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  • भगवान बुद्ध का ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक, अमित शाह ने बताया शांति का मार्ग

    भगवान बुद्ध का ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक, अमित शाह ने बताया शांति का मार्ग

    नई दिल्ली। लद्दाख की शांत और पवित्र वादियों में उस समय एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला जब भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए लोगों की बड़ी संख्या एकत्र हुई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में Amit Shah ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह आज भी उतना ही जीवंत और प्रासंगिक है जितना वह 2500 साल पहले था।

    उनके अनुसार बुद्ध का ज्ञान मानव जीवन के हर दौर में दिशा दिखाने वाला प्रकाश है।

    अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का क्षण है। जब इतने लंबे अंतराल के बाद पवित्र अवशेषों का पुनः आगमन लद्दाख की धरती पर हुआ, तो यह न केवल आस्था का विषय बना, बल्कि लोगों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण भी साबित हुआ। इस आयोजन ने क्षेत्र में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित किया।

    अमित शाह ने भगवान बुद्ध के जीवन को मानवता के लिए एक आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ से तथागत बनने की यात्रा करुणा, त्याग और आत्मज्ञान की ऐसी मिसाल है, जो हर व्यक्ति को जीवन में सही दिशा अपनाने की प्रेरणा देती है। बुद्ध का संदेश अहिंसा, मध्यम मार्ग और संतुलित जीवन पर आधारित था, जो आज के समय में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में बहुत कम ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिनके जीवन की घटनाएं इतनी गहराई से प्रतीकात्मक हों। जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों का एक ही आध्यात्मिक अर्थ में जुड़ जाना उनके जीवन की विशिष्टता को दर्शाता है। यह अपने आप में मानवता के लिए एक दुर्लभ और प्रेरणादायक उदाहरण है।

    लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र सदियों से बौद्ध धम्म का केंद्र रहा है। यहां न केवल बौद्ध विचारधारा को संरक्षित किया गया, बल्कि उसे आगे भी बढ़ाया गया। यह भूमि शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की जीवंत मिसाल है, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गई है।

    अंत में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब दुनिया कई चुनौतियों से गुजर रही है, तब भगवान बुद्ध का संदेश समाधान का मार्ग दिखाता है। उनका विचार आज भी उतना ही प्रभावशाली है और मानवता को एक बेहतर, शांत और संतुलित दिशा की ओर ले जाने की क्षमता रखता है।

  • Harbhajan Singh की सुरक्षा पर HC सख्त: कहा- परिवार को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए

    Harbhajan Singh की सुरक्षा पर HC सख्त: कहा- परिवार को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए


    नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर Harbhajan Singh की सुरक्षा को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि हरभजन सिंह और उनके परिवार को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। यह आदेश उनकी सुरक्षा बहाल करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

    दरअसल, 24 अप्रैल को हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थामा। इसके तुरंत बाद पंजाब पुलिस ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने जालंधर स्थित उनके घर के बाहर CRPF की तैनाती कर दी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पर्याप्त नहीं है और परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    याचिका में हरभजन सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा बिना किसी नोटिस और खतरे के ताजा आकलन के हटा दी गई, जिसे उन्होंने मनमाना निर्णय बताया। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि हरभजन सिंह और उनके परिवार के किसी भी सदस्य को शारीरिक नुकसान न पहुंचे।

    सुरक्षा हटने के बाद उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। AAP कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की और दीवारों पर ‘गद्दार’ लिखा। याचिका में यह भी कहा गया कि 25 और 26 अप्रैल को उनके घर पर भीड़ ने हमला किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उस समय हरभजन सिंह मुंबई में थे और उन्हें इस घटना की जानकारी फोन के जरिए मिली।

    याचिका में यह भी कहा गया कि सुरक्षा हटाने के बाद पुलिस को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार अब पंजाब सरकार को हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

    इस मामले ने सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव के बीच संतुलन के सवाल को भी उजागर किया है। हरभजन सिंह की याचिका और कोर्ट के आदेश ने साफ कर दिया कि किसी भी नागरिक, खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

  • गैस कीमतों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों की लागत बढ़ी, आम उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

    गैस कीमतों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों की लागत बढ़ी, आम उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

    नई दिल्ली।  एलपीजी कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने व्यावसायिक क्षेत्र की लागत को सीधे प्रभावित किया है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में इसकी कीमत 3,071.5 रुपए के स्तर तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और कच्चे तेल तथा गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

    इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग जैसे व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी का उपयोग होता है। लागत बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में संचालन खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर सेवाओं और उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त आर्थिक दबाव के रूप में सामने आई है।

    हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर पहले की तरह ही पुराने दामों पर उपलब्ध रहेंगे। इससे करोड़ों परिवारों को महंगाई के इस दौर में कुछ राहत मिली है और घरेलू बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है।

    पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो यह स्पष्ट होता है कि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले भी दो बार कीमतों में इजाफा हो चुका है, जिससे व्यावसायिक क्षेत्र पहले से ही दबाव में चल रहा था। लगातार बढ़ती लागत ने कारोबारियों के लिए चुनौतियां और अधिक बढ़ा दी हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुनाफा पहले से ही सीमित रहता है।

    दूसरी ओर, ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के प्रयास भी जारी हैं। पेट्रोल, डीजल और अन्य प्रमुख ईंधनों की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसके साथ ही सरकार और संबंधित व्यवस्था यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।

    यह स्थिति दो अलग-अलग प्रभाव दिखाती है, जहां एक ओर व्यापारिक क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा ही यह तय करेगी कि एलपीजी की कीमतों में आगे क्या रुझान देखने को मिलेगा।

  • गोरखपुर में प्रेमी की खातिर मौत से खेल गई किशोरी, बिजली के टावर पर चढ़कर घंटों मचाया कोहराम

    गोरखपुर में प्रेमी की खातिर मौत से खेल गई किशोरी, बिजली के टावर पर चढ़कर घंटों मचाया कोहराम


    नई दिल्ली। गोरखपुर के ग्रामीण अंचल में गुरुवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी जिसने कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर सवाल खड़े कर दिए। चिलुआताल इलाके के एक गांव में उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब ग्रामीणों ने एक किशोरी को जान जोखिम में डालकर बिजली के ऊंचे हाईटेंशन पोल पर चढ़ते हुए देखा। यह नजारा इतना खौफनाक था कि लोगों की रूह कांप गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और हर कोई किशोरी से नीचे उतरने की मिन्नतें करने लगा। मामला प्रेम संबंधों से जुड़ा था, जहाँ किशोरी समाज और कानून की बंदिशों को तोड़कर अपने उस साथी के पास जाने की जिद कर रही थी जिसे पुलिस ने पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया था।

    इस पूरे प्रकरण की पटकथा मार्च के महीने में शुरू हुई थी, जब किशोरी की मां ने एक युवक पर अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गंभीर आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की और लड़की को बरामद कर युवक को जेल की कालकोठरी में डाल दिया था। किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था, लेकिन उसके मन में उपजा विद्रोह शांत नहीं हुआ। गुरुवार की सुबह वह घर से निकली और सीधे बिजली के टावर पर चढ़ गई। उसकी केवल एक ही मांग थी कि उसे उसके प्रेमी के घर जाने दिया जाए। इस जिद्दी रवैये ने पुलिस प्रशासन को भी मुश्किल में डाल दिया क्योंकि बिजली की लाइन चालू होने की स्थिति में कोई भी बड़ी अनहोनी घट सकती थी।

    लगभग ढाई घंटे तक चले इस ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामे के दौरान पुलिस की टीम ने सूझबूझ का परिचय दिया। जमीन पर खड़े अधिकारी लगातार फोन के जरिए किशोरी से बातचीत करते रहे और उसे यह यकीन दिलाने की कोशिश की गई कि उसकी हर बात सुनी जाएगी। जब पुलिस ने उसे भविष्य में मदद का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर उसके तेवर नरम पड़े और वह धीरे-धीरे पोल से नीचे उतरी। इस दौरान पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा और लोग अपनी सांसें थामे रहे। नीचे उतरते ही पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और थाने ले जाकर आवश्यक पूछताछ की, जिसके बाद उसे दोबारा उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।

    दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस का एक सख्त चेहरा भी देखने को मिला। एक अन्य आपराधिक मामले में जहाँ एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था, पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को न केवल गिरफ्तार किया बल्कि महज 24 घंटे के भीतर न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी। अधिकारियों का कहना है कि वे महिला अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं और इस मामले में कड़ी सजा दिलाने के लिए न्यायालय में मजबूत पैरवी करेंगे। इन दोनों घटनाओं ने एक तरफ जहाँ युवाओं में बढ़ते आवेश को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की मुस्तैदी को भी रेखांकित किया है।

  • आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव

    आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव


    नई दिल्ली।
    एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आज 1 मई से नियमों में कई बदलाव (Many changes Rules) हो गए हैं। जिसकी वजह से अब एलपीजी सिलेंडर बिना डॉक्यूमेंट के लेना और कठिन हो जाएगा। बता दें, इस बीच कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial gas cylinder) की कीमतों में आज भारी इजाफा किया गया है।

    1 मई से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बदलाव? (LPG Booking rules changed)
    अभी तक आप अपना एलपीजी बुकिंग पासबुक के जरिए भी सिलेंडर पा जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिना ओटीपी के एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाएगा। डिस्ट्रीब्यूटर्स DAC नंबर के बिना एलपीजी सिलेंडर नहीं दे पाएंगे। इस नियम को आज से और कड़ा कर दिया गया है।


    एलपीजी बुकिंग कितने दिन में? (LPG booking time)

    1 मई यानी आज से शहरी क्षेत्रों में 21 दिन की जगह 25 दिन पर एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करवाई जा सकती है। वहीं, गांव में पहले से ही 45 दिन के अंतराल पर एलपीजी सिलेंडर बुक किया जा सकता है। सप्लाई को बेहतर बनाने और गलत उपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम बनाए हैं।


    98% बुकिंग हो रही है ऑनलाइन

    मौजूदा समय में 98% सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन ही हो रही है। जबकि 94 प्रतिशत डिलीवरी कोड्स के जरिए हो रहा है। इससे कालाबाजारी पर नकेल कसी गई है।


    eKYC हुई एलपीजी सिलेंडर के लिए जरूरी (LPG booking ekyc details)

    अगर आपने अपने एलपीजी पासबुक का eKYC नहीं करवाया है तो ऐसी स्थिति में सिलेंडर नहीं मिलेगा। अब आधार आधारित eKYC करवाना जरूरी हो गया है। बता दें, जिन ग्राहकों ने eKYC नहीं करवाई है उन्हें एलपीजी सिलेंडर बुक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


    1 मई को बढ़ गए कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट (LPG price today)

    आज दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का रेट 993 रुपये बढ़ गया है। जिसके बाद 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का रेट 3071.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई भी इजाफा नहीं किया है। आखिरी बार घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट मार्च में बढ़ाया गया था। उसके बाद से ही दाम स्थिर है।

    युद्ध के बाद एलपीजी की शुरू हुई किल्लत (LPG latest News)
    भारत अपनी एलपीजी जरूरत के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन युद्ध ने आपूर्ति पर बुरा असर डाला है। जिसकी वजह से सप्लाई लगभग रुक गई है। सरकार ने घरेलू कंपनियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा है। इसके अलावा यूनाइटेड स्टेट से भी एलपीजी मंगवाया जा रहा है। हालांकि, भारत को इसके लिए और पैसे खर्च करने होंगे।

  • पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी

    पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी


    नई दिल्ली।
    अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections Five states) में मतों की गिनती के दिन यानी 4 मई को सभी मतगणना केंद्रों (Counting centres) पर चुनाव आयोग (Election Commission.) क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (QR-Based Identity Cards) जारी करेगा ताकि किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को रोका जा सके। चुनाव आयोग की यह अनूठी पहल है और पहली बार व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा। पांच राज्यों की सभी विधानसभा क्षेत्रों के काउंटिंग सेंटर के अलावा यह व्यवस्था पांच राज्यों की सात असेंबली सीटों पर हुए उपचुनाव में मतगणना केंद्रों पर भी की जाएगी।

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को एक प्रेस नोट जारी कर घोषणा की कि काउंटिंग सेंटर्स पर सुरक्षा को मजबूत करने और अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए ECINET पर QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली शुरू की गई है। आयोग के अनुसार, “काउंटिंग सेंटर्स में किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश की संभावना को खत्म करने के लिए QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू किया गया है।”


    पिछले एक साल में 30 से अधिक पहलों का हिस्सा

    यह प्रणाली 4 मई, 2026 को होने वाली मतगणना से लागू की जाएगी। यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ पांच राज्यों के सात विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए होगी। ECI ने कहा कि इस प्रणाली का विस्तार भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी आम चुनावों और उपचुनावों तक भी किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह कदम पिछले एक साल में की गई 30 से अधिक पहलों का हिस्सा है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के लिए मानकीकृत QR कोड-आधारित पहचान पत्र शामिल हैं।


    मतगणना केद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

    आयोग के मुताबिक मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। पहले और दूसरे स्तर पर, संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए फोटो पहचान पत्रों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। मतगणना कक्ष के पास स्थित तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में, क्यूआर कोड की सफल ‘स्कैनिंग’ के बाद ही कर्मी को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। क्यूआर आधारित पहचान पत्र मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश करने की अनुमति प्राप्त सभी श्रेणियों के अधिकृत कर्मियों को जारी किए जाएंगे, जिनमें चुनाव अधिकारी, सहायक चुनाव अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं।

    केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही QR-आधारित पहचान पत्र
    आयोग ने कहा है कि QR-आधारित पहचान पत्र केवल अधिकृत व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे। इनमें रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और आयोग द्वारा अनुमति प्राप्त अन्य व्यक्ति शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा निर्देशों के अनुसार उसके द्वारा जारी किए गए प्राधिकार पत्रों के आधार पर मीडियाकर्मियों को प्रवेश की अनुमति जारी रहेगी। लोकसभा चुनाव-2024 में उस समय विवाद पैदा हो गया था, जब मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट पर मतगणना के दौरान एक उम्मीदवार के सहयोगी द्वारा एक ”अधिकृत व्यक्ति” के मोबाइल फोन का ”अनाधिकृत रूप से” उपयोग किया गया था।

  • AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

  • ओजोन परत की रिकवरी में आ रही बाधा, फीडस्टॉक रसायनों के रिसाव से सुधार में आ सकती है देरी

    ओजोन परत की रिकवरी में आ रही बाधा, फीडस्टॉक रसायनों के रिसाव से सुधार में आ सकती है देरी

    नई दिल्ली। ओजोन परत की सुधार प्रक्रिया को लेकर अब तक मिल रहे सकारात्मक संकेतों के बीच एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। Nature Communications में प्रकाशित शोध के अनुसार, औद्योगिक फीडस्टॉक रसायनों का छिपा हुआ रिसाव ओजोन परत की रिकवरी को धीमा कर सकता है। यह रिसाव पहले के अनुमान से कई गुना अधिक पाया गया है, जिससे 1980 के स्तर तक वापसी में अतिरिक्त समय लग सकता है।

    ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक अहम सुरक्षा परत है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। 1980 के दशक में वैज्ञानिकों ने पाया था कि अंटार्कटिका के ऊपर यह परत तेजी से पतली हो रही है, जिसे ओजोन छिद्र के रूप में जाना गया। इसका मुख्य कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे रसायन थे, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एयरोसोल उत्पादों में होता था।

    इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल लागू किया गया, जिसके तहत 197 देशों ने ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का संकल्प लिया। वैज्ञानिकों के अनुसार इन प्रयासों का असर दिख रहा है और ओजोन परत धीरे-धीरे सुधर रही है। अनुमान है कि यह 2040 से 2060 के बीच 1980 के स्तर के करीब पहुंच सकती है, जिससे त्वचा कैंसर और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आने की संभावना है।

    हालांकि, नए अध्ययन में एक अहम खामी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि फीडस्टॉक रसायन जिनका उपयोग प्लास्टिक, नॉन-स्टिक कोटिंग्स और अन्य उत्पादों के निर्माण में होता है वास्तव में अपेक्षा से अधिक मात्रा में वातावरण में रिस रहे हैं। पहले जहां इनसे लगभग 0.5 प्रतिशत उत्सर्जन का अनुमान था, वहीं अब यह तीन से चार प्रतिशत तक पाया गया है। यह अतिरिक्त रिसाव ओजोन परत के सुधार की गति को प्रभावित कर रहा है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ओजोन परत को 1980 के स्तर तक पहुंचने में करीब सात साल की अतिरिक्त देरी हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि औद्योगिक रसायनों के उपयोग और उनके उत्सर्जन पर सख्त निगरानी जरूरी है। साथ ही, रासायनिक उद्योग के पास मौजूद कम हानिकारक विकल्पों को अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस

    देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस


    नई दिल्ली ।
    देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से तेज़ी लाने पर जोर दिया गया, साथ ही विभिन्न विभागों की नीतियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक का सबसे प्रमुख फोकस आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर रहा। सरकार ने निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सके। छोटे और बड़े कार्यों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    वन विभाग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। वन दरोगा पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और अधिक योग्य उम्मीदवारों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। वन आरक्षी पदों के लिए भी नई आयु सीमा लागू की गई है, जिससे भर्ती मानकों को अपडेट किया जा सके।

    परिवहन विभाग में भी कई अहम निर्णय लिए गए हैं। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। पहले निर्धारित संख्या में बढ़ोतरी करते हुए अब अधिक बसें खरीदने का फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शिक्षा क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली को भी औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे शिक्षकों की सेवा संरचना और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके।

    खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी संशोधन करते हुए रॉयल्टी दरों में बदलाव किया गया है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कक्षा स्तर के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है।

    इसके साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा करेगी।

  • बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने देशभर में अप्रेंटिस पदों पर बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के तहत कुल 1865 पदों को भरा जाएगा, जिससे हजारों उम्मीदवारों को बैंकिंग सेक्टर में करियर शुरू करने का मौका मिलेगा।

    इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 मई तय की गई है, जिसके बाद कोई भी फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन पूरा करने की सलाह दी जा रही है।

    शैक्षणिक योग्यता के अनुसार, आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से प्राप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही कुछ अन्य पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है।

    उम्र सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना एक निर्धारित तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आयु में छूट भी दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें सबसे पहले ऑनलाइन परीक्षा होगी, इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा ली जाएगी और अंतिम चरण में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, जिसकी राशि कार्यस्थल और पद के अनुसार तय होगी। यह अवसर विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो बैंकिंग क्षेत्र में अनुभव हासिल करना चाहते हैं।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क अधिक रखा गया है, जबकि महिला उम्मीदवारों और आरक्षित वर्ग के लिए यह राशि कम है। भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। उम्मीदवारों को पहले संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, इसके बाद बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और शुल्क का भुगतान करके फॉर्म जमा करना होगा। अंत में भविष्य के उपयोग के लिए आवेदन की एक कॉपी सुरक्षित रखना जरूरी है।