Category: Madhya Pradesh

  • मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला

    मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला


    मध्यप्रदेश । सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े अंतरराज्यीय वित्तीय समझौते को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के हितों से समझौता किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कह दें वही अंतिम सत्य नहीं हो जाता। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि जब मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना में हुए नुकसान के आधार पर 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था तो आखिर वह दावा किस आधार पर छोड़ दिया गया। पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की।

    भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और सरदार सरोवर परियोजना के कारण सबसे अधिक नुकसान भी प्रदेश को ही उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक कृषि भूमि वन क्षेत्र और आदिवासी गांव मध्यप्रदेश में डूब क्षेत्र में आए। हजारों परिवारों का विस्थापन हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा दायित्व भी प्रदेश ने निभाया। ऐसे में तत्कालीन आकलन के आधार पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार यह बताए कि वह दावा अचानक समाप्त कैसे हो गया।

    कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल यह प्रचार कर रही है कि गुजरात की लगभग 1500 करोड़ रुपए की देनदारी को कम कर 231 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया और इसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि मध्यप्रदेश के हजारों करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि जनता को पूरे समझौते की सच्चाई जानने का अधिकार है और सरकार को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।

    पटवारी ने सरकार से कई सीधे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं यह फैसला किस कानूनी और वित्तीय आधार पर लिया गया। क्या इस विषय पर राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा हुई थी। क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया था। क्या पर्यावरण विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े जानकारों की राय ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई बैठक में शामिल होने जा रहे अधिकारियों से उनकी विमान यात्रा के दौरान बातचीत हुई थी और अधिकारियों ने बताया था कि मध्यप्रदेश अपने दावे को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहा है। ऐसे में समझौते के बाद दावा समाप्त होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी इस मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश पर पांच लाख इकसठ हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार लगातार नया कर्ज लेकर खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की ठोस योजना के बजाय सरकार केवल प्रचार और आयोजनों पर ध्यान दे रही है। हाल ही में लिए गए नए कर्ज का उल्लेख करते हुए उन्होंने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए।

    दरअसल नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच कई वर्षों से वित्तीय विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का कहना था कि परियोजना से सबसे अधिक भूमि और गांव उसके प्रभावित हुए हैं इसलिए उसे मुआवजा मिलना चाहिए जबकि गुजरात परियोजना की लागत में अन्य राज्यों की हिस्सेदारी की मांग कर रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550 550 करोड़ रुपए देंगे जबकि पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त माना जाएगा। इसी समझौते को लेकर अब प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग कर रही है।

  • आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही

    आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही


    भोपाल  राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा तफरी मच गई जब आयशर कॉलेज के पास एथेनॉल से भरे एक टैंकर के केबिन में अचानक आग भड़क उठी। घटना सुबह करीब सवा ग्यारह बजे की बताई जा रही है। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और तत्काल इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी के चलते आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार टैंकर पूरी तरह एथेनॉल से भरा हुआ था जिसकी पुष्टि संबंधित डिपो के अधिकारियों ने भी की है। एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ माना जाता है और यदि आग टैंकर के मुख्य हिस्से तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। राहत की बात यह रही कि आग केवल चालक के केबिन तक सीमित रही और टैंकर में भरे एथेनॉल तक नहीं पहुंच सकी। इससे किसी बड़े विस्फोट और जनहानि की आशंका पूरी तरह टल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार केबिन से अचानक धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू किया और एक फायर ब्रिगेड वाहन की मदद से आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो आग टैंकर तक पहुंच सकती थी जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में इसे अज्ञात कारणों से लगी आग माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह जांच की जाएगी कि आग शॉर्ट सर्किट किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह से लगी थी। इसके साथ ही टैंकर की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।

    घटना के समय टैंकर चालक मौके पर मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि हादसे के दौरान चालक कहां था और आग लगने के समय परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस चालक की तलाश करने के साथ उससे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी सामने आ सके।

    अधिकारियों के अनुसार आग में टैंकर का केबिन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है लेकिन टैंकर में भरा एथेनॉल सुरक्षित बचा हुआ है। यही वजह रही कि एक बड़ा औद्योगिक हादसा टल गया। घटना के दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं तथा आग लगने के कारणों का पता लगाने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

  • मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को नई रफ्तार, 40 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें, हर 10 सेकेंड मिलेगी लोकेशन

    मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को नई रफ्तार, 40 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें, हर 10 सेकेंड मिलेगी लोकेशन


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेश के 40 प्रमुख इंटरसिटी बस रूटों पर सरकारी बस सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। परिवहन विभाग ने राज्य सड़क परिवहन योजना का प्रारूप जारी करते हुए इस पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से तीस दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन मार्गों पर सरकारी बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के यात्रियों को सुरक्षित समयबद्ध और तकनीक आधारित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।

    सरकार की इस नई योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यात्रियों को पूरी तरह डिजिटल सुविधाएं मिलेंगी। बसों में इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा जिससे टिकट लेने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। इसके साथ ही हर बस में आधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे जो हर दस सेकेंड में वाहन की लाइव लोकेशन अपडेट करेंगे। यात्री वेबसाइट के माध्यम से बस की वास्तविक स्थिति जान सकेंगे जिससे उन्हें बस के आने और पहुंचने का सही समय पता चल सकेगा और अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।

    परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन बसों का संचालन मध्यप्रदेश यात्री बस परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर परमिट जारी किए जाएंगे जबकि संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी बस संचालकों के सहयोग से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से बेहतर संसाधनों का उपयोग होगा और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। योजना लागू होने के सात दिन के भीतर बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    नई परिवहन नीति के तहत प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहर और जिले आपस में बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इसमें भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर रीवा सागर छिंदवाड़ा खंडवा खरगोन बड़वानी रतलाम धार नीमच मंदसौर शिवपुरी गुना शाजापुर देवास सीहोर नरसिंहपुर सहित अनेक जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख मार्ग शामिल किए गए हैं। इन मार्गों पर यात्रियों की संख्या और ट्रैफिक के अनुसार बसों की संख्या भी तय की जाएगी ताकि भीड़भाड़ वाले रूटों पर लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।

    योजना में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग अलग श्रेणी की बसों का संचालन किया जाएगा। सामान्य मार्गों पर 23 से 34 सीटों वाली मिडी बसें चलाई जाएंगी जिनमें साधारण सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणी शामिल होगी। वहीं लंबे और व्यस्त इंटरसिटी मार्गों पर 35 से 70 सीटों वाली स्टैंडर्ड बसें संचालित होंगी जिनमें एसी डीलक्स एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे यात्रियों को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि नई परिवहन नीति लागू होने से प्रदेश में सार्वजनिक बस सेवा अधिक व्यवस्थित सुरक्षित और समयबद्ध बनेगी। साथ ही निजी और सरकारी भागीदारी के जरिए परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डिजिटल टिकटिंग और लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएंगी और सार्वजनिक परिवहन पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो मध्यप्रदेश में बस यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित हो जाएगी।

  • स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल

    स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल


    मध्यप्रदेश । भोपाल में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया जब बच्चों को स्कूल लेकर जा रही एक स्कूल वैन कोहेफिजा थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर पर अनियंत्रित होकर बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे के समय वैन में छह स्कूली बच्चे और स्कूल की एक महिला स्टाफ सदस्य सवार थीं। राहत की बात यह रही कि सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित बच गए जबकि आगे की सीट पर बैठी महिला कर्मचारी के सिर में चोट आई जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया गया। इस घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    जानकारी के अनुसार भोपाल गर्ल्स स्कूल की वैन सुबह पंचवटी क्षेत्र से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जैसे ही वाहन कोहेफिजा थाने के सामने बने फ्लाईओवर पर पहुंचा तभी चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया और वैन सीधे बिजली के खंभे से जा टकराई। तेज आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग मौके की ओर दौड़े और बिना समय गंवाए वैन में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने घायल महिला को भी तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद की जिससे उसे समय पर इलाज मिल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दूसरी गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें सुरक्षित स्कूल के लिए रवाना किया। हादसे के बाद अभिभावकों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल रहा लेकिन बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलते ही सभी ने राहत की सांस ली।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वैन के सामने अचानक एक बड़ा वाहन आ गया था। चालक ने टक्कर से बचने की कोशिश की लेकिन इसी दौरान वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा और वैन बिजली के खंभे से टकरा गई। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं वाहन के ब्रेक में तकनीकी खराबी तो नहीं थी। यदि ब्रेक ने अचानक काम करना बंद किया होगा तो चालक ने बड़ा हादसा टालने के लिए जानबूझकर वैन को खंभे से टकराकर रोकने का प्रयास किया हो सकता है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्कूल वैन की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। वाहन की ब्रेक प्रणाली स्टीयरिंग और अन्य मैकेनिकल हिस्सों की जांच विशेषज्ञों से कराई जाएगी। साथ ही चालक से भी विस्तार से पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं थी।

    इस घटना ने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फिटनेस जांच की आवश्यकता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को लेकर चलने वाले सभी वाहनों की समय समय पर तकनीकी जांच होना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की खराबी समय रहते सामने आ सके। फिलहाल इस हादसे में किसी बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन यह घटना भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर बन गई है।

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के बाद प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस फैसले को लेकर मुस्लिम संगठनों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जो लोग अपनी धार्मिक संस्थाओं और उनसे जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से नहीं संभाल पा रहे हैं वे वक्फ की धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह अपनी धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर ध्यान दे और मुस्लिम समाज को उसकी धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं का संचालन स्वयं करने दे।

    मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता स्थापित करना चाहती है तो यही व्यवस्था मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी धार्मिक संस्था में दूसरे समुदाय के लोगों को शामिल करने का सिद्धांत अपनाया जा रहा है तो यह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में ऐसा करना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास में अब तक सभी धार्मिक संस्थाओं का संचालन उसी समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता रहा है और पहली बार मुस्लिम समाज की धार्मिक संस्था में इस प्रकार का बदलाव किया गया है जिससे समाज में असंतोष पैदा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां सरकार की नहीं बल्कि समाज के लोगों द्वारा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए समर्पित की गई हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से लोगों का भरोसा कमजोर होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से वक्फ बोर्ड में सरकारी अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते रहे हैं और इस व्यवस्था पर कभी कोई आपत्ति नहीं रही। लेकिन गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को पारदर्शिता का नाम देकर उचित ठहराना समझ से परे है।

    जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार की मंशा निष्पक्ष है तो सभी धर्मों की धार्मिक समितियों में समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में यह प्रयोग करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि किसी एक समुदाय की धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।

    इधर इस विवाद के बीच भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने अपने पद से इस्तीफा देकर मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने निकाह काजी के साथ साथ दीनी तालीमी बोर्ड और जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र सौंपते हुए वर्तमान परिस्थितियों में पद पर बने रहना संभव नहीं बताया। दूसरी ओर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम को लेकर भी संगठन के भीतर मतभेद सामने आए हैं।

    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भोपाल में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के नेतृत्व में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए इसे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया था। वहीं जमीयत उलेमा ने साफ किया है कि संगठन इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगा और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को मजबूती से रखेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • Monsoon Alert: उत्तर से दक्षिण तक सक्रिय हुआ मानसून आज इन राज्यों में तेज बारिश और आंधी की संभावना

    Monsoon Alert: उत्तर से दक्षिण तक सक्रिय हुआ मानसून आज इन राज्यों में तेज बारिश और आंधी की संभावना


    मध्यप्रदेश । देशभर में आज मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। मानसून की सक्रियता के चलते कई राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जबकि कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज चमक भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पूर्वी भारत और पश्चिमी तटीय इलाकों में मानसून मजबूत स्थिति में बना हुआ है जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव फिसलन और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में आज बादल छाए रहने के साथ रुक रुक कर बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिलेगी।

    मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है इसलिए लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। वहीं राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है। बिहार और झारखंड में भी कई स्थानों पर गरज चमक के साथ अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

    पश्चिमी तट की बात करें तो महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक और केरल में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। इन राज्यों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में भी तेज बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने की संभावना बनी हुई है।

    पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैंड और मिजोरम में कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने की संभावना है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। तेज बारिश के दौरान वाहन सावधानी से चलाएं और जलभराव वाले रास्तों पर जाने से परहेज करें। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है वहां स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। कुल मिलाकर आज का दिन देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बदलते मौसम के नाम रहेगा जिससे गर्मी से राहत तो मिलेगी लेकिन सावधानी बरतना भी उतना ही आवश्यक होगा।

  • पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा


    पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पिछले तीन दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार शाम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। करीब 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े एक युवक को पुलिस और SDRF की टीम ने लगभग 51 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात रहे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एक युवक हाथ में शराब की बोतल लेकर अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे रोकने और नीचे आने के लिए आवाज लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी और टावर के सबसे ऊपरी व संकरे हिस्से पर जाकर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पांढुर्णा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

    थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कई बार उसे नीचे उतरने की अपील की, लेकिन उसने किसी भी प्रयास का जवाब नहीं दिया।

    सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम
    संभावित हादसे को देखते हुए प्रशासन ने टावर के चारों ओर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यदि युवक नीचे गिर जाए तो उसकी जान बचाई जा सके, इसके लिए टावर के नीचे गद्दे बिछाए गए और सुरक्षा जाल (नेट) लगाया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयास सफल नहीं होने पर तत्काल SDRF की टीम को बुलाया गया।

    चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
    टावर की ऊंचाई और युवक की अस्थिर स्थिति के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रात के समय अंधेरा और तेज ऊंचाई के बीच युवक लगातार खतरनाक हरकतें करता रहा, जिससे उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। पुलिस और SDRF की टीम ने लगातार धैर्य के साथ बातचीत कर उसे शांत रखने की कोशिश की और पूरी रणनीति के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा।

    बुधवार शाम सुरक्षित उतारा गया युवक
    करीब 51 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार शाम लगभग 7 बजे SDRF और पुलिस की टीम ने तकनीकी कौशल और सतर्कता के साथ युवक को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और नीचे उतार लिया। उसके सुरक्षित जमीन पर पहुंचते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने राहत की सांस ली।

    फिलहाल युवक की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। पुलिस उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार कर रही है, ताकि उसकी पहचान और मोबाइल टावर पर चढ़ने के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

  • एमपी में मानसूनी गतिविधियां जारी, आज ग्वालियर-चंबल समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसूनी गतिविधियां जारी, आज ग्वालियर-चंबल समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और प्रदेशभर में लगातार बारिश का दौर जारी है। कहीं तेज तो कहीं रुक-रुककर हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। बुधवार को 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे कई सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित हो गए।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए भिंड जिले में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, राजगढ़, आगर-मालवा और रतलाम में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।

    इसके अलावा नीमच, उज्जैन, शाजापुर, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना जिलों में भी भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तेज बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है।

    भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों में बारिश के आसार
    गुरुवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी बारिश होने का अनुमान है।

    कई जिलों में उफान पर रहे नदी-नाले
    बुधवार को लगातार हुई बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में नदी-नाले उफान पर रहे। सेंधवा के ग्रामीण इलाकों में जलभराव और तेज बहाव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार दमोह में पौने दो इंच, नर्मदापुरम में 1.1 इंच तथा खजुराहो और टीकमगढ़ में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। जबलपुर, खरगोन और बैतूल में करीब आधा इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा दतिया, धार, ग्वालियर, खंडवा, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, छिंदवाड़ा, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, सागर, सतना, सिवनी, बालाघाट, मंदसौर, शाजापुर, पन्ना, बड़वानी, देवास और सीहोर में भी अच्छी बारिश हुई।

    तापमान में आई गिरावट
    लगातार बारिश के कारण प्रदेशभर में अधिकतम तापमान में कमी दर्ज की गई। पांच प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर 28.5 डिग्री, उज्जैन 29.2 डिग्री, ग्वालियर 29.7 डिग्री और भोपाल 30.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान सीधी में 33.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम छिंदवाड़ा में 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

    सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक हुई बारिश
    इस बार जून महीने में प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती आठ दिनों में हुई तेज बारिश ने यह कमी पूरी कर दी है।

    अब तक मध्य प्रदेश में कुल 223.7 मिमी (करीब 9 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 202.5 मिमी (8.1 इंच) वर्षा से 10 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब भी सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में औसत से 30 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

  • देवास में NSUI का हल्ला बोल, जर्जर स्कूल भवन हटाने से लेकर कॉलेज का नाम बदलने तक उठाईं कई अहम मांगें

    देवास में NSUI का हल्ला बोल, जर्जर स्कूल भवन हटाने से लेकर कॉलेज का नाम बदलने तक उठाईं कई अहम मांगें


    देवास । देवास जिले के हाटपिपल्या में वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई ने तहसील कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाया।

    एनएसयूआई के अध्यक्ष अरुण माली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तहसील कार्यालय पहुंचे। संगठन का कहना है कि पिछले चार वर्षों से विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। इसी कारण संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा शासकीय बालक विद्यालय के जर्जर भवन का रहा। एनएसयूआई ने बताया कि स्कूल भवन लंबे समय से खस्ताहाल स्थिति में है और वहां पढ़ने वाले छात्र लगातार खतरे के बीच शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संगठन ने याद दिलाया कि करीब दो वर्ष पहले भवन की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्र घायल हो गए थे लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने नया भवन बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। छात्रों ने मांग की कि पुराने और जर्जर भवन को हटाकर वहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन बनाया जाए तथा सीएम राइज स्कूल की स्थापना की जाए ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

    एनएसयूआई ने शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्या का नाम भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के नाम पर रखने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के लिए यह निर्णय लिया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण से प्रेरणा मिलेगी।

    ज्ञापन में महाविद्यालय के एक छात्र के साथ हुई कथित मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एनएसयूआई का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

    प्रदर्शन के अंत में एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा कि छात्र हितों की रक्षा के लिए वह लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन छात्रों ने जल्द सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

  • शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप

    शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया। इंदौर से ग्वालियर जा रही कृष्णा ट्रेवल्स की स्लीपर कोच बस अचानक अनियंत्रित होकर हाईवे के मीडियन में उतर गई। राहत की बात यह रही कि मीडियन की गीली और नरम मिट्टी में बस फंस गई जिससे वह पलटने से बच गई और बस में सवार यात्रियों की जान सुरक्षित रही। यदि बस पलट जाती तो हादसा बेहद भयावह हो सकता था और बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।

    जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार सुबह करीब साढ़े चार बजे बदरवास के सड़ बाईपास के पास हुई। बस इंदौर से ग्वालियर की ओर जा रही थी और उसमें कई यात्री सवार थे। अचानक संतुलन बिगड़ने के बाद बस सीधे हाईवे के मीडियन में उतर गई। तेज झटके के कारण बस में बैठे यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। कई लोग घबरा गए और चीख पुकार शुरू हो गई लेकिन कुछ ही देर में सभी को यह एहसास हुआ कि बस पलटी नहीं है जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

    घटना की सूचना मिलते ही बदरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और उनके गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कराई। हादसे में बामौरकला निवासी मोनिका जाटव सहित कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    हादसे के बाद बस चालक और बस का अन्य स्टाफ मौके से फरार हो गया। इससे यात्रियों में नाराजगी देखी गई। यात्रियों का आरोप है कि चालक शुरुआत से ही तेज रफ्तार में बस चला रहा था और कई बार यात्रियों ने उसे सावधानी से वाहन चलाने की सलाह भी दी थी लेकिन उसने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। यात्रियों का कहना है कि यदि चालक समय रहते गति नियंत्रित कर लेता तो यह हादसा नहीं होता।

    स्थानीय लोगों का भी मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना लगातार हादसों का कारण बन रहा है। परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों को ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की जरूरत है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों के चालकों की नियमित निगरानी और समय समय पर फिटनेस जांच भी जरूरी है।

    फिलहाल बदरवास थाना पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और बस चालक की तलाश भी की जा रही है। पुलिस यात्रियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तेज रफ्तार की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी भी जिम्मेदार थी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।