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  • देश में आज से VB-G RAM G योजना लागू…. ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन का रोजगार

    देश में आज से VB-G RAM G योजना लागू…. ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन का रोजगार


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था (Rural Employment System) में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (वीबी-जी राम जी एक्ट -VB-G RAM G Act ) को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना (New Rural Employment Scheme) के तहत मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी की है। अब देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। यानी औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी की। नई दरें 1 जुलाई से देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में लागू हो गई हैं।


    अब 100 नहीं, 125 दिन के रोजगार की गारंटी

    सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पहले मनरेगा (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी।


    न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये तय

    सरकार ने नई योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसका मतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। सरकार का कहना है कि पूरे देश में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।


    इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरी

    मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहां मजदूरी करीब 24.5 प्रतिशत बढ़ाई गई है।

    जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी की गई है। नई अधिसूचना के अनुसार-
    हरियाणा- 409 रुपये प्रतिदिन
    गोवा- 406 रुपये प्रतिदिन
    केरल- 401 रुपये प्रतिदिन
    सिक्किम (ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र) – 450 रुपये प्रतिदिन


    95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट

    सरकार ने नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। इसका उद्देश्य समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना है।


    शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक कदम

    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा और गांवों की समृद्धि तथा आजीविका सुरक्षा को नई मजबूती देगा।


    पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्य

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में भी ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका बनी रहेगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा।


    विपक्ष ने उठाए सवाल

    नई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार की मांग आधारित व्यवस्था, राज्यों और पंचायतों की भूमिका तथा योजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण आजीविका को और मजबूत करेगा, बेहतर परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा और रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। इस कार्यक्रम में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से संबंधित जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।

  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान

    भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Prime Minister Sanae Takaichi) की भारत यात्रा (India Tour) को कई मायनों में महत्वूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक निवेश, पूर्वोत्तर विकास, कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में नए ऐलान किए जा सकते हैं। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए क्वाड को फिर से सक्रिय करने पर भी बात हो सकती है।


    भारत में भारी निवेश

    कूटनीतिक जानकारों के अनुसार भारत के विकास में जापान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि उसने बुनियादी ढांचे, ऑटोमाइबल तथा भारी उद्योग क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश किया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी वह निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, संयुक्त उपक्रम और निवेश की जापान से अपार संभावनाएं हैं।

    जापान का मौजूदा निवेश 44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा वह सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका और नीदरलैंड के बाद पांचवा बड़ा निवेशक है। इस यात्रा के दौरान भी जापान की प्रधानमंत्री बड़े निवेश का ऐलान कर सकती हैं। भारत और जापान उभरती प्रौद्यौगिकी में 100 से अधिक परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान एआई में सहयोग को लेकर घोषणा हो सकती है।

    भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए भी जापान बेहद महत्वपूर्ण है। भारत और जापान ने 2017 में भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम बनाया है, जिसके जरिये पूर्वोत्तर के विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पिछले एक साल के दौरान जापान के उच्चस्तरीय दलों ने मेघालय, असम, मणिपुर के दौरे किए हैं, जबकि मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने जापान के दौरे किए।


    बैठक में व्यापार को मजबूत करने पर भी होगी बातचीत

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वैसे तो क्षेत्रीय और वैश्विक सभी मुद्दों पर दोनों राष्ट्राध्यक्ष बात करेंगे, लेकिन व्यापार को मजबूत करने पर भी बात होगी। दरअसल, भारत-जापान के बीच में 2011 से व्यापार समझौता है, लेकिन यह जापान के लिए ही फायदेमंद साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच करीब 27 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है, जिसमें भारत का निर्यात छह अरब डॉलर और आयात 21 अरब डॉलर का है। यानी 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। भारत इस समझौते के नवीनीकरण के पक्ष में है।


    भारत में कहां सबसे ज्यादा निवेश

    पूर्वोत्तर में जापान ने भारी निवेश भी किए हैं तथा वहां के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। जापान का मानना है कि पूर्वोत्तर एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की स्वतंत्र एवं खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जाता है।

    एक तरफ जहां आर्थिक नजरिये से जापान महत्वपूर्ण है। वहीं, क्वाड के सदस्य के रूप में भी जापान भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है। लेकिन क्वाड निष्क्रिय होता जा रहा है। इसलिए संभावना है कि मोदी के संग बैठक में जापान की प्रधानमंत्री क्वाड को सक्रिय करने पर भी बात करेंगी। दरअसल, क्वाड की शुरुआती पहल जापान की तरफ से ही की गई थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे


    अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी के तरीके, रकम के इस्तेमाल और दान राशि की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, जांच का दायरा अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों तक भी बढ़ा दिया गया है।

    अविनाश मिश्रा से सबसे लंबी पूछताछ
    सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की, लेकिन सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और चोरी के नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।

    पूछताछ में चोरी की कार्यप्रणाली का खुलासा
    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दान राशि की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस के सामने रखी। दावा किया गया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुलिस ने यह जानने का प्रयास किया कि रकम किस समय निकाली जाती थी, उसे कैसे छिपाया जाता था और बाद में किस तरीके से मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था।

    सूत्रों का यह भी दावा है कि पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। आरोपियों ने तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं।

    एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी बनाते थे घेरा
    पूछताछ में सामने आए दावों के अनुसार, चोरी के दौरान एक व्यक्ति दान राशि निकालता था, जबकि बाकी आरोपी उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि बाहर से किसी को कोई संदेह न हो। इससे सीसीटीवी कैमरों और अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी।

    सूत्रों के मुताबिक, निकाली गई रकम को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था। बाद में अनुकूल अवसर मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।

    कैमरों की निगरानी से बचने की थी पूरी जानकारी
    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी के दायरे की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से योजना ऐसे तैयार की जाती थी कि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है।

    गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
    पूछताछ में आरोपियों ने तौर पर बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, बैंक कर्मियों की किसी भूमिका की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
    इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव तथा रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में हुई ताजा पूछताछ को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से पूछताछ की गई।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने नोटिस का दिया जवाब
    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी थी, जिस पर बैंक ने जवाब सौंप दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती।

    सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।

    चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था। फिलहाल इस खाते में बहुत कम राशि है और लंबे समय से कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है।

    इसी शाखा में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि, पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है और अब तक जांच एजेंसियों ने इन खातों का चोरी से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं की है।

    इन खातों की भी मांगी गई जानकारी
    पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण भी मांगा था। बैंक ने अपने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम किसी अन्य माध्यम से तो नहीं पहुंचाई गई।

  • जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    नई दिल्ली । जुलाई महीने की शुरुआत के साथ देशभर में कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सेवाओं पर पड़ेगा। आधार से जुड़े अपडेट, रेलवे यात्रा के नियम, पासपोर्ट शुल्क, बैंकिंग सेवाओं तथा एलपीजी और अन्य ईंधनों की कीमतों में होने वाले बदलाव लोगों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में इन नए प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

    आधार से जुड़े बदलाव के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा सीमित अवधि के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब निर्धारित अवधि तक नागरिक बिना किसी शुल्क के अपने आधार रिकॉर्ड में ईमेल आईडी अपडेट करा सकेंगे। इससे पहले इस सेवा के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ता था। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को अपने आधार विवरण अद्यतन कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    रेलवे ने भी यात्रा संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़े जाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने में वृद्धि की गई है। इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी टिकट का उपयोग करने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। महिला कोच में अनधिकृत रूप से यात्रा करने वाले पुरुष यात्रियों पर भी अधिक जुर्माना लगाया जाएगा। रेलवे का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को मजबूत करना है।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की मासिक समीक्षा भी पहली जुलाई से प्रभावी होगी। तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। नई दरों के अनुसार कीमतों में बदलाव या उन्हें यथावत रखने का निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह विमान ईंधन और सीएनजी की कीमतों में भी संशोधन की संभावना बनी रहती है, जिसका असर परिवहन और अन्य क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है।

    पासपोर्ट सेवाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों के लिए भी नई व्यवस्था लागू हो रही है। सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों में पासपोर्ट जारी कराने के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन किया गया है। इसके बाद नए आवेदन करने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क का भुगतान करना होगा। विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैंकिंग क्षेत्र में भी कुछ नए प्रावधान लागू हुए हैं। विशेष रूप से कुछ क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एयरपोर्ट लाउंज सुविधा का लाभ लेने संबंधी पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया है। अब निर्धारित श्रेणी के कार्डधारकों को निःशुल्क लाउंज सुविधा प्राप्त करने के लिए एक निश्चित अवधि में न्यूनतम खर्च की शर्त पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य कार्ड उपयोग से जुड़े लाभों को नई नीति के अनुरूप व्यवस्थित करना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे नियामकीय बदलाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने और सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से लागू किए जाते हैं। हालांकि इन परिवर्तनों का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर अलग हो सकता है। इसलिए आधार, पासपोर्ट, रेलवे, बैंकिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं का उपयोग करने वाले नागरिकों के लिए नए नियमों की जानकारी रखना और उसी के अनुरूप अपनी योजनाएं बनाना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज से स्पष्ट दूरी बना ली है। संगठन ने कहा है कि मंदिर के संचालन और ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट की है। वीएचपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताया है।

    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संगठन की भूमिका मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक सीमित थी। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है और उसके प्रशासनिक तथा वित्तीय निर्णयों से वीएचपी का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर ही है।

    आलोक कुमार ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में मंदिरों का संचालन करना वीएचपी का दायित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार जिस संस्था को मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही उसके सभी निर्णयों और परिणामों के लिए उत्तरदायी है।

    उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय के कार्यों से भी स्वयं को अलग बताया। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है और किसी अन्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच वीएचपी के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।

    चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता बढ़ने से ट्रस्ट के भीतर भी बदलाव देखने को मिले हैं। इसी क्रम में नैतिक आधार पर चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। इन घटनाक्रमों के बाद पूरे मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उससे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु आहत हुए हैं। उनके अनुसार जिन लोगों ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया, आर्थिक सहयोग दिया और अपनी आस्था इस अभियान से जोड़ी, उनके लिए यह घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वीएचपी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि संगठन न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। इसके बाद ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने सभी निर्णय लेता रहा है। इसलिए ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय विवाद की जवाबदेही उसी संस्था की है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में अहम साबित होंगे।

  • उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेंगे। हाल ही में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से इस प्रवास को संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बेहतर समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नितिन नवीन के कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा करना और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आवश्यक सुझावों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने, विभिन्न स्तरों पर संवाद को मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठनात्मक समन्वय को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है और यह बैठक उसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान नई टीम के साथ बैठक कर संगठनात्मक कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संवाद कर जमीनी स्तर की गतिविधियों और संगठन की सक्रियता का आकलन करेंगे।

    भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों को केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रखकर बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन की कार्यप्रणाली पर फीडबैक प्राप्त करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठित ढांचा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के चुनावी अनुभवों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक रणनीति को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रत्येक स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा हो और संगठन के भीतर समन्वय तथा संवाद को लगातार बेहतर बनाया जाए। इसी कारण शीर्ष नेतृत्व स्वयं प्रदेश का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।

    नितिन नवीन के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं के प्रभावी प्रचार और विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियों के जवाब जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    नई दिल्ली । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में दिए गए बयान और उसके बाद सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये के मानहानि दावे का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा, भ्रामक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

    इससे पहले अदालत में सुनवाई के दौरान सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी को 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इसी दौरान अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि सिया गोयल की ओर से पैरवी कौन कर रहा है। सुनवाई के दौरान सिया गोयल ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से अधिवक्ता विपुल दुशिंग पैरवी कर रहे हैं, जबकि आशुतोष श्रीवास्तव उनके वकील नहीं हैं।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब साहिल गोयल ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने आशुतोष श्रीवास्तव को कभी अपना वकील नियुक्त नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विषय पर आपत्ति जताने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। साहिल ने कहा कि परिवार की ओर से विपुल दुशिंग को अधिवक्ता नियुक्त किया गया है और इस संबंध में अदालत में हलफनामा भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

    इन आरोपों के बाद एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने साहिल गोयल को कानूनी नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। नोटिस के माध्यम से आरोपों को तत्काल वापस लेने, सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में इस प्रकार के बयान न देने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है। साथ ही 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी किया गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि नोटिस में दर्ज सभी आरोप एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से किए गए दावे हैं। दूसरी ओर, इस कानूनी नोटिस पर साहिल गोयल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित जवाब पर सभी की नजर बनी हुई है।

    एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अपने पक्ष में कहा कि उनकी कानूनी टीम ने सीधे सिया गोयल से संपर्क किया था और उनकी सहमति से वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका दावा है कि सिया गोयल बालिग हैं और अपने कानूनी निर्णय स्वयं लेने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने साहिल गोयल से नहीं बल्कि सीधे सिया गोयल से बातचीत की थी और उनके पक्ष में विधिवत वकालतनामा उपलब्ध है, जिसमें उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।

    दूसरी ओर, अदालत में दिए गए सिया गोयल के बयान और परिवार की ओर से पेश किए गए दावों ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। अब यह मामला केवल हत्याकांड की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी प्रतिनिधित्व और कथित मानहानि के आरोप भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि साहिल गोयल इस कानूनी नोटिस का क्या जवाब देते हैं और अदालत के समक्ष दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल, मामले से जुड़े सभी आरोप और प्रत्यारोप संबंधित पक्षों के दावे हैं, जिनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए ठोकी दावेदारी

    उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए ठोकी दावेदारी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। इस राजनीतिक बदलाव को शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि सचिन अहीर को लंबे समय से आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि उन्हें नई राजनीतिक जिम्मेदारी देने की तैयारी पहले से ही की जा चुकी थी। दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी ने इस पद के लिए जे. एम. अभ्यंकर को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में उपसभापति का चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

    सचिन अहीर का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े और फिर अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए। वर्ष 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ बने रहने का फैसला किया था। हालांकि अब उनका शिंदे गुट में जाना महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन अहीर का शिवसेना में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना गया था। विशेष रूप से मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे के चुनाव अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा में रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ ने उस समय पार्टी को लाभ पहुंचाया था। ऐसे नेता का अब प्रतिद्वंद्वी खेमे में जाना उद्धव ठाकरे के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    हाल के महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं लगातार तेज रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के नए राजनीतिक विकल्प तलाशने और खेमे बदलने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसी बीच सचिन अहीर का फैसला इस बहस को और अधिक बल देता है कि राज्य की राजनीति अभी भी पुनर्संतुलन के दौर से गुजर रही है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल विधान परिषद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुंबई और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। खासकर शिवसेना (यूबीटी) के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं शिंदे गुट इसे अपने राजनीतिक विस्तार और संगठनात्मक मजबूती के रूप में देख रहा है।

    आने वाले दिनों में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद का चुनाव और उसके परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं और विभिन्न दल भविष्य की रणनीति को लेकर सक्रिय नजर आ रहे