Category: Madhya Pradesh

  • हमीदिया अस्पताल में मेडिकल चमत्कार: 10.2 किलो ओवरी ट्यूमर के साथ गर्भवती का सफल ऑपरेशन, स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म

    हमीदिया अस्पताल में मेडिकल चमत्कार: 10.2 किलो ओवरी ट्यूमर के साथ गर्भवती का सफल ऑपरेशन, स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म


    मध्य प्रदेश । भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने 10.2 किलोग्राम वजन के विशाल ओवरी ट्यूमर से पीड़ित गर्भवती महिला का सफल सिजेरियन ऑपरेशन किया। इस दुर्लभ और जोखिमभरी सर्जरी में पहले 2.6 किलोग्राम वजन के स्वस्थ शिशु का सुरक्षित जन्म कराया गया और इसके तुरंत बाद उसी ऑपरेशन के दौरान महिला की ओवरी से 10.2 किलोग्राम का ट्यूमर भी सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनकी स्थिति स्थिर और संतोषजनक बताई जा रही है।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह मामला चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत जटिल था क्योंकि एक ओर महिला गर्भवती थी और दूसरी ओर उसकी ओवरी में असामान्य रूप से बड़ा ट्यूमर मौजूद था। ऐसी स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों ने ऑपरेशन से पहले पूरी योजना तैयार की और हर चरण को बेहद सावधानी से पूरा किया ताकि किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।

    इस सफल शल्य चिकित्सा का नेतृत्व गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा वाधवानी के मार्गदर्शन में किया गया। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी सिंह और डॉ. अदिति खरे ने सर्जरी को अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. तृप्ति वत्सल्य, डॉ. जितेन्द्र कुमार और डॉ. देवांशु सराफ ने संभाली। ऑपरेशन के दौरान विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी पूरी टीम के साथ समन्वय बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान इतने बड़े ओवरी ट्यूमर के साथ सफल प्रसव और ट्यूमर को एक ही ऑपरेशन में निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भस्थ शिशु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। लेकिन अनुभवी डॉक्टरों की टीम, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और सटीक रणनीति की बदौलत यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।

    यह सफलता न केवल हमीदिया अस्पताल की विशेषज्ञता को दर्शाती है बल्कि यह भी साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में जटिल से जटिल मामलों का भी उच्च स्तर पर सफल इलाज संभव है। डॉक्टरों की समर्पित टीम और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण मां और नवजात दोनों को नया जीवन मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

  • आधी रात कॉन्वेंट मिशन सेंटर पर धावा: लूट के बाद चार नर्सों से गैंगरेप, 28 साल पुरानी वारदात ने देश-दुनिया को झकझोरा

    आधी रात कॉन्वेंट मिशन सेंटर पर धावा: लूट के बाद चार नर्सों से गैंगरेप, 28 साल पुरानी वारदात ने देश-दुनिया को झकझोरा


    मध्य प्रदेश । साल 1998 में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात आज भी प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिनी जाती है। आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले एक कॉन्वेंट मिशन सेंटर पर आधी रात हथियारबंद बदमाशों ने हमला कर दिया। शुरुआत में यह मामला केवल डकैती का लगा लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सामने आए तथ्यों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना की गूंज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक सुनाई दी और मिशनरी संस्थानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

    22 सितंबर 1998 की रात करीब दो बजे मिशन सेंटर की घंटी बजी। बाहर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि उनके साथ एक बीमार बच्चा है जिसे तुरंत इलाज की जरूरत है। मानवता के नाते दरवाजा खोला गया लेकिन अगले ही पल पूरा माहौल बदल गया। हथियारों से लैस 26 से अधिक बदमाश परिसर में घुस आए और पूरे मिशन सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया।

    बदमाशों ने वहां मौजूद लोगों के साथ मारपीट की और कमरों की तलाशी लेते हुए नकदी तथा कीमती सामान लूट लिया। करीब दो घंटे तक परिसर में दहशत का माहौल बना रहा। बाहर गांव में सन्नाटा पसरा था जबकि अंदर चीख पुकार और हिंसा का दौर चलता रहा। लगातार आ रही आवाजों से कुछ ग्रामीण जागे और धीरे धीरे मिशन सेंटर की ओर पहुंचे। सुबह होने तक लोग परिसर के बाहर इकट्ठा हो गए। मुख्य गेट टूटा हुआ था और अंदर का दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।

    घटना के समय मिशन सेंटर के प्रभारी फादर वहां मौजूद नहीं थे। वे दूसरे गांव गए हुए थे। सूचना मिलने पर लौटे और हालात देखकर सीधे पुलिस थाने पहुंचे। शुरुआती शिकायत में डकैती का जिक्र किया गया क्योंकि रिपोर्ट दर्ज कराने वाला व्यक्ति घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था।

    जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित चारों नर्सों के अलग-अलग बयान दर्ज किए। उनके बयानों के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। उन्होंने बताया कि लूटपाट के दौरान उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म भी किया गया। इसके बाद पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया और घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए। कपड़ों समेत अन्य सबूत जांच के लिए भेजे गए।

    यह घटना सामने आते ही पूरे झाबुआ जिले में सनसनी फैल गई। सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले मिशन सेंटर में हुई इस जघन्य वारदात ने प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया और मिशनरी संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई।

    इस मामले ने कई अहम सवाल खड़े किए। आखिर इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद बदमाश मिशन सेंटर तक कैसे पहुंच गए। वारदात के पीछे उनकी मंशा क्या थी। लूट के साथ इतनी क्रूर घटना को अंजाम क्यों दिया गया और इतनी बड़ी साजिश की भनक पहले क्यों नहीं लगी। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की और यह मामला मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित क्राइम फाइल्स में शामिल हो गया।

  • मानसून ने बदली मध्य प्रदेश की तस्वीर: 35 जिलों में मेहरबान बादल, खजुराहो-मंडला में रिकॉर्ड बारिश, कई इलाकों में बढ़ा खतरा

    मानसून ने बदली मध्य प्रदेश की तस्वीर: 35 जिलों में मेहरबान बादल, खजुराहो-मंडला में रिकॉर्ड बारिश, कई इलाकों में बढ़ा खतरा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने पूरी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई जिससे एक ओर लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली तो दूसरी ओर कई इलाकों में जनजीवन भी प्रभावित हो गया। मौसम विभाग के अनुसार खजुराहो में 4.4 इंच और मंडला में 4.2 इंच बारिश दर्ज की गई जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश का असर यह हुआ कि प्रदेश की औसत वर्षा करीब 7 इंच तक पहुंच गई है। जून के आखिर तक जहां बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी वहीं अब यह कमी घटकर महज 1 प्रतिशत रह गई है।

    सतना रतलाम सीधी उमरिया पन्ना पचमढ़ी रीवा श्योपुर नौगांव भोपाल नरसिंहपुर दमोह टीकमगढ़ बैतूल नर्मदापुरम इंदौर सिवनी सागर शिवपुरी बालाघाट छिंदवाड़ा रायसेन धार जबलपुर गुना उज्जैन खंडवा खरगोन दतिया मैहर शाजापुर सीहोर छतरपुर बुरहानपुर बड़वानी और पांढुर्णा सहित अनेक जिलों में दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार हो रही वर्षा से जलस्तर बढ़ा है और खेतों में भी पर्याप्त नमी पहुंचने लगी है जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

    बारिश के बीच कई स्थानों पर हादसे भी सामने आए। बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि सीएम राइज स्कूल में कक्षा नौ की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया जिससे दो छात्राएं घायल हो गईं। दोनों के सिर में मामूली चोटें आईं और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार कराया गया। इस घटना ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उधर इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में लगातार बारिश के कारण सड़क धंस गई जिससे स्कूली बच्चों का आवागमन बाधित हो गया। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। यह दृश्य स्थानीय लोगों की सतर्कता और सहयोग की मिसाल बन गया।

    पन्ना जिले में भी तेज बारिश के कारण हरसा बागोहा नाला उफान पर आ गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद लोग जोखिम उठाकर नाला पार करते नजर आए जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। वहीं खजुराहो में लगातार बारिश के चलते खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और एहतियात के तौर पर खजुराहो जटकरा मार्ग बंद करना पड़ा। प्रशासन लोगों से नदी नालों से दूर रहने की अपील कर रहा है।

    हरदा जिले में भी बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है। इस मानसून सीजन में यहां अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। कई जिलों में तापमान में गिरावट आने से मौसम सुहावना हो गया है और लोगों को उमस से राहत मिली है।

    मौसम विभाग ने आने वाले घंटों के लिए भी चेतावनी जारी की है। गुना अशोकनगर विदिशा सागर और छतरपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि बड़वानी धार बुरहानपुर रतलाम टीकमगढ़ पन्ना सहित कई जिलों में भारी बारिश और गरज चमक के साथ वर्षा की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह बारिश का सिलसिला जारी रहा तो प्रदेश में खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिलेगा और जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ेगा।

  • एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित

    एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा खजुराहो में 4.4 इंच और मंडला में 4.2 इंच रिकॉर्ड की गई। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश के कारण प्रदेश की औसत वर्षा करीब 7 इंच तक पहुंच गई है। जून के आखिर तक जहां प्रदेश में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी, वहीं अब यह कमी घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार सतना, रतलाम, सीधी, उमरिया, पन्ना, पचमढ़ी, रीवा, श्योपुर, नौगांव, भोपाल, नरसिंहपुर, दमोह, टीकमगढ़, बैतूल, नर्मदापुरम, इंदौर, सिवनी, सागर, शिवपुरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, रायसेन, धार, जबलपुर, गुना, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, दतिया, मैहर, शाजापुर, सीहोर, छतरपुर, बुरहानपुर, बड़वानी और पांढुर्णा समेत कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश से जनजीवन प्रभावित, दो छात्राएं घायल

    लगातार बारिश के बीच बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल में बड़ा हादसा हो गया। कक्षा 9 के कमरे की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राओं के सिर में मामूली चोट आई। दोनों को तत्काल सिविल अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। वहीं इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में सड़क धंस जाने से स्कूली बच्चों की आवाजाही प्रभावित हुई। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    खजुराहो में नदी उफान पर, सड़क बंद

    खजुराहो में लगातार 24 घंटे से हो रही मूसलधार बारिश के कारण खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। एहतियात के तौर पर खजुराहो-जटकरा मार्ग को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील की है। पन्ना जिले में हरसा-बागोहा नाला उफान पर है। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

    हरदा में सामान्य से ज्यादा बारिश

    हरदा जिले में उमस के बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक जिले में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 13 इंच बारिश हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों के लिए यह बारिश बेहद लाभदायक साबित होगी।

    इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर और छतरपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बड़वानी, धार, बुरहानपुर, रतलाम, टीकमगढ़, पन्ना सहित कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।

  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध

    भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध


    भोपाल  लगातार हो रही बारिश के चलते भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के बीच बनाए गए इस डायवर्सन पर पानी भर जाने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने सोमवार देर रात यह फैसला लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

    बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के बीच बना अस्थायी मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है और वहां से गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए इस मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

    बैरिकेडिंग और निगरानी के निर्देश

    प्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस रास्ते का उपयोग न कर सके।

    आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

    उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    पहले भी हो चुके हैं हादसे

    यह वैकल्पिक मार्ग जनवरी 2025 में पार्वती नदी पर बने 49 वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद तैयार किया गया था। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी रास्ते से बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन गुजर रहे थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ यहां हादसों का खतरा भी बढ़ गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी मार्ग पर एक बस फंस गई थी, जबकि हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में गिर गई थी। हालांकि उस हादसे में चारों लोग सुरक्षित बच गए थे।

    कई जिलों की लाइफलाइन है यह मार्ग

    बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर स्थित यह पुल भोपाल और राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन और इंदौर जैसे जिलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही मार्ग आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है।

    करीब 49 वर्ष पुराने इस पुल की अब तक केवल दो बार मरम्मत हुई है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई और जनवरी 2025 में पुल धंसने के बाद इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंद मार्ग से गुजरने का प्रयास न करें और केवल सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का ही उपयोग करें।

  • मौसम का बड़ा अलर्ट 7 जुलाई को कई राज्यों में झमाझम बारिश और तेज आंधी के आसार जानें आपके राज्य का हाल

    मौसम का बड़ा अलर्ट 7 जुलाई को कई राज्यों में झमाझम बारिश और तेज आंधी के आसार जानें आपके राज्य का हाल


    मध्य प्रदेश देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय होता नजर आ रहा है और 7 जुलाई को कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर मध्य पूर्वी और पश्चिमी भारत के अनेक हिस्सों में तेज बारिश गरज चमक और तेज हवाओं की संभावना है। कई राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड दिल्ली हरियाणा पंजाब उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवा के साथ गरज चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार हवा की रफ्तार कई स्थानों पर 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है जिससे पेड़ गिरने बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और यातायात में बाधा आने की आशंका है।

    पश्चिमी भारत की बात करें तो गुजरात महाराष्ट्र गोवा और कोंकण क्षेत्र में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

    दक्षिण भारत में केरल कर्नाटक और तटीय क्षेत्रों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। यहां कई जिलों में लगातार बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है इसलिए पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में भी हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। लगातार बारिश के कारण नदी और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी प्रणाली और मानसूनी ट्रफ के उत्तर की ओर बढ़ने से बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। यही कारण है कि आने वाले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में अच्छी वर्षा होने के संकेत मिल रहे हैं।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें। आकाशीय बिजली चमकने पर सुरक्षित स्थान पर रहें। जलभराव वाली सड़कों से वाहन निकालते समय सावधानी बरतें और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखें। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना भी जरूरी होगा। कुल मिलाकर 7 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और कई राज्यों में अच्छी बारिश के साथ मौसम सुहावना रहने की संभावना है

  • MP में सरकारी व्यवस्था पर सवाल: 6 साल में नहीं बना अस्पताल, कागजों में चलती रहीं 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग

    MP में सरकारी व्यवस्था पर सवाल: 6 साल में नहीं बना अस्पताल, कागजों में चलती रहीं 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। खजराना क्षेत्र में छह वर्ष पहले 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन आज तक अस्पताल का भवन तैयार नहीं हो सका। इसके बावजूद अस्पताल के नाम पर 87 पद स्वीकृत हुए और वर्षों तक डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियां तथा तबादले होते रहे।

    जानकारी के अनुसार, 23 जून 2020 को खजराना में 100 बेड के सिविल अस्पताल की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 87 पद स्वीकृत किए गए थे। हालांकि छह साल बीतने के बाद भी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित नहीं हो सकी और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।

    भवन नहीं बना, फिर भी होती रहीं पोस्टिंग
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित था, तब उसके नाम पर कर्मचारियों की पदस्थापना और तबादले कैसे किए जाते रहे। जानकारी के मुताबिक, 15 जून 2026 को भी एक लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना सिविल अस्पताल, खजराना के नाम पर की गई।

    स्वास्थ्य विभाग ने बताई वजह
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन उपलब्ध कराना आसान नहीं है। इसी कारण अस्पताल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के लिए स्वीकृत नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को फिलहाल शहर के संजीवनी क्लीनिकों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देने के लिए तैनात किया गया है।

    स्वास्थ्य मंत्री बोले- पोर्टल बंद किया गया
    उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि संबंधित स्थान पर पहले अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर (UPHC) था, जिसे बाद में सिविल अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया गया। लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि अस्पताल का नाम विभागीय पोर्टल पर दर्ज रहने की वजह से नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया जारी रही। अब ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित पोर्टल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

    कांग्रेस ने उठाए सवाल
    इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का निर्माण हुए बिना कर्मचारियों की नियुक्तियां और तबादले होना गंभीर मामला है और कांग्रेस आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।

    तीन लाख से अधिक आबादी प्रभावित
    फिलहाल इस अस्पताल के लिए स्वीकृत स्टाफ पीसी सेठी अस्पताल, हुकुमचंद अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहा है। वहीं खजराना, मुसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास के तीन लाख से अधिक लोगों को आज भी इलाज के लिए एमवाय अस्पताल, एमटीएच और जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यदि समय पर सिविल अस्पताल का निर्माण पूरा हो जाता, तो इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव काफी हद तक कम हो सकता था।

  • एमपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, आज 31 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, आज 31 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और जुलाई की शुरुआत से ही लगातार तेज बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले छह दिनों से हो रही बारिश के चलते प्रदेश में औसत वर्षा का आंकड़ा करीब 7 इंच (179.6 मिमी) तक पहुंच गया है। यह सामान्य औसत 181.6 मिमी से केवल 1 प्रतिशत कम है, जबकि जून महीने में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, विशेष रूप से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों के अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। देवास जिले में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
    मंगलवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर और छतरपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, मैहर, दमोह, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, सीहोर, हरदा, आगर-मालवा, राजगढ़, झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
    श्योपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, भोपाल, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर और रतलाम में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    डिंडौरी में बढ़ा नदी-नालों का जलस्तर, कई गांवों का संपर्क टूटा
    डिंडौरी जिले में लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। तुड़ार नदी की पुलिया पर पानी बहने से करंजिया ब्लॉक के कई गांवों का संपर्क कट गया है। वहीं, 11 मकानों में पानी घुसने से लोगों के घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है।

    इन जिलों में दर्ज हुई बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार श्योपुर में सबसे अधिक सवा इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। खजुराहो और मंडला में 1 इंच, जबकि नौगांव और दमोह में पौन इंच बारिश हुई। छिंदवाड़ा, सिवनी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया और रीवा में करीब आधा इंच वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा जबलपुर, बैतूल, दतिया, नर्मदापुरम, खरगोन, सागर, सतना, सीहोर, छतरपुर और पांढुर्णा में भी अच्छी बारिश हुई।

    तापमान में आई गिरावट
    लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। मलाजखंड सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा सिवनी (28°), बैतूल (28.2°), पचमढ़ी (28.6°), खंडवा (29.1°), छिंदवाड़ा (29.3°) और खरगोन (29.6°) दर्ज किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में जबलपुर का अधिकतम तापमान 31.3 डिग्री, भोपाल में 33.4 डिग्री, इंदौर में 33.8 डिग्री, उज्जैन में 34 डिग्री और ग्वालियर में 36.7 डिग्री सेल्सियस रहा।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बारिश
    इस वर्ष जून महीने से ही प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला बना हुआ है। 6 जुलाई तक प्रदेश में कुल 179.6 मिमी (करीब 7 इंच) बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। यह सामान्य औसत 181.6 मिमी से सिर्फ 1 प्रतिशत कम है। हालांकि, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 22 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।

    बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।

    यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।