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  • बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल

    बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में एक बार फिर चर्चित जमीन सौदे से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। इस बार मामला Robert Vadra की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका को लेकर है। वाड्रा ने निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की है।

    यह पूरा मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में रखा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस सौदे में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने कम कीमत पर जमीन खरीदकर बाद में भारी मुनाफे में उसे बेचा।

    जानकारी के अनुसार, यह सौदा 2008 में हुआ था, जब कंपनी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से लगभग 3.5 एकड़ जमीन करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस समय Robert Vadra इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

    इसके बाद 2012 में वही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। इस लेनदेन को लेकर बाद में गंभीर सवाल उठे और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।

    इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2012 में आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे भूमि चकबंदी नियमों और प्रक्रियात्मक उल्लंघन से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की थी। इसके बाद यह सौदा विवादों के घेरे में आ गया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी का कहना है कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेजों और शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

    इसी आरोपपत्र के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल को समन जारी किया था और वाड्रा सहित अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। इसी आदेश को अब Robert Vadra ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

    दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। वाड्रा की तरफ से दलील दी गई है कि निचली अदालत का समन कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर सही नहीं है, इसलिए इसे रद्द किया जाए। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और इसकी गहन जांच जरूरी है।

    फिलहाल अदालत का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि हाईकोर्ट इस समन को बरकरार रखता है या इसे रोकने का आदेश देता है।

  • SC की बड़ी टिप्पणी, कहा- आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए महिलाएं क्यों दे अपने करियर की बलि?

    SC की बड़ी टिप्पणी, कहा- आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए महिलाएं क्यों दे अपने करियर की बलि?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादी के बाद महिलाओं (Women) के अधिकारों को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने इस बात पर जोर दिया है कि एक पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिला (Working Woman) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह शादी (Marriage) के बाद अपनी पहचान और करियर की बलि दे दे। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर कोई महिला अपने करियर के लिए पति से अलग रह रही है, तो उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।

    SC में एक डेंटिस्ट पत्नी और एक आर्मी ऑफिसर के बीच चल रहे विवाद पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सिर्फ महिला से त्याग माने जाने की सोच को दकियानूसी बताया। पीठ ने कहा, “यह उम्मीद करना कि महिला हमेशा अपने करियर का त्याग करे और एक ‘आज्ञाकारी पत्नी’ की पारंपरिक छवि में सिमट कर रहे, यह एक पुरानी और दकियानूसी सोच है।” पीठ ने कहा कि महिला अपने पति के घर का महज एक हिस्सा नहीं है। उसकी अपनी बौद्धिक और पेशेवर आकांक्षाएं हैं, जिनका सम्मान होना चाहिए।

    क्या है पूरा मामला?
    बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जोड़े की शादी 2009 में हुई थी। पति सेना में अधिकारी था। वहीं पत्नी ने अहमदाबाद में अपना डेंटल क्लिनिक शुरू किया था। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने आरोप लगाए कि महिला ने अपने परिवार के बजाय करियर को चुना और पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। अर्जी के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के इस फैसले को ‘क्रूरता’ माना था।

    कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ने पति को बिना बताए अपना क्लिनिक शुरू किया और अहमदाबाद में रहने के दौरान ससुराल के बजाय अपने मायके में रुकना पसंद किया, जो सही नहीं है। वहीं गुजरात हाईकोर्ट ने भी 2024 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।

    तलाक को दे दी मंजूरी
    सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के नजरिए को रूढ़िवादी बताया। SC ने तीखे शब्दों में कहा, “आज की दुनिया में जहां महिलाएं लंबी छलांगे लगा रही हैं। सिर्फ इसलिए कि पति एक आर्मी ऑफिसर है, यह उम्मीद करना कि पत्नी अपने करियर के बारे में सोच भी नहीं सकती, एक सामंती मानसिकता को दर्शाता है।” फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को रिकॉर्ड से हटा दिया। हालांकि, पति ने दूसरी शादी कर ली है और दोनों के बीच रिश्ते सुधरने की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।

  • कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!

    कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल अगले महीने पूरे होने जा रहे हैं। इसके बाद संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार (Council of Ministers expansion) को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी एक वजह भाजपा (BJP) के नए संगठन की टीम का गठन होना भी शामिल है। कुछ नेताओं की संगठन और सरकार में अदला-बदली भी हो सकती है। इस बीच, मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी ब्योरा तैयार किया जा रहा है और उनके संसदीय क्षेत्र एवं राज्य से उनके बारे में जानकारी ली जा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अभी तक कोई विस्तार नहीं हुआ है। पिछले कार्यकाल में भी सरकार बनने के लगभग दो साल बाद ही पहला विस्तार हुआ था। ऐसे में, अब विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन केंद्र सरकार में शामिल अपने मंत्रियों के कामकाज को लेकर विभिन्न स्तरों से फीडबैक ले रहा है। प्रदेश संगठन एवं संसदीय क्षेत्र से भी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

    मंत्रियों के क्षेत्र में दौरे, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, संसदीय क्षेत्र में प्रवास, संगठन की बैठकों में हिस्सेदारी, कार्यकर्ताओं से संपर्क आदि की जानकारी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है, इस कवायद के पीछे संभावित विस्तार है। माना जा रहा है कि संभावित विस्तार में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। पार्टी इस समय नया,युवा संगठन को तरजीह दे रही है।


    अनुभवी नेताओं को संगठन में लाने की संभावना

    संगठन की टीम और मंत्रिमंडल विस्तार दोनों के कई पहलू एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। नए व युवा अध्यक्ष के सहयोग के लिए कुछ अनुभवी नेताओं को संगठन में लाए जाने की भी संभावना है। पश्चिम बंगाल में जीत के बाद सरकार में अब इस राज्य का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा और आने वाले चुनावों के मद्देनजर संबंधित राज्यों को भी जगह मिल सकती है। सबसे ज्यादा संभावना चेहरों को बदलने की है। मोदी सरकार में अभी 72 मंत्री हैं और यह संख्या 81 तक बढ़ाई जा सकती है।

  • LPG संकट के बीच भारत को मिली बड़ी कामयाबी…. होर्मुज से न‍िकली 34 लाख स‍िलेंडर की खेप

    LPG संकट के बीच भारत को मिली बड़ी कामयाबी…. होर्मुज से न‍िकली 34 लाख स‍िलेंडर की खेप


    नई दिल्ली।
    दुन‍ियाभर में चल रहे एलपीजी संकट (LPG Crisis) के बीच गैस को लेकर एक नहीं दो खुशखबरी आ रही हैं. मिडल ईस्ट (Middle East.) में जारी तनाव और जंग के बीच भारत ने अपनी एनर्जी जरूरतों को लेकर बड़ी कामयाबी हासिल की है. पहली खुशखबरी एलपीजी टैंकर (LPG tanker) के होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) पार करने को लेकर है. एजेंसी के अनुसार भारत आ रहे एलपीजी टैंकर ‘एमवी सनशाइन’ (MV Sunshine) ने इस समय सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर ल‍िया है. मीड‍िया र‍िपोर्ट के अनुसार इस जहाज के जर‍िये 48,456 टन एलपीजी भारत आ रही है, ज‍िसके 18 मई तक पहुंचने की उम्‍मीद है. दूसरी खुशखबरी गैस स‍िलेंडर की कीमत को लेकर है।

    सूत्रों का कहना है ‘एमवी सनशाइन’ को ऐसे जहाजों की ल‍िस्‍ट में शाम‍िल क‍िया गया था, ज‍िसे मौजूदा तनाव के चलते विशेष सुरक्षा घेरे में रखा गया था. इसके अलावा तेल कंपन‍ियों ने स‍िलेंडर के रेट में क‍िसी तरह का इजाफा नहीं क‍िया है. कुछ मीड‍िया र‍िपोर्ट में कहा जा रहा था क‍ि 14 क‍िलो वाले घरेलू गैस स‍िलेंडर का रेट बढ़ सकता है. फारस की खाड़ी में बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए भारत ने अपने एनर्जी जहाजों को निकालने के लिए खास स्‍ट्रेटजी तैयार की है. यह सफलता इसलिए खास हो जाती है क्योंकि ‘एमवी सनशाइन’ गैस का 15वां ऐसा जहाज है, जिसे इस खतरनाक इलाके से सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया है।


    जहाज के 18 मई को भारतीय सीमा में पहुंचने की उम्‍मीद

    अध‍िकार‍ियों की तरफ से पुष्टि की गई क‍ि टैंकर अपने तय रूट पर बढ़ रहा है और उसे भारत तक पहुंचाने के लि‍ए हर संभव तकनीकी और सुरक्षा सहायता दी जा रही है. इस जहाज के 18 मई को भारतीय सीमा में पहुंचने की उम्‍मीद है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच यह आशंका जताई जा रही थी क‍ि होर्मुज स्‍ट्रेट से होने वाली एलपीजी सप्लाई रुक सकती है. क्‍योंक‍ि जंग के बीच भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्‍ते से इम्‍पोर्ट कर रहा है. सरकार और तेल कंपनियों ने वैकल्पिक इंतजाम और कूटनीतिक लेवल पर बातचीत के जरिये यह तय क‍िया है क‍ि सप्‍लाई चेन बाध‍ित नहीं होगी.


    भारतीय बाजार में सस्‍ती है कीमत

    फिलहाल सप्लाई को लेकर बड़ा खतरा नहीं है, ज‍िससे देश में गैस की किल्लत नहीं होगी. तेल कंपनियों की तरफ से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट प‍िछले दाम पर ही चल रहा है. यह स‍िलेंडर द‍िल्‍ली में 3071 रुपये में म‍िल रहा है. घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत को लेकर भी यही उम्‍मीद है क‍ि इंटरनेशल मार्केट में क्रूड ऑयल और गैस की कीमत में स्थिरता रहने पर आने वाले समय में आम जनता को राहत मिल सकती है. दुनियाभर में एलपीजी का एवरेज प्राइस 86.19 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारतीय बाजार में औसत रेट 66.73 रुपये प्रत‍ि लीटर का है. ये आंकड़े ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज की तरफ से जारी क‍िये गए हैं।

  • तेज आंधी-बारिश का कहर… UP में 54 लोगों की मौत, दिल्ली से उत्तराखंड तक बदला मौसम

    तेज आंधी-बारिश का कहर… UP में 54 लोगों की मौत, दिल्ली से उत्तराखंड तक बदला मौसम


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) से लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) तक मौसम (Weather) में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. बुधवार को कई जगहों पर तेज आंधी (Strong Storm), भारी बारिश और ओलावृष्टि (Heavy Rain and Hailstorm) देखने को मिली. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम का कहर देखने को मिला है. यहां कई जिलों में 54 लोगों की मौत हो गई. भदोही जिले में अचानक बदले मौसम ने बड़ा कहर बरपाया. यहां तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण 11 लोगों की मौत हुई है. कई जगह पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए. इससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ.

    वहीं हरदोई जिले में बदले मौसम ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं. तेज आंधी-तूफान और बारिश के बीच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए हादसों में दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई. एक बच्ची की शौचालय की दीवार गिरने से मौत हुई, जबकि दूसरी किशोरी आकाशीय बिजली की चपेट में आ गई. दोनों घटनाओं के बाद गांवों में मातम पसरा हुआ है. वहीं कानपुर देहात के कपड़ाहट ग्राम पंचायत के मजरा भैथरी गांव में आकाशीय बिजली गिरने से एक युवती की मौत हो गई, जबकि करीब 35 बकरियां भी चपेट में आकर मर गईं।

    फतेहपुर में भी आंधी-तूफान का कहर बरपा. यहां 5 महिला सहित 9 की मौत हो गई जबकि 17 लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा 8 मवेशियों की मौत हुई है. घटना सदर और खागा तहसील क्षेत्र की हैं. कौशांबी जिले के सिराथू तहसील क्षेत्र के केसारी गांव में पेड़ की भारी डाल टूटकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से एक वृद्ध महिला की दबने से मौके पर ही मौत हो गई. इसके अलावा तरसौरा गांव में तेज आंधी के बाद लगी भीषण आग से एक दर्जन घरों में आग लग गई, जिसमें एक भैंस की जलकर मौत हो गई।


    प्रयागराज में 17 लोगों की मौत

    संगम नगरी प्रयागराज में बुधवार शाम आए तेज आंधी तूफान ने जमकर तबाही मचाई है. तेज तूफान के कारण अलग-अलग स्थान में 17 व्यक्तियों की मौत हुई है. कई जगह पेड़ गिरे हैं और कई गाड़ियां दबी हैं. प्रयागराज के हंडिया, सोरांव, फूलपुर और मेजा इलाके में मौत ने अपना कहर बरपाया है. हंडिया में सात लोगों की मौत हुई है. वहीं फूलपुर में चार, सोरांव में तीन और मेजा में दो लोगों की मौत हुई है. वहीं तेज आंधी और तूफान के कारण कई बड़े पेड़ धराशाई हो गए. हवाओं के साथ धूल भरी आंधी के बीच कई जगहों पर सड़क पर पुराने पेड़ गिर गए हैं।


    दिल्ली में अचानक बदला मौसम

    उधर, दिल्ली में भी मौसम ने अचानक करवट ली. पश्चिमी दिल्ली में सुबह से मौसम सुहाना बना हुआ था, हालांकि दोपहर में तेज गर्मी महसूस की गई. लेकिन रात करीब 8 बजे अचानक मौसम बदला और कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई. उत्तम नगर इलाके में बारिश के दौरान ओले भी पड़े. दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है. लगातार बढ़ती गर्मी के बीच ठंडी हवाओं ने लोगों को राहत दी है।


    उत्तराखंड के लिए मौसम विभाग का अलर्ट

    वहीं उत्तराखंड में भी मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है. देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर में कई जगहों पर बारिश की संभावना जताई गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने देहरादून और नैनीताल समेत छह जिलों में बिजली कड़कने, ओलावृष्टि, तेज बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. देहरादून में आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहने का अनुमान है और यहां बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया. मैदानी इलाकों में भी तापमान सामान्य से कम रहा.

    लगातार खराब मौसम और भारी बारिश-ओलावृष्टि को देखते हुए प्रशासन ने आदि कैलाश तीर्थयात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है. सोमवार को जिले में भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद धारचूला बेस कैंप पर तीर्थयात्रियों के 36 सदस्यीय जत्थे को रोक दिया गया. प्रशासन ने ऊंचाई वाले यात्रा मार्गों पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है. प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है.


    राजस्थान में भी आंधी-तूफान का कहर

    राजस्थान के अलवर में भी अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ आए आंधी तूफान ने शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दीं. तेज हवाओं और बरसात के चलते शहर के कई इलाकों में पेड़ ओर बिजली के पोल गिर गए, जिससे यातायात व्यवस्था ओर बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई. यहां तूफान से टीन शेड गिरने से एक युवक की मौत हो गई. वहीं रामगढ़ के नेमरा में वज्रपात से एक साथ 26 मवेशियों की मौत हो गई. मुख्यमंत्री के पैतृक गांव में सात गाय और 19 बैल की मौत से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. इसके अलावा महाराष्ट्र के सतारा में बिजली गिरने से 22 भेड़ों की मौत हो गई।

  • भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15-20 मई 2026 तक पांच देशों के दौरे पर जा रहे हैं जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.-UAE) की यात्रा से हो रही है. पीएम मोदी यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात करेंगे. ईरान जंग के बीच जहां दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है, माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा पर प्रमुखता से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में UAE ने तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ढांचे से बाहर निकलने का फैसला किया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी और भी अहम हो गई है, खासकर लंबे समय के लिए एनर्जी सप्लाई और उसके भंडारण में सहयोग के क्षेत्र में।

    भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल होगा।


    फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत की उम्मीद बन सकते हैं ये पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे. यह साझेदारी मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है. बयान में कहा गया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

    भारत और UAE ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ाया है. इसमें कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के डाउनस्ट्रीम सेक्टर में सहयोग शामिल है। UAE फिलहाल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 सालों में भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में सातवें स्थान पर है।

    इस यात्रा के दौरान UAE में रहने वाले 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के कल्याण पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक माना जाता है।


    यूएई के अलावा और किन देशों के दौरे पर जा रहे हैं पीएम

    पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग है जिसमें वो नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर भी बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में शामिल पांच देश हैं- यूएई और यूरोप के चार देश नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली. यूरोपीय देशों के दौरे का मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करना और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूती देना है।

  • पानी बचाने के आसान तरीके: लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से दूर होगी गर्मियों की किल्लत

    पानी बचाने के आसान तरीके: लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से दूर होगी गर्मियों की किल्लत

    नई दिल्ली ।गर्मी का मौसम शुरू होते ही कई इलाकों में पानी की कमी एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आने लगती है। बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर और पानी के अनियंत्रित उपयोग के कारण आने वाले समय में यह संकट और गहरा हो सकता है। ऐसे में केवल प्रशासनिक प्रयास ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की छोटी-छोटी आदतें भी इस समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि पानी बचाने के लिए बड़े और कठिन बदलाव करने होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि दैनिक जीवन में कुछ सरल सुधार करके भी बड़ी मात्रा में पानी की बचत की जा सकती है। यदि इन आदतों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो गर्मी के मौसम में पानी की कमी की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    सबसे पहले ध्यान देने योग्य बात यह है कि ब्रश या शेविंग करते समय नल को लगातार खुला नहीं छोड़ना चाहिए। अक्सर अनजाने में बहने वाला यह पानी हर दिन कई लीटर की बर्बादी का कारण बनता है। जरूरत पड़ने पर ही पानी का उपयोग करना और तुरंत नल बंद कर देना एक बेहद प्रभावी तरीका है।

    इसके अलावा नहाने की आदत में बदलाव भी पानी की बचत में बड़ी भूमिका निभा सकता है। शॉवर की बजाय बाल्टी और मग का उपयोग करने से पानी की खपत काफी कम हो जाती है। यह एक पारंपरिक लेकिन बेहद उपयोगी तरीका है, जिसे अपनाकर हर घर में पानी की बचत संभव है।

    घर में उपयोग होने वाले आरओ सिस्टम और कूलर से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, जबकि इसका उपयोग पोछा लगाने, पौधों को पानी देने या सफाई जैसे कार्यों में आसानी से किया जा सकता है। इसी तरह यह पानी कई घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है।

    पौधों की देखभाल के समय भी समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। सुबह या शाम के समय पौधों को पानी देने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जबकि दोपहर की तेज धूप में पानी तेजी से वाष्पित हो जाता है, जिससे उसकी बर्बादी बढ़ जाती है।

    घर में किसी भी तरह की पानी की लीकेज को नजरअंदाज करना भी एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। टपकते नल या पाइपलाइन की छोटी सी खराबी भी समय के साथ बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी का कारण बनती है। इसलिए ऐसी समस्याओं को तुरंत ठीक कराना बेहद जरूरी है।

    कुल मिलाकर, पानी की बचत केवल एक आदत नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे अपनाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यदि हर व्यक्ति इन छोटे-छोटे कदमों को अपनाए, तो गर्मियों में पानी की किल्लत को काफी हद तक कम किया जा सकता है और एक बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।

  • रेल नेटवर्क में बड़ा विस्तार, गुजरात की डबल लाइन परियोजना को मंजूरी, 284 गांवों को मिलेगा फायदा

    रेल नेटवर्क में बड़ा विस्तार, गुजरात की डबल लाइन परियोजना को मंजूरी, 284 गांवों को मिलेगा फायदा

    नई दिल्ली । Cabinet Committee on Economic Affairs ने गुजरात में एक बड़ी रेलवे परियोजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत अहमदाबाद-धोलेरा के बीच सेमी-हाईस्पीड डबल रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना देश के रेलवे ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और इसकी अनुमानित लागत 20,667 करोड़ रुपए बताई गई है।

    इस परियोजना का उद्देश्य अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, प्रस्तावित धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इससे न केवल यात्रियों की यात्रा का समय कम होगा, बल्कि एक ही दिन में आने-जाने की सुविधा भी संभव हो सकेगी।

    नई रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्रीय विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लगभग 134 किलोमीटर लंबी यह परियोजना करीब 284 गांवों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे करीब 5 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना भी जताई जा रही है।

    सरकार का मानना है कि यह परियोजना देश में सेमी-हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी। इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य हिस्सों में भी लागू करने की योजना पर विचार किया जा सकता है, जिससे रेलवे सिस्टम और अधिक आधुनिक और तेज बनाया जा सके।

    यह परियोजना राष्ट्रीय अवसंरचना विकास योजना के तहत तैयार की गई है, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे न केवल यात्री परिवहन बल्कि माल ढुलाई भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

    पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रेलवे एक ऊर्जा-कुशल और कम प्रदूषण वाला परिवहन माध्यम है। अनुमान है कि इससे ईंधन की खपत में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील का असर अब राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।

    मुख्यमंत्री ने इस पहल को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा संकल्प बताया है। उनका कहना है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों का सही उपयोग आज की आवश्यकता है, और हर स्तर पर इसके लिए जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक भारत के निर्माण की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सोच है जो देश को अधिक जिम्मेदार और सतत विकास की ओर ले जाती है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपने मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं।

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।

    इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर ऊर्जा बचत और ईंधन के कम उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल और अनावश्यक खपत को कम करने की सलाह दी थी, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया जा सके।

    इसी दिशा में यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश देता है कि यदि नेतृत्व स्तर पर बदलाव आता है, तो उसका असर समाज के अन्य वर्गों तक भी तेजी से पहुंचता है।

  • अम्मा के बाद बिखरती AIADMK! क्या 2026 में खत्म हो जाएगी MGR-जयललिता की राजनीतिक विरासत?

    अम्मा के बाद बिखरती AIADMK! क्या 2026 में खत्म हो जाएगी MGR-जयललिता की राजनीतिक विरासत?

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में कभी बेहद मजबूत मानी जाने वाली All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। 2026 विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद पार्टी के भीतर लंबे समय से दबा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी एक और बड़े विभाजन की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एमजीआर और J. Jayalalithaa द्वारा खड़ी की गई यह राजनीतिक विरासत अब बिखरने की ओर बढ़ रही है।

    चुनावी हार के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के भीतर एक बड़ा गुट खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौजूदा रणनीति और फैसलों ने पार्टी को कमजोर कर दिया है, जिसका सीधा असर चुनावी परिणामों में दिखाई दिया। यही कारण है कि अब संगठन के भीतर दो अलग-अलग धड़े स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

    तमिलनाडु विधानसभा के हालिया सत्र के दौरान भी पार्टी के भीतर का मतभेद खुलकर सामने आ गया। विधायकों के अलग-अलग समूहों में दिखाई देने से यह साफ संकेत मिला कि अंदरूनी एकजुटता लगभग खत्म होती जा रही है। कुछ नेताओं ने खुले तौर पर मौजूदा नेतृत्व को अस्वीकार करते हुए नए चेहरे को आगे लाने की मांग की। इस घटनाक्रम ने पार्टी समर्थकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam पहले भी कई बार आंतरिक संघर्षों का सामना कर चुकी है, लेकिन इस बार स्थिति पहले से कहीं ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। पार्टी के संस्थापक M. G. Ramachandran और बाद में J. Jayalalithaa के नेतृत्व में संगठन ने तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन अब करिश्माई नेतृत्व की कमी साफ महसूस की जा रही है।

    विवाद की एक बड़ी वजह भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी बताई जा रही है। पार्टी के भीतर कुछ नेता बदलते राजनीतिक समीकरणों के अनुसार नई साझेदारी और गठबंधन की वकालत कर रहे हैं, जबकि दूसरा पक्ष पुराने ढर्रे पर आगे बढ़ना चाहता है। इसी टकराव ने संगठन के भीतर दूरी और बढ़ा दी है।

    चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के कई नेता खुलकर यह कह रहे हैं कि अगर समय रहते संगठन में बड़े बदलाव नहीं किए गए, तो पार्टी का जनाधार और कमजोर हो सकता है। समर्थकों के बीच भी निराशा का माहौल है क्योंकि वे लगातार पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान को देख रहे हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि यह विवाद और गहराया, तो पार्टी के सामने पहचान और चुनाव चिन्ह तक का संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल पूरा तमिलनाडु इस राजनीतिक संघर्ष पर नजर बनाए हुए है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई नया नेतृत्व इस बिखरते संगठन को संभाल पाएगा या फिर यह संघर्ष पार्टी के इतिहास का सबसे बड़ा संकट साबित होगा।