Category: Madhya Pradesh

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी

    मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी


    मध्‍य प्रदेश आज के समय में शिक्षा केवल परीक्षा में अधिक अंक लाने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बदलते दौर में सफलता का असली आधार ज्ञान के साथ कौशल और व्यक्तित्व विकास बन चुका है। ऐसे समय में सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर और सेज ग्रुप के सीएमडी डॉ संजीव अग्रवाल ने अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा है कि बच्चों को केवल नंबरों की दौड़ में उलझाने के बजाय उनकी प्रतिभा और स्किल्स को विकसित करने पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में वही युवा सबसे आगे होंगे जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान नई सोच और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होगी।

    डॉ संजीव अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना होना चाहिए जो आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जहां छात्र सिर्फ नौकरी पाने की तैयारी न करें बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के विकास में योगदान दें।

    उन्होंने बताया कि सेज यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यदि कोई छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित नहीं होता तो केवल सूचना देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जाती बल्कि शिक्षक स्वयं उसके घर तक पहुंचते हैं और उसकी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। संस्थान का उद्देश्य हर छात्र को शिक्षा से जोड़कर रखना और उसकी क्षमता को सही दिशा देना है।

    डॉ अग्रवाल के अनुसार आज की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। इसलिए विश्वविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों को भी छात्रों से संवाद के लिए बुलाया जाता है। कैंपस में स्टार्टअप कॉन्क्लेव करियर डे और विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि विद्यार्थी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें और अपने करियर की बेहतर तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने व्यावहारिक सोच विकसित करने और नई परिस्थितियों में स्वयं निर्णय लेने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा का स्वरूप काफी अलग था। उस समय शिक्षक केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देते थे लेकिन अब समय बदल चुका है। आज सफल होने के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स लीडरशिप टीमवर्क और तकनीकी दक्षता जैसी क्षमताएं भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके समय में भी कम अंक आने का डर रहता था लेकिन आज कई अभिभावक बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल देते हैं जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है और वे अपनी वास्तविक प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते।

    युवाओं के लिए उनका संदेश भी स्पष्ट है कि सफलता मेहनत धैर्य और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से मिलती है। यदि किसी प्रयास में तुरंत सफलता न मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसे अनुभव मानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत करने वाले लोगों के लिए अवसर जरूर बनते हैं और ईमानदारी के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

    डॉ संजीव अग्रवाल का मानना है कि भारत का भविष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था में छिपा है जो बच्चों को केवल अच्छे अंक नहीं बल्कि बेहतर इंसान जिम्मेदार नागरिक और सफल पेशेवर बनने की प्रेरणा दे। जब शिक्षा में स्किल्स नवाचार और नैतिक मूल्यों को बराबर महत्व मिलेगा तभी देश की युवा शक्ति वास्तव में राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बन सकेगी।

  • सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी

    सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी यानी एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित की गई है जबकि भर्ती परीक्षा 2 अगस्त से आयोजित होगी। यह भर्ती समूह 2 उप समूह 1 के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना जरूरी होगा ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    भर्ती प्रक्रिया में राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू रहेगी। अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग को 16 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। कुल 73 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था के अनुसार परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि ओबीसी आरक्षण न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

    कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

    परीक्षा में आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा। पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कर्मचारी चयन मंडल ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

    परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन स्मार्ट वॉच कैलकुलेटर ब्लूटूथ डिवाइस या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    भर्ती के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है उन्हें भी आवेदन की अनुमति नहीं होगी। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष अभ्यर्थी भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती सुनहरा अवसर है। समय पर आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप देना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकता है।

  • दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर

    दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आधार जातीय समीकरण माना जा रहा है क्योंकि यहां किसी एक वर्ग के भरोसे जीत हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओबीसी ब्राह्मण अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही चुनावी परिणाम तय करेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का है। अनुमानित तौर पर करीब 95 हजार ओबीसी मतदाता हैं जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं। इस वर्ग में यादव कुशवाहा काछी लोधी बघेल पाल समेत कई प्रभावशाली समुदाय शामिल हैं। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर सबसे अधिक जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ओबीसी मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं तो मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।

    जातीय समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज भी सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं। दोनों समुदायों की अनुमानित संख्या करीब 33 33 हजार बताई जाती है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है जबकि अनुसूचित जाति विशेषकर अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुझान इस उपचुनाव का सबसे अहम फैक्टर बन सकता है।

    सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 60 हजार बताई जा रही है। इसमें ब्राह्मणों के अलावा बनिया राजपूत कायस्थ और सिंधी समाज की अच्छी भागीदारी है। यदि सामान्य वर्ग किसी एक दल के समर्थन में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खटीक वाल्मीकि कोरी और जाटव समाज कई बूथों पर जीत हार का अंतर तय करने की क्षमता रखते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भले लगभग आठ हजार है लेकिन करीबी मुकाबले में उनका समर्थन भी बेहद अहम साबित हो सकता है।

    कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी है और अब वह अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं। वहीं वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया था इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है जिससे कांग्रेस में मुकाबला और रोचक हो गया है।

    दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है जबकि आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 7742 मतों से हराया था इसलिए इस बार का उपचुनाव भी बेहद कांटे का माना जा रहा है। सभी दल जातीय संतुलन संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी जीत का समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।

  • ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर

    ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर


    भोपाल  भोपाल में ई रिक्शा चालकों के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शहर के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस से छेड़छाड़ की जा रही है जिसके कारण चलते वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। इससे न केवल चालकों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सवारियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा जबकि चालकों को वाहन धक्का देकर ले जाना पड़ा।

    बुधवारा निवासी ई रिक्शा चालक तनवीर मोहम्मद खान ने बताया कि वीआईपी रोड पर बच्चों को लेकर जा रहे थे तभी उनका वाहन अचानक बंद हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी रिक्शा चालू नहीं हुआ और आखिरकार उसे धक्का देकर ले जाना पड़ा। बाद में सिस्टम अनलॉक कराने के लिए उनसे 200 रुपए भी लिए गए। तनवीर का कहना है कि एक ही दिन में उनका ई रिक्शा चार बार बंद हुआ जिससे पूरे दिन की कमाई लगभग खत्म हो गई। उनका कहना है कि हर महीने लगभग आठ हजार रुपए की बैंक किस्त भरनी होती है लेकिन जब वाहन ही नहीं चलेगा तो किस्त कैसे चुकाई जाएगी।

    इसी तरह रेतघाट क्षेत्र के चालक फरान मोहम्मद खान ने भी बताया कि सवारी छोड़ने के बाद उनका ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने मुख्य एमसीबी बंद कर दोबारा चालू करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए वाहन चल पड़ा लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बंद हो गया। बाद में तकनीकी सहायता मिलने के बाद ही वाहन दोबारा चालू हो सका। फरान के अनुसार दिन में कई बार और रात के समय भी यह समस्या सामने आ रही है जिससे काम करना बेहद मुश्किल हो गया है।

    चालकों का दावा है कि यह समस्या केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा प्रभावित हुए हैं। मैकेनिकों की दुकानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी है वे किसी तरह सिस्टम को अनलॉक कर लेते हैं जबकि बाकी चालक घंटों तक परेशान होते रहते हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध BAT BMS नाम का एक ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से आसपास मौजूद कुछ ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोज सकता है। यदि किसी वाहन का सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा या पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े कुछ नियंत्रण विकल्प सामने आ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों में इसी ऐप का दुरुपयोग हुआ है या नहीं लेकिन इस संभावना को गंभीरता से जांचा जा रहा है।

    पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित ई रिक्शा मॉडलों में सुरक्षा संबंधी कौन सी तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं और उनका किस तरह गलत इस्तेमाल किया गया। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो यह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में ई रिक्शा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बीएमएस सिस्टम विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि चालकों की आजीविका और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

  • Weather Update 3 July बारिश और बादलों का डबल अटैक कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Weather Update 3 July बारिश और बादलों का डबल अटैक कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली । देशभर में 3 जुलाई शुक्रवार को मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आएगा। दक्षिण पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो चुका है और इसका असर उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिमी तटीय राज्यों तथा पूर्वोत्तर भारत में साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। वहीं कुछ इलाकों में तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और उत्तराखंड में गरज चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और तेज बहाव वाले नालों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय रहेगा। कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बुआई को गति मिलेगी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी और उमस का असर अभी भी बना रह सकता है।

    महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है जिससे जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

    पूर्वोत्तर भारत के असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा में भी तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कई नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।

    दक्षिण भारत के तमिलनाडु तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर बादलों के बीच धूप निकलने से उमस बनी रह सकती है। किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। ऐसे में जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है वहां लोगों को जलभराव बिजली गिरने और तेज हवा जैसी परिस्थितियों से सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें। मानसून की यह सक्रियता एक ओर जहां गर्मी से राहत दे रही है वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी हो गया है।

  • दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

    दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।

    वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्ष
    कुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है।

    इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

    भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारी
    बड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।

    भाजपा नेताओं ने की सराहना
    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

    भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया।

    इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।

    कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वर
    दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी।

    वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी।

    साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुट
    बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है।

    इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।

  • पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 24 जून को नौ दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून गुरुवार को उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग तक पहुंच गया। इसके साथ ही महज नौ दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया है। हालांकि, अब भी 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि भोपाल, इंदौर और देवास में सबसे अधिक वर्षा हुई है।

    खंडवा और हरदा में रेड अलर्ट
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार को खंडवा और हरदा जिलों के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में इन जिलों में 4 से 8 इंच तक वर्षा हो सकती है।

    19 जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    रतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

    इसके अलावा अलीराजपुर, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, जबलपुर, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, कटनी, शहडोल और मंडला में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सीजन का पहला रेड अलर्ट
    मौसम विभाग ने प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जो इस मानसून सीजन का पहला रेड अलर्ट है। गुरुवार को भोपाल समेत 15 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई।

    जुलाई में बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई, लेकिन जुलाई में मानसून के अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। आमतौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुलाई में होता है।

    उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा करीब 39 इंच मानी जाती है, जिसमें लगभग 14 इंच बारिश केवल जुलाई में दर्ज होती है। वहीं, बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई के दौरान 17 इंच से अधिक वर्षा होती है। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किया जाता है।

  • पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

    पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

    बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

    इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

    घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

  • मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती

    मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती


    भोपाल । राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं।

    स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता

    भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।

    ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे

    भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

    न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय

    शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है।

    रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं।

    आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं।

    अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं।

    नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं।

    भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं।

    मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 31 पद रिक्त हैं। सतना जिले में कार्यकर्ता के 11 एवं सहायिका के 30 पद रिक्त हैं। सिंगरौली जिले में कार्यकर्ता के 2 तथा सहायिका के 8 पद रिक्त हैं। सीधी जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 12 पद रिक्त हैं।

    अनूपपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 19 पद रिक्त हैं। उमरिया जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। शहडोल जिले में कार्यकर्ता के 11 तथा सहायिका के 27 पद रिक्त हैं।

    छतरपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। टीकमगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 15 एवं सहायिका के 11 पद रिक्त हैं। दमोह जिले में कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 41 पद रिक्त हैं। निवाड़ी जिले में कार्यकर्ता के 6 एवं सहायिका के 6 पद रिक्त हैं। पन्ना जिले में कार्यकर्ता के 4 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। सागर जिले में कार्यकर्ता के 25 एवं सहायिका के 47 पद रिक्त हैं।