Category: Madhya Pradesh

  • 50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री

    50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गांवों में वर्षों से अपने घर और आबादी की जमीन पर रह रहे लाखों परिवारों के लिए 17 सितंबर से एक बड़ा अभियान शुरू हो रहा है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा चयनित संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जिन लोगों के नाम स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं उन्हें अब संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराया जाए। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    इस योजना को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्वामित्व योजना में प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री एक जैसी चीज नहीं हैं। ग्रामीण आबादी की जमीन का सर्वे कर तैयार किए गए अधिकार अभिलेख में संपत्ति पर संबंधित व्यक्ति के अधिकार का रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए चयनित संपत्तियों का पंजीयन कराने जा रही है। यानी पहले से तैयार रिकॉर्ड को पंजीकृत दस्तावेज का रूप दिया जाएगा।

    सरकार ने इसके लिए अलग से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यवस्था की है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाने की योजना है ताकि लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ अधिकारियों को उप-पंजीयक की शक्तियां भी दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन कम समय में पूरा करना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अभियान एक महीने तक चलाया जाएगा और पंजीयन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

    इसका फायदा हर व्यक्ति को अपने आप नहीं मिलेगा। अभियान में वही संपत्तियां शामिल हैं जिनके अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत पहले से तैयार और मंजूर हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अभी स्वामित्व योजना के तैयार रिकॉर्ड में शामिल नहीं है तो केवल इस अभियान के दौरान आवेदन करके तुरंत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सुविधा नहीं होगी। पहले उसका रिकॉर्ड योजना की प्रक्रिया के तहत तैयार होना जरूरी होगा।

    रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति के मालिक के पास उसका पंजीकृत दस्तावेज होगा। इससे संपत्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को और मजबूत आधार मिल सकता है। सरकार का कहना है कि पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर पात्रता और बैंक की अन्य शर्तें पूरी होने पर संपत्ति के बदले ऋण लेने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा संपत्ति को कारोबार या स्वरोजगार के लिए इस्तेमाल करने के रास्ते भी आसान हो सकते हैं।

    हालांकि जमीन विवादित होने पर स्थिति अलग हो सकती है। सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से किसी पुराने मालिकाना विवाद का अपने आप अंत नहीं माना जा सकता। यदि किसी संपत्ति पर किसी दूसरे व्यक्ति का दावा है या मामला राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में चल रहा है तो उसका कानूनी निपटारा अलग प्रक्रिया से ही होगा। इसलिए रजिस्ट्री को हर तरह के भूमि विवाद का अंतिम समाधान मानना सही नहीं होगा।

    इस अभियान के बीच पटवारियों की आपत्ति भी सामने आई है। पटवारी संघों की चिंता अतिरिक्त जिम्मेदारी और रिकॉर्ड में भविष्य में सामने आने वाली किसी गलती की जवाबदेही को लेकर बताई गई है। उनका सवाल है कि यदि खसरे नक्शे या सर्वे रिकॉर्ड में कोई त्रुटि निकलती है और उसके आधार पर विवाद खड़ा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। कुछ पटवारी संगठनों ने इस तरह की जिम्मेदारी के साथ अधिकार भी स्पष्ट करने की मांग की है।

    यह मुद्दा सरकार के स्तर पर भी उठा है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पटवारियों की आशंकाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से यह कहा गया है कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।

    यानी स्वामित्व योजना के तहत शुरू हो रहा यह अभियान उन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी संपत्ति पहले से योजना के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन किसी नए दावे या पुराने विवाद को केवल मुफ्त रजिस्ट्री के जरिए खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित राजस्व या न्यायिक प्रक्रिया ही लागू होगी। अब अभियान शुरू होने के साथ यह देखना अहम होगा कि चयनित 50 लाख से ज्यादा संपत्तियों का पंजीयन तय समय में किस तरह पूरा होता है।

  • उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं

    उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया है। जबलपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के सामने यह प्रमाण नहीं आया कि जिस वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था वह मंत्री का वाहन था या तिरंगा मंत्री के निर्देश पर वहां लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी आधार पर अदालत ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

    यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।

    परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।

    परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।

    इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।

    इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।

  • RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी

    RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गुरुवार को बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी लैंग्वेज परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे गए हैं। प्रश्नपत्र हाथ में आने के बाद कई विद्यार्थी असमंजस में पड़ गए। छात्रों का कहना था कि उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा की तैयारी की थी लेकिन प्रश्नपत्र में ऐसी विषयवस्तु से सवाल पूछे गए जो उनके सिलेबस का हिस्सा नहीं थी।

    परीक्षा के दौरान छात्रों ने इस संबंध में पर्यवेक्षकों से जानकारी लेने की कोशिश की। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। परीक्षा केंद्र पर स्थिति बिगड़ने के बाद छात्र एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

    मामला यहीं नहीं रुका। नाराज छात्र एनएसयूआई के समर्थन के साथ कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के निवास पर पहुंच गए। वहां छात्रों ने धरना शुरू कर दिया और प्रश्नपत्र को लेकर जांच कराने की मांग रखी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में अगर निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग सवाल पूछे गए हैं तो इससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम पर असर पड़ सकता है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। विद्यार्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय पाठ्यक्रम का उचित तरीके से मिलान नहीं किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यार्थियों के हित में उचित कदम उठाने की मांग की।

    एनएसयूआई आरडीवीवी प्रभारी अंचलनाथ ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यार्थी लंबे समय तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल आ जाएं तो छात्रों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि छात्र कई घंटे से कुलगुरु निवास के बाहर बैठे हैं और अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।

    छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव और सिविल लाइन थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्रों की शिकायत को सुना और मामले की जानकारी ली। इस दौरान छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र की जांच कराने और परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों के हित में फैसला लेने की मांग दोहराई गई।

    मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुनील दुबे ने बताया कि छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाने की जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और इसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल छात्रों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच जारी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र में वास्तव में निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल शामिल थे या नहीं। इसके बाद परीक्षा को लेकर आगे की प्रक्रिया और छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फैसला लिया जाएगा।

  • 100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

    100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क


    जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

    जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

    दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

    ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

    मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

    फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

  • भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल

    भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं को अलग अलग मुद्दों पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक से यूजीसी से जुड़े सवाल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया और कुछ देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं। वहीं सागर में मंत्री प्रहलाद पटेल से शराबकांड को लेकर सवाल हुआ जबकि शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल पूछा गया। इसी बीच भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें 11 सितंबर 2023 के आश्वासन की याद दिलाई।

    सिंगरौली में सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान विधायक रीति पाठक से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सवाल सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता जिस विषय पर रखी गई है उसी विषय पर बात की जाए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम समाप्त कर दिया और वहां से चली गईं।

    उधर भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही गई थी।

    2023 की उस महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर दोबारा अवसर देने और लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने की बात शामिल थी। इसके अलावा मासिक मानदेय और पीएससी भर्ती में आरक्षण से संबंधित घोषणाएं भी की गई थीं।

    मौजूदा प्रदर्शन में अतिथि विद्वानों की मुख्य मांग नियमितीकरण और नौकरी की स्थिरता को लेकर नीति बनाने की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी नीति नहीं बनती तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकी जाए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री से बातचीत के बाद भी इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बनी।

    शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने अपने पुराने आश्वासनों का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए और उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

    सागर में सेवा संकल्प अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल से बंडा शराबकांड को लेकर सवाल किया गया। मीडिया ने पूछा कि ऐसे मामले के बीच सेवा कार्यक्रमों का आयोजन कितना जरूरी है और इस घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है। मंत्री ने कार्यक्रमों को सेवा से जुड़ा बताया लेकिन शराबकांड से जुड़े सवाल पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।

    शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल हुआ। मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें पूरा वंदे मातरम् आता है। जवाब में उन्होंने कहा कि वे भी सीख रहे हैं और सभी को सीखते रहना चाहिए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ देर के लिए सवाल जवाब पर केंद्रित हो गया।

    इस तरह सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों में अभियान के साथ साथ अलग अलग मुद्दे भी सामने आए। सिंगरौली में यूजीसी का सवाल हो या सागर में शराबकांड से जुड़ा मुद्दा और भोपाल में अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन सभी घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

  • कर्मचारियों के पूरे वेतन पर बढ़ा कानूनी पेच हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने SC में लगाई याचिका

    कर्मचारियों के पूरे वेतन पर बढ़ा कानूनी पेच हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने SC में लगाई याचिका


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में वेतन को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें प्रोबेशन के दौरान लागू 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त करते हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

    राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कई आधार रखते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े नियम निर्धारित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 309 का हवाला दिया गया है। सरकार का कहना है कि प्रोबेशन के दौरान चरणबद्ध वेतन की व्यवस्था किसी मनमाने फैसले के तहत लागू नहीं की गई थी बल्कि वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में प्रक्रिया और विचार विमर्श के बाद सक्षम स्तर की मंजूरी से इसे लागू किया गया था।

    सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि प्रोबेशन की अवधि केवल नौकरी की शुरुआती अवधि नहीं बल्कि प्रशिक्षण और कर्मचारी की दक्षता के आकलन से जुड़ी प्रक्रिया है। राज्य ने 1966 के सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का उल्लेख करते हुए कहा है कि नियुक्ति के शुरुआती दौर में कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान किया गया था। सरकार का कहना है कि नीतिगत और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए जब तक किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान का उल्लंघन सामने न आए।

    मामले का एक अहम पहलू वित्तीय भार भी है। सरकार के मुताबिक यदि 2019 से अब तक प्रोबेशन पर रहे कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन के आधार पर अंतर की राशि का भुगतान करना पड़ा तो राज्य के खजाने पर बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके अलावा पुराने कर्मचारियों के एरियर के भुगतान के बाद बढ़े हुए वेतन का असर भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों के बजट प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार ने अपनी याचिका में पुलिस पटवारी और शिक्षक जैसी बड़ी भर्तियों का भी उल्लेख किया है। राज्य का तर्क है कि पुराने एरियर और वेतन संबंधी अतिरिक्त वित्तीय दायित्व का प्रभाव पूंजीगत कार्यों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित बजट पर पड़ सकता है। सरकार ने दूसरे राज्यों की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ में प्रोबेशन के दौरान स्टाइपेंड या कम वेतन की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। हालांकि वहां 2023 में यह व्यवस्था समाप्त कर 100 प्रतिशत वेतन लागू किया गया था लेकिन पुराने समय का एरियर नहीं दिया गया।

    इस विवाद में हाईकोर्ट पहले भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त करते हुए नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया।

    अब राज्य सरकार ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ऐसे में आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगी। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है और कर्मचारियों के पूरे वेतन तथा पुराने एरियर को लेकर अंतिम स्थिति शीर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • शिक्षकों के लिए बड़ी खबर दिसंबर में TET की तैयारी तेज आवेदन कम होने पर फिर बढ़ सकती है अंतिम तारीख

    शिक्षकों के लिए बड़ी खबर दिसंबर में TET की तैयारी तेज आवेदन कम होने पर फिर बढ़ सकती है अंतिम तारीख


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को लेकर गुरुवार को बड़ा फैसला हो सकता है। प्रदेश में लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख एक बार फिर बढ़ाए जाने की संभावना है। अभी तक करीब 19100 शिक्षकों ने ही परीक्षा के लिए आवेदन किया है। आवेदन की संख्या कम होने के कारण शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारी आवेदन के लिए अतिरिक्त समय देने पर विचार कर रहे हैं। गुरुवार को होने वाली बैठक में तय किया जाएगा कि शिक्षकों को आवेदन के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा या फिर 15 दिन की मोहलत मिलेगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा मंडल को दी है। इसके बाद परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर मंडल और लोक शिक्षण संचालनालय के स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश वैद्य सहित संबंधित अधिकारी बैठक में परीक्षा की आगे की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

    परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से शुरू की गई थी। शुरुआत में आवेदन के लिए समय निर्धारित किया गया था लेकिन अपेक्षाकृत कम आवेदन आने के बाद अंतिम तारीख में बदलाव किया गया। इसके बावजूद 16 सितंबर तक आवेदन करने वाले शिक्षकों की संख्या करीब 19100 ही पहुंच सकी है। अब विभाग चाहता है कि पात्र शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने के लिए पर्याप्त अवसर मिले। इसी वजह से आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

    अधिकारियों की बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि आवेदन की अवधि कितने दिनों के लिए बढ़ाई जाएगी। निर्णय होने के बाद एमपी ऑनलाइन और कर्मचारी चयन मंडल को आवेदन अवधि बढ़ाने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके बाद शिक्षक निर्धारित अतिरिक्त अवधि में परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा की तारीख फिलहाल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल की तैयारियों को देखते हुए दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में परीक्षा आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    मंडल के अधिकारियों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों की संख्या सामने आने के बाद व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्र और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए तैयारी में समय लगता है। इसी वजह से आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परीक्षा की तारीख तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में दिसंबर में TET कराने की संभावना बनी हुई है।

    इधर शिक्षक पात्रता परीक्षा के साथ शिक्षकों से जुड़े दूसरे मुद्दे भी चर्चा में हैं। लंबे समय से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। पदोन्नति प्राप्त कर चुके कई शिक्षकों को पदस्थापना आदेश का इंतजार भी है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति के बाद नवीन दायित्व और कार्यस्थल को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    इसके अलावा ई-अटेंडेंस व्यवस्था में सामने आ रही तकनीकी और व्यवहारिक दिक्कतों के समाधान की मांग भी उठ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं होने जैसी स्थितियों को लेकर शिक्षकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत बताई जा रही है। शिक्षक वर्ग चाहता है कि TET से लेकर पदोन्नति और ई-अटेंडेंस तक सभी मामलों में विभाग लिखित और समयबद्ध निर्देश जारी करे। अब गुरुवार की बैठक के बाद TET आवेदन की अंतिम तारीख और परीक्षा की संभावित समय-सारिणी को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

  • ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी

    ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी


    भोपाल। भोपाल में गुरुवार की शाम सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। शहर में 17 और ग्रामीण क्षेत्र में 11 स्थानों पर होने वाला यह सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन केवल रोशनी का आयोजन नहीं होगा बल्कि सेवा समर्पण सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण का संदेश भी देगा। ऐतिहासिक स्मारकों से लेकर प्रमुख चौराहों घाटों मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों तक दीपों की रोशनी नजर आएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में देवस्थलों तालाबों और सामुदायिक परिसरों को भी दीपों से सजाया जाएगा।

    राजधानी के अलग अलग हिस्सों में होने वाले इस आयोजन के जरिए शहर के गौरवशाली इतिहास आस्था शौर्य और आधुनिक विकास की झलक भी देखने को मिलेगी। सामूहिक रूप से जलने वाले हजारों दीप लोगों को सेवा और सकारात्मकता की साझा भावना से जोड़ने का प्रयास करेंगे। हर वार्ड में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है जिससे अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

    ग्रामीण क्षेत्र भी इस अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। ग्राम पंचायत चंदेरी के रामदेव बाबा मंदिर प्रांगण से लेकर अरेड़ी के अमृत सरोवर तक कई स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। ईमलिया में तालाब मंदिर के पास पाटनिया में हनुमान मंदिर ईंटखेड़ी सड़क पर नदी के पास अमोनी में पटेल बाबा मंदिर और सिकंदराबाद के सामुदायिक शेड में भी दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा बगरोदा बरखेड़ी बाजयाफ्त बरखेड़ा बोन्दर और फंदा कलां सहित कई स्थानों पर भी सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन होगा। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एकता सामूहिक सहभागिता और ग्राम विकास का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत केवल दीप प्रज्ज्वलन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और रक्तदान से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भोपाल जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक रक्तदान शिविरों का व्यापक अभियान चलेगा। इसके लिए जिले के 31 अस्पतालों और ब्लड सेंटरों को चिन्हित किया गया है। जिला चिकित्सालय भोपाल के अलावा शहर के कई निजी अस्पतालों मेडिकल संस्थानों और ब्लड सेंटरों में रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। अभियान के दौरान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।

    स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ी देव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक भीमनगर में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण और गोदभराई कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर आवश्यक टीकाकरण भी किया जाएगा।

    नरेला विधानसभा क्षेत्र में दीप प्रज्ज्वलन का विशेष आयोजन होगा। यहां सवा लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी आवास पर भी दीपों से विशेष सजावट की जाएगी। यहां 25 फीट ऊंचे दीप स्तंभ में 9125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही सेवा और समर्पण के 25 वर्ष विषय पर विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    इस तरह भोपाल में होने वाला दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत को सामूहिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास करेगा। शहर से गांव तक जलने वाले दीप सामाजिक एकता स्वास्थ्य सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के साथ अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम दौर में है, लेकिन विदाई से पहले एक और बारिश का दौर प्रदेश को मिल सकता है। इस मानसूनी सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे 37.3 इंच का 88.7% है। प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिलों में बारिश अब भी औसत से कम है।

    मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद चक्रवात या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर कुछ हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अभी दो सिस्टम, लेकिन असर सीमित

    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ अरब सागर में लो प्रेशर एरिया भी सक्रिय है। फिलहाल दोनों सिस्टम का प्रदेश में व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय होने से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे में झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में 4 इंच पानी गिरा। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश हुई।

    21 सितंबर के बाद बन सकता है नया दौर

    मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति नहीं है, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। 21 सितंबर के बाद चक्रवात और लो प्रेशर एरिया की गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। इसके असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।

    मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस लिहाज से अब मानसून की विदाई में 13 दिन बाकी हैं। हालांकि, प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी विदा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

    अक्टूबर की बारिश मानसूनी आंकड़े में नहीं जुड़ेगी

    मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की गणना 1 जून से 30 सितंबर के बीच होती है। इसलिए अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी सीजन के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक प्रदेश से पूरी तरह विदा होता है।

    फिलहाल प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 33.1 इंच है, जबकि सामान्य बारिश 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटे तक पहुंचने के लिए करीब 4.2 इंच बारिश और जरूरी है।

    पूर्वी MP में कमी घटकर 1% तक पहुंची

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आते हैं। यहां कुल मिलाकर बारिश सामान्य से 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार आया है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने, जिससे सीजन की बारिश का औसत ऊपर आया। एक समय पूर्वी हिस्सा सामान्य से बेहतर स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन बुधवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 1% हो गया।

    पश्चिमी हिस्से में ज्यादा जिले पिछड़े

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर जिलों में बनी हुई है, जबकि प्रदेश के कई पूर्वी और उत्तरी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश


    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    अब नजर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों पर है। यदि इनका असर प्रदेश पर व्यापक रहा तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के और करीब पहुंच सकता है।

  • नेहा पच्चीसिया मामले में एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, एफआईआर चुनौती याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

    नेहा पच्चीसिया मामले में एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, एफआईआर चुनौती याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

    मध्य प्रदेश /कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक यानी CSP नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और उन्हें मामले में फंसाया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

    नेहा पच्चीसिया के खिलाफ कटनी के कुठला थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह प्रकरण जमीन के सौदे और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को लेकर है। मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी भी आरोपी बनाए गए हैं। क्षितिज राज बारापात्रे को मामले में मुख्य फाइनेंसर और मारूफ अहमद हनफी को कागजी खरीदार बताया गया है।

    हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। उनकी ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नेहा पच्चीसिया फिलहाल फरार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पर्याप्त भ्रष्टाचार संबंधी साक्ष्य होने का दावा किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है।

    इस मामले से पहले नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका भी जिला अदालत में खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई से राहत पाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद से नेहा पच्चीसिया के साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के भी फरार होने की जानकारी दी गई है।

    तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक आरोपी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से तीनों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए एसआईटी, पुलिस की अलग-अलग टीमें और साइबर सेल संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

    नेहा पच्चीसिया का पुलिस सेवा में आने का सफर भी चर्चा में रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में प्रवेश किया था और बाद में कटनी में CSP के पद पर पदस्थ रहीं। वर्तमान मामले के सामने आने के बाद वह निलंबित हैं और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की वैधता को लेकर हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई चल रही है।

    मामले में आगे की दिशा अब हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इस बीच पुलिस की ओर से फरार आरोपियों की तलाश और मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया जारी है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया और जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।