Category: Madhya Pradesh

  • PHE में फाइलों की खींचतान से ठप हुआ भुगतान ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया प्रदर्शन अब बिल लगाने के निर्देश

    PHE में फाइलों की खींचतान से ठप हुआ भुगतान ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया प्रदर्शन अब बिल लगाने के निर्देश


    भोपाल । भोपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी PHE के प्रमुख अभियंता कार्यालय जल भवन के बाहर बुधवार को ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। एकल नल जल योजना से जुड़े ठेकेदार लंबे समय से लंबित भुगतान की मांग कर रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि काम पूरा करने के बाद भी उनके बिलों का भुगतान अटका हुआ है। उनका आरोप है कि मामले की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ जिसके बाद उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    इस पूरे मामले में विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर चल रहा विवाद भी सामने आया है। प्रमुख अभियंता संजय अंधवान और अपर संचालक वित्त अंजू सिंह के बीच वित्तीय फाइलों को लेकर टकराव की स्थिति बताई जा रही है। इसी वजह से भुगतान से जुड़ी कई फाइलों की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है। अधिकारियों के बीच फाइलों को लेकर खींचतान का असर ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ा और जून 2026 से लगाए गए कई बिल अब तक लंबित बताए जा रहे हैं।

    अपर संचालक वित्त अंजू सिंह की विभाग में करीब दो महीने पहले पदस्थापना हुई थी। इसके बाद उन्होंने भुगतान से जुड़ी फाइलों को लेकर अधीनस्थ कर्मचारियों और बाद में PHE के ईएनसी से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति सामने आई। विभाग की ओर से इसी महीने अपर संचालक वित्त को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।

    नोटिस में एसएनएस स्पर्श प्रणाली के जरिए होने वाले भुगतान की प्रगति का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि 5 सितंबर को अपर मुख्य सचिव ने भुगतान व्यवस्था की समीक्षा की थी। जिलों से मांग आने के बावजूद समय पर राशि जारी नहीं होने से भुगतान में देरी की बात नोटिस में कही गई। न्यायालयीन मामलों में गणना पत्रक के सत्यापन और अनुमोदन से जुड़ी प्रक्रिया में देरी का भी उल्लेख किया गया और तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया था।

    दूसरी ओर अपर संचालक वित्त की ओर से भी फाइलों के संचालन को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। उनकी ओर से ई फाइल में भुगतान प्रक्रिया और बजट आवंटन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कुछ फाइलों में वित्तीय पोर्टल के इस्तेमाल और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    प्रदर्शन के बाद अब ठेकेदारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जल निगम के एमडी वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि विभाग के पास बजट उपलब्ध है और जिन ठेकेदारों के बिल लंबित हैं उनके बिल लगाए जाएं ताकि भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपर संचालक वित्त और ईएनसी के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर टकराव की स्थिति है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजर इस बात पर है कि लंबित बिलों की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है। ठेकेदारों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि विभागीय स्तर पर वित्तीय फाइलों की प्रक्रिया में देरी का सीधा असर काम करने वाले ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ रहा है। अब विभाग के सामने चुनौती लंबित बिलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की भी है।

  • MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा का बदला पूरा सिस्टम अब ऑफलाइन होगी परीक्षा माशिमं संभालेगा जिम्मेदारी जानिए नया अपडेट

    MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा का बदला पूरा सिस्टम अब ऑफलाइन होगी परीक्षा माशिमं संभालेगा जिम्मेदारी जानिए नया अपडेट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित होने वाली इस परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख फिर बढ़ाई जाएगी। फिलहाल आवेदन की आखिरी तारीख 18 सितंबर निर्धारित है लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। आवेदन की तारीख एक सप्ताह बढ़ेगी या फिर 15 दिन तक आगे की जाएगी इसका फैसला अगले एक दो दिनों में होने की संभावना है। तारीख बढ़ने से उन शिक्षकों को राहत मिल सकती है जो अभी तक किसी वजह से अपना आवेदन नहीं कर पाए हैं।

    इस परीक्षा को लेकर एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब शिक्षक पात्रता परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से नहीं बल्कि पूरी तरह ऑफलाइन आयोजित की जाएगी। परीक्षा में वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न पूछे जाएंगे। शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए प्रश्नपत्र आधारित परीक्षा व्यवस्था अपनाई जाएगी। परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों की संख्या के आधार पर परीक्षा केंद्रों की संख्या तय की जाएगी। यानी जितने अधिक आवेदन आएंगे उसी हिसाब से परीक्षा केंद्र बढ़ाए जा सकते हैं।

    शिक्षकों को कोशिश की जाएगी कि उनके लिए नजदीकी परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराया जाए। हालांकि परीक्षा केंद्रों का अंतिम निर्धारण आवेदकों की संख्या के आधार पर होगा। अगर आवेदन संख्या अधिक रही तो ज्यादा केंद्र बनाए जा सकते हैं। वहीं आवेदन सीमित रहने की स्थिति में परीक्षा केंद्रों की संख्या भी उसी अनुपात में रखी जा सकती है।

    शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी अब माध्यमिक शिक्षा मंडल यानी माशिमं को दी गई है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद माशिमं ने परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा की पूरी कार्ययोजना तैयार की जाएगी और इसके बाद प्रश्नपत्रों की छपाई सहित दूसरी व्यवस्थाओं पर काम शुरू होगा। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा अब तक वसूली गई परीक्षा फीस को माध्यमिक शिक्षा मंडल को ट्रांसफर किया जाएगा।

    दरअसल शिक्षक संगठनों की ओर से परीक्षा ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कराने की मांग की गई थी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल ने ऑफलाइन परीक्षा आयोजित कराने से इनकार कर दिया था। लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा कराने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जिसे शासन की मंजूरी मिल गई। इसके बाद माशिमं के परीक्षा एजेंसी बनने का रास्ता साफ हो गया।

    इस बीच अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को लेकर भी मामला चर्चा में है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर शिक्षकों की कठिनाइयों के निराकरण की मांग की है। उन्होंने अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा बैतूल की ओर से दिए गए ज्ञापन का उल्लेख करते हुए TET की अनिवार्यता से जुड़ी समस्याओं पर शासन स्तर पर उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

    परीक्षा को लेकर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा अलग अलग होने की संभावना भी सामने आई है। ऐसे में शिक्षकों के लिए आवेदन से लेकर परीक्षा केंद्र और प्रश्नपत्र तक पूरी प्रक्रिया नए स्वरूप में होगी। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर आवेदन की नई अंतिम तारीख पर है जिसका फैसला जल्द होने की उम्मीद है।

  • आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    मध्य प्रदेश: के आगर-मालवा जिले के सुसनेर में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण क्षेत्र में दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और कई डेयरियां बंद बताई जा रही हैं। दूध विक्रेता मौजूदा कीमतों को लेकर असंतोष जताते हुए भाव बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    दूध विक्रेताओं की मुख्य मांग दूध का भाव बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर करने की है। इसके साथ ही फैट का दाम 12 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर दूध का कारोबार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दूध उत्पादन और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए वे कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

    हड़ताल के बीच सुसनेर में विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर सुसनेर की ओर आ रहे पिकअप वाहनों को रोककर प्रदर्शनकारियों ने दूध सड़क पर बहा दिया। विरोध के दौरान सड़क पर काफी मात्रा में दूध फैल गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को रोककर दूध सड़क पर बहाते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं।

    विरोध के दौरान दूध विक्रेताओं और दूध लेकर आने वाले वाहनों को रोकने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूध सड़क पर बहाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

    सुसनेर में एक होटल से पैकेट और अन्य दूध भी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर बहाए जाने का दावा किया गया है। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं। दूध की बर्बादी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    दूध विक्रेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सुसनेर क्षेत्र के अलावा आगर-मालवा के ग्रामीण इलाकों में भी दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। कई डेयरियों के बंद रहने से स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

    विक्रेताओं की मांग में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला, दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर किया जाए और दूसरा, फैट का दाम बढ़ाकर 12 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान कीमतों पर दूध का कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    फिलहाल हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान सामने नहीं आया है। दूध विक्रेताओं ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में हड़ताल कितने समय तक चलती है और प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर क्या बातचीत होती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

    यदि हड़ताल लंबी चलती है, तो सुसनेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की सप्लाई और उपलब्धता पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है। फिलहाल दूध विक्रेता 100 रुपये प्रति लीटर कीमत और 12 रुपये फैट के दाम की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

  • भोपाल में जुआ फड़ पर पुलिस की छापेमारी: कई जुआरी गिरफ्तार, TI समेत 3 पर गिरी गाज

    भोपाल में जुआ फड़ पर पुलिस की छापेमारी: कई जुआरी गिरफ्तार, TI समेत 3 पर गिरी गाज


    भोपाल । भोपाल के चौक बाजार इलाके में जुए के अड्डे पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कोतवाली थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। एसीपी कोतवाली संतोष पटेल की टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर दर्जनभर से ज्यादा जुआरियों को पकड़ा था। मौके से करीब सवा दो लाख रुपए भी जब्त किए गए थे। कार्रवाई के बाद जब अधिकारियों ने जुए के अड्डे के संचालन और स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाई तो थाना स्तर पर लापरवाही का मामला सामने आया। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी प्रभात गौड़ को निलंबित कर दिया गया।

    थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी एएसआई राकेश गुर्जर और माइक्रो बीट प्रभारी आरक्षक नरेंद्र रावत पर भी कार्रवाई की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करने के साथ निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के स्तर से की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौक बाजार क्षेत्र में जुआ चलने की जानकारी सामने आने के बावजूद उसे रोकने के लिए थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई थी।

    दरअसल गत दिवस एसीपी कोतवाली संतोष पटेल अपनी टीम के साथ चौक बाजार क्षेत्र में पहुंचे थे। टीम ने जुए के अड्डे पर अचानक दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई से वहां मौजूद जुआरियों में अफरा तफरी मच गई। टीम ने दर्जनभर से ज्यादा लोगों को पकड़ा और मौके से करीब 2.25 लाख रुपए बरामद किए। इस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस बात पर गया कि जिस इलाके में जुआ चल रहा था वहां स्थानीय पुलिस की ओर से पहले क्या कार्रवाई की गई थी।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जुआ बंद कराने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद गतिविधियां पूरी तरह नहीं रुक सकीं। थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस अधिकारियों ने जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी जांच के दौरान थाना प्रभारी प्रभात गौड़ पर जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की गई। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभागीय कार्रवाई के आधार पर ही तय होगा।

    बीट और माइक्रो बीट स्तर के पुलिसकर्मियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया। अधिकारियों का मानना है कि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध गतिविधि चलने की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इसी आधार पर थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी और माइक्रो बीट प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

    भोपाल में जुए से जुड़े मामलों में थाना स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई का यह दूसरा बड़ा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा कौरव को भी निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ भी जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोप सामने आए थे। अब कोतवाली क्षेत्र की कार्रवाई के बाद तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन से पुलिस विभाग में जिम्मेदारी और निगरानी को लेकर सख्ती का संकेत मिला है।

    एसीपी कोतवाली संतोष पटेल ने कोतवाली थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस अब चौक बाजार में जुए के अड्डे से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वहां जुए की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इसमें कौन कौन लोग शामिल थे। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रमोटरों से जुड़े कोलकाता और मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित करीब 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय बलों के जवान भी टीमों के साथ मौजूद रहे। कोलकाता में छह अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली गई, जबकि इंदौर में 11 ठिकानों पर कार्रवाई जारी रही।

    यह जांच निवेश से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके निदेशकों ने अलग-अलग डिपॉजिट स्कीम के नाम पर आम लोगों से रकम जमा कराई। निवेशकों को आकर्षक और अधिक रिटर्न देने का भरोसा दिलाए जाने का आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, बाद में कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया गया रिटर्न नहीं दिया और निवेशकों की रकम भी वापस नहीं की।

    मामले में शिकायतें सामने आने के बाद जांच आगे बढ़ी। ईडी को संदेह है कि निवेशकों से कथित तौर पर जुटाए गए चिटफंड के पैसों का इस्तेमाल रियल एस्टेट और निर्माण कारोबार में किया गया तथा इसी माध्यम से रकम को कथित तौर पर वैध दिखाने की कोशिश की गई। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी इसी वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    कोलकाता में नारकेलडांगा, नेताजी नगर और रवींद्र सरोबर थाना क्षेत्रों में छह स्थानों पर ईडी की टीमें पहुंचीं। वहीं, इंदौर में भी अमृत ग्रुप से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली गई। दोनों शहरों में एक साथ हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना है।

    इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में ईडी की कोलकाता टीम ने जमीन हड़पने और दस्तावेजों तथा जमीन के रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में अमित गांगुली नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी मंगलवार रात की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, अमित गांगुली पर अलग-अलग लोगों और संस्थाओं की संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करने के आरोप हैं।

    ईडी के मुताबिक, अमित गांगुली के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से 23 एफआईआर दर्ज हैं। एजेंसी इन मामलों और संपत्तियों से जुड़े कथित लेनदेन की भी जांच कर रही है। हालांकि, इन आरोपों और मामलों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    अमृत ग्रुप से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार निवेशकों से रकम जुटाने, कथित तौर पर रिटर्न का भुगतान नहीं करने और पैसों के संभावित दूसरे कारोबारों में इस्तेमाल से जुड़ी जांच है। ईडी की तलाशी के दौरान संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

    फिलहाल कंपनी या उसके प्रमोटरों की ओर से ईडी की कार्रवाई को लेकर कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कोलकाता में छह और इंदौर में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई। खानूगांव कैंपस में आयोजित बैठक में UCC के विरोध के साथ इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और बोर्ड के रुक्न-ए-आमला एवं कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने मुस्लिम समाज की ओर से अपना पक्ष रखा।

    शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि मुस्लिम समाज UCC को स्वीकार नहीं करता और इस मुद्दे पर पहले भी अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है। ऐसे में UCC की जरूरत और उसके संभावित असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और जिम्मेदार लोगों से इस विषय पर गंभीरता से सोचने की बात कही।

    शहर काजी ने अपने पक्ष को रखते हुए आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दिए गए एक भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में गोलवलकर ने कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड को जरूरी नहीं बताया था। शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम समाज और इस विषय के जानकारों की बात सुनी जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है। उनका कहना था कि इस विषय को केवल सामान्य चर्चा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े पक्षों को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।

    बैठक में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा हुई। शहर काजी ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को पहले से अधिकार और सम्मान दिया है। उन्होंने महिलाओं के मां, बेटी और पत्नी के रूप में अधिकारों के साथ संपत्ति में हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में मुस्लिम समाज किसी से पीछे नहीं है।

    UCC के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम का भी मुद्दा बैठक में उठा। मध्य प्रदेश से लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई। शहर काजी ने मुस्लिम समाज के साथ सेक्युलर नागरिकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।

    आरिफ मसूद ने कहा कि UCC के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए बोर्ड की लीगल टीम तैयार है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग जिलों में भी वकील अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। बोर्ड की ओर से याचिका का मसौदा तैयार होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने के बजाय कानूनी लड़ाई के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की।

    इस तरह भोपाल की बैठक में UCC को लेकर विरोध के साथ आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया, दोनों स्तरों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बोर्ड की ओर से 17 सितंबर के दिल्ली कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने और कानूनी कार्रवाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    मध्य प्रदेश: में NEET UG-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने पर लगाई गई 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पटवारी ने सरकार से इस पेनल्टी को वापस लेने और विद्यार्थियों से पहले ही वसूली जा चुकी अतिरिक्त राशि लौटाने की मांग की है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि 3 सितंबर 2026 के राउंड-2 नोटिस में सीट छोड़ने पर 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी का प्रावधान किया गया। उनके अनुसार यह व्यवस्था पहले जारी की गई रूल बुक के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि रूल बुक में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने की स्थिति में केवल प्रवेश शुल्क देय होने की जानकारी दी गई थी। विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।

    पटवारी ने कहा कि उसी समय ऑल इंडिया एमसीसी सहित अन्य राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रियाएं भी चल रही थीं। एमसीसी के राउंड-2 सीट आवंटन का कार्यक्रम 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने फ्री एग्जिट की अंतिम तारीख 3 और 4 सितंबर निर्धारित कर दी थी।

    उनके अनुसार इस समय-सीमा के कारण विद्यार्थियों को एमसीसी के राउंड-2 परिणाम और सीट अपग्रेड होने की संभावनाओं की जानकारी मिले बिना ही मध्य प्रदेश में मिली सीट को छोड़ने या उसे बनाए रखने का अंतिम निर्णय लेना पड़ा। पटवारी ने इसे विद्यार्थियों के लिए परेशानी वाली स्थिति बताते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों की स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।

    पटवारी ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी अन्य काउंसलिंग व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। उनके अनुसार एमसीसी की व्यवस्था में अधिकतम 10 हजार रुपये तक का नुकसान होता है। उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग के पहले राउंड से ही सभी नियम स्पष्ट रूप से विद्यार्थियों के सामने रखे जाने चाहिए।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके बीच में नियमों में बदलाव विद्यार्थियों के लिए परेशानी पैदा करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि NEET UG की पुनः परीक्षा और काउंसलिंग में हुई देरी से विद्यार्थी पहले ही प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सीट छोड़ने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला प्रावधान उनके लिए आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।

    पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को वापस लेने के साथ इसे स्थगित किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2026 की रूल बुक में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों की देयता केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित रखी जानी चाहिए।

    उन्होंने पहले से वसूली गई अतिरिक्त राशि विद्यार्थियों को वापस करने की मांग भी की। इसके अलावा राउंड-2 की प्रक्रिया पूरी होने से पहले आवंटित सीट छोड़ने के लिए विद्यार्थियों को उचित समय-सीमा उपलब्ध कराने की बात कही।

    पटवारी ने भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव नहीं करने की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उनका कहना है कि काउंसलिंग से जुड़े सभी नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी उपलब्ध विकल्पों और अलग-अलग काउंसलिंग के परिणामों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकें।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी राज्यपाल को दी।

    मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाले विशेष अभियान के बारे में भी बताया। इसके तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र के 50 लाख से अधिक लोगों के पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की योजना है। इस रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकारी स्तर पर वहन किया जाएगा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ ही सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए कार्यों को स्मरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर दीपोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर को ग्रामीण क्षेत्रों के 50 लाख से अधिक पट्टों की रजिस्ट्री निशुल्क कराई जाएगी। इसके लिए होने वाला पूरा सरकारी खर्च शासन की ओर से वहन किया जाएगा। इस अभियान को प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प से जुड़ी विकास यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा बताया गया है।

    ‘सेवा-संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे मध्य प्रदेश में संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की अविरल सेवा-संकल्प की यात्रा को प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस महाअभियान का हिस्सा बनें और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की यात्रा में सहभागी बनें।

    राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अभियान से संबंधित कार्यक्रमों और नि:शुल्क रजिस्ट्री की योजना की जानकारी साझा की। ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाली रजिस्ट्री ग्रामीण क्षेत्र के पट्टाधारकों से जुड़ी है और इसमें सरकारी स्तर पर खर्च वहन किए जाने की बात कही गई है।

    सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर होगी और इसका संचालन एक महीने तक किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश में अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे प्रधानमंत्री की जनसेवा से जुड़ी 25 वर्षों की यात्रा को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बताया है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी में अभियान के कार्यक्रमों के साथ-साथ 50 लाख से अधिक ग्रामीण पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से संबंधित योजना भी शामिल रही। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अभियान में सहभागिता की अपील करते हुए इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी यात्रा में भागीदारी का अवसर बताया।

  • स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    मध्य प्रदेश । के छतरपुर जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में पटवारियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा के आह्वान पर दर्जनों पटवारी रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही।

    पटवारी संघ की मुख्य मांग है कि आबादी भूमि के पंजीयन और निष्पादन की प्रक्रिया, ई-केवाईसी तथा व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े अन्य कार्यों से पटवारी संवर्ग को अलग रखा जाए। संघ का कहना है कि इन कार्यों में जमीन की सीमा, क्षेत्रफल, मालिकाना हक या दस्तावेजों से जुड़ी किसी भी त्रुटि की स्थिति में पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी आने की आशंका है। इसी वजह से संघ इन अतिरिक्त दायित्वों को लेकर विरोध कर रहा है।

    मध्य प्रदेश पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद ने कहा कि पंजीयन से संबंधित कार्यों के लिए शासन के पास अलग विभाग मौजूद है। इसके बावजूद राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र का भू-स्वरूप कृषि भूमि से अलग है और पंचायत राज व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण से जुड़े कार्य पंचायत विभाग से संबंधित हैं।

    पटवारियों ने किसान हितैषी फार्मर आईडी और जियो-टैग गिरदावरी में सामने आ रही तकनीकी खामियों का भी मुद्दा उठाया। संघ के अनुसार, तकनीकी समस्याओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। पटवारी संघ का कहना है कि पहले से ही कई जिम्मेदारियां निभा रहे कर्मचारियों पर लगातार नई योजनाओं का काम बढ़ाया जा रहा है।

    संघ ने ग्रेड-पे, वेतन विसंगति और कैडर रिव्यू जैसी लंबित मांगों का भी उल्लेख किया। पटवारियों के मुताबिक इन मुद्दों का अभी निराकरण नहीं हुआ है और इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से संघ ने शासन से आबादी पंजीयन एवं निष्पादन योजना से पटवारियों को तत्काल अलग करने की मांग की है।

    कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान पटवारी इस बात पर भी अड़े रहे कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन केवल जिला कलेक्टर को ही सौंपा जाएगा। डिप्टी कलेक्टर और एडीएम विनय द्विवेदी ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन पटवारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारी बिना आवेदन लिए वापस लौट गए और पटवारी धरने पर बैठे रहे।

    पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर दबाव जारी रहा, तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में पटवारी काम बंद कर कलमबंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।

  • धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, दो महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

    धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, दो महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

    मध्य प्रदेश: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है। जमानत मंजूर होने के बाद करीब दो महीने से जेल में बंद शालिग्राम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने सुनाया।

    मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रघुराजनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि मोतीलाल कुशवाहा को स्कूल के पास रोककर उनके साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने गाली-गलौज की और साथ मौजूद सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाया।

    मामले में मोतीलाल कुशवाहा के पेट में गोली लगने का भी आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। शालिग्राम की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया था। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण उन्हें इस मामले में फंसाया गया है।

    बचाव पक्ष की ओर से अदालत में घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 296(B), 351(3) और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।

    शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को 15 जुलाई 2026 से जेल में रखा गया है। इससे पहले जिला अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन वहां से जमानत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली।

    जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ में जमानत याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सामने रखी गईं, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त रिहाई का आदेश दिया है।

    इस मामले में शालिग्राम पर मुख्य आरोप सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाने और घटना से जुड़े होने को लेकर लगाए गए हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश का हवाला दिया है। अदालत के समक्ष घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई थी।

    जिला अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब शालिग्राम को राहत मिली है। अदालत के आदेश के अनुसार निजी मुचलका और निर्धारित शर्तों के आधार पर उनकी जेल से रिहाई हो सकेगी। वह 15 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थे और जमानत मिलने के बाद करीब दो महीने बाद बाहर आएंगे।