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  • होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच ईरान और भारत के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने बुधवार शाम भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को फोन कर क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की।

    इस बातचीत में मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य हलचल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय विदेश मंत्री ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देश मौजूदा संकट की गंभीरता को देखते हुए एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार मार्ग पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।

    ईरानी दूतावास के अनुसार, इस चर्चा में न केवल सुरक्षा मुद्दों बल्कि युद्धविराम की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसी बीच, ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भारत को लेकर एक सकारात्मक संकेत मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रतिनिधियों का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने और चल रही जंग को समाप्त करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने वर्तमान संकट को ‘दमन और आत्मरक्षा’ के बीच का संघर्ष करार देते हुए बढ़ते मानवीय नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ईरान का मानना है कि वैश्विक समुदाय को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है और भारत जैसे प्रभावशाली राष्ट्र इस दिशा में मध्यस्थता कर सकते हैं।

    दूसरी ओर, सैन्य मोर्चे पर ईरान का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि यदि अमेरिका ने कोई भी नई सैन्य गलती की, तो ईरान अपनी ‘आश्चर्यजनक रणनीतियों’ और नव विकसित रक्षा क्षमताओं का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

    इसके साथ ही, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर वह अपना नियंत्रण किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद में दिए गए बयानों के अनुसार, देश के पास मिसाइलों और उन्नत ड्रोनों का इतना विशाल भंडार है कि वह किसी भी लंबे संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

    कूटनीतिक स्तर पर यह भी खुलासा हुआ है कि तनाव के बावजूद पर्दे के पीछे कुछ वार्ताओं के रास्ते खुले हुए हैं। खबर है कि कुछ पड़ोसी देशों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष संवाद की प्रक्रिया जारी है, जिसका प्रबंधन ईरानी संसद के अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा है।

    हालांकि, जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान के कड़े सैन्य तेवर और भारत के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले दिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज मार्ग की सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गई है।

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।


    नई दिल्ली । राजनीतिक गलियारों में अपनी अलग पहचान रखने वाले राघव चड्ढा ने जैसे ही एक नए राजनीतिक दल के साथ अपनी पारी शुरू की, उन्हें संगठन की गहराई और वहां के कड़े नियमों का अहसास पहले ही दिन हो गया। भारतीय राजनीति में कैडर आधारित व्यवस्था के लिए विख्यात भारतीय जनता पार्टी ने अपने इस नए सदस्य को स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर पद की मर्यादा होती है।

    हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब राघव चड्ढा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुखातिब हुए, तो उन्होंने अनजाने में उन्हें उनके नाम से संबोधित कर दिया। पार्टी के भीतर इस तरह का संबोधन प्रोटोकॉल के खिलाफ माना जाता है, जिसके तुरंत बाद वहां मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें शिष्टाचार के अनकहे लेकिन अनिवार्य नियमों की जानकारी दी।

    भाजपा जैसी विचारधारा आधारित पार्टी में अनुशासन का स्तर काफी ऊंचा रहता है, जहाँ जनसंघ के समय से ही पद की गरिमा को व्यक्तिगत पहचान से ऊपर रखा गया है। राघव चड्ढा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच हुई इस मुलाकात में जब राघव ने बार-बार अध्यक्ष का नाम लिया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे तुरंत सुधारने की सलाह दी।

    उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाया गया कि बातचीत के दौरान ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहकर संबोधित करना ही पार्टी की संस्कृति का हिस्सा है। यह वाकया उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम देखते हैं कि वर्तमान अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई नेताओं से छोटे होने के बावजूद संगठन के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, और पार्टी ने स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं कि प्रोटोकॉल में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    संगठन के भीतर यह नियम केवल नए सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उन पुराने दिग्गजों के लिए भी है जिनके अध्यक्ष के साथ बेहद करीबी या पुराने संबंध रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यदि पद का सम्मान कम होता है, तो संगठन की शक्ति पर भी उसका असर पड़ता है।

    इसलिए, आधिकारिक चर्चाओं के दौरान निजी संबंधों को किनारे रखकर केवल पद के अनुरूप सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करना अनिवार्य है। राघव चड्ढा के लिए यह अनुभव काफी अलग था, क्योंकि वे एक ऐसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए हैं जहाँ कार्यशैली और संबोधन के तरीके काफी भिन्न रहे हैं। इस छोटी सी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में शामिल होने का अर्थ केवल विचारधारा अपनाना नहीं, बल्कि उसकी सख्त अनुशासन व्यवस्था का हिस्सा बनना भी है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अनुशासन के जरिए पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। राघव चड्ढा को मिला यह सबक यह भी दर्शाता है कि पार्टी अपने हर सदस्य से पद की गरिमा बनाए रखने की उम्मीद करती है, चाहे वह कितना ही अनुभवी या चर्चित चेहरा क्यों न हो।

    आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा पार्टी के इस नए सांचे में खुद को कितनी जल्दी और कितनी सहजता से ढाल पाते हैं। फिलहाल, ‘नाम नहीं, पद का सम्मान’ के इस सिद्धांत ने स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ संगठन ही सर्वोपरि है।

  • तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया।

    इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है।

    नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

  • PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!

    PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!


    दुबई।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) की एक संक्षिप्त यात्रा कर सकते हैं। अपनी आगामी यूरोप यात्रा (Europe trip) के दौरान पीएम मोदी बीच रास्ते में कुछ समय के लिए यूएई में रुकेंगे, जहां उनकी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan.- MBZ) के साथ द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। वर्तमान में इस यात्रा की रूपरेखा तैयार की जा रही है और अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।


    यूरोप दौरे के बीच यूएई में पड़ाव

    प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक चार यूरोपीय देशों- नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली की अहम यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण ओस्लो (नॉर्वे) में होने वाला ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ होगा। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद पीएम मोदी की यह पहली यूरोप यात्रा होगी।


    संकट के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय वार्ताएं

    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला लगातार जारी है। अगर पीएम मोदी यूएई पहुंचते हैं, तो यह इसी कड़ी का नवीनतम हिस्सा होगा। इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति (MBZ) एक दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ वार्ता की।

    मार्च में ईरान युद्ध के बीच, यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल-हाशिमी ने भारत का दौरा किया। अप्रैल (11-12) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई का दौरा किया। उन्होंने राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात कर पीएम मोदी का एक निजी संदेश उन्हें सौंपा। इसके अलावा, उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की।

    पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने यूएई जाकर राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर अहम चर्चा हुई।


    तेजी से बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंध

    पिछले एक दशक में भारत और यूएई के संबंधों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। दोनों देशों ने आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को काफी मजबूत किया है। वर्ष 2021 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया था। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों का लक्ष्य 2032 तक इस व्यापार को दोगुना करना है। यूएई ऊर्जा, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक बन गया है।


    ऊर्जा क्षेत्र में गहराता सहयोग (एलएनजी और ओपेक)

    ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच हाल ही में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान 10 साल का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति समझौता हुआ था। इसके तहत, यूएई 2028 से शुरू होकर अगले 10 वर्षों तक भारत को $3 बिलियन तक की एलएनजी की आपूर्ति करेगा।

    यूएई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसके बाद यह उम्मीद की जा रही है कि यूएई अपने तेल उत्पादन में भारी वृद्धि करेगा, जिससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा संबंध और अधिक मजबूत होंगे। संक्षेप में कहें तो, पीएम मोदी की यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश न केवल व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार भी बने हुए हैं।

  • दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं

    दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं


    नई दिल्ली:
    दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई है। रोहिणी ईस्ट से तीन बार के पार्षद प्रवेश वाही को दिल्ली का नया मेयर चुना गया, जबकि आनंद विहार की पार्षद डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर निर्वाचित हुईं। आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रक्रिया से दूर रहने के कारण मुकाबला काफी आसान हो गया।

    मेयर पद के लिए हुए मतदान में प्रवेश वाही को कुल 156 वोट मिले। उन्हें इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 14 पार्षदों का भी समर्थन मिला। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार हाजी ज़राफ़ को सिर्फ 9 वोट ही प्राप्त हुए। डिप्टी मेयर पद पर भी बीजेपी की जीत उतनी ही मजबूत रही। आनंद विहार से पार्षद डॉ. मोनिका पंत को 156 वोट मिले और वे निर्वाचित हुईं। चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय में बैठक कर सांसदों और पार्षदों को वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा स्थायी समिति के लिए भी चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी के जय भगवान यादव और मनीष चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी की पार्षद जलज चौधरी को शामिल किया गया।

    प्रवेश वाही का राजनीतिक सफर
    प्रवेश वाही नगर निगम की राजनीति में लंबे अनुभव वाले नेता हैं। वे रोहिणी-ईस्ट वार्ड से तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं। उनका राजनीतिक करियर 1980 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी से जुड़कर शुरू हुआ था। वे 2007 में पहली बार पार्षद बने और इसके बाद 2012 और 2022 में भी जीत हासिल की। लगभग दो दशक के अनुभव के दौरान वे उत्तर दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और रोहिणी ज़ोन के चेयरमैन जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। 2004 से 2007 के बीच वे मंडल अध्यक्ष भी रहे। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें मेयर की जिम्मेदारी सौंपी।

    डॉ. मोनिका पंत की प्रोफाइल
    डिप्टी मेयर बनीं डॉ. मोनिका पंत पेशे से मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं और उनकी पहचान एक शिक्षित व साफ छवि वाली नेता के रूप में है। उन्होंने 2001 में इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन से एमडी (A.M.) की डिग्री प्राप्त की। 48 वर्षीय पंत आनंद विहार वार्ड से पार्षद हैं और 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी। वे दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की महामंत्री भी रह चुकी हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास लगभग 13.96 करोड़ रुपये की संपत्ति है और उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके पति आशीष पंत चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।

    स्टैंडिंग कमेटी में नई टीम
    मेयर और डिप्टी मेयर के साथ एमसीडी की अहम स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का भी चयन किया गया। बीजेपी की ओर से बेगमपुर के पार्षद जय भगवान यादव और पहाड़गंज के मनीष चड्ढा शामिल हुए, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से शालीमार बाग की पार्षद जलज चौधरी को जगह मिली।

    इस चुनाव में बीजेपी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती साफ दिखाई दी। आम आदमी पार्टी के चुनाव से बाहर रहने के फैसले ने पार्टी की राह और आसान कर दी, जबकि कांग्रेस को बेहद कम समर्थन मिला। अब नए नेतृत्व के सामने दिल्ली में सफाई व्यवस्था सुधारने और निगम प्रशासन को मजबूत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

  • दिल्ली में राशन सिस्टम का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: QR स्मार्ट कार्ड लागू, हर शनिवार लगेगा समाधान कैंप

    दिल्ली में राशन सिस्टम का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: QR स्मार्ट कार्ड लागू, हर शनिवार लगेगा समाधान कैंप

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    नई दिल्ली| Delhi में राशन वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने QR कोड से लैस स्मार्ट राशन कार्ड लागू करने का फैसला किया है, जिससे न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का फायदा सीधे और सही तरीके से पहुंचेगा। यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    इस नई व्यवस्था के तहत जारी होने वाले QR स्मार्ट राशन कार्ड में डिजिटल फीचर्स शामिल होंगे, जिनकी मदद से लाभार्थियों की पहचान तुरंत और सटीक तरीके से हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे डुप्लीकेट कार्ड, गलत एंट्री और अनधिकृत लाभ लेने जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। साथ ही, राशन वितरण की प्रक्रिया अधिक यूजर-फ्रेंडली और तेज हो जाएगी।

    इस योजना को तेजी से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के साथ समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। सरकार का फोकस है कि तकनीक के जरिए सिस्टम को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।

    इसके साथ ही, आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 1 मई से हर शनिवार ‘जन शिकायत समाधान कैंप’ आयोजित किए जाएंगे। ये कैंप सुबह 9 बजे से 11 बजे तक चलेंगे, जहां राशन कार्ड से जुड़ी लंबित शिकायतों का मौके पर ही निपटारा किया जाएगा। इन कैंपों में असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जिम्मेदारी तय रहे और लोगों को तुरंत राहत मिल सके। संभावना है कि मुख्यमंत्री खुद भी इन कैंपों का औचक निरीक्षण करेंगी, जिससे व्यवस्था पर निगरानी और सख्ती बनी रहे।

    सरकार ने राशन वितरण में गड़बड़ियोंजैसे कम तौल, देरी या अवैध कटौतीपर कड़ा रुख अपनाया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई डीलर या सप्लायर दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाने की योजना भी है, जिससे केवल जरूरतमंद लोगों को ही योजना का लाभ मिल सके।

    इस पहल के साथ ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना को भी मजबूती दी जाएगी। कैंपों के जरिए लोगों को इस योजना के बारे में जागरूक किया जाएगा, ताकि वे देश में कहीं भी अपना राशन प्राप्त कर सकें। हालांकि, नियम के अनुसार एक समय में केवल एक ही स्थान से राशन लिया जा सकेगा।

    कुल मिलाकर, QR स्मार्ट राशन कार्ड और साप्ताहिक समाधान कैंप दिल्ली के राशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और जनसंतोष तीनों में सुधार की उम्मीद है।

  • साबरकांठा में भीषण सड़क हादसा लग्जरी बस की टक्कर से 8 जिंदगियां खत्म कई घायल

    साबरकांठा में भीषण सड़क हादसा लग्जरी बस की टक्कर से 8 जिंदगियां खत्म कई घायल


    साबरकांठा । गुजरात के साबरकांठा जिला में बुधवार को एक भयावह सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार लग्जरी बस और कार के बीच हुई जोरदार टक्कर में 7 महिलाओं समेत 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख पुकार और अफरा तफरी का माहौल बन गया

    यह दर्दनाक दुर्घटना हिम्मतनगर के पास जसवंतगढ़ पाटिया के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर हुई जहां शामलाजी से हिम्मतनगर की ओर जा रही एक निजी बस ने आगे चल रही कार को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला

    हादसे में जिन लोगों की मौत हुई उनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं मृतकों में नायक अंजू बेन भोई नीता बेन नायक मीनाक्षी बेन पटेल कामिनी बेन नायक कंचन बेन प्रजापति नीता बेन गोस्वामी रेखा बेन और कार चालक रावल अनिल कुमार शामिल हैं बताया जा रहा है कि ये सभी एक कैटरिंग टीम का हिस्सा थे और अरावली जिले के मोडासा से हिम्मतनगर के हुंज गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और राहगीर मदद के लिए दौड़ पड़े घायलों को तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से हिम्मतनगर सिविल अस्पताल और गंभोई अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस तेज रफ्तार में थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया जिसके कारण यह हादसा हुआ पुलिस उपाधीक्षक ए के पटेल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी हादसे के बाद अस्पताल परिसर में मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी अपने प्रियजनों को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ नजर आ रहा था माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरनाक परिणामों की ओर इशारा करता है जरूरत है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

    फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है वहीं घायलों के इलाज का सिलसिला जारी है प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें

  • बंगाल चुनाव 2026 में सितारों की सियासी जंग रूपा गांगुली से सायंतिका बनर्जी तक कई चेहरे मैदान में

    बंगाल चुनाव 2026 में सितारों की सियासी जंग रूपा गांगुली से सायंतिका बनर्जी तक कई चेहरे मैदान में


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार राजनीति और सिनेमा का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है जहां एक ओर राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर है वहीं दूसरी ओर कई फिल्मी और टीवी सितारे भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान जारी है और अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं

    भारतीय राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रवेश कोई नई बात नहीं है लेकिन हर चुनाव में यह आकर्षण और भी बढ़ जाता है इस बार बंगाल चुनाव में भी कई चर्चित चेहरे मैदान में उतरे हैं जो अपने अभिनय के साथ साथ अब जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं

    इन्हीं में एक बड़ा नाम रूपा गांगुली का है जिन्होंने लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाकर घर घर में पहचान बनाई थी अब वे भारतीय जनता पार्टी की ओर से सोनारपुर दक्षिण सीट से चुनाव लड़ रही हैं रूपा गांगुली पहले भी राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं

    वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भी कई फिल्मी चेहरों पर भरोसा जताया है अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी बारानगर सीट से चुनाव मैदान में हैं वे इससे पहले उपचुनाव जीतकर विधायक बन चुकी हैं और एक बार फिर जनता के बीच पहुंची हैं

    एक्टर रुद्रनील घोष भी इस चुनाव में भाजपा के टिकट पर शिबपुर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं उनका नाम भी बंगाल की राजनीति में चर्चित रहा है इसके अलावा अभिनेता और निर्देशक राज चक्रवर्ती तृणमूल कांग्रेस की ओर से बैरकपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं

    अभिनेत्री जून मालिया भी इस चुनाव में फिर से मैदान में उतरी हैं वे टीएमसी के टिकट पर मेदिनीपुर से चुनाव लड़ रही हैं और पहले भी इस सीट से जीत दर्ज कर चुकी हैं इसी तरह हिरन चटर्जी भाजपा के उम्मीदवार के रूप में श्यामपुर सीट से मैदान में हैं उन्होंने पिछला चुनाव भी जीता था और इस बार अपनी जीत दोहराने की कोशिश में हैं

    इसके अलावा पापिया अधिकारी टॉलीगंज से भाजपा की उम्मीदवार हैं वहीं सोहम चक्रवर्ती करीमपुर सीट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं इनके साथ ही कुछ और टीवी और फिल्मी कलाकार भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं

    बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है और इन स्टार उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है जनता के बीच इन सितारों की लोकप्रियता किस हद तक वोट में बदलती है यह देखना बेहद अहम होगा अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं जब यह साफ हो जाएगा कि सिनेमा के ये सितारे राजनीति के मंच पर कितने सफल साबित होते हैं और बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाती है

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में करीब 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। राज्य की सियासत में इस समय मुकाबला बेहद दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मतदान केंद्रों के आसपास मौजूद रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां धारा 163 लागू है, वहां मुख्यमंत्री का इस तरह घूमना नियमों पर सवाल खड़ा करता है। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रभाव डाल सकती हैं।

    खरगे की अपील- बिना डर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें। खरगे ने कहा कि यह समय उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने का है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से विशेष रूप से सक्रिय भागीदारी की अपील की। खरगे ने अपने संदेश में कहा कि मतदाता विकास, प्रगतिशील मूल्यों, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के लिए मतदान करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा बदलाव और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है और यह चुनाव भी उसी दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावा
    भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मतदान के दौरान दावा किया कि इस बार मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव के नतीजे बड़े बदलाव का संकेत देंगे।

    अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।

    4 मई को आएंगे नतीजे
    राज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। इससे पहले पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। सभी सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।