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  • टमाटर-प्याज-आलू की कीमतों में भारी इजाफा…. बिगड़ा रसोई का बजट

    टमाटर-प्याज-आलू की कीमतों में भारी इजाफा…. बिगड़ा रसोई का बजट


    नई दिल्ली।
    अगर आपको पिछले कुछ दिनों से सब्जी मंडी (Vegetable Market) में टमाटर, प्याज और आलू पहले से महंगे नजर आ रहे हैं, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है। देशभर में इन तीनों जरूरी सब्जियों की कीमतों (Vegetable prices) में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे एक बार फिर खाने-पीने की चीजों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन (Food inflation) बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में टमाटर की औसत खुदरा कीमत में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्याज लगभग 11 प्रतिशत और आलू करीब 1.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। ये तीनों सब्जियां भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में इनका संयुक्त योगदान करीब 1.75 प्रतिशत है। इसलिए इनके दाम बढ़ने का सीधा असर महंगाई के आंकड़ों पर भी पड़ सकता है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो टमाटर की कीमत करीब 25 प्रतिशत अधिक हो चुकी है, जबकि प्याज लगभग 3.3 प्रतिशत महंगा है। हालांकि, आलू अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत सस्ता है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।


    50% तक बढ़ीं टमाटर की कीमतें

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर टमाटर पर देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में टमाटर की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टमाटर लगभग दोगुना महंगा हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह भीषण गर्मी को माना जा रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण टमाटर की फसल प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हो गया। इसके अलावा गर्म मौसम में लंबी दूरी तक टमाटर की ढुलाई भी मुश्किल हो गई, क्योंकि फल जल्दी पककर खराब होने लगे।

    दिल्ली की आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा से आने वाली टमाटर की आवक में काफी कमी आई है। इसका सीधा असर राजधानी समेत उत्तर भारत के कई शहरों में कीमतों पर पड़ा है।


    प्याज की कीमतों में भी तेजी

    प्याज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। कई राज्यों में प्याज 10 से 20 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण प्याज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हुई, जिससे बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज कम पहुंच रहा है।

    एक्सपर्ट बताते हैं कि मानसून के दौरान टमाटर और प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। लेकिन इस बार एल-नीनो के प्रभाव, भीषण गर्मी और मानसून में देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अगर आने वाले दिनों में बारिश सामान्य नहीं रही या आपूर्ति में और कमी आई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच आम लोगों की रसोई का बजट फिर बिगड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। अगर टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में फूड इंफ्लेशन के आंकड़ों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार और सरकारी कदम इन बढ़ती कीमतों पर कितना असर डाल पाते हैं।

  • लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….

    लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) लोकसभा सीटों (Lok Sabha seats) की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरह के फार्मूलों पर काम कर रही है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही, सरकार महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Law) को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) के नए मसौदे को प्रभावी बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

    दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया जा रहा है कि आबादी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि सरकार इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।


    क्या है नया फॉर्मूला

    पहले वाले विधेयक को आधार बनाते हुए नए मसौदे में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यह उन प्रस्तावों में से एक है जिन पर सरकार काम कर रही है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि अभी की जा रही जनगणना के आंकड़े आने बाकी हैं।


    दो तिहाई बहुमत का इंतजार

    सूत्रों ने बताया कि सरकार को जब संख्याबल का भरोसा हो जाएगा उसके बाद ही विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। अभी सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 360 के आंकड़े की जरूरत है।


    2034 से पहले अड़चन

    मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने से जुड़ी हुई है। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून में बदलाव की जरूरत थी।

    सरकार की योजना के अनुसार, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 कर दी जाएगी।


    पिछला संविधान संशोधन विधेयक

    अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें ‘किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।’

  • अयोध्या दौरे से पहले यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय नजरबंद, राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सियासत तेज

    अयोध्या दौरे से पहले यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय नजरबंद, राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सियासत तेज


    अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसदों और नेताओं के प्रस्तावित अयोध्या दौरे से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को प्रशासन ने नजरबंद कर दिया। उन्हें अयोध्या स्थित होटल पद्म श्री पैलेस में रोका गया है।

    अजय राय कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल की तैयारियों के सिलसिले में अयोध्या पहुंचे थे, जिसमें पार्टी के सांसद, विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल मंगलवार सुबह रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचने वाला है।

    कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल करेगा दर्शन
    कांग्रेस के 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में अमेठी से सांसद किशोरी लाल, सीतापुर से सांसद राकेश राठौर, प्रयागराज से सांसद उज्ज्वल रमण सिंह और बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया सहित कई वर्तमान और पूर्व सांसद, विधायक तथा पूर्व एमएलसी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल के सुबह करीब 9:30 बजे अयोध्या पहुंचने का कार्यक्रम है।

    चढ़ावा मामले की जांच बैंकिंग सिस्टम तक पहुंची
    इस बीच, राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित 6 से 7 बैंकों को नोटिस जारी कर संबंधित खातों, लॉकर और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का ब्योरा मांगा है।

    जांच एजेंसियां ट्रांजैक्शन ट्रेल के जरिए धन के प्रवाह का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े खातों और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

    बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
    पुलिस अब बैंक कर्मचारियों और दान राशि की गिनती, सुरक्षा तथा बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े स्टाफ की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं इस पूरी प्रक्रिया में लापरवाही या किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं हुई। इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

  • मॉनसून में 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक, महाराष्ट्र सरकार दे सकती है ₹50 हजार की सहायता

    मॉनसून में 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक, महाराष्ट्र सरकार दे सकती है ₹50 हजार की सहायता


    मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मॉनसून के दौरान समुद्र में मछली पकड़ने पर लगने वाले वार्षिक प्रतिबंध की अवधि बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दी है। प्रतिबंध से प्रभावित मछुआरों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकार प्रति मछुआरे 50 हजार रुपये तक की सहायता देने पर विचार कर रही है।

    विधानसभा में मछली पालन मंत्री नितेश राणे ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देर से सक्रिय होने के कारण केंद्र सरकार ने पहले पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक मछली पकड़ने पर रोक लगाई थी। अब राज्य सरकार ने इस अवधि को बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया है।

    क्यों बढ़ाया गया प्रतिबंध?
    मंत्री के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य समुद्री जैव विविधता और मछलियों के प्रजनन चक्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रतिबंध के दौरान समुद्री प्रजातियों को अंडे देने और प्राकृतिक रूप से विकसित होने का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मॉनसून के दौरान तेज हवाएं, ऊंची लहरें, चक्रवात और खराब समुद्री मौसम के कारण मछुआरों की सुरक्षा भी इस निर्णय की प्रमुख वजह है।

    मछुआरों को मिलेगी आर्थिक राहत
    नितेश राणे ने कहा कि प्रतिबंध बढ़ने से मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। इसे देखते हुए सरकार ने प्रत्येक मछुआरे को 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी।

    मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए कई नई पहल
    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा प्रदान किया है, जिससे मछुआरों को किसानों की तरह विभिन्न सब्सिडी और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

    इसके अलावा मछली बीज (सीड) उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। जिला नियोजन समितियों को अपनी 5 प्रतिशत राशि मत्स्य पालन विकास पर खर्च करने की सलाह दी गई है। पहली बार आंतरिक (इनलैंड) मत्स्य पालकों को प्राकृतिक आपदाओं और अनियमित बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। तालाब आवंटन, समितियों के पंजीकरण और अन्य प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डिजिटल प्रणाली विकसित की जा रही है।

    मत्स्य बाजारों का होगा आधुनिकीकरण
    मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 1,240 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस धनराशि से आधुनिक मछली बाजार विकसित किए जाएंगे, जिससे मछुआरों को सीधे बाजार तक पहुंच मिलेगी और उपभोक्ताओं को ताजी मछली उपलब्ध कराई जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

  • तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    नई दिल्ली । कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सोमवार शाम मौसम ने बड़ी राहत दी। अचानक तेज हवाएं चलने के बाद राजधानी और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। लंबे समय से गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की और शाम के समय मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

    दिनभर तेज धूप और उमस के बाद शाम होते-होते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद तेज हवा चलने लगी और कई स्थानों पर बारिश शुरू हो गई। मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी का असर काफी कम हो गया। बारिश के चलते सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और कई इलाकों में लोगों ने खुले मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के कारण यातायात की रफ्तार भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी राजधानी में राहत का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या रात के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

    मंगलवार को अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह पश्चिमी दिशा से हवाएं लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़ सकती हैं। शाम और रात के दौरान हवा की रफ्तार कुछ कम होने का अनुमान है, लेकिन मौसम में नमी बनी रहेगी।

    बुधवार, 1 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह रहने की संभावना जताई गई है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है और हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जिससे मौसम और अधिक सुहावना बना रहेगा।

    एक जुलाई को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चलेंगी, जबकि दोपहर और शाम के दौरान पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा के कारण तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राजधानी और एनसीआर के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे न केवल तापमान नियंत्रित रहेगा बल्कि लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    नई दिल्ली: देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का वडोदरा-मुंबई सेक्शन 31 अगस्त 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय लगभग 8 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया गया है, ताकि एक्सप्रेसवे सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।

    करीब 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश का सबसे लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस परियोजना पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसका उद्देश्य दिल्ली और मुंबई के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना भी है।

    वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर का महाराष्ट्र वाला हिस्सा लगभग 157 किलोमीटर लंबा है, जिसका निर्माण करीब 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस सेक्शन को सात निर्माण पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें से पांच पैकेज का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष दो पैकेज अगस्त के अंत तक पूरे होने की उम्मीद है। इनके चालू होने के बाद इस पूरे सेक्शन पर निर्बाध यातायात संभव हो सकेगा।

    इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ माल ढुलाई क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद उत्तर भारत से आने वाला माल मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंचने के लिए भीड़भाड़ वाले मार्गों से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे परिवहन में लगने वाला समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से उत्तर और पश्चिम भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। तेज और आधुनिक परिवहन नेटवर्क देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करेगा।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का यह नया सेक्शन केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के सड़क परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक आधुनिक, तेज और किफायती बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    नई दिल्ली। हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की मौजूदगी में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस समझौते को जल प्रबंधन और सहकारी संघवाद की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

    समझौते के तहत मानसून के दौरान जुलाई से अक्टूबर के बीच हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को उसके हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के अनुसार लगभग 580 एमसीएम पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा, जिससे पानी की सुरक्षित और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

    सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इन इलाकों में इस परियोजना से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    समझौते में लागत साझा करने, वित्तीय जिम्मेदारियों, जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, रखरखाव और निगरानी तंत्र से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य में किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी तय की गई है। सरकार का दावा है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार यह मॉडल आने वाले वर्षों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगा।

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य आपसी सहयोग और संवाद की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने परियोजना को दोनों राज्यों के लिए लाभकारी बताते हुए इसे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पहुंचाना है, ताकि वर्ष 1994 के जल बंटवारा समझौते के तहत मिले पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके। इससे विशेष रूप से सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही यह मॉडल भविष्य में राज्यों के बीच जल प्रबंधन से जुड़े अन्य मामलों के समाधान के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है। सरकार का विश्वास है कि सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लाखों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा।

  • सरला भट मर्डर केस में 36 साल बाद चार्जशीट दाखिल, पांच आरोपी नामजद, गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों पर टिका पूरा मामला

    सरला भट मर्डर केस में 36 साल बाद चार्जशीट दाखिल, पांच आरोपी नामजद, गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों पर टिका पूरा मामला

    नई दिल्ली। वर्ष 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में 36 साल बाद महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति हुई है। जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल करते हुए अलगाववादी नेता यासीन मलिक को इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। एजेंसी का दावा है कि यह हत्या घाटी में भय का माहौल बनाने और कश्मीरी पंडित समुदाय को पलायन के लिए मजबूर करने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी।

    चार्जशीट के अनुसार, सरला भट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें लगातार नौकरी छोड़ने और घाटी से बाहर जाने की धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उन्होंने अपना कार्य जारी रखा। आरोप है कि 14 अप्रैल 1990 को उनका अपहरण किया गया और कुछ दिनों बाद उनका शव गोलियों से छलनी अवस्था में बरामद हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं बल्कि पूर्व नियोजित आतंकी वारदात थी।

    मामले में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें यासीन मलिक, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस, गुलाम मोहम्मद टपलू और खुर्शीद अहमद चाल्कू के नाम शामिल हैं। इनमें से तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चाल्कू को फरार बताया गया है। यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

    जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट को पहले झूठा पुलिस मुखबिर बताकर निशाना बनाया गया। चार्जशीट के अनुसार उनका अपहरण अस्पताल के पास से किया गया, जिसके बाद उन्हें कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और अंत में गोली मारकर हत्या कर दी गई। एजेंसी का कहना है कि पूरी वारदात एक संगठित आतंकी नेटवर्क के निर्देश पर अंजाम दी गई थी।

    चार्जशीट में कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान शामिल किए गए हैं। जांच के अनुसार, गवाहों ने अपहरण से पहले सरला भट को आरोपियों के साथ देखा था और बाद की घटनाओं का भी विस्तृत विवरण दिया है। कई स्वतंत्र गवाहों ने भी कथित आरोपियों की पहचान की है। इसके अलावा घटनास्थल और अपहरण के रास्ते से जुड़े दस्तावेज तथा पहचान संबंधी रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए गए हैं।

    मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट को भी अभियोजन पक्ष का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। जांच में सरला भट के शरीर पर कई गोली लगने के निशान, गंभीर चोटें और यातना के संकेत मिलने का उल्लेख किया गया है। बैलिस्टिक जांच में घटनास्थल से बरामद कारतूसों के एक ही हथियार से चलाए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया है, जिसे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी जोड़ा गया है।

    चार्जशीट में घटनास्थल से बरामद कथित संगठनात्मक दावा-पत्र, अस्पताल कर्मचारियों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी साक्ष्यों से यह मामला एक सुनियोजित आतंकी साजिश की ओर संकेत करता है। अब विशेष अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। साथ ही एजेंसी का मानना है कि इस जांच से उस दौर में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर की गई अन्य घटनाओं की जांच में भी नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में कानूनी लड़ाई तेज, आरोपी सिया के वकील ने कोर्ट से जताई उम्मीद, परिवार ने दूसरे वकील से किया किनारा

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में कानूनी लड़ाई तेज, आरोपी सिया के वकील ने कोर्ट से जताई उम्मीद, परिवार ने दूसरे वकील से किया किनारा

    नई दिल्ली। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और अब मामले का कानूनी पक्ष भी स्पष्ट होने लगा है। आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में पेश होने वाले अधिवक्ता ने कहा है कि मामला अभी शुरुआती चरण में है और जांच की दिशा को देखते हुए अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुलिस रिमांड से जुड़े मुद्दों पर अदालत में आवश्यक दलीलें प्रस्तुत की जाएंगी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब सिया गोयल के परिवार की ओर से एक अन्य अधिवक्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। सिया के भाई साहिल ने कहा कि जिस वकील के नाम की चर्चा की जा रही है, उन्हें परिवार ने नियुक्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से अधिकृत कानूनी प्रतिनिधित्व अलग अधिवक्ता कर रहे हैं और दूसरे व्यक्ति के दावों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    इस बीच सिया गोयल के भाई और उनके अधिवक्ता को पुलिस स्टेशन पहुंचते हुए भी देखा गया, जहां जांच से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। पुलिस पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों की जांच कर रही है तथा आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

    जांच के दौरान दर्ज एफआईआर से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। शिकायत के अनुसार, घटना से पहले के दिनों में सिया गोयल का व्यवहार बदला हुआ बताया गया है। परिवार का दावा है कि केतन अग्रवाल ने अपने परिजनों से बातचीत के दौरान बताया था कि दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर विवाद होने लगे थे और व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई दे रहा था।

    एफआईआर के अनुसार, घटना से एक दिन पहले सिया गोयल ने अपने जन्मदिन का हवाला देते हुए केतन अग्रवाल को यात्रा के लिए राजी किया था। अगले दिन दोनों निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लोहागढ़ किले की ओर रवाना हुए। आरोप है कि वहीं पर कथित रूप से एक सुनियोजित साजिश के तहत केतन अग्रवाल को ऊंची चट्टान से धक्का दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई।

    दस्तावेजों के मुताबिक, घटना के बाद सिया गोयल ने केतन अग्रवाल के परिवार को फोन कर उनके खाई में गिरने की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस अब घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अदालत में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर तथ्य का गहन परीक्षण कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सुना जाएगा और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी, “क्या बाद में सुनवाई होने से कोई आसमान टूट जाएगा”, सबसे अधिक चर्चा में रही। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी और किसी भी मामले में केवल आग्रह के आधार पर तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती।

    सोमवार को यह याचिका जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग की गंभीरता को देखते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की जाए और इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में कराई जाए। हालांकि पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अदालत के नियमित कामकाज शुरू होने के बाद इस मामले पर सुनवाई करना पर्याप्त होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह, 12 से 17 जुलाई के बीच सूचीबद्ध किया जाएगा।

    जनहित याचिका दो अधिवक्ताओं की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संरक्षण और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराने की मांग की है ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।

    इस बीच पुलिस की जांच लगातार जारी है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, से पूछताछ की जा सकती है। चंपत राय के ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं, हालांकि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।

    राम मंदिर दान विवाद उस समय सामने आया जब मंदिर के दान पात्र से नकदी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की, जिसमें कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने दान राशि की गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उनकी गिरफ्तारी भी की। जांच एजेंसियां अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने मामले की गंभीरता को नकारा नहीं है, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार किया है। अब इस जनहित याचिका पर नियमित सूची के अनुसार जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। उस दौरान अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों, जांच की स्थिति और याचिका में उठाए गए मुद्दों के आधार पर आगे किस प्रकार की न्यायिक कार्रवाई की जानी चाहिए।