Category: Madhya Pradesh

  • तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    नई दिल्ली । भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला तेजा दशमी पर्व राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की स्मृति से जुड़ा है और ग्रामीण लोकसंस्कृति में इसका विशेष महत्व माना जाता है। तेजा दशमी के अवसर पर लोग वीर तेजाजी के जीवन, उनके साहस, त्याग और वचन निभाने की परंपरा को याद करते हैं।

    लोक परंपराओं में वीर तेजाजी को सत्य, साहस और वचनबद्धता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। उनकी गाथा में दिए गए वचन को हर परिस्थिति में निभाने की भावना को विशेष स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि तेजा दशमी केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा अवसर नहीं, बल्कि लोक जीवन में नैतिक मूल्यों और संकल्प की परंपरा को याद करने का दिन भी माना जाता है।

    राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भी तेजा दशमी को लेकर विशेष उत्साह दिखाई देता है। इस अवसर पर तेजाजी से जुड़े मंदिरों और थानों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और जागरण के आयोजन होते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में मेले भी लगाए जाते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार और श्रद्धालु शामिल होकर लोकदेवता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

    तेजाजी की लोकगाथा में गौ-रक्षा का प्रसंग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लोकमान्यता में उन्हें गौ-रक्षा के लिए साहस और त्याग का परिचय देने वाले लोकदेवता के रूप में याद किया जाता है। इसी वजह से ग्रामीण समाज में तेजाजी की पूजा और उनसे जुड़ी परंपराओं का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व लंबे समय से बना हुआ है।

    तेजा दशमी के आयोजन स्थानीय लोक संस्कृति को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम बनते हैं। पूजा-पाठ के साथ होने वाले भजन, कीर्तन, जागरण और मेलों में पारंपरिक आस्था और सामुदायिक सहभागिता दिखाई देती है। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनसे जुड़ी मान्यताओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने वीर तेजाजी महाराज के प्रति श्रद्धा और आस्था से जुड़े इस पर्व को सुख, शांति और खुशहाली से जोड़ते हुए सभी परिवारों के लिए मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने कामना की कि लोकदेवता के प्रति लोगों की श्रद्धा के इस पर्व से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की वृद्धि हो।

    तेजा दशमी के मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का वातावरण भी देखने को मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम लोकपरंपराओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। वीर तेजाजी की स्मृति से जुड़ा यह पर्व साहस, सत्य, त्याग और अपने वचन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की भावना को रेखांकित करता है।

    राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित जिन क्षेत्रों में तेजाजी की लोकआस्था गहरी है, वहां तेजा दशमी का दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामुदायिक आयोजनों के बीच लोग लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और परिवार तथा समाज के सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।

  • MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय, भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का वर्चुअल भूमिपूजन किया। राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क का निर्माण 31.34 किलोमीटर लंबाई में किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 9,762.78 लाख रुपये है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी मार्ग हाटपिपलिया क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजना के तौर पर सामने आया है। सड़क निर्माण से इस मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

    वर्चुअल भूमिपूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण को क्षेत्रीय संपर्क और विकास से जोड़ते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों की शहरी क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होती है और आवागमन की सुविधा बढ़ने से विकास गतिविधियों को भी समर्थन मिलता है।

    31.34 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना पर 9,762.78 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। यानी परियोजना की लागत करीब 97.63 करोड़ रुपये है। इस राशि के साथ सड़क निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे संबंधित क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम होगा।

    देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क संपर्क स्थानीय स्तर पर लोगों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने से दैनिक आवागमन के साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए भी परिवहन सुविधा उपलब्ध होती है। परियोजना पूरी होने के बाद राजोदा, कैलोद और डबलचौकी के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय विकास के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका कहना था कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित होने से विकास की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क परियोजना के वर्चुअल भूमिपूजन के साथ अब इसके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र में आवागमन की सुविधा और संपर्क व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।

    यह परियोजना देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी है। 31.34 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरा होने के बाद आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार ने परियोजना को क्षेत्रीय विकास और सुगम आवागमन से जोड़कर देखा है।

  • क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’

    क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’


    छतरपुर।
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ इन दिनों चर्चा में है। मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव के दौरान उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने का बताया जाने लगा। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी खड़ाऊ लकड़ी की हैं और उन पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है।

    अब इस विवाद पर एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में कहा है कि अगर लोग सोने की खड़ाऊ की चर्चा करते रहेंगे तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे।

    बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करेंगे’

    छतरपुर में कथा के दौरान खड़ाऊ को लेकर उठ रहे सवालों पर धीरेंद्र शास्त्री ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि अगर उनकी सोने की खड़ाऊ का जिक्र किया गया तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसे बाबा नहीं हैं जो इस तरह की बातों से डर जाएं।

    उनके इस बयान की रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रकाशित हुई है।

    ‘हम माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं’

    धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि वह माया-मोह छोड़ने का प्रवचन नहीं देते। उनके अनुसार, उनका संदेश यह है कि व्यक्ति माया-मोह में रहते हुए खूब कमाए और उस धन का इस्तेमाल परमात्मा की ओर बढ़ने में करे।

    उन्होंने कहा कि वह ऐसी बातों में दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहते और जो बात है, उसे उसी रूप में कहेंगे।

    अंबानी के घर जाने के बाद शुरू हुई थी चर्चा

    सोने की खड़ाऊ को लेकर चर्चा उस समय शुरू हुई, जब धीरेंद्र शास्त्री को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान देखा गया। तस्वीरों और वीडियो में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने की खड़ाऊ बताया जाने लगा।

    हालांकि, उपलब्ध तस्वीरों और अन्य रिपोर्टों में इन खड़ाऊ के लकड़ी की होने और उन पर सुनहरी फिनिश होने की जानकारी सामने आई है। इन्हें वास्तव में सोने से बना होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पहले भी दे चुके हैं सफाई

    धीरेंद्र शास्त्री इस मामले में पहले भी सफाई दे चुके हैं। उनका कहना था कि खड़ाऊ लकड़ी की है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई थी कि सिर्फ रंग के आधार पर इसे सोने की खड़ाऊ बताया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में पहनने की चीज नहीं है। बाद में इसी विवाद पर ताजा प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में डायमंड की खड़ाऊ बुक करने की बात कही।

    इस तरह फिलहाल ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा धीरेंद्र शास्त्री के अपने बयान के मुताबिक सही नहीं है। उनके अनुसार खड़ाऊ लकड़ी की है, जबकि सुनहरे रंग के कारण उसके सोने की होने की चर्चा शुरू हुई।

  • MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा- नीमच में बनेगा नया एयरपोर्ट…. स्टेडियम की भी सौगात

    MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा- नीमच में बनेगा नया एयरपोर्ट…. स्टेडियम की भी सौगात


    नीमच।
    राजस्थान (Rajasthan) की सीमा से सटे मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच (Neemuch) को जल्द ही नए एयरपोर्ट (New Airport) और खेल स्टेडियम की बड़ी सौगात मिलने जा रही है. नीमच के पास ही पड़ोसी राज्य राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ और कोटा जैसे प्रमुख जिले स्थित हैं; ऐसे में नीमच में नए एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल मध्य प्रदेश के मालवा अंचल, बल्कि राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के साथ भी कनेक्टिविटी और व्यापार को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।

    रविवार को नीमच के अग्रोहा भवन में आयोजित ‘सेवा से संकल्प अभियान’ के अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने यह घोषणाएं कीं. उन्होंने क्षेत्र के विकास, नागरिकों के उद्यमशीलता और हाल ही में कूनो के बाद नीमच-मंदसौर सीमा पर स्थित गांधी सागर अभ्यारण्य में शुरू हुए चीता प्रोजेक्ट को जिले की बड़ी उपलब्धि बताया।


    राजस्थान से सटे इलाकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा नया एयरपोर्ट

    राजस्थान के कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों से सीधा जुड़े होने के कारण नीमच में हवाई सेवाओं का विस्तार पूरे क्षेत्र के लिए व्यापारिक और पर्यटन की दृष्टि से गेम-चेंजर माना जा रहा है।


    ग्वालियर की सड़कों के सैंपल फेल, हाईकोर्ट ने निगम कमिश्नर से मांगा जवाब

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट बनने से नीमच का सीधा जुड़ाव देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से होगा. इसके अलावा, जिले में बहुउद्देशीय खेल स्टेडियम बनने से स्थानीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे.


    गांधी सागर में ‘मादा चीता’ की रिहाई से बढ़ेगा पर्यटन

    प्रोजेक्ट चीता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नीमच जिले के खिमला क्षेत्र में मादा चीता ‘राधा’ को रिलीज किया गया है. उन्होंने कहा कि कूनो के बाद गांधी सागर को चीतों का ‘सेकंड होम’ बनाने से क्षेत्र में वाइल्डलाइफ टूरिज्म और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय नागरिकों के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे।

    इस अवसर पर स्थानीय विधायक दिलीप सिंह परिहार ने 2 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित कर ‘सेवा से संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करने पर खुशी जताई और गांधी सागर बांध से किसानों को मिल रहे सिंचाई के लाभ के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।

  • MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला

    MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला


    आगर मालवा।
    आगर-मालवा जिले (Agar-Malwa district) के नलखेड़ा (Nalkheda) स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर (Siddha Peeth Maa Baglamukhi Temple) के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद मंदिर में रात 8 बजे बाद हवन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. शासन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अब मंदिर में हवन रात 8 बजे से पहले ही किए जा सकेंगे।

    शनिवार को तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया था. इसी दौरान श्रद्धालुओं से भरी एक कार तेज बहाव में बह गई. हादसे में कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ोद का निवासी था. मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल थे।

    हादसे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे. इसी के बाद अब रात 8 बजे के बाद हवन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।

    जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के सात श्रद्धालु उज्जैन दर्शन के लिए आए थे. इसके बाद उन्होंने कार किराए पर ली और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे. शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास स्थित बरसाती नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया।

    बताया गया कि कार पुलिया के पास तेज बहाव की चपेट में आ गई और करीब 100 मीटर दूर तक बह गई. नलखेड़ा में उस दौरान पिछले 24 घंटे में करीब 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    हादसे का पता शनिवार सुबह चला, जब स्थानीय लोगों ने नाले में पलटी हुई कार देखी. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. SDRF की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया और उसमें सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए. शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया. बाद में प्रशासन ने शवों को एंबुलेंस के जरिए उनके गृह क्षेत्र ओडिशा भिजवाया।


    मृतकों के गले में लिपटी थी लाल चुनरी

    पुलिस के मुताबिक, जब शवों को कार से बाहर निकाला गया तो सभी के गले में माता के आशीर्वाद वाली लाल चुनरी लिपटी हुई थी. बताया गया कि श्रद्धालु रात में हवन-पूजन करने के बाद लौट रहे थे।

    मृतकों की पहचान चालक अरुण पिता ब्रदीलाल गोयल निवासी सुदवास, बड़ोद, राधारानी बेहरा (33), ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा (41), रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा (38), कृष्णा राजवीर पिता शिवप्रसाद (13), शिवप्रसाद बेहरा, वी साई स्वस्तिक पिता ज्ञानेंद्र (10) और शाहीरा स्वयं प्रभा पिता शिवप्रसाद (6) के रूप में हुई है. सभी सात श्रद्धालु ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले थे।


    CCTV में एक और व्यक्ति भी बहता दिखा

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज बारिश और नाले में अचानक बढ़ा पानी सामने आया है. मंदिर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    CCTV फुटेज में हादसे से पहले करीब 11 बजे एक व्यक्ति पैदल तेज बहाव वाले रास्ते को पार करता दिखाई दिया. बताया गया कि वह भी नाले के बहाव में बह गया. फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पाया है।


    हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    हादसे के बाद नलखेड़ा में लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे और अंबेडकर चौराहे पर चक्काजाम किया. दुकानों को भी बंद कराया गया।

    स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे से 12 बजे तक तेज बारिश के दौरान जब मंदिर मार्ग का नाला उफान पर था, तब वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. आरोप है कि नाले के दोनों ओर बेरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा जवान भी मौजूद नहीं थे।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तेज बहाव के दौरान रास्ते को बेरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया जाता या सुरक्षा जवान तैनात रहते तो हादसे को रोका जा सकता था. हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी और कारणों को लेकर पुलिस-प्रशासन की जांच जारी है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की. ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी घटना पर शोक जताया।

  • जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज

    जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज


    भोपाल। भोपाल में रविवार को बुजुर्गों के लिए आयोजित एक खास कार्यक्रम ने संगीत और अपनत्व के जरिए जिंदगी को फिर से करीब से महसूस करने का मौका दिया। होशंगाबाद रोड स्थित होटल बैस्टियन में अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित बुजुर्गों के साथ उनके परिवारों और केयरगिवर्स के लिए लव यू जिंदगी कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंजलि एन एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिस्ट और लव यू जिंदगी संस्था की ओर से हुए इस आयोजन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ वृद्धावस्था और अल्जाइमर तथा डिमेंशिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों के साथ उनके परिजन केयरगिवर्स और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।

    कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य अतिथि राधारमण इंस्टीट्यूट के संजीव सक्सेना विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट वाइस एडमिरल विमल वर्मा और जनरल श्याम सुंदर श्रीवास्तव मौजूद रहे। अतिथियों ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों की शारीरिक जरूरतों के साथ उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस अवसर पर राधारमण इंस्टीट्यूट के संस्थापक स्वर्गीय राधारमण सक्सेना के शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों के म्यूजिकल बैंड Med Beats की प्रस्तुति रही। डॉक्टरों ने बुजुर्गों की पसंद के पुराने और सदाबहार गीतों की धुनें छेड़ीं तो कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया। परिचित गीतों को सुनकर कई बुजुर्ग अपने पुराने दिनों की यादों में खो गए। कुछ लोगों ने गीतों के साथ गुनगुनाया तो कुछ ने संगीत की धुन पर हल्की शारीरिक गतिविधियां करते हुए खुशी जाहिर की। कई बुजुर्गों के चेहरे पर लंबे समय बाद खुली मुस्कान दिखाई दी।

    आयोजकों के मुताबिक डिमेंशिया और अल्जाइमर से प्रभावित लोगों के लिए परिचित संगीत खास अनुभव दे सकता है। पुराने और पहचाने हुए गीत व्यक्ति को बीते समय की यादों से जोड़ सकते हैं और उनके सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में संगीत को मनोरंजन के साथ भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनाया गया। आयोजन में सिर्फ बुजुर्गों को ही केंद्र में नहीं रखा गया बल्कि उनकी देखभाल करने वाले परिवारों और केयरगिवर्स को भी विशेष महत्व दिया गया।

    संस्था की संस्थापक डॉ. अंजलि सहाय ने कहा कि वृद्धावस्था में अकेलापन चिंता और स्मृति से जुड़ी समस्याएं बुजुर्गों के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे समय में उन्हें सकारात्मक आत्मीय और खुशहाल वातावरण देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित व्यक्ति की देखभाल करने वाले परिवार और केयरगिवर्स भी लगातार भावनात्मक दबाव से गुजरते हैं इसलिए उनके लिए भी सहयोग और संवेदनशील माहौल जरूरी है। लव यू जिंदगी कार्यक्रम ने इसी संदेश को संगीत और सामूहिक सहभागिता के जरिए सामने रखा कि बुजुर्गों की जिंदगी में दवाओं और देखभाल के साथ खुशी अपनापन और संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच

    पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच


    इंदौर।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब प्रदेश के नगरीय निकायों में पानी और सीवर लाइनों की अंदरूनी स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इस जांच के लिए सड़कों को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। विभाग ने एजेंसी के साथ एक साल का समझौता किया है और पाइपलाइन जांच की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय की गई है।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि इंदौर का भागीरथपुरा हादसा है। दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में दूषित पेयजल के कारण यहां 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए थे। सामने आया था कि सीवर लाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। जांच के दौरान अकेले भागीरथपुरा क्षेत्र में ऐसे 260 स्थान मिले थे जहां सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलने की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में ऐसी संवेदनशील जगहों की पहचान शुरू की।

    GIS प्लेटफॉर्म गरुड़ के जरिए कराई गई मैपिंग में प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स चिन्हित किए गए जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर के करीब 30 हजार और भोपाल के 20 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स शामिल हैं। इन जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज या दूसरी तकनीकी खराबी होने की स्थिति में सीवर का पानी पेयजल लाइन में पहुंचने का खतरा बना रहता है।

    अब इन पाइपलाइनों के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए CCTV क्रॉलर सिस्टम वाले रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा। रोबोट को मौजूदा मैनहोल एयर रिलीज वाल्व या दूसरे एक्सेस पॉइंट्स से पाइपलाइन के भीतर भेजा जाएगा। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगे होंगे। करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े इस सिस्टम की मदद से पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और तकनीकी डेटा जुटाया जा सकेगा। लीकेज टूट-फूट अवरोध और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याओं की पहचान भी की जा सकेगी।

    इस काम के लिए विभाग ने 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर और पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने 40 रुपए प्रति मीटर की दर पेश की। सबसे कम बोली के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे। विभाग के मुताबिक ऐसी रोबोटिक पाइपलाइन जांच तकनीक देश के 15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल की जा रही है। मध्य प्रदेश में इसका इस्तेमाल पहली बार बड़े स्तर पर किया जाएगा।

  • कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों छोटे छोटे घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। देवास के सोनकच्छ में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां मंदिर में पूजा करने पहुंचे भाजपा विधायक राजेश सोनकर को पुजारी ने उनका पुराना वादा याद दिला दिया। पूजा-अर्चना के बाद जब विधायक मंदिर से बाहर निकले तो पुजारी ने उनसे सड़क निर्माण को लेकर सवाल कर दिया। पुजारी ने कहा कि पिछली बार जब विधायक यहां आए थे तब उन्होंने अगली बार डामर रोड से आने की बात कही थी लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इस दौरान विधायक पुजारी की बात सुनते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।

    दूसरी ओर ग्वालियर जिले के डबरा में भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह द्वारा पूर्व मंत्री इमरती देवी को मंच पर बुलाए जाने के बावजूद उनके मंच पर नहीं जाने का मामला सामने आया। कार्यक्रम के दौरान सांसद ने उन्हें मंच पर आने के लिए बुलाया लेकिन इमरती देवी कार्यकर्ताओं के बीच नीचे ही बैठी रहीं। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। बाद में जब उनसे मंच पर नहीं जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वहां तो मर्डर करने वाले भी बैठे हैं और ऐसे लोगों के साथ जाने का क्या मतलब है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी से नाराज नहीं हैं। उन्होंने खुद को भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बैठना पसंद है।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर छतरपुर में भाजपा विधायक ललिता यादव का भजन भी चर्चा में रहा। 17 सितंबर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया। इसी दौरान ललिता यादव ने मोदी के नाम पर भजन गाया। उन्होंने मोदी जन्मे आधी रात सुनो री सखियां भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मौजूद अन्य महिला नेताओं ने भी उनका साथ दिया। विधायक के इस भजन का वीडियो सामने आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी।

    मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक खबर भी चर्चा में है। एक ही विभाग के अलग अलग विंग में पदस्थ एक ही बैच के दो आईएएस अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों को लेकर मतभेद की बात सामने आई है। इनमें एक महिला अधिकारी हैं। जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी अपनी तय की गई टेंडर शर्तों के अनुसार काम कराने के पक्ष में हैं जबकि दूसरे विंग में पदस्थ अधिकारी ने एक टेंडर की शर्तों में बदलाव कर दिया। बताया गया है कि नए पदस्थ अधिकारी के सामने टेंडर की फाइल आने के बाद उन्होंने शर्तों में बदलाव किया।

    इसके बाद महिला अधिकारी ने पत्र लिखकर टेंडर की शर्तों में बदलाव नहीं करने की बात कही। अब दोनों अधिकारियों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यही बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार किसके पास है। मामला बढ़ने के बाद यह प्रकरण वल्लभ भवन तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस सामग्री में नहीं है।

    इस तरह देवास में सड़क के वादे को लेकर पुजारी का सवाल हो या डबरा में मंच पर नहीं जाने का घटनाक्रम और छतरपुर में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा विधायक का भजन इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अलग अलग वजहों से चर्चा पैदा की है।

  • सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज

    सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज


    सीहोर । सीहोर जिले में सब्सिडी की राशि जारी करने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी पर कार्रवाई की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के विपणन अधिकारी अनुराग को शिकायत सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला उस समय सामने आया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिले के दौरे पर निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वेयरहाउस संचालकों ने अधिकारी पर सब्सिडी की राशि जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया था।

    बताया गया है कि शिकायत में दो वेयरहाउस संचालकों से रिश्वत मांगने की बात कही गई थी। आरोप है कि शिवाय वेयरहाउस से सब्सिडी की रकम जारी करने के बदले एक लाख रुपए की मांग की गई जबकि श्रीकृष्णा वेयरहाउस संचालक से 60 हजार रुपए मांगे गए। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाई थी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    शिकायत सामने आने के बाद कृषि मंत्रालय के स्तर पर अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सब्सिडी जारी करने के लिए वास्तव में किसी तरह की रकम की मांग की गई थी या नहीं और इस पूरे मामले में अधिकारी की भूमिका क्या रही।

    मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सब्सिडी की राशि सरकारी प्रक्रिया के तहत पात्र लाभार्थियों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर तय होगी।

    सीहोर में निरीक्षण के दौरान सामने आई इस शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब जांच में शिकायत से जुड़े दस्तावेजों रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    इस मामले में अभी विभागीय जांच के परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसलिए रिश्वत मांगने के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारी अनुराग के निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। सीहोर में सामने आए इस मामले ने सरकारी सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर भी ध्यान खींचा है।

  • दिवाली-छठ की भीड़ से पहले रेलवे की तैयारी तेज भोपाल समेत MP के 30 स्टेशनों से चलेंगी कई पूजा स्पेशल ट्रेनें

    दिवाली-छठ की भीड़ से पहले रेलवे की तैयारी तेज भोपाल समेत MP के 30 स्टेशनों से चलेंगी कई पूजा स्पेशल ट्रेनें

    भोपाल। दिवाली और छठ पूजा के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने मध्यप्रदेश से कई स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी की है। त्योहारी सीजन में नियमित ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का संचालन किया जाएगा। इन स्पेशल ट्रेनों के जरिए मध्यप्रदेश के करीब 30 स्टेशन राजस्थान उत्तरप्रदेश बिहार झारखंड महाराष्ट्र तेलंगाना आंध्रप्रदेश तमिलनाडु हरियाणा और दिल्ली से जुड़ेंगे। इससे यात्रियों को त्योहारों के दौरान अपने घर जाने और वापस लौटने के लिए अतिरिक्त ट्रेन विकल्प मिल सकेंगे।

    भोपाल मंडल के यात्रियों के लिए भी इन सेवाओं में कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। सुल्तानपुर और वाराणसी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें बीना रानी कमलापति और इटारसी होकर चलेंगी। दोनों दिशाओं में इनके चार चार फेरे निर्धारित किए गए हैं। इससे भोपाल मंडल के इन तीन प्रमुख स्टेशनों से मुंबई जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सुल्तानपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन 21 अक्टूबर से 11 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार चलेगी जबकि वापसी सेवा 22 अक्टूबर से 12 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार रहेगी। वाराणसी से मुंबई जाने वाली ट्रेन 22 अक्टूबर से 12 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार और मुंबई से वाराणसी लौटने वाली ट्रेन 23 अक्टूबर से 13 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार चलेगी।

    इसके अलावा अजमेर से रांची के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी। ट्रेन के दोनों दिशाओं में नौ नौ फेरे होंगे। यह सेवा अक्टूबर से नवंबर के बीच चलेगी और मध्यप्रदेश में रुठियाई गुना सागर दमोह कटनी ब्यौहारी और सिंगरौली जैसे स्टेशनों के यात्रियों को सुविधा देगी। इसी तरह जोधपुर और चेन्नई बीच चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन के भी दोनों दिशाओं में नौ नौ फेरे होंगे। यह ट्रेन गुना बीना भोपाल और इटारसी जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी।

    पितृपक्ष के दौरान रानी कमलापति से गया के बीच भी विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन के दोनों दिशाओं में तीन तीन फेरे होंगे। रानी कमलापति से गया के लिए सेवा 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को रहेगी जबकि गया से वापसी 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को होगी। ट्रेन नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर कटनी मैहर सतना और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर ठहरेगी।

    त्योहारी भीड़ को देखते हुए पुणे से गोरखपुर और मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच भी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। पुणे गोरखपुर सेवा मध्यप्रदेश में खंडवा इटारसी भोपाल और बीना से होकर जाएगी। वहीं मुंबई सीएसएमटी गोरखपुर सेवा खंडवा इटारसी भोपाल और बीना से होकर चलेगी। मुंबई गोरखपुर स्पेशल के 43 फेरे निर्धारित हैं जबकि पुणे और मुंबई से गोरखपुर जाने वाली दोनों सेवाओं को मिलाकर कुल 87 अतिरिक्त फेरे होने की जानकारी दी गई है।

    विंध्य और मालवा क्षेत्र के यात्रियों के लिए भी अतिरिक्त सेवाएं रखी गई हैं। रानी कमलापति रीवा पूजा स्पेशल के दोनों दिशाओं में चार चार फेरे होंगे। वहीं रीवा से डॉ. अंबेडकर नगर के बीच चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन के दोनों दिशाओं में छह छह फेरे होंगे। यह ट्रेन सतना मैहर कटनी जबलपुर इटारसी रानी कमलापति संत हिरदाराम नगर सीहोर शुजालपुर मक्सी देवास और इंदौर जैसे स्टेशनों पर ठहरेगी। इससे रीवा और आसपास के यात्रियों को भोपाल जबलपुर और इंदौर मालवा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त कनेक्टिविटी मिलेगी।

    इन 10 स्पेशल ट्रेन सेवाओं के घोषित ठहरावों को मिलाकर दोहराव हटाने पर मध्यप्रदेश के 30 अलग अलग स्टेशन इस त्योहारी रेल नेटवर्क में शामिल होंगे। इनमें भोपाल रानी कमलापति बीना इटारसी नर्मदापुरम खंडवा गुना सागर दमोह विदिशा कटनी मैहर सतना जबलपुर इंदौर देवास और डॉ. अंबेडकर नगर सहित कई स्टेशन शामिल हैं। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को नियमित सेवाओं के साथ यात्रा के और विकल्प मिल सकेंगे।