Category: Madhya Pradesh

  • ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला

    ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला


    मंदसौर । मंदसौर के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहा यानी बीपीएल चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार प्रशासन के यू-टर्न के साथ फिलहाल थम गया। लगातार विरोध और जनदबाव के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को चौराहे पर लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद यहां फिर से पुरानी यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई।

    बैरिकेड्स हटने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा था।

    प्रशासन ने कुछ महीनों पहले बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे के सर्कल को छोटा कर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत चौराहे पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। नई व्यवस्था के कारण अफीम गोदाम रोड, नई आबादी और संजीत नाका की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सीधे मार्ग की बजाय सिटी क्राउन होटल या महाराणा प्रताप चौराहा होकर निकलना पड़ रहा था। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी और दूसरे मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनने लगी थी।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप था कि बिना पर्याप्त योजना और जनसुनवाई के लागू की गई इस व्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। इसी के विरोध में कुछ दिन पहले जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर एक महीने के भीतर व्यवस्था की समीक्षा करने और बैरिकेड्स हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने तय समय से पहले ही बैरिकेड्स हटाने का फैसला कर लिया।

    दीपक सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि सर्कल छोटा करने और बैरिकेड्स लगाने से चौराहे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बैरिकेड्स हटाने का श्रेय आम जनता के संघर्ष को दिया।

    बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से बैरिकेड्स हटाने की मांग की थी। अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की है और चौराहे पर यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम दिखाई दे रहा है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद, एंबुलेंस व्यवस्था के नोडल बदले

    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद, एंबुलेंस व्यवस्था के नोडल बदले


    नरसिंहपुर  नरसिंहपुर जिले में 108 एंबुलेंस सेवाओं को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों और अव्यवस्थाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गुरुवार देर शाम विभाग ने 108 एंबुलेंस सेवा के नोडल प्रभारी को बदलते हुए नई जिम्मेदारी सौंप दी। विभागीय आदेश के अनुसार अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी परिवार कल्याण रंजीत चौधरी को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिन के भीतर वाहन शाखा और 108 सेवा का पूरा प्रभार नए प्रभारी प्रशांत सोनी को सौंप दें।

    बताया जा रहा है कि जिले में लंबे समय से 108 एंबुलेंस सेवाओं के मनमाने संचालन और लापरवाही को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप था कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचती, कई बार फोन रिस्पॉन्स नहीं मिलता और सेवाओं का संचालन बेहद अव्यवस्थित हो चुका था। इससे लोगों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था।

    कुछ दिन पहले सेवा संचालक कंपनी ने भी जिला प्रबंधक को हटाया था। इसके बाद अब नोडल स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि निगरानी और समन्वय मजबूत होने से एंबुलेंस सेवाओं में सुधार आएगा।

    16 मई को सामने आई एक घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था। हसन खान को एंबुलेंस कर्मियों के कथित असंवेदनशील रवैये के कारण अपनी बीमार मां को पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ा था। इस घटना का वीडियो और शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं, जिसके बाद विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।

    हालांकि विभागीय आदेश में नोडल प्रभारी बदलने का कारण “प्रशासकीय कार्य सुविधा” बताया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी में गंभीर लापरवाही के कारण यह निर्णय लिया गया। लगातार बिगड़ती व्यवस्था और बढ़ती शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।

    इस मामले में डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा कि नोडल 108 के प्रभार में बदलाव उच्च स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एंबुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी करेगा।

  • गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप

    गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप


    राजगढ़ । राजगढ़ जिले के कांगनीखेड़ा गांव में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गिट्टी हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला ने अपने देवर, देवरानी और सास पर मारपीट, अभद्रता और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीड़िता अपने पति के साथ थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता सुनीता बाई बैरागी ने आरोप लगाया कि घटना दोपहर करीब एक बजे की है। वह अपने घर के सामने खड़ी थी, तभी उसका देवर राजू बैरागी वहां गिट्टी लेने पहुंचा और उसे हटने के लिए कहा। सुनीता के मुताबिक उसने कहा कि वह पहले से ही किनारे खड़ी है, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

    महिला का आरोप है कि थोड़ी ही देर में देवरानी सुमित्रा बाई और उसकी सास भी मौके पर आ गईं और तीनों ने मिलकर गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया। पीड़िता के अनुसार देवर राजू ने पीछे से फावड़े से हमला किया, जबकि सुमित्रा ने उसका गला पकड़ लिया। बीच-बचाव करने आए उसके बेटे के साथ भी मारपीट की गई।

    सुनीता बाई ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपियों ने उसके दो मंगलसूत्र और नाक की बाली छीन ली। महिला का कहना है कि मारपीट के दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए। उसने आरोप लगाया कि देवर राजू ने उसके ब्लाउज के बटन तोड़ दिए, जिससे उसकी बेइज्जती हुई।

    पीड़िता ने कहा कि जिस देवर को उसने हमेशा बेटे की तरह माना, उसी ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया। घटना के बाद परिवार में तनाव का माहौल बना हुआ है।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप

    नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप


    राजगढ़ । राजगढ़ में नई रेलवे लाइन पर गश्त कर रहे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो जवान गुरुवार देर रात सड़क हादसे का शिकार हो गए। जालपा माता मंदिर की पहाड़ी के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद राजस्थान के झालावाड़ रेफर किया गया है। वहां उनका इलाज जारी है।

    घायल जवानों की पहचान पवन उपाध्याय और ओमवीर सिंह जाट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पवन उपाध्याय झालावाड़ रेलवे स्टेशन पर जबकि ओमवीर सिंह जाट रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर पदस्थ हैं। राजगढ़ क्षेत्र में नई रेलवे लाइन शुरू होने के बाद दोनों जवानों की ड्यूटी रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग और सुरक्षा निगरानी के लिए लगाई गई थी।

    जानकारी के अनुसार दोनों जवान बाइक से रेलवे ट्रैक क्षेत्र की निगरानी करते हुए जालपा माता मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों जवान सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को संभाला और उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए झालावाड़ रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके।

    इस हादसे के बाद नई रेलवे लाइन क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान जवानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई और मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।

  • वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

    वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन


    राजगढ़ । राजगढ़ में तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज स्वास्थ्य कर्मचारियों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर दिखाई दिया। जिलेभर के स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक लंबित वेतन जारी नहीं किया गया तो मंगलवार से जिलेभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    सुबह 10 बजे से ही जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों से कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन में नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और उषा कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अस्पतालों और गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    कर्मचारियों ने बताया कि तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। बैंक की किस्तें रुक गई हैं और घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था कि विभागीय प्रक्रियाओं और फाइलों में उलझे भुगतान का खामियाजा उन्हें और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

    सुरेश पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सोमवार तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

    प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन साहू, सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आरबीएसके डॉक्टर, सीएचओ, बीसीएम, बीपीएम, आउटसोर्स कर्मचारी, आशा और उषा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य कर्मचारियों की चेतावनी के बाद अब जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय पर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

  • राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश

    राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश


    विदिशा। राजगढ़ जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों को भुगतान में हो रही देरी और तकनीकी समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को आयोजित जिला उपार्जन समिति की बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

    बैठक के दौरान कलेक्टर ने उन मामलों की समीक्षा की, जिनमें तकनीकी कारणों से भुगतान अटक गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे किसानों की तुरंत ई-केवाईसी कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर बैंक खाते में सुधार या खाता परिवर्तन की प्रक्रिया भी प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए, ताकि किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिल सके।

    कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि गेहूं उपार्जन केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आजीविका से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को परेशान करने वाली किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही सभी खरीदी केंद्रों की लगातार निगरानी करने और लंबित मामलों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में खरीदी केंद्रों पर रखे गेहूं के परिवहन और भंडारण व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कई केंद्रों पर अब तक गेहूं का उठाव पूरा नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिवहन एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर परिवहन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि खरीदी केंद्रों पर भंडारण का दबाव कम हो सके और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    बैठक के दौरान जिला उपार्जन समिति के सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उपार्जन कार्यों की प्रगति, किसानों को किए गए भुगतान और परिवहन व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान कर उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

  • विदिशा में हादसे से मातम, परिजनों की आंखों के सामने बुझ गई जिंदगी

    विदिशा में हादसे से मातम, परिजनों की आंखों के सामने बुझ गई जिंदगी


    विदिशा। विदिशा जिले के नटेरन थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय किशोर की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। बताया जा रहा है कि किशोर घर के बाथरूम में नहाने गया था, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, जहां वह पानी की टंकी में डूबा मिला।

    जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान महेंद्र रघुवंशी के रूप में हुई है। गुरुवार दोपहर महेंद्र घर के बाथरूम में नहाने के लिए गया था। उस समय परिवार के अन्य सदस्य भी घर में मौजूद थे। काफी देर बीत जाने के बाद जब वह बाहर नहीं आया, तो परिजनों को चिंता हुई।

    परिवार के सदस्य और उसकी बहन उसे देखने के लिए बाथरूम पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि महेंद्र पानी की बड़ी टंकी में डूबा हुआ है। यह दृश्य देखकर घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और इलाज के लिए नटेरन अस्पताल पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक के परिजन मुकुट रघुवंशी ने बताया कि दोपहर के समय घर के सभी सदस्य मौजूद थे और किसी को अंदाजा नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि महेंद्र किसी तरह पानी की टंकी में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका।

    घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शुक्रवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    इस दुखद घटना ने एक बार फिर घरों में बने खुले पानी के टैंक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए पानी की टंकियों को सुरक्षित ढंग से ढंककर रखना बेहद जरूरी है।

  • पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका

    पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका


    विदिशा । विदिशा जिले में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में पदस्थ 15 आरक्षकों को पदोन्नत कर प्रधान आरक्षक बनाया गया। अधिकारियों ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए बेहतर पुलिसिंग और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार शासन की नई व्यवस्था के तहत प्रधान आरक्षकों की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि थानों में विवेचना कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विभाग का मानना है कि अनुभवी पुलिसकर्मियों को पदोन्नति मिलने से कामकाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा और थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

    प्रशांत चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष प्रशिक्षण के लिए भेजे गए 89 आरक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। ये सभी जवान जल्द ही जिले में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस बल की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी।

    इसके अलावा पुलिस भर्ती 2025 के तहत चयनित 293 नए आरक्षकों को भी जल्द प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में उनके दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन नवआरक्षकों को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में फील्ड पोस्टिंग दी जाएगी।

    पुलिस विभाग के अनुसार जिले में अभी भी पुलिसकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। जिले के 25 थानों और अन्य इकाइयों में फिलहाल करीब 1000 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 500 पद अब भी खाली हैं। इसका असर कई थानों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि शहर के सबसे बड़े कोतवाली थाना में पहले 115 जवान तैनात थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 62 रह गई है। वहीं सिविल लाइन थाना क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुरूप पुलिस बल में वृद्धि नहीं हो पाई है। ऐसे में नई भर्ती और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पुलिस विभाग का मानना है कि 15 नए प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति, 89 प्रशिक्षित जवानों की वापसी और 293 नए आरक्षकों की भर्ती से जिले की कानून व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। आने वाले समय में इससे अपराध नियंत्रण और आम जनता को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप

    जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप


    कटनी। कटनी जिले के बड़वारा क्षेत्र में जमीन विवाद और कथित दबंगों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में किसान को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

    पीड़ित किसान की पहचान चंद्रभान महोबिया के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें पांच लोगों को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    सुसाइड नोट में किसान ने भानपुरा निवासी भूरा, जगमोहन, कल्लू, जग्गू और अर्जुन के नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि ये लोग लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। नोट में उन्होंने लिखा कि वह अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहे हैं और उनके परिवार को किसी प्रकार से परेशान न किया जाए।

    किसान के बेटे चंद्रकांत महोबिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, वे दबंग प्रवृत्ति के हैं और उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाए जा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    परिजनों के मुताबिक बड़वारा तहसील, थाना और एसपी कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की टालमटोल नीति के कारण आरोपी बेखौफ बने रहे और किसान पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसी मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसान ने यह कदम उठाया।

    घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती तो शायद किसान को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

    मामले को लेकर संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित थाने को पहले ही जांच के निर्देश दिए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और किसान का इलाज जारी है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे

    स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे


    कटनी  कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

    यह ज्ञापन मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में अधीक्षक भू-अभिलेख अधिकारी को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना काल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक उन्होंने लगातार जिम्मेदारी निभाई, जिसके चलते मध्य प्रदेश को कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिले। बावजूद इसके सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।

    संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूर्व में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और अब वे आंदोलन के लिए मजबूर हो गए हैं।

    ज्ञापन में कर्मचारियों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत कर्मचारियों को एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी की गई है।

    कर्मचारियों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता यानी डीए देने, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी CHO के वेतन में पीबीआई का समायोजन करने और पहले की तरह इंडिकेटर व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो 2 जून से प्रदेशभर में सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

    कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल शुरू होती है तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। फिलहाल ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।