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  • YouTube गेम का ऐसा चढ़ा खुमार कि घर छोड़कर निकल पड़े बच्चे, फार्महाउस के पास बनाया सीक्रेट ठिकाना

    YouTube गेम का ऐसा चढ़ा खुमार कि घर छोड़कर निकल पड़े बच्चे, फार्महाउस के पास बनाया सीक्रेट ठिकाना


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में बच्चों के बीच ऑनलाइन वीडियो और गेमिंग कंटेंट के बढ़ते असर का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो मासूम बच्चों ने YouTube पर सीक्रेट हाउस गेम से जुड़ा वीडियो देखा और उससे इतने प्रभावित हुए कि खुद भी 24 घंटे तक छिपे रहने का चैलेंज पूरा करने निकल पड़े। दोनों बच्चे अचानक घर से गायब हो गए तो परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और मिशन शक्ति की टीम ने तेजी से तलाश शुरू की और करीब दो घंटे के भीतर दोनों बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवार के हवाले कर दिया।

    यह मामला मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र का है। बताया गया कि बी ब्लॉक कॉलोनी में रहने वाले 11 और 7 साल के दो बच्चे रविवार दोपहर अचानक घर से निकल गए। शुरुआत में परिजनों को लगा कि दोनों बच्चे आसपास खेल रहे होंगे लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे तो चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने आसपास के घरों में पूछताछ की और रिश्तेदारों के यहां भी जानकारी जुटाई लेकिन बच्चों का कहीं पता नहीं चला। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

    पुलिस के लिए यह मामला गंभीर था क्योंकि दोनों बच्चे काफी कम उम्र के थे और उनके अचानक गायब होने से परिवार बेहद परेशान था। सूचना मिलते ही पुलिस ने बच्चों की तलाश शुरू की। मिशन शक्ति की टीम को भी खोजबीन में लगाया गया। लगातार तलाश के बाद टीम को दोनों बच्चे सुरक्षित मिल गए। पुलिस के अनुसार बच्चे किसी अनहोनी का शिकार नहीं हुए थे बल्कि उन्होंने खुद ही घर से निकलकर छिपने की योजना बनाई थी।

    पूछताछ में जो बात सामने आई उसने सभी को हैरान कर दिया। बच्चों ने बताया कि उन्होंने YouTube पर सीक्रेट हाउस गेम और 24 घंटे तक छिपे रहने से जुड़ा गेमिंग कंटेंट देखा था। वीडियो देखने के बाद उनके मन में भी ऐसा ही चैलेंज करने का विचार आया। दोनों ने तय किया कि वे घर से दूर जाकर अपना एक गुप्त ठिकाना बनाएंगे और 24 घंटे तक वहीं छिपे रहेंगे। इसी योजना के तहत दोनों घर से निकल पड़े।

    पुलिस के मुताबिक बच्चों ने एक फार्महाउस के पास सुनसान जगह को अपना ठिकाना बनाया था। उनका इरादा वहां 24 घंटे तक छिपे रहने का था ताकि वे वीडियो में देखे गए चैलेंज को पूरा कर सकें। बच्चों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके अचानक गायब होने से परिवार किस कदर परेशान हो जाएगा और उन्हें खोजने के लिए पुलिस तक को सक्रिय होना पड़ेगा।

    करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और मिशन शक्ति की टीम ने दोनों बच्चों को खोज निकाला। बच्चों के सुरक्षित मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। इसके बाद उन्हें परिवार के हवाले कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने भी बच्चों से बातचीत कर उन्हें समझाया कि इंटरनेट या वीडियो में दिखाई जाने वाली हर गतिविधि को वास्तविक जीवन में दोहराना सुरक्षित नहीं होता।

    यह घटना एक बार फिर बच्चों द्वारा मोबाइल और ऑनलाइन कंटेंट देखने पर निगरानी की जरूरत को सामने लाती है। इंटरनेट पर कई तरह के गेमिंग वीडियो और चैलेंज मौजूद हैं जिन्हें बच्चे मनोरंजन या खेल समझकर दोहराने की कोशिश कर सकते हैं। कम उम्र में बच्चे वीडियो में दिखने वाले खतरे और वास्तविक जीवन के जोखिम के बीच अंतर को पूरी तरह नहीं समझ पाते। ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के ऑनलाइन कंटेंट पर नजर रखें और उन्हें यह समझाएं कि किसी भी वायरल गेम या चैलेंज को बिना सोचे समझे आजमाना खतरनाक हो सकता है।

    मेरठ की यह घटना भले ही सुखद अंत तक पहुंच गई क्योंकि दोनों बच्चे समय रहते सुरक्षित मिल गए लेकिन इसने परिवारों के लिए एक बड़ा संदेश जरूर छोड़ा है। कुछ घंटों के एक ऑनलाइन वीडियो ने दो बच्चों को 24 घंटे तक घर से दूर छिपने की योजना बनाने के लिए प्रेरित कर दिया और परिवार की चिंता बढ़ा दी।

  • ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर दावा: अभिजीत दीपके बोले- CJI सूर्यकांत का इशारा सौरभ दास की ओर था

    ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर दावा: अभिजीत दीपके बोले- CJI सूर्यकांत का इशारा सौरभ दास की ओर था


    नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को लेकर अब नया दावा सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि CJI की यह टिप्पणी CJP प्रवक्ता और पत्रकार सौरभ दास के संदर्भ में थी। हालांकि, दास ने भी इस संभावना से इनकार नहीं किया और कहा कि उस समय कई वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उनसे संपर्क कर कहा था कि टिप्पणी शायद उन्हीं के लिए की गई है।

    एक इंटरव्यू के दौरान सौरभ दास ने अपने पत्रकारिता करियर और अदालतों से जुड़े लेखन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह कानून और खास तौर पर जजों से जुड़े मामलों पर लिखते हैं। इसी दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि CJI द्वारा इस्तेमाल किया गया ‘कॉकरोच’ शब्द सौरभ दास के लिए था।

    ‘उस समय सबसे ज्यादा यही लिख रहा था’

    दीपके ने कहा, ‘जो कॉकरोच शब्द यूज किया गया था, वह सौरभ के लिए किया गया था। यह ओजी कॉकरोच है, क्योंकि तब सबसे ज्यादा यही लिख रहा था।’

    इस पर सौरभ दास ने बताया कि उस समय कुछ वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उनसे संपर्क किया था। उनके मुताबिक, उन लोगों का कहना था कि CJI की टिप्पणी संभवतः उनके लिए थी।

    दास ने बताया कि उस दौरान वह कारवां मैगजीन के लिए CJI सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल लिख रहे थे। इससे पहले वह पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर भी प्रोफाइल लिख चुके थे। इसी सिलसिले में उन्होंने कुछ RTI आवेदन भी दाखिल किए थे।

    दास के मुताबिक, उसी समय CJI ने कहा था कि कुछ युवा लोग पेशे में नौकरी नहीं ढूंढ पाते और फिर मीडिया या RTI एक्टिविज्म की तरफ चले जाते हैं और सिस्टम पर हमला करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि ‘कॉकरोच’ टिप्पणी उन्हीं के लिए थी, तो उन्होंने कहा, ‘पता नहीं, हां हो सकता है।’

    युवाओं पर टिप्पणी को लेकर हुआ था विवाद

    दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। इसे कुछ जगहों पर देश के बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी के तौर पर प्रचारित किया गया। बाद में CJI ने अदालत में अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।

    CJI ने कहा था कि उन्होंने उन लोगों की आलोचना की थी, जो फर्जी या नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और उनकी तुलना ‘परजीवियों’ से की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की थी।

    CJI की टिप्पणी के बाद बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

    CJI की इसी ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को आधार बनाकर अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत की थी। टिप्पणी के बाद दीपके ने एक्स पर लिखा था- ‘क्या होगा यदि सारे कॉकरोच एकत्रित हो जाएं।’

    इस पोस्ट के वायरल होने के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। दावा किया गया कि इंस्टाग्राम पर महज चार दिन में करीब 2.5 करोड़ फॉलोअर हो गए। इसके बाद दीपके चर्चा में आए और अमेरिका से भारत लौटकर उन्होंने NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया।

  • फडणवीस की डिनर डिप्लोमेसी से सुलझी महायुति की गुत्थी, नेतृत्व बदलाव की अटकलें भी खारिज

    फडणवीस की डिनर डिप्लोमेसी से सुलझी महायुति की गुत्थी, नेतृत्व बदलाव की अटकलें भी खारिज


    मुंबई। महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सरकारी निगमों में नियुक्तियों को लेकर चल रहा गतिरोध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर सोमवार देर रात महायुति के तीनों प्रमुख दलों के नेताओं की बैठक हुई। डिनर के दौरान हुई इस बैठक में निगमों के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की चल रही अटकलों को भी बीजेपी ने खारिज कर दिया।

    विधायकों की संख्या के आधार पर निगमों का बंटवारा

    बैठक में तय हुआ कि सरकारी निगमों में हिस्सेदारी महायुति के घटक दलों की विधानसभा में संख्या के आधार पर होगी। गठबंधन में सबसे ज्यादा विधायक बीजेपी के हैं, इसलिए निगमों में उसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एनसीपी को हिस्सेदारी मिलेगी।

    सरकारी निगमों को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। ए कैटेगरी में सबसे महत्वपूर्ण निगम रखे जाएंगे। इनके अध्यक्षों और सदस्यों के नाम जल्द तय कर सरकार को भेजे जाएंगे।

    मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए हर मंगलवार बैठक होगी और सरकार का लक्ष्य एक महीने के भीतर सभी विवादों का समाधान करना है।

    नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर बीजेपी का जवाब

    बैठक के बाद बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को बड़ा जनादेश दिया है और 235 विधायक एनडीए सरकार के साथ हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का कोई आधार नहीं है।

    बावनकुले ने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष मुख्यमंत्री फडणवीस के मजबूत नेतृत्व से परेशान है।

    DPDC में भी हिस्सेदारी का फॉर्मूला

    बैठक में जिला योजना विकास समिति (DPDC) से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन क्षेत्रों में, जहां महायुति के अलग-अलग दलों के विधायक हैं, सत्ताधारी दलों के विधायकों को 60 प्रतिशत सदस्यों की नियुक्ति और फंड पर नियंत्रण मिलेगा। संबंधित पालक मंत्री को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाएगी, जबकि छोटे सहयोगी दलों के लिए 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रावधान होगा।

    तीनों दलों के प्रमुख नेता रहे मौजूद

    बैठक में बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रशेखर बावनकुले शामिल हुए। शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई और दादा भुसे मौजूद रहे। वहीं एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके ने बैठक में हिस्सा लिया।

    बैठक के बाद महायुति के भीतर चल रहे मतभेदों को कम करने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। अब निगाहें सरकारी निगमों में होने वाली नियुक्तियों पर हैं। सरकार जल्द ही इन नियुक्तियों की घोषणा कर सकती है।

  • भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति

    भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति


    नई दिल्ली ।
    भारत और भूटान के बीच लंबे समय से कायम मित्रता अब विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच पिछले एक वर्ष के दौरान आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है।

    भारत और भूटान के संबंध 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना पर आधारित हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है और भारत की विकास भागीदारी अब केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। इसे भूटान की दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

    हाल में हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के लिए भारत की ओर से घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई। इस सहयोग पैकेज का बड़ा हिस्सा प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है।

    इसमें 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत-भूटान सहयोग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विकास परियोजनाओं को भूटान की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्वामित्व मजबूत होने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। भारत की जेएसडब्ल्यू एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है। इसमें भूटानी कंपनी की 51 प्रतिशत और भारतीय कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा सक्रिय हुई है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाना है। इससे भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता विस्तार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देश सीमा क्षेत्र को केवल भौगोलिक संपर्क के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले के बीच नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है।

    इस मार्ग से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उपलब्ध होंगे।

    भारत-भूटान सहयोग का विस्तार डिजिटल और डाक सेवाओं तक भी हुआ है। गुवाहाटी में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पॉसट्रांसफर व्यवस्था को भारत की यूपीआई प्रणाली से जोड़ने की पहल शामिल है।

    रेल संपर्क भी भविष्य के सहयोग का अहम हिस्सा है। भूटान के पास अभी घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में भूटानी माल ढुलाई को तेज, कम लागत वाला और अधिक कुशल परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।

    इस तरह भारत और भूटान के रिश्ते अब पारंपरिक विकास सहायता से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क के साझा हितों पर आधारित व्यापक साझेदारी में बदल रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

  • एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    नई दिल्ली ।दिल्ली से पटना आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 1741 के साथ सोमवार सुबह लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना सामने आई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से पहले विमान के दाहिने हिस्से में एक पक्षी टकरा गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया।

    विमान ने सुबह करीब 7:43 बजे पटना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के जमीन पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल भवन तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। पायलट की तत्परता और समय पर लिए गए फैसले से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    लैंडिंग से पहले विमान के दाहिने इंजन के आसपास पक्षी के टकराने का पता चला। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डे के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी।

    किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास दमकल वाहनों और चिकित्सा दलों को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू की।

    ग्राउंड इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान के बाहरी हिस्से के साथ दोनों इंजनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बर्ड हिट की पुष्टि हुई। शुरुआती तकनीकी निरीक्षण में विमान के मुख्य इंजन और टरबाइन में किसी बड़े आंतरिक या संरचनात्मक नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

    सुरक्षा मानकों के तहत विमान की दोबारा उड़ान से पहले आवश्यक तकनीकी जांच और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विमान को उड़ान के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद आगे के संचालन की अनुमति दी गई। इस प्रक्रिया के कारण विमान के निर्धारित कार्यक्रम पर असर पड़ा।

    AI 1741/1852 विमान को पटना से दिल्ली के लिए सुबह 8:45 बजे रवाना होना था। हालांकि, बर्ड हिट के बाद की गई अनिवार्य सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण के चलते विमान को करीब डेढ़ घंटे की देरी से दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

    बर्ड स्ट्राइक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। पक्षी के इंजन या विमान के किसी महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने की स्थिति में तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में पायलट की सतर्कता के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं की तत्परता भी महत्वपूर्ण होती है।

    पटना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना में विमान को सुरक्षित उतारने के बाद यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचाया गया और तकनीकी जांच के जरिए विमान की उड़ान क्षमता सुनिश्चित की गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन सभी 164 यात्रियों के सुरक्षित रहने से बड़ी चिंता टल गई। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने निर्धारित मार्ग पर अपनी अगली उड़ान भरी।

  • संत रविदास के समानता और सामाजिक समरसता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, नितिन नवीन ने गिनाई प्राथमिकताएं

    संत रविदास के समानता और सामाजिक समरसता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, नितिन नवीन ने गिनाई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समरसता संकल्प अभियान के पावन माटी कलश वंदन एवं वितरण कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता और निष्काम कर्म के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को साथ लेकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लिया गया है।

    नितिन नवीन ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर पार्टी उनके विचारों और सामाजिक संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, समाज में समानता और आपसी सद्भाव की भावना को मजबूत करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी का भी उन्होंने स्वागत किया।

    उन्होंने बताया कि समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर की गई थी। अभियान के आरंभ से ही देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नवीन ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अभियान शुरू करने का उद्देश्य संत रविदास से जुड़े इस कार्यक्रम को गुरु परंपरा के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से आगे बढ़ाना था।

    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की परंपरा संतों और महापुरुषों के विचारों से समृद्ध रही है। उनके मुताबिक, जब समाज के सामने असमानता या कठिन परिस्थितियां आईं, तब संतों और महापुरुषों ने लोगों को सामाजिक एकता और सुधार का रास्ता दिखाया। उन्होंने संत रविदास के विचारों को इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    नितिन नवीन ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समय में सामाजिक समानता की बात की, जब समाज कई तरह की ऊंच-नीच और कुप्रथाओं से प्रभावित था। उनके विचारों ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने और समाज में समरसता की भावना मजबूत करने का काम किया। भाजपा इसी संदेश को अभियान के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सरकार की योजनाओं की भूमिका रही है।

    कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए नवीन ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई व्यक्ति भूखा न सोए। उन्होंने इसे सामाजिक सरोकार और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने की नीति से जोड़ा।

    नितिन नवीन ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल किसी एक वर्ग का विषय नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके मुताबिक, यही भावना विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगी।

    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी संत रविदास के आदर्शों और प्रधानमंत्री मोदी के विकास दृष्टिकोण को साथ लेकर सामाजिक एकता और देश के विकास की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को जोड़कर 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

  • पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम

    पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम


    नई दिल्ली ।
    तलाक के बाद पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते यानी एलिमनी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर महिला दोबारा शादी कर ले तो क्या पहले पति को पहले की तरह आर्थिक सहायता देते रहना होगा। भारतीय कानून में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं और दूसरी शादी के बाद पूर्व पति की जिम्मेदारी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    सामान्य कानूनी स्थिति यह है कि तलाकशुदा महिला के दोबारा विवाह करने के बाद पहले पति से मिलने वाला नियमित गुजारा भत्ता जारी रहने का आधार खत्म हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पुनर्विवाह के बाद महिला के भरण-पोषण की परिस्थितियां बदल जाती हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानून, अदालत के आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इसके तहत अदालत परिस्थितियों में बदलाव होने पर पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर सकती है। पत्नी के पुनर्विवाह को भी ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों में माना जा सकता है, जिसके आधार पर पूर्व पति अदालत से एलिमनी के आदेश में संशोधन या उसे समाप्त करने की मांग कर सकता है।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल दूसरी शादी की जानकारी सामने आते ही हर स्थिति में भुगतान अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा। यदि पहले पति के पक्ष में कोई एलिमनी आदेश मौजूद है, तो उसके प्रभाव और उसे बदलने की प्रक्रिया को संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार देखा जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को अपने स्तर पर भुगतान बंद करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो सकता है।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 144 भी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इस व्यवस्था में भी तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू कानूनी प्रावधान और न्यायालय के आदेश के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

    मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के मामलों में भी पुनर्विवाह का पहले पति से मिलने वाले भरण-पोषण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, व्यक्तिगत कानून और मामले की परिस्थितियों के कारण कानूनी स्थिति को हमेशा संबंधित प्रावधानों और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में समझना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भरण-पोषण को लेकर है। यदि तलाकशुदा पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी केवल मां की दूसरी शादी के कारण खत्म नहीं होती। बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी उनके जैविक पिता पर बनी रह सकती है।

    इसलिए पत्नी की दूसरी शादी और बच्चों के अधिकार को अलग-अलग कानूनी मुद्दों के रूप में देखा जाता है। पूर्व पत्नी को मिलने वाली एलिमनी पर पुनर्विवाह का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र विषय है।

    एलिमनी से जुड़े मामलों में आय, आर्थिक स्थिति, अदालत का पूर्व आदेश, पुनर्विवाह की स्थिति और बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कई तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मामले में केवल सामान्य नियम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून को देखना जरूरी है। यही वजह है कि एलिमनी बंद करने या बदलने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले ही साथ चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दे चुके हैं, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री ने विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर सपा और आप के बीच सीटों को लेकर सहमति बनती है तो कांग्रेस के सामने गठबंधन के भीतर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

    सियासी हलकों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए करीब 15 से 20 सीटें देने पर विचार कर सकती है। इस संभावना को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह के बीच हुई मुलाकातों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यूपी की चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।

    संजय सिंह और अखिलेश यादव की इसी साल अप्रैल में मुलाकात हुई थी। इसके बाद 23 अगस्त को भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर सकती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन के बीच आप को साथ लाने की कोशिश कांग्रेस के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि 2027 में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद है। ऐसे में दोनों दलों को एक ही गठबंधन में लाने का फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।

    इसके अलावा आम आदमी पार्टी के INDIA गठबंधन से दूरी बनाने वाले बयानों ने भी स्थिति को जटिल बनाया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आप की उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष चुनावी भूमिका नहीं रही थी। पार्टी ने यूपी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे और समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था।

    2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को कुल 3 लाख 47 हजार 187 वोट मिले थे। हालांकि उसका प्रदर्शन व्यापक रूप से प्रभावी नहीं रहा, लेकिन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उसे अपेक्षाकृत अधिक मत मिले थे। रुधौली में आप उम्मीदवार को 24,367 और खलीलाबाद में 25,123 वोट मिले थे।

    इसके अलावा लोनी, साहिबाबाद, नोएडा और मोहनलालगंज जैसे क्षेत्रों में भी पार्टी के उम्मीदवारों को पांच हजार से अधिक वोट मिले थे। यही कारण है कि आगामी चुनाव में आप इन क्षेत्रों को संभावित सीट दावेदारी के आधार के रूप में देख सकती है। यदि सपा इन क्षेत्रों में आप को जगह देती है तो सीट बंटवारे की प्रक्रिया में कांग्रेस की भूमिका और रणनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी।

    2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था। चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता भी की थी। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था।

    ऐसे में उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और आप के संभावित समीकरण को लेकर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। यदि आप की गठबंधन में औपचारिक एंट्री होती है तो सीटों के बंटवारे के साथ-साथ तीनों दलों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और चुनावी रणनीति को लेकर भी बातचीत करनी होगी। फिलहाल सपा और आप के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने यूपी की विपक्षी राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

  • प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज

    प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ की गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग का मामला सामने आया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस मामले में तीन बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन को पहले ही कुर्क किया जा चुका था और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय थी।

    मामला एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के शाहा उर्फ पीपल गांव से जुड़ा है। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आराजी संख्या 1115 की करीब 0.4680 हेक्टेयर जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई थी। इस जमीन को सरकारी अभिरक्षा में रखा गया था और संबंधित थाना प्रभारी को इसका कस्टोडियन बनाया गया था।

    आरोप है कि मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद नसरत और मोहम्मद आफताब अहमद ने इस जमीन पर कब्जा कर वहां अवैध तरीके से प्लाटिंग शुरू कर दी। आरोप यह भी है कि जमीन को प्लॉट के रूप में विकसित कर उसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। तीनों को अतीक अहमद के कथित फाइनेंसर के तौर पर भी बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    प्रशासन को जब जमीन पर कथित कब्जे और प्लाटिंग की जानकारी मिली तो अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। 22 अगस्त को एसडीएम सदर की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई और जमीन पर की गई कथित अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

    सोमवार को लेखपाल मनीष कुमार की ओर से तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कुर्क जमीन पर कब्जा किस तरह किया गया और वहां प्लाटिंग की गतिविधियां कब से चल रही थीं।

    इस घटना ने कुर्क संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले से कुर्क थी और उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदारी निर्धारित थी, तब कथित तौर पर वहां निर्माण और प्लाटिंग की गतिविधियां कैसे शुरू हुईं, यह जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन यह भी देखेगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों और बिक्री की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

    मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन का ध्यान जमीन की स्थिति, कथित कब्जे और प्लाटिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच पर है।

    अतीक अहमद और अशरफ की हत्या 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में उस समय हुई थी, जब दोनों को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। दोनों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनकी कई संपत्तियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। ऐसे में कुर्क जमीन पर कथित कब्जे का यह मामला प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कुर्क संपत्ति पर कब्जा और प्लाटिंग किस अवधि में हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और जमीन से संबंधित गतिविधियों को रोकने में प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई या नहीं। फिलहाल तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को लखनऊ स्थित अपने पुराने विद्यालय कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे। कभी जिस संस्थान में उन्होंने विद्यार्थी के रूप में शिक्षा हासिल की थी, वहीं लौटकर उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उनका अंदाज शिक्षक जैसा रहा और उन्होंने छात्रों को लोकतंत्र, चुनाव, मताधिकार तथा जिम्मेदार नागरिकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान हासिल करने की जगह नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उनके अनुसार, अच्छे शिक्षक, अनुशासन और विद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अपने जीवन में विद्यालय से मिली सीख को भी याद किया।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में शामिल होता है। इसी दौरान व्यक्ति के विचार, व्यवहार और भविष्य की दिशा तय होने लगती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों और विद्यालय में मिलने वाले अनुभवों को गंभीरता से लें और उनसे सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें।

    विद्यार्थियों के साथ बातचीत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी का माध्यम भी है। जागरूक और जिम्मेदार मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों को मताधिकार से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आने वाले वर्षों में पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंचेंगे। ऐसे में उनके लिए अभी से चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करना उपयोगी होगा।

    संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने अपने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका पुराना और गहरा संबंध रहा है। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया और अब लंबे अंतराल के बाद उसी विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच लौटना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।

    उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जीवन के अलग-अलग चरण व्यक्ति को अलग-अलग अनुभव देते हैं। वर्तमान समय उनके लिए सीखने और अपने भविष्य की नींव मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से मिलने वाली शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों का सामना करने का साहस और सही विचारों को अपनाने की क्षमता भी विकसित करती है।

    इस मुलाकात को ज्ञानेश कुमार ने अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसा अनुभव बताया। एक समय वह स्वयं इसी विद्यालय के विद्यार्थी थे और अब उसी परिसर में विद्यार्थियों को लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में बता रहे थे। कार्यक्रम में चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुख रहा। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए युवा विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने की यह पहल विशेष महत्व रखती है।