Category: Madhya Pradesh

  • MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब

    MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) को लेकर अब हाईकोर्ट (High Court) में सवाल उठाए गए हैं. योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच (High Court Gwalior Bench) ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर इस जनहित याचिका में योजना से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने सरकार से योजना के लाभार्थियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से योजना के तहत खर्च होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के कल्याण के नाम पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे का इस्तेमाल रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करने में किया जा सकता था. उनका तर्क है कि अगर महिलाओं के हित में पैसा खर्च करना था तो इससे उद्योग-धंधे या रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उनका कहना है कि रोजगार के जरिए पैसा आर्थिक गतिविधियों में बना रह सकता है और महिलाओं को लंबे समय तक इसका फायदा मिल सकता है. अनिल मिश्रा ने सवाल उठाया कि सरकार इस पैसे से क्या फायदा हासिल कर रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए. उनके मुताबिक, सीधे राशि देने की बजाय अगर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र बन सकता है।

    सरकारी खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर उठे सवाल

    वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने योजना के खर्च को लेकर दावा किया कि हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सरकारी खजाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कर्ज लेकर पैसा बांटा जाएगा तो बेरोजगारी और बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल डेवलपमेंट, एजुकेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. वकील ने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश पर करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. हालांकि यह आंकड़ा और इससे जुड़े आर्थिक प्रभाव याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं. इन दावों पर राज्य सरकार का जवाब अभी सामने आना बाकी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से लाड़ली बहना योजना के लागू होने के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अनिल मिश्रा ने कहा कि योजना मार्च 2023 में लागू की गई थी और उस समय चुनाव का माहौल था. उन्होंने योजना को चुनाव के समय तोहफे बांटने जैसी स्थिति बताते हुए इस पर सवाल उठाया. यह याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील है. इस मामले में सरकार का पक्ष अभी आना बाकी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है. कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि योजना के कितने लाभार्थी हैं और उनके लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है. सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख पात्र आवेदक दर्ज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से इसी योजना के वित्तीय असर और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए हैं, ताकि सरकार इन सवालों पर अपना जवाब दे सके. अब सरकार को योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने हैं।


    रोजगार और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को मजबूत किया जाए

    लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बावजूद फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद होगी. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीधे भुगतान के बजाय रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने पर सरकारी धन खर्च किया जाना चाहिए. अब इस मामले में सरकार के जवाब पर नजर रहेगी. सरकार को यह बताना होगा कि योजना का उद्देश्य क्या है, इसके तहत कितने लाभार्थी हैं, कितनी राशि वितरित की जा रही है और योजना से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड क्या हैं. इसके बाद हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी।

  • विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क

    विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क


    भोपाल। भोपाल में गणपति विसर्जन का दौर शुरू होने वाला है लेकिन विसर्जन घाटों तक पहुंचने वाले कई प्रमुख रास्ते अभी भी बदहाल हैं। 22 सितंबर से गणपति विसर्जन शुरू होगा जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़े चल समारोह निकलेंगे। 26 सितंबर तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में बड़ी झांकियों ट्रकों और जुलूसों की आवाजाही के दौरान सड़कों पर मौजूद गड्ढे और उखड़ी गिट्टी परेशानी बढ़ा सकती है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों के मेंटेनेंस के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थायी पैचवर्क का काम प्रभावित हो रहा है।

    भोपाल में पीडब्ल्यूडी की करीब 174 किलोमीटर सड़कों का मेंटेनेंस परफॉर्मेंस गारंटी के तहत संबंधित ठेकेदारों को करना है। फिलहाल बड़े गड्ढों में गिट्टी और छोटे गड्ढों में कोल्ड मिक्स डालकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है। हालांकि बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण यह सामग्री ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रही है। स्थायी पैचवर्क के लिए हॉट मिक्स प्लांट से काम कराने की जरूरत है जिसके लिए करीब एक सप्ताह तक मौसम साफ रहना जरूरी बताया जा रहा है।

    पुराने शहर से कमलापति घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कई जगह सड़क की हालत खराब है। जिंसी से मोती मस्जिद के बीच करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में दर्जनों बड़े गड्ढे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रोफेसर कॉलोनी से गायत्री मंदिर तक करीब 6.50 किलोमीटर के रास्ते पर भी सड़क सुधार का काम बाकी है। भदभदा घाट की ओर जाने वाले लिंक रोड 3 मुख्य मार्ग 2 नेहरू नगर तुलसी नगर और भदभदा नीलबड़ सीहोर मार्ग पर कई जगह गिट्टी उखड़ चुकी है।

    शाहपुरा और कलियासोत क्षेत्र के विसर्जन रूट पर भी अरेरा हिल्स गुलमोहर इकोसिटी दानिशकुंज बावड़ियाकलां और कलियासोत से चेतक ब्रिज तक सड़क सुधार की जरूरत है। अयोध्या बायपास करोंद पलासी बंगरसिया और बावड़ियाकलां मार्ग पर फिलहाल गड्ढों में गिट्टी डाली जा रही है।

    इधर प्रेमपुरा घाट के विसर्जन मार्ग पर मेट्रो निर्माण की बैरिकेडिंग भी चुनौती बनी हुई है। सड़क के एक हिस्से में बैरिकेडिंग होने के कारण करीब 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता ही बचा है। गुरुवार शाम एसीपी ट्रैफिक अजय बाजपेयी ने डिपो से भदभदा चौराहे के बीच सड़क की चौड़ाई इंचीटेप से नापी। बड़ी झांकियों और ट्रकों की आवाजाही के लिए दोनों तरफ करीब 6-6 मीटर जगह की जरूरत बताई गई है। इसके बाद मेट्रो से बैरिकेड्स पीछे करने के निर्देश दिए गए।

    बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद बैरागढ़ मेन रोड स्थित विसर्जन घाट के पहुंच मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा हो गया। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विसर्जन से पहले प्रमुख रास्तों को सुरक्षित और सुगम बनाने की है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार मेंटेनेंस का काम शुरू है और प्रमुख सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं। हालांकि स्थायी सुधार के लिए मौसम साफ होना जरूरी है।

  • महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक

    महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक


    भोपाल। भोपाल की कई गलियों में इन दिनों घरों के बाहर लाल पानी से भरी प्लास्टिक की बोतलें टंगी नजर आ रही हैं। लोगों के बीच मान्यता है कि इन बोतलों को गेट के बाहर लटकाने से आवारा कुत्ते घर के आसपास नहीं आते और गंदगी से भी राहत मिलती है। कुछ लोग इसे पुराना देसी नुस्खा बताते हैं तो कुछ इसे बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इस दावे के पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है।

    नेहरू नगर में रहने वाली अमाया यादव बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही कई घरों के बाहर लाल पानी की बोतलें टंगी देखी हैं। इसी वजह से वह भी अपने घर के बाहर ऐसी बोतल लगाती हैं। उनके मुताबिक पानी में महावर सिंदूर या लाल रंग मिलाकर बोतल तैयार की जाती है और फिर इसे घर के गेट के बाहर टांग दिया जाता है। लोगों का मानना है कि इससे आवारा कुत्ते घर के आसपास आने से बचते हैं।

    भोपाल के कई इलाकों में यह तरीका देखने को मिल रहा है। अयोध्या बायपास से लेकर अवधपुरी नेहरू नगर रचना नगर गौतम नगर इंद्रपुरी बावड़ियाकलां कोलार कटारा और लालघाटी तक कई घरों के बाहर लाल पानी वाली बोतलें नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि कई लोग इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं जानते। उन्हें बस इतना पता है कि आसपास के दूसरे घरों में ऐसी बोतलें लगी हैं और इसलिए उन्होंने भी अपने घर के बाहर इसे लगा लिया।

    निशि पटेल के मुताबिक लोगों में यह धारणा है कि कुत्तों को लाल रंग इंसानों की तरह साफ दिखाई नहीं देता। उनका मानना है कि हवा में हिलती हुई बोतल और उसमें दिखाई देने वाला प्रतिबिंब कुत्तों को असहज करता है और वे घर से दूर चले जाते हैं। कुछ बुजुर्ग इस परंपरा को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव से भी जोड़ते रहे हैं।

    दीपांशी पटेल भी बताती हैं कि कई लोगों को इस नुस्खे की असली वजह मालूम नहीं है। उनका कहना है कि एक घर के बाहर बोतल देखकर दूसरे लोग भी इसे अपनाने लगते हैं और धीरे धीरे यह पूरे मोहल्ले में आम हो जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि लाल पानी और रोशनी के प्रतिबिंब के कारण कुत्ते डर सकते हैं।

    लेकिन वेटरनरी स्पेशलिस्ट डॉ. ब्रजेश गुप्ता इस दावे को वैज्ञानिक आधार वाला नहीं मानते। उनका कहना है कि कुत्ते इंसानों की तरह सभी रंगों को अलग अलग तरीके से नहीं देख पाते। उनके अनुसार कुत्तों की रंग पहचान सीमित होती है और वे नीले तथा पीले रंग को अपेक्षाकृत बेहतर देख सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लाल रंग की बोतल देखकर कुत्तों के भागने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक तर्क नहीं है।

    इस दावे की हकीकत जानने के लिए भोपाल में रियलिटी चेक भी किया गया। रिपोर्टर ने कुछ इलाकों में कुत्तों के सामने लाल पानी से भरी बोतल रखकर देखा। इस दौरान कुत्तों पर इसका कोई खास असर नजर नहीं आया। न तो वे बोतल देखकर वहां से भागे और न ही उन्होंने पानी रखे जाने पर किसी तरह की आक्रामक प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि लाल पानी की बोतल को कुत्तों को दूर रखने का पक्का वैज्ञानिक उपाय मानने से पहले उसके दावे और वास्तविक असर में फर्क समझना जरूरी है।

  • बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग

    बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की बीमारी और मौतों का मामला गंभीर बना हुआ है। बीते तीन महीने में 32 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़े से ज्यादा हो सकती है। प्रभावित गांवों में बीमारी का डर इस कदर है कि छोटे बच्चों की तबीयत ठीक होने के बाद भी परिवार चिंतित हैं। कई जगह अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों को दोबारा तेज बुखार आने की शिकायत सामने आई है। जांच में मीजल्स और मलेरिया के पॉजिटिव केस भी मिले हैं।

    बालाघाट के जंगलों में बसे अड़ोरी कुंडेकसा बोंदारी और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार के लिए अस्थायी कैंप लगाए हैं। कुंडेकसा के स्कूल में बने स्वास्थ्य केंद्र में रोज बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के शरीर पर दाने और फफोले दिखाई दिए। रजिस्टर के मुताबिक एक दिन में 26 और अगले दिन सुबह तक 15 बच्चों के नाम दर्ज किए गए। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अलग-अलग केंद्रों पर रोज करीब 60 प्रभावित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग भी कर रही हैं। बिरसा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के अनुसार रोज 100 से 150 घरों में पहुंचकर बच्चों की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में करीब 18 से 20 गांवों को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है। कुंडेकसा के अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड और चार गद्दों की व्यवस्था है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बच्चों का इलाज जमीन पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। कुछ बच्चों को खिड़की से सलाइन की बोतलें लटकाकर उपचार दिया जा रहा है।

    बीमारी के साथ इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट भी सामने आया है। कई बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र आधार और समग्र आईडी तक नहीं बनी थी। अब प्रशासन ने स्वास्थ्य कैंप के साथ दस्तावेज बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है। ग्रामीण महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों के टीकाकरण में कमी की शिकायत की है। बोंदारी गांव में आज भी कुछ परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक घरों तक पर्याप्त साफ पानी नहीं पहुंचता।

    मृत बच्चों के परिजनों ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। एक पिता ने बताया कि उनके पांच साल के बेटे की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधार नहीं होने पर गोंदिया के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। एक अन्य बच्चे को 10 सितंबर को अस्पताल से स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज किया गया लेकिन घर लौटने के बाद उसे फिर तेज बुखार आने लगा।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और करीब साढ़े चार हजार लोगों का उपचार किया गया है। 56 स्वास्थ्य टीमें करीब 200 कर्मचारियों और 40 डॉक्टरों के साथ काम कर रही हैं। 490 बच्चों को उपचार के बाद घर भेजा जा चुका है जबकि 57 बच्चे अभी भर्ती बताए गए हैं।

    जांच में 101 मीजल्स सैंपल में 32 पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए भेजे गए 64 सैंपल में 50 पॉजिटिव पाए गए। डेंगू के 28 सैंपल में दो और चिकनगुनिया का एक सैंपल पॉजिटिव मिला। पानी के 14 सैंपल में पांच के परिणाम पॉजिटिव आए और अधिकारियों के मुताबिक नाले के पानी में एडिनोवायरस मिला है। प्रशासन का कहना है कि मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। मलेरिया उल्टी-दस्त और कुपोषण जैसे कई कारक भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

    फिलहाल प्रभावित मुख्य क्षेत्र में मीजल्स टीकाकरण रोककर आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रभावित क्षेत्र में भी टीकाकरण शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों की शिकायतें यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि बीमारी के साथ स्वास्थ्य पोषण पानी और टीकाकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात को कितना प्रभावित किया है।

  • MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान

    MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार बड़े राजनीतिक बयान से ज्यादा छोटे घटनाक्रम चर्चा में आ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सिंगरौली में भाजपा विधायक से नारेबाजी के दौरान हुई चूक हो या इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के मैदान का बढ़ा किराया या फिर गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने किसान की खाद को लेकर नाराजगी इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में अलग तरह की चर्चा पैदा कर दी है।

    सिंगरौली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रहे थे। उत्साह में उन्होंने नरेंद्र मोदी अमर रहे का नारा लगा दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद किसी ने नरेंद्र मोदी जिंदाबाद का नारा लगाया तो विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भी तुरंत जिंदाबाद के नारे लगाए और अपनी चूक पर मुस्कुराते नजर आए। कार्यक्रम में हुआ यह छोटा सा वाकया बाद में चर्चा का विषय बन गया।

    दूसरी ओर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मैदान के किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से पहले 10 लाख रुपए किराया लिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उस समय कहा था कि कार्यक्रम के लिए 10 लाख क्या 10 करोड़ रुपए भी मांगे जाते तो कांग्रेस उसे जुटाकर देती। अब आईडीए की ओर से मैदान के किराए के तौर पर चार लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से की जा रही वसूली और दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने बयान का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे विवाद में मैदान का किराया राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।

    गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। एक किसान ने सिंधिया से सीधे कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। किसान की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने मौके पर मौजूद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों के नाम और मोबाइल नंबर नोट करने को कहा। कलेक्टर ने जब ठीक है कहा तो सिंधिया ने दोबारा उन्हें निर्देश दिया कि सिर्फ ठीक है कहने के बजाय नाम और नंबर लिखे जाएं। उन्होंने पेन और पैड निकालकर जानकारी नोट करने को कहा। इसके बाद किसानों की जानकारी दर्ज की गई।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी एक अधिकारी की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी की ड्यूटी राजधानी के नजदीकी जिले में लगाई गई थी लेकिन वे अभियान से जुड़े काम के बजाय मंत्रालय में बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    इस तरह एक ही दिन में सिंगरौली से इंदौर और गुना तक सामने आए अलग-अलग घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कहीं नारेबाजी में हुई चूक सुर्खियां बनी तो कहीं कार्यक्रम के खर्च और किसानों की खाद समस्या ने राजनीतिक बहस को हवा दी।

  • शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई

    शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई


    भोपाल। मध्य प्रदेश में देशी शराब की थोक सप्लाई के टेंडरों में डिस्टिलरीज के बीच कथित मिलीभगत और टेंडर फिक्सिंग से जुड़े मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI की जांच अब आगे जारी रह सकेगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड बेवरेजेस लिमिटेड समेत अन्य डिस्टिलरीज की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही CCI की जांच पर लगी अंतरिम रोक भी हटा दी गई है। हालांकि कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि कंपनियों को टेंडर में मिलीभगत का दोषी घोषित कर दिया गया है। फिलहाल अदालत ने केवल CCI के जांच करने के अधिकार को बरकरार रखा है।

    मामला वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच हुए देशी शराब के सरकारी टेंडरों से जुड़ा है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट में अलग-अलग डिस्टिलरीज की बोलियों के बीच बेहद कम अंतर होने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद CCI ने वर्ष 2020 में मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए और संबंधित डिस्टिलरीज के परिसरों की तलाशी भी ली गई।

    जांच में एमपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन नाम के WhatsApp ग्रुप से जुड़े रिकॉर्ड ईमेल और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई। महानिदेशक स्तर पर की गई जांच के बाद 1200 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट CCI को सौंपी गई। इसके बाद एसोसिएटेड अल्कोहल्स ग्रेट गैलियन ओएसिस डिस्टिलरीज समेत कुछ कंपनियों ने CCI की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि शराब का पूरा कारोबार राज्य सरकार और आबकारी विभाग के नियंत्रण में है। लाइसेंस उत्पादन आपूर्ति कीमत और कोटा जैसी व्यवस्थाएं सरकार निर्धारित करती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा कानून के तहत CCI को इस मामले की जांच करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। आबकारी विभाग की ओर से भी इसी तरह का पक्ष रखा गया और बताया गया कि डिस्टिलरीज का मुनाफा भी निर्धारित सीमा में रहता है।

    हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आबकारी कानून के तहत शराब कारोबार पर सरकारी नियंत्रण होने से CCI के अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। आबकारी विभाग की भूमिका नियामकीय व्यवस्था तक है जबकि कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की जांच का सवाल अलग है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि CAG की रिपोर्ट को अंतिम सबूत नहीं माना गया है। रिपोर्ट केवल जांच शुरू करने का आधार बनी और इसके बाद CCI के महानिदेशक ने स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि कंपनियों ने CCI के शुरुआती आदेश को उसी समय चुनौती नहीं दी थी और जांच प्रक्रिया में सहयोग करती रहीं। महानिदेशक की रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया गया। अब CCI जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजी व डिजिटल सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलेगा।

    मामले में अंतिम निर्णय आने के बाद यदि कोई पक्ष CCI के आदेश से असहमत होता है तो उसके पास NCLAT में अपील करने का कानूनी विकल्प रहेगा। इस तरह हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश के देशी शराब टेंडरों में कथित मिलीभगत से जुड़े मामले की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

  • 2 घंटे में 118KM भागे लुटेरे लेकिन मुरैना में ट्रक बना रोड़ा: हादसे के बाद कार से निकले 41 लाख और हथियार

    2 घंटे में 118KM भागे लुटेरे लेकिन मुरैना में ट्रक बना रोड़ा: हादसे के बाद कार से निकले 41 लाख और हथियार


    भोपाल। फिरोजाबाद में पशु व्यापारियों से हुई 41 लाख रुपए की लूट का राज एक सड़क हादसे के बाद खुल गया। वारदात को अंजाम देने के बाद चार बदमाश तेज रफ्तार कार से मध्य प्रदेश की ओर भाग रहे थे लेकिन मुरैना में उनकी कार ट्रक से टकरा गई। हादसे में चारों बदमाश घायल होकर कार में फंस गए। इसी दौरान मौके पर पहुंचे एक भाजपा नेता को बदमाशों ने कार से बैग निकालने के लिए कहा। बैग को उठाने पर उसका वजन और सख्ती देखकर उन्हें शक हुआ। पुलिस ने तलाशी ली तो बैग से 41 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई। इसके साथ ही कार से पिस्टल चाकू और काले रंग के मास्क भी मिले।

    पुलिस के मुताबिक इस पूरी वारदात की शुरुआत करीब 10 दिन पहले हुई थी। भोपाल का रहने वाला राज फिरोजाबाद में अपने रिश्तेदारों के यहां आया था। इसी दौरान उसने पशु व्यापारियों की गतिविधियों पर नजर रखी। उसे पता चला कि व्यापारी सुबह की हाट में जाने के लिए रात करीब दो बजे बड़ी रकम लेकर घर से निकलते हैं। राज ने यह जानकारी भोपाल के चार बदमाशों रिहान खालिद अरसव और आबिद को दी। इसके बाद चारों को फिरोजाबाद बुलाया गया। पुलिस के अनुसार इनमें अरसव और आबिद निगरानीशुदा बदमाश हैं।

    14 सितंबर की रात पशु व्यापारी जान मोहम्मद रहीश और अनीश कार से बाजार जाने के लिए निकले थे। घर से करीब 20 मीटर आगे पहुंचने के बाद एक व्यापारी को याद आया कि उसका मोबाइल घर पर छूट गया है। कार वापस लौटाई गई और वह मोबाइल लेने घर चला गया। इसी दौरान दो अन्य व्यापारी कुछ दूरी पर बाथरूम के लिए चले गए। बदमाशों ने इसी मौके का फायदा उठाया और कार में रखे नकदी से भरे दो बैग लेकर फरार हो गए। दोनों बैग में कुल 41 लाख रुपए थे।

    लूट के बाद आरोपी कार से टूंडला पार करते हुए मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ गए। पुलिस की घेराबंदी से बचते हुए उन्होंने करीब 118 किलोमीटर का सफर लगभग दो घंटे में पूरा किया। 15 सितंबर की सुबह करीब चार बजे मुरैना के कोतवाली थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर पर ओवरटेक करने के दौरान उनकी कार आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में चारों घायल हो गए और कार में फंस गए।

    इसी दौरान वहां से गुजर रही पुलिस टीम ने घायलों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। कुछ देर बाद भाजपा नेता अर्जुन तोमर भी मौके पर पहुंचे। घायलों ने उनसे कार से बैग निकालने को कहा और बताया कि उनमें कपड़े हैं। एक बैग उठाने पर उन्हें वह असामान्य रूप से सख्त और भारी लगा। शक होने पर उन्होंने दोनों बैग पुलिस को सौंप दिए। तलाशी में नोटों की गड्डियां बरामद हुईं।

    इसके बाद पुलिस ने घायलों से पूछताछ की तो फिरोजाबाद की लूट की पूरी कड़ी सामने आ गई। आरोपियों के मोबाइल और कॉल डिटेल की जांच शुरू की गई। पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों के कुछ रिश्तेदार हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुरैना पहुंचने वाले थे। फिरोजाबाद पुलिस की टीम भी मुरैना पहुंची और आरोपियों से पूछताछ की।

    जांच में आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आ रहे हैं। पुलिस खालिद के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों के साथ आबिद के ATM क्लोनिंग से जुड़े मामलों की भी पड़ताल कर रही है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 41 लाख की इस लूट के पीछे सिर्फ चार बदमाश थे या कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से शुरू हुई वारदात की कड़ियां भोपाल और मुरैना तक पहुंचने के बाद पुलिस दोनों राज्यों में आरोपियों के संपर्क और गतिविधियों की जांच कर रही है।

  • MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर

    MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन इसकी सक्रियता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और आंधी का दौर बना रह सकता है। इसके बाद 22 सितंबर से गतिविधियां सीमित होने के संकेत हैं। इस दौरान कम बारिश वाले जिलों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    मानसून की विदाई की शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के अंतिम सप्ताह तक बनी रह सकती है। मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान में भी 21 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी की गतिविधियों का संकेत है, जबकि फिलहाल भारी बारिश की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं है।

    18 से 21 सितंबर तक बन सकता है बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच वर्षा गतिविधियां बनी रह सकती हैं। 22 सितंबर से इसमें कमी आने लगेगी।

    मानसून की विदाई के पहले होने वाली यह गतिविधि उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां इस सीजन में बारिश सामान्य से कम हुई है। प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इसके उलट इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी ही बारिश हुई है, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    भोपाल, सीहोर और देवास में तेज बारिश

    गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा।

    ग्वालियर में दिनभर उमस और गर्मी के बाद शाम को झमाझम बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया।

    अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र

    शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। मानसून ट्रफ भी इस निम्न दबाव क्षेत्र से होते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

    इन मौसमी प्रणालियों से मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसी वजह से 18 और 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है।

    19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।

    इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। यह सिस्टम मध्य प्रदेश के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकता है। IMD ने भी 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई है।

    अब तक 33.1 इंच बारिश, सामान्य से 2.5 इंच कम

    मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक 842.1 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 35.6 इंच (905.3 मिमी) से करीब 2.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 7% कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% है।

    32 जिलों में 4 से 50% तक कम बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 1% तक बारिश कम हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार आया है।

    पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    ऐसे में सितंबर के अंतिम दौर में होने वाली बारिश इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि, अभी उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में 21 सितंबर तक भारी बारिश का व्यापक अलर्ट नहीं है; बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां अधिक प्रमुख रहने की संभावना है।

  • रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए

    रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में निर्माणाधीन मकान को चोरों ने निशाना बनाते हुए मोटर केबल और भारी मात्रा में लोहे का सरिया चोरी कर लिया। घटना लोधी मोहल्ला जगतपुर की है जहां चोर मुख्य दरवाजे के पास लगी ईंटों को तोड़कर मकान के अंदर दाखिल हुए और वहां रखा निर्माण सामग्री से जुड़ा सामान लेकर फरार हो गए। चोरी की घटना 14 से 16 सितंबर के बीच की बताई जा रही है। मकान मालिक ने मामले की शिकायत 17 सितंबर को कोलारस थाने में दर्ज कराई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम राछी निवासी इंदरसेन धाकड़ कोलारस के लोधी मोहल्ला जगतपुर में अपना मकान बनवा रहे हैं। मकान का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने निर्माणाधीन भवन को निशाना बनाया। बताया गया है कि चोर मकान के मुख्य दरवाजे के पास लगी कुछ ईंटों को तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने वहां रखा कीमती सामान समेट लिया और बिना किसी को भनक लगे मौके से निकल गए।

    मकान मालिक के मुताबिक चोर बोरवेल में लगी मोटर के साथ एक टिल्लू मोटर भी निकालकर ले गए। इसके अलावा करीब 300 फीट लंबी केबल भी चोरी कर ली गई। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाला लगभग दो क्विंटल लोहे का सरिया भी चोरों ने नहीं छोड़ा। चोरी हुए सामान का पता उस समय चला जब मकान मालिक निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे और सामान गायब मिला।

    मकान में सामान अस्त व्यस्त मिलने और प्रवेश के स्थान पर ईंटें टूटी देखकर उन्हें चोरी की आशंका हुई। इसके बाद इंदरसेन धाकड़ ने आसपास रहने वाले लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की। उन्होंने स्थानीय लोगों से यह पता लगाने का प्रयास किया कि 14 से 16 सितंबर के बीच किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन को इलाके में देखा गया था या नहीं। हालांकि आसपास के लोगों से चोरों के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

    इसके बाद मकान मालिक ने मामले की सूचना पुलिस को दी और 17 सितंबर को कोलारस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने और चोरी गया सामान बरामद कराने की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अब आसपास के क्षेत्र में पूछताछ करने के साथ ही चोरी की घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटा रही है। निर्माणाधीन मकान में आमतौर पर सुरक्षा व्यवस्था कम होने के कारण वहां रखा सरिया केबल मोटर और अन्य निर्माण सामग्री चोरों के निशाने पर रहती है। इस घटना में भी चोरों ने ऐसी ही सामग्री को चुना जिसे आसानी से निकालकर ले जाया जा सकता था और जिसकी कीमत भी अच्छी होती है।

    मकान मालिक की शिकायत के बाद अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चोरी में कितने लोग शामिल थे और चोरी का सामान किस वाहन से ले जाया गया। आसपास के इलाकों में पूछताछ और उपलब्ध सुरागों के आधार पर पुलिस चोरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम

    हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार हादसों की वजह बन रही है। बुधवार रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां सड़क पर बैठे बैल से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार 38 वर्षीय विकास भार्गव गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में बैल की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।

    हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।

    यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

    प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।