Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात चिंताजनक बना दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में तेज से अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। लगातार बरसात के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, कई पुल जलमग्न हो गए हैं, सड़क संपर्क टूट गया है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सबसे दर्दनाक घटना सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र से सामने आई, जहां पानी में डूबने से दो मासूम बच्चों की जान चली गई। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में सबसे अधिक ढाई इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग 2.2 इंच, खंडवा में करीब पौने दो इंच, भोपाल में डेढ़ इंच, जबकि दतिया, नौगांव और बालाघाट में सवा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। रतलाम, बैतूल और धार में लगभग एक इंच वर्षा हुई। इसके अलावा खरगोन, पचमढ़ी, दमोह, नर्मदापुरम, जबलपुर और उमरिया सहित कई जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा से प्रदेश के अधिकांश नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।

    सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र में पार्वती और तप नदी के उफान पर आने से कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया। बापचा दोनिया गांव में दो मासूम बच्चों के डूबने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। परिजन बच्चों को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन ने लोगों से नदी और तालाबों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।

    हरदा जिले में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण कालीमाचक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और ग्राम मांदला के पास पुल के ऊपर लगभग तीन फीट पानी बहने लगा। इसके चलते नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है और ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी स्थित नाले में आई बाढ़ के कारण खिरकिया मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बहाव वाले नालों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें तथा सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें।

    प्रदेश के कई हिस्सों में खेतों में पानी भर गया है जिससे खरीफ फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं तथा जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नागरिकों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर

    MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर जिले (Maihar district) के अमरपाटन थाना (Amarpatan Police Station) क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां के ग्राम खरामसेड़ा (Village Kharamseda) के अहिरान टोला में शुक्रवार की रात कुएं में गिरे एक बैल की जान बचाने के चक्कर में तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।

    दरअसल बैल को बाहर निकालने की कोशिश में चार ग्रामीण एक-एक कर कुएं की गहराई में उतरे, लेकिन भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते चारों अचेत हो गए। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि एक की हालत नाजुक बनी हुई है।

    इस हादसे की शुरुआत शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई, जब गांव के रामनिवास कुशवाहा के घर के पास बने करीब 35 फीट गहरे कुएं में अचानक एक बैल गिर गया। बैल को कुएं में तड़पता देख गांव के दो युवक उसे सुरक्षित बाहर निकालने की नीयत से रस्सी के सहारे गहराई में उतरे और कुएं की तली में पहुंचते ही ऑक्सीजन ना मिल पाने के कारण दोनों का दम घुटने लगा और कुछ ही देर में ऊपर खड़े लोगों को उनकी आवाज आना बंद हो गई। उन्हें अचेत होते देख, बाहर खड़े दो अन्य ग्रामीण भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्हें बचाने के लिए फौरन कुएं में कूद गए, लेकिन अफसोस वे भी उसी जहरीली हवा की चपेट में आकर वहीं निढाल हो गए।


    रस्सियों और कांटों के सहारे ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू

    चार लोगों के नीचे उतरने के बाद भी जब काफी देर तक जब कुएं के भीतर से कोई हलचल नहीं हुई और किसी की आवाज बाहर नहीं आई, तो कुएं के मुहाने पर खड़े ग्रामीणों के होश उड़ गए और किसी अनहोनी की आशंका से वहां चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए खुद ही बचाव अभियान शुरू किया। रस्सियों, हुक और कांटों के सहारे चारों अचेत लोगों को भारी मशक्कत के बाद एक-एक कर कुएं से बाहर निकाला गया। इसी बीच डायल-112 पुलिस को भी सूचना दी गई। रात करीब 9 बजे सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चारों को तत्काल सिविल अस्पताल अमरपाटन ले जाया गया।


    अस्पताल पहुंचते ही तीन को मृत घोषित किया

    अमरपाटन सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद तीन ग्रामीणों को मृत घोषित कर दिया, जिससे अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। मृतकों की पहचान कृष्ण कुमार यादव (28 वर्ष) पिता रामदास यादव, वीरेंद्र यादव (47 वर्ष) पिता जगदीश यादव और राहुल यादव (34 वर्ष) पिता मोतीलाल यादव के रूप में हुई है। ये तीनों मृतक अहिरान टोला, खरमसेड़ा के ही रहने वाले थे। वहीं, चौथे ग्रामीण रामचंद्र यादव की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में आईसीयू में इलाज जारी है।


    कुएं में भरा था घुटनों तक पानी, पीएम रिपोर्ट का इंतजार

    बताया जा रहा है कि कुआं लगभग 35 फीट गहरा है, जिसमें घुटनों तक पानी भरा हुआ था। लेकिन लंबे समय से बंद रहने या हवा का प्रवाह न होने के कारण कुएं के निचले हिस्से में जानलेवा कार्बन मोनोऑक्साइड या अन्य जहरीली गैसें जमा हो गई थीं। अमरपाटन एसडीओपी ख्याति मिश्रा ने बताया कि ‘रामनिवास कुशवाहा के कुएं में एक बैल गिर गया था, जिसे बचाने के लिए चार लोग नीचे उतरे थे। समय पर वापस नहीं आने पर ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक का इलाज जारी है। प्रथम दृष्टया मामला दम घुटने का लग रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।’

  • एमपी में मानसून सक्रिय, 19 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, बड़वानी-खंडवा में रेड वार्निंग

    एमपी में मानसून सक्रिय, 19 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, बड़वानी-खंडवा में रेड वार्निंग


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इंदौर और उज्जैन सहित 19 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। बड़वानी और खंडवा में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जहां अगले 24 घंटे में करीब 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, खरगोन, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं इंदौर, देवास, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर और पांढुर्णा में भारी बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, ग्वालियर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बारिश का दौर जारी रहेगा।

    बीते 24 घंटे में कई जिलों में झमाझम बारिश
    मानसून की सक्रियता के चलते पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार, इंदौर में सबसे अधिक करीब सवा दो इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग पौने दो इंच, भोपाल में डेढ़ इंच तथा बालाघाट में सवा इंच वर्षा हुई।

    इसके अलावा बैतूल, नर्मदापुरम, दतिया, रतलाम और शिवपुरी में पौन इंच, जबकि दमोह, धार और पचमढ़ी में करीब आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, नरसिंहपुर, नौगांव, सागर, सतना, सिवनी, टीकमगढ़, उमरिया, गुना, ग्वालियर और रायसेन में भी अच्छी बारिश हुई।

    बारिश से तापमान में आई गिरावट
    लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेशभर में दिन के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भोपाल में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि इंदौर में 30 डिग्री, ग्वालियर में 33.6 डिग्री, उज्जैन में 32 डिग्री और जबलपुर में 28.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सबसे कम अधिकतम तापमान मलाजखंड में 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नरसिंहपुर, सागर, दमोह, रायसेन, मंडला, छिंदवाड़ा, गुना, धार और बैतूल में भी अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित
    शुक्रवार को भोपाल में सुबह से रुक-रुककर बारिश होती रही। वहीं उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में रातभर हुई तेज बारिश से शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे घाटों पर स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए। ग्वालियर में भी सुबह तेज बारिश दर्ज की गई। उधर, रतलाम जिले के शिवपुर गांव में खेतों में पानी भर जाने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

  • विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा

    विदिशा में कचरा संकट गहराया, डंपिंग साइट तक नहीं पहुंच सके वाहन, शहर में गंदगी का खतरा बढ़ा


    विदिशा  लगातार हो रही बारिश ने विदिशा शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। जतरापुरा स्थित डंपिंग ग्राउंड तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया है जिसके कारण नगर पालिका के कचरा वाहन वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर से रोजाना एकत्र होने वाला लगभग 35 टन कचरा नगर पालिका परिसर में ही रुका हुआ है और ट्रैक्टर ट्रॉलियां व डंपर खड़े रहने को मजबूर हैं। यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में शहर में कचरे का ढेर लगने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

    नगर पालिका के सफाई कर्मचारी प्रतिदिन शहर के सभी वार्डों घरों बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा एकत्र करते हैं। सामान्य दिनों में करीब छह ट्रैक्टर ट्रॉलियों और चार बड़े डंपरों के माध्यम से इस कचरे को जतरापुरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। लेकिन गुरुवार की तेज बारिश के बाद डंपिंग स्थल तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह दलदल बन गया जिससे वाहन बीच रास्ते में फंसने लगे और कचरा ले जाना असंभव हो गया। मजबूरी में सभी वाहनों को नगर पालिका परिसर में ही खड़ा करना पड़ा।

    यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी बारिश के मौसम में इसी तरह की स्थिति बन चुकी है जब डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया था और कई दिनों तक कचरे से भरे वाहन नगर पालिका परिसर में खड़े रहे थे। हालांकि उस समय बारिश थमने के बाद रास्ता खुल गया था और कचरे का निस्तारण किया जा सका था। इस बार भी पूरे मार्ग में कीचड़ होने से वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    विदिशा नगर पालिका पहले सोठिया क्षेत्र के पास कचरा डंप करती थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध और मानव अधिकार आयोग में शिकायत के बाद वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया। इसके बाद जतरापुरा और मिर्जापुर क्षेत्रों को अस्थायी डंपिंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाने लगा। अब लगातार बारिश के कारण इन स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है जिससे नगर पालिका के सामने कचरा प्रबंधन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

    नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि यदि रास्ता जल्द नहीं खुला तो शहर से निकलने वाले दैनिक कचरे का उठाव प्रभावित हो जाएगा। इससे सड़कों और मोहल्लों में गंदगी बढ़ेगी तथा मच्छरों और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश के मौसम में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है और ऐसे में डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच बंद होना हालात को और गंभीर बना सकता है।

    नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष आशीष माहेश्वरी ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक डंपिंग व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि स्थायी डंपिंग ग्राउंड के लिए जिला प्रशासन से भूमि की मांग की गई है। फिलहाल दूसरी जगह तलाशने के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

  • शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी

    शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर कस्बे की पाल कॉलोनी में चार दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। लगातार शिकायतों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कॉलोनी की छात्राएं सड़क पर उतर आईं। गुरुवार रात बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने उन्होंने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और जैसे ही मामला प्रशासन तक पहुंचा बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हरकत में आ गए। इसके बाद टूटी हुई बिजली लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया गया और बिजली बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई।

    जानकारी के अनुसार पाल कॉलोनी की घरेलू बिजली लाइन टूट जाने के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिछले चार दिनों से बंद थी। लगातार अंधेरे में रहने से लोगों को पीने के पानी घरेलू कामकाज और गर्मी से राहत पाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही थी जो परीक्षा और नियमित पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। बिजली नहीं होने के कारण रात में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे थे जिससे ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क भी बाधित हो रहे थे।

    प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने बताया कि वे समय पर बिजली बिल जमा करती हैं लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था। उन्होंने कई बार बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन भी किए लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका आरोप था कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी उपेक्षा से नाराज होकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।

    गुरुवार रात प्रियंका लोधी सहित दर्जनभर छात्राएं बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचीं और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी। अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने भी छात्राओं की मांगों का समर्थन करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

    स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ममता शाक्य के निर्देश पर पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों ने तत्काल टूटी लाइन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने शुरुआती शिकायतों पर ही कार्रवाई कर दी होती तो लोगों को चार दिनों तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता और सड़क पर उतरकर विरोध करने की नौबत भी नहीं आती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान आखिर शिकायतों से होगा या फिर प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन और विभाग जागेंगे।

  • बोरवेल चलाते समय किसान की करंट लगने से मौत, सिंचाई के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा

    बोरवेल चलाते समय किसान की करंट लगने से मौत, सिंचाई के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के मणिखेड़ा गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। खेत में सिंचाई करने पहुंचे एक किसान की बोरवेल की विद्युत व्यवस्था में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। रोज की तरह खेती का काम करने निकले किसान को यह अंदाजा भी नहीं था कि खेत में लगाया गया बोरवेल उसकी जिंदगी की आखिरी मंजिल बन जाएगा। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया जबकि गांव में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार मणिखेड़ा गांव निवासी 40 वर्षीय माथुर जाटव पुत्र भरोसा जाटव शुक्रवार सुबह अपने खेत में सिंचाई करने के लिए पहुंचे थे। खेत में लगी बोरवेल से पानी निकालकर फसल की सिंचाई की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान अचानक बोरवेल की विद्युत व्यवस्था में करंट दौड़ गया और माथुर जाटव उसकी चपेट में आ गए। तेज करंट लगने से वह मौके पर ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। खेत में मौजूद लोगों को जब घटना का पता चला तो तुरंत परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी गई।

    घटना की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर किसान को तत्काल शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया लेकिन वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। किसान की असमय मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

    माथुर जाटव खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि वह मेहनती और सरल स्वभाव के किसान थे तथा रोज की तरह खेत में सिंचाई करने गए थे लेकिन विद्युत करंट ने उनकी जान ले ली। गांव के लोगों का कहना है कि खेतों में लगे बोरवेल और बिजली कनेक्शनों की नियमित जांच नहीं होने से इस तरह के हादसे लगातार सामने आते रहते हैं। उनका कहना है कि समय रहते विद्युत उपकरणों की जांच और रखरखाव किया जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में किसान की मौत का कारण करंट लगना माना गया है लेकिन पुलिस यह भी पता लगा रही है कि विद्युत व्यवस्था में करंट किस वजह से आया और कहीं किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही तो इस हादसे का कारण नहीं बनी।

    इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में उपयोग होने वाली विद्युत व्यवस्थाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सिंचाई के दौरान बिजली से जुड़े उपकरणों का उपयोग पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए और समय समय पर वायरिंग मोटर तथा बोरवेल कनेक्शन की जांच करानी चाहिए ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

  • सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप

    सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप


    शिवपुरी। जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के लाड़करन गांव में कृषि भूमि के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीमांकन के बाद दोबारा खेत जोतने का विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।

    संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।

    आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • 6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    शिवपुरी। जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में छह वर्षीय मासूम के साथ कथित बर्बरता का मामला सामने आया है। बच्चे के पिता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि पुरानी रंजिश के चलते गांव के दो लोगों ने उनके बेटे के बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली कुल्हाड़ी से काट दी। मामले में मारपीट, जान से मारने की धमकी और झूठा केस दर्ज कराने के भी आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

    शिकायत के अनुसार बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम मदनपुर निवासी रामवीर गुर्जर का छह वर्षीय बेटा सचिन बुधवार शाम करीब चार बजे घर के पास खेल रहा था। आरोप है कि गांव के आनंद गुर्जर और उदयभान गुर्जर उसे अपने घर ले गए, जहां पुरानी रंजिश के चलते कुल्हाड़ी से उसके बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली काट दी गई। हमले में उसकी तीसरी उंगली भी गंभीर रूप से घायल हो गई।

    घायल बच्चा किसी तरह रोते-बिलखते घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद हैं। जब परिवार ने आरोपियों से इस बारे में विरोध जताया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

    रामवीर गुर्जर का कहना है कि गांव के कुछ लोगों ने समझौते का भरोसा देकर उन्हें तत्काल पुलिस में शिकायत करने से रोक दिया। बाद में जब परिवार इलाज और बातचीत के लिए आरोपियों के घर पहुंचा तो आरोपित पक्ष के कई लोग लाठी-डंडे लेकर उनके घर आ गए और मारपीट की। इस दौरान उनके सिर पर लाठी मारकर घायल करने का भी आरोप लगाया गया है।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित पक्ष ने खुद अपनी मां को चोट पहुंचाकर उनके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।

    पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि डायल-112 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। उनका यह भी कहना है कि बदरवास थाने में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई कर दी गई।

    पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में रामवीर गुर्जर ने बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं बदरवास थाना प्रभारी नवीन यादव ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया था। उनके अनुसार शिकायतकर्ता बच्चे को साथ लेकर नहीं आया था। पुलिस ने बच्चे के साथ दोबारा थाने आने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल परीक्षण, पूछताछ और जांच के बाद दोनों पक्षों के तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका

    बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका


    सीहोर। मूसलाधार बारिश ने सीहोर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील आईसीयू वार्ड में एसी और छत से पानी टपकने लगा, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन मरीजों को अत्याधुनिक उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उनके बेड तक बारिश का पानी पहुंच रहा है।

    जानकारी के अनुसार आईसीयू में लगा एयर कंडीशनर पूरी तरह फेल हो गया है। ठंडी हवा देने की बजाय उससे लगातार पानी रिस रहा है। छत और पाइपलाइन से भी पानी टपकने के कारण वार्ड में जगह-जगह सीलन और जलभराव की स्थिति बन गई है। आईसीयू में वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

    मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को इस समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पानी लगातार बेड के आसपास टपकता रहा और मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ी।

    विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू जैसे वार्ड में नमी और पानी का रिसाव संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा वार्ड में लगी जीवन रक्षक मशीनें और अन्य चिकित्सा उपकरण बिजली से संचालित होते हैं। ऐसे में लगातार पानी टपकने से शॉर्ट सर्किट या किसी बड़े विद्युत हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

    करोड़ों रुपये के बजट और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। मरीजों और उनके परिजनों ने आईसीयू की तत्काल मरम्मत, एसी सिस्टम को दुरुस्त करने और सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं मरीजों के परिजन उम्मीद जता रहे हैं कि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड की खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।