Category: Madhya Pradesh

  • साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी

    साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में लोगों तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए चलाई जा रही अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई जलप्रदाय प्रोजेक्ट्स में SCADA सिस्टम के लिए अप्रूव्ड ब्रांड के उपकरणों की जगह दूसरे और कथित तौर पर लोकल उपकरण लगाए गए। कुछ उपकरणों पर नामी कंपनियों के स्टीकर भी चिपके मिले। एक मामले में सेंसर से स्टीकर हटाने पर उसके नीचे दूसरी कंपनी का नाम दिखाई दिया।

    अमृत 2.0 के तहत प्रदेश में 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इनमें 416 प्रोजेक्ट के टेंडर वर्ष 2025 में जारी हुए थे। किसी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल लागत का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा SCADA सिस्टम पर खर्च किया जाता है। प्लांट की क्षमता के हिसाब से इसकी लागत लगभग 50 से 80 लाख रुपए तक हो सकती है। SCADA सिस्टम पानी की गुणवत्ता और सप्लाई से जुड़े कई मानकों की निगरानी करता है इसलिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सेंसर और नियंत्रण उपकरणों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक सात जिलों के दस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मौके पर जांच की गई। इनमें तीन जगह उपकरणों और उनकी ब्रांडिंग को लेकर गड़बड़ी सामने आई। एक प्लांट में Siemens के स्थान पर Holisys का PLC लगा मिला जबकि फ्लो मीटर वॉल्व पर अपेक्षित SBEM ब्रांड नहीं था। दूसरे प्लांट में भी Siemens की जगह Holisys का PLC और SBEM की जगह दूसरी कंपनी का प्रेशर ट्रांसमीटर मिला।

    सबसे ज्यादा सवाल उस प्लांट में उठे जहां प्रेशर ट्रांसमीटर पर SBEM का स्टीकर लगा था। रिपोर्टर ने जब स्टीकर हटाया तो उसके नीचे ATC कंपनी का नाम दिखाई दिया। इसी प्लांट में PLC और pH तथा क्लोरीन सेंसर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने का दावा किया गया है। इससे उपकरणों की वास्तविक कंपनी और उनकी स्वीकृति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    मामले को लेकर SBEM से भी संपर्क किया गया। शहडोल की वीरानी इंजीनियरिंग ने प्लांट में लगे सेंसरों की तस्वीर और जानकारी QAP में अप्रूव्ड कंपनी SBEM को भेजी थी। जवाब में कंपनी ने लिखित रूप से कहा कि उसने इस प्रोजेक्ट के लिए कोई उपकरण या तकनीक सप्लाई नहीं की है। इसके बाद प्लांट में SBEM के नाम से लगाए गए स्टीकर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठने लगे।

    वहीं संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने कहा कि प्रोजेक्ट अभी पूरा नहीं हुआ है और PDMC की निगरानी में काम चल रहा है। उनका कहना है कि किसी अमानक उपकरण को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। एक ठेकेदार ने बताया कि SCADA का काम Orbit Engineering Solutions को दिया गया था।

    Orbit Engineering Solutions के मालिक विजय कुमार तिवारी ने कहा कि अप्रूव्ड कंपनियों से उपकरणों की सप्लाई में देरी हो रही थी इसलिए समय पर काम पूरा करने के लिए दूसरी कंपनियों के उपकरण लगाए गए। उन्होंने इन उपकरणों की गुणवत्ता को अच्छा बताया। हालांकि अप्रूव्ड ब्रांड की जगह दूसरे उपकरण लगाने के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे मामले ने अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में निगरानी और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में मानकों के विपरीत उपकरण लगाने की पुष्टि होती है तो यह न केवल सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा मामला होगा बल्कि पानी की गुणवत्ता और लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

  • MP में UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी हलचल, 2 हजार से ऊपर के भुगतान पर कई दुकानदारों ने किया इनकार, जानिए वजह

    MP में UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी हलचल, 2 हजार से ऊपर के भुगतान पर कई दुकानदारों ने किया इनकार, जानिए वजह


    भोपाल। मध्य प्रदेश में UPI भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR के विरोध में 23 सितंबर को व्यापारियों ने नो UPI डे मनाया। भोपाल इंदौर जबलपुर ग्वालियर समेत प्रदेश के कई शहरों में व्यापारियों ने 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान लेने से इनकार कर विरोध जताया। कई बाजारों में UPI स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काले कपड़े डालकर व्यापारी विरोध करते नजर आए। इस दौरान UPI बंद करो और UPI पर चार्ज बंद करो जैसे नारे भी लगाए गए। व्यापारी संगठनों के अनुमान के मुताबिक इस विरोध के दौरान प्रदेश में करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ।

    भोपाल और इंदौर में इस अभियान का असर बाजारों में देखने को मिला। भोपाल व्यापारी संगठन से जुड़े अनुपम अग्रवाल के मुताबिक शहर में करीब 80 प्रतिशत कारोबार UPI के जरिए होता है। नो UPI डे पर करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया। ग्वालियर में CAT के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया के अनुसार शहर में रोज करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार UPI से होता है और विरोध के दौरान इसमें करीब 20 प्रतिशत का असर पड़ा। इंदौर में भी करीब 50 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ने की बात सामने आई।

    विरोध की वजह 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित UPI चार्ज को बताया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात कही गई है। प्रति ट्रांजैक्शन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए रखे जाने का उल्लेख किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि इससे UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है और कम मार्जिन वाले कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    मध्य प्रदेश में UPI के इस्तेमाल का आकार भी काफी बड़ा है। अगस्त में प्रदेश में कुल 50.79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए जिनका कुल मूल्य 63 हजार 628.33 करोड़ रुपए रहा। जुलाई में 49.6 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 66 हजार 107 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। अगस्त के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में हर दिन औसतन 1.64 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए और इनका औसत दैनिक कारोबार करीब 2 हजार 52 करोड़ रुपए रहा।

    प्रस्तावित चार्ज को लेकर व्यापारियों की चिंता खासतौर पर 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान को लेकर है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक P2M भुगतान का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा 2 हजार रुपए से ज्यादा की राशि वाला है। इस आधार पर करीब 12 हजार 788 करोड़ रुपए का मासिक कारोबार संभावित MDR दायरे में आ सकता है। यानी रोजाना करीब 4.13 लाख ट्रांजैक्शन और करीब 412 करोड़ रुपए के कारोबार पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना बताई जा रही है।

    नो UPI डे के दौरान भोपाल के सराफा बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया। एक ग्राहक सोने की अंगूठी खरीदने पहुंचा लेकिन भुगतान 2 हजार रुपए से ज्यादा होने के कारण दुकानदार ने ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार नहीं किया। ग्राहक के पास पर्याप्त नकद नहीं था और उसे बिना खरीदारी किए लौटना पड़ा। हालांकि कई दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से कम के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार किए। मेडिकल दुकानों पर भी UPI भुगतान जारी रहा और कुछ दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान भी स्वीकार किए।

    व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में यदि डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ती है तो इसका असर व्यापारियों के खर्च पर पड़ सकता है। कुछ कारोबारी संगठनों का तर्क है कि व्यापारी अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन करने के बजाय इसे कारोबार की लागत में शामिल कर सकते हैं जिसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है।

    हालांकि प्रस्तावित MDR व्यापारी पर लगाए जाने की व्यवस्था बताई गई है और ग्राहक से सीधे UPI शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है। सरकार और NPCI की ओर से भी कहा गया है कि MDR का भार सीधे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी। इसके बावजूद व्यापारी और ग्राहक दोनों इस व्यवस्था को लेकर अपने अपने सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित चार्ज को लेकर आगे क्या फैसला होता है और व्यापारियों की मांगों पर किस तरह विचार किया जाता है।

  • 27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज

    27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और इससे जुड़ी रुकी नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है। 22 सितंबर को लिखे गए पत्र को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक किया। उन्होंने यह मुद्दा इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान सामने आने के बाद उठाया है।

    राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उनके सामने रखे थे। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राहुल गांधी के अनुसार छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षाएं पास करने के साथ चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली है लेकिन 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। उनके मुताबिक इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था लेकिन इसके बावजूद मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं का समय और अधिक नहीं बीतना चाहिए।

    यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रावधान और इसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस बढ़ोतरी को अदालत में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई जिसमें 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती रहीं जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।

    इंदौर के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी थी। छात्रों ने बताया था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियां लंबित रहने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले के समाधान की मांग की।

    दूसरी ओर इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि OBC आरक्षण से जुड़े विवाद को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और सरकार की ओर से 13 प्रतिशत पदों को मनमाने तरीके से रोकने की बात सही नहीं है। वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि OBC आरक्षण का विवाद पिछली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ा है और मौजूदा सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच OBC आरक्षण से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। भर्ती और आरक्षण से जुड़े अलग अलग मामलों में अदालत की कार्यवाही के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण के विवादित हिस्से पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। अदालत में 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में दलीलें पेश की जा चुकी हैं।

    राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार इस विवाद की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। ऐसे में आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर रहेगी।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।

  • बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी

    बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी


    भोपाल। भोपाल में बारिश और मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते कई इलाकों की सड़कों की हालत खराब हो गई है। रायसेन रोड पर स्थिति ज्यादा परेशानी वाली नजर आ रही है। सुभाषनगर चौराहे से रत्नागिरी तक सड़क जगह जगह से उखड़ गई है। कई हिस्सों में गड्ढे और कीचड़ के कारण वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश रुकने के बाद इन्हीं सड़कों से धूल के गुबार उठ रहे हैं। इस बीच सड़क के बीचोंबीच मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बेरिकेडिंग की गई है जिससे वाहनों के निकलने की जगह और कम हो गई है।

    कॅरियर कॉलेज से रत्नागिरी के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को संभलकर निकलना पड़ रहा है। रायसेन रोड पर बस और लोडिंग वाहन भी फंसने की स्थिति सामने आ रही है। इससे कई बार यातायात प्रभावित हो जाता है। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने सड़क की बदहाल स्थिति और फंसे वाहनों का वीडियो जारी किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने सड़क की स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस नेता के अनुसार रायसेन रोड पर हर दिन करीब 15 से 20 वाहन फंस जाते हैं। इनमें लोडिंग वाहनों के पहिए गड्ढों में फंसने के साथ बसों के कारण भी यातायात प्रभावित होने की बात कही गई है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर आम वाहन चालकों के साथ आसपास के रहवासियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ रहा है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो की ब्लू लाइन का काम भी चल रहा है। भदभदा से रत्नागिरी तक प्रस्तावित ब्लू लाइन का रूट करीब 14.16 किलोमीटर लंबा बताया गया है। भदभदा से जवाहर चौक के बीच मेट्रो निर्माण कार्य के चलते सड़क के बीच में बेरिकेडिंग की गई है। निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई और लगातार बारिश के कारण सड़क के दोनों ओर की सतह कई जगह खराब हो गई है। संकरी सड़क और जर्जर हिस्सों के कारण वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है।

    भोपाल के दूसरे इलाकों में भी बारिश के बाद सड़कों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। करोंद एमपी नगर पॉलीटेक्निक चौराहा अवधपुरी रोहित नगर और अयोध्या बायपास सहित कई क्षेत्रों में सड़कें जगह जगह से उखड़ने की बात सामने आई है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी और कीचड़ भरने से वाहन चालकों को परेशानी होती है जबकि मौसम साफ होने पर धूल की समस्या बढ़ जाती है।

    कोहेफिजा क्षेत्र में भी सड़क की खराब हालत के कारण हादसे की स्थिति सामने आई है। सड़क से उखड़ी गिट्टी के कारण एक टू व्हीलर फिसल गई और एक बुजुर्ग गिरकर घायल हो गए। इस घटना ने सड़क की सतह और यातायात सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो निर्माण और जर्जर सड़क के बीच लोगों को रोजाना आवागमन करना पड़ रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह और सड़क की स्थिति को बेहतर करने के इंतजाम किए जाएं ताकि मेट्रो प्रोजेक्ट का काम भी चलता रहे और आम लोगों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो।

  • भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान

    भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान


    भोपाल। भोपाल में गणेश उत्सव के बाद अब प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। डोल ग्यारस से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो चुका है जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा। शहर के अलग अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस निकलेंगे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख घाटों तक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। खासतौर पर विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं।

    भोपाल के प्रमुख सात विसर्जन घाटों पर 13 क्रेन और 12 पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। इनके जरिए गणेश प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी में विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही 184 गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। घाटों पर श्रद्धालुओं के पानी में उतरने पर रोक रहेगी। नगर निगम के कर्मचारी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने के साथ विसर्जन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

    विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए घाटों पर लाइफ जैकेट लाइफ बॉय ट्यूब रस्सी बंडल और पीए सिस्टम जैसे संसाधन उपलब्ध रहेंगे। तैराकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घाटों पर लगातार निगरानी रखेंगी। इसके अलावा पुलिस कंट्रोल रूम से भी प्रमुख घाटों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। खटलापुरा प्रेमपुरा संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ हथाईखेड़ा डैम शाहपुरा और आर्च ब्रिज क्षेत्र के घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इन घाटों पर पिछले दो दिनों में ही डेढ़ हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है।

    नगर निगम ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर के अलग अलग इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा स्टॉल भी लगाए हैं। लालघाटी चौराहा गांधी नगर करोंद चौराहा कोलार रायसेन रोड और अवधपुरी समेत कई स्थानों पर श्रद्धालु पूजा के बाद गणेश प्रतिमाएं इन स्टॉल पर जमा कर सकेंगे। इसके बाद नगर निगम की टीम इन प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से विसर्जन करेगी। इससे घाटों पर भीड़ और प्रत्यक्ष रूप से पानी में उतरने वाले लोगों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

    विसर्जन जुलूस और चल समारोह को देखते हुए शहर के रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। नगर निगम के अनुसार प्रेमपुरा रानी कमलापति शाहपुरा खटलापुरा हथाईखेड़ा मालीखेड़ी और बैरागढ़ विसर्जन घाटों पर 1090 एलईडी फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इसके अलावा चल समारोह वाले मार्गों पर 575 अतिरिक्त फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इस तरह घाटों और विसर्जन मार्गों पर कुल 1665 लाइटों की व्यवस्था की गई है।

    गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण यातायात व्यवस्था और घाटों पर सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती रहेगी। नगर निगम पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर व्यवस्थाओं को संभालेंगी। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को श्रद्धा के साथ विदाई दें और विसर्जन प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो।

  • MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का सिस्टम सक्रिय हो गया है। गुरुवार को 10 जिलों में तेज बारिश का अनुमान है, जबकि 25 और 26 सितंबर को इसका असर और बढ़ने की संभावना है। इन दोनों दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है। प्रदेश में अब तक औसत 34.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे की 91.9% है।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में विकसित हो रहा है। अगले 24 घंटे के बाद इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    आज इन 10 जिलों में तेज बारिश

    गुरुवार को छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    25-26 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

    बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम के मजबूत होने के बाद 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। खासकर पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। मानसून की विदाई से पहले सिस्टम का सक्रिय होना प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर ला सकता है।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। ऐसे में मानसून की औपचारिक विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    बुधवार को कई जिलों में हुई तेज बारिश

    इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। राजधानी भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश हुई। नर्मदापुरम के इटारसी में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। खरगोन में भी करीब आधे घंटे हुई तेज बारिश के कारण अनाज मंडी में रखा लगभग 200 क्विंटल मक्का भीग गया। इसके अलावा खंडवा, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के मुताबिक प्रदेश में अब तक 870.5 मिमी यानी 34.3 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके मुकाबले अब तक सामान्य बारिश 36.7 इंच यानी 931.7 मिमी होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश हुई है। ओवरऑल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 7% कम है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% कम बारिश हुई है।

    पूर्वी हिस्से में इन जिलों में कमी

    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 2% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों के आंकड़ों में सुधार आया है। बुधवार को पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी का आंकड़ा माइनस 2% रहा।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश हुई है। यहां दिए आंकड़ों में खंडवा का नाम स्रोत में दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    मध्य प्रदेश : में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नए प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी की नियुक्ति की है। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की नेता और सांसद रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के साथ प्रदेश में प्रभारी पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

    बिप्लब कुमार देव का राजनीतिक सफर संगठनात्मक गतिविधियों से शुरू हुआ। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और बाद में दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ नेता के.एन. गोविंदाचार्य के सहायक के तौर पर काम करते हुए राजनीतिक संगठन का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2016 में उन्हें त्रिपुरा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

    उनके नेतृत्व में बीजेपी ने वर्ष 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी और लंबे समय से सत्ता में रहे वाम दल के शासन का अंत हुआ। 9 मार्च 2018 को बिप्लब कुमार देव ने त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वह वर्ष 2018 से 2022 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

    वर्ष 2022 में बिप्लब देव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गईं। वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी के तौर पर काम किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने त्रिपुरा पश्चिम सीट से जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंचे।

    इसके बाद पार्टी संगठन में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। बिप्लब कुमार देव को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। अब उन्हें मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।

    मध्य प्रदेश में बिप्लब देव के साथ रेखा वर्मा को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश की नेता हैं और धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। अब वह मध्य प्रदेश में प्रभारी के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

    इससे पहले मध्य प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी। अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां संगठन से जुड़े कामों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश में उनके स्थान पर बिप्लब कुमार देव को जिम्मेदारी दी गई है।

    सह प्रभारी के स्तर पर भी बदलाव हुआ है। इससे पहले यह जिम्मेदारी सतीश कुमार उपाध्याय संभाल रहे थे। अब उनकी जगह रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। इस बदलाव के बाद प्रदेश संगठन में प्रभारी और सह प्रभारी की नई टीम काम करेगी।

    प्रदेश प्रभारी का मुख्य काम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच तालमेल बनाए रखना होता है। वह प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। राज्य संगठन से मिलने वाली जानकारी और फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने में भी प्रभारी की भूमिका होती है। सह प्रभारी संगठनात्मक कार्यों में प्रभारी का सहयोग करते हैं।

  • मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल

    मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश:
    सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची के मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

    सारंग ने कहा कि कांग्रेस के समय लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का किस तरह मजाक बनाया जाता था, इसका उदाहरण सोनिया गांधी से जुड़ा मामला है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र की व्यवस्था को लेकर कई ऐसे सवाल सामने आए, जिनका जवाब दिया जाना चाहिए।

    मंत्री ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम और उनके मतदान को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में मतदान के अधिकार से संबंधित स्पष्ट प्रावधान हैं और केवल पात्र नागरिकों को ही मतदान का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर उन्होंने पूछा कि सोनिया गांधी किस हैसियत से वोट दे रही थीं।

    विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के संविधान के पालन से जुड़े बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार संविधान की बात करते हैं, लेकिन मतदान के अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कांग्रेस पर देश में लंबे समय से कथित वोट चोरी करने का आरोप लगाया। सारंग ने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, जो भारत का नागरिक नहीं है और उसने मतदान भी किया है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

    मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा नियमों का पालन जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

    सारंग ने अपने बयान में कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के सत्ता में आने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से उनके अनुसार पीछे के दरवाजे से सत्ता हासिल की गई थी, उसी राजनीतिक सोच के प्रभाव आज भी कांग्रेस में दिखाई देते हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा संविधान और लोकतंत्र को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए। सारंग का कहना था कि कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल और उससे जुड़े विवादों पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाने चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि देश की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची का विशेष महत्व है। किसी योग्य नागरिक का नाम छूटना या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल होना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच और तथ्यों की स्पष्टता जरूरी है।

    सोनिया गांधी के मतदाता सूची से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए सारंग ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज किया। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के लोकतंत्र तथा संविधान से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने अतीत और वर्तमान में उठ रहे सवालों का भी सामना करना चाहिए।

    विश्वास सारंग के बयान के बाद मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। उनके आरोपों के केंद्र में कांग्रेस का शासनकाल, सोनिया गांधी से जुड़ा मतदाता सूची का मुद्दा और राहुल गांधी के संविधान संबंधी बयान रहे।

  • BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका

    BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका


    भोपाल । भारतीय जनता पार्टी ने अगस्त 2026 में अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम का ऐलान किया था जिसमें मीडिया विभाग में भी बदलाव किए गए। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में घोषित टीम में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि मध्यप्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इससे मध्यप्रदेश BJP के मीडिया संगठन से जुड़े आशीष अग्रवाल की भूमिका प्रदेश स्तर से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।

    आशीष उषा अग्रवाल लंबे समय से BJP के मीडिया विभाग से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने मध्यप्रदेश BJP में मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया और इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान उनका काम पार्टी के राजनीतिक मुद्दों को मीडिया के सामने रखने और प्रदेश संगठन तथा मीडिया के बीच समन्वय से जुड़ा रहा। 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे पार्टी की प्रदेश मीडिया व्यवस्था से जुड़े प्रमुख पद पर रहे।

    अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर पार्टी के राष्ट्रीय संगठन तक हो गया है। BJP की घोषित राष्ट्रीय टीम में मीडिया विभाग की कमान अनिल बलूनी को दी गई है जबकि आशीष अग्रवाल के साथ प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

    राष्ट्रीय मीडिया टीम में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब BJP ने अपने संगठन में कई स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। पार्टी ने मीडिया के साथ सोशल मीडिया संगठन में भी नियुक्तियां की हैं। दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि प्रीति गांधी शिवानंद द्विवेदी आलोक भट्ट और अरुण यादव को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह पार्टी के पारंपरिक मीडिया और डिजिटल संचार दोनों क्षेत्रों के लिए नई टीम सामने आई है।

    आशीष अग्रवाल के राजनीतिक और संगठनात्मक सफर की शुरुआत ग्वालियर से जुड़ी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार वे छात्र जीवन से सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। इसके बाद BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी और धीरे धीरे मीडिया विभाग में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती गई। पार्टी के प्रदेश मीडिया संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला है।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र में भी रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने ICICI Bank और उसके समूह में काम किया। उन्होंने Great Lakes Institute of Management Chennai से MBA की पढ़ाई की है जबकि Jiwaji University Gwalior से MA और B.Com की डिग्री हासिल की है।

    BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष अग्रवाल की नियुक्ति के साथ मध्यप्रदेश के एक और पार्टी पदाधिकारी को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका मिली है। अगस्त में घोषित टीम के अनुसार अनिल बलूनी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं और आशीष अग्रवाल प्रदीप भंडारी तथा सिद्धार्थ यादव उनके साथ मीडिया सह-संयोजक के रूप में काम करेंगे।

    इस नियुक्ति के बाद आशीष अग्रवाल की जिम्मेदारी अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। राष्ट्रीय मीडिया विभाग में उनकी भूमिका पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के मीडिया समन्वय और संगठनात्मक संचार से जुड़े कामों में होगी। वहीं अलग अलग राज्यों और क्षेत्रों में पार्टी की मीडिया गतिविधियों को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ना नई टीम की जिम्मेदारियों का हिस्सा रहेगा।