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  • भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    नई दिल्ली । भारत की वैश्विक छवि को लेकर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में अलग-अलग देशों के लोगों की राय में बड़ा अंतर सामने आया है। 36 देशों में किए गए अध्ययन के मुताबिक भारत के प्रति दुनिया की औसत सकारात्मक धारणा 45 प्रतिशत रही, जबकि 41 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक राय व्यक्त की। आंकड़े बताते हैं कि भारत की लोकप्रियता कई देशों में मजबूत है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उसकी छवि को लेकर मतभेद भी स्पष्ट हैं।

    सर्वे में भारत के पड़ोसी देशों की राय सबसे ज्यादा चर्चा में रही। श्रीलंका में भारत के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों का अनुपात 79 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा भारत के लिए सर्वे में शामिल देशों के बीच सबसे मजबूत सकारात्मक प्रतिक्रियाओं में शामिल है। इसके विपरीत पाकिस्तान में केवल 7 प्रतिशत लोगों ने भारत के बारे में सकारात्मक राय व्यक्त की।

    भारत की बेहतर छवि केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रही। केन्या और ब्रिटेन में भी लगभग दस में सात लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख जताया। जर्मनी, इजरायल, इटली, स्वीडन, जापान और थाईलैंड में भी भारत को लेकर सकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।

    यूरोपीय देशों में भारत की छवि में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले सुधार भी दर्ज किया गया है। ब्रिटेन में एक वर्ष के दौरान भारत के प्रति सकारात्मक राय में 11 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। जर्मनी में सकारात्मक धारणा छह प्रतिशत अंक बढ़ी। फ्रांस में भी भारत के प्रति सकारात्मक राय 2023 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई।

    श्रीलंका में भारत की छवि में विशेष सुधार दिखाई दिया। वहां 2024 के मुकाबले भारत के प्रति सकारात्मक राय में 14 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे दोनों देशों के बीच सामाजिक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता की एक मजबूत तस्वीर सामने आती है।

    हालांकि अमेरिका में भारत को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर रही। वहां 45 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की, जबकि 50 प्रतिशत लोगों की राय नकारात्मक रही। यह भारत के लिए 2008 के बाद अमेरिका में दर्ज सबसे कम सकारात्मक रेटिंग बताई गई है। वर्ष 2023 में अमेरिका में भारत को लेकर 51 प्रतिशत सकारात्मक राय सामने आई थी।

    अमेरिका में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भी भारत को लेकर अंतर दिखाई दिया। डेमोक्रेट समर्थकों में 50 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा। इससे अमेरिकी समाज में भारत की छवि को लेकर राजनीतिक विभाजन का संकेत मिलता है।

    सर्वे में भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी अमेरिकी नागरिकों से सवाल किया गया। 54 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने माना कि दुनिया में भारत का प्रभाव लगभग पहले जैसा ही है। वहीं 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत का प्रभाव बढ़ा है, जबकि 13 प्रतिशत ने इसके कम होने की बात कही।

    तुर्किये में भारत के प्रति सकारात्मक राय केवल 15 प्रतिशत रही। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत था। इजरायल में भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर राय में अंतर सामने आया, जहां दक्षिणपंथी विचार रखने वालों में सकारात्मक धारणा 68 प्रतिशत और वामपंथी विचार रखने वालों में 46 प्रतिशत रही।

    कुल मिलाकर सर्वे भारत की वैश्विक छवि की मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहां श्रीलंका, ब्रिटेन, जर्मनी और कई अन्य देशों में भारत के प्रति सकारात्मक धारणा मजबूत हुई है, वहीं पाकिस्तान, तुर्किये और अमेरिका जैसे देशों में अलग रुझान दिखाई देता है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता एक समान नहीं है और अलग-अलग देशों में उसकी छवि क्षेत्रीय संबंधों, राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक धारणा के अनुसार बदल रही है।

  • सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी मानहानि शिकायत के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की निचली अदालत से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मानहानि शिकायत और उससे जुड़े निचली अदालत के पुराने आदेशों को भी समाप्त कर दिया गया है।

    यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे के बाद आया। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड उसके पास उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इसी तथ्य को कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार माना।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार का हलफनामा पीठ के सामने रखा गया। इसमें मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति के रिकॉर्ड के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है, तो इस आधार पर निचली अदालत में आगे की आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन के साथ शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पहले पारित किए गए आदेशों को भी रद्द कर दिया।

    यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान से संबंधित है। 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में यात्रा के दौरान आयोजित एक जनसभा में राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद इस मामले को लेकर विवाद खड़ा हुआ और उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दाखिल की गई।

    शिकायतकर्ता वकील नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर के बारे में टिप्पणी कर उनका जानबूझकर अपमान किया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद लखनऊ की अदालत में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ी और राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया गया।

    राहुल गांधी ने निचली अदालत की कार्रवाई और समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनके बयान को लेकर नाराजगी जताते हुए सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, उसी दौरान निचली अदालत से जारी समन पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दी गई थी।

    अब उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में आवश्यक अनुमति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की बुनियादी कानूनी स्थिति पर विचार किया। अदालत के ताजा आदेश के बाद इस शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ अदालत में चल रही संबंधित कार्यवाही समाप्त हो गई है।

    सावरकर से जुड़े बयानों को लेकर राहुल गांधी पहले भी राजनीतिक और कानूनी विवादों का सामना करते रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, अदालत की कार्रवाई का आधार राजनीतिक विवाद के बजाय मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना रहा।

  • जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    नई दिल्ली । देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार आजादी के बाद देशव्यापी स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। नागरिकों से उनकी सामाजिक, जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना के रूप में आयोजित की जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जाति से संबंधित जानकारी भी आधिकारिक तौर पर दर्ज की जाएगी। इससे देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

    निर्धारित 40 सवालों में नागरिकों से जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र की जाएगी।

    जनगणना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया रखी गई है। दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।

    इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने के साथ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने और आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

    पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं असमान क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समयसीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

    जनगणना 2027 की प्रक्रिया में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने को सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार के पास विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या से संबंधित अधिक विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

    यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसकी प्रक्रिया निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई वर्षों की देरी के बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन स्व-पंजीकरण और पहली बार जातिगत आंकड़ों का समावेश इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।

  • स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, सुबह 4 से 10 बजे तक लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद रहेंगे

    स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, सुबह 4 से 10 बजे तक लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद रहेंगे

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह को देखते हुए दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली यातायात पुलिस ने 15 अगस्त को राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को लेकर विशेष व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। सुरक्षा कारणों से शनिवार सुबह 4 बजे से सुबह 10 बजे तक लाल किले और उसके आसपास के कई रास्तों पर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा।

    यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले और आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। जिन लोगों को जरूरी काम से घर से निकलना है, उन्हें अपनी यात्रा पहले से निर्धारित करने और सामान्य दिनों की तुलना में अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है।

    लाल किले के आसपास नेताजी सुभाष मार्ग पर दिल्ली गेट से छत्ता रेल चौक तक यातायात प्रभावित रहेगा। इसके अलावा लोथियन रोड और दिल्ली के मुख्य डाकघर से छत्ता रेल चौक की दिशा में भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। एसपी मुखर्जी मार्ग से यमुना बाजार चौक की ओर जाने वाले रास्ते पर भी यातायात व्यवस्था बदली जाएगी।

    चांदनी चौक मार्ग पर फाउंटेन चौक से लाल किले की तरफ जाने वाले वाहनों को भी सामान्य रूप से आवाजाही की अनुमति नहीं होगी। निशाद राज मार्ग, एस्प्लेनेड रोड और संपर्क मार्ग से नेताजी सुभाष मार्ग की ओर जाने वाले हिस्सों में भी सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप यातायात प्रतिबंध लागू रहेगा।

    राजघाट से अंतरराज्यीय बस अड्डे की ओर जाने वाली रिंग रोड और कश्मीरी गेट के आसपास भी यातायात प्रभावित रहेगा। इन क्षेत्रों में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत केवल अधिकृत पहचान वाले वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। पुलिस ने वाहन चालकों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने के बजाय वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की है।

    यातायात पुलिस ने इंडिया गेट के आसपास सी-हेक्सागन, कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस, तिलक मार्ग और मथुरा मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर भी अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। बीएसजेड मार्ग और जेएल नेहरू मार्ग की ओर जाने वाले यात्रियों को भी यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति को ध्यान में रखने को कहा गया है।

    निजामुद्दीन खट्टा से अंतरराज्यीय बस अड्डे के बीच रिंग रोड तथा कश्मीरी गेट से बाहरी रिंग रोड होते हुए सलीमगढ़ बाईपास की ओर जाने वाले मार्ग पर भी यातायात दबाव और सुरक्षा व्यवस्था के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। राजधानी की सीमाओं, प्रमुख बाजारों, मॉल, होटलों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस की गश्त और वाहनों की जांच के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।

    सुरक्षा एजेंसियां संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों का अभ्यास भी कर रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात संकेतों का पालन करें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

    स्वतंत्रता दिवस के दिन दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस ने नागरिकों से संयम बरतने और यात्रा की योजना पहले से बनाने को कहा है। प्रतिबंधित मार्गों से बचने और निर्धारित वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने से यातायात को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

  • धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।

    धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।


    नई दिल्ली । 
    अयोध्या स्थित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की पूजा-अर्चना व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित तथा मर्यादित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के अंतर्गत अब गर्भगृह में सेवा देने वाले सभी अर्चक एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। यह नया ड्रेस कोड 15 अगस्त से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

    नए ड्रेस कोड के दिशानिर्देशों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु के दौरान सभी अर्चक नीचे पीली धोती और ऊपर बिना सिला हुआ पीला रेशमी अंगवस्त्र धारण करेंगे। कंधों पर रखा जाने वाला यह अंगवस्त्र पूरी तरह से बिना सिलाई का होगा। धार्मिक परंपराओं में गर्भगृह की पवित्रता और शुचिता को बनाए रखने के लिए बिना सिले रेशमी वस्त्रों के उपयोग को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाती है।

    मौसम में परिवर्तन के अनुसार पुजारियों के परिधान सामग्री में बदलाव किया जाएगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीला ही रहेगा। आगामी शीत ऋतु के आगमन पर मौसम के अनुकूल पीले रंग के ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। धार्मिक न्यास समिति के अनुसार, सनातन और वैष्णव परंपराओं में सूती अथवा सिले हुए कपड़ों की तुलना में रेशमी और ऊनी वस्त्रों को पूजा-अर्चना के दौरान सर्वाधिक शुद्ध माना गया है।

    पूजा-अर्चना में संलग्न पुजारियों का कार्य समय और रोस्टर प्रत्येक माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। रोस्टर में बदलाव के साथ ही नए वस्त्र कोड का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य पूजा व्यवस्था में एकरूपता और धार्मिक मर्यादाओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना है।

    अयोध्या में रामलला के नए ड्रेस कोड और धार्मिक अनुष्ठानों की शुचिता को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा देखी जा रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे सांस्कृतिक शहरों के राम भक्तों और धार्मिक विद्वानों ने भी इस पारंपरिक पहल का स्वागत किया है। मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी इस प्रकार की वैदिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर की सुरक्षा, प्रबंधन और दान व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। पूर्व में सामने आई व्यवस्थात्मक कमियों को दूर करते हुए प्रबंधन में कई व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों और अर्चकों की कार्यशैली को और अधिक अनुशासित बनाना शामिल है।

    वैदिक आचार्यों और धार्मिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र गर्भगृह के भीतर मर्यादा और शुचिता का पालन सर्वोपरि होता है। बिना सिले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करने की यह प्राचीन पद्धति राम मंदिर की भव्यता और सनातन संस्कृति के गौरव को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगी।

    इस नए नियम के लागू होने के बाद मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन के साथ-साथ अर्चकों की एकरूप और सात्विक वेशभूषा का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा, जो मंदिर की पावन छवि को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब पूरा देश 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय ध्वज फहराने और जश्न की तैयारियों में जुटा होता है, वहीं बिहार के पूर्णिया जिले में एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा दशकों से निभाई जा रही है। शहर के भट्ठा बाजार स्थित प्रसिद्ध झंडा चौक पर 14 अगस्त की मध्यरात्रि ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर तिरंगा फहराया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यह ऐतिहासिक और गौरवशाली परंपरा विगत 79 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के जारी है।

    इस अनूठी परंपरा की शुरुआत 14 अगस्त 1947 की उस ऐतिहासिक रात को हुई थी, जब पूरा देश आजादी की औपचारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उस वक्त पूर्णिया के स्थानीय नागरिक और स्वतंत्रता सेनानी भट्ठा बाजार स्थित एक दुकान के बाहर रेडियो पर प्रसारित हो रहे समाचार सुन रहे थे। जैसे ही ऑल इंडिया रेडियो पर देश के स्वतंत्र होने की आधिकारिक घोषणा हुई, पूरा क्षेत्र देश भक्ति के जयकारों से गूंज उठा।

    स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके सहयोगियों ने तय किया कि आजादी की पहली सांस के साथ ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। उन्होंने तुरंत बांस और रस्सी की व्यवस्था की और रात ठीक 12:01 बजे तिरंगा फहरा दिया। इस ऐतिहासिक घटना के बाद ही उस स्थान का नाम औपचारिक रूप से ‘झंडा चौक’ रखा गया और वहां मौजूद लोगों ने हर वर्ष इस परंपरा को इसी समय दोहराने का सामूहिक संकल्प लिया।

    वर्ष 1947 में ली गई वह शपथ आज भी पूरी निष्ठा और राष्ट्रीय सम्मान के साथ निभाई जा रही है। शुरुआत करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के निधन के बाद उनकी अगली पीढ़ियां इस धरोहर और परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर एकत्र होते हैं और घड़ी की सुई 12:01 पर पहुंचते ही राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के साथ ध्वजारोहण करते हैं।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में जहां 15 अगस्त की सुबह प्रभात फेरियों और मुख्य समारोहों के साथ तिरंगा फहराया जाता है, वहीं बिहार के पूर्णिया की यह मध्यरात्रि ध्वजारोहण की परंपरा पूरे देश के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय बनी रहती है।

    हर साल की तरह इस बार भी 14 अगस्त की देर रात झंडा चौक पर भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज नजर आया। रोशनी से जगमगाते चौराहे पर रात 12:01 बजते ही जैसे ही तिरंगा लहराया गया, पूरा माहौल भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

    यह ऐतिहासिक आयोजन केवल एक रस्म नहीं बल्कि उन अमर सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। पूर्णिया वासियों के लिए यह क्षण अत्यंत गर्व और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और राष्ट्रीय इतिहास से जोड़े रखता है।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा भी इस वार्षिक आयोजन के अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। 79 वर्षों से चली आ रही यह निष्ठा साबित करती है कि देशभक्ति का यह जज्बा आने वाले कई दशकों तक इसी तरह अमर रहेगा।

  • नालसर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा।

    नालसर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा।


    नई दिल्ली । 
    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा एक नए प्रशासनिक और वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने बीसीआई के आधिकारिक बजटीय खर्चों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर तीखा हमला बोला है।

    यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बीसीआई ने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत नामांकन पर अस्थायी रोक लगाने का प्रशासनिक आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के आमंत्रण का विरोध करने वाले छात्र जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनसे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी।

    हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही विधिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विभिन्न स्तरों पर हुए विरोध और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सलाह के बाद बीसीआई ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना आदेश वापस ले लिया। बीसीआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह पाया गया कि छात्रों की सीधी संलिप्तता नहीं थी, जिसके बाद सभी कार्यवाहियां समाप्त कर दी गईं।

    इस प्रशासनिक यू-टर्न के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने बीसीआई के वार्षिक आय-व्यय के आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए अध्यक्ष की घेराबंदी शुरू कर दी। प्रवक्ता सौरव दास ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिटेड आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बैठकों, सम्मेलनों और यात्रा-आवास मद में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है।

    सौरव दास ने मीडिया के सामने सवाल उठाया कि संस्था द्वारा इतनी बड़ी धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद युवा वकीलों के कल्याण और देश भर के लॉ स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की गई है। उन्होंने बीसीआई नेतृत्व के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है।

    देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश के विधिक गलियारों और कानून के छात्रों के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम की व्यापक चर्चा हो रही है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर के लॉ कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र और युवा वकील बार काउंसिल की नीतियों तथा हालिया आदेशों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

    विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी स्वायत्त और शीर्ष विधिक संस्था को अपने फैसलों में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। छात्रों पर प्रतिबंध लगाने और उसे तुरंत वापस लेने की घटना से संस्था की छवि पर असर पड़ा है, जिसकी भरपाई के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।

    वर्तमान में इस विवाद के बाद बीसीआई नेतृत्व पर वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीसीआई प्रबंधन इन वित्तीय आरोपों और प्रशासनिक फैसलों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है।

  • नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान नागा व्यक्ति का मजेदार वीडियो शेयर किया।

    नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान नागा व्यक्ति का मजेदार वीडियो शेयर किया।


    नई दिल्ली । 
    पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के पर्यटन एवं उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद रोचक और मनोरंजक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में एक स्थानीय नागा व्यक्ति को डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अपनी आंखों को मोबाइल स्कैनर के सामने पहचान कराने में आ रही परेशानियों का सामना करते हुए देखा जा सकता है।

    साझा किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अपना बायोमेट्रिक सत्यापन कराने के लिए एक खुले स्थान पर बैठा हुआ है। जब संबंधित अधिकारी मोबाइल डिवाइस के स्कैनर कैमरे से उसकी आंखों की पुतली को स्कैन करने का प्रयास करते हैं, तो डिवाइस का सॉफ्टवेयर छोटी आंखों के कारण पुतली की स्पष्ट पहचान नहीं कर पाता है।

    स्कैनर द्वारा पहचान न कर पाने की स्थिति में वहां उपस्थित दो-तीन अन्य लोग उस व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आते हैं। वे उंगलियों के सहारे उसकी पलकों को थोड़ा चौड़ा करने का प्रयास करते हैं ताकि कैमरा पुतलियों को स्पष्ट रूप से स्कैन कर सके। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद लोग और स्वयं वह व्यक्ति अपनी हंसी रोक नहीं पाते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह संघर्ष पूरी तरह से वास्तविक है। अपने अनोखे और हास्यपूर्ण अंदाज के लिए देश भर में पहचाने जाने वाले मंत्री का यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो गया और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग पूर्व में भी पूर्वोत्तर के लोगों की शारीरिक बनावट और छोटी आंखों को लेकर अपने सकारात्मक और हास्यपूर्ण बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पूर्व में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि छोटी आंखों के अनेक व्यावहारिक फायदे होते हैं, जिनमें आंखों में धूल-मिट्टी कम जाना और लंबे आयोजनों के दौरान सहजता शामिल है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार के वायरल और मनोरंजक वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा व्यापक रूप से पसंद किया जाता है। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर और भोपाल में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीक की व्यावहारिक चुनौतियों और ऐसे हास्यस्पद पलों को लेकर लोगों के बीच अक्सर उत्सुकता देखने को मिलती है।

    यद्यपि यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की व्यावहारिक सीमाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। कई तकनीकी विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि डिजिटल सत्यापन प्रणालियों और सॉफ्टवेयर को देश के सभी क्षेत्रों के नागरिकों की विभिन्न शारीरिक विशेषताओं और विविधता के अनुरूप अधिक सक्षम और सर्वसमावेशी बनाया जाना चाहिए।

    बायोमेट्रिक सत्यापन की इस प्रक्रिया में सामने आई इस अनूठी चुनौती ने जहां एक ओर इंटरनेट पर लोगों को मुस्कुराने का अवसर दिया है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया है कि तकनीकी विकास के दौर में क्षेत्रीय और भौगोलिक विविधताओं का समावेश किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

  • भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।

    भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।


    नई दिल्ली । 
    भारत की ओर से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दिए गए दो अलग-अलग आधिकारिक निमंत्रणों पर पड़ोसी देश की ओर से अभी तक कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ढाका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रस्तावित भारत यात्रा का अंतिम ढांचा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा।

    भारत ने सितंबर महीने में आयोजित होने जा रहे आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। इसके अतिरिक्त एक पृथक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भी नई दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अभी पर्याप्त समय शेष है और सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण घरेलू व संवैधानिक प्राथमिकताओं में व्यस्त है।

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बिम्सटेक संगठन के वर्तमान अध्यक्ष के नाते भारत ने बांग्लादेश को ब्रिक्स सम्मेलन के संपर्क सत्र में शामिल होने का विशेष अवसर प्रदान किया है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनावपूर्ण माहौल को सामान्य बनाना और द्विपक्षीय वार्ता के जरिए आपसी संबंधों को नई दिशा देना है।

    ढाका में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंधों की पक्षधर है। यदि आगामी दिनों में स्थितियां अनुकूल रहती हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो निश्चित रूप से भारत यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों पड़ोसी मुल्कों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष संवाद से कई लंबित क्षेत्रीय व व्यापारिक मुद्दों के हल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बांग्लादेश में बीते समय में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच रणनीतिक व कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे समय में शीर्ष स्तर की यह प्रस्तावित बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्विपक्षीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों का मिलकर काम करना बेहद आवश्यक है।

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की इस हलचल का सीधा असर भारत के विभिन्न राज्यों और व्यापारिक साझेदारियों पर भी देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश जैसे औद्योगिक और कृषि प्रधान राज्य, जो वस्त्र और हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े हैं, वे भी पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक घरानों और नीति निर्माताओं की नजरें भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहती हैं।

    दक्षिण एशियाई कूटनीति में बिम्सटेक और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका आने वाले समय में और अधिक निर्णायक होने की संभावना है। यदि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह क्षेत्र में आर्थिक सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकता है।

    हाल के समय में पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के राजनयिक लगातार संपर्क में हैं। अब सभी की नजरें ढाका के अंतिम आधिकारिक निर्णय पर टिकी हुई हैं कि क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता संभव हो पाती है या नहीं।