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  • पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उनका पारंपरिक पहनावा एक बार फिर चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने लाल और पीले रंग की बंधेज पगड़ी पहनी, जिसके साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट थी।

    प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर पहने जाने वाले साफे और पगड़ी की खास बात यह है कि हर वर्ष इसका रंग, डिजाइन और बांधने का अंदाज अलग दिखाई देता है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी पगड़ी एक अलग पहचान बन चुकी है।

    इस बार पहनी गई बंधेज पगड़ी गहरे लाल रंग की थी और उस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदु बने थे। बंधेज राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से जुड़ी है। इसमें कपड़े को धागों से बांधकर अलग-अलग हिस्सों में रंग दिया जाता है, जिससे कपड़े पर खास तरह के बिंदु और पैटर्न उभरते हैं।

    बंधेज को राजस्थान और गुजरात में उत्सव, सम्मान और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह की पगड़ी विशेष अवसरों और समारोहों में भी पहनी जाती है। प्रधानमंत्री के इस परिधान को स्थानीय हस्तकला और पारंपरिक कपड़ा कला के संदर्भ में भी देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल रंग की चमकदार राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। इसके अगले वर्ष उनकी पगड़ी में पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग के क्रॉस-क्रॉस पैटर्न दिखाई दिए थे।

    2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग की टाई-डाई शैली वाली पगड़ी पहनी। 2017 में लाल रंग की पगड़ी उनके पहनावे का हिस्सा बनी। 2018 में उन्होंने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी, जबकि 2019 में लाल, पीले और हरे रंगों से सजी राजस्थानी पगड़ी नजर आई।

    2020 में प्रधानमंत्री ने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी, जिस पर क्रीम रंग का प्रिंट दिखाई दिया। 2021 में उनकी पगड़ी केसरी और लाल रंग के पैटर्न वाली थी। उस समय हल्के नीले रंग की जैकेट के साथ उनका पहनावा भी चर्चा में रहा।

    2022 में प्रधानमंत्री तिरंगे रंगों वाली पगड़ी में नजर आए। इसके साथ उन्होंने नीले रंग की जैकेट पहनी थी। 2023 में उनकी पगड़ी में लाल, पीले, हरे और बैंगनी रंगों वाली बांधनी शैली दिखाई दी। 2024 में भगवा और हरे रंग की पगड़ी के साथ उन्होंने नीले रंग की सदरी पहनी थी।

    2025 में प्रधानमंत्री ने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी और उनके पहनावे में तिरंगे का प्रिंट भी शामिल था। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन हर वर्ष अलग रहे हैं।

    इस वर्ष की बंधेज पगड़ी में लाल रंग प्रमुख रहा। पारंपरिक बंधेज कला के इस्तेमाल ने एक बार फिर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को चर्चा में ला दिया। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पगड़ी ने उनके परिधान में पारंपरिक भारतीय शैली को प्रमुखता दी।

  • LPG टैंकर में घुसकर लापता क्रू की तलाश करने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम को शौर्य चक्र, 78 वीरता पुरस्कारों की पूरी सूची

    LPG टैंकर में घुसकर लापता क्रू की तलाश करने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम को शौर्य चक्र, 78 वीरता पुरस्कारों की पूरी सूची


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इनमें 13 मरणोपरांत पुरस्कार भी शामिल हैं। पुरस्कारों में 9 कीर्ति चक्र, 19 शौर्य चक्र, 36 सेना पदक, 3 नौसेना पदक और 5 वायु सेना पदक शामिल हैं। इसके अलावा सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों के लिए 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेज को भी मंजूरी दी गई है।

    इन पुरस्कारों में भारतीय नौसेना के INS त्रिकंद के NBCD ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार का नाम खास तौर पर सामने आया है। उन्हें अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा।

    जान की परवाह किए बिना चलाया था रेस्क्यू ऑपरेशन

    लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार ने अक्टूबर 2025 में अदन की खाड़ी में बेहद जोखिम भरे बचाव अभियान का नेतृत्व किया था। यह इलाका हूती हमलों के खतरे के कारण पहले से ही बेहद संवेदनशील माना जाता था।

    घटना 18 अक्टूबर 2025 की है। उस दिन कैमरून के झंडे वाला LPG टैंकर MT Falcon भीषण विस्फोट के बाद आग की चपेट में आ गया था। हादसे के बाद जहाज से खतरनाक LPG गैस का रिसाव हो रहा था और किसी भी समय दूसरा बड़ा विस्फोट होने का खतरा बना हुआ था।

    टैंकर पर सवार दो भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गए थे। ऐसे समय में लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार ने खुद आगे बढ़कर खोज और राहत अभियान की कमान संभाली।

    जहरीली गैस और धुएं के बीच बार-बार जहाज में घुसे

    रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शिवम कुमार ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना क्षतिग्रस्त टैंकर के बेहद खतरनाक हिस्सों में प्रवेश किया। वहां जहरीली गैस, तेज गर्मी और घना धुआं मौजूद था और किसी भी वक्त स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

    उन्होंने तकनीकी और सुरक्षा जोखिमों का आकलन करते हुए अभियान को आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने लापता भारतीय क्रू सदस्यों के अवशेषों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    उनका यह अभियान न केवल असाधारण साहस बल्कि संकट की स्थिति में नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा का भी उदाहरण माना गया है।

    वीरता पुरस्कार विजेताओं की सूची

    कीर्ति चक्र
    1. लेफ्टिनेंट कर्नल मनियो फ्रांसिस पीएफ, एससी, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    2. मेजर जितेंद्र राठी, 2 पैरा (विशेष बल) – सेना
    3. हवलदार गजेंद्र सिंह, 2 पैरा (विशेष बल) (मरणोपरांत) – सेना
    4. श्री जगबीर सिंह, हेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    5. श्री जसवंत सिंह, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    6. श्री बलविंदर सिंह, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    7. श्री तारिक हुसैन, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    8. श्री बशीर अहमद, हेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    9. श्री सुनील कुमार, इंस्पेक्टर एसटीएफ (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    बार टू शौर्य चक्र
    1. मेजर आदित्य प्रताप सिंह, एससी, एसएम, द राजपूताना राइफल्स, 44 असम राइफल्स – सेना
    शौर्य चक्र
    1. मेजर परमवीर, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    2. मेजर तरुण वासुदेवन, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    3. मेजर केशव कुमार, 12 डोगरा – सेना
    4. मेजर गौरव सिंह ब्रिजवाल, 21 ग्रेनेडियर्स – सेना
    5. मेजर विपीन कुमार, कोर ऑफ सिग्नल्स, 11 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    6. नायब सूबेदार शंकर राम, 3 असम राइफल्स – सेना
    7. नायब सूबेदार डब्बल सिंह बिष्ट, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    8. हवलदार जगतार सिंह, 4 पैरा (विशेष बल) – सेना
    9. लांस नायक नरेंद्र सिंधु, द राजपूताना राइफल्स, 9 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    10. लांस नायक कपिल देव, द डोगरा रेजीमेंट, 11 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    11. सिपाही जसविंदर सिंह, 7 सिख लाइट इन्फैंट्री – सेना
    12. लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार – नौसेना
    13. स्क्वाड्रन लीडर सुधीर कुमार, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    14. श्री धीरज सिंह कटोच, डिप्टी एसपी – गृह मंत्रालय (MHA)
    15. श्री अजय सिंह चिब, इंस्पेक्टर – गृह मंत्रालय (MHA)
    16. श्री सुखवीर सिंह, डिप्टी एसपी – गृह मंत्रालय (MHA)
    17. श्री नियाज अहमद, सहायक उप-निरीक्षक – गृह मंत्रालय (MHA)
    18. श्री अंजनी कुमार, डिप्टी कमांडेंट – गृह मंत्रालय (MHA)
    19. श्री दीपक साह, कांस्टेबल – गृह मंत्रालय (MHA)


    बार टू सेना पदक (वीरता)
    1. मेजर डीएस पाओशो, एसएम, 7 मद्रास – सेना
    2. मेजर अनुज महाजन, एसएम, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 36 असम राइफल्स – सेना
    3. मेजर कृष्ण कांत, एसएम, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    4. सूबेदार रमेश कुमार, एसएम, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) – सेना
    5. नायब सूबेदार राजेंद्र सिंह, एसएम, 2 पैरा (विशेष बल) – सेना
    सेना पदक (वीरता)
    1. लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्कर विजय चौधरी, 27 (इंडिपेंडेंट) आरएंडओ फ्लाइट – सेना
    2. लेफ्टिनेंट कर्नल सोनम तोपदेन भूटिया, 2/8 गोरखा राइफल्स – सेना
    3. मेजर सुधांशु शेखर पाणी, पैरा रेजीमेंट, 9 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    4. मेजर मोहित पोडिया, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 37 असम राइफल्स – सेना
    5. मेजर आर साहिल, द गढ़वाल राइफल्स, 33 असम राइफल्स – सेना
    6. मेजर बालेन्दु कुमार झा, 24 ग्रेनेडियर्स – सेना
    7. मेजर रवि शंकर जोशी, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    8. मेजर रूपम दास, 8 बिहार – सेना
    9. मेजर अर्णव बाली, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 9 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    10. मेजर अंशुमान रंजन, 4 पैरा (विशेष बल) – सेना
    11. मेजर अरविंद कुमार, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 33 असम राइफल्स – सेना
    12. कैप्टन करन सिंह चीमा, असम रेजीमेंट, 59 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    13. कैप्टन हरीश सिंह देवाली, द मराठा लाइट इन्फैंट्री, 17 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    14. कैप्टन मोहित रावत, कोर ऑफ सिग्नल्स, 44 असम राइफल्स – सेना
    15. कैप्टन अंशुमान सिंह, 11 पैरा (विशेष बल) – सेना
    16. कैप्टन बाने स्वरांज सुधीर, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    17. कैप्टन पृथ्वीराज जयसिंह निघोट, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    18. कैप्टन साविक, 5/9 गोरखा राइफल्स – सेना
    19. लेफ्टिनेंट भानु प्रताप सिंह, 12 डोगरा – सेना
    20. लेफ्टिनेंट अमन पांडे, 8 बिहार – सेना
    21. असिस्टेंट कमांडेंट बिकाश राय, 11 असम राइफल्स – सेना
    22. सूबेदार पवन कुमार, 11 पैरा (विशेष बल) – सेना
    23. सूबेदार परभात गौड़, पैरा रेजीमेंट, 9 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    24. सूबेदार कणसे नामदेव बालकृष्ण, 18 मराठा लाइट इन्फैंट्री – सेना
    25. सूबेदार बलजिंदर सिंह, 7 सिख लाइट इन्फैंट्री – सेना
    26. नायब सूबेदार दयाल सिंह, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    27. हवलदार एल जोएल कॉम, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    28. हवलदार मुल्ला आबिदअली अशरफअली, 18 मराठा लाइट इन्फैंट्री – सेना
    29. लांस हवलदार पलाश घोष, पैरा रेजीमेंट, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    30. नायक अली मोहम्मद खान, 24 ग्रेनेडियर्स – सेना
    31. लांस नायक सुजय घोष, पैरा रेजीमेंट, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    32. लांस नायक अभिमन्यु सिंह, 21 ग्रेनेडियर्स – सेना
    33. लांस नायक बिधा सिंह, द जाट रेजीमेंट, 34 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    34. लांस नायक प्रीतपाल सिंह, सिख लाइट इन्फैंट्री, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    35. सिपाही हरमिंदर सिंह, सिख लाइट इन्फैंट्री, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    36. पैराट्रूपर हिमांशु कुमार, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    नौ सेना पदक (वीरता)
    1. कमांडर विनीत शर्मा – नौसेना
    2. कमांडर युवराज कुमार – नौसेना
    3. अविनाश अण्णासो, पीओए (एफडी) – नौसेना
    वायु सेना पदक (वीरता)
    1. ग्रुप कैप्टन राहुल जगोता, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    2. ग्रुप कैप्टन राहुल रावत, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    3. विंग कमांडर आशीष राजपूत, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    4. फ्लाइट लेफ्टिनेंट यश, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    5. मास्टर वारंट ऑफिसर रविंदरजीत सिंह, पैराशूट जंप इंस्ट्रक्टर – वायु सेना
    मेंशन-इन-डिस्पैचेज
    राष्ट्रपति ने 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेज की भी मंजूरी दी है, जिनमें भारतीय सेना के 75, भारतीय नौसेना के 04 और भारतीय वायु सेना के 10 कर्मी शामिल हैं.
    भारतीय सेना
    ऑपरेशन रक्षक
    • कर्नल रणवीर सिंह, 207 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक जोशी, एसएम, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल हिमांशु शर्मा, 21 काउंटर इंसर्जेंसी इंटेलिजेंस यूनिट
    • लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य जसरोटिया, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर देवश्री अरविंद शर्मा, 25 मद्रास
    • मेजर कुणाल नरूला, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर स्वप्निल श्रीवास्तव, द राजपूताना राइफल्स, 9 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अक्षय सिंह, द डोगरा रेजीमेंट, 11 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अरुण, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 11 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अब्दुलअजीज एम, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 26 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर रोहित शर्मा, 290 फील्ड रेजीमेंट
    • कैप्टन मुनिराज टी, आर्मी मेडिकल कोर, 19 राष्ट्रीय राइफल्स
    • सुल्तान महमूद, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, उधमपुर
    • सूबेदार मनोज कुमार, 4 पैरा (विशेष बल)
    • नायब सूबेदार करमबीर, 21 ग्रेनेडियर्स
    • नायक मुकेश सिंह, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • नायक रोशन कुमार, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 3 राष्ट्रीय राइफल्स
    • नायक रजत शर्मा, 12 डोगरा
    • नायक नंदन सिंह गुसाईं, 4 पैरा (विशेष बल)
    • राइफलमैन रंजीत सिंह, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स
    • राइफलमैन रमेश सिंह, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स
    • राइफलमैन गोविंद सिंह, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स
    • पैराट्रूपर मधुकर शैलेश चौगुले, 2 पैरा (विशेष बल)
    • आर्मी डॉग टाइसन (C071), रिमाउंट वेटनरी कोर, 2 पैरा (विशेष बल)
    ऑपरेशन हिफाजत
    • मेजर सी साई विवेक, एसएम, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 33 असम राइफल्स
    • मेजर राजकुमार संजीव, जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स, 31 असम राइफल्स
    • कैप्टन अथर्व श्रीरंग जाधव, 5/9 गोरखा राइफल्स
    • सूबेदार तिल बहादुर डांगी, 21 पैरा (विशेष बल)
    • सूबेदार अमित कुमार, 2 महार
    • सूबेदार जरनैल सिंह, 2 महार
    • हवलदार देवेंद्र सिंह नेगी, 21 पैरा (विशेष बल)
    • हवलदार डोंगरे गुलाबराव शामराव, 2 महार
    • नायक कपिल देव, 21 पैरा (विशेष बल)
    • नायक सुनील कुमार, 2 महार
    • लांस नायक बिन्नार योगेश पोपट, 21 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर राहुल कुमार यादव, 21 पैरा (विशेष बल)
    • अग्निवीर हरिओम, 2 महार
    • अग्निवीर कृष्ण कुमार, 2 महार
    ऑपरेशन आर्किड
    • मेजर लक्ष्यद्वीप कांकेर, आर्मी एयर डिफेंस, 4 असम राइफल्स
    • पैराट्रूपर बिकाश काकती, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर योग राज, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर लालतन सांगा, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर दीपचंद कारगवाल, एसएम, 21 पैरा (विशेष बल)
    ऑपरेशन मेघदूत
    • मेजर देवेश भंडारी, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर ऋषिकेश पाठक, 24 पंजाब
    ऑपरेशन स्नो लेपर्ड
    • लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश वशिष्ठ, 301 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (SO)
    • मेजर अभिमन्यु यादव, 16 पंजाब
    • मेजर राजीव मील, 203 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)
    • मेजर राहुल मेहता, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 5 विकास (SFF)
    • कैप्टन मोहित गंजू, असम रेजीमेंट, 59 राष्ट्रीय राइफल्स
    • कैप्टन गौरव कुमार, 60 आर्मर्ड रेजीमेंट
    ऑपरेशन चक्रव्यूह
    • मेजर अमित नैन, 19 गढ़वाल राइफल्स
    ऑपरेशन चेथेबा
    • मेजर देबाशीष पुस्टी, आर्मर्ड रेजीमेंट, 13 असम राइफल्स
    ऑपरेशन खोइजुमान
    • मेजर अभिषेक कुमार सिंह, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन माउंट कांगतो
    • मेजर कार्तिक यादव, आर्मी एयर डिफेंस, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    ऑपरेशन तलाश
    • मेजर विशाल राणा, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    • मेजर ज़ुबैर अहमद इटू, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 19 असम राइफल्स
    ऑपरेशन अवांग लेखाई
    • मेजर शर्मा तनुज दिलीप, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन खोज
    • लेफ्टिनेंट शिवम पांडे, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन नोंगरेन II
    • सिपाही शुभम कुमार, 8 बिहार
    ऑपरेशन माओवा-कियेवी
    • राइफलमैन एच यांग पांग शानयेई फोम, 22 असम राइफल्स
    ऑपरेशन सिक्योर शील्ड-XLII
    • राइफलमैन देलबोर अली मोंडल, 3 असम राइफल्स
    • राइफलमैन अडेपु राकेश, 3 असम राइफल्स
    ऑपरेशन चानबिरोक
    • राइफलमैन भोज बहादुर राना मगर, 2/8 गोरखा राइफल्स
    विविध ऑपरेशन
    • लांस नायक जसपुनीत सिंह, 22 सिख
    • लेफ्टिनेंट कर्नल रोहित सिंह साही (सेवानिवृत्त)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल सुहेल सिंह गिल, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल सौबाम किनोबाबू सिंह, एसएम, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    • लेफ्टिनेंट कर्नल विकास पांडे, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर निकम निखिल जनार्दन, 2/8 गोरखा राइफल्स
    • मेजर अभिषेक अर्जुन, द गढ़वाल राइफल्स, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • कैप्टन अरुण कुमार सोलानिया, 2 महार
    • हवलदार ऐजाज अहमद, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • हवलदार नेहखोहाओ हाओकिप, 165 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • हवलदार नरेश शर्मा, 18 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स
    भारतीय नौसेना
    1. कमांडर निखिल चुघ
    2. लेफ्टिनेंट अजय जोस एन जोसेफ
    3. अश्विन संतोष, एवीआर सी (सीडी)
    4. अभिषेक सी धनवड़े, सी I (सीडी)
    भारतीय वायु सेना
    1. विंग कमांडर राजा रेड्डी ललिता नागेश कुमार, फ्लाइंग (पायलट)
    2. विंग कमांडर अम्मर हैदर नकवी, फ्लाइंग (पायलट)
    3. विंग कमांडर मनोज पुरी गोस्वामी, एडमिनिस्ट्रेशन/एयर ट्रैफिक कंट्रोलर
    4. स्क्वाड्रन लीडर कुंदरापु कौशिक, फ्लाइंग (पायलट)
    5. फ्लाइट लेफ्टिनेंट पार्थसारथी मुले, फ्लाइंग (पायलट)
    6. मास्टर वारंट ऑफिसर ब्रह्म प्रकाश, पैरा जंपिंग इंस्ट्रक्टर (सेवानिवृत्त)
    7. मास्टर वारंट ऑफिसर अनूप सिंह, पैरा जंपिंग इंस्ट्रक्टर
    8. कॉर्पोरल मोहन लाल सैनी, भारतीय वायु सेना (सुरक्षा)
    9. विंग कमांडर सीआर प्रदीप, फ्लाइंग (पायलट)
    10. स्क्वाड्रन लीडर अविरल गांधी, फ्लाइंग (पायलट)

  • CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए

    CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • 970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

    970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज


    नई दिल्ली ।
    ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़े मामले में वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और भारत सरकार की पहल के बाद संयुक्त अरब अमीरात से उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

    वीरेंद्र बसोया पर पुणे से जुड़े एक बड़े कथित ड्रग्स नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। जांच में सामने आए मामले की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन की खेप तैयार कर उसे विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बसोया की भारत वापसी को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।

    मामले की जांच के दौरान 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का दावा किया गया था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा विदेश में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार मेफेड्रोन की खेप को विदेश भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की योजना थी। इस सिलसिले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ लोगों पर भी कार्रवाई की गई। संदीप हनुमानसिंह यादव और देवेंद्र रामफुल यादव को मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसकी अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

    वीरेंद्र बसोया की भारत वापसी को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से देश से बाहर था और उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश की प्रक्रिया चल रही थी। उसके भारत आने के बाद जांच एजेंसियों को मामले की कथित साजिश, नेटवर्क के संचालन और विदेशों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की योजना से जुड़े कई सवालों के जवाब हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

    जांच एजेंसियां अब बसोया से मामले में उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों से संबंधों को लेकर पूछताछ कर सकती हैं। साथ ही बरामद मेफेड्रोन की खेप, उसके स्रोत, तैयार करने की प्रक्रिया और कथित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पहलुओं की भी जांच आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि, जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल बसोया की भारत वापसी के बाद इस मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

  • नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी इतिहास सिलेबस में बड़ा बदलाव, दिल्ली सल्तनत पर केंद्रित मुख्य पेपर नए पाठ्यक्रम से हटाया गया

    दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी इतिहास सिलेबस में बड़ा बदलाव, दिल्ली सल्तनत पर केंद्रित मुख्य पेपर नए पाठ्यक्रम से हटाया गया

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय ने पोस्टग्रेजुएट इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। जुलाई 2026 से लागू नए सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के इतिहास से जुड़े एक प्रमुख पेपर को तीसरे सत्र की अंतिम सूची से हटा दिया गया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति और नए पीजी शिक्षा ढांचे के अनुरूप किए गए पाठ्यक्रम संशोधन का हिस्सा बताया गया है।

    हटाए गए विषय का नाम दिल्ली सल्तनत : मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता की बनावट था। इस पेपर में 13वीं और 14वीं सदी के दौरान दिल्ली सल्तनत की राजनीतिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और सत्ता के स्वरूप का अध्ययन कराया जाता था। विषय के जरिए विद्यार्थियों को उस दौर के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक बदलावों को समझने का अवसर मिलता था।

    नए पाठ्यक्रम में केवल दिल्ली सल्तनत से जुड़े पेपर में ही बदलाव नहीं हुआ है। उत्तर भारत के इतिहास से संबंधित लगभग 1400 से 1550 की अवधि वाला एक अन्य विषय भी तीसरे सत्र की अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया है। इससे मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन की संरचना में बदलाव दिखाई देता है।

    पाठ्यक्रम में प्रस्तावित कई अन्य विषयों को भी अंतिम रूप से जगह नहीं मिली है। इनमें शुरुआती भारत में महिलाओं और लिंग से संबंधित इतिहास, प्राचीन भारत में राजनीतिक व्यवस्था तथा प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज जैसे विषय शामिल हैं। इन बदलावों के कारण इतिहास के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध वैकल्पिक विषयों का दायरा पहले की तुलना में अलग हो गया है।

    इतिहास विभाग की ओर से तीसरे सत्र के लिए कुल 38 विशेष वैकल्पिक विषय प्रस्तावित किए गए थे। अंतिम पाठ्यक्रम में इनमें से 16 विषयों को ही शामिल किया गया है। इस तरह 22 प्रस्तावित विषय अंतिम सूची का हिस्सा नहीं बने हैं। विश्वविद्यालय के नए पीजी ढांचे के तहत विषयों के चयन और संरचना को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है।

    दिल्ली सल्तनत से संबंधित पेपर को हटाए जाने को समझने के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। परास्नातक स्तर पर हटाए गए पेपर में केवल सल्तनत काल की घटनाओं का सामान्य परिचय नहीं दिया जाता था, बल्कि सत्ता, शासन और इतिहास को समझने के अलग-अलग दृष्टिकोणों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता था।

    वहीं स्नातक स्तर पर दिल्ली सल्तनत के इतिहास से संबंधित विषय अभी अलग स्वरूप में पढ़ाया जाता है। इसमें इस कालखंड की प्रमुख घटनाओं, शासकों, राजनीतिक परिस्थितियों और व्यापक ऐतिहासिक विकास का अध्ययन शामिल होता है। इसलिए पीजी के एक विशेष पेपर को हटाने का अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली सल्तनत का इतिहास दिल्ली विश्वविद्यालय की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था से समाप्त हो गया है।

    नए बदलावों के पीछे विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम संरचना को नई शिक्षा नीति और संशोधित पीजी शिक्षा ढांचे के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसमें वैकल्पिक विषयों की संख्या, उनकी विशेषज्ञता और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अध्ययन क्षेत्रों को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है।

    इतिहास जैसे विषय में पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव अकादमिक अध्ययन की दिशा को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से परास्नातक स्तर पर विषयों का चयन विद्यार्थियों को किसी ऐतिहासिक कालखंड को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने का अवसर देता है। ऐसे में नए पाठ्यक्रम के तहत शामिल विषयों और हटाए गए विषयों को लेकर अकादमिक क्षेत्र में चर्चा होना स्वाभाविक है।

    दिल्ली विश्वविद्यालय में लागू किए गए इस संशोधित पाठ्यक्रम के तहत अब विद्यार्थियों को उपलब्ध अंतिम 16 वैकल्पिक विषयों में से अपने अध्ययन क्षेत्र का चयन करना होगा। विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था में इतिहास के विभिन्न कालखंडों और विषयगत क्षेत्रों को नए शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।

  • जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए सवालों की सूची जारी कर दी है। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें भी अपनी जाति बतानी पड़ेगी। उनके इस बयान के बाद जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि जनगणना में जब जाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी तो राहुल गांधी को भी अपनी जाति बतानी होगी। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उन्हें अपनी जाति के बारे में जवाब देना पड़ा तो उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान राहुल गांधी के राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए।

    जनगणना 2027 के लिए जारी किए गए प्रश्नों में जाति से संबंधित सवाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जाति संबंधी प्रश्न सूची में 10वें स्थान पर है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ जाति की जानकारी का विकल्प भी जोड़ा गया है। यह बदलाव सामाजिक संरचना से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आजादी के बाद होने वाली जनगणनाओं के संदर्भ में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार सभी समुदायों की जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के फॉर्म में जाति से जुड़े सवाल के तहत मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती थी।

    नई जनगणना में केवल जाति तक सीमित जानकारी नहीं ली जाएगी। व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता और धर्म जैसे विषयों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

    शिक्षा और डिजिटल साक्षरता को लेकर भी सवाल पूछे जाने हैं। व्यक्ति किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहा है या नहीं, उसकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता क्या है और संबंधित अध्ययन क्षेत्र कौन सा है, जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े आंकड़ों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

    जनगणना में लोगों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष में काम किया है या नहीं, उसका व्यवसाय क्या है और वह किस क्षेत्र में कार्य करता है, जैसे प्रश्न शामिल किए गए हैं। कामगार की श्रेणी और काम से जुड़ी अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

    इसके अलावा काम की तलाश, काम करने की उपलब्धता और कार्यस्थल तक आने जाने से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। जनगणना के दौरान मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते से संबंधित सवालों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जाति जनगणना को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जनगणना 2027 में जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Independence Day 2026: तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंग का क्या है अर्थ, जानिए त्याग, शांति और विकास का संदेश

    Independence Day 2026: तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंग का क्या है अर्थ, जानिए त्याग, शांति और विकास का संदेश


    नई दिल्ली । 
    15 अगस्त को भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय गौरव और एकता का प्रतीक बनकर हर जगह लहराता है। तिरंगे में शामिल केसरिया, सफेद और हरा रंग केवल उसकी पहचान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके साथ अलग-अलग भाव और प्रतीकात्मक अर्थ भी जोड़े जाते हैं। भारतीय परंपरा और जीवन दर्शन में इन रंगों को त्याग, शांति, सत्य, प्रकृति और विकास जैसे मूल्यों से जोड़कर देखा जाता रहा है।

    तिरंगे की सबसे ऊपरी पट्टी का रंग केसरिया है। इसे साहस, त्याग, तपस्या और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में केसरिया रंग का संबंध संन्यास और वैराग्य से भी रहा है। साधु-संतों और संन्यासियों के वस्त्रों में इस रंग का प्रयोग लंबे समय से देखने को मिलता है।

    राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग का प्रतीकात्मक संदेश यह माना जाता है कि राष्ट्रहित में व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इसे नेतृत्व, आत्मबल और दृढ़ संकल्प से भी जोड़ा जाता है। यही भाव स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों की भावना से भी जुड़ा दिखाई देता है।

    तिरंगे के बीच में सफेद रंग की पट्टी है। सफेद रंग को शांति, सत्य और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। भारतीय संस्कृति में सफेद रंग को सात्विकता और शुद्धता से जोड़ने की परंपरा रही है। धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर भी सफेद रंग को शांत और सकारात्मक भावनाओं से संबंधित माना जाता है।

    राष्ट्रीय ध्वज में सफेद रंग यह संदेश देता है कि राष्ट्र की शक्ति और प्रगति के साथ शांति तथा सत्य का महत्व भी बना रहना चाहिए। इसी सफेद पट्टी के बीच गहरे नीले रंग का अशोक चक्र स्थित है, जो निरंतर गति और प्रगति का प्रतीक माना जाता है।

    तिरंगे की सबसे निचली पट्टी हरे रंग की है। हरा रंग प्रकृति, हरियाली, उर्वरता और विकास से जुड़ा माना जाता है। पेड़-पौधे, कृषि और प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में हरे रंग को जीवन, समृद्धि और संतुलित विकास के व्यापक भाव से जोड़ा जाता है।

    भारतीय परंपराओं में हरे रंग और हरियाली का संबंध नवजीवन तथा प्रकृति से भी रहा है। खेती-किसानी और प्राकृतिक वातावरण से जुड़े समाज में हरियाली समृद्धि और जीवन की निरंतरता का संकेत मानी जाती है। राष्ट्रीय ध्वज में यह रंग देश के विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण के महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है।

    तिरंगे के तीनों रंगों को एक साथ देखें तो इनमें राष्ट्र जीवन के कई महत्वपूर्ण मूल्यों का प्रतीकात्मक समन्वय दिखाई देता है। केसरिया त्याग और साहस का संदेश देता है, सफेद शांति और सत्य की याद दिलाता है, जबकि हरा विकास और प्रकृति से जुड़ी समृद्धि का भाव सामने रखता है।

    इन रंगों के बीच मौजूद अशोक चक्र भी तिरंगे की पहचान को पूर्ण करता है। इसमें 24 तीलियां हैं और यह निरंतर गति का संदेश देता है। इस तरह तिरंगा केवल राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक नहीं, बल्कि देश के नागरिकों को कर्तव्य, शांति, प्रगति और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला राष्ट्रीय ध्वज भी है।

  • अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है

    अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है


    नई दिल्ली । 
    अभिजीत दीपके ने सौरव दास के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि वह देश और विशेष रूप से कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास के एक वीडियो के सामने आने के बाद बार काउंसिल के चेयरमैन ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया था। दीपके के मुताबिक इससे बड़ी संख्या में लॉ छात्रों का भविष्य प्रभावित होने से बच गया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव दास का प्रयास देश के लिए सकारात्मक है और कानून के छात्रों के लिए भी इसका महत्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है तो उसे जानबूझकर परेशान करने की कोशिश क्यों की जानी चाहिए।

    उन्होंने सौरव दास और उनके परिवार से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। दीपके के अनुसार दिल्ली में एक यूट्यूबर सौरव दास के घर में प्रवेश कर गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव और उनके परिवार को इस तरह परेशान करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

    दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों से उनकी निजी गतिविधियों और कामकाज से जुड़े सवाल क्यों किए गए। उन्होंने विशेष रूप से सौरव की मां को इस पूरे मामले में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान करने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

    सौरव दास ने इससे पहले पुडुचेरी में अपने परिवार को पुलिस की ओर से डराए और धमकाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि अधिकारी सौरव दास के रिश्तेदारों के घर जरूर गए थे, लेकिन यह कार्रवाई नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

    पुलिस के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के घर जाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत सौरव दास के रिश्तेदारों के घर भी पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने किसी तरह की धमकी या परेशान किए जाने के आरोपों से इनकार किया था।

    इस पूरे मामले के बीच अभिजीत दीपके ने सौरव दास के काम को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवाज उठाना जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर बदलाव की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए और संबंधित व्यवस्था से जवाब मांगा जाना चाहिए।

    स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभिजीत दीपके ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इस दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

    सौरव दास से जुड़े विवाद में फिलहाल उनके आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वहीं अभिजीत दीपके ने स्पष्ट रूप से सौरव के प्रयासों का समर्थन किया है और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अनावश्यक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर अब नजर रहेगी।

  • अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिया बड़ा बयान, कहा भारत की सहनशीलता को कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी

    अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिया बड़ा बयान, कहा भारत की सहनशीलता को कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की रणनीतिक क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत की उदारता और सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी। जरूरत पड़ने पर देश जोखिम उठाने और अपने हितों की रक्षा के लिए कड़े फैसले लेने की क्षमता रखता है।

    डोभाल की यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित आगामी दो हिस्सों वाली डॉक्यूसीरीज में सामने आई है। यह बातचीत अभियान के बाद उनके प्रमुख सार्वजनिक बयानों में से एक मानी जा रही है। इसमें उन्होंने सैन्य कार्रवाई के पीछे की सोच, सुरक्षा चुनौतियों और फैसले लेने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर बात की है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बारे में डोभाल ने बताया कि करीब 88 घंटे चले सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। कार्रवाई का संबंध पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़े ठिकानों से बताया गया। भारत ने इस अभियान के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति और प्रतिक्रिया की क्षमता को स्पष्ट करने का प्रयास किया।

    उन्होंने कहा कि भारत शांति और सहनशीलता में विश्वास करता है, लेकिन इन दोनों मूल्यों को कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक देश जरूरत पड़ने पर ऐसे फैसले लेने में सक्षम है जिनमें जोखिम शामिल हो सकता है और जिनके संभावित परिणामों की परवाह किए बिना राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी है। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।

    डॉक्यूसीरीज में अभियान के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य स्तर पर लिए गए फैसलों से जुड़े कई पहलुओं को सामने लाने की तैयारी है। इसमें वरिष्ठ सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों के अनुभवों के माध्यम से अभियान की परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की जाएगी।

    डोभाल इस कार्यक्रम में सैन्य कार्रवाई के पीछे मौजूद रणनीतिक सोच और विभिन्न स्तरों पर लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते नजर आएंगे। इससे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने का अवसर मिल सकता है।

    अजीत डोभाल लंबे समय से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त डोभाल को 30 मई 2014 को पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया था। इसके बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, खुफिया मामलों और रणनीतिक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

    डोभाल का करियर खुफिया और सुरक्षा क्षेत्र में लंबे अनुभव से जुड़ा रहा है। इसी पृष्ठभूमि के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी रणनीतिक समझ को विशेष महत्व दिया जाता है। ऑपरेशन सिंदूर पर उनकी टिप्पणी भी भारत की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसके दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।

    डॉक्यूसीरीज का प्रसारण शनिवार रात नौ बजे से निर्धारित है। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम, सैन्य कार्रवाई और उससे संबंधित रणनीतिक फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी सामने आने की उम्मीद है।