Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर MY हॉस्पिटल में सनसनी: तीन माह के नवजात का शव मिलने से मचा हंगामा

    इंदौर MY हॉस्पिटल में सनसनी: तीन माह के नवजात का शव मिलने से मचा हंगामा


    इंदौर। इंदौर स्थित MY Hospital Indore में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब इमरजेंसी वार्ड के सामने बने बाथरूम में एक नवजात का शव बरामद हुआ। यह मामला सामने आते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

    जानकारी के अनुसार, सुबह कुछ लोग बाथरूम की ओर गए थे, तभी उन्होंने वहां एक नवजात का शव पड़ा देखा। तुरंत इसकी सूचना अस्पताल के सुरक्षा गार्डों को दी गई, जिसके बाद स्टाफ और सफाई कर्मचारियों की मदद से शव को बाहर निकाला गया और अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नवजात की उम्र लगभग तीन महीने के आसपास बताई जा रही है। शव को पहले अस्पताल के CHMO कक्ष में सुरक्षित रखा गया, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेज दिया है।

    घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि परिसर में सुरक्षा गार्ड तैनात होने के साथ-साथ कई स्थानों पर CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं। इसके बावजूद शव का बाथरूम तक पहुंचना कई संदेह पैदा कर रहा है। पुलिस अब पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और CCTV फुटेज खंगालने में जुटी है।

    पुलिस का कहना है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नवजात का शव अस्पताल परिसर तक कैसे पहुंचा और इसे वहां किसने और क्यों छोड़ा। अस्पताल प्रबंधन भी मामले की आंतरिक जांच में जुट गया है और वरिष्ठ डॉक्टर स्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं। फिलहाल इस घटना ने पूरे अस्पताल प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया है और पुलिस सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है।

  • गांधीनगर में STF की बड़ी कार्रवाई: नशीले कफ सिरप का अवैध जाल उजागर, 10 हिरासत में

    गांधीनगर में STF की बड़ी कार्रवाई: नशीले कफ सिरप का अवैध जाल उजागर, 10 हिरासत में


    भोपाल । भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र में देर रात STF ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध कफ सिरप बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यह पूरा अवैध कारोबार एक सामान्य से दिखने वाले मकान के सिर्फ दो कमरों में संचालित किया जा रहा था, जहां नशीले कफ सिरप का उत्पादन, पैकिंग और स्टोरेज किया जा रहा था।

    STF की टीम को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इलाके में प्रतिबंधित और नशीले तत्वों से युक्त कफ सिरप की सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है। इसी इनपुट के आधार पर गुरुवार देर रात करीब 12 बजे छापा मारा गया, जो शुक्रवार तड़के 3 बजे तक चला। कार्रवाई के दौरान 700 से अधिक पेटियां, पैकिंग मशीनें और बड़ी मात्रा में तैयार माल बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    मकान के भीतर ‘आफ कफ’ नाम से अवैध सिरप तैयार किया जा रहा था। एक कमरे में उत्पादन से जुड़ा सामान रखा गया था, जबकि दूसरे कमरे को स्टोरेज और पैकिंग यूनिट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मौके से मिले सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है, ताकि सिरप में मौजूद रसायनों और नशीले तत्वों की पुष्टि की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान STF ने मौके से 10 लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में सामने आ रहा है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों में इसकी सप्लाई की जा रही थी। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और सप्लाई चैन किन-किन राज्यों या शहरों तक फैला हुआ है।

    दिलचस्प बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग सकी। STF अधिकारियों के मुताबिक यह एक सुनियोजित छापेमारी थी, ताकि नेटवर्क को मौके पर ही दबोचा जा सके। मकान किसके नाम पर है, इसकी भी जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मकान किसी मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है, हालांकि उससे अभी संपर्क नहीं हो पाया है।

    STF अब इस बात की भी जांच कर रही है कि अवैध कफ सिरप किन-किन मेडिकल स्टोर्स या अवैध चैनलों के जरिए सप्लाई किया जा रहा था। साथ ही अन्य ठिकानों पर भी दबिश की संभावना जताई जा रही है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में कफ सिरप की गुणवत्ता और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ मामलों में जहरीले केमिकल मिलने से बच्चों की मौत तक की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे इस तरह के अवैध नेटवर्क पर सख्ती और बढ़ा दी गई है।

  • एमपी में बदला मौसम का मिजाज, ग्वालियर-मुरैना में बारिश, कई जिलों में लू और ओलावृष्टि का अलर्ट

    एमपी में बदला मौसम का मिजाज, ग्वालियर-मुरैना में बारिश, कई जिलों में लू और ओलावृष्टि का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार सुबह से ग्वालियर में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि मुरैना में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। गुरुवार को भी दमोह सहित कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि हुई थी।

    मौसम विभाग ने शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, जबलपुर समेत 27 जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इन जिलों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है।

    10 शहरों में पारा 45 डिग्री के पार, खजुराहो सबसे गर्म
    प्रदेश में 25 मई से नौतपा की शुरुआत के साथ ही तेज गर्मी का दौर जारी है। 18 मई से खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म क्षेत्र बने हुए हैं, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। गुरुवार को नौतपा के चौथे दिन प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 46 डिग्री, दतिया में 45.7 डिग्री, नौगांव, दमोह और मलाजखंड में 45.5 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री तथा मंडला और सागर में 45 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। गुना में 44.7 डिग्री, श्योपुर में 44.6 डिग्री, रायसेन में 44.2 डिग्री और रीवा व छिंदवाड़ा में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। जबलपुर में 44 डिग्री, भोपाल में 43.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    30 मई से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलों की संभावना
    मौसम विभाग के अनुसार 30 मई से 1 जून तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। 30 मई को अधिकांश जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि इंदौर और नर्मदापुरम संभाग में गर्मी का असर बना रह सकता है। 31 मई और 1 जून को भी प्रदेश में ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। इन तीन दिनों के दौरान कहीं भी हीटवेव का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश का रिकॉर्ड
    भोपाल में पिछले 14 वर्षों में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की गई है, जबकि 2 बार बूंदाबांदी हुई। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। वर्ष 2018 और 2019 में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।

    आज का अलर्ट
    ऑरेंज अलर्ट (तीव्र लू): ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर।
    येलो अलर्ट (हीटवेव): भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, नरसिंहपुर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, जबलपुर, दमोह, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, खरगोन, भिंड, दतिया, खंडवा और बुरहानपुर।
    तेज गर्मी वाले जिले: इंदौर, उज्जैन, देवास, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार और रतलाम।

    आंधी-बारिश की संभावना:
    छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली।

    मौसम विभाग ने 29 मई से 1 जून तक का पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि शुक्रवार को प्रदेश में गर्मी, बारिश और ओलावृष्टि जैसे मिश्रित मौसम की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि 30 मई से बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।

  • ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


    झाबुआ झाबुआ में गुरुवार को आदिवासी अस्मिता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नई दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय गर्जना’ रैली के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर आदिवासी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। जिला मुख्यालय के राजवाड़ा चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और गृहमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने किया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. विक्रांत भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर ‘आदिवासी’ शब्द से परहेज कर रही है और ‘वनवासी’ जैसे शब्दों के जरिए समाज को सीमित दायरे में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास है।

    डॉ. भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को दूर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है। अब भाषा और शब्दों के माध्यम से भी उनकी पहचान बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े औद्योगिक घरानों के हवाले करना चाहती है और आदिवासी समाज को केवल मजदूर बनाकर रखना चाहती है।

    उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे समाप्त कर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। डॉ. भूरिया ने कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समाज के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर और आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में उन्हें ‘जंगली’ या ‘वनवासी’ जैसे शब्दों से संबोधित करना अपमानजनक है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने शुरुआती दो बार पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। तीसरी कोशिश में कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान राजवाड़ा चौक पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।

    कार्यक्रम में जसवंत सिंह भाबर, नटवर डोडियार, नरवेश अमलियार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि आदिवासी समाज की पहचान और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल जारी रहा, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच

    जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच


    भोपाल । भोपाल की अर्रावती ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रभार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उप सरपंच सविता चौहान ने जनपद CEO पर जिला पंचायत CEO के आदेश को पलटने और 10 महीने तक अधिकार नहीं देने के आरोप लगाए हैं। मामला अब पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तक पहुंच गया है।

    भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले तक पहुंची इस शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप सरपंच सविता चौहान ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक सरपंच के पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए।

    पूरा मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब अर्रावती के तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रकरण दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार सरपंच का प्रभार उप सरपंच को सौंपा जाना था। इसी नियम के तहत जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने 14 अगस्त 2025 को जनपद CEO देवेशकुमार सराठे को आदेश जारी कर सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार देने के निर्देश दिए थे।

    आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी जनपद CEO ने शुरुआत में प्रभार देने में देरी की। बाद में औपचारिक रूप से चार्ज तो सौंप दिया गया, लेकिन सरपंच के अधिकार और वित्तीय शक्तियां नहीं दी गईं। सविता चौहान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से वे अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पंचायत के खातों और बिल भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे। सविता चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपए के बिल पास किए गए। इतना ही नहीं, बाद में पंचों के सम्मेलन आयोजित किए गए और इसी प्रक्रिया के बीच लेखरात अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया। चौहान का कहना है कि यह फैसला जिला पंचायत CEO के आदेश के खिलाफ है और जनपद CEO को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

    उप सरपंच सविता चौहान अपने पति धनवीर सिंह और समर्थकों के साथ पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें नियमानुसार अधिकार दिलाने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में जनपद CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी नियमों के तहत सविता चौहान को प्रभार दे चुके हैं, तब किसी दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करना नियम विरुद्ध है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर पंचायत व्यवस्था में आदेशों के टकराव का जिम्मेदार कौन माना जाएगा।

  • ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी

    ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति

    रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

    मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

    भोपाल। “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…” अपनी शायरी से करोड़ों दिलों को छूने वाले मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। आधुनिक गजल को नई पहचान देने वाले बद्र साहब ने 91 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और कला जगत में गहरा शोक व्याप्त है।

    डॉ. बशीर बद्र ने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल के ईदगाह हिल्स स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और उम्र संबंधी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

    उनके निधन की खबर फैलते ही देश-विदेश में फैले उनके चाहने वालों, साहित्य प्रेमियों और शायरी के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ साहित्यकारों और शायरों ने उनके निधन को उर्दू अदब की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

    डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे।
    डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे।

    बशीर बद्र ने उर्दू गजल को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, जिंदगी और रिश्तों की सादगी भरी गहराई दिखाई देती थी। उनकी नर्म लहजे वाली गजलें और मखमली आवाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उनके जाने से उर्दू शायरी की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भर पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।

  • उज्जैन में माहौल बिगाड़ने की कोशिश? घर के गेट पर मिला मांस, CCTV खंगाल रही पुलिस

    उज्जैन में माहौल बिगाड़ने की कोशिश? घर के गेट पर मिला मांस, CCTV खंगाल रही पुलिस


    उज्जैन। उज्जैन के आगर रोड स्थित गांधी नगर क्षेत्र में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक घर के बाहर मांस का टुकड़ा मिलने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार, गांधी नगर निवासी स्नेहलता गुप्ता सुबह घर की साफ-सफाई करने के बाद कुछ देर के लिए अंदर गई थीं। जब वे वापस बाहर आईं तो उन्होंने देखा कि घर के मुख्य गेट के पास मांस का टुकड़ा रखा हुआ है। इस पर उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद इलाके में भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    स्थानीय लोगों ने इसे संदिग्ध और आपत्तिजनक घटना बताते हुए आरोप लगाया कि किसी ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। कुछ लोगों ने इसे बकरीद या ईद के मौके पर शरारती तत्वों की हरकत करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    घटना की सूचना मिलते ही चिमनगंज थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और पूरे क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मांस का टुकड़ा वहां किसने और किस उद्देश्य से रखा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।

    घटना के बाद इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

    वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटी हुई है और इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • नागदा में राज्यपाल का अचानक आगमन: पत्नी की तबीयत बिगड़ने के बाद पहुंचे घर

    नागदा में राज्यपाल का अचानक आगमन: पत्नी की तबीयत बिगड़ने के बाद पहुंचे घर


    उज्जैन। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत अचानक मुंबई से सीधे उज्जैन जिले के नागदा स्थित अपने निजी निवास पहुंच गए, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका यह दौरा पूरी तरह पारिवारिक कारणों से जुड़ा हुआ है।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल की पत्नी अनीता गहलोत की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बताया जा रहा है कि उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया, जिसके बाद चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए परिवार ने तुरंत राज्यपाल को सूचना दी। इसके बाद थावरचंद गहलोत मुंबई से सीधे नागदा के लिए रवाना हो गए।

    नागदा पहुंचने पर सबसे पहले उन्होंने अपनी पत्नी को स्थानीय चौधरी अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया, जहां प्राथमिक जांच के बाद उन्हें घर पर ही आराम करने और निरंतर डॉक्टरों की निगरानी में रहने की सलाह दी गई। फिलहाल अनीता गहलोत का इलाज उनके निवास पर ही चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    राज्यपाल के अचानक नागदा पहुंचने के बाद उनके निवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और प्रशासनिक अमला भी सतर्क हो गया। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी पत्नी की सेहत पर नजर बनाए हुए है।

    हालांकि इसी बीच कर्नाटक की राजनीति में चल रहे संभावित बदलावों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे और संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राज्यपाल का बेंगलुरु से बाहर होना राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

    सूत्रों के अनुसार कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आज दोपहर तक बड़े फैसले की संभावना जताई जा रही है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बनने की भी चर्चा है, हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा।

    इसी बीच बताया गया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन उनके नागदा में होने के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो पाई। ऐसे में अब चर्चा है कि मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा ई-मेल या राजभवन के अधिकारियों के माध्यम से भी सौंप सकते हैं, जैसा कि नियमों में प्रावधान है।

    हालांकि इन तमाम राजनीतिक अटकलों के बीच राज्यपाल के करीबी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका नागदा आना पूरी तरह निजी और पारिवारिक कारणों से जुड़ा हुआ है और इसका किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है।

    फिलहाल स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है, जबकि नागदा स्थित निवास पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।