Category: Madhya Pradesh

  • तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन

    तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन


    इंदौर । इंदौर के छत्रीबाग स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में 10 से 16 जुलाई तक श्रीब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में भगवान वेंकटेश के विशेष पूजन, महाभिषेक, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान वेंकटेश की गौरवशाली रजत रथयात्रा रहेगी, जो नगर भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देगी।

    इस वर्ष महोत्सव का आयोजन तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा और वैभव की तर्ज पर किया जा रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा, जहां शंख, चक्र और तिलक की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। आयोजन की शुरुआत 9 जुलाई की शाम विश्वकसेन पूजन और सुंदरकांड पाठ से होगी। दोपहर में श्री वेंकटेश महिला मंडल की ओर से सुंदरकांड का आयोजन भी किया जाएगा।

    10 जुलाई को ध्वजारोहण के साथ श्रीब्रह्मोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा। यह अनुष्ठान अनंतश्रीविभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। इसके बाद प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

    11 जुलाई को भगवती श्रीमहालक्ष्मी का महाभिषेक होगा और 500 दंपति सामूहिक कुमकुम अर्चना में भाग लेंगे। 12 जुलाई को भगवान श्री वेंकटेश का 108 रजत कलशों से महाभिषेक किया जाएगा तथा रात्रि में छत्रीबाग क्षेत्र में छोटी रथयात्रा निकाली जाएगी।

    13 जुलाई को वसंतोत्सव और तिरुपावड़ा उत्सव का आयोजन होगा। 14 जुलाई को भगवान वेंकटेश का कल्याण उत्सव और विवाहोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर बारात निकलेगी तथा विवाह की सभी पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी। रात्रि में परकाल स्वामी की लीला पर आधारित नाटिका का मंचन भी होगा।

    15 जुलाई को भगवान के पुष्प बंगला दर्शन होंगे। वृंदावन और इंदौर के कलाकार सुगंधित फूलों और विशेष सजावटी सामग्री से मनोहारी पुष्प बंगला तैयार करेंगे, जिसमें भगवान वेंकटेश के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे।

    महोत्सव का समापन 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा के साथ होगा। भगवान वेंकटेश वर्ष में एक बार निकलने वाले रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। रथयात्रा में दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक, पारंपरिक वाद्य यंत्र, धार्मिक झांकियां और भक्ति संगीत श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।

    पूरे महोत्सव के दौरान भगवान का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भजन संध्या, धार्मिक प्रवचन और संतों का सान्निध्य भी श्रद्धालुओं को मिलेगा। आयोजन में स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी विद्याभास्कर महाराज, स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज, स्वामी अनंताचार्यजी महाराज, स्वामी वेंकटेशप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी दामोदराचार्यजी महाराज, संत इन्द्रेश महाराज, युवराज स्वामी माधवप्रपन्नाचार्य महाराज, गोवत्स राधाकृष्ण महाराज और पुण्डरीकाक्षाचार्य महाराज सहित अनेक संत शामिल होंगे।

  • तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बच्चा बेहोश, CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस

    तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बच्चा बेहोश, CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस


    इंदौर  इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से 13 वर्षीय एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा बुधवार दोपहर नगीन नगर इलाके में हुआ, जब बच्चा अपनी साइकिल से सड़क पार कर रहा था। टक्कर इतनी तेज थी कि वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

    पुलिस के अनुसार घायल बच्चे की पहचान हर्ष नामदेव के रूप में हुई है। घटना बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। हादसे के बाद बाइक सवार दोनों युवक मौके से फरार नहीं हुए, बल्कि वहीं रुक गए। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाने में मदद की और पुलिस को सूचना दी।

    एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि पुलिस ने घायल बच्चे और उसके पिता कुंदन नामदेव के बयान दर्ज कर लिए हैं। मामले की जांच के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी सामने आई है, जिसमें हादसा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर बाइक चला रहे दोनों युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सड़क हादसे के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना तेज रफ्तार, लापरवाही या यातायात नियमों के उल्लंघन की वजह से हुई। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट

    हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और लगातार गैरहाजिर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अवमानना मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला कृषि विभाग, जबलपुर के सेवानिवृत्त उप संचालक देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के समय उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए। आरोप है कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद संबंधित विभाग ने राशि वापस नहीं की, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद तीनों वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। एसीएस मनीष रस्तोगी की ओर से न तो कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन दिया गया। वहीं अन्य दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की गंभीर अवहेलना माना।

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से इन वारंटों की तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित हों।

    सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अदालत में बुलाने के निर्देश दिए। बाद में उनके उपस्थित होने पर अदालत ने उनसे भी यह स्पष्ट करने को कहा कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचे।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि 8 मई 2024 के मूल आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में और कठोर रुख अपनाया जा सकता है।

  • उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान

    उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान


    उमरिया मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। नेशनल हाईवे-43 पर तेज रफ्तार अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल एक युवती की अस्पताल में समय रहते सीपीआर देने से सांसें लौट आईं। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया है।

    यह हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र की सिविल लाइन चौकी के पास भरौला स्थित सिद्ध बाबा क्षेत्र में तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच हुआ। पुलिस के अनुसार कार में सवार सभी लोग अनूपपुर जिले के लीला गांव के निवासी थे और परिवार की युवती खुशबू मार्को को परीक्षा दिलाने के लिए चित्रकूट जा रहे थे।

    हादसे में लीला गांव के सरपंच कुलपत सिंह, उनकी पत्नी और हेड कॉन्स्टेबल सविता सिंह मार्को, तीन वर्षीय पुत्र रुद्र प्रताप तथा कुलपत सिंह के भाई की बेटी प्रियंका सिंह की मौत हो गई। वहीं खुशबू मार्को गंभीर रूप से घायल हो गई। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने तक उसकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन तत्काल सीपीआर देने के बाद उसकी धड़कनें फिर से चलने लगीं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया।

    हादसे के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक व्यक्ति कार के अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था, जिसे रेस्क्यू कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    कार चालक ददन सिंह से जब पुलिस और मीडिया ने घटना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे हादसे की कोई जानकारी याद नहीं है। उसके कपड़ों पर खून के निशान थे और वह बार-बार यही पूछता रहा कि आखिर क्या हुआ और वह अस्पताल कैसे पहुंचा।

    इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से गांव में शोक का माहौल है, जबकि घायल युवती के जल्द स्वस्थ होने की सभी कामना कर रहे हैं।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला

    राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अहम कानूनी सवाल सामने आया। अदालत ने पूछा कि क्या गिरफ्तारी मेमो में हुई केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर किसी आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मान लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया और मामले पर आगे विचार करने के संकेत दिए।

    जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग न्यायिक फैसले मौजूद हैं और कानून की स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भी भेजा जा सकता है, ताकि भविष्य के मामलों के लिए स्पष्ट दिशा तय हो सके।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां अदालत में पेश की जाएं। अदालत यह जानना चाहती है कि गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को किन धाराओं और किन आधारों की जानकारी दी गई थी।

    मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या होगी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी जरूरी जानकारी दी गई थी और गलत धारा का उल्लेख केवल लिपिकीय त्रुटि थी, जिससे पूरी गिरफ्तारी अवैध नहीं हो जाती।

    दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक हर स्तर पर पूरा सहयोग किया है।

    इससे पहले मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को सोनम को जमानत देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की हत्या से संबंधित धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403 दर्ज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की गंभीर चूक माना और कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की सही जानकारी नहीं दी गई।

    अब सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या ऐसी लिपिकीय त्रुटि गिरफ्तारी को अवैध बनाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है। यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमत नहीं होती है तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होने की संभावना भी बन सकती है।

    इस बीच हाल ही में राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि सोनम जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर नेपाल भाग गई है और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि सोनम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह शिलॉन्ग में ही मौजूद है और अदालत तथा जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।

    गौरतलब है कि मई 2025 में इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित सहयोगियों ने रची थी। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था और फिलहाल इसकी सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है।

  • इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस

    इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस


    इंदौर । इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब रीवा से इंदौर आ रही जय अंबे ट्रेवल्स की यात्री बस में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 11 बजे शिप्रा थाने के सामने हुई। बस में सवार यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक की सूझबूझ और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस इंदौर की ओर बढ़ रही थी, तभी उसका एक टायर अचानक फट गया। टायर फटने के बाद चालक ने बस पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। इसी दौरान टायर और सड़क के बीच हुए तेज घर्षण के कारण बस के अगले हिस्से से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें दिखाई देने लगीं।

    चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बस रोक दी और यात्रियों को तेजी से नीचे उतरने के निर्देश दिए। यात्रियों ने भी बिना घबराहट के बस खाली कर दी, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह खाली करा ली गई और संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही शिप्रा थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इससे आग बस के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें दूसरी बस की व्यवस्था कर इंदौर के लिए रवाना किया। घटना के कारण कुछ समय तक क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

    पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में टायर फटने के बाद हुए घर्षण को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जाएगी। बस की यांत्रिक स्थिति और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    समय रहते चालक की सतर्कता, यात्रियों के सहयोग और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है।

  • इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज

    इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज


    इंदौर  इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर देवास पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने, मारपीट करने और कार में बंधक बनाने के आरोप में बाणगंगा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था और मना करने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर मानसिक रूप से परेशान करता रहा।

    पुलिस के अनुसार महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब एक वर्ष पहले देवास में पदस्थापना के दौरान उसकी पहचान राहुल शर्मा से हुई थी। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी ने लगातार फोन करना शुरू कर दिया। महिला के बार बार मना करने के बावजूद वह बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा और निजी संबंध बनाने की कोशिश करता रहा।

    पीड़िता का कहना है कि राहुल की हरकतों से परेशान होकर उसने अपना तबादला देवास से इंदौर करा लिया ताकि उससे दूरी बनाई जा सके। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। महिला ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया, लेकिन वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता रहा और लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। आरोप है कि कई बार उसने महिला का पीछा भी किया और उसे मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देकर महिला पर बात करने और शादी के लिए सहमत होने का दबाव बनाता था। एक बार वह उस समय भी सरकारी अस्पताल पहुंच गया जब महिला एक मामले में पीड़ित का मेडिकल कराने गई थी। वहां भी उसने बातचीत करने की कोशिश की और विवाद खड़ा कर दिया।

    महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन राहुल शर्मा ने जबरन उसे अपनी कार में बैठा लिया। बाणगंगा क्षेत्र में उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और शादी के लिए दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसे बाहर निकलने नहीं दिया।

    इसी दौरान महिला की मां का फोन आया। महिला ने किसी तरह उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे कार में बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही महिला के पिता और भाई मौके पर पहुंच गए। उन्हें आता देख आरोपी कार लेकर वहां से फरार हो गया।

    घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल ने थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत की जांच के बाद बाणगंगा पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

  • बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल

    बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल


    मध्यप्रदेश अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने और उसे निजी बैंक खातों में जमा करने के आरोपों ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिन के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी कहां हुई कितनी राशि का मामला है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर के संचालन के लिए पहले से शासकीय प्रबंध समिति मौजूद है जिसके पदेन अध्यक्ष संबंधित एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम से एक निजी समिति बनाई गई। आरोप है कि इस समिति के सदस्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से नकद राशि और चांदी के रूप में दान लेने लगे तथा अपनी अलग रसीदें जारी करते रहे। बताया जा रहा है कि चांदी के अलावा मिलने वाली नकद राशि सरकारी खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की जाती रही।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी समिति के रहते निजी समिति आखिर कैसे बनाई गई और तीन वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उसका संचालन कैसे चलता रहा। शिकायतों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम और बाद में पदस्थ अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस व्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब जांच की आंच केवल समिति तक सीमित नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

    मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों में लगभग 170 श्रद्धालुओं द्वारा चांदी दान किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन उसके बाद कितने लोगों ने दान दिया कितना चढ़ावा आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि समिति का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हालांकि समिति के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी और सहमति से ही समिति का गठन किया गया था तथा उसका विधिवत पंजीयन भी कराया गया था।

    शिकायत के आधार पर गठित जांच समिति कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें गर्भगृह में लगाए गए चांदी के वास्तविक उपयोग की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसे सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सरकारी मंदिर में निजी समिति का गठन नियमों के अनुरूप था या नहीं।

    मां बगलामुखी मंदिर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पहले से 27 सरकारी दान पेटियां और ऑनलाइन दान की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में समानांतर निजी व्यवस्था चलने से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर चढ़ावे के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का।

  • बुजुर्ग दंपती की हत्या में सुपारी किलिंग का शक गहराया, बारिश का फायदा उठाकर फरार हुए आरोपी, CCTV बना बड़ा सुराग

    बुजुर्ग दंपती की हत्या में सुपारी किलिंग का शक गहराया, बारिश का फायदा उठाकर फरार हुए आरोपी, CCTV बना बड़ा सुराग


    भोपाल । भोपाल के ऐशबाग स्थित सुदामा नगर में बुजुर्ग दंपती हेमंत फिलेमोन और उनकी पत्नी शकुंतला बारीक की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी अब और उलझती जा रही है। पुलिस की जांच में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं लेकिन अब तक हत्यारों का कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लग सका है। इस बीच घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने जांच को नई दिशा दी है। फुटेज में तेज बारिश के दौरान रेनकोट पहने दो संदिग्ध युवक वारदात के बाद इलाके से निकलते दिखाई दिए हैं। पुलिस का मानना है कि यही दोनों युवक इस दोहरे हत्याकांड में शामिल हो सकते हैं और इन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    जांच में सामने आया है कि दोनों संदिग्ध पहले एक साथ चलते दिखाई देते हैं लेकिन कुछ दूरी पर पहुंचकर अलग अलग रास्तों से आगे बढ़ जाते हैं। इसके बाद सुभाष नगर अंडरब्रिज के पास दोनों फिर एक स्थान पर मिलते हैं और वहां से आगे बढ़ने के बाद कैमरों की नजर से ओझल हो जाते हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने बारिश और रेनकोट का सहारा लेकर अपनी पहचान छिपाने की पूरी योजना बनाई थी ताकि सीसीटीवी कैमरों में उनका चेहरा साफ दिखाई न दे। फुटेज में एक तीसरे संदिग्ध के भी नजर आने की जानकारी मिली है जिसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    तकनीकी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो चुका है कि दंपती की हत्या 24 जून को ही कर दी गई थी जबकि उनके शव 27 जून को घर के अंदर मिले। यानी करीब तीन दिनों तक दोनों के शव घर में ही पड़े रहे और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शकुंतला बारीक को दो गोलियां मारी गई थीं जबकि हेमंत फिलेमोन के सिर में एक गोली दागी गई थी। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उससे पुलिस को शुरुआत से ही पेशेवर शूटरों के शामिल होने का संदेह है।

    पुलिस की जांच अब सुपारी किलिंग के एंगल पर सबसे अधिक केंद्रित हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने वारदात से पहले कई दिनों तक बुजुर्ग दंपती की गतिविधियों पर नजर रखी और पूरी योजना के साथ हत्या को अंजाम दिया। जिस सटीक तरीके से गोली मारी गई उससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि वारदात में प्रशिक्षित अपराधियों का हाथ हो सकता है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस को जानकारी मिली है कि दंपती अपना मकान लगभग एक करोड़ बीस लाख रुपए में बेचने की तैयारी कर रहे थे। मकान का सौदा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका था लेकिन रजिस्ट्री और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोनों की हत्या हो गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस सौदे से किस व्यक्ति या समूह को आर्थिक नुकसान होने वाला था और कहीं इसी वजह से हत्या की साजिश तो नहीं रची गई।

    मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच साइबर सेल और विभिन्न थानों की करीब बीस टीमें लगातार काम कर रही हैं। पुलिस मोबाइल लोकेशन डिजिटल ट्रांजैक्शन बैंक खातों और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। मृतका की एक करीबी रिश्तेदार के बैंक खातों में कुछ संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं जिनकी गहन पड़ताल जारी है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच हर पहलू से आगे बढ़ रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। मामले में उपयोगी और पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए पचास हजार रुपए के इनाम की भी घोषणा की गई है। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का खुलासा किया जा सकेगा।