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  • दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा बोरा का इनकार, 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने से किया मना

    दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा बोरा का इनकार, 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने से किया मना

    नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार देने से इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट से उनकी याचिका खारिज होने के बाद भी उन्होंने अपना रुख नहीं बदला। नेहा बोरा ने स्पष्ट कहा कि उनकी ओर से कोई शर्त नहीं रखी गई है और वह बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने नहीं जा रही हैं। यह मामला दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की ओर से जारी नोटिस से जुड़ा है।

    मामले की शुरुआत 16 अक्टूबर को हुई थी, जब दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में विरोध प्रदर्शन और ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के सिलसिले में पुलिस ने नेहा बोरा को हिरासत में लिया था। इसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की संबंधित धाराओं के तहत जांच के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया था।

    नेहा बोरा ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि नोटिस अस्पष्ट है और इसमें तथ्यात्मक गलतियां हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से शांति भंग होने की कोई आशंका नहीं थी। ऐसे में बॉन्ड भरने का निर्देश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने अदालत से नोटिस में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

    हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस याचिका को खारिज कर दिया और पुलिस की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध थी। अदालत के अनुसार, जारी किया गया नोटिस कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप था और इसे केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जारी नहीं किया गया था।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर हाईकोर्ट विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की जगह लेकर उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनकी संतुष्टि का दोबारा आकलन नहीं कर सकता। मामले में उपलब्ध सामग्री में नेहा बोरा का उल्लेख करने वाली छह प्राथमिकी, विभिन्न स्थानों पर हुई घटनाओं से संबंधित सामान्य डायरी की प्रविष्टियां और मंडी हाउस क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी शामिल थी। अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

    हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद नेहा बोरा ने बॉन्ड भरने से साफ मना कर दिया है। उनका कहना है कि वह इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। इस तरह मामला अब अदालत के फैसले के बाद भी उनके रुख को लेकर चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बॉन्ड भरने से इनकार करने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई के संबंध में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

    यह मामला शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को सामने लाता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जबकि नेहा बोरा ने 10,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानतदार देने से इनकार करने का अपना रुख कायम रखा है।

  • दिसंबर में फिर बढ़ सकता है रेपो रेट, 50 बेसिस प्वाइंट तक इजाफे का अनुमान

    दिसंबर में फिर बढ़ सकता है रेपो रेट, 50 बेसिस प्वाइंट तक इजाफे का अनुमान


    नई दिल्ली। महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, अगली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दर में 50 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी संभव है। अक्टूबर की एमपीसी बैठक के मिनट्स से केंद्रीय बैंक का रुख पहले के मुकाबले अधिक सख्त नजर आया है। बढ़ती महंगाई और रुपये पर दबाव को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दिसंबर की एमपीसी बैठक में 50 बेसिस प्वाइंट तक नीतिगत बदलाव की संभावना जताई गई है। यह बदलाव सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के रूप में हो सकता है। दूसरा विकल्प रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) कॉरिडोर में 25 बेसिस प्वाइंट के समायोजन का है।

    एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ रहा है और रुपये में कमजोरी बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई को हालात पर करीबी नजर रखते हुए संतुलित नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।

    नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद

    डॉ. घोष ने कहा कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई की सतर्क निगरानी जरूरी है।

    डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव के मुताबिक, अक्टूबर की एमपीसी बैठक के बाद आरबीआई का सख्त रुख स्पष्ट हुआ है। बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई और नीतिगत रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला गया। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने महंगाई के बढ़ते दबाव और मजबूत आर्थिक वृद्धि को ब्याज दर बढ़ाने के प्रमुख कारणों के रूप में देखा।

    महंगाई के जोखिम पर पहले से कदम उठाने पर जोर

    महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए समय रहते कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। हालांकि, कुछ सदस्य रेपो रेट में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के पक्ष में रहे और लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति के संकेत देने से बचते दिखाई दिए।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि महंगाई का दबाव अधिक व्यापक रूप लेता दिख रहा है। राधिका राव के अनुसार, यदि चालू कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई दर करीब 6 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो दिसंबर में ब्याज दर में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।

    विदेशी मुद्रा बाजार के उपायों से रुपये को सहारा

    बाजार में बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े उपायों के बाद रुपये में मजबूती आई है। इन कदमों के असर से इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया करीब डेढ़ प्रतिशत मजबूत हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम अब भी चुनौती बने हुए हैं।

    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में विदेशी निवेश बढ़ने से भी रुपये को सहारा मिला है। फिलहाल रुपया बाहरी घटनाक्रमों पर सीमित प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

  • यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद

    यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के उद्देश्य से दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है लेकिन उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस उन सीटों और उम्मीदवारों का स्पष्ट ब्योरा दे जहां उसकी जीत की संभावना सबसे अधिक है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन की बातचीत के दौरान उम्मीदवारों के नामों की सूची साझा करना जरूरी नहीं है। इसी मुद्दे पर दोनों दलों के बीच मतभेद गहराने की खबरें सामने आ रही हैं।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इस सूची को लेकर समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है। सपा के भीतर यह चिंता है कि कांग्रेस को अधिक सीटें देने से गठबंधन की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। उनके इस बयान ने सीट बंटवारे की चर्चा को और गर्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में इतनी अधिक सीटों पर दावा करना गठबंधन के भीतर बातचीत को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस का मानना है कि उसके पास ऐसे उम्मीदवार हैं जो कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। पार्टी का कहना है कि सीटों का चयन केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि उनकी चुनावी स्थिति और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    रिपोर्ट के मुताबिक 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय पार्टी के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी वाड्रा के सामने उम्मीदवारों और सीटों की सूची का मुद्दा उठाया था। बताया जाता है कि प्रियंका गांधी ने इस पर सूची साझा करने का आश्वासन दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 180 सीटों की सूची को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह सूची बातचीत शुरू करने का एक आधार है और दोनों दल आपसी सहमति से सीटों की संख्या तय कर सकते हैं। चर्चा के दौरान 80 से 90 सीटों पर भी समझौते की संभावना का जिक्र किए जाने की बात सामने आई है।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने आंतरिक सर्वे के आधार पर सीटों को चार श्रेणियों में बांटा है। इसका उद्देश्य उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करना है जहां पार्टी की स्थिति मजबूत है और जहां जीत की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस अपने संभावित उम्मीदवारों की जानकारी देकर गठबंधन की रणनीति को स्पष्ट करे। सपा नेताओं की चिंता है कि कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से विपक्षी वोटों का नुकसान हो सकता है और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

    गौरतलब है कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था और 40 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई थी। हालांकि पार्टी को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी। इसी पिछले प्रदर्शन को देखते हुए सीटों के बंटवारे में कांग्रेस की चुनावी ताकत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की है जिससे सीटों पर सहमति भी बने और भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की एकजुटता भी कायम रहे। फिलहाल उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या पर जारी मतभेद के कारण बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
  • भारत का बड़ा लक्ष्य…. 5 साल में 30 मिलियन टन मछली उत्पादन, 1.25 लाख करोड़ के निर्यात की तैयारी

    भारत का बड़ा लक्ष्य…. 5 साल में 30 मिलियन टन मछली उत्पादन, 1.25 लाख करोड़ के निर्यात की तैयारी


    भोपाल।
    भारत (India) ने मत्स्य पालन (Fisheries) को लेकर बड़ा लक्ष्य (Big Target) रखा है. अगले पांच वर्षों पर फोकस किया गया है. मछली उत्पादन (Fish Production) बढ़ाने की तैयारी है. इसे 30 मिलियन टन तक पहुंचाना है. सीफूड निर्यात बढ़ाने का भी लक्ष्य है. इसे 1.25 लाख करोड़ तक पहुंचाना है. इसके लिए राष्ट्रीय कार्य योजना बनेगी. इसके विकास की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    यह योजना छोटे मछुआरों पर केंद्रित होगी. खासकर अंतर्देशीय मत्स्य पालन पर फोकस रहेगा. मछुआरों की आजीविका सुधारने पर जोर होगा. उनकी आय बढ़ाने के प्रयास भी होंगे।


    अभी 19.7 मिलियन टन उत्पादन

    भारत का मछली उत्पादन लगातार बढ़ा है. अभी सालाना उत्पादन 19.7 मिलियन टन है. इसका बड़ा हिस्सा अंतर्देशीय क्षेत्र से आता है. करीब तीन-चौथाई उत्पादन इसी क्षेत्र से है. इसमें नदियों और जलाशयों की बड़ी भूमिका है. तालाब और झीलें भी शामिल हैं. भारत का सीफूड निर्यात भी बढ़ा है. यह 70 हजार करोड़ रुपये पार है. अब इसे और बढ़ाने की तैयारी है।


    नेशनल एक्शन प्लान पर काम शुरू

    केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने पहल शुरू की है. नेशनल प्लान ऑफ एक्शन तैयार होगा. इसे NPOA नाम दिया गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने शुरुआत की. उन्होंने योजना के विकास चरण को लॉन्च किया. इसमें कई क्षेत्रों पर काम होगा. मछुआरों की आजीविका बेहतर करना प्राथमिकता है. वैल्यू चेन भी मजबूत की जाएगी. मीठे पानी के संसाधनों पर ध्यान रहेगा. इनके बेहतर प्रबंधन की योजना बनेगी।


    छोटे मछुआरों तक पहुंचे योजना

    डॉ. लिखी ने आउटरीच पर जोर दिया. उन्होंने मिशन मोड में काम मांगा है. योजना की जानकारी मछुआरों तक पहुंचाई जाएगी. उनका कहना है कि योजना व्यावहारिक होनी चाहिए. यह सिर्फ सरकारी कार्यालयों तक सीमित न रहे. इसका फायदा मछुआरा समुदायों को मिलना चाहिए. मछुआरों की आय बढ़ाने पर भी जोर है. इसके लिए वैल्यू चेन मजबूत होगी. बाजार तक पहुंच सुधारने पर काम होगा।


    जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती

    – अंतर्देशीय मत्स्य पालन के सामने चुनौतियां भी हैं. जलवायु परिवर्तन इनमें प्रमुख है. पानी की क्वालिटी भी चिंता का विषय है.
    – जलाशयों में ऑक्सीजन कम होना चुनौती है. इसका असर मछलियों पर पड़ सकता है. इसलिए क्लाइमेट रेजिलिएंस पर जोर रहेगा.
    – स्थानीय मछुआरों के अनुभव भी लिए जाएंगे. वे इन समस्याओं का सीधे सामना करते हैं. उनके अनुभव योजना बनाने में मदद करेंगे.


    नदी से तालाब तक होगा फोकस

    – प्रस्तावित योजना का दायरा काफी बड़ा है. इसमें नदियों का मत्स्य पालन शामिल होगा. नहरों को भी योजना में रखा गया है.
    – जलाशयों और झीलों पर भी फोकस होगा. बाढ़ वाले आर्द्रभूमि क्षेत्र भी शामिल होंगे. तालाबों को भी योजना में जगह मिलेगी. ठंडे पानी वाले तंत्र भी शामिल होंगे.
    – अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतें अलग हैं. इसलिए स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान दिया जाएगा. क्षेत्र के हिसाब से रणनीति बनाई जाएगी.


    FAO के ढांचे में बनेगी योजना

    – यह योजना अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत बनेगी. संयुक्त राष्ट्र का FAO इसमें शामिल है. केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग इसका नेतृत्व करेगा.
    – बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम भी सहयोग करेगा. BOBP-IGO योजना तैयार करने में मदद करेगा.

    BOBP-IGO के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने जानकारी दी. उनके मुताबिक, कई मुद्दों पर फोकस रहेगा. मछली पकड़ने के अधिकार पर ध्यान होगा. संसाधनों का प्रबंधन भी अहम रहेगा. रोजगार और सम्मानजनक काम पर फोकस होगा. लैंगिक समानता को भी जगह मिलेगी.


    वैल्यू चेन मजबूत करने की तैयारी

    – मछली उत्पादन के बाद का कारोबार अहम है. इसलिए वैल्यू चेन पर काम किया जाएगा. पोस्ट-हार्वेस्ट व्यापार भी योजना में शामिल है.
    – आपदा जोखिम पर भी ध्यान दिया जाएगा. जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय होंगे. छोटे मछुआरों के हितों को प्राथमिकता मिलेगी.

    योजना अभी विकास के चरण में है. स्टेकहोल्डर्स से इस पर चर्चा होगी. उनके सुझाव भी योजना में शामिल होंगे. इसके बाद अंतिम दस्तावेज तैयार किया जाएगा. अगले महीने इसे सार्वजनिक करने की तैयारी है. इसके बाद योजना को लागू किया जाएगा.

  • जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद नदवी हिरासत में

    जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद नदवी हिरासत में


    नई दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में अब विपक्षी नेताओं की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी छात्रों के समर्थन में पहुंचे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। नदवी ने पुलिस पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

    यूनिवर्सिटी परिसर में हाल ही में दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विवाद बढ़ गया था। इन नारों को लेकर परिसर से लेकर बाहर तक तनाव का माहौल है। प्रशासन ने विवादित नारों को केमिकल की मदद से मिटा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इमरान मसूद बोले- कश्मीर भारत का अभिन्न अंग

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ‘आजतक’ से बातचीत में कहा कि वह यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे किसी भी विवादित पोस्टर या नारे का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन प्रशासन छात्र संघ की बहाली क्यों नहीं कर रहा है?”

    मसूद छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को समर्थन देने पहुंचे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

    नदवी ने लगाया धक्का-मुक्की का आरोप

    समाजवादी पार्टी के रामपुर से सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भी छात्रों से मिलने जाते समय रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया। नदवी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की।

    नदवी ने कहा कि जामिया के पूर्व छात्र होने के नाते विद्यार्थियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना उनका फर्ज है। हालांकि, हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

    CCTV के तार काटने का भी दावा

    यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, जिन जगहों पर विवादित नारे लिखे गए थे, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के तार काटे गए थे। प्रशासन ने नारों को मिटा दिया है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।

    विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने जामिया की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। इलाके में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की जांच और पूछताछ के बाद ही लोगों को यूनिवर्सिटी की ओर जाने दिया जा रहा है।

    12 अक्टूबर से जारी है छात्र संघ चुनाव की मांग

    जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। इस दौरान छात्राओं ने भी एकजुट होकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि जब तक चुनाव का शेड्यूल जारी नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

    वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई है। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र जल्द से जल्द चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

  • पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ करार दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेता को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश करती है, लेकिन इसके लिए देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटती। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका, संसद की कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि जब दुनिया नई वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, उस समय कुछ लोग भारत में अव्यवस्था की स्थिति पैदा करने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सामने एक मजबूत और स्थिर भारत की तस्वीर प्रस्तुत की जानी चाहिए, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं और बाहरी हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

    राहुल गांधी पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक साल में श्रीहरिकोटा से जितने रॉकेट प्रक्षेपित नहीं होते, उससे अधिक बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती है। उनके इस बयान को राहुल गांधी को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने के प्रयासों पर कटाक्ष के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी आखिर कब तक अपने नेता को आगे बढ़ाने के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।

    प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को आशंका है कि यदि संसद में दूसरे नेताओं को पर्याप्त अवसर मिला, तो वे भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस अपने राजनीतिक मंच पर केवल एक नेता को प्रमुखता देना चाहती है। उन्होंने इसे विपक्ष के युवा सांसदों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से पार्टी के भीतर अन्य नेताओं को अपनी क्षमता दिखाने के अवसर सीमित हो सकते हैं।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को ‘परजीवी’ भी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए लगातार अपने नेतृत्व को केंद्र में रखती है। हालांकि, ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थीं और इनके जरिए उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री के बयान के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की तुलना ऐसी मछली से की, जो सत्ता से बाहर रहने पर पानी के बिना तड़पती है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस का रवैया लूट-खसोट और समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाला रहा है। उन्होंने पार्टी पर भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने का आरोप भी लगाया।

    त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक रिकॉर्ड उपलब्धियों से जुड़ा है, जबकि राहुल गांधी का रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए समस्याएं पैदा करने वाला रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ देश के संवैधानिक ढांचे को भी जोखिम में डाल दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को देश और उनकी अपनी पार्टी, दोनों के लिए पहेली बताया।

    प्रधानमंत्री मोदी और सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणियों से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री का ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाला तंज और विदेशों में भारत की छवि को लेकर लगाए गए आरोप इस राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, इन बयानों के जवाब में कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

  • पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा से जुड़े शांति बॉन्ड का मामला दिल्ली में चर्चा का विषय बना हुआ है। नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई के लिए ठोस आधार नहीं दिया गया और इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसी निवारक कार्रवाई जरूरी हो सकती है। इस विवाद के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीस बॉन्ड क्या होता है, इसे भरने का आदेश किन परिस्थितियों में दिया जा सकता है और इसका पालन नहीं करने पर क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

    पीस बॉन्ड को सामान्य तौर पर शांति बनाए रखने का कानूनी आश्वासन माना जाता है। यह अपने आप में किसी अपराध की सजा नहीं है, बल्कि भविष्य में शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की जाने वाली निवारक कार्रवाई है। इसमें संबंधित व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने का वचन देना पड़ सकता है। आदेश के अनुसार बॉन्ड की राशि तय की जाती है और कुछ मामलों में जमानतदार की आवश्यकता भी हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या को पहले ही रोकना है।

    इस प्रक्रिया का प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में है। पहले इसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 में था। अब BNSS की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है, जिसके बारे में शांति भंग करने की आशंका से जुड़ी सूचना मिली हो। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    BNSS की धारा 130 के तहत मजिस्ट्रेट को प्रारंभिक आदेश में सूचना का सार, बॉन्ड की राशि, उसकी अवधि और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने होते हैं। इसके बाद धारा 135 के तहत जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जांच के दौरान कुछ परिस्थितियों में अंतरिम बॉन्ड भरने का आदेश भी दिया जा सकता है। यदि संबंधित व्यक्ति आदेश का पालन नहीं करता, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उसकी हिरासत का प्रश्न उठ सकता है। जांच पूरी होने पर धारा 136 के तहत अंतिम आदेश जारी किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई की वैधता संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

    नेहा बोरा को यह नोटिस अक्टूबर में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम के बाद मिला था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं और अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद उन्हें BNSS की धारा 126, 130 और 135(3) के तहत नोटिस जारी किया गया। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था।

    नेहा की याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस में आरोपों को साबित करने वाली पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई। उनके अनुसार, इसमें किसी विशेष घटना और उसकी अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कनॉट प्लेस जाने के लिए उकसाने से जुड़े आरोपों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।

    पीस बॉन्ड नहीं भरने के कानूनी परिणाम भी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। यदि जांच के बाद मजिस्ट्रेट वैध अंतिम आदेश जारी करता है और संबंधित व्यक्ति निर्धारित बॉन्ड नहीं भरता, तो BNSS की धारा 141 के तहत उसे हिरासत में रखने या जेल भेजने की स्थिति बन सकती है। कानून के तहत साधारण कारावास की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक हो सकती है। यह परिणाम केवल बॉन्ड भरने से शुरुआती इनकार के आधार पर स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आदेश पर निर्भर करता है।

    वहीं, बॉन्ड भरने के बाद उसकी शर्तों का उल्लंघन साबित होने पर भी कार्रवाई हो सकती है। परिस्थितियों के अनुसार बॉन्ड की राशि जब्त की जा सकती है और कानून के तहत हिरासत या कारावास से जुड़े आदेश दिए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित आदेश और लागू कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस विवाद में एक अन्य घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर पीस बॉन्ड भरा था। इसके विपरीत, नेहा बोरा के वकीलों ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का रुख रखा। अब मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या शांति भंग होने की आशंका के आधार पर जारी नोटिस पर्याप्त तथ्यों पर आधारित था और क्या संबंधित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला इस विवाद में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

  • आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    अमरावती। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 100 शहरी निकायों में जारी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं, आयोग अब गुरुवार को इस पर फैसला करेगा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं।

    मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। गठबंधन नेताओं ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने रोकी प्रक्रिया

    शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद वाईएसआरसीपी की याचिका के बाद बढ़ा। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने राज्य के सभी 100 शहरी निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया रोक दी।

    अब आयोग को यह तय करना है कि जिन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए या नहीं। इस निर्णय पर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों की नजर बनी हुई है।

    एनडीए का आरोप, चुनाव रोकने की कोशिश कर रही YSRCP

    चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और पीवीएन माधव ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बयान में कहा गया, “हमने 2024 का चुनाव आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के वादे के साथ लड़ा था। लोगों ने हम पर भरोसा किया और गठबंधन को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी। पिछले दो वर्षों में हमने कल्याण, विकास और सुशासन पर ध्यान दिया है। हमने लोगों का विश्वास बहाल किया है।”

    एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शुरुआत से ही स्थानीय निकाय चुनावों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का तत्काल कारण सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। विपक्ष पर लगाए गए साजिश के आरोप एनडीए नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

    स्थानीय निकायों के चुनाव को विकास के लिए बताया जरूरी

    एनडीए नेताओं ने कहा कि मजबूत स्थानीय निकाय राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, समय पर चुनाव होने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और 16वें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि से जुड़े प्रावधानों के लिहाज से भी चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

    गठबंधन का कहना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

    पिछली सरकार के चुनावों को लेकर भी उठाए सवाल

    एनडीए नेताओं ने वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में हिंसा और धमकियों के कारण भय का माहौल बना था तथा विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    बयान में गठबंधन नेताओं ने कहा कि वाईएसआरसीपी ने उस समय चुनावी जीत का जश्न मनाया, जबकि अब कानून के अनुसार चुनाव कराने की प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    एनडीए में शामिल टीडीपी, जनसेना और भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में सहयोग देने की बात कही है।

    आयोग के अगले फैसले पर टिकी निगाहें

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक के बाद अब राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले का इंतजार है। खास तौर पर उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

    आयोग का निर्णय आगे की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। फिलहाल इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान जारी, उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत वोटिंग

    चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान जारी, उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत वोटिंग

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान जारी है। इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चारों राज्यों में हो रहे इस चुनाव को राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम संबंधित क्षेत्रों में उनके संगठनात्मक प्रभाव और मतदाताओं के समर्थन का संकेत दे सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान कराया जा रहा है। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम चार बजे तक चलेगा। औरैया, हरदोई, जालौन, चित्रकूट और गौतमबुद्ध नगर सहित राज्य के 72 जिलों में मतदान की व्यवस्था की गई है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख है। कुछ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश की सीटों में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर विशेष ध्यान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र से जुड़ी इस सीट पर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत सक्रियता बढ़ाई है। वहीं समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी की ओर से मानदेय, पुरानी पेंशन योजना और सेवा सुरक्षा जैसे विषय उठाए गए हैं। स्थानीय असंतोष और बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।

    बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। पटना स्नातक सीट पर राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर है। यहां जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी नीरज कुमार के मुकाबले को लेकर चर्चा है। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, विधायक अनंत सिंह द्वारा जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से चुनावी माहौल प्रभावित हुआ है।

    महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें औरंगाबाद, पुणे और नागपुर के तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा अमरावती और पुणे के दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। राज्य में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार मैदान में हैं और दस लाख से अधिक मतदाता मतदान के पात्र हैं।

    कर्नाटक में चार सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। इनमें कर्नाटक दक्षिण-पूर्व और कर्नाटक पश्चिम के दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा कर्नाटक उत्तर-पूर्व और बेंगलुरु के दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। यहां सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    चारों राज्यों में मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जा रहा है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता वरीयता क्रम के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करते हैं। मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन और कैमरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में समाजवादी पार्टी ने प्रशासनिक पक्षपात की आशंका जताई है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    मतदान पूरा होने के बाद मतपेटियों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और चारों राज्यों की संबंधित सीटों के परिणाम घोषित किए जाएंगे। नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच किस दल और उम्मीदवार को कितना समर्थन मिला है।

  • अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई सीमावर्ती स्थानों पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी है। इनमें से कुछ स्थानों पर ऐसी परिस्थितियां अब भी जारी हैं। उन्होंने बल के जवानों को संबोधित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात ‘शौर्य कमांडो’ टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।

    यह जानकारी आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ के दौरान सामने आई। कपूर ने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इन स्थितियों में तैनात शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सतर्कता बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए बल अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

    आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त दो और टीमें गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। दीर्घकालिक लक्ष्य हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके साथ ही विशेष अभियानों के संचालन के लिए एक अलग कमांडो बटालियन बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन इकाइयों को विशेष रूप से पहाड़ी और अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां मौसम, भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित पहुंच जवानों के सामने चुनौतियां पैदा करती हैं।

    सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आईटीबीपी आधुनिक तकनीक पर भी ध्यान दे रही है। कपूर ने कहा कि ड्रोन ने युद्ध के पारंपरिक तरीकों में बदलाव किया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अन्य उन्नत तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए बल ड्रोन संचालन, पायलटों के प्रशिक्षण और ड्रोन निर्माण की अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

    ड्रोन के साथ-साथ एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और इस्तेमाल की तैयारी भी की जा रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। बल की आधुनिकीकरण योजना में ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा वाहनों, उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में तेजी से आवाजाही और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष वाहनों, स्वचालित जमीनी वाहनों और क्विक रिएक्शन व्हीकल को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तैयारी है। इन कदमों का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर जवानों और उपकरणों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाना है।

    भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर सैन्य स्तर पर बातचीत भी जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सीमा पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में गश्त के दौरान आमने-सामने की स्थिति बनती रही है।

    आईटीबीपी प्रमुख का बयान बताता है कि सीमा पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ बल अपनी विशेष इकाइयों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में जिन स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है, उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।