Category: Madhya Pradesh

  • मानसून ने इंदौर को किया तरबतर, सीजन में 11 इंच से ज्यादा बारिश; अगले 3-4 दिन भी राहत नहीं

    मानसून ने इंदौर को किया तरबतर, सीजन में 11 इंच से ज्यादा बारिश; अगले 3-4 दिन भी राहत नहीं


    इंदौर । इंदौर में मानसून लगातार मेहरबान बना हुआ है। जुलाई की शुरुआत से ही शहर में बारिश का दौर जारी है और पिछले तीन दिनों में छह इंच से अधिक पानी बरस चुका है। शुक्रवार शाम हुई जोरदार बारिश के बाद रातभर रुक-रुककर बारिश होती रही, जबकि शनिवार सुबह भी आसमान में बादल छाए रहे और कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शनिवार को भी तेज बारिश की संभावना जताई है। लगातार हो रही बारिश के चलते इस सीजन में अब तक 11 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है।

    शुक्रवार शाम करीब दो घंटे तक हुई तेज बारिश के दौरान लगभग ढाई इंच पानी बरसा। इसके बाद देर रात फिर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। लगातार बारिश के बावजूद दिन का अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। बारिश के दौरान मौसम सुहावना हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद उमस का असर भी महसूस किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक अजय कुमार शुक्ला के अनुसार फिलहाल इंदौर पर दोहरे मानसूनी सिस्टम का प्रभाव है। अरब सागर में सक्रिय मौसम प्रणाली का असर मालवा क्षेत्र तक पहुंच रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा और भोपाल संभाग में अच्छी बारिश करा रहा है। दोनों सिस्टम के सक्रिय रहने से पूरे प्रदेश में व्यापक वर्षा हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह स्थिति अगले तीन से चार दिनों तक बनी रह सकती है और जुलाई का पहला सप्ताह अच्छी बारिश के साथ गुजरने की संभावना है।

    लगातार बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण के कारण डायरिया, टाइफाइड, पीलिया, पैचिश, हैजा, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से केवल स्वच्छ और उबला हुआ पानी पीने, ताजा भोजन करने और भोजन से पहले तथा शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की अपील की है। दस्त और उल्टी की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस घोल और जिंक का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है। साथ ही खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और सड़े-गले फलों से बचने की हिदायत दी गई है।

    मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। कूलर, फ्रिज की ट्रे, फुलदान, पुराने टायर और अन्य बर्तनों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का उपयोग करने और बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जुलाई को 63.6 मिमी, 2 जुलाई को 41.9 मिमी और 3 जुलाई को 64.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस तरह जुलाई के शुरुआती तीन दिनों में ही 169 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन में अब तक करीब 283.9 मिमी यानी 11 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों में भी इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है।

  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर  इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी

    हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी


    भोपाल  राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र स्थित पटेल नगर में शुक्रवार देर रात एक हॉस्टल पर हुए पथराव से इलाके में हड़कंप मच गया। करीब आठ युवकों ने अचानक हॉस्टल पर पत्थर बरसाकर दहशत फैला दी। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की हैभोपाल 

    हॉस्टल संचालक दुर्गेश तिवारी और शिवम सिंह ने आरोप लगाया है कि यह हमला कारोबारी रंजिश के चलते कराया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र में हॉस्टल संचालन को लेकर प्रतिस्पर्धा है और दूसरे हॉस्टल संचालक पुष्पराज यादव उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने साथियों के जरिए हॉस्टल पर हमला करवाया। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार रात कुछ युवक अचानक हॉस्टल के बाहर पहुंचे और बिना किसी विवाद के पथराव शुरू कर दिया। कुछ मिनट तक लगातार पत्थर फेंके गए जिससे हॉस्टल परिसर में अफरा तफरी मच गई। घटना में भवन की खिड़कियों और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की सबसे अहम कड़ी सीसीटीवी फुटेज बनी है जिसमें कथित आरोपी पत्थर फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब इन फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान करने और उनकी भूमिका तय करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

    पिपलानी थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फरियादियों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने घटना के बाद कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय के माध्यम से जेल भेजा गया है। वहीं पुलिस का कहना है कि यदि जांच में पथराव और साजिश के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

  • दोस्ती के नाम पर बुलाया, फिर बीच रास्ते लूट ली कार, भोपाल में युवक के साथ वारदात से सनसनी

    दोस्ती के नाम पर बुलाया, फिर बीच रास्ते लूट ली कार, भोपाल में युवक के साथ वारदात से सनसनी


    भोपाल  राजधानी भोपाल में दोस्ती के भरोसे बुलाए गए एक युवक के साथ लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। कोहेफिजा थाना क्षेत्र में परिचित युवकों ने पहले युवक को देर रात ढाबे पर बुलाया और फिर लौटते समय सुनसान इलाके में उसके साथ मारपीट कर कार लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और दो संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार पंचवटी कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय सौरव सीतलानी को उसके परिचित आदित्य ने गुरुवार देर रात परवलिया स्थित एक ढाबे पर भोजन करने के लिए बुलाया था। वहां पहले से आदित्य के साथ बाबर उर्फ मंडी मोइन और बुशरा मौजूद थे। सभी ने साथ बैठकर खाना खाया और इसके बाद तड़के करीब तीन बजे सौरव अपनी टाटा टियागो कार से सभी को लेकर भोपाल की ओर रवाना हुआ।

    जब कार मनुआभान टेकरी के पास पहुंची तो आदित्य ने अपने एक दोस्त से मिलने की बात कहकर वाहन रुकवाया। जैसे ही कार रुकी माहौल अचानक बदल गया। आरोप है कि चारों युवकों ने सौरव के साथ गाली गलौज शुरू कर दी और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। इसी दौरान बाबर उर्फ मंडी ने सौरव को थप्पड़ मारकर कार की चाबी छीन ली और उसे धक्का देकर वाहन से नीचे उतार दिया। इसके बाद सभी आरोपी कार लेकर मौके से फरार हो गए और पीड़ित सड़क पर ही छूट गया।

    घटना के बाद सौरव ने तुरंत पुलिस से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। शिकायत के आधार पर कोहेफिजा थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ लूट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुख्य आरोपी बाबर उर्फ मंडी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

    पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच में दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटी गई कार बरामद करने का प्रयास किया जाएगा। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि वारदात के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा किया जा सके।

  • एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा

    एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में बढ़ती अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं या सोशल मीडिया के जरिए संगठन और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं। कांग्रेस का मानना है कि ऐसे नेताओं की बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है और राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का मौका मिलता है। अब ऐसे मामलों में चेतावनी से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करें जो सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर पार्टी की आधिकारिक लाइन के विपरीत बयान देते हैं। इस सूची के आधार पर पहले संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि चेतावनी के बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं आता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई बैठकों में इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि कुछ नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं जिनसे संगठन की छवि प्रभावित होती है और पार्टी को अनावश्यक विवादों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से अब संगठन स्तर पर सख्ती करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनुशासन कायम रखा जा सके।

    कांग्रेस ने केवल सार्वजनिक बयानबाजी ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया गतिविधियों को भी गंभीरता से लेने का फैसला किया है। जिला अध्यक्षों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया मंचों पर पार्टी की नीतियों नेतृत्व या फैसलों के खिलाफ टिप्पणी करता है तो उसे भी अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी ने जिला इकाइयों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं हो वहां पूरे साक्ष्य और संबंधित दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए। प्रदेश स्तर पर जांच के बाद आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। संगठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के भीतर रहकर सार्वजनिक रूप से संगठन की छवि को नुकसान न पहुंचाए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में कांग्रेस के कई नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर अपने ही नेतृत्व के खिलाफ दिए गए बयानों से पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों ने कई बार संगठन के भीतर मतभेदों को भी सार्वजनिक किया। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

    कांग्रेस का कहना है कि संगठन में विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है लेकिन इसके लिए पार्टी के आंतरिक मंच उपलब्ध हैं। सार्वजनिक रूप से पार्टी विरोधी बयान देना या सोशल मीडिया के जरिए संगठन की आलोचना करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा और सभी जिला इकाइयों से प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अब संगठनात्मक अनुशासन को लेकर पहले से कहीं अधिक सख्त नजर आने वाली है।

  • वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा

    वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के सबसे चर्चित सोशल मीडिया चेहरों में शामिल शहडोल के निलंबित हेड कॉन्स्टेबल विवेकानंद तिवारी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। करोड़ों फॉलोअर्स और सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करने वाले तिवारी ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि उनका इस्तीफा अभी विभाग ने स्वीकार नहीं किया है और पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है। इस घटनाक्रम ने सरकारी सेवा और सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    विवेकानंद तिवारी फेसबुक यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मिलाकर करीब एक करोड़ अठासी लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। पुलिस विभाग ने तीन जून को उन्हें निलंबित किया था। आरोप था कि वे कई बार बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे और इसी दौरान वर्दी में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते रहे। इसके करीब दो सप्ताह बाद उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।

    विभागीय जांच में सबसे बड़ा सवाल उनकी सोशल मीडिया से होने वाली आय को लेकर उठा है। विभिन्न ऑनलाइन एनालिटिक्स वेबसाइटों के अनुमानों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये मासिक और करोड़ों रुपये सालाना की संभावित कमाई हो सकती है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विवेकानंद तिवारी ने इन दावों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। उनका कहना है कि वास्तविक आय इससे काफी कम है और सभी सोशल मीडिया अकाउंट उनकी पत्नी के नाम पर संचालित होते हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों को अपने और पत्नी के बैंक खातों का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की बात कही है।

    पुलिस विभाग का दूसरा आरोप यह है कि तिवारी कई बार निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और बिना अनुमति अनुपस्थित रहे। विभाग के अनुसार जिन दिनों उनकी गैरहाजिरी दर्ज हुई उन्हीं दिनों उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नए वीडियो अपलोड किए गए। वहीं तिवारी का कहना है कि वे मेडिकल अवकाश पर थे और इसकी जानकारी विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पहले ही साझा कर दी गई थी। उनके अनुसार अवकाश की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण गलतफहमी पैदा हुई और उन्हें अनुपस्थित मान लिया गया।

    विवाद का एक बड़ा कारण वर्दी में वीडियो बनाना भी बना। पुलिस मुख्यालय पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी कर चुका है कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में ऐसे वीडियो या रील नहीं बनाएगा जिससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो। विभाग का आरोप है कि विवेकानंद तिवारी निजी वीडियोग्राफरों और कर्मचारियों की मदद से व्यावसायिक उद्देश्य से कंटेंट तैयार करते थे। हालांकि तिवारी का कहना है कि उन्होंने कभी ड्यूटी के दौरान वीडियो नहीं बनाए और अधिकतर वीडियो पहले से रिकॉर्ड किए गए थे जिन्हें उनकी पत्नी बाद में अपलोड करती थीं।

    मामले के दौरान पुलिस विभाग ने उन्हें दो विकल्प भी दिए थे। पहला यह कि वे पुलिस के सोशल मीडिया सेल में रहकर जनजागरूकता से जुड़े आधिकारिक वीडियो बनाएं। दूसरा यह कि वे पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया शाखा में सेवाएं दें। लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।

    विवेकानंद तिवारी का कहना है कि निलंबन के बाद लगातार मानसिक दबाव और अपमान की भावना के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। दूसरी ओर विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि सोशल मीडिया से संभावित अधिक आय भी इस फैसले का एक कारण हो सकती है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष उसी के बाद सामने आएगा।

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।

  • मध्य प्रदेश पुलिस में देर रात बड़ा बदलाव, भोपाल ग्रामीण से सागर-नर्मदापुरम तक नए आईजी की तैनाती

    मध्य प्रदेश पुलिस में देर रात बड़ा बदलाव, भोपाल ग्रामीण से सागर-नर्मदापुरम तक नए आईजी की तैनाती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए 9 भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। गृह विभाग की ओर से देर रात जारी आदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस प्रशासनिक बदलाव के तहत शाजापुर और शहडोल जैसे अहम जिलों को नए पुलिस अधीक्षक मिले हैं जबकि भोपाल ग्रामीण सागर और नर्मदापुरम रेंज में भी नए पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी की तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।

    तबादला सूची के अनुसार संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है जबकि प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को ऐसे समय नई जिम्मेदारी मिली है जब प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार लगातार सक्रिय नजर आ रही है।

    प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब तक पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन के पद पर कार्यरत रुचि वर्धन मिश्रा को भोपाल ग्रामीण जोन का नया आईजी बनाया गया है। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें राजधानी से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं मिथिलेश शुक्ला को सागर रेंज का आईजी बनाया गया है। वे अब तक नर्मदापुरम जोन के आईजी थे और सागर रेंज का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। हिमानी खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के रूप में संचालित हो रहा था जिसे अब नियमित नियुक्ति मिल गई है।

    इसी क्रम में चंद्रशेखर सोलंकी को नर्मदापुरम जोन का नया आईजी नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले इंदौर एसएएफ रेंज में पदस्थ थे। वहीं हरि नारायणचारी मिश्रा को आईजी प्रशासन पुलिस मुख्यालय की जिम्मेदारी दी गई है। वे अभी तक आईजी एससीआरबी के पद पर कार्यरत थे।

    तबादला सूची में अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां मिली हैं। सिमाला प्रसाद को डीआईजी खरगोन रेंज बनाया गया है। यशपाल सिंह राजपूत को शाजापुर एसपी के पद से हटाकर पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर भेजा गया है जबकि रामजी श्रीवास्तव को शहडोल एसपी से एआईजी पुलिस अकादमी भौंरी पदस्थ किया गया है।

    सरकार ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ स्पेशल डीजी दूरसंचार पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं आईजी इंदौर ग्रामीण जोन अनुराग को आईजी एसएएफ इंदौर रेंज और आईजी आरएपीटीसी इंदौर की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विभागीय तबादलों के लिए समय सीमा तय की थी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद देर रात गृह विभाग ने यह आदेश जारी किए। माना जा रहा है कि आगामी प्रशासनिक चुनौतियों और कानून व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए यह व्यापक फेरबदल किया गया है। नई नियुक्तियों से प्रदेश के विभिन्न जिलों और रेंज में पुलिस कार्यप्रणाली को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान

    राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली जाएगी। उनका कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना होगा।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और वे स्वयं फेसबुक एक्स सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के लिए होगा ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान दिया था इसलिए यह जानना उनका अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।

    उन्होंने घोषणा की कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक कराया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े लोग यदि चंदे की पारदर्शिता चाहते हैं तो वे इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा के दौरान वे अपनी दान रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि दानदाताओं को अपने योगदान का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा विकसित गेस्ट हाउस और होटल परियोजना की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट को जनता से चंदा मिलता है तो उसकी आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना दान वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे जिस पर लिखा होगा कि चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।