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  • नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता

    नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता


    नई दिल्ली।
    नेपाल त्रासदी (Nepal Tragedy) से बचाए गए 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार को दिल्ली लौट आए, जबकि 320 अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल आपदा के बाद से करीब 320 भारतीय नागरिकों (320 Indian citizens) से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, भारतीय मूल के 100 लोगों का भी अब तक पता नहीं चल सका है।


    मानसरोवर यात्रा पर थे ये लोग

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने बताया कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के रहने वाले 21 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। गुरुवार को काठमांडू पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें इंडिगो की उड़ान से भारत लाया गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने इन लोगों से मुलाकात की। जैसवाल ने बताया, त्रिशूली बिजली परियोजना में कार्यरत 63 लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस परियोजना में बड़ी संख्या में भारतीय कार्य कर रहे थे, जो प्रभावित हुए हैं।


    तिब्बत-चीन में 400 भारतीय सुरक्षित

    जैसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित तिब्बत और चीन की तरफ 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। हालांकि, सभी सुरक्षित हैं और परिजनों के संपर्क में हैं। मार्ग बाधित होने से उनकी वापसी में दिक्कत है। बता दें कि अब तक 96 भारतीयों को वहां से निकालकर नेपाल लाया गया है।


    स्थिति पर नजर

    मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली और काठमांडू में बनाए गए नियंत्रण कक्ष लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय दूतावास राहत-बचाव और तलाशी अभियान में जुटी स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में है।


    भारत ने मदद की तीसरी खेप भेजी

    जैसवाल ने बताया कि भारत ने अब तक नेपाल को 57 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। 26 अगस्त को 10 टन मदद लेकर पहला विमान भेजा था। 27 अगस्त को नेपाल सरकार के अनुरोध पर 37.5 टन सहायता लेकर दूसरा विमान भेजा गया। शुक्रवार को तीसरा विमान 12-13 टन सामान लेकर रवाना हुआ। इसमें पोर्टेबल जनरेटर सेट, महिलाओं के लिए जरूरी सामान, खाने के पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं।

    गुजरात के 26 लोग लापता हैं, जिनमें कुछ एनआरआई भी शामिल हैं। राज्य के मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल बिठा रही है। सीएम भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर सभी जिलों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। नेपाल में फंसे गुजरातवासियों की जानकारी के लिए उनके परिवार हेल्पलाइन नंबर 1070 के अलावा कंट्रोल रूम के नंबर (079)232-51900 या 9978405304 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

    उधर, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोलकाता मूल के एक ब्रिटिश जोड़े का नेपाल में बाढ़ के बाद पिछले चार दिनों से कोई पता नहीं चल पाया है। उधर, कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल और तिब्बत में कर्नाटक के 28 लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। चार लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।


    चंपारण के छह लोग भी रसुवा में गायब

    भीषण बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया थाने के तुरहापट्टी वार्ड-1 के तीन बढ़ई लापता हो गए हैं। लापता युवकों की पहचान समीर अंसारी, मोख्तार मियां और अरमान आलम के रूप में हुई है। उधर, पूर्वी चंपारण के केसरिया के प्रखंड क्षेत्र जगीरहां पंचायत के निवासी तीन युवक नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद से लापता हैं।


    पलामू के युवक का पता नहीं

    नेपाल के बाणेश्वर स्थित हाइड्रो पावर प्लांट निर्माण कार्य में लगे पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड के बरवाडीह गांव निवासी 50 वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा पिछले कई दिनों से लापता हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार बंद मिलने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है।


    हरदोई के दो लोग गुम

    हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के अहेमी ग्राम सभा के दो युवकों का परिवार से सम्पर्क टूट गया है। तीन दिन से कोई जानकारी न मिलने से परिजन परेशान हैं। वे लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।

  • SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा

    SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने पैक फूड (Packaged food) पर शिंकजे की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खाद्य पदार्थों में चीनी (Sugar), फैट और नमक की मात्रा तय मानक से अधिक होगी, उनके पैकेट या डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट के रूप में चेतावनी लाल रंग में अंकित करना अनिवार्य किया जा सकता है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ के समक्ष दाखिल छह पन्नों के हलफनामे में यह जानकारी दी। कोर्ट को बताया गया कि इससे जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि यह चेतावनी तस्वीर (षट्भुजाकार) के रूप में अंकित होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि किन खाद्य पदार्थ में नमक या चीनी जैसे पदार्थ अधिक ‌मात्रा में हैं। इसका फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन की जानकारी देने वाली टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट साइज से एक पॉइंट बड़ा होगा।


    जनहित याचिका पर सुनवाई

    एफएसएसएआई ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई फटकार के बाद दाखिल किया है। कोर्ट गैर सरकारी संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है।


    दो चरणों में लागू होगा

    प्रस्तावित नियम दो चरण में लागू किए जाएंगे, ताकि इंडस्ट्री को उत्पाद दोबारा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। पहले चरण में उन उत्पादों पर नियम लागू होंगे, जिनमें दो या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक अधिक मात्रा में हों। दूसरे चरण में वे उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।


    इन उत्पादों को छूट मिलेगी

    हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा है कि सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही चीज से बने खाद्य पदार्थों और उन चीजों को प्रस्तावित नियम से छूट दी जाएगी, जिनमें प्राकृतिक रूप से वसा, चीनी या नमक अधिक होता है। जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद आदि। हालांकि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग के बाकी नियमों से छूट नहीं मिलेगी।

  • निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क

    निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क


    नई दिल्ली।
    इंफोसिस (Infosys) ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सहायक कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज (Infosys Public Services) के प्रमुख लैक्स गोपीसेट्टी (Lax Gopisetty) नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी इंफोसिस की सहायक कंपनी है। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के सरकारी क्षेत्र के लिए काम करती है।

    इंफोसिस ने बताया कि गोपीसेट्टी निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे। कंपनी ने कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और सेहत सुनिश्चित करना है। इंफोसिस ने एक बयान में कहा, हम पुष्टि कर सकते हैं कि हमारे सहयोगी लैक्स गोपिसेट्टी फिलहाल संपर्क में नहीं हैं, जो निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे।

    कंपनी ने आगे कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है। साथ ही गोपीसेट्टी से संपर्क करने की कोशिश भी की जा रही है। इंफोसिस ने यह भी कहा कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है। कंपनी इस मुश्किल समय में परिवार को हर जरूरी मदद दे रही है।

    इंफोसिस ने कहा, हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और इस मुश्किल समय में हर जरूरी मदद दे रहे हैं। हमारी संवेदनाएं लैक्स और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। कंपनी ने कहा कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ और इसमें हुई लोगों की मौत से उसे बहुत दुख हुआ है।


    फंसे हुए भारतीयों को लेकर एमईए ने क्या कहा?

    विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। वहीं, 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को इस स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है।

    एमईए ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।


    गोपीसेट्टी क्या काम करते हैं?

    इंफोसिस की वेबसाइट पर दी गई उनकी प्रोफाइल के मुताबिक, गोपीसेट्टी सरकारी क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, कामकाज और बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। इसका मकसद सरकारी एजेंसियों के काम और लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना है। वह कंपनी की रणनीति और उसे लागू करने के काम की भी देखरेख करते हैं, ताकि तय उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

    इस पद पर आने से पहले गोपीसेट्टी इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट थे। वह बिजनेस एप्लीकेशंस और डिजिटल वर्कस्पेस सर्विस के प्रमुख भी थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में इस काम का विस्तार किया।

    इंफोसिस में शामिल होने से पहले गोपिसेट्टी एक्सेंचर में प्रबंध निदेशक थे। वहां उन्होंने उत्तर अमेरिका में कंपनी के हेल्थ एंड पब्लिक सर्विसेज कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया। इंफोसिस की वेबसाइट के मुताबिक, गोपीसेट्टी ने बियरिंगपॉइंट, आईबीएम, पीडब्ल्यूसी और एचसीएल में भी तेजी से बढ़ते कारोबार और सेवाओं को खड़ा किया है।

  • NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार

    NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) (National Testing Agency -NTA) की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, परिणाम तैयार करने और शिकायतों के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा (Review) की जा रही है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) लगातार विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मंत्रालय का जोर एनटीए के पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक मजबूत, विश्वसनीय, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी बनाने पर है। इसके लिए देश और दुनिया में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं यानी ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण बदलावों की तैयारी है। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित संचालन, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को और मजबूत करना शामिल है।


    बेस्ट प्रैक्टिसेज होंगी साझा

    एनटीए में सुधार के लिए विभिन्न संस्थानों, परीक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों से बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने को कहा जा रहा है। उद्देश्य विश्वसनीयता कायम रखना है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में एक संयुक्त सचिव, तीन निदेशक और एक संयुक्त निदेशक की नियुक्ति की है।

    कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, 2005 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी अंशुमान शर्मा को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए एनटीए में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्रालय की ओर से 27 अगस्त को जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारी सत्या एस., भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रवि कुमार सिंह और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं, 2016 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है।

    मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, नियुक्त अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन सप्ताह के भीतर अपना नया पद संभालना होगा। हाल ही में सरकार ने एनटीए की परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की घोषणा की थी।


    कौन से बदलाव संभावित

    – प्रश्नपत्र सुरक्षा : प्रश्नपत्रों की डिजिटल एन्क्रिप्शन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा शुरू होने तक बहु-स्तरीय एक्सेस कंट्रोल।
    – अभ्यर्थी की पहचान : आधार/डिजिटल आईडी के साथ बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी बहु-स्तरीय पहचान व्यवस्था।
    – परीक्षा केंद्रों की निगरानी : सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग, एआई आधारित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और केंद्रों की रियल टाइम निगरानी।
    – परीक्षा केंद्रों का चयन : केंद्रों की रैंकिंग और जोखिम के आधार पर उनकी नियमित ऑडिटिंग, ताकि संदिग्ध या कमजोर केंद्रों को हटाया जा सके।
    – चार-स्तरीय जांच : प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, वितरण और परीक्षा संचालन तक अलग-अलग स्तरों पर स्वतंत्र सत्यापन।
    – तकनीकी सुरक्षा : सर्वर, परीक्षा सॉफ्टवेयर और डेटा के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग और बैकअप व्यवस्था।

  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट

    तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट


    पटना।
    कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल (Nepal) पर शुक्रवार को खतरा तब और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा (Tibet-Nepal border) पर बनी एक और झील फट गई। संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के आदेश पर वाल्मीकिनगर एवं कोसी बराज (Kosi Barrage) पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषकर गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा के आगमन को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है।


    पड़ोसी देश में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर बढ़ी सतर्कता

    नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी स्पर, स्टड एवं अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य है। कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक दर्ज हुआ, जबकि बराह में बढ़कर 99,500 क्यूसेक रहा। शाम छह बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग अलर्ट है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है, जिसका कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।


    दिन रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम

    संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।


    क्या बोले डिप्टी सीएम विजय चौधरी?

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ। इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।


    नेपाल की दो दर्जन नदियों से उत्तर बिहार को खतरा

    नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियों से पश्चिम चंपारण जिले समेत उत्तर बिहार को खतरा है। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसा हादसा सीमावर्ती क्षेत्रों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक व सिकरहना तबाही मचा सकती हैं। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी ही भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी में त्रिशूली नदी मिलती है।

    नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात व नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली बताते हैं कि त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। त्रिशूली नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है। ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण यह नदी बेहद खतरनाक मानी जाती है। त्रिशूली नदी में ही बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने से इसका असर भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।


    तिब्बत के नाले से निकली गंडक, नाम जुगूं खोला था

    नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव ने बताया कि गंडक तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है। यहां उसका नाम जुगूं खोला है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। इसमें ठाकुर जी मिलती हैं। आगे बढ़ने पर कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पूर्व यह गंडक हो जाती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं। इन झीलों पर अवरोधक बने हुए हैं। कभी भी इनमें बर्स्ट आउट हो सकता है। इससे भारी तबाही मच सकती है।

    सिकरहना लाई थी तबाही
    रामनगर और गौनाहा से आने वाली डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया व सिकटा में आकर सिकरहना से मिलती हैं। 2017 में सिकरहना में बाढ़ आने पर चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में तबाही मची थी।

    बताते चलें कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। पानी गंडक में प्रवाह होने से गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।

  • ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल

    ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल


    नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विकसित देशों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की उनकी अपेक्षाओं पर सवाल उठाते हुए जलवायु न्याय और साझा जिम्मेदारी की जरूरत बताई। लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सचिवालय में 56 देशों के साझा मंच पर ‘जलवायु न्याय पर नीति संवाद’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन औद्योगिक देशों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ने में करीब दो सदियां लगीं, वे अब विकासशील देशों से कुछ ही दशकों में उसी बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।

    विकासशील देशों पर तेजी से बदलाव का दबाव

    CJI ने कहा कि जो देश अभी औद्योगीकरण के दौर से गुजर रहे हैं, उनसे तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की अपेक्षा की जाती है। ऐसा न कर पाने पर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है। दूसरी ओर, जिन विकसित देशों की ओर से यह बदलाव जल्द करने की मांग की जा रही है, उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक ताकत खड़ी करने में करीब दो सदियां कोयले और तेल पर निर्भर रहकर बिताईं।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बदलाव की रफ्तार तय करते समय विकासशील देशों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

    कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम से जुड़ी नई चुनौती

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम जैसे खनिजों पर भी निर्भर करता है। इन खनिजों के खनन का पर्यावरण और समाज दोनों पर असर पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि विकासशील देश अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पहले से कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन्हें अवास्तविक गति से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए मजबूर करना नई समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए ऊर्जा परिवर्तन की तात्कालिकता को निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना जरूरी है।

    पर्यावरण बनाम विकास नहीं, संतुलन का रास्ता जरूरी

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर्यावरण, पारिस्थितिकी और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने जाम्बिया हाईकोर्ट के एक मामले का भी उदाहरण दिया, जिसमें पानी को प्रदूषित करने वाली कॉपर खनन कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया था।

    उनके मुताबिक, कॉमनवेल्थ के देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को बेहतर तरीके से लागू कर सकते हैं, ताकि इसकी भारी कीमत आम लोगों को न चुकानी पड़े।

    CJI ने कहा कि जलवायु से जुड़े मामलों में हर देश की अदालत को नए सिरे से अलग कानूनी शब्दावली गढ़ने की जरूरत नहीं है। अदालतें कॉमनवेल्थ के दूसरे देशों में प्रभावी रहे विचारों और समाधानों से सीख सकती हैं। हालांकि, इन्हें अपने देश के संवैधानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय हालात के मुताबिक ढालना होगा।

    घायल जवानों के लिए सड़क चौड़ीकरण का दिया उदाहरण

    CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि घायल अर्धसैनिक बलों के जवानों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क चौड़ी करने के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया था।

    उन्होंने कहा कि अदालत के सामने दुविधा यह थी कि न तो पेड़ काटने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत किया जा सकता था और न ही घायल जवानों के लिए एंबुलेंस के रास्ते को रोका जा सकता था।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण पर रोक लगाने के बजाय बड़े पैमाने पर क्षतिपूरक वनीकरण का आदेश दिया। CJI ने बताया कि इस वनीकरण की निगरानी अब भी की जा रही है।

    ‘कई बार तीसरा रास्ता तलाशना पड़ता है’

    CJI ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को हमेशा एक-दूसरे के विरोधी पक्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कई परिस्थितियों में अदालतों को ऐसा समाधान तलाशना होता है, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ विकास की जायज जरूरतें भी पूरी हो सकें।

    उनके मुताबिक, न्यायिक रचनात्मकता का उद्देश्य कई बार ऐसा तीसरा रास्ता तलाशना होता है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश हो।

  • ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन

    ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन


    नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के सक्रिय होने के साथ पार्टी का सोशल मीडिया तंत्र भी नए अंदाज में काम करता नजर आ रहा है। भाजपा सोशल मीडिया कन्वीनर दीपक म्हस्के की टीम ने पिछले तीन दिनों में अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स को आपस में जोड़कर एक साथ राजनीतिक संदेश देने की रणनीति शुरू की है। इसके तहत मीम्स, बॉलीवुड-हॉलीवुड फिल्मों के चर्चित सीन और क्रिएटिव वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    इस अभियान में राज्यों के भाजपा हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट और रिट्वीट करने के साथ टैग और कोलैबोरेशन कर रहे हैं। इसका मकसद कंटेंट की पहुंच बढ़ाने के साथ राजनीतिक व्यंग्य के जरिए विपक्ष पर निशाना साधना भी है।

    जम्मू-कश्मीर BJP के पोस्ट से शुरू हुआ सिलसिला

    इस नए सोशल मीडिया प्रयोग की शुरुआत जम्मू-कश्मीर भाजपा के X हैंडल से हुई। हैंडल ने सलमान खान, संजय दत्त और जैकी श्रॉफ का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें तीनों अभिनेता एक साथ रियलिटी शो के मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

    भाजपा ने इस वीडियो को राजनीतिक रंग देते हुए संजय दत्त को कर्नाटक भाजपा, सलमान खान को जम्मू-कश्मीर भाजपा और जैकी श्रॉफ को गोवा भाजपा के रूप में पेश किया। पोस्ट में लिखा गया—“तीन भाई, तीनों तबाही ?? The worst nightmare for the Dimagi Naxal ecosystem!”

    पोस्ट के ट्रेंड करने के बाद भाजपा IT सेल और सोशल मीडिया टीम ने इसे आगे बढ़ाया। इसके बाद दूसरे राज्यों के भाजपा हैंडल्स भी इस अभियान से जुड़ते चले गए।

    MP BJP ने जोड़े ‘तीन’ में ‘चार भाई’

    जम्मू-कश्मीर भाजपा की पोस्ट को मध्य प्रदेश भाजपा ने कोट करते हुए लिखा—“Hold up… Madhya Pradesh is entering the chat?? तीन भाई? Make it चार, अब तबाही होगी आर-पार!”

    इसके बाद यह सिलसिला और आगे बढ़ा। दिल्ली भाजपा ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी के एक वीडियो के साथ पोस्ट किया—“भूल तो नहीं गए हमें?” इसके बाद अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स ने इसी अंदाज में मीम्स और वीडियो पोस्ट करना शुरू कर दिया।

    दो-तीन राज्यों तक पहुंचाने की रणनीति

    भाजपा IT सेल के एक अधिकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर भाजपा के वीडियो के बाद यह रणनीति बनाई गई कि देशभर के भाजपा राज्यों के सोशल मीडिया हैंडल्स को एक साथ जोड़ा जाए। इसके तहत हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट, टैग और जरूरत के अनुसार कोलैबोरेट करेंगे।

    अधिकारी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स के फॉलोअर्स काफी ज्यादा हैं। ऐसे में एक राज्य का हैंडल जब दूसरे राज्य के हैंडल को कोट या टैग करता है तो पोस्ट की पहुंच कई गुना बढ़ जाती है।

    पार्टी के मुताबिक, दिल्ली भाजपा की एक पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जिस तरह दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर किया, उसी तरह पंजाब में भी AAP को सबक मिल सकता है।

    भाजपा का दावा है कि इस रणनीति से राजनीतिक कंटेंट केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पहुंचता है। पार्टी अब ऐसे कंटेंट पर जोर दे रही है, जिसका असर एक साथ दो-तीन राज्यों की राजनीति पर पड़े।

    ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे को बनाया सोशल मीडिया हथियार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से “दिमागी नक्सल” शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। अब भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसी कथित “दिमागी नक्सल” मानसिकता को निशाना बनाते हुए मीम्स और फनी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं।

    इसके लिए बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के लोकप्रिय दृश्यों को एडिट किया जा रहा है। इनके जरिए राजनीतिक संदेश के साथ विपक्ष पर व्यंग्य भी किया जा रहा है।

    भाजपा के एक नेता का कहना है कि अभी यह सिर्फ “करवट” है। उनके मुताबिक, तीन दिनों में सोशल मीडिया पर जिस तरह का नैरेटिव तैयार हुआ है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरी ताकत से अभियान चलने पर इसका असर कितना बड़ा हो सकता है।

    Twitter के बाद Instagram पर भी तैयारी

    भाजपा नेता का आरोप है कि कांग्रेस का नैरेटिव झूठ पर आधारित है और पार्टी को “झूठ की राजनीति” का जवाब देना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत अब Twitter के बाद Instagram पर भी क्रिएटिव वीडियो और तस्वीरों के जरिए अभियान चलाने की तैयारी है।

    भाजपा सूत्रों के मुताबिक, Twitter पर राजनीतिक मुद्दों में रुचि रखने वाले लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए वहां अभियान शुरू किया गया है। अब इसी रणनीति को Instagram पर भी लागू किया जाएगा।

    आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स से मीम्स, फनी वीडियो और क्रिएटिव पोस्ट लगातार सामने आने की संभावना है। पार्टी ने अपने Instagram और Twitter अकाउंट पर टीजर के तौर पर “Shall we begin” संदेश भी पोस्ट किया है और देशभर के अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स को टैग किया है।

    यानी भाजपा की नई सोशल मीडिया टीम ने साफ संकेत दे दिया है कि मौजूदा अभियान महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर पार्टी का राजनीतिक कैंपेन और ज्यादा आक्रामक और क्रिएटिव नजर आ सकता है।

  • न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल

    न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका दौरे पर हैं और शुक्रवार, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस ‘ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम’ में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम की थीम ‘वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता का उत्सव’ रखी गई है।

    भागवत के संबोधन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भागवत अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करेंगे और अमेरिका में संघ की भूमिका को किस तरह पेश करेंगे।

    संतों और प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन

    भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी समेत कई हस्तियों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके अमेरिकी दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    X अकाउंट सस्पेंड होने पर अखिलेश का तंज

    कार्यक्रम के आयोजक ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘विदेशों में जब Unregistered-Underground लोग उभरकर आएंगे तो उनके एक्स अकाउंट तो सस्पेंड किए ही जाएंगे।’

    इसके बाद अखिलेश ने RSS से 21 सवाल पूछे। उन्होंने स्वदेशी का नारा देने वाले संगठन के प्रमुख के विदेश दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भागवत वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने गए हैं या फिर भविष्य में राजनीतिक प्रश्रय तलाशने की कोशिश की जा रही है।

    हालांकि, कुछ समय बाद ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट बहाल हो गया। संस्था ने दावा किया कि विरोधियों के बॉट अटैक के कारण एल्गोरिदम प्रभावित हुआ था और इसी वजह से हैंडल अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया था।

    कर्नाटक में RSS मार्च पर दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड

    इधर कर्नाटक में RSS के मार्च में शामिल होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। राज्य में दो सरकारी शिक्षकों अन्ना साहेब देशमुख और गुरुराज जोशी को मार्च में शामिल होने पर सस्पेंड किया गया है।

    कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी गैर-रजिस्टर्ड संगठन के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी नियमों के खिलाफ है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सी. नारायणस्वामी ने सरकार की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और देश का कोई भी देशभक्त किसी देशभक्त संगठन से जुड़ सकता है।

    न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताया विरोध

    मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में भी विरोध की आवाज उठी है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।

    हालांकि, प्रदर्शन या कार्यक्रम रद्द किए जाने से जुड़े सवाल पर ममदानी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार संभवतः सिटी अथॉरिटी के पास नहीं है।

    अब निगाहें भागवत के संबोधन पर

    एक तरफ कार्यक्रम को वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन से मोहन भागवत अपने संबोधन में संघ, भारत और वैश्विक समाज को लेकर क्या संदेश देते हैं।

  • पाकिस्तान सीमा से शुरू होगी सरकार की ‘स्मार्ट बॉर्डर’ योजना

    पाकिस्तान सीमा से शुरू होगी सरकार की ‘स्मार्ट बॉर्डर’ योजना

    नई दिल्ली। देश की सीमाओं को और अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है। गृह मंत्रालय सभी भूमि सीमाओं के लिए एक आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तैयार कर रहा है। इसके तहत सीमावर्ती इलाकों में तैनात निगरानी उपकरणों से मिलने वाली सूचनाओं को कमांड सेंटरों के नेटवर्क के जरिए सीधे नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय तक पहुंचाया जाएगा।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद सीमा पर निगरानी को मजबूत करने के साथ-साथ किसी भी संभावित खतरे पर रियल टाइम में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नई सीमा प्रबंधन नीति के तहत खास तौर पर उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना मुश्किल है। इस महत्वाकांक्षी योजना का पायलट प्रोजेक्ट पाकिस्तान सीमा से शुरू होने की संभावना है।

    AI से ड्रोन तक, एक सिस्टम में जुड़ेंगी कई तकनीकें

    प्रस्तावित ‘स्मार्ट बॉर्डर’ व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर, कैमरे, ड्रोन, निगरानी उपकरण और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक को एक साथ जोड़ा जाएगा।

    इन अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाले इनपुट को एक साझा परिचालन तस्वीर में बदला जाएगा। इससे सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ, तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और अन्य सुरक्षा खतरों की पहचान करने तथा उन पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

    अधिकारियों के अनुसार, भूमि सीमाओं पर कई छोटे कमांड सेंटर बनाए जाएंगे। इन्हें क्षेत्रीय फील्ड मुख्यालयों से जोड़ा जाएगा और आगे इनका नेटवर्क दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय से कनेक्ट होगा।

    लाइव फीड से सीमा पर रखी जाएगी नजर

    नई व्यवस्था में लाइव निगरानी फीड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे सीमा सुरक्षा बलों को वास्तविक समय में अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति देखने में मदद मिलेगी। जरूरत के हिसाब से जवानों और दूसरे संसाधनों को तुरंत उस इलाके में भेजा जा सकेगा, जहां खतरा दिखाई देगा।

    इससे उन इलाकों में हर समय बड़ी संख्या में जवानों की भौतिक गश्त पर निर्भरता भी कम हो सकती है, जहां तकनीकी निगरानी ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।

    पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन चुनौती पर खास फोकस

    पाकिस्तान सीमा से इस परियोजना की शुरुआत किए जाने के पीछे ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी और निगरानी की बढ़ती चुनौती भी अहम वजह मानी जा रही है।

    सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हथियार, मादक पदार्थ और अन्य प्रतिबंधित सामान भेजने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में नई तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली में ड्रोन गतिविधियों की पहचान और उस पर तत्काल प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।

    चीन से लगी 3,488 किमी सीमा भी होगी फोकस में

    भारत की सभी सीमाएं एक जैसी भौगोलिक परिस्थितियों से नहीं गुजरतीं। कहीं रेगिस्तान है तो कहीं पहाड़, नदी, जंगल और घनी आबादी वाले इलाके। इसलिए सरकार ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसे स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सके।

    चीन के साथ भारत की करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा भी इस योजना के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक कई हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियां और सीमांकन की स्थिति पारंपरिक बाड़ लगाने को मुश्किल बनाती है।

    बांग्लादेश सीमा पर बाढ़ वाले इलाकों में तकनीक बनेगी सहारा

    बांग्लादेश सीमा के कई हिस्से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। ऐसे इलाकों में हर जगह स्थायी भौतिक बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं है।

    इसलिए यहां तकनीक आधारित निगरानी, सेंसर, कैमरों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिन जगहों पर भौतिक सुरक्षा ढांचा सीमित है, वहां तकनीकी निगरानी उसकी कमी पूरी कर सके।

    सीमावर्ती राज्यों की पुलिस भी होगी सिस्टम का हिस्सा

    सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार केवल सीमा सुरक्षा बलों पर निर्भर रहने के बजाय सीमावर्ती समुदायों और स्थानीय पुलिस को भी नई व्यवस्था का हिस्सा बनाने की योजना पर काम कर रही है।

    9 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में पहली बार भूमि सीमा से जुड़े जिलों के पुलिस अधीक्षकों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार से सीमा साझा करने वाले 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 119 सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, राज्यों से दिसंबर तक इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सुझाव मांगे गए हैं।

    अगले डेढ़ साल में तैयार करने की योजना

    सरकार प्रस्तावित चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा व्यवस्था में सीमा सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और सीमावर्ती आबादी की भूमिका को भी शामिल करना चाहती है।

    अधिकारियों के अनुसार, राज्यों से मिलने वाले सुझावों और विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसे अगले करीब डेढ़ वर्ष में पूरी तरह तैयार करने की योजना है।

    इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सरकार का लक्ष्य सीमा निगरानी को अधिक तकनीक आधारित, एकीकृत और रियल टाइम बनाने का है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली स्थित केंद्रीय तंत्र तक तेजी से पहुंच सके।

  • सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक

    सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक


    नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारतीय संस्करण के प्रकाशन से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हाथ खींच लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक पांडुलिपि के एक खास हिस्से में संपादकीय बदलाव के साथ कुछ अंश हटाना चाहता था। सोनिया गांधी ने बदलाव या कटौती करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रकाशन का समझौता आगे नहीं बढ़ सका।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई बड़े प्रकाशक इस पुस्तक के भारतीय संस्करण के अधिकार हासिल करने की कोशिश में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हार्पर कॉलिंस इंडिया किताब के प्रकाशन का समझौता अंतिम रूप देने के करीब है।

    भारत को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों में यह किताब 10 नवंबर को जारी होगी। पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नोपफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक डिवीजन है। नोपफ के मुताबिक, किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी।

    छह दशक की निजी कहानी

    सोनिया गांधी पहले भी किताबें लिख चुकी हैं, लेकिन उनके करीबियों के अनुसार ‘बिलोंगिंग’ उनके जीवन का सबसे निजी और प्रामाणिक विवरण है। इसमें 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी पहली मुलाकात से लेकर नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक के सफर को शामिल किया गया है।

    किताब में संजय गांधी की मृत्यु और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की हत्या के दौरान झेले व्यक्तिगत दुखों का भी जिक्र है। इसके अलावा 2004 में कांग्रेस को जनादेश मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों और कारणों पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी है।

    सोनिया गांधी ने पुस्तक के बारे में कहा कि उनके परिवार पर काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम लेखन ऐसा है जो उनके परिवार के सदस्यों की भावनाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों को वास्तविक रूप में सामने रखता है। उनके मुताबिक, यह किताब पिछले छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

    पेंगुइन के फैसले पर फिर उठे सवाल

    पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का किसी चर्चित पुस्तक से पीछे हटने का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल प्रकाशक ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने से इनकार किए जाने की बात कही थी। हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की हार्ड कॉपी दिखाई थी।

    जून में पेंगुइन ने ग्राफिक उपन्यासकार जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब ‘द वंस एंड फ्यूचर रायट’ का प्रकाशन भी रद्द कर दिया था। इसके पीछे कानूनी जांच और नक्शे में सीमाओं से जुड़े मुद्दों को वजह बताया गया था।