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  • वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए।

    अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह गीत हकदार है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ा रहा है और करोड़ों भारतीयों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इससे संबंधित किसी भी घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेता मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसी दौरान सोनिया गांधी के एक इशारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाए और इसे गीत के प्रति कथित आपत्ति से जोड़ दिया।

    अमित शाह ने दावा किया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर कुछ संकेत किया था। उन्होंने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस पर सवाल खड़े किए। हालांकि इस मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है और भाजपा के आरोपों को लेकर सियासी बहस जारी है।

    अमित शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह लोगों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम बना। स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् का नारा और गीत देशभक्ति की भावना से जुड़ा रहा है।

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक और चुनावी हितों के कारण वंदे मातरम् को पीछे किया। उन्होंने कहा कि देश की भावनाओं से जुड़े इस गीत का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वंदे मातरम् के महत्व को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की बात कर चुके हैं। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के घटनाक्रम को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की भूमिका और नेताओं के संकेत पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा ने कांग्रेस से माफी की मांग को और प्रमुखता दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

  • ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की

    ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की


    नई दिल्ली । कर्नाटक के मंगलुरु में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विकास पुत्तूर ने सोनिया गांधी के खिलाफ उर्वा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान से जुड़ी है।

    बीजेपी नेता का आरोप है कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के समय सोनिया गांधी का व्यवहार राष्ट्रगीत के प्रति सम्मानजनक नहीं था। शिकायत में कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर व्यवधान पैदा करने और गीत के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाने का आरोप लगाया गया है।

    विकास पुत्तूर ने पुलिस से मामले की जांच करने और शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों और गीतों के सम्मान से संबंधित मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    यह विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के बाद सामने आया। कार्यक्रम में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ था। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि गीत के दौरान कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता बातचीत करते हुए दिखाई दिए और उनका रवैया उचित नहीं था। इसी आधार पर बीजेपी ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया है।

    मामले को लेकर बीजेपी नेता ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई करते समय किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस और राज्य सरकार की ओर से मामले में कार्रवाई नहीं की जाती है तो वह कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

    हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। पुलिस की ओर से मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाया जाता है, यह स्पष्ट होना बाकी है। फिलहाल शिकायत के आधार पर लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है और इसके साथ देश के स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। इसी कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके सम्मान और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अक्सर महत्वपूर्ण बन जाती है।

    मंगलुरु में दर्ज शिकायत ने इस मुद्दे को कर्नाटक की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई कानूनी उल्लंघन बनता है या नहीं।

    इस विवाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना भी है। शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट जाने की बात कहकर मामले को आगे कानूनी स्तर पर ले जाने का संकेत दिया है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं।

    फिलहाल मामले का केंद्र 15 अगस्त के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के दौरान हुए कथित व्यवहार पर है। पुलिस जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। तब तक सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखे जा रहे हैं।

  • राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..

    राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..


    नई दिल्ली । 
    वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक रुख, उनके बयानों और विदेश दौरों को लेकर कई सवाल उठाए और कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का सबसे प्रमुख चेहरा राहुल गांधी हैं, लेकिन उनके बयानों से युवाओं को स्पष्ट दिशा मिलने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जगह उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं।

    वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार देश की आलोचना करता है, उससे वंदे मातरम् और भारत माता के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे पर निशाना साधने की कोशिश की।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो वहां दिए जाने वाले उनके बयानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विदेशों में दिए गए कुछ बयानों से भारत के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है और इससे देश की छवि प्रभावित होने का आरोप लगाया।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की मानसिक स्थिति और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ऐसा है कि या तो वह बहुत फ्रस्ट्रेट हैं या मानसिक तनाव में हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक स्तर पर पहले भी विवाद का विषय रहा है। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी को पॉलिटिकल जोकर तक करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा है। गिरिराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है।

    वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसी वजह से इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    गिरिराज सिंह के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह विवाद केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि राहुल गांधी की राजनीति, उनके बयानों और देश से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

  • झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। प्रदर्शन 23वें दिन में पहुंच गया है और अब आंदोलनकारी छात्रों का निशाना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस और राहुल गांधी भी बन गए हैं। छात्रों ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है।

    आंदोलनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला जलाने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

    राहुल गांधी को लेकर छात्रों की नाराजगी की वजह उनके साथ हुई बातचीत के बाद कार्रवाई नहीं होने को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उनकी मांगों पर कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया।

    छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनकी समस्याओं के समर्थन में हैं तो उन्हें आंदोलन के बीच पहुंचकर छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

    आंदोलनकारियों ने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो कांग्रेस को अपने समर्थन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि समर्थन वापस लेने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का तरीका बदला जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में प्रदर्शन के और व्यापक होने की संभावना है।

    20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायतों पर निर्णय करे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्य विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआईएमएल के दो विधायक शामिल हैं।

    यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 40 विधायक रह जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से एक कम है। हालांकि, विधानसभा में जेकेएलएम का एक विधायक भी है। उसका समर्थन मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 41 विधायकों के आंकड़े तक पहुंच सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करने वाला विषय बनता जा रहा है।

  • वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    नई दिल्ली । वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से अफरा तफरी मच गई। घटना में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से जुड़े दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोली चलने की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, एक यात्री अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। यात्री के पास बंदूक थी और उसने विमान यात्रा के दौरान हथियार ले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी।

    बताया गया है कि हथियार की जांच के दौरान अचानक बंदूक से एक राउंड फायर हो गया। गोली चलने के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना में सुरक्षा जांच का काम कर रहे दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए।

    घटना के तुरंत बाद दोनों घायल कर्मचारियों को न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर आगे जानकारी दी जा सकती है।

    जिस यात्री के हथियार से गोली चली, वह मुंबई जाने वाली IX-1810 फ्लाइट से यात्रा करने वाला था। वह अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचा था। हथियार साथ होने की जानकारी पहले से दिए जाने के बावजूद जांच के दौरान अचानक फायरिंग हो गई। इस कारण अब सुरक्षा प्रक्रिया और घटना की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके से जुड़े घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंदूक से गोली किस परिस्थिति में चली और हथियार की जांच के समय सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया जा रहा था।

    पुलिस और संबंधित अधिकारी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग के समय हथियार की स्थिति क्या थी और जांच के दौरान किन परिस्थितियों में अचानक एक राउंड फायर हुआ। मामले में उपलब्ध जानकारी और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में हथियार की जांच के दौरान गोली चलने की घटना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान घायलों के उपचार और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

    पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस वजह से हुई और इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है और आगे की जानकारी जांच के आधार पर सामने आने की संभावना है।

  • दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल

    दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में दिमागी नक्सल शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले तत्वों को पहचानने की जरूरत पर जोर दिया था। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। चिदंबरम की इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान को विपक्ष और सरकार से असहमति रखने वाले लोगों के संदर्भ में देखा और इस तरह की शब्दावली के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्बन नक्सल शब्द के पुराने इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री की ओर से अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन संसद में इसकी परिभाषा को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्पष्ट परिभाषा सामने नहीं आई थी।

    जयराम रमेश ने जाति जनगणना के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक जाति जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच से जोड़कर देखा जाता था, जबकि बाद में सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की ओर से पहले किसी मांग या विचार को एक विशेष राजनीतिक शब्दावली से जोड़ना और बाद में उसी दिशा में कदम उठाना सवाल खड़े करता है।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने या उनसे असहमति जताने वालों को इस तरह के विशेषणों से संबोधित करना उचित नहीं है।

    वाम दलों ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी को गंभीरता से लिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के महासचिव एमए बेबी ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। वाम नेताओं ने दिमागी नक्सल जैसे शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक विमर्श के लिए गंभीर विषय बताया।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से हुई। लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों और समाज को प्रभावित करने वाली विचारधाराओं का उल्लेख किया। इसी दौरान उन्होंने दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे तत्वों को पहचानने की आवश्यकता बताई, जो उनके अनुसार समाज को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।

    प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद अब सार्वजनिक बहस का रूप ले चुके हैं। कांग्रेस और वाम दल जहां इस शब्दावली को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री के बयान का संदर्भ सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों से जुड़ा बताया जा रहा है।

    दिमागी नक्सल शब्द पर शुरू हुआ यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक दल स्वतंत्रता दिवस के संदेशों और देश की दिशा से जुड़े मुद्दों पर अपनी-अपनी विचारधारा के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चिदंबरम की टिप्पणी और विपक्षी नेताओं की आपत्तियों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

  • अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को देश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। नई दिल्ली स्थित उनके स्मारक सदैव अटल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता भी शामिल हुए। सभी ने वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और भारतीय राजनीति में उनकी विशिष्ट भूमिका को याद किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व को लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व और राष्ट्रहित से जोड़कर देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाजपेयी को याद करते हुए उनके नेतृत्व और विचारों को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया और उनके विचार तथा कार्य आज भी देशवासियों को दिशा देते हैं। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा।

    अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे जिनकी पहचान केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, कवि और राजनेता के तौर पर भी बनी। उनकी भाषण शैली, सरल व्यवहार और राजनीतिक संवाद का अलग अंदाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता था। संसद में उनके वक्तव्यों को लंबे समय तक राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 में उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला, लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2004 तक सरकार का नेतृत्व किया। इस दौरान गठबंधन सरकार को स्थिरता के साथ चलाना उनके राजनीतिक कौशल की महत्वपूर्ण मिसाल माना गया।

    उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में वर्ष 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाओं में शामिल रहा। इस निर्णय के बाद भारत की परमाणु क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे और सड़क संपर्क को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।

    स्वर्णिम चतुर्भुज योजना उनके कार्यकाल की प्रमुख विकास परियोजनाओं में रही। इसका उद्देश्य देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना था। इसके अलावा ग्रामीण सड़क संपर्क और दूरसंचार क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पहल हुईं।

    अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान के प्रति देश की मान्यता के रूप में देखा गया।

    16 अगस्त 2018 को वाजपेयी का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी उनके स्मारक सदैव अटल पर नेताओं ने पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। भारतीय राजनीति में वाजपेयी की विरासत आज भी उनके नेतृत्व, भाषण कला, कविताओं और राष्ट्रसेवा से जुड़ी स्मृतियों के रूप में मौजूद है।

  • बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं

    बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं


    नई दिल्ली । 
    बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पारंपरिक परिवहन साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने एक घोड़ागाड़ी को रोककर भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर वाहनों की नियमित जांच से बचने के लिए घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधार पर पुलिस टीम ने बेघर गांव के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध घोड़ागाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से विभिन्न ब्रांडों की लगभग दो सौ बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों का पता लगाया जा सके।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आमतौर पर चार पहिया वाहनों, ट्रकों या यात्री बसों का उपयोग किया जाता था, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण अब ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों और जानवरों का सहारा लिया जा रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप पड़ोसी क्षेत्रों से लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इस माध्यम का उपयोग किया गया था।

    शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदेह के आधार पर कृषि कार्यों या माल ढुलाई में लगे पारंपरिक साधनों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि अवैध मादक पदार्थों और शराब की अंतरराज्यीय तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार पुलिस के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष जांच अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भागे हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जब्त शराब और वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया है तथा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

  • PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) (15 अगस्त 2026) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के लाल किले से दिए गए भाषण में “दिमागी नक्सल” (“Intellectual Naxal”) शब्द के इस्तेमाल ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में जहां एक तरफ हथियारबंद नक्सलवाद खात्मे की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ समाज में अराजकता फैलाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    लाल किले से PM मोदी का क्या था बयान?
    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नक्सली विचारधारा वाले लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के मौकों की तलाश में हैं।”

    पीएम ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में पैठ बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया था। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करना होगा।

    विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार
    प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने उन पर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा, अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। पीएम अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं जिनकी सलाह उनकी तरफ से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।”

    वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने पीएम की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सल या ऐसा कोई भी ठप्पा काम नहीं आने वाला, प्रधानमंत्री जी! आप देश के शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकामी है।”

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राइट-विंग ट्रॉप्स में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के बाद अब पीएम ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक नया निरर्थक लेबल जोड़ दिया है। यह असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार-शिक्षा मांगने वाले युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम के बयान पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं। परिभाषा के मुताबिक सभी कॉकरोच होते हैं।” 2027 और 2028 के आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से आया यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा बहस का एक मुख्य केंद्र बनने वाला है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।