तर पर भी प्रतिमाओं के एकत्रीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 140 से अधिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाएं एकत्र की जा रही हैं और मौके पर ही जल कुंड बनाकर विसर्जन की व्यवस्था भी की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली प्रतिमाओं के विसर्जन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। पुलिसकर्मियों के साथ एनडीआरएफ की टीम और पांच विशेष तैराकों को तैनात किया गया है। इनकी मौजूदगी का उद्देश्य विसर्जन के दौरान किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    श्रद्धालुओं को भी तालाब के कुंड से दूर रखा जा रहा है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान उन्हें पानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। प्रतिमाओं को मशीनों और अन्य निर्धारित माध्यमों से तालाब में कुछ दूरी से ही विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इस तरह प्रतिमा विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया को बनाए रखते हुए लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।

    तालाब और विसर्जन स्थल के आसपास निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके जरिए आयोजन स्थल और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मशीनों से होने वाले विसर्जन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य गणेश प्रतिमा विसर्जन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है। खासतौर पर पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मानव रहित मशीनों और सुरक्षा दलों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए एकत्रीकरण केंद्रों और जल कुंडों के जरिए विसर्जन व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर पोकलेन, लिफ्ट, नाव और अन्य मशीनों के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को पानी से दूर रखकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराने की व्यवस्था के जरिए इस धार्मिक आयोजन को सुरक्षित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।