Category: Madhya Pradesh

  • आईसीयू में बदल रहा मरीजों का पैटर्न: युवाओं में स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा परेशानी बुजुर्गों में कई बीमारियां बनी बड़ी वजह

    आईसीयू में बदल रहा मरीजों का पैटर्न: युवाओं में स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा परेशानी बुजुर्गों में कई बीमारियां बनी बड़ी वजह


    भोपाल । भोपाल में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले गंभीर मरीजों में बुजुर्गों की संख्या अधिक दिखाई देती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं जो धीरे धीरे गंभीर रूप ले सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं में बढ़ता तनाव नींद की कमी लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना और बिगड़ी लाइफस्टाइल चिंता का कारण बन रहे हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर मरीज शुरुआत में आईसीयू तक नहीं पहुंचते और ओपीडी में ही इलाज कराते हैं लेकिन कुछ मामलों में स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
    भोपाल में आयोजित एमपी क्रिटिकॉन 1.0 में इंदौर के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. संजय धानुका और डॉ. आनंद सांघी ने आईसीयू में बदलते मरीजों के पैटर्न पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि बीमारियों का मूल स्वरूप पूरी तरह नहीं बदला है लेकिन मरीजों की उम्र उनकी जीवनशैली और गंभीर अवस्था तक पहुंचने के कारणों में बदलाव जरूर दिखाई दे रहा है।

    20 से 40 साल की उम्र के लोगों में स्ट्रेस डिसऑर्डर इंसोम्निया सिरदर्द और लाइफस्टाइल से जुड़ी परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर चलाने तथा देर रात तक जागने की आदत का असर नींद के साथ गर्दन कंधे और मांसपेशियों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच बीच में ब्रेक लेना चाहिए। इसके साथ सर्वाइकल और शोल्डर एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करना भी मददगार हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार प्रोफेशनल स्ट्रेस अब केवल ऑफिस की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। काम का दबाव कम समय में ज्यादा काम करने की अपेक्षा और घर की जिम्मेदारियां मिलकर तनाव को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव कुछ लोगों में गंभीर मानसिक परेशानियों का कारण बन सकता है। आईसीयू में पॉइजनिंग के मरीज भी पहुंचते हैं जिनमें कीटनाशक और सल्फास जैसी चीजों से हुई पॉइजनिंग के मामले शामिल हैं। ऐसे मामलों में मरीज के शारीरिक इलाज के साथ मानसिक स्थिति का आकलन भी जरूरी माना जाता है और जरूरत पड़ने पर साइकेट्रिस्ट को उपचार में शामिल किया जाता है।

    तनाव का असर बच्चों और छात्रों में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल नहीं देने पढ़ाई को लेकर डांटने या अपेक्षाओं के दबाव जैसी स्थितियां कुछ बच्चों में काफी तनाव पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में परिवार की भूमिका अहम हो जाती है। केवल दिखाई देने वाले लक्षणों का इलाज करने के बजाय तनाव के पीछे की वजह समझना जरूरी है।

    वहीं दूसरी तरफ आईसीयू में बुजुर्ग मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। बढ़ती उम्र के साथ डायबिटीज ब्लड प्रेशर किडनी संबंधी बीमारी और दूसरी पुरानी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं। कई बार संक्रमण डायलिसिस हार्ट अटैक एंजाइना या ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं के कारण ऐसे मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। बढ़ती उम्र और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का असर भी क्रिटिकल केयर सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र दोनों ही आईसीयू पर अलग अलग तरह का दबाव बढ़ा रहे हैं।

  • MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम

    MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जो मजबूत रहा तो प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है; अभी सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले 33 इंच बारिश हुई है।

    88.5% बारिश, लक्ष्य तक पहुंचने 4.3 इंच बाकी

    प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। मंगलवार तक 33 इंच यानी सामान्य बारिश की 88.5% बारिश हो चुकी है। सामान्य औसत 37.3 इंच है, ऐसे में सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 4.3 इंच बारिश और चाहिए।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस अवधि में होने वाली बारिश ही मानसून के आंकड़ों में शामिल की जाती है। हालांकि कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक विदा होता है। इस बार सितंबर के आखिरी हिस्से में इसकी विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले होने वाली बारिश प्रदेश के कुल आंकड़े को सामान्य के करीब ले जा सकती है।

    17 से 21 सितंबर के बीच बारिश का जोर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसकी ताकत अच्छी रही और इसका प्रभाव व्यापक रहा तो मानसून के बचे दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े को छू सकता है।

    मंगलवार को लो प्रेशर एक्टिव, लेकिन तेज बारिश नहीं

    मंगलवार को पश्चिमी मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधि भी देखने को मिली, लेकिन इसका असर तेज बारिश के रूप में सामने नहीं आया। प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश दर्ज नहीं हुई।

    भोपाल में दिनभर धूप खिली रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम लगभग ऐसा ही रहा। यानी सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद मंगलवार को प्रदेश में बारिश का जोर देखने को नहीं मिला।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिर चुका है। ऐसे में मानसून के बचे दिनों में यहां होने वाली बारिश को अतिरिक्त बारिश के तौर पर देखा जाएगा।

    37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे

    दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे हैं। इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां सामान्य की आधी बारिश भी अब तक नहीं हुई है।

    इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। अब निगाह 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित सिस्टम पर है कि वह कितनी व्यापक बारिश कराता है और प्रदेश को मानसून के सामान्य आंकड़े के कितने करीब पहुंचाता है।

  • भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल । शहर के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब इस मामले की सुनवाई बाद में होगी। फिलहाल नई तारीख तय नहीं हुई है।

    इस सुनवाई में भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रहे करीब 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद थी। इसी मामले में मंगलवार, 15 सितंबर को सुनवाई तय थी। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी थी। अब सुनवाई टलने के बाद अगली तारीख का इंतजार है।

    इस मामले में भोपाल नगर निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि निगम ने कार्रवाई को लेकर जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें कई बातें सही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं। रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई को लेकर कोर्ट के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

    दरअसल, 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक नोटिस देने का अभियान चला।

    इस दौरान सूची में शामिल करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद निगम ने 3 दिनों तक कार्रवाई करते हुए करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया था। हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई।

    निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए थे। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 15 दिनों से इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी हो रही है।

    भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

    कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए राहत और स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    रहवासियों की मांग है कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बंद की जाएं। दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले शोर और भीड़ को रोका जाए। बढ़ते ट्रैफिक और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली सार्वजनिक परेशानी को कम किया जाए। रहवासी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की मांग की गई है। साथ ही नियमों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग है।

    अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। नई तारीख तय होने के बाद 62,500 प्रतिष्ठानों और भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

  • MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

    MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

     मध्यप्रदेश । अगले चार दिन मध्यप्रदेश की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं। 17 से 20 सितंबर के बीच प्रदेश में देश के कई बड़े चेहरे नजर आएंगे। एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा होगा, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी युवाओं के बीच पहुंचेंगे। इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी प्रदेश में मौजूद रहेंगे। ऐसे में इन चार दिनों के दौरान मध्यप्रदेश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल काफी सक्रिय रहने वाला है और इन सभी कार्यक्रमों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

    17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनका मंदसौर, इंदौर और उज्जैन में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। नितिन नवीन मध्यप्रदेश में इससे जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगे।

    नितिन नवीन मंदसौर में SVAMITVA योजना से जुड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति और आवासीय जमीन से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार कर लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उनके दौरे में गांधी सागर अभयारण्य भी महत्वपूर्ण रहेगा। यहां चीता पुनर्वास योजना के तहत कार्यक्रम होना है। कूनो के बाद गांधी सागर को भी चीतों के लिए विकसित किया जा रहा है।

    17 और 18 सितंबर को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उज्जैन में रहेंगे। उज्जैन पहुंचने के बाद वे संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश की पहली ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि, गीतकार मनोज मुंतशिर और IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु राय समेत कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी।

    मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित बड़े दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का भी हिस्सा बनेंगे। उनके दौरे को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटा है।

    19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंचेंगे। यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए वे युवाओं और Gen Z से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस संगठन की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    चार दिनों के इस सिलसिले का अंतिम बड़ा कार्यक्रम 20 सितंबर को भोपाल में होगा। RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले लाल परेड मैदान में आयोजित ‘शाखा संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के शामिल होने की तैयारी है। इनमें 30 हजार से ज्यादा Gen-Z स्वयंसेवक शामिल होंगे, जबकि कुल उपस्थिति करीब 50 हजार बताई जा रही है।

    संघ के अनुसार भोपाल विभाग के पांच जिलों और छह नगरों की करीब 800 शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से शारीरिक अभ्यास और दंड प्रदर्शन भी किया जाएगा। दत्तात्रेय होसबाले अपने संबोधन में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, भविष्य के लक्ष्यों और इतिहास से मिलने वाली सीख पर बात करेंगे।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय


    जबलपुर:
     एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। करीब तीन सप्ताह से लंबित याचिका पर अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

    गिरिबाला सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए नियमित जमानत की मांग की है। मंगलवार की सुनवाई में उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने गिरिबाला सिंह की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत दिए जाने की दलील रखी।

    गिरिबाला सिंह के वकील के मुताबिक, उनकी मुवक्किल की ओर से ऐसा कोई कृत्य नहीं किया गया है, जिसके आधार पर उन्हें अपराध में संलिप्त माना जाए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ट्विशा शर्मा ने आत्महत्या की थी। वकील ने गिरिबाला सिंह की ओर से किसी तरह की गलती किए जाने से इनकार किया।

    सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। एजेंसी ने कहा कि वह मामले की केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहती है और जमानत याचिका पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराना चाहती है। इसके लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।

    अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। फिलहाल गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनकी जमानत का निर्णय अगली सुनवाई में CBI के जवाब और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगा।

    मामले के अनुसार, ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और गिरिबाला सिंह तथा उनके बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    फिलहाल गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह जेल में हैं। इसी मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों को जमानत के पक्ष में रखा, जबकि CBI ने जवाब और केस डायरी प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।

    अदालत द्वारा अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब मामले में CBI का जवाब महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद अदालत जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलों और जांच से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आगे सुनवाई करेगी। अभी पूर्व जज गिरिबाला सिंह को जमानत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में हैं।

  • एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, साइबर सुरक्षा और भूमि संबंधी नीतियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल 10 हजार 630 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

    कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस के माध्यम से 12 प्रमुख मार्गों के निर्माण के लिए 4,600 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी। इस ऋण के लिए राज्य सरकार की ओर से गारंटी प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित मार्गों में भोपाल-विदिशा, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास, नीमच-मनासा-रामपुरा-झालावाड़, इंदौर-देपालपुर, चापड़ा-नेवरी-देवास, दिनारा-दतिया-सेवड़ा, आगर-सारंगपुर, सोयत-माचलपुर-जीरापुर, राहतगढ़-खुरई-खिमलासा और अन्य मार्ग शामिल हैं।

    राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व नाममात्र मूल्य पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। इसके बदले निगम राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी जारी करेगा। ऋण और ब्याज का भुगतान टोल संग्रह तथा अन्य प्राप्तियों से किए जाने का प्रावधान है। परियोजनाओं में राशि का उपयोग आवश्यकता के अनुसार जस्ट इन टाइम सिद्धांत पर किया जाएगा।

    कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट मार्ग के लिए भी बड़ा फैसला लिया। 91.64 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को चार लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ विकसित करने तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए कुल 3,960 करोड़ 9 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें निर्माण लागत, संचालन अवधि में भुगतान और भू-अर्जन सहित अन्य पूर्व निर्माण कार्य शामिल हैं। यह मार्ग सिवनी और बालाघाट को जोड़ने के साथ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों, खनिज क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों से संपर्क बेहतर करेगा। इससे लगभग 8 से 10 लाख आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई है।

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 19 योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए 1,740 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इन योजनाओं में पेंशन, परिवार सहायता, कन्या विवाह-निकाह सहायता, दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक मदद, प्रशिक्षण, कृत्रिम अंग वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और नशा पीड़ितों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रभावी संचालन के लिए कुल 244 पदों और व्यक्तियों की स्वीकृति दी गई। इनमें 154 नियमित, एक संविदा और 89 आउटसोर्स पद शामिल हैं। इससे स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा से संबंधित प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने का उद्देश्य है।

    कैबिनेट ने राज्य कम्प्यूटर सेक्युरिटी इंसीडेंट-रेसपॉन्स ऑपरेशन सेंटर के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 80 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसमें नए पद, तकनीकी संसाधन, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक और इंसीडेंट रिस्पॉन्स से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा मानव संसाधन तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग स्नातकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी मंजूर की गई।

    नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और संबंधित कार्यालयों के संचालन तथा प्रस्तावित मध्यांचल भवन के विस्तार के लिए भी राशि स्वीकृत की गई। आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति में संशोधन को मंजूरी देते हुए ग्रामीण कृषि भूमि के लिए पुनर्वास अनुदान संबंधी प्रावधान में बदलाव किया गया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को भारतीय न्याय संहिता की परिवर्तित धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत करने संबंधी अधिसूचना में संशोधन को भी मंजूरी मिली।

    इसके अलावा महिला टी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट 2025 ब्लाइंड में स्वर्ण पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश की तीन खिलाड़ियों को कुल 75 लाख रुपये और उनके तीन प्रशिक्षकों को कुल 3 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। खिलाड़ियों सुनिता सराठे, दुर्गा येबले और सुषमा पटेल को 25-25 लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि तीन प्रशिक्षकों को एक-एक लाख रुपये की राशि मिलेगी।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता

    सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता


    मध्यप्रदेश:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देते हुए तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग तकनीक के साथ नए प्रयोग कर रहा है और अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर अधोसंरचना तैयार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। उन्होंने कहा कि अभियंता दिवस समारोह अभियांत्रिकी कार्यों में गुणवत्ता और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी बनाई संरचनाएं उनकी सोच और तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि इंजीनियर शब्द में उन्हें इंजन का आभास होता है। इंजन वह होता है जो पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापत्य और शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐतिहासिक इमारतों, चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों और उत्कृष्ट प्रतिमाओं के रूप में इंजीनियरिंग तथा कला-कौशल के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और अन्य प्राचीन संरचनाएं हजारों वर्षों पुरानी कला साधना की पहचान हैं।

    मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी ऐतिहासिक विभूतियों को स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है और अधोसंरचना निर्माण के लिए स्वयं संसाधन जुटाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसमें लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का टीम वर्क महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी है। उन्होंने इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पिछले नौ महीनों में प्रदेश के 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

    कार्यक्रम में CSIR-AMPRI भोपाल और लोक निर्माण विभाग के बीच हुए MoU के तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क निर्माण की तकनीक विकसित करने और सरकारी भवनों में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में भी काम होगा।

    समारोह में अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को लोक निर्माण पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार कम्पेंडियम सर्कुलर का विमोचन भी किया गया। कई अधिकारियों और अभियंताओं को सम्मानित किया गया, जबकि सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।

  • टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन में राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नई दिल्ली में ग्रहण किया सम्मान

    टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन में राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नई दिल्ली में ग्रहण किया सम्मान

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले को ग्रे वॉटर प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी का विजेता घोषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नवीत कुमार धुर्वे और जिला समन्वयक जिला पंचायत मनीष जैन ने पुरस्कार ग्रहण किया।

    टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों ने गांवों की गलियों में बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था विकसित की है। यह पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे अन्य गांवों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की।

    पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था जिले के 225 गांवों तक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन की योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से ग्राम पंचायतों में स्थानीय जरूरत के अनुसार भूमिगत जल निकासी व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके चलते गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में गंदा पानी बहने, कीचड़ और जलभराव की समस्या में कमी आई है।

    इस मॉडल में घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए घरों के बाहर सिल्ट चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों को करीब आठ इंच व्यास वाले पाइपों से जोड़ा जाता है। पाइपलाइन के माध्यम से पानी को भूमिगत तरीके से गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है।

    सिल्ट चैंबर में गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था रहती है। इससे भूमिगत पाइपों में रुकावट की संभावना कम होती है और पानी की निकासी सुचारु बनी रहती है। व्यवस्था का असर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। गलियों में गंदे पानी और कीचड़ की समस्या कम होने से लोगों का आवागमन आसान हुआ है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी रास्ते अधिक सुविधाजनक हुए हैं।

    इस पूरी व्यवस्था के विकास में ग्राम पंचायतों के स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के साथ पंचम वित्त आयोग से मिले वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया गया। चैंबर, भूमिगत पाइपलाइन और सोख्ता गड्ढों का निर्माण स्थानीय परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार किया गया है।

    कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने पुरस्कार को जिले की ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल अब 225 गांवों तक पहुंच गई है। उनके अनुसार यह केवल भूमिगत जल निकासी तैयार करने का काम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और गांवों के परिवेश में बदलाव लाने का प्रयास है।

    उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के साथ इसके संचालन और रखरखाव पर भी लगातार ध्यान देगा। एक गांव से शुरू होकर 225 गांवों तक पहुंची यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे वॉटर प्रबंधन के लिए स्थानीय समाधान और योजनाबद्ध प्रयास के उदाहरण के रूप में सामने आई है।

  • सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    मध्य प्रदेश: के सतना में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिस और आबकारी अमले को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। कबाड़ी टोला इलाके में अवैध शराब की फुटकर बिक्री के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने मोहल्ले में आने-जाने वाले रास्तों पर CCTV कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिए पुलिस और आबकारी विभाग की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी।

    अधिकारियों के मुताबिक सोमवार दोपहर मुखबिर से अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद सतना सर्किल क्रमांक-1 की टीम ने कबाड़ी टोला में घेराबंदी कर कार्रवाई की। टीम ने 24 वर्षीय राजेश उर्फ नंगा लोधी को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 113 पाव अंग्रेजी और देशी शराब बरामद की गई। जब्त शराब की कीमत 15 हजार 123 रुपये बताई गई है।

    कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ की गई। पूछताछ में अवैध शराब के कारोबार में उसके साथ जुड़े अन्य लोगों और कथित सरपरस्तों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों ने इस जानकारी की तस्दीक शुरू कर दी है और संबंधित ठिकानों पर आगे छापेमारी की जा रही है।

    मामले की जांच के दौरान CCTV कैमरों का नेटवर्क सामने आना कार्रवाई का अहम हिस्सा रहा। जानकारी के मुताबिक राजेश लोधी और उसके सहयोगियों ने कबाड़ी टोला में मोहल्ले के प्रवेश मार्गों पर गोपनीय तरीके से कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की लाइव फीड राजेश के घर में लगी टीवी स्क्रीन पर देखी जाती थी।

    इस व्यवस्था का इस्तेमाल पुलिस और आबकारी अमले की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। जब भी टीम के इलाके में पहुंचने की जानकारी कैमरों के जरिए मिलती थी, आरोपी और उसके साथी कथित तौर पर शराब को छिपाकर वहां से निकल जाते थे। इस तरह वे कार्रवाई से बचने की कोशिश करते थे।

    आबकारी टीम ने कार्रवाई के दौरान CCTV कैमरों के साथ उनका DVR भी जब्त कर लिया है। अब जब्त उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कैमरों और DVR से अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों तथा उसकी निगरानी व्यवस्था के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

    इस कार्रवाई से यह भी सामने आया कि अवैध शराब की बिक्री में शामिल लोगों ने अपने ठिकाने की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया था। आमतौर पर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल यहां कार्रवाई से बचने के लिए किया जा रहा था। आबकारी विभाग अब जब्त किए गए उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहा है।

    आरोपी के खिलाफ अवैध शराब से संबंधित प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ में सामने आए अन्य नामों और ठिकानों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

    कार्रवाई में आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। फिलहाल आरोपी से बरामद 113 पाव शराब, CCTV कैमरों और DVR को जांच का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की कार्रवाई का अगला चरण पूछताछ और तकनीकी जांच से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा।

  • छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    मध्य प्रदेश: के छिंदवाड़ा जिले में गलत इलाज के बाद एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के मरीजों का एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों को दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। महिला की मौत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दोनों के पास चिकित्सा शिक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले।

    पुलिस के अनुसार घटना 18 जुलाई 2026 की है। ग्राम बम्होरी निवासी 43 वर्षीय आरती, पत्नी रामभगस साहू, को बुखार आया था। तब उसके परिजन इलाज के लिए महाराजा मार्केट स्थित एक क्लिनिक पर लेकर पहुंचे थे। यहां राजेश सिन्हा नाम का व्यक्ति इलाज करता था। महिला की जांच और उपचार के दौरान उसके भाई ज्योतिप्रकाश मंडल उर्फ काली ने फोन पर राजेश से बातचीत की।

    इसके बाद ज्योतिप्रकाश ने आरती को दो इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल हर्रई अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान आरती की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपचार से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

    जांच के दौरान पुलिस को राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल के पास चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र, डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। इसके अलावा दोनों के पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके बावजूद दोनों मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें दवाएं तथा इंजेक्शन दे रहे थे। पुलिस ने इसी आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) के साथ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच का मुख्य आधार महिला को दिए गए उपचार, दोनों आरोपियों की चिकित्सा योग्यता और घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से जुड़े तथ्य रहे।

    मामला बिना वैध चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने से जुड़ा है। जांच में दोनों आरोपियों के पास इलाज करने के लिए जरूरी डिग्री, डिप्लोमा और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दे रहे थे।

    आरती को बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन दो इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।