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  • यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने वर्ष 2026 की चयन आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कुल 48 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। भर्ती प्रक्रिया 11 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार 31 जुलाई की शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती स्वास्थ्य, कृषि, कॉर्पोरेट मामलों, गृह तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में की जाएगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार सबसे अधिक रिक्तियां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्पेशलिस्ट ग्रेड-III असिस्टेंट प्रोफेसर के विभिन्न विषयों में निकाली गई हैं। इनमें एंडोक्रिनोलॉजी, नियोनेटोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पल्मोनरी मेडिसिन, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा विषय शामिल हैं। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में असिस्टेंट सॉइल केमिस्ट, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस में प्रॉसिक्यूटर तथा अन्य तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भी भर्ती की जाएगी।

    भर्ती में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अंतर्गत डिप्टी असिस्टेंट डायरेक्टर (कीट विज्ञान) और एंटोमोलॉजिस्ट के पद भी शामिल हैं। वहीं गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (टॉक्सिकोलॉजी) तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय में अधीक्षक (कानूनी) के पदों पर भी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित पद के अनुसार मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक, स्नातकोत्तर अथवा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। अधिकांश पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में एक से तीन वर्ष का कार्यानुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले प्रत्येक पद की योग्यता और अनुभव संबंधी शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

    आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। अधिकतम आयु 30 वर्ष से 43 वर्ष के बीच रखी गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमानुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। हालांकि किसी भी श्रेणी के उम्मीदवार के लिए अधिकतम आयु 56 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती।

    चयन प्रक्रिया में भर्ती परीक्षा अथवा संयुक्त भर्ती परीक्षा, व्यक्तिगत साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे। अंतिम चयन सभी चरणों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-7 से लेवल-11 के तहत वेतन दिया जाएगा। इसके साथ केंद्र सरकार के नियमानुसार विभिन्न भत्तों और अन्य सेवा लाभों का भी प्रावधान रहेगा।

    आवेदन शुल्क सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए 25 रुपये निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट प्रदान की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित पदों की विस्तृत पात्रता, अनुभव तथा अन्य शर्तों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में सावधानीपूर्वक जांचने की सलाह दी गई है।

  • CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ

    CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे ‘पौधरोपण महायज्ञ-2026’ का शुभारंभ 12 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से करेंगे। प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मुख्यमंत्री भगवानपुर टोल प्लाजा लिंक एक्सप्रेसवे के समीप और आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण करेंगे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करेंगे। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहेंगे।

    त्रिवेणी और मौलश्री के पौधों से होगी शुरुआत
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पास त्रिवेणी—नीम, पीपल और बरगद—का पौधा रोपकर अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वह ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाएंगे। राज्य सरकार ने इस वर्ष पूरे उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    गोरखपुर को मिला 55.28 लाख पौधरोपण का लक्ष्य
    राज्य सरकार के इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग के समन्वय में कुल 27 विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के कुल लक्ष्य में गोरखपुर जिले को 55 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सबसे अधिक योगदान वन विभाग का रहेगा।

    पौधों की सुरक्षा और संरक्षण के पूरे इंतजाम
    प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी सरकारी पौधशालाओं में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। साथ ही पौधों की बेहतर वृद्धि और उनकी उत्तरजीविता (सर्वाइवल) दर बढ़ाने के लिए चयनित स्थलों पर गड्ढों की खुदाई, ऊपरी मिट्टी (टॉप सॉयल) की उपलब्धता और पौधों के संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।

  • कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा

    कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा


    कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर, रामकोला हाटा विधानसभा क्षेत्र की 525 करोड़ की 464 परियोजनाओं का शनिवार को लोकार्पण व शिलान्यास करते हुए विपक्ष को विकास और कानून व्यवस्था पर घेरते हुए सीधा हमला बोला। कहा कि, पहले की सरकार के पास नीयत थी न नीति थी। सोच ही लकवाग्रस्त थी, ऐसे में विकास की बात ही बेमानी थी।

    इस दौरान टेकुआटार में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा पर हमला बोला और कहा कि, पहले उत्तर प्रदेश में त्योहारों पर दंगे होते थे, अब नो कर्फ्यू , नो दंगा, यूपी में सब चंगा। बिना राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों पर कब्जा करने वाले अयोध्या, काशी और मथुरा के बारे में कैसे सोच सकते हैं। धर्म आस्था पर आज हमें आइना दिखाने वाले अपना चेहरा देखें।

    मुख्यमंत्री योगी ने कुशीनगर की इंसेफेलाइटिस से मासूमो के बचपन छिनने व मुसहरों की मौत का उदाहरण देते पूर्व की सरकारों को कठघरे में खड़ा किया तो कहा कि, अब इंसेफेलाइटिस से बचपन छिनता है और न कोई प्रदेश में भूख से मरता है। अब आवास, बिजली, गैस कनेक्शन, उपचार व रोजगार संग विकास की बात होती है।

    कुशीनगर से शीघ्र शुरू होगी उड़ान, गया और जेवर से जुड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पश्चिम एशिया संकट से दुनिया में मची उथल-पुथल के चलते नए नए एयरक्राफ्ट नहीं आ सके, जिससे कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान शुरू नहीं हो सकी। शीघ्र ही यहां से उड़ान शुरू होगी और गया और जेवर को जोड़ जाएगा। सरकार पूरी तरह संजीदा है।

    दियारा को मिलेगा 800 करोड़ का पुल
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारायणी उस पार दियारा के गांवों की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि डीपीआर बन रहा है। शीघ्र ही नारायणी पर 800 करोड़ का पुल बनेगा। दियारा के सभी गांव विकास की मुख्य धारा से जुड़ेगें। अंतिम व्यक्ति का विकास ही हमारी सरकार की सोच है। इस पर हम इमानदारी से कार्य भी कर रहे हैं।

  • 32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली को आधुनिक शिक्षा और ज्ञान संसाधनों के क्षेत्र में एक नई सौगात मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा विकसित अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित यह बहुमंजिला पुस्तकालय पारंपरिक पुस्तकों और डिजिटल ज्ञान संसाधनों का समन्वित केंद्र होगा। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और आम पाठकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे आधुनिक सुविधाओं के साथ अध्ययन और शोध कर सकें।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के बौद्धिक विकास से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में पुस्तकालयों में अधिक संख्या में लोग अध्ययन करने आते हैं, वह समाज ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर इस पुस्तकालय को समर्पित किए जाने को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

    नई लाइब्रेरी में 32 हजार से अधिक भौतिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही पाठकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 5 लाख से अधिक ई-बुक्स तक पहुंच की सुविधा भी दी गई है। आधुनिक डिजिटल कैटलॉग, अध्ययन कक्ष, शोध सुविधाएं और तकनीक आधारित सेवाएं इसे राजधानी के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल करती हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक ही स्थान पर विविध विषयों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

    अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने पुस्तकालयों की सामाजिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। पढ़ने की संस्कृति मजबूत होने से समाज में जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित होती है, जो किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान होती है।

    अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में लागू किए गए पुस्तकालय मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांवों में छोटी-छोटी लाइब्रेरियों को एक केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ने की व्यवस्था की गई, जिससे जरूरत के अनुसार किताबें नियमित रूप से गांवों तक पहुंचाई जाती हैं। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से शिक्षा के अवसरों का विस्तार होता है और ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को भी बनाए रखें। उनका कहना था कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच और जीवन मूल्यों को भी मजबूत करती हैं। नई दिल्ली के मध्य स्थित यह पुस्तकालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और बौद्धिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता रखता है। आधुनिक सुविधाओं और व्यापक डिजिटल संसाधनों के साथ यह पहल राजधानी में ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के युद्धक बेड़े में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरी के शामिल होने के साथ भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल समुद्र के माध्यम से अपनी रणनीतिक दिशा तय करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में समुद्री क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और वैश्विक समुद्री उपस्थिति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।

    विशाखापट्टनम में आयोजित कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरी एक आधुनिक ब्लू-वाटर स्टील्थ फ्रिगेट है, जो तटीय क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गहरे समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान संचालित करने में सक्षम है। यह युद्धपोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार कर रही है।

    आईएनएस महेंद्रगिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट है। यह परियोजना भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। युद्धपोत को आधुनिक हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियारों और उन्नत रक्षा उपकरणों से लैस किया गया है। इसके कारण यह समुद्र, आकाश और पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम माना जाता है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक सैन्य शक्ति की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में आधुनिक तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके प्रशिक्षित सैनिकों, मजबूत सैन्य ढांचे और विश्वसनीय रक्षा क्षमता से ही तय होगी।

    उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत भविष्य की तकनीकों में निवेश के साथ-साथ अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार मजबूत बना रहा है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक हैं। इतिहास यह प्रमाणित करता है कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति की उपेक्षा की, उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसलिए संतुलित रक्षा रणनीति ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे प्रभावी आधार बन सकती है।

    रक्षा मंत्री ने हाल के सुरक्षा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने समय-समय पर यह साबित किया है कि देश की आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की सैन्य क्षमताएं मिलकर प्रभावी परिणाम देने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगी। आईएनएस महेंद्रगिरी का नौसेना में शामिल होना आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारत लगातार अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाते हुए ऐसी सैन्य क्षमताओं का विकास कर रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक समुद्री संतुलन में भी उसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

  • ऑनलाइन बुकिंग, बाहरी राज्यों और विदेशी युवतियों का इस्तेमाल, नागपुर में संगठित देह व्यापार गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, कई गिरफ्तार

    ऑनलाइन बुकिंग, बाहरी राज्यों और विदेशी युवतियों का इस्तेमाल, नागपुर में संगठित देह व्यापार गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, कई गिरफ्तार

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर शहर में पुलिस ने एक संगठित देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर मोबाइल ऐप और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बना रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की युवतियों को भी शामिल किया गया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई महिलाओं को सुरक्षित निकालकर संरक्षण में लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसके संचालन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    बताया जा रहा है कि पुलिस को लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद विशेष निगरानी और गोपनीय सूचना के आधार पर अंबाझरी थाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई। जांच के दौरान यह सामने आया कि ग्राहकों से संपर्क और बुकिंग की प्रक्रिया मोबाइल एप्लीकेशन तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित की जा रही थी। कथित तौर पर ग्राहकों को अलग-अलग स्थानों पर भेजने और पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन समन्वित किया जाता था, जिससे अवैध गतिविधियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा था।

    प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह में उज़्बेकिस्तान की कुछ महिलाओं के अलावा दिल्ली, पंजाब और अन्य क्षेत्रों से आई युवतियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई महिलाओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा है। संबंधित विभागों की मदद से उनकी पहचान, दस्तावेजों और परिस्थितियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उन्हें किसी प्रकार के दबाव, धोखे या मानव तस्करी के माध्यम से इस नेटवर्क में तो नहीं लाया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से हो रहा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और इसका विस्तार किन-किन शहरों तक फैला हुआ था। डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, जिससे पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और आर्थिक नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, वहीं कुछ संगठित गिरोह इसका उपयोग अवैध गतिविधियों को छिपाने और संचालित करने के लिए भी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, साइबर विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों या किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें इस तरह की किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि मानव तस्करी और संगठित अपराध जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

  • ओडिशा में एटीएम चोरी का हैरान करने वाला तरीका, थार से मशीन उखाड़ ले गए बदमाश, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात से पुलिस अलर्ट

    ओडिशा में एटीएम चोरी का हैरान करने वाला तरीका, थार से मशीन उखाड़ ले गए बदमाश, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात से पुलिस अलर्ट

    नई दिल्ली । ओडिशा के बालासोर जिले में एटीएम चोरी की एक अनोखी और सुनियोजित वारदात सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार तड़के कुछ बदमाश एक काले रंग की महिंद्रा थार में सवार होकर एक एटीएम कियोस्क के बाहर पहुंचे और बेहद कम समय में पूरी मशीन को उखाड़कर अपने साथ ले गए। घटना का तरीका इतना अलग था कि आसपास के लोगों के साथ-साथ पुलिस भी प्रारंभिक जांच में हैरान रह गई।

    बताया जा रहा है कि घटना देर रात करीब दो बजे की है। पांच से अधिक बदमाश पहले एटीएम कियोस्क का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने मजबूत रस्सी की मदद से पूरी एटीएम मशीन को वाहन से बांध दिया। कुछ ही क्षणों में वाहन की ताकत से मशीन को उसकी जगह से उखाड़ लिया गया और उसे सड़क पर घसीटते हुए वहां से फरार हो गए। पूरी कार्रवाई बेहद तेजी और सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई।

    बदमाश एटीएम मशीन को शहर से दूर एक सुनसान स्थान पर ले गए, जहां मशीन को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकाल ली। नकदी लेकर फरार होने से पहले उन्होंने क्षतिग्रस्त एटीएम मशीन को सड़क किनारे छोड़ दिया। बाद में स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मशीन की स्थिति देखकर स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने केवल नकदी निकालने के उद्देश्य से पूरी योजना बनाई थी।

    घटना की पूरी वारदात एटीएम कियोस्क में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में कई संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं, जो वाहन की मदद से मशीन उखाड़ते और उसे लेकर जाते नजर आते हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही आसपास के इलाकों में लगे अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है ताकि बदमाशों के आने और भागने के पूरे रास्ते का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी पहले से पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। उन्होंने एटीएम की लोकेशन, आसपास की गतिविधियों और मौके की परिस्थितियों का पहले से अध्ययन किया होगा। घटना के समय इलाके में लोगों की आवाजाही बेहद कम थी, जिसका फायदा उठाकर बदमाश बिना किसी विरोध के अपनी योजना को सफल बनाने में कामयाब रहे।

    पुलिस ने आसपास के जिलों और पड़ोसी क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया है। संदिग्ध वाहन और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि अपराधियों तक जल्द पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

    यह घटना एक बार फिर एटीएम सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले और कम निगरानी वाले एटीएम केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, मजबूत अलार्म सिस्टम और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इस वारदात में शामिल आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान

    हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान


    नई दिल्ली ।
    हरिद्वार की हर की पौड़ी क्षेत्र से जुड़ी सेवा और मानवता की एक प्रेरणादायक पहचान अब इतिहास का हिस्सा बन गई है। वर्षों तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को जरूरतमंद लोगों से जोड़ने वाले रमाशंकर गुप्ता, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘भंडारा किंग बाबा’ के नाम से जानते थे, का निधन हो गया। उनके जाने से न केवल हरिद्वार बल्कि उन हजारों लोगों के बीच भी शोक का माहौल है, जिनके लिए वह नियमित रूप से भोजन की व्यवस्था कराने का माध्यम बने थे।

    रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी थे, लेकिन लंबे समय पहले हरिद्वार आकर उन्होंने अपना जीवन सेवा कार्यों को समर्पित कर दिया। हर की पौड़ी के निकट शिवसेतु पर बैठकर वह श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह करते थे कि यदि संभव हो तो भूखे साधुओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे में सहयोग करें। उनका यह प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से होता था।

    समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी, जिस पर श्रद्धालु पूरी तरह भरोसा करते थे। लोग जानते थे कि उनके माध्यम से दिया गया सहयोग वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। यही विश्वास उन्हें सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता था। हरिद्वार आने वाले अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से उन्हें खोजते थे और उनके माध्यम से भोजन वितरण की व्यवस्था कराते थे। उनकी सादगी और पारदर्शिता ने समाज में उनकी अलग छवि स्थापित की।

    रमाशंकर गुप्ता हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि भोजन की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उनका मानना था कि जैसा भोजन वह स्वयं ग्रहण करते हैं, वैसा ही भोजन जरूरतमंदों को भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ वह भोजन तैयार करवाने और उसके वितरण की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक सेवा उपलब्ध कराना था।

    उनके निधन के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह भी सामने आया है कि अब उन लोगों की सहायता किस प्रकार होगी, जिनके लिए वह प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करते थे। वह दान देने वालों और भोजन पाने वालों के बीच एक मजबूत कड़ी थे। उनकी मौजूदगी ने वर्षों तक सेवा कार्यों को सरल और व्यवस्थित बनाए रखा। अब उनकी अनुपस्थिति में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समाज और स्थानीय लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में खड़ी है।

    हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों की पहचान केवल मंदिरों, घाटों और धार्मिक आयोजनों से नहीं बनती, बल्कि ऐसे लोगों से भी बनती है जो निस्वार्थ सेवा को अपना जीवन बना लेते हैं। रमाशंकर गुप्ता ने बिना किसी संस्था, प्रचार या पद के समाज सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने उन्हें लोगों के बीच विशेष सम्मान दिलाया। उनकी पहचान किसी औपचारिक संगठन से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और सेवा भाव से बनी।

    आज जब श्रद्धालु हर की पौड़ी की ओर जाएंगे और शिवसेतु से गुजरेंगे, तो वहां उनकी परिचित आवाज सुनाई नहीं देगी। हालांकि उनका जीवन यह संदेश अवश्य छोड़ गया है कि समाज में छोटे-छोटे प्रयास भी हजारों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। सेवा, विश्वास और मानवता के प्रति उनका समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा और हरिद्वार की सामाजिक स्मृतियों में उनकी पहचान हमेशा जीवित रहेगी।

  • शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक संकेत देखने को मिल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। इस मुलाकात में सनातन, गौरक्षा और राम मंदिर से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति पर जोर देने वाली पार्टी अब धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।

    लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सनातन और समाजवाद के बीच समानता का संदेश दिया। मुलाकात के दौरान उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की ओर से इसे सामाजिक समरसता और भारतीय परंपरा के सम्मान का संदेश बताया गया।

    बैठक में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित अनियमितता के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने इस विषय पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक लाभ या नुकसान के बजाय जनविश्वास के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ समय से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। गौरक्षा, सनातन परंपरा और अन्य धार्मिक विषयों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के महीनों में उनकी कई सार्वजनिक टिप्पणियों ने प्रदेश की राजनीति में भी प्रभाव डाला है। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी नेतृत्व का उनसे लगातार संवाद राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले भी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव शंकराचार्य से मुलाकात कर चुके हैं। दोनों पक्षों के बीच गौरक्षा, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता रहा है। इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी धार्मिक नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा सकता है।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी जहां सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, वहीं अब सनातन परंपरा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय भागीदारी दिखा रही है। इससे प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।

    हालांकि इस मुलाकात के राजनीतिक प्रभाव का वास्तविक आकलन आगामी चुनावी माहौल और मतदाताओं की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता संवाद चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, जहां सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

  • देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही

    देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही


    नई दिल्ली।
    पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के पहुंचने के बाद झमाझम बारिश (Heavy downpour) हो रही है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, विशेषतौर पर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में तो बारिश प्रचंड चरण में है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में वर्षा जनित घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। दोनों राज्यों में मूसलाधार बारिश से नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर हैं, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है।

    उत्तराखंड के यमुनोत्री हाईवे के साथ दोनों राज्यों में सैकड़ों सड़के बंद हैं, संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को मूसलाधार बारिश से स्थिति इतनी भयावह हुई कि कई क्षेत्रों में स्कूलों को बंद करना पड़ा। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों समेत उत्तर-पश्चिम भारत और देश के कई अन्य हिस्सों में तीन-चार दिन भार बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    हिमाचल प्रदेश में खराब मौसम की सबसे भारी मार सिरमौर और सोलन जिलों में पड़ी है। कुल्लू जिले में पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर की चपेट में आने से 70 वर्ष के एक व्यक्ति की जान चली गई। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर भी कई जगह भूस्खलन में लोगों के घायल होने की खबर है। त्रिपुरा में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। बाढ़ और बारिश के कारण करीब 11 हजार लोग बेघर हो गए हैं, जबकि 4,027 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।


    देहरादून समेत सात जिलों में स्कूल बंद

    मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन से उत्तराखंड में भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 118 सड़कें बंद हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के चलते अभी तक खोला नहीं जा सका है। भारी बारिश के चलते देहरादून समेत सात जिलों में शुक्रवार को 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। हरिद्वार जिले के भगवानपुर में उफनती नदी में डूबने से 18 साल के एक लड़के की मौत हो गई है।


    हरियाणा, पंजाब व यूपी में भारी बारिश

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हुई। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार और पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में भारी से बहुत बारिश (7-20 सेमी) दर्ज की गई। इन राज्यों के साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात क्षेत्र, कच्छ, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    वायनाड में मृतक संख्या सात हुई

    केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन वाली जगह से शुक्रवार को एक और शव मिला, जिससे इस आपदा में मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। बरामद शव की पहचान पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर निवासी सर्वेयर राकेश गुचैत के रूप में हुई है। उनका शव यहां मीनाक्षी पुल के पास से निकाला गया। हिमाचल प्रदेश के कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा अभी भी लापता हैं। गुरुवार तक, भूस्खलन वाली जगह से छह शव बरामद किए गए थे। बता दें कि सात जुलाई को अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी टनल प्रोजेक्ट वाली जगह पर भूस्खलन हुआ था। यह टनल वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।


    पुणे में इमारत में अभी भी दबे हैं आठ लोग, 30 ट्रेनों को किया गया रद्द

    मुंबई में शुक्रवार को तो बारिश से राहत मिली, लेकिन पुणे में कूड़े के पहाड़ के नीचे गिरने से दबी इमारत में अभी भी 8 लोग फंसे हुए हैं। हादसे के तीन दिन बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका है। अधिकारियों ने बताया कि लोगों को बाहर निकालने के लिए मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इमारत के सामने वाला हिस्सा पूरी तरह मलबे में दबा है, इसलिए लोगों को पीछे से रास्ता बनाकर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। भोर घाट खंड में भारी भूस्खलन के चलते मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर रेल सेवा बाधित हुई, जिसके 17 जुलाई से पहले सुचारू होने की संभावना नहीं है। इसके चलते लंबी दूरी की 30 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।