Category: National

  • मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रस्तावित दिल्ली रैली के लिए मीरवाइज उमर फारूक को भेजे गए निमंत्रण का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप देकर राज्य का दर्जा बहाल करने की उनकी पार्टी की मांग से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रैली का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

    जम्मू में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए 50 से अधिक लोगों को आमंत्रण भेजा था, लेकिन केवल एक नाम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने लोगों को निमंत्रण भेजा गया, तब केवल मीरवाइज उमर फारूक के नाम को ही प्रमुखता से क्यों उठाया गया। उनके अनुसार यह पूरी बहस वास्तविक राजनीतिक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    मुख्यमंत्री ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मंचों पर इस निमंत्रण को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो पार्टी ने किसी अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास किया हो। उन्होंने कहा कि यह व्याख्या तथ्यों के अनुरूप नहीं है और इससे केवल भ्रम पैदा किया जा रहा है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने के बजाय राजनीतिक विमर्श को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।

    उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां अब समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह दावा सही है, तो फिर उसी आधार पर किसी व्यक्ति को अलगाववादी बताकर विवाद खड़ा करना विरोधाभासी प्रतीत होता है। उनका कहना था कि दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं और इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी पार्टी का प्रमुख लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है, ताकि इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। उनके अनुसार यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और राजनीतिक दलों को भी इसी विषय पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाई जा रही यह मांग आगे भी मजबूती के साथ जारी रहेगी।

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इस निमंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे राज्य का दर्जा बहाल करने के अभियान का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

  • कर्नाटक का PRC सर्टिफिकेट बना सियासी विवाद का केंद्र, SIR से पहले कांग्रेस सरकार के फैसले पर बीजेपी ने उठाए संवैधानिक सवाल

    कर्नाटक का PRC सर्टिफिकेट बना सियासी विवाद का केंद्र, SIR से पहले कांग्रेस सरकार के फैसले पर बीजेपी ने उठाए संवैधानिक सवाल

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के निवासियों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने की नई व्यवस्था ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस पहल के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस सरकार इसे प्रशासनिक और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का माध्यम बता रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी इसके अधिकार क्षेत्र और संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े कर रही है।

    राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रमाणपत्र का उद्देश्य लंबे समय से कर्नाटक में रह रहे पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक अवसरों तथा अन्य लाभों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा। इसी उद्देश्य से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए कई पात्रता मानदंड भी निर्धारित किए हैं। इनमें राज्य में जन्म, लंबे समय से निवास, शिक्षा, पारिवारिक संबंध, संपत्ति और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज रिकॉर्ड जैसे आधार शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन मानकों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा ताकि पात्र व्यक्तियों की पहचान पारदर्शी तरीके से हो सके।

    वहीं बीजेपी ने इस पहल को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नागरिकता और निवास से जुड़े विषयों पर अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है। उनका तर्क है कि यदि कोई राज्य सरकार ऐसे प्रमाणपत्रों को नागरिकता या विशेष अधिकारों से जोड़ने की कोशिश करती है तो यह संवैधानिक प्रश्न खड़े कर सकता है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया से पहले इस तरह की पहल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकती है।

    हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र और नागरिकता प्रमाणपत्र दोनों अलग-अलग विषय हैं। भारतीय नागरिकता का निर्धारण केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह नागरिकता कानूनों के तहत संचालित होता है। दूसरी ओर, राज्य सरकारें प्रशासनिक जरूरतों और स्थानीय योजनाओं के संचालन के लिए निवास या डोमिसाइल से जुड़े प्रमाणपत्र जारी कर सकती हैं। ऐसे दस्तावेज किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक घोषित नहीं करते, बल्कि केवल उसके राज्य में निवास से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करते हैं।

    कर्नाटक सरकार का दावा है कि पीआरसी का उपयोग केवल राज्य की योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं, रोजगार अवसरों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद का केंद्र प्रमाणपत्र की प्रकृति से अधिक उसके समय और संभावित प्रभाव को लेकर है। एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची के अद्यतन और राज्य सरकार की नई पहल के बीच संबंधों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं। ऐसे में इस विषय पर कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।

  • अलवर पेट्रोल पंप फायरिंग का खुलासा, प्रेम प्रसंग में रची गई थी पूरी साजिश, बाइक चोरी कर हथियार खरीदा और सेल्समैन पर कर दी गोलीबारी

    अलवर पेट्रोल पंप फायरिंग का खुलासा, प्रेम प्रसंग में रची गई थी पूरी साजिश, बाइक चोरी कर हथियार खरीदा और सेल्समैन पर कर दी गोलीबारी


    नई दिल्ली । राजस्थान के अलवर जिले में पेट्रोल पंप पर दिनदहाड़े सेल्समैन को गोली मारने की घटना का पुलिस ने खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह वारदात व्यक्तिगत विवाद और प्रेम प्रसंग से जुड़ी थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने घटना को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बनाई, बाइक चोरी की, हथियार का इंतजाम किया और फिर पहचान सुनिश्चित करने के बाद फायरिंग की।

    घटना सदर थाना क्षेत्र के बुर्जा स्थित एक पेट्रोल पंप की है, जहां कार्यरत सेल्समैन पर दिन के समय गोली चलाई गई थी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद उसे स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी थी।

    जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर आरोपी जगत गुर्जर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि घायल सेल्समैन कथित रूप से आरोपी की परिचित महिला को लगातार फोन कर रहा था। महिला ने इसकी जानकारी आरोपी को दी, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर पूरी वारदात की योजना बनाई।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पहले कठूमर क्षेत्र से एक मोटरसाइकिल चोरी करके अलवर पहुंचा। इसके बाद वह संबंधित पेट्रोल पंप पर गया और वहां मौजूद सेल्समैन की तस्वीर लेकर अपनी परिचित महिला को भेजी। पहचान की पुष्टि होने के बाद उसने सेल्समैन से संपर्क किया और मौके पर ही देसी कट्टे से गोली चला दी। गोली सेल्समैन के कंधे में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार आरोपी ने पहले से जुटाया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार और आठ कारतूस बरामद किए हैं। इनमें से एक कारतूस फायरिंग में इस्तेमाल हुआ था जबकि शेष कारतूस बरामद कर लिए गए। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस मोटरसाइकिल का उपयोग वारदात में किया गया, उसके चोरी होने की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से हुई है। इस संबंध में संबंधित थाने में अलग से मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी ने हथियार कहां से प्राप्त किया और इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।

    आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान उसने पुलिस टीम का विरोध करने का प्रयास किया और हाथापाई भी की, जिसमें उसे मामूली चोटें आईं। इसके बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और नियमानुसार गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पहले किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल रहा है या नहीं।

    पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में मामला व्यक्तिगत विवाद और प्रेम प्रसंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, लेकिन पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। अधिकारी सभी उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी तथ्यों के आधार पर मामले की प्रत्येक कड़ी की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    नई दिल्ली । कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने आम यात्री का भेष धारण कर बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बसों में सफर किया और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं तथा कर्मचारियों के व्यवहार का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक चले इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने दस से अधिक बसों में यात्रा की और कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री ने देखा कि एक यात्री द्वारा निर्धारित बस स्टॉप पर उतरने का स्पष्ट संकेत देने के बावजूद संबंधित बस के चालक और परिचालक ने वाहन नहीं रोका। इस लापरवाही के कारण यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्री ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन में ऐसी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस निरीक्षण के दौरान स्वयं मंत्री को भी यात्रियों जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान उन्होंने किराया देने के लिए 100 रुपये का नोट दिया, लेकिन कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने की बात कहते हुए उन्हें बस से उतर जाने के लिए कहा। मंत्री ने इस घटना को यात्रियों के साथ होने वाले व्यवहार का वास्तविक उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी समस्याएं रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए गंभीर असुविधा का कारण बनती हैं और इनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

    बसों के निरीक्षण के अलावा मंत्री ने शहर में ऑटो-रिक्शा सेवाओं का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया, जहां मीटर पर निर्धारित किराए से अधिक राशि यात्रियों से वसूली जा रही थी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित चालक को नियमों का पालन करने और निर्धारित किराए से अधिक वसूली नहीं करने की हिदायत दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी साधनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    बायराथी सुरेश ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यदि चालक, परिचालक या अन्य कर्मचारी अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि यात्रियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाया जाए।

    मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर आम नागरिक की तरह सेवाओं का अनुभव करना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा, कर्मचारियों में अनुशासन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाती रहेगी।

  • असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    नई दिल्ली । असम के तिनसुकिया शहर में सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। तिनसुकिया नगर बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ‘हॉल ऑफ शेम’ अभियान लागू किया है। इस अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाती है और उनके वीडियो फुटेज शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बढ़ेगा।

    नगर बोर्ड ने शहर के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया है। इन कैमरों की सहायता से ऐसे लोगों की निगरानी की जा रही है जो सड़कों, दीवारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकते हैं या खुले में पेशाब करते हैं। कैमरों में रिकॉर्ड हुई घटनाओं को डिजिटल स्क्रीन पर दिखाकर लोगों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और जुर्माना लगाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

    नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपमानित करना नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है। उनका मानना है कि जब लोगों को यह एहसास होगा कि नियमों की अनदेखी सार्वजनिक रूप से सामने आ सकती है, तो वे स्वच्छता नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे शहर में गंदगी फैलाने की घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक स्थान अधिक साफ-सुथरे बने रहेंगे।

    हालांकि इस पहल ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई बहस को भी जन्म दिया है। कई नागरिकों ने इसे स्वच्छ भारत की दिशा में एक प्रभावी कदम बताते हुए समर्थन दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। ऐसे में यदि कठोर उपायों से लोगों की आदतों में सुधार आता है तो इससे पूरे शहर को लाभ मिलेगा।

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस अभियान पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना निजता के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उनका तर्क है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और जागरूकता अभियान जैसे उपाय पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि सार्वजनिक प्रदर्शन से व्यक्तिगत सम्मान और गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग प्रभावी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शिता, स्पष्ट नियमों और उचित निगरानी के साथ किया जाए तो ऐसे अभियान बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

    तिनसुकिया नगर बोर्ड की यह पहल अब अन्य शहरों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह अभियान सार्वजनिक स्वच्छता में कितना बदलाव ला पाता है और साथ ही निजता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़े उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। फिलहाल यह पहल देश में स्वच्छता प्रबंधन और तकनीक के उपयोग को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन चुकी है।

  • राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पिछले कुछ समय से सार्वजनिक गतिविधियों में अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस द्वारा शिक्षा से जुड़े मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। पटना में होने वाला कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था, लेकिन अंतिम समय में इसके स्थगित होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को पटना से देहरादून स्थानांतरित करने के पीछे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक चुनौतियां एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रदेश इकाई के भीतर बढ़ी आंतरिक खींचतान को देखते हुए नेतृत्व ने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव का निर्णय लिया। इसके बाद उत्तराखंड में आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    इसी बीच राहुल गांधी की सार्वजनिक अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले करीब 20 दिनों से उनकी ओर से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रेस संबोधन या सोशल मीडिया गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर से यह जानकारी सामने आई है कि वह विदेश यात्रा पर हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनकी वापसी को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को पहले से निर्धारित कई कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पटना के अलावा प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम भी स्थगित किए जाने की चर्चा है। पार्टी अब आगामी आयोजनों की नई रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि अभियान की गति प्रभावित न हो और विभिन्न राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम समय पर आयोजित किए जा सकें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे समय में किसी भी बड़े कार्यक्रम के स्थगित होने से राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और आवश्यक परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों में बदलाव करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से संवाद के माध्यम से शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। वहीं राहुल गांधी की वापसी के बाद उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों की नई रूपरेखा सामने आने की संभावना है।

  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण को लेकर चल रही चर्चाओं पर पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का अंतिम निर्णय केवल पार्टी नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की सिफारिश या व्यक्तिगत अपेक्षाओं के बजाय पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

    धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद आनंद भदौरिया ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने का अधिकार पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार किसी व्यक्ति की सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर टिकट मिलने की संभावना नहीं है। पार्टी जिस उम्मीदवार को अधिक उपयुक्त समझेगी, उसी को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे उसे विजयी बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करें।

    उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत पसंद का कोई उम्मीदवार नहीं है। सांसद होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अपने लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों के प्रति है। इसलिए पार्टी यदि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में किसी भी नेता को उम्मीदवार बनाती है तो वह पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ उसके समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाना उनके सिद्धांतों में नहीं है और संगठन सर्वोपरि है।

    आनंद भदौरिया ने टिकट की उम्मीद रखने वाले नेताओं को सलाह दी कि यदि वे चुनाव लड़ना चाहते हैं तो अपना पक्ष सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखें। उन्होंने कहा कि कई बार कुछ लोग आवश्यकता पड़ने पर उनकी प्रशंसा करते हैं, लेकिन अपेक्षाएं पूरी नहीं होने पर वही लोग आलोचना करने लगते हैं। इस प्रकार का दोहरा व्यवहार राजनीतिक कार्यशैली के अनुरूप नहीं माना जा सकता और पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिन कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका सहयोग किया था, उनसे उन्होंने कभी टिकट दिलाने का कोई वादा नहीं किया था। वर्तमान में भी उन्होंने किसी को टिकट दिलाने का आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ मेहनत की है, उनके योगदान को वह सम्मान देते हैं और समय-समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर उनका सहयोग करने का प्रयास करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। विभिन्न दलों में संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी के भीतर भी टिकट को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन आनंद भदौरिया के बयान को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की भूमिका को स्पष्ट करने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संकेत मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति कम हो सकती है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया संगठन के स्तर पर तय मानकों के अनुसार होगी। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ विभिन्न दलों में टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को लेकर गतिविधियां और अधिक बढ़ने की संभावना है।

  • वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली । वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के निकट हुए दर्दनाक पर्यटक नौका हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी शव रविवार शाम तक हो ची मिन्ह सिटी पहुंच जाएंगे। वहां आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय दूतावास और वियतनामी प्रशासन लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत भेजने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास की टीमें संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो और मृतकों के परिजनों तक उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर जल्द पहुंचाए जा सकें।

    शवों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए एक अधिकृत एजेंसी को नियुक्त किया गया है। यह एजेंसी मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक अनुमति, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं को पूरा कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही पार्थिव शरीर विशेष व्यवस्था के तहत भारत भेज दिए जाएंगे।

    हादसे में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की हालत में लगातार सुधार बताया गया है। उनका इलाज वियतनाम के एक सरकारी अस्पताल में चल रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य पहले से बेहतर हो रहा है। वहीं, दुर्घटना में सुरक्षित बचाए गए अन्य भारतीय पर्यटकों की स्वदेश वापसी की भी व्यवस्था की गई है। सभी यात्रियों को रविवार को उनके-अपने गृह राज्यों के लिए रवाना किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित पर्यटकों की यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि वे सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। भारतीय दूतावास लगातार सभी यात्रियों और उनके परिवारों के संपर्क में है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं सहायता कार्य पूरी तरह सक्रिय हैं।

    यह हादसा शनिवार को उस समय हुआ था जब भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक पर्यटन नौका फु क्वोक द्वीप के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में भ्रमण के दौरान पलट गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नौका में लगभग 32 भारतीय सवार थे। इनमें तमिलनाडु के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक थी, जबकि अन्य यात्री आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल से थे।

    स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस दुर्घटना में 15 भारतीयों की मृत्यु हुई, जबकि अन्य यात्रियों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और आवश्यक देखभाल की गई। हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने राहत एवं समन्वय कार्यों को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार कार्रवाई जारी रखी है।

    इस घटना ने विदेश यात्रा पर गए भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मृतकों के पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक भारत पहुंचाने, घायलों के उपचार और सभी प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

  • राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

    राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे।

    एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की।

    पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी।

    अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीति
    जांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था।

    लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरी
    सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।

  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी


    चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी।

    हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

    चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेल
    पंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके।

    बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की।

    रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
    भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवार
    सुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”