Category: Madhya Pradesh

  • छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में हुए चर्चित गोलीकांड के आरोपी शालिगराम गर्ग उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिगराम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने उन्हें 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने पहले से सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद अब शालिगराम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

    शालिगराम गर्ग के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर छतरपुर के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमला किया था। शिकायत के मुताबिक घटना के दौरान गोली भी चलाई गई थी और एक गोली मोतीलाल के सीने में जाकर फंस गई थी। घायल मोतीलाल का जिला अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था जिसके बाद गोली निकाल दी गई थी। इस मामले में रघुराजनगर थाना पुलिस ने जांच के बाद शालिगराम को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था।

    जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शालिगराम की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित दवे ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शालिगराम को राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के चलते मामले में फंसाया गया है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि आरोपी को बदनाम करने के उद्देश्य से उसके खिलाफ मामला बनाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई के निर्देश दिए।

    पूरा मामला जुलाई 2026 में सामने आया था। मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि शालिगराम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घर से बाहर खींचकर लाठी डंडों से पीटा गया। इसके बाद गोली चलाए जाने का आरोप लगाया गया। मोतीलाल के सीने में गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।

    मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई थी। पुलिस जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। एक तस्वीर में शालिगराम के हाथ में हथियार दिखाई देने का दावा किया गया था। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और बाद में शालिगराम को गिरफ्तार कर लिया।

    इस मामले में जमीन विवाद की बात भी सामने आई थी। घायल मोतीलाल ने आरोप लगाया था कि शालिगराम उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। हालांकि यह आरोप मामले की शिकायत और बयान का हिस्सा हैं और अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इन पर निर्णय होना बाकी है।

    मामले पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि शालिगराम गर्ग से उनका कोई संबंध नहीं है और वह इस बात को पहले भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने घटना को लेकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही थी। फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालिगराम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

  • पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी

    पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने मोहर सिंह रावत की हत्या के आरोप में उनके भतीजे दिलीप रावत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी को शक था कि करीब 7 से 8 साल पहले उसके पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे उसके फूफा मोहर सिंह रावत का हाथ था। इसी बात को लेकर उसके मन में लंबे समय से नाराजगी थी। पुलिस का कहना है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते दिलीप ने हत्या की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

    घटना 21 अगस्त की रात रातीकिरार पुलिया के पास हुई। पुलिस के अनुसार दिलीप ने शराब के नशे में मोहर सिंह के साथ मारपीट की। इसके बाद पत्थर से उनके सिर पर हमला किया जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने शव को सड़क से नीचे ले जाकर छिपाने की कोशिश भी की। हालांकि वह ज्यादा नशे में था और शव को अधिक दूर तक नहीं ले जा सका। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया।

    22 अगस्त को जाफरपुर निवासी मिथुन रावत ने सिरसौद थाने में अपने पिता मोहर सिंह के लापता होने की सूचना दी। परिवार के मुताबिक मोहर सिंह 21 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे अपने भतीजे दिलीप के साथ शिवपुरी से छिमछिमा मंदिर जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। इसी बीच गांव के युवक दुर्वेन्द्र रावत ने परिजनों को जानकारी दी कि मोहर सिंह रातीकिरार पुलिया के पास पड़े हुए हैं। परिवार के लोग तुरंत वहां पहुंचे तो मोहर सिंह मृत अवस्था में मिले।

    मामले की जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और सिर बुरी तरह कुचला गया था। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल और साइबर सेल की मदद ली। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। जांच आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस का शक मोहर सिंह के भतीजे दिलीप रावत पर गहराता गया।

    पुलिस के मुताबिक इसी दौरान दिलीप गांव छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। 14 सितंबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दिलीप को शिवपुरी में पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी मथुरा से शिवपुरी की ओर आ रहा था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने कथित तौर पर वारदात और हत्या की वजह के बारे में जानकारी दी।

    पूछताछ में सामने आया कि दिलीप के पिता प्रीतम रावत की करीब 7 से 8 साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। यह मौत उसकी बुआ के घर यानी मोहर सिंह के घर पर हुई थी। दिलीप को लंबे समय से शक था कि उसके पिता की मौत के लिए मोहर सिंह जिम्मेदार थे। इसी शक और पुरानी रंजिश को लेकर उसके मन में फूफा के खिलाफ गुस्सा बना हुआ था।

    पुलिस के अनुसार 21 अगस्त की रात शराब के नशे में उसने मोहर सिंह के साथ मारपीट की और पत्थर से सिर पर हमला कर दिया। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए दोबारा घटनास्थल पर पहुंचा और उसे घसीटकर सड़क से नीचे ले जाने की कोशिश की। लेकिन नशे की हालत में वह सफल नहीं हो सका और मौके से भाग गया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

  • शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म

    शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के बिजरौनी गांव के पास सिंध नदी में मंगलवार दोपहर डूबे 14 साल के सौरभ कुशवाह का शव बुधवार सुबह बरामद कर लिया गया। बच्चे की तलाश के लिए करीब 18 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। बुधवार सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी में शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची परिवार में चीख पुकार मच गई। परिजन बदहवास होकर मौके पर पहुंचे और बच्चे का शव देखते ही रोने लगे।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को ऋषिपंचमी के अवसर पर बिजरौनी गांव की कुछ महिलाएं सिंध नदी के किनारे पूजा और स्नान करने पहुंची थीं। उनके साथ परिवार के बच्चे भी मौजूद थे। सौरभ भी अपनी मां के साथ नदी पर गया था। महिलाएं नदी किनारे पूजा की तैयारी में जुटी थीं इसी दौरान सौरभ नहाने के लिए नदी के पानी में उतर गया। देखते ही देखते वह गहरे पानी की तरफ चला गया और डूब गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी की गहराई अधिक होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीईआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने मंगलवार दोपहर से नदी में सौरभ की तलाश शुरू कर दी। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने नदी के आसपास काफी देर तक तलाश की लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। शाम होने के बाद अंधेरा बढ़ गया जिसके चलते रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद बुधवार सुबह दोबारा तलाश शुरू करने का फैसला लिया गया।

    बुधवार सुबह करीब 4 बजे सौरभ के परिजन और गांव के लोग फिर नदी के किनारे पहुंच गए। ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर नदी में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। कई घंटे की कोशिश के बाद सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी के पानी में सौरभ का शव दिखाई दिया। शव को बाहर निकाला गया और पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

    सौरभ की मौत के बाद ग्रामीणों में सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन को लेकर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से रेत निकालने के लिए कई जगह गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है और वे सामान्य नदी के तल से अलग नजर नहीं आते। ऐसे में नदी में नहाने वाले लोगों को पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के गहरे गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

    पुलिस ने शव बरामद करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सौरभ की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बिजरौनी गांव में भी शोक का माहौल है। ऋषिपंचमी के दिन मां के साथ पूजा के लिए नदी पर गया सौरभ वापस घर नहीं लौट सका। करीब 18 घंटे की तलाश के बाद उसका शव मिलने से परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं।

  • ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता

    ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता


    भोपाल । AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भोपाल में दिए गए बयान के बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार किया है। ओवैसी ने मंगलवार को भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित UCC विरोधी सभा के दौरान रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र किया था। उन्होंने विधायक को काजी कैंप आने की चुनौती दी थी। इसके बाद बुधवार को रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने पुराने बयान पर कायम रहने की बात कही।

    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद विधायक ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ओवैसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय सेना ने किया और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। शर्मा ने दावा किया कि आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत की मिसाइल कार्रवाई जारी रहेगी।

    विधायक ने कहा कि मिसाइल चलती थी और मिसाइल चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां आतंकवाद के कैंप होंगे और जहां भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कैंप होंगे वहां भारत की मिसाइल तैयार है। शर्मा ने कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं। उन्होंने ओवैसी को पूरा भाषण सुनने की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वह वकील होने के नाते इसे अदालत में ले जा सकते हैं।

    इसके बाद रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी ओवैसी के बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल हिंदुओं से वोट मांगते हैं तो हिंदुओं से जुड़े कानूनों को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं। उन्होंने UCC को लेकर अपनी पार्टी के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि मध्यप्रदेश में UCC लागू हो चुका है। शर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है।

    ओवैसी ने भोपाल में आयोजित अपनी सभा में UCC को लेकर अलग रुख रखा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को उनकी संस्कृति परंपरा और धार्मिक पहचान के कारण UCC से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों शामिल किया गया। उन्होंने UCC के जरिए RSS का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था। ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों का भी हवाला दिया था।

    इस तरह भोपाल में UCC को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर ओवैसी UCC के प्रावधानों और इसके दायरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर रामेश्वर शर्मा इसे लागू करने के समर्थन में अपना पक्ष रख रहे हैं। मिसाइल संबंधी पुराने बयान को लेकर ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा के जवाब ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

  • सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान

    सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान


    सीधी । मध्यप्रदेश में मंगलवार को राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं चर्चा में रहीं। सीधी में सड़क की बदहाली को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें सड़क निर्माण शुरू नहीं होने पर कड़ी चेतावनी दी। वहीं इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र कार्यक्रम को लेकर सवाल पूछे जाने पर ऐसा जवाब दिया जिस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग हंस पड़े। दूसरी ओर खंडवा में कलेक्टर के किसानों से नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने कुत्ते के गले में ज्ञापन बांधकर विरोध जताया। रतलाम में भी किसानों ने कलेक्ट्रेट में हनुमान चालीसा का पाठ किया।

    सीधी में सड़क की खराब हालत को लेकर आंदोलन कर रहीं लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा को सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इसी साल सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो सांसद की सांसदी चली जाएगी। उन्होंने अपने बयान में महिला शक्ति और रावण के संदर्भ का उदाहरण देते हुए सांसद के साम्राज्य के खत्म होने की बात कही।

    लीला साहू के मुताबिक उनके गांव की सड़क लंबे समय से खराब है। सड़क पर कीचड़ जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही मुश्किल है और पैदल चलने में भी लोगों को परेशानी होती है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस के गांव तक पहुंचने में भी दिक्कत हो सकती है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने धरना प्रदर्शन शुरू किया है।

    लीला साहू ने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया जिसमें उनके मुताबिक गर्भावस्था के दौरान सांसद की ओर से हेलिकॉप्टर से ले जाने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांव की गर्भवती महिलाओं को वास्तव में परेशानी हो रही है तो उनकी मदद के लिए हेलिकॉप्टर क्यों नहीं आया।

    इधर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी बढ़ाने के लिए रैपर्स और सिंगर्स को बुलाए जाने की चर्चा के बीच विजयवर्गीय ने तंज करते हुए कहा कि जबरदस्ती बुला रहे हैं और राहुल गांधी इसके लिए पर्याप्त हैं। उनके इस बयान के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह बयान राजनीतिक तंज के तौर पर सामने आया।

    खंडवा में किसानों का विरोध प्रदर्शन अलग वजह से चर्चा में आ गया। किसान अपनी मांगों को लेकर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे कलेक्टर को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन कलेक्टर के कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद किसानों ने विरोध के अनोखे तरीके के तौर पर एक कुत्ते के गले में ज्ञापन बांध दिया।

    भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने भी इस दौरान प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कलेक्टर को लेकर कड़ा बयान दिया और कहा कि वे अधिकारियों की अकड़ निकालने का काम करेंगे। इसी तरह रतलाम में भी किसानों के कलेक्टर से नहीं मिलने पर नाराजगी सामने आई। किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

    इन घटनाओं के बीच मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक IAS अधिकारी की ऊर्जा विभाग में वापसी को लेकर भी चर्चाएं चलती रहीं। खबर में दावा किया गया है कि अधिकारी अपनी वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं और दिल्ली स्तर पर भी संपर्क साधे जा रहे हैं। साथ ही उनके बिहार से जुड़े पारिवारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं रखी गई है।

    इस तरह मंगलवार को मध्यप्रदेश में सड़क की बदहाली से लेकर किसानों के विरोध और नेताओं के राजनीतिक बयानों तक कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। सीधी में सड़क आंदोलन खंडवा में अनोखा ज्ञापन और इंदौर में राहुल गांधी को लेकर विजयवर्गीय का बयान खास तौर पर चर्चा में रहा।

  • UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती

    UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती


    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए समान नागरिक संहिता यानी UCC का विरोध किया। यह सभा AIMIM के UCC विरोधी अभियान का हिस्सा थी। इस दौरान ओवैसी ने मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखने और मुसलमानों को इसके दायरे में लाने को लेकर सवाल उठाए।

    ओवैसी ने कहा कि मध्यप्रदेश की आबादी में आदिवासियों की बड़ी हिस्सेदारी है और उनकी अलग संस्कृति परंपराएं तथा सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। उनके मुताबिक इन्हीं कारणों से आदिवासियों को UCC से बाहर रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि अलग संस्कृति और परंपराओं को आधार मानकर एक समुदाय को UCC से अलग रखा जा सकता है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों लाया जा रहा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के जरिए RSS का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सभा में ओवैसी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान है। उन्होंने UCC के जरिए हिंदू मैरिज एक्ट हिंदू सक्सेशन एक्ट और अडॉप्शन एंड कस्टडी से जुड़े प्रावधानों को गैर हिंदुओं पर लागू करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 29 का उल्लेख करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों की बात कही।

    ओवैसी ने केंद्र में भाजपा के सहयोगी दलों से भी UCC को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की। उन्होंने TDP JDU चिराग पासवान एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि यदि इन दलों का भाजपा से कुछ वैचारिक अंतर अभी भी है तो उन्हें UCC का विरोध करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब समान नागरिक संहिता को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।

    भोपाल की सभा में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का मुद्दा भी उठा। ओवैसी ने काजी कैंप से जुड़े उनके पुराने मिसाइल वाले बयान का जिक्र करते हुए उन्हें काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं के नाम भी गिनाए और कहा कि भोपाल की इस जमीन का अपना ऐतिहासिक महत्व है।

    ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप उनके राजनीतिक वक्तव्य के तौर पर सामने आए। उन्होंने सागर में जहरीली शराब के मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। लव जिहाद से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि यदि दो बालिग अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं तो उन्हें रोकने का अधिकार सरकार या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होना चाहिए।

    सभा के दौरान ओवैसी ने सोवियत यूनियन का उदाहरण देते हुए RSS पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां कम्युनिस्ट शासन के दौरान मदरसों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई घर पर जारी रखी। भोपाल में हुई इस सभा के दौरान UCC के साथ धार्मिक स्वतंत्रता सामाजिक पहचान अल्पसंख्यक अधिकार और राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

  • सागर जहरीली शराब कांड में पहुंची NHRC टीम, पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं होने पर पुलिस से नाराज

    सागर जहरीली शराब कांड में पहुंची NHRC टीम, पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं होने पर पुलिस से नाराज


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की टीम मंगलवार को सागर पहुंची। आयोग सदस्य प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में टीम ने जगतार और घुघर गांवों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और घटना के बाद की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान कई परिजनों ने पुलिस पर अब तक उनके बयान दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया। पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आने पर आयोग की टीम ने नाराजगी जताई और पुलिस को तत्काल बयान दर्ज करने के निर्देश दिए।

    बंडा तहसील क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचाररत हैं। जहरीली शराब के सेवन से कुछ लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने की बात भी सामने आई है। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की ओर से कार्रवाई जारी है।

    पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

    NHRC की टीम ने जगतार और घुघर गांवों में पहुंचकर जहरीली शराब त्रासदी में जान गंवाने वाले और प्रभावित लोगों के परिजनों से बातचीत की। परिवारों ने आयोग के समक्ष घटना से जुड़ी परेशानियों और पुलिस कार्रवाई की जानकारी रखी। परिजनों ने बताया कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं।

    इस पर आयोग सदस्य प्रियांक कानूनगो ने पुलिस अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान जांच की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें तत्काल दर्ज किया जाना चाहिए।

    ‘सभी कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी’

    पत्रकारों से चर्चा में प्रियांक कानूनगो ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोग घायल हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने मामले की जांच में सभी कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    कानूनगो के मुताबिक पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि कई लोगों के बयान अब तक दर्ज नहीं किए गए हैं। इसके बाद पुलिस को पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान तत्काल दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जांच में किसी तरह की कमी न रहे।

    शराब आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग

    पीड़ित परिवारों ने आयोग के सामने यह आरोप भी लगाया कि स्थानीय शराब आपूर्तिकर्ताओं के बयान पुलिस ने नहीं लिए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की गई है। आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है।

    प्रियांक कानूनगो ने बताया कि पुलिस से जिले में शराब के सभी एजेंटों की सूची तैयार करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करना जरूरी है।

    30 में से 19 आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 30 आरोपियों में से 19 को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत राजपूत अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

    NHRC टीम के दौरे के बाद मामले की जांच और पुलिस कार्रवाई की निगरानी बढ़ने की संभावना है। आयोग ने पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज करने के साथ ही अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर भी जोर दिया है।

  • MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन

    MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के काफिले (Convoy) से जुड़ा सड़क हादसा सामने आया है. शहर के VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हादसा हुआ, जिसमें करीब 4 से 5 बाइक सवारों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    बताया जा रहा है कि VIP रोड पर ओवैसी का काफिला गुजर रहा था. इसी दौरान काफिले के वाहनों और बाइक सवारों (Motorcyclists) के बीच टक्कर हो गई. हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सड़क पर मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. हादसे में घायल बाइक सवारों को किस तरह की चोटें आई हैं।

    इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है. वहीं, VIP रोड पर हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित होने की सूचना है. पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालते हुए यातायात को सामान्य कराया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. हादसा काफिले के किस वाहन से हुआ और दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    यातायात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वसंत कॉल ने बताया कि असदुद्दीन ओवैसी के काफिले में चल रही कुछ गाड़ियां एक दूसरे से टकराई हैं. काफिला मोड़ पर रोक गया था उसके बाद ये हादसा हुआ है. पुलिस ने तुरंत ही मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. कुछ बाइक सवारों को चोट आई थी. उनको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा दिया है।

    VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हुए इस हादसे ने एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़

    PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद मुंबई के पास रहने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा के करीब 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ सामने आया है। असगर अली वोरा ने अपनी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब इस मामले में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और जमीन से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की जानकारी भी दी है।

    असगर अली वोरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात 8 सितंबर को हुई थी। दोनों गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ चुके हैं। मुलाकात के दौरान वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी जमीन से जुड़े पुराने विवाद को रखा था। उन्होंने बताया था कि उन्होंने वर्ष 1989 में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार वर्ष 2011 में इस जमीन पर कब्जे का विवाद शुरू हुआ था। वोरा का आरोप था कि स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया था।

    वोरा का कहना था कि वह लंबे समय से इस मामले को लेकर अलग अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे थे। करीब 15 वर्षों तक मामला अधिकारियों के सामने उठाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला। इसी बीच प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और उन्होंने अपनी समस्या सीधे उनके सामने रखी। मुलाकात के बाद वोरा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही थी।

    मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र मंत्रालय में भी इस विवाद को लेकर बैठक हुई। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में अधिकारियों और दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। बैठक में असगर अली वोरा और नरेंद्र मेहता के साथ मीरा भायंदर नगर निगम के नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी मौजूद रहे।

    बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति को सरेंडर करने की बात कही। मेहता के अनुसार उन्होंने यह जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

    इस मामले में भाजपा विधायक ने पुलिस कमिश्नर को भी अलग पत्र दिया है। इसमें उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी दी। मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद करीब डेढ़ दशक से जमीन विवाद को लेकर संघर्ष कर रहे असगर अली वोरा को राहत मिलने की उम्मीद बनी है।

    अब इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया जमीन के कब्जे और निर्माण अनुमति से जुड़े प्रशासनिक कदमों पर निर्भर करेगी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विवाद में आए इस बदलाव ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी

    ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी


    भोपाल। भोपाल में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सभा के बाद अब तेलंगाना के विधायक टी राजा की प्रस्तावित धर्मसभा को लेकर सियासत तेज होती दिखाई दे रही है। हिंदू उत्सव समिति ने प्रशासन से टी राजा की सभा के लिए अनुमति देने की मांग उठाने का फैसला किया है। समिति का कहना है कि जिस सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में ओवैसी की सभा आयोजित की गई है वहां टी राजा की सभा के लिए भी अनुमति पर विचार किया जाना चाहिए। समिति इस मुद्दे को लेकर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात करने की तैयारी में है।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक समिति इकबाल मैदान अग्रसेन चौक या सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगेगी। उनका कहना है कि मई में टी राजा की प्रस्तावित सभा को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रद्द किया गया था। अब ओवैसी की सभा आयोजित होने के बाद समिति ने प्रशासन के सामने समान नियमों के आधार पर अनुमति देने का सवाल उठाने की बात कही है।

    दरअसल मंगलवार रात भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में असदुद्दीन ओवैसी की सभा हुई थी। कार्यक्रम में ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को यूसीसी से बाहर रखने की मांग रखी और सरकार पर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। ओवैसी ने लव जिहाद कानून का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार से सवाल किए। सभा के दौरान उन्होंने हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के बयानों और सागर शराब मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इसी घटनाक्रम के बाद टी राजा की सभा का मुद्दा फिर सामने आया है। टी राजा की भोपाल के गांधीनगर क्षेत्र में 31 मई को धर्मसभा प्रस्तावित थी लेकिन पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। कार्यक्रम निरस्त होने के बाद टी राजा ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए नाराजगी जाहिर की थी। उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद भी हुआ था।

    धर्मसभा को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में भोपाल के तलैया थाने में शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत में दो इंस्टाग्राम अकाउंट संचालकों पर धमकी अभद्र भाषा और भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए थे। मामले में सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका का भी उल्लेख किया गया था।

    टी राजा तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अपने आक्रामक बयानों को लेकर अक्सर राजनीतिक चर्चा में रहते हैं। उनकी प्रस्तावित भोपाल सभा की अनुमति का मामला पहले न्यायालय तक भी पहुंचा था। अब ओवैसी की सभा के बाद हिंदू उत्सव समिति की ओर से टी राजा के कार्यक्रम की अनुमति मांगने की तैयारी ने इस पूरे मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या फैसला करता है इस पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर रहेगी।