Category: Madhya Pradesh

  • बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन

    बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन


    भोपाल। बच्चों की दुनिया में एक छोटी-सी कहानी भी बड़ा सपना जगा सकती है, कविता की दो पंक्तियां उनके भीतर संवेदना का दीप जला सकती हैं और किसी बाल पात्र का साहस उन्हें जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखा सकता है। इसी बाल मन की कल्पनाशीलता, जिज्ञासा और संवेदना को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

    दरअसल, अर्चना प्रकाशन न्यास के तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बाल साहित्यकार और साहित्यप्रेमी शामिल होंगे। सम्मेलन के साथ बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को साहित्य के साथ बाल अधिकार, संस्कार, रचनात्मकता और बाल मनोविज्ञान के व्यापक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देशभर के बाल साहित्यकारों का होगा संगम

    भोपाल में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन बाल साहित्य को केंद्र में रखकर देश के विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। अर्चना प्रकाशन न्यास की बैठक में सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया। बैठक में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चन्द्र, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा, साहित्यकार उमेश सिंह, नुसरत मेंहदी, बाल साहित्यकार महेश सक्सेना, गोपेश्वर बाजपेयी, गोकुल सोनी, मीनू पांडे, गीत धीर, मृदुल त्यागी, सुदर्शन व्यास, देविदयाल सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

    सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आने वाले बाल साहित्यकारों की सहभागिता से मध्य प्रदेश के रचनाकारों को भी देश के अन्य क्षेत्रों में लिखे जा रहे बाल साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रयोगों का आदान-प्रदान संभव होगा।

    बाल साहित्य को मनोरंजन तक सीमित करने की जरूरत नहीं

    इस बैठक के दौरान इस बात पर भी विमर्श हुआ कि बाल साहित्य बच्चों के मनोरंजन का माध्यम भर नहीं है। वह उनके व्यक्तित्व निर्माण, भाषा विकास, कल्पनाशक्ति, नैतिक बोध और सामाजिक संवेदनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहानी और कविता के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं। प्रकृति, परिवार, मित्रता, देश, समाज, विज्ञान, इतिहास और मानवीय संबंधों के प्रति उनकी दृष्टि विकसित होती है।

    आज डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच बच्चों के पढ़ने की आदत और उनके सामने उपलब्ध सामग्री का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की आवश्यकता और बढ़ जाती है। सम्मेलन इस प्रश्न पर भी सार्थक विमर्श का अवसर दे सकता है कि आज के बच्चे के लिए कैसा साहित्य लिखा जाए, जो उसकी भाषा में हो, उसकी जिज्ञासाओं को समझे और उसे अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति तैयार करे।

    बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता से जुड़ेगा संवेदनशील पक्ष

    मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है। बाल साहित्य में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से स्थान दिया जा सकता है। बच्चों के लिए लिखने वाले साहित्यकार यदि बाल मन की वास्तविक चुनौतियों को समझकर रचना करें तो साहित्य उनके लिए सिर्फ कल्पना की दुनिया नहीं रहेगा, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी बनेगा।

    आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि “बाल साहित्य बच्चे के मन तक पहुंचने का सबसे सहज और प्रभावी माध्यम है। एक अच्छी कहानी बच्चे को आनंद देने के साथ ही वह उसके भीतर संवेदना, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सही-गलत को समझने की दृष्टि भी विकसित करती है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस प्रकार के प्रयासों को इसलिए महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि बच्चों के अधिकारों की बात कानून और संस्थागत व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती। समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने में साहित्य और संस्कृति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।”

    उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश में बाल साहित्यकारों और बाल अधिकारों से जुड़े संस्थानों के बीच संवाद बढ़ना प्रदेश के बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।”

    साहित्य अकादमी की सहभागिता से रचनाकारों को मिलेगा मंच

    मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की सहभागिता सम्मेलन को प्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ती है। साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दावे कहते हैं, अकादमी लंबे समय से प्रदेश में साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों में सक्रिय रही है। बाल साहित्यकार सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश के वरिष्ठ और नवोदित बाल साहित्यकारों के बीच संवाद का यहां एक सुखद अवसर बन सकता है।

    उन्‍होंने कहा, यह आयोजन नई पीढ़ी के लेखकों को बाल साहित्य की बदलती जरूरतों को समझने और अपनी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब बच्चों के लिए साहित्य लिखने में भाषा की सरलता के साथ विषयों की आधुनिकता भी आवश्यक हो गई है, साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मध्य प्रदेश को क्या मिलेगा

    इस संबंध में अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन का सबसे बड़ा संभावित लाभ यह होगा कि भोपाल बाल साहित्य के राष्ट्रीय संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले साहित्यकार अपने अनुभव और रचनात्मक दृष्टि लेकर आएंगे। इससे मध्य प्रदेश के बाल साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों से संवाद का अवसर मिलेगा।

    उन्‍ळोंने बताया कि दूसरा महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की उपलब्धता और उसके प्रति जागरूकता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। विद्यालयों, पुस्तकालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और साहित्यकारों के बीच यदि बाल साहित्य को लेकर संवाद बढ़ता है तो बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को भी बल मिल सकता है। इसके अलावा स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाने का है। मध्य प्रदेश के अनेक छोटे शहरों और कस्बों में बाल साहित्य लिखने वाले रचनाकार सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन से उन्हें व्यापक मंच मिल सकता है और उनके साहित्य को प्रदेश से बाहर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    बाल साहित्य प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

    सम्मेलन के अवसर पर बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है। बाल पुस्तकों और साहित्यिक सामग्री के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग समय में बच्चों के लिए साहित्य किस प्रकार विकसित हुआ है और आज के दौर में उसकी दिशा क्या होनी चाहिए।

    ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा

    सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीयन लिंक जारी किया गया है। प्रतिभागी लिंक पर अपना विवरण भरकर सम्मेलन के लिए पंजीयन करा सकेंगे। आयोजकों की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बाल साहित्यकारों से इसमें सहभागिता का आह्वान किया गया है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब बच्चों की दुनिया तेजी से बदल रही है। मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल सामग्री के बीच पुस्तक, कहानी और कविता के साथ बच्चे का रिश्ता बनाए रखना एक बड़ी सामाजिक आवश्यकता बन गया है। यह बाल साहित्यकारों, साहित्यिक संस्थाओं और बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों का साझा संवाद बच्चों के लिए ऐसी रचनात्मक दुनिया तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जहां कल्पना को उड़ान मिले, संवेदना को भाषा मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को शब्द देने का अवसर मिले।

  • मध्‍य प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.3 इंच कम हुई बारिश, 26 सितंबर तक तेज बारिश के आसार, आज भी अलर्ट

    मध्‍य प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.3 इंच कम हुई बारिश, 26 सितंबर तक तेज बारिश के आसार, आज भी अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून अब तक सामान्य बारिश के आंकड़े से नीचे बना हुआ है। प्रदेश में 869.3 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश का 91.5% है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब के असर से अगले चार दिन बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। 25 और 26 सितंबर को कुछ जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम का रूप ले रहा है। इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ नमी का परिवहन, वायुमंडलीय परिसंचरण और अन्य मौसमी परिस्थितियां मध्यप्रदेश में बारिश को प्रभावित करेंगी।

    छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में आज भारी बारिश

    IMD के अनुसार बुधवार को छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    33 जिलों में पहले ही बरस चुका पानी

    सोमवार और मंगलवार को प्रदेश के 33 जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, सीहोर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आलीराजपुर, शाजापुर, देवास, खंडवा, रीवा, सिंगरौली, सीधी, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम और बैतूल शामिल हैं।

    सागर के देवरी में सबसे ज्यादा 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों में बारिश हुई।

    26 सितंबर तक जारी रह सकता है दौर

    मौसम विशेषज्ञ नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बनने वाले सिस्टम जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, उनके साथ आने वाली नमी और वायुमंडलीय परिसंचरण मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। इसी वजह से 26 सितंबर तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश होने के आसार हैं।

    23 और 24 सितंबर को भी कुछ जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि 25 और 26 सितंबर को कहीं-कहीं भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश का यह दौर प्रदेश के मौजूदा वर्षा घाटे को कम कर सकता है।

    सामान्य से 2.3 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 869.3 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश हुई है। इस अवधि तक सामान्य बारिश 927.5 मिमी यानी 36.5 इंच होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश सामान्य से 2.3 इंच पीछे है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 6% कम है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में 10% बारिश कम हुई है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 2% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 22% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में स्थिति में काफी सुधार हुआ है। मंगलवार को प्रदेश का कुल बारिश का अंतर माइनस 2% तक पहुंच गया था।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है। स्रोत सूची में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के 23 जिलों में अब तक सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर बढ़ने के साथ प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। 26 सितंबर तक चलने वाले इस दौर से प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े में और सुधार होने की उम्मीद है।

  • भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल: के निशातपुरा थाना क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में चलती बाइक पर गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी अलीम उर्फ अल्लू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर अपने दोस्त तासी उर्फ इकलास की देशी पिस्टल से गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस ने उसे घटना के करीब 12 घंटे के भीतर जिला रायसेन से गिरफ्तार किया।

    पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई देशी पिस्टल भी बरामद कर जब्त कर ली है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या के पीछे पुरानी रंजिश को वजह बताया है। मामले में पुलिस आरोपी से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर रही है।

    पूछताछ में अलीम ने बताया कि करीब एक साल पहले मृतक तासी उर्फ इकलास का उसके दोस्त ताहिर उर्फ अय्यू से विवाद हुआ था। उस समय अलीम ने अपने दोस्त ताहिर की मदद की थी। इसी विवाद के बाद तासी आरोपी अलीम से भी रंजिश रखने लगा था। आरोपी के अनुसार, मृतक की ओर से उसे धमकी भी दी जाती थी।

    करीब 15 दिन पहले दोनों के बीच एक बार फिर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि लगातार बनी रंजिश के चलते उसने तासी की हत्या करने की योजना बनाई। इसके बाद वह गंजबासौदा में रहने वाले अपने रिश्तेदार आसिफ के पास पहुंचा।

    आरोपी के अनुसार, वहीं से उसे देशी पिस्टल मिली। हथियार हासिल करने के बाद वह भोपाल आया और तासी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के बताए स्थान और उसकी निशानदेही के आधार पर घटना में इस्तेमाल की गई पिस्टल बरामद कर ली है।

    घटना 20 सितंबर रविवार की बताई गई है। तासी अपने एक दोस्त के साथ सुबह मछली पकड़ने के लिए निकला था। इसी दौरान अलीम भी उनके साथ लिफ्ट लेकर बाइक पर पीछे बैठ गया। चलती बाइक के दौरान आरोपी ने तासी को गोली मार दी।

    गोली लगने के बाद तासी की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश तेज कर दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसे रायसेन जिले से पकड़ लिया। गिरफ्तारी के साथ ही हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है।

    मामले में अब पुलिस का फोकस हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों तक पहुंचने पर है। पुलिस के अनुसार, घटना में हथियार उपलब्ध कराने वाले साहन और आसिफ की तलाश की जा रही है। दोनों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस आरोपी से हत्या की योजना, हथियार हासिल करने की प्रक्रिया और वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में पूछताछ कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या से पहले आरोपी ने किस तरह तैयारी की और वारदात को अंजाम देने के बाद वह रायसेन कैसे पहुंचा।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश हत्या की प्रमुख वजह के तौर पर सामने आई है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। हथियार उपलब्ध कराने के आरोपों की पुष्टि और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह

    मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह


    मध्य प्रदेश: के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 21,500 रुपये करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। आदेश के अनुसार बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इससे प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिलेगा।

    विभाग की ओर से जारी आदेश में वर्तमान में प्रचलित 14,337 रुपये की राशि को संशोधित कर 21,500 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इस तरह इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 7,163 रुपये की वृद्धि हुई है। सितंबर में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच सहमति बनने के बाद अब विभागीय स्तर पर इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे थे। सितंबर में यह मामला आंदोलन तक पहुंच गया था। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हुई और वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटना भी सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों की मांग और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से हस्तक्षेप किया गया।

    इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई थी। चर्चा के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनी और 21,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की गई। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और विभागीय आदेश का इंतजार किया जा रहा था। अब आदेश जारी होने के साथ बढ़े हुए स्टाइपेंड को लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

    इससे पहले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। आंदोलन के दौरान डॉक्टरों की ओर से इससे काफी अधिक राशि की मांग रखी गई थी। सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद 21,500 रुपये की राशि पर सहमति बनी। अब आदेश में इसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किए जाने से अप्रैल से सितंबर तक की अवधि के भुगतान को लेकर भी बढ़ी हुई दर लागू होने का आधार तैयार हो गया है।

    स्टाइपेंड में यह संशोधन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे इंटर्न डॉक्टरों के लिए सीधे आर्थिक लाभ से जुड़ा फैसला है। इंटर्नशिप के दौरान डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, विभिन्न विभागों में चिकित्सकीय कार्य और प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके प्रशिक्षण काल के दौरान मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता को बढ़ाएगी।

    सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा स्टाइपेंड था, लेकिन आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी चर्चा में रही। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और बल प्रयोग के बाद मामला और गंभीर हुआ था। उप मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम पर कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के साथ आंदोलन समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ।

    अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड की नई दर औपचारिक रूप से लागू हो गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने के कारण यह निर्णय केवल आगे की अवधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदेश में निर्धारित प्रभावी तारीख के आधार पर भुगतान की गणना की जाएगी।

  • एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को तेज हो गया। बड़ी संख्या में आयुष इंटर्न डॉक्टर भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया और इंटर्न डॉक्टरों को अंदर जाने से रोका गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में राशि बढ़ाने की मांग रखी। उनका कहना है कि मौजूदा 9,383 रुपये का मासिक स्टाइपेंड 15 राज्यों की तुलना में सबसे कम है।

    डॉक्टरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में आयुष इंटर्न्स को 33,099 रुपये प्रतिमाह, ओडिशा में 30 हजार रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। बिहार में यह राशि 27 हजार रुपये, आंध्र प्रदेश में 25,906 रुपये और केरल में 23 हजार रुपये प्रतिमाह बताई गई है।

    इसी तरह कर्नाटक में 22,500 रुपये, असम और महाराष्ट्र में 18 हजार रुपये, छत्तीसगढ़ में 15,900 रुपये तथा पंजाब और उत्तराखंड में 15 हजार रुपये का स्टाइपेंड मिलने की जानकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने दी। राजस्थान में 14 हजार रुपये के साथ डीए मिलने की बात भी कही गई है।

    हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने का दावा किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाया जाना चाहिए।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में भोपाल में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने तीन दिन तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने उनके स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया।

    सरकार की घोषणा के बाद एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़कर 21,500 रुपये प्रतिमाह किया गया। हालांकि प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई थी। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिसमें कुछ डॉक्टर घायल हुए थे।

    इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया था और मामले की जांच जारी है। इसी घटनाक्रम के बीच अब आयुष विभाग से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों ने भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनकी आर्थिक स्थिति और अन्य राज्यों में मिलने वाली राशि को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति पर नजर रखी गई।

    अब आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर है। प्रदर्शन के जरिए डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर अपनी मांग प्रशासन के सामने रख दी है।

  • अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    मध्य प्रदेश: सरकार ने शासकीय धन के गबन और भ्रष्टाचार से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ पेंशन संबंधी कड़ी कार्रवाई की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े मामले में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी की पेंशन न्यूनतम करते हुए 7,750 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत पदस्थ रहीं एक प्राचार्य की देय पेंशन स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।

    पहले मामले में जनपद पंचायत छिन्दवाड़ा में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे सुनील कुमार अंधवान के खिलाफ अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता से संबंधित अनियमितताओं की जांच की गई थी। जांच में उनके द्वारा 23 फर्जी प्रकरण तैयार किए जाने और इनके माध्यम से 50.25 लाख रुपये के शासकीय धन के गबन का आरोप सही पाया गया।

    प्रकरण में कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने सुनील कुमार अंधवान को दंडित किया है। उनकी पेंशन राशि को न्यूनतम स्तर पर निर्धारित करते हुए अब 7,750 रुपये कर दिया गया है। अंधवान 30 जून 2025 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी मामले में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की गई।

    अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने से जुड़ी सरकारी व्यवस्था है। ऐसे मामलों में फर्जी प्रकरण तैयार कर शासकीय राशि का इस्तेमाल किए जाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। इसी आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई।

    दूसरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झकनावदा में प्राचार्य और प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर रहीं शकुंतला शंखवार की देय पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है।

    शकुंतला शंखवार के खिलाफ लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना इंदौर से जुड़े एक आपराधिक प्रकरण में विशेष न्यायालय झाबुआ ने 4 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया था। न्यायालय ने उन्हें अलग-अलग मामलों में चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।

    न्यायालय से सजा मिलने के बाद राज्य सरकार ने पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके परिणामस्वरूप उनकी देय पेंशन को स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    दोनों मामलों में सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि शासकीय सेवा के दौरान वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। एक मामले में सरकारी धन के गबन से जुड़े आरोप सही पाए जाने के बाद पेंशन न्यूनतम की गई, जबकि दूसरे मामले में न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई।

  • बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    मध्यप्रदेश: के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में निर्माणाधीन ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और आसपास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में सामने आई लापरवाही को लेकर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान विधायक रामेश्वर शर्मा भी मंत्री के साथ मौजूद रहे। मंत्री ने निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास की सड़क व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है और स्ट्रीट लाइट भी बंद हैं। निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल और आसपास की सभी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों की समयसीमा दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मंत्री ने निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित कंपनी पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए अधिकारियों को कहा गया।

    बैरागढ़ में निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास यातायात और आम लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया। मंत्री ने कहा कि निर्माण स्थल पर काम के दौरान जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन होना चाहिए। सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान सिविल अस्पताल के पास फैली अव्यवस्था का मुद्दा भी सामने आया। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को अस्पताल के आसपास की व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में लोगों को होने वाली असुविधाओं को देखते हुए आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

    मंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली। जिन कार्यों को अक्टूबर तक पूरा किए जाने की उम्मीद थी, उनके अब तक अधूरे रहने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों के लिए समयसीमा निर्धारित है, उन्हें तय अवधि में पूरा करने के लिए प्रभावी निगरानी की जाए।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित कंपनी और अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा कराने पर जोर दिया गया।

    बैरागढ़ ब्रिज का निर्माण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माण की गति के साथ-साथ सड़क, रोशनी और सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निरीक्षण में सामने आई कमियों का समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित करें।

  • एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    मध्य प्रदेश: पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। 24 बिंदुओं वाली इस नीति में वर्दी में रील, संवेदनशील जानकारी साझा करने, सरकारी दस्तावेजों को AI टूल्स पर अपलोड करने और सोशल मीडिया से कमाई सहित कई गतिविधियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग में अनुशासन, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अथवा ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में भी ऐसी सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पहले से मौजूद अनुचित सामग्री को हटाने और भविष्य में निर्देशों का पालन करने के लिए भी कहा गया है।

    पुलिसकर्मियों को सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। खास तौर पर गोपनीय और सुरक्षा से जुड़ी सरकारी जानकारी को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स पर अपलोड करने से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।

    संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी, काम की प्रकृति और तैनाती वाले स्थान की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया है। ऐसे स्थानों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय लोकेशन और जियो टैगिंग जैसी सुविधाएं बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका कम हो।

    नई नीति में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। सरकार की पूर्व अनुमति के बिना पुलिसकर्मी अपने, आश्रितों या परिजनों के नाम से बनाए गए खातों के माध्यम से पेड प्रमोशन या मॉनेटाइजेशन नहीं करा सकेंगे। व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार पर भी प्रतिबंध रहेगा। सोशल मीडिया से हुई किसी आय का विवरण निर्देश जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर विभाग को देना होगा।

    दुर्भावनापूर्ण, अश्लील या जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव दिखाने वाली सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से भी बचने को कहा गया है। विशिष्ट और अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों के फोटो या सेल्फी साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील कार्रवाई के फोटो या वीडियो पोस्ट या लाइव नहीं किए जा सकेंगे।

    किसी शिकायत, जांच या विवेचना के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, आरोपी अथवा अन्य संबंधित लोगों के फोटो और वीडियो साझा करने पर भी रोक है। आवश्यक परिस्थितियों में अनुमति के बाद और पहचान छिपाकर ही सामग्री साझा की जा सकेगी। जारी जांच या अदालत में लंबित मामलों से जुड़ी ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रभावित हो।

    महिला और बालिका से जुड़े यौन अपराधों के पीड़ितों तथा कानून के संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा नहीं की जा सकेगी। न्यायालय के निर्देशों या फैसलों पर ऐसी टिप्पणी से भी बचना होगा, जिससे अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो।

    गाइडलाइन में संदिग्ध या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ सोशल मीडिया पर मित्रता, फॉलो या सहयोग से बचने को कहा गया है। पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन और सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए करने पर भी रोक रहेगी। सरकारी नीतियों, विभागीय कार्यप्रणाली या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पद की गरिमा के विपरीत टिप्पणियां करने की अनुमति नहीं होगी।

    पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के अनावश्यक व्यक्तिगत इस्तेमाल से भी बचना होगा। पुलिस की रणनीति, फील्ड क्राफ्ट, जांच तकनीक और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति साझा नहीं की जा सकेगी। सेवा संबंधी शिकायतों के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत रखने को कहा गया है।

    निर्देशों को थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य इकाइयों में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए हैं। जानबूझकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    मध्यप्रदेश: कांग्रेस के सचिव कुणाल चौधरी ने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए छात्र-छात्राओं का आभार जताते हुए युवाओं और किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए राहुल गांधी का भी आभार व्यक्त किया। चौधरी ने कहा कि युवाओं ने अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े सवाल मजबूती से सामने रखे हैं।

    उन्होंने कहा कि इंदौर की अर्थव्यवस्था में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन प्रदेश में पढ़े-लिखे युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और वेतन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

    चौधरी ने पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए बोर्ड बनाने और प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को बार-बार परीक्षा शुल्क भरकर परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन व्यवस्था की गलती सामने आने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

    उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर कार्रवाई का सामना करने के बजाय उनकी समस्याओं का नीतिगत समाधान मिलना चाहिए। रोजगार और वेतन से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    चौधरी ने भागीरथपुरा मामले और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही ड्रग से जुड़े मामलों में पूरे नेटवर्क की जांच करने तथा किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर जवाबदेही तय करने की बात कही।

    सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासनिक लापरवाही या सरकारी तंत्र की विफलता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी धन के नुकसान की स्थिति में जिम्मेदार लोगों से उसकी वसूली की मांग की।

    भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज से जुड़े मुद्दे पर भी चौधरी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजधानी से जुड़े महत्वपूर्ण अधोसंरचना संबंधी सवालों पर जनता को समयबद्ध जानकारी मिलनी चाहिए।

    किसानों के मुद्दे पर उन्होंने सोयाबीन की फसल में मौसम और बीमारी से हुए नुकसान का उल्लेख किया। चौधरी ने पीले मोजेक सहित फसल खराब होने की शिकायतों के बीच तत्काल सर्वे और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की।

    उन्होंने एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति खेतों में जाकर देखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई किसान कम उत्पादन और फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं।

    सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चौधरी ने कहा कि सरकार ने 5,700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बात कही है, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति क्यों बन रही है। उन्होंने भावांतर योजना के पंजीयन, भुगतान और वास्तविक लाभ को लेकर भी स्पष्टता की मांग की।

    उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कटाई शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे होना जरूरी है। फसल कट जाने के बाद सर्वे होने पर वास्तविक नुकसान का आकलन मुश्किल हो सकता है। चौधरी ने उचित एमएसपी, समय पर सर्वे, फसल नुकसान का मुआवजा और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।

    चौधरी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी आरोप लगाए और कहा कि नेताओं को विवाद और विभाजन के बजाय युवाओं, किसानों, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई चाहती है।