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  • पारिवारिक विवाद ने लिया हिंसक रूप, पीलीभीत में पति पर तेजाब फेंकने की घटना से मचा हड़कंप

    पारिवारिक विवाद ने लिया हिंसक रूप, पीलीभीत में पति पर तेजाब फेंकने की घटना से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। पीलीभीत जिले में एक पारिवारिक विवाद ने अचानक भयावह रूप ले लिया, जब एक व्यक्ति पर तेजाब फेंकने का गंभीर आरोप सामने आया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, यह मामला कोतवाली क्षेत्र का है, जहां खैरुल्लाह शाह मोहल्ले में रहने वाले हेमंत वर्मा और उनकी पत्नी शिल्पी रस्तोगी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों का रिश्ता पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण था और मामला कानूनी स्तर तक पहुंच चुका था। परिवार में चल रहे इस विवाद का असर उनके निजी जीवन पर लगातार दिखाई दे रहा था।

    घटना उस समय हुई जब महिला अपने मायके से वापस आई थी। बताया जाता है कि उसी दौरान पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। बहस इतनी तेज हो गई कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और इसी दौरान तेजाब फेंके जाने की घटना सामने आई। अचानक हुई इस वारदात ने घर और आसपास के लोगों को भी चौंका दिया।

    घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग और परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे और घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को गंभीर बताया है और आगे के इलाज पर नजर बनाए हुए हैं। तेजाब से शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं, जिससे उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के पीछे असली वजह क्या थी और विवाद किस हद तक पहुंच चुका था।

    यह पूरा मामला एक बार फिर पारिवारिक विवादों के खतरनाक रूप को सामने लाता है, जहां छोटी-छोटी कहासुनी भी गंभीर वारदात में बदल सकती है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच को आगे बढ़ा रही है, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।

  • तेज बीप और चेतावनी संदेश से दहशत, देशभर में हुआ आपदा प्रबंधन सिस्टम का परीक्षण..

    तेज बीप और चेतावनी संदेश से दहशत, देशभर में हुआ आपदा प्रबंधन सिस्टम का परीक्षण..

    नई दिल्ली। शनिवार की सुबह का समय था और देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, तभी अचानक मोबाइल फोन पर तेज़ बीप की आवाज़ और साथ में एक आपदा चेतावनी संदेश ने सभी को चौंका दिया। कुछ ही पलों में यह संदेश लाखों मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने लगा, जिससे कई जगहों पर लोग असमंजस में पड़ गए और कुछ समय के लिए घबराहट का माहौल बन गया।

    अचानक आए इस अलर्ट का स्वरूप इतना अप्रत्याशित था कि कई लोगों ने इसे किसी वास्तविक आपात स्थिति से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर लोग अपने मोबाइल चेक करने लगे और एक-दूसरे से जानकारी साझा करने लगे कि आखिर यह संदेश किस खतरे की ओर संकेत कर रहा है। तेज आवाज और लगातार बजती बीप ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया, जिससे कुछ स्थानों पर हल्की अफरा-तफरी की स्थिति भी बन गई।

    हालांकि थोड़ी ही देर बाद स्थिति स्पष्ट हुई कि यह कोई वास्तविक आपदा नहीं थी, बल्कि देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली की तैयारी जांचने के लिए किया गया एक अभ्यास था। इस अभ्यास के तहत पूरे देश में एक साथ मोबाइल अलर्ट सिस्टम को सक्रिय किया गया, ताकि यह देखा जा सके कि किसी आपातकालीन स्थिति में चेतावनी संदेश कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचता है।

    इस मॉक ड्रिल के दौरान आधुनिक संचार तकनीक का उपयोग करते हुए एक साथ बड़ी संख्या में मोबाइल उपकरणों पर संदेश भेजे गए। इसका मुख्य उद्देश्य यह परखना था कि यदि भविष्य में कोई प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या अन्य गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो लोगों तक सही जानकारी कितनी जल्दी पहुंचाई जा सकती है और वे उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

    कुछ लोगों ने इस अलर्ट को देखकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी और अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने बताया कि अचानक आई तेज आवाज ने उन्हें कुछ समय के लिए चिंतित कर दिया था, जबकि बाद में जब सच्चाई सामने आई तो राहत महसूस हुई। वहीं कुछ स्थानों पर लोग एक-दूसरे से जानकारी लेकर स्थिति को समझने की कोशिश करते नजर आए।

    प्रशासन की ओर से पहले ही यह संकेत दिया गया था कि इस तरह के अभ्यास समय-समय पर किए जाते हैं, ताकि आपातकालीन व्यवस्था को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जा सके। इस प्रकार के परीक्षण यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि संकट की स्थिति में सूचना प्रणाली बिना किसी देरी के काम कर सके और अधिक से अधिक लोगों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दर्शाया कि आज के समय में तकनीक आपदा प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। हालांकि अचानक आए इस अलर्ट ने लोगों को कुछ समय के लिए असहज जरूर किया, लेकिन इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी वास्तविक आपात स्थिति से निपटने की तैयारी को और अधिक मजबूत बनाना है।

  • 4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार मतगणना के दिन किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी उद्देश्य से एक अहम वर्चुअल बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्यभर के काउंटिंग एजेंट्स को शामिल किया जाएगा।

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। यही वजह है कि इस बैठक को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित न रखकर इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर तैनात काउंटिंग एजेंट्स को विस्तार से दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। एजेंट्स को स्पष्ट रूप से कहा जाएगा कि वे मतगणना के हर चरण पर पैनी नजर बनाए रखें और किसी भी असामान्य स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करें। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

    एजेंट्स की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए जाने की संभावना है कि वे मतगणना शुरू होने से लेकर अंतिम परिणाम और प्रमाण पत्र जारी होने तक काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रहें। इसके साथ ही उन्हें ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाने की प्रक्रिया, सील खोलने और हर राउंड की गिनती पर नजर रखने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अंतिम राउंड तक सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि कई बार परिणाम आखिरी चरणों में बदल सकते हैं।

    इस बार TMC 2021 के अनुभवों से भी सबक ले रही है। पिछले चुनाव में कुछ स्थानों पर हुई अप्रत्याशित घटनाओं ने विवाद को जन्म दिया था, खासकर नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।

    इसके अलावा, इस बार मतगणना प्रक्रिया में कुछ नई तकनीकी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिनमें QR कोड आधारित सत्यापन शामिल है। ऐसे में एजेंट्स को तकनीकी रूप से भी तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे नई प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकें और उनका सही तरीके से पालन सुनिश्चित कर सकें।

    हाल के दिनों में कुछ काउंटिंग सेंटरों को लेकर उठे सवालों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण Mamata Banerjee खुद भी सक्रिय नजर आईं और उन्होंने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। पार्टी के भीतर यह साफ संदेश दिया गया है कि इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

     तृणमूल कांग्रेस इस बार मतगणना को लेकर पूरी तरह सतर्क और संगठित रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि पूरे प्रक्रिया को निष्पक्ष और विवाद रहित बनाए रखना भी है। अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।

  • वैदिक घड़ी ने रचा नया कीर्तिमान, 78 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची भारतीय कालगणना की पहचान

    वैदिक घड़ी ने रचा नया कीर्तिमान, 78 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची भारतीय कालगणना की पहचान


    भोपाल।
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ धाम के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी अनुराग उइके ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अवलोकन से ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को वैश्विक विस्तार मिला है।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने गत 29 अप्रैल को वाराणसी प्रवास के दौरान भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के इस संगम का अवलोकन बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस वैदिक घड़ी को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत मेल बताया। उनके अवलोकन के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर नया उत्साह देखा गया, जिससे यह देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गई।

    प्रधानमंत्री मोदी के अवलोकन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं का ऐसा वातावरण तैयार हुआ कि केवल सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से ही लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी गूँज पहुँची। प्रधानमंत्री श्री मोदी और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर आयोजित लाइव स्ट्रीम को 5,933 दर्शकों ने सीधे देखा। साथ ही राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर हुए सीधे प्रसारण ने करोड़ों दर्शकों तक इसकी जानकारी पहुँचाई

    सोशल मीडिया के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत के ‘ट्रेंडिंग सेक्शन’ में नंबर 1 स्थान पर काबिज रहा, जो सनातन संस्कृति और भारतीय कालगणना से जुड़े आयोजनों के लिए एक डिजिटल मील का पत्थर है। 16 से अधिक प्रमुख हैशटैग्स को ट्रैक किया गया, जिनमें #वाराणसी, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #वैदिक घड़ी जैसे हैशटैग ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। इस व्यापक कवरेज ने इस गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    सांस्कृतिक चेतना का नया संवाहक

    मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा निर्मित इस घड़ी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सादर भेंट किया गया था। 04 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय कालगणना, पंचांग, और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल गणनाओं को सरलता से प्रस्तुत करती है।

    भविष्य की योजनाएँ

    इस सफल डिजिटल आउटरीच ने सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों को जानने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के श्री राम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंग परिसरों में ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश जन-जन तक पहुँच सके। यह न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय काल-चिन्तन को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप

    जिन लोगों को वैदिक घड़ी अपने मोबाइल फोन पर चाहिए तो विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐपवैदिक घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जो भारतीय काल गणना (तिथि, नक्षत्र, योग, करण) और 7000 वर्षों का पंचांग दिखाता है। यह ऐप 189+ भाषाओं में उपलब्ध है, जो सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और 30 घंटे के समय प्रारूप को एड्राइड-आईओएस पर दिखाता है।
    वैदिक घड़ी ने रचा नया कीर्तिमान, 78 लाख से अधिक लोगों तक पहुँची भारतीय कालगणना की पहचान

    वैदिक घड़ी ऐप की मुख्य विशेषताएं

    – भारतीय काल गणना: यह ऐप समय को 30 मुहूर्तों में बांटकर दिखाता है, जो सूर्योदय पर आधारित है।
    – पंचांग विवरण: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, और मास की सटीक जानकारी।
    – 189+ भाषाएँ: यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी सहित 189+ भाषाओं में उपलब्ध है।
    – शुभ/अशुभ समय: यह दैनिक ‘राहुकाल’, ‘शुभ मुहूर्त’ और ‘चौघड़िया’ की जानकारी देता है
    – इतिहास: इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7000 वर्षों का पंचांग समाहित है।
    अलार्म: आप वैदिक समय के अनुसार अलार्म भी सेट कर सकते हैं।

  • Karnataka: तुमकुरु जिले में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस से 44 मोरों की मौत… क्षेत्र में दहशत

    Karnataka: तुमकुरु जिले में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस से 44 मोरों की मौत… क्षेत्र में दहशत


    तुमकुरु।
    कर्नाटक (Karnataka) के तुमकुरु जिले (Tumakuru district) में 44 मोरों की मौत हो गई है। इनके H5N1 बर्ड फ्लू वायरस (H5N1 Bird flu virus) से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि यह घटना सबसे पहले 16 अप्रैल को सामने आई थी और एक हफ्ते के भीतर तुमकुरु तालुका में अलग-अलग जगहों पर रहस्यमय परिस्थितियों में 44 मोर मृत पाए गए।

    वन विभाग के अनुसार, केसरामाडु, हिरेहल्लि और गुलूर ग्राम पंचायतों के खेतों में सर्च ऑपरेशन के दौरान इन मोरों के शव मिले। मृत पक्षियों के सैंपल भोपाल स्थित आईसीएआर (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीजेस) भेजे गए थे, जहां जांच में H5N1 वायरस को मौत का कारण बताया गया। हालांकि 23 अप्रैल के बाद से तुमकुरु तालुक में कोई नई मौत दर्ज नहीं की गई है।


    10 किमी दायरे में कंटेनमेंट जोन घोषित

    वन्यजीव के मुख्य वन संरक्षक कुमार पुष्कर ने बताया कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन व पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है और सभी पोल्ट्री फार्मों को सतर्क कर दिया गया है। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों को ILI (इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण) और SARI (गंभीर श्वसन संक्रमण) के मामलों की निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही PPE किट, ट्रिपल-लेयर मास्क, ओसेल्टामिविर दवा, वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम और थ्रोट स्वैब किट का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने को कहा गया है।


    H5N1 बर्ड फ्लू संक्रमण क्या है

    H5N1 बर्ड फ्लू बेहद संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है। लेकिन, कभी-कभी मनुष्यों में भी संक्रमण फैला सकता है। यह इन्फ्लुएंजा A वायरस का एक प्रकार है, जो विशेष रूप से मुर्गियों, बतखों और जंगली पक्षियों में पाया जाता है। संक्रमित पक्षियों के संपर्क, उनके मल, लार या दूषित वातावरण से यह वायरस फैलता है। मनुष्यों में इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई शामिल हो सकते हैं, जो गंभीर होने पर जानलेवा भी हो सकते हैं।

  • बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…

    बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद के बीच भाजपा (BJP) ने चुनाव बाद की स्थितियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। परिणाम जो भी हों, पार्टी के निर्वाचित विधायक बिना बुलाए अपना क्षेत्र नहीं छोंड़ेंगे। स्थानीय संगठन के नेताओं को भी नतीजों के बाद कुछ दिन तक अपने ही क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विरोधी खेमे की किसी भी तरह का संभावित हिंसा से निपटा जा सके।

    वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में कई हिंसक घटनाएं हुईं थी। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया था। इसी को देखते हुए भाजपा अपने समर्थकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने नतीजे आने के बाद की स्थितियों के लिए पूरे संगठन को जरूरी निर्देश दिए हैं। उसके निर्वाचित विधायक भी बिना बुलाए कोलकाता नहीं पहुंचेंगे। संगठन के प्रमुख लोग भी कुछ दिनों तक अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे और सुरक्षा स्थितियों पर नजर रखेंगे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने भी अगले आदेश तक बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती सुनिश्चित की है।

    भाजपा ने अपने नेताओं से कहा है कि नतीजे आने के बाद भी उसका वार रूम काम करेगा और वहां पर हर क्षेत्र की स्थिति के बार में जानकारी दी जा सकेगी, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पार्टी नेता इस बारे में लगातार बैठकें कर भावी स्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। दो मई को कोलकाता में होने वाली पार्टी की बड़ी बैठक में मुख्य मुद्दा मतगणना को लेकर रहेगा, लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर भी चर्चा संभव है।


    मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं : चुनाव आयोग

    पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में किसी भी मतगणना केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा रही है। सीईओ ने स्ट्रांगरूमों में ईवीएम से कथित छेड़छाड़ और गड़बड़ियों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

    कोलकाता में गुरुवार को मतगणना केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता और प्रत्याशी कुणाल घोष व शशि पांजा ने धरना दिया था। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर के सखावत स्कूल में बने मतगणना केंद्र में पहुंच गई थीं।


    टीएमसी की याचिका पर आज होगी सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बंगाल में मतगणना केंद्रों पर सिर्फ केंद्रीय कर्मियों की पर्यवेक्षकों के तौर पर तैनाती के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

  • भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा, हीटवेव से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

    भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा, हीटवेव से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

    नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के प्रकोप ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर उन श्रमिकों पर पड़ रहा है जो खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि मेहनतकश वर्ग को केवल अधिकार और सम्मान ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण भी मिलना चाहिए।
    तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच निर्माण कार्य, खेतों में मेहनत और सड़कों पर काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। दिनभर की कड़ी मेहनत के दौरान वे सीधे सूर्य की गर्मी के संपर्क में आते हैं, जिससे उनके शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। लू लगने की स्थिति में चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकते हैं।
    विशेषज्ञों के अनुसार, हीटवेव से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि श्रमिक अपने काम के दौरान कुछ बुनियादी सावधानियों को अपनाएं। जहां तक संभव हो, काम छाया में किया जाए और अगर धूप में काम करना अनिवार्य हो, तो सिर को अच्छी तरह ढककर रखा जाए। टोपी, गमछा या हल्के कपड़े का इस्तेमाल शरीर को सीधे धूप से बचाने में मदद करता है।
    पानी का पर्याप्त सेवन भी इस मौसम में बेहद जरूरी है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए, भले ही प्यास न लगी हो। छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसके विपरीत, ज्यादा मीठे या कैफीन युक्त पेय पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर होता है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं।
    कपड़ों का चयन भी गर्मी से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनने से शरीर को ठंडक मिलती है और पसीना आसानी से सूखता है। लगातार लंबे समय तक धूप में काम करने से बचना चाहिए और हर कुछ समय बाद थोड़ी देर आराम करना जरूरी होता है। यह शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है और थकान को कम करता है।
    खानपान पर भी ध्यान देना उतना ही आवश्यक है। हल्का और सुपाच्य भोजन शरीर को गर्मी से लड़ने में मदद करता है, जबकि ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना शरीर के तापमान को और बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार अपनाना जरूरी है।
    यदि किसी श्रमिक में लू के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उसे छाया में ले जाकर ठंडक पहुंचानी चाहिए और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
    इस समय यह भी जरूरी है कि नियोक्ता और संबंधित संस्थाएं श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करें। काम के घंटों में लचीलापन, पीने के पानी की उपलब्धता और आराम के लिए छाया जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। जागरूकता और सहयोग के माध्यम से ही श्रमिकों को इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • रक्षा उत्पादन को नई दिशा देंगे रवि, एचएएल के नए प्रमुख के रूप में संभाली जिम्मेदारी..

    रक्षा उत्पादन को नई दिशा देंगे रवि, एचएएल के नए प्रमुख के रूप में संभाली जिम्मेदारी..

    नई दिल्ली। भारत की अग्रणी एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण कंपनी Hindustan Aeronautics Limited में नेतृत्व परिवर्तन के साथ एक नए दौर की शुरुआत हुई है। अनुभवी अधिकारी Ravi K ने कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक का पद संभाल लिया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी D. K. Sunil से ग्रहण की, जिनका कार्यकाल पूर्ण होने के बाद यह बदलाव हुआ।

    रवि के पास तीन दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है, जिसमें उन्होंने रक्षा और विमानन क्षेत्र के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया है। संगठन में उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं रही, बल्कि उन्होंने तकनीकी और रणनीतिक दोनों स्तरों पर कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। एचएएल में निदेशक (ऑपरेशन्स) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई सुधार लागू किए।

    उनका नाम विशेष रूप से स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas कार्यक्रम से जुड़ा रहा है। इस परियोजना में उन्होंने नेतृत्व करते हुए उत्पादन और आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया, जिससे भारतीय वायुसेना को समय पर विमानों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी। इसके अलावा उन्नत हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही, जहां उन्होंने रक्षा बलों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया।

    रवि ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए। उन्होंने विमान निर्माण में स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को शामिल किया, जिससे एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित हुई। इस पहल का परिणाम यह हुआ कि देश में रक्षा उत्पादन का दायरा बढ़ा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली।

    कंपनी के संचालन को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने कई तकनीकी और प्रबंधन सुधार लागू किए। विशेष रूप से वायुसेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए डेटा कनेक्टिविटी और सेवा प्रणाली को उन्नत किया गया, जिससे किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तेजी से किया जा सके। इन सुधारों से विमानों की सेवा क्षमता में भी सुधार देखने को मिला।

    नए चेयरमैन के रूप में रवि का लक्ष्य एचएएल को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके लिए वे आधुनिक तकनीकों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत डिजिटल प्रणालियों के उपयोग पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि भविष्य में सफलता के लिए नवाचार और कुशल कार्यबल दोनों का संतुलन आवश्यक होगा।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि कंपनी आने वाले समय में नागरिक विमानन और रखरखाव सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी। इससे न केवल नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे बल्कि कंपनी की आर्थिक स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।

    शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी रवि का मजबूत आधार रहा है, जिसने उन्हें तकनीकी और प्रबंधकीय दोनों दृष्टियों से सक्षम बनाया है। उनके नेतृत्व में एचएएल से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह न केवल देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान को और मजबूत करेगा।

  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, विदेश यात्रा पर रोक सहित कई शर्तें लागू

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, विदेश यात्रा पर रोक सहित कई शर्तें लागू

    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मानहानि और कथित गलत आरोपों से जुड़े एक मामले में अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है, हालांकि इसके साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। यह मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित रूप से विदेशी संपत्तियों और पासपोर्ट को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।

    सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पवन खेड़ा को राहत दी जा सकती है, लेकिन जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें लागू करना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होना होगा।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पवन खेड़ा किसी भी तरह से साक्ष्यों को प्रभावित करने या जांच में हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्हें यह अनुमति नहीं होगी कि वे बिना संबंधित अदालत की अनुमति के देश से बाहर यात्रा करें। यह शर्त इस उद्देश्य से लगाई गई है ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। अदालत का मानना था कि उपलब्ध तथ्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया और कुछ टिप्पणियां ऐसी थीं जो आरोपी पर अनावश्यक रूप से भार डालती प्रतीत होती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि किसी स्पष्ट कानूनी आधार के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब मुख्यमंत्री की पत्नी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई गई है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद यह मामला कानूनी प्रक्रिया में चला गया और विभिन्न स्तरों पर इसकी सुनवाई होती रही।

    इससे पहले पवन खेड़ा को कुछ समय के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत भी मिली थी, लेकिन बाद में उस पर रोक से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया सामने आई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अंतिम रूप से अग्रिम जमानत पर फैसला सुनाया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब पवन खेड़ा को राहत तो मिल गई है, लेकिन जांच प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्हें आगे भी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होगा और अदालत द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

    यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ इसे अभिव्यक्ति और आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे कानूनी प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता से जोड़ा जा रहा है। अब आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की आगामी सुनवाई पर निर्भर करेगी।

  • प्रकृति का कहर: यूपी में भारी बारिश और तूफान से 24 की मौत, प्रशासन राहत कार्य में जुटा”

    प्रकृति का कहर: यूपी में भारी बारिश और तूफान से 24 की मौत, प्रशासन राहत कार्य में जुटा”

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पिछले दो दिनों से जारी मौसम का कहर अब एक बड़े संकट के रूप में सामने आया है। तेज आंधी, लगातार बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा में अब तक कम से कम 24 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है।

    राज्य के विभिन्न जिलों में अचानक बदले मौसम ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे रास्ते बाधित हो गए और बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। कई ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

    खेतों में काम कर रहे किसान और खुले क्षेत्रों में मौजूद लोग इस प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर बिजली गिरने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके।

    सरकारी स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता पहुंचाई जाए और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न हो।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही यह आदेश दिया गया है कि मृतकों के परिवारों, घायलों और पशुहानि का मुआवज़ा 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

    जिला प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। नुकसान का आकलन किया जा रहा है और जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। कई स्थानों पर अस्थायी राहत केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान और आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं।

    इस बीच मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर चेतावनी जारी की है। पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में अभी भी तेज हवाओं, बारिश और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। कुछ स्थानों पर बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली है, वहीं कई इलाकों में यह राहत एक गंभीर आपदा में बदल गई है।