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  • प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन

    प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन


    नई दिल्ली ।
    भारत ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य कानूनी और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना, कौशल आधारित वैश्विक अवसरों का विस्तार करना तथा अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई अन्य देशों के साथ इसी प्रकार के समझौतों पर बातचीत जारी है।

    मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मानव गतिशीलता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है और इसी सोच के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जयशंकर ने कहा कि प्रवासन एवं गतिशीलता संबंधी समझौते केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना और देशों की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए तो इससे मूल देश, गंतव्य देश, नियोक्ता, कामगार और स्थानीय समुदाय सभी को समान रूप से लाभ मिलता है।

    विदेश मंत्री ने सुरक्षित, नियमित और कानूनी प्रवास की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रवासन व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए देशों के बीच समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से भारत विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी विकसित कर रहा है।

    उन्होंने अवैध प्रवासन, धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों, शोषणकारी तौर-तरीकों और मानव तस्करी को वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों को गंभीर जोखिम में भी डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें रोजगार और कौशल की मांग को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे परिवर्तनों के बीच वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना और उनकी सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण, कृषि और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आज भी कुशल कार्यबल की मांग बनी हुई है। ऐसे में मानव संसाधन गतिशीलता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सहयोग और साझा विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने, सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

  • भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

    बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

    संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

    इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

    भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

    मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से वेनेजुएला में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय डॉक्टर मानवता की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा समुदाय ने हर चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया है। उनका मानना है कि डॉक्टर केवल मरीजों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और आशा का वातावरण भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में चिकित्सकों का समर्पण भारत की सेवा संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने वेनेजुएला में संचालित राहत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कार्यरत भारतीय चिकित्सा दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सेवा भावना विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के कारण करोड़ों नागरिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मेडिकल शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों का व्यापक विस्तार किया गया है। इससे भविष्य के लिए अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार हो रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चिकित्सा समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉक्टर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, चिकित्सा अनुसंधान को गति देने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और मानव संसाधन का विस्तार देश की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    वेनेजुएला में चल रहे मानवीय राहत अभियान के तहत भारत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, पोर्टेबल अस्पताल और बड़ी मात्रा में दवाइयों तथा राहत सामग्री की आपूर्ति की है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

    राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश चिकित्सा समुदाय के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा भावना के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।

  • प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे यात्रियों ने साफ-सफाई और ऑनबोर्ड सेवाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। यात्रियों का आरोप है कि भोपाल से तमिलनाडु की ओर यात्रा के दौरान उनके केबिन में पूरी रात चूहे और कॉकरोच घूमते रहे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद यात्रा के दौरान समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया, जिससे पूरी रात उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।

    यात्रियों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में चूहे और कॉकरोच लगातार दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि प्रीमियम श्रेणी का टिकट लेने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने ट्रेन के स्टाफ को कई बार स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समस्या दूर करने के बजाय उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। यात्रियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने चूहों की मौजूदगी के लिए यात्रियों के भोजन को ही कारण बता दिया।

    यात्रा कर रहे अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने ट्रेन स्टाफ से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि प्रीमियम श्रेणी के कोच की स्थिति ऐसी है तो यात्रियों का रेलवे की सेवाओं पर भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए मामले की जानकारी भी साझा की और कोच की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    दूसरे यात्री शिवांश तिवारी ने दावा किया कि पूरी रात उनका परिवार आराम से सो नहीं सका। उनके अनुसार चूहे लगातार सीटों के आसपास घूमते रहे, जबकि कॉकरोच केबिन में दिखाई देते रहे। उन्होंने बताया कि रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मौके पर केवल एक रैट ट्रैप रखा गया, जिससे तत्काल राहत नहीं मिल सकी। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद यात्रा के दौरान स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद रेलवे की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी भेजने और पीएनआर विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि यात्रियों का कहना है कि यह कार्रवाई यात्रा समाप्त होने तक उनके लिए व्यावहारिक राहत साबित नहीं हुई। उनका मानना है कि शिकायत मिलने के बाद ऑनबोर्ड टीम को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।

    मामले पर भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी साफ-सफाई या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस घटना के बाद भारतीय रेलवे की प्रीमियम श्रेणी की सेवाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रथम श्रेणी के कोच में उच्च स्तर की सुविधाओं की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि शिकायतों के बावजूद तत्काल समाधान नहीं मिलता है तो इससे न केवल यात्रियों का अनुभव प्रभावित होता है, बल्कि रेलवे की सेवा गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि कोच में स्वच्छता और रखरखाव संबंधी दावों के अनुरूप व्यवस्थाएं थीं या नहीं।

  • राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में दिए गए बयान पर सियासी विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर सदन में दी गई जानकारी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बताया है।

    कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे यह संदेश गया कि अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। उनका कहना है कि बाद में आधिकारिक जानकारी में छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई, जिससे संसद में दिए गए बयान पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि सदन के समक्ष तथ्यों से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई है तो यह संसदीय परंपराओं और विशेषाधिकारों का गंभीर मामला है। पार्टी ने इसे संसद को गुमराह करने का मामला बताते हुए नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर संसद को सटीक और पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। कांग्रेस का दावा है कि बाद में सार्वजनिक हुई आधिकारिक जानकारी में पांच सेना के जवानों और एक वायुसेना कर्मी के शहीद होने की पुष्टि हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि यह तथ्य पहले से उपलब्ध थे, तो संसद में उनका उल्लेख न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री के भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, मंत्री का बयान उन दावों के जवाब में था जिनमें अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय का कहना है कि पूरे भाषण को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि उनके वक्तव्य का आशय अलग था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद अभियान के दौरान हुए सैन्य बलिदान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि शहीदों के सम्मान और अभियान से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

    ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता, संसदीय जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और सरकार की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे के निकट स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला इन दिनों अपनी गौरवशाली सैन्य विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज व पेशवाओं के शौर्य इतिहास के बजाय एक बेहद विचलित करने वाली वजह से देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में इस किले में घटित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि किले में पहुँचने वाले इन नए पर्यटकों की रुचि इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला या इसके समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को जानने में नहीं है, बल्कि वे उस विशिष्ट स्थान और गहरी खाई को देखने के लिए उत्सुक हैं जहाँ कथित तौर पर सिया गोयल ने अपने मंगेतर को धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया था। स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस त्रासदीपूर्ण स्थान को ‘सिया पॉइंट’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को चिंता में डाल दिया है।

    इस घटना के बाद से लोहगढ़ किले में सप्ताहांत पर पर्यटकों की इतनी भारी भीड़ जमा हो रही है कि किले के संकरे रास्तों पर कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से स्पष्ट है कि लोग उस खौफनाक मर्डर स्पॉट पर जाकर तस्वीरें खिंचवाने, सेल्फी लेने और रील बनाने की होड़ में लगे हैं। किसी अपराध स्थल या त्रासदी की जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने की इस बढ़ती प्रवृत्ति को समाजशास्त्री और विशेषज्ञ ‘डार्क टूरिज्म’ (Dark Tourism) का नाम दे रहे हैं। जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जिसका इतिहास या वर्तमान मृत्यु, विनाश, मानवीय त्रासदी या किसी जघन्य अपराध से जुड़ा हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले मेघालय के चेरापूंजी में भी एक ऐसी ही पारिवारिक हत्या के बाद उस पहाड़ी को ‘सोनम पॉइंट’ कहा जाने लगा था और दिल्ली का कुख्यात बुराड़ी घर भी इसी तरह की उत्सुकता का केंद्र बना था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डार्क टूरिज्म का एक ऐतिहासिक और गंभीर स्वरूप रहा है, जैसे पोलैंड का ऑशविट्ज़ प्रताड़ना शिविर या जलियांवाला बाग, जहाँ लोग इतिहास की त्रासदियों से सीख लेने, शोक संवेदना प्रकट करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। इसके विपरीत, वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण जो नया डार्क टूरिज्म उभर रहा है, वह बेहद सतही और केवल सनसनीखेज मामलों से प्रेरित है। लोग केवल अपनी जिज्ञासा शांत करने और इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री (रील्स और मीम्स) के माध्यम से व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए इन संवेदनशील और दर्दनाक स्थानों का रुख कर रहे हैं। किसी की असामयिक और क्रूर मौत को मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का जरिया बना लेना एक बेहद खतरनाक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।

    इस पूरे प्रकरण ने पुरातत्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और इतिहासकारों के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सदियों पुराना लोहगढ़ किला, जो कभी मराठा साम्राज्य की सामरिक शक्ति का प्रतीक था और जहाँ लोग इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करने आते थे, उसकी पहचान को एक आपराधिक घटना के नाम पर री-ब्रांड करने की कोशिश की जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को इस तरह कमतर करना और उसे एक नकारात्मक छवि के साथ जोड़ना हमारी आने वाली पीढ़ियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की अनियंत्रित और संवेदनहीन भीड़ को संभालना एक बड़ी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समस्या बनता जा रहा है।

    लोहगढ़ किले की इस बदलती तस्वीर ने अंततः सामूहिक सामाजिक चेतना पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चंद लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में इंसानी संवेदनाओं और किसी परिवार के गहरे दुख का मजाक उड़ाने का यह चलन यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक समाज के रूप में हम कितने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि न केवल प्रशासन ऐसे संवेदनशील स्थलों पर रील बनाने और अनुचित फोटोग्राफी पर कड़े प्रतिबंध लगाए, बल्कि नागरिक समाज भी यह आत्मनिरीक्षण करे कि मनोरंजन और उत्सुकता की सीमा कहाँ समाप्त होनी चाहिए। किसी भी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और मानवीय त्रासदियों के प्रति सम्मानजनक मौन बनाए रखना ही एक परिपक्व समाज की पहचान है।

  • जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    देश में इस बार जुलाई (July 2026) के महीने में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी-IMD) ने मंगलवार को अपना मासिक पूर्वानुमान (Monthly Forecast) जारी करते हुए बताया कि जुलाई में देश भर में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। आईएमडी के अनुसार, जुलाई में दीर्घकालिक औसत (एलपीए – 1971-2020) की तुलना में केवल 94 फीसदी बारिश होने की संभावना है। देश में जुलाई महीने का एलपीए लगभग 280.4 मिमी होता है। एलपीए से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि (जैसे एक महीने या एक सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई वर्षा से है, जिसे एक लंबी अवधि (आमतौर पर 30 से 50 वर्ष) में औसत निकाला जाता है।

    पूरे देश में एक जैसे हालात रहने की उम्मीद नहीं है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में भले ही सूखा या कम बारिश देखने को मिले, लेकिन कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है।


    जून में 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिश

    आईएमडी के अनुसार, जून का महीना देश के लिए काफी सूखा रहा। पूरे भारत में जून के दौरान करीब 40 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। मध्य भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और यहा सबसे अधिक 50.4 फीसदी कम बारिश हुई। इस साल जून में केवल 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम जून की बारिश है।


    कम बारिश के पीछे कई मुख्य कारण

    मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा के पीछे कई मुख्य कारक रहे। मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का प्रतिकूल चरण…यह हवा, बादल और दबाव की एक गतिशील प्रणाली है और भूमध्य रेखा के चक्कर लगाते समय बारिश लाती है। कम दबाव वाले क्षेत्रों का न बनना…जून में कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना। चूंकि हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं, इसलिए ये प्रणालियां चुंबक की तरह काम करती हैं, जो नमी से भरी हवाओं को खींचती हैं, जिससे बारिश होती है।