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  • Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम

    Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम


    पुरी।
    भगवान जगन्‍नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा (Rath Yatra) से पहले एक महत्‍वपूर्ण अनुष्‍ठान किया जाता है, जिसे स्‍नान यात्रा कहा जाता है. ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा (Jagannath Snana Purnima) के दिन महाप्रभु जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा का विशेष स्‍नान होता है, जिस कारण इस दिन को स्‍नान पूर्णिमा और इस परंपरा को स्‍नान यात्रा कहा जाता है।

    साल 2026 में स्‍नान यात्रा आज 29 जून 2026, सोमवार को है. वहीं रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी. रथ यात्रा से पहले भगवान का सुन कुएं के पवित्र जल से स्‍नान होता है. इसके बाद वे 15 दिनों के बीमार पड़ते हैं और आराम के लिए एकांतवास में चले जाते हैं।


    108 स्‍वर्ण कलशों से भगवान का स्‍नान

    स्‍नान यात्रा उत्‍सव मशहूर रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. यह जल एक खास पवित्र कुएं का होता है, जिसे साल में एक बार ही खोला जाता है. इस जल में खास जड़ी-बूटियां, इत्र आदि मिलाकर 3 देवी-देवताओं का स्‍नान कराया जाता है।

    भगवान का विशेष श्रृंगार होता है. भगवान जगन्‍नाथ गजवेश धारण करते हैं. यानी कि उनका मुख गजानन के रूप में सजाया जाता है. इससे जुड़ी एक कथा है कि भगवान गणेश के एक भक्‍त ने जब जगन्‍नाथ भगवान के दर्शन करने की इच्‍छा की तो उसे भगवान जगन्‍नाथ ने गजानन रूप में दर्शन दिए थे. आज भी उसी परंपरा का पालन करते हुए हर साल स्‍नान यात्रा के दिन भगवान गज वेश धारण करते हैं।


    15 दिन नहीं होंगे दर्शन

    इस महास्‍नान के बाद महाप्रभु जगन्‍नाथ 15 दिन के लिए प्रतीकात्‍मक रूप से बीमार होते हैं और एकांतवास में रहते हैं. इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं. पुजारी भगवान को तरह-तरह के काढ़े का भोग लगाते हैं।

    यह परंपरा बताती है कि भगवान भी इंसान की तरह बीमार होते हैं. उन्‍हें औषधियां दी जाती हैं. 15 दिन के अनवसर काल में के बाद भगवान स्‍वस्‍थ होकर नवयौवन रूप में भक्‍तों को दर्शन देते हैं।

    …फिर निकलती है रथ यात्रा
    इसके बाद कई धार्मिक अनुष्‍ठान प्रारंभ होते हैं और फिर भगवान जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा 3 दिव्‍य और भव्‍य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं. इन रथों की रस्सियां खींचने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचते हैं. (संबंधित खबर: कौन थीं गुंडिचा, जिनके मंदिर में हर साल जाते हैं भगवान जगन्नाथ?)

    मान्‍यता है कि जो भक्‍त रथ की रस्सियों को छू भी ले उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और वह मोक्ष प्राप्‍त करता है. वहीं इस रथ यात्रा के दर्शन करने से पाप नष्‍ट होते हैं और सारे तीर्थ करने का पुण्‍य प्राप्‍त होता है।

  • विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग

    विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग


    नई दिल्ली। भारत ने विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी में पहली बार जेट इंजन वाले विमान की सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली के जरिए सफल लैंडिंग कराई गई। उदयपुर हवाई अड्डे पर इंडिगो के एयरबस A320 विमान ने इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) प्रणाली का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

    छोटे हवाई अड्डों के लिए साबित होगी वरदान

    इससे पहले टर्बोप्रॉप एटीआर विमान इस तकनीक का उपयोग कर चुके हैं, लेकिन जेट विमान में पहली बार इसका सफल इस्तेमाल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सैटेलाइट आधारित लैंडिंग प्रणाली उन छोटे हवाई अड्डों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां पारंपरिक और महंगे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) उपलब्ध नहीं हैं। इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता बढ़ेगी।

    भारत बना चुनिंदा देशों में शामिल

    गगन प्रणाली का विकास इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली विमान संचालन के लिए लोकलाइजर परफॉर्मेंस विद वर्टिकल गाइडेंस (LPV) जैसी उन्नत लैंडिंग प्रक्रियाओं को आवश्यक सटीकता और कवरेज उपलब्ध कराती है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन प्रणाली मौजूद है।

    सैटेलाइट नेविगेशन में नई उड़ान

    उदयपुर के लिए संचालित इंडिगो की उड़ान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच (LPV) को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसे भारत में सैटेलाइट आधारित विमानन नेविगेशन प्रणाली के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    इंडिगो कर रही तकनीक का विस्तार

    इंडिगो ने वर्ष 2022 में अपने एटीआर विमानों में एलपीवी आधारित संचालन की शुरुआत की थी। अब एयरलाइन अपने जेट विमानों सहित पूरे बेड़े में इस स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम की सुविधा का विस्तार कर रही है। इससे भविष्य में देश के अधिक हवाई अड्डों पर सुरक्षित और आधुनिक लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

  • 3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज

    3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज


    नई दिल्ली। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए बहुप्रतीक्षित अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी, जो 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से भरपूर यात्रा में शामिल होते हैं। यदि आप भी इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी सामान और आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहद जरूरी है।

    यात्रा में ये जरूरी सामान साथ रखें

    जरूरी दवाइयां
    नियमित रूप से ली जाने वाली दवाइयां।
    सिरदर्द, बुखार, उल्टी और सर्दी-जुकाम की दवाएं।
    फर्स्ट एड किट।
    बैंडेज, एंटीसेप्टिक क्रीम और अन्य प्राथमिक उपचार का सामान।

    मौसम के अनुसार कपड़े रखें
    अमरनाथ यात्रा ऊंचाई वाले और ठंडे इलाके में होती है, इसलिए मौसम को ध्यान में रखते हुए सामान पैक करें।
    – गर्म कपड़े।
    – रेनकोट या बरसाती।
    – छाता।
    – वाटरप्रूफ ट्रेकिंग जूते।
    – अतिरिक्त ऊनी मोजे और मौसम के अनुसार कपड़े।

    इन जरूरी चीजों को भी रखें साथ
    – सनस्क्रीन।
    – धूप का चश्मा।
    – हेडलैंप या टॉर्च।
    – ट्रेकिंग स्टिक।
    – मोबाइल के लिए वाटरप्रूफ कवर।
    – बैग के लिए रेन कवर।

    जरूरी दस्तावेज रखना न भूलें
    यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर सुरक्षा जांच होती है। इसलिए अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज रखें।
    वैध पहचान पत्र।
    यात्रा पंजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज।
    संबंधित विभाग द्वारा बताए गए अन्य जरूरी प्रमाण पत्र।

    क्या साथ नहीं ले जाना चाहिए?
    जरूरत से ज्यादा सामान लेकर यात्रा पर न जाएं।
    बैग हल्का रखें ताकि पैदल यात्रा में परेशानी न हो।
    महंगे गहने या कीमती सामान साथ ले जाने से बचें।
    ऐसी वस्तुएं न रखें जिनके खोने या क्षतिग्रस्त होने का जोखिम हो।

    सही तैयारी और आवश्यक सावधानियों के साथ अमरनाथ यात्रा न केवल सुरक्षित बल्कि अधिक आरामदायक भी बन सकती है।

  • होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली। देश की आर्थिक और मनोरंजन राजधानी मुंबई से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। मुंबई पुलिस की एक विशेष टीम ने दक्षिण मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थित एक नामी होटल में चल रहे बेहद हाई-प्रोफाइल देह-व्यापार रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस औचक छापेमारी और दबोचने की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो प्रसिद्ध अभिनेत्रियों (एक्ट्रेस) को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस खुलासे के बाद से ही माया नगरी के गलियारों में हड़कंप मच गया है और मनोरंजन जगत के कई बड़े नामों पर सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू की गई दो अभिनेत्रियों में से एक मराठी सिनेमा की जानी-मानी मुख्य अभिनेत्री (लीड एक्ट्रेस) है, जो कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुकी है। वहीं, दूसरी अभिनेत्री बंगाली फिल्मों के साथ-साथ कुछ बॉलीवुड फिल्मों में छोटे और कैमियो रोल कर चुकी है। पुलिस ने इन दोनों ही पीड़ित महिलाओं को इस अवैध धंधे के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन अभिनेत्रियों को किन परिस्थितियों में इस अनैतिक दलदल में धकेला गया।

    इस पूरी छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से एक मुख्य दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी मनोरंजन उद्योग से ही जुड़ा हुआ एक सक्रिय शख्स है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सेलिब्रिटीज के साथ काम करने वाला एक पेशेवर मेकअप आर्टिस्ट है। वह फिल्म सेट और शूटिंग के दौरान अभिनेत्रियों से जान-पहचान बढ़ाता था और फिर उनकी मजबूरियों या आर्थिक तंगहाली का फायदा उठाकर उन्हें इस अवैध व्यापार के नेटवर्क में शामिल कर लेता था। सेलिब्रिटी नेटवर्क होने के कारण वह हाई-प्रोफाइल ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेता था।

    गौरतलब है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में भी नवी मुंबई के तुर्भे नाका इलाके में पुलिस ने एक ऐसे ही बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया था। उस दौरान अनैतिक मानव तस्करी विरोधी विभाग (AHTU) की टीम ने एक स्थानीय लॉज पर अचानक छापा मारकर सात महिलाओं को मुक्त कराया था और मौके से तीन आरोपियों को दबोचा था। पुलिस के अनुसार, इस तरह के रैकेट को चलाने वाले शातिर अपराधी अक्सर बड़े होटलों और लॉज को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाते हैं।

    पुलिस की शुरुआती जांच और कार्यप्रणाली से यह साफ हुआ है कि ये आरोपी आपस में मिलीभगत कर पीड़ित महिलाओं को आलीशान होटलों में ठहराते थे। इसके बाद विभिन्न डिजिटल माध्यमों और संपर्कों के जरिए ग्राहकों को बुलाकर उनकी पसंद के अनुसार मोटी रकम का सौदा तय किया जाता था। इस रैकेट की पुख्ता जानकारी जुटाने और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुलिस ने नकली ग्राहकों (डमी कस्टमर्स) का जाल बिछाया था, जिसके बाद इस पूरी अवैध गतिविधि का भंडाफोड़ हो सका। फिलहाल, गिरगांव मामले में स्थानीय पुलिस सख्त कानूनी धाराओं के तहत आगे की तफ्तीश कर रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    नई दिल्ली। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए विदेश मंत्रालय ने एक नई और बेहद महत्वपूर्ण ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा की योजना बना रहे सभी नागरिकों को सचेत किया है कि वे अपने सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज और परमिट प्राप्त करने के बाद ही भारत से प्रस्थान करें। मंत्रालय द्वारा यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें आवश्यक अनुमति और प्रवेश पत्रों के अभाव में कई भारतीय नागरिकों के नेपाल में फंसे होने की बात सामने आई थी। पुष्ट दस्तावेजों के बिना केवल उम्मीद के सहारे यात्रा शुरू करना श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहा है।

    विदेश मंत्रालय को पिछले कुछ दिनों में उन भारतीय नागरिकों से मदद और आपातकालीन सहायता के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो आवश्यक चीनी वीजा और तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) परमिट के बिना ही काठमांडू पहुंच गए थे। वर्तमान में लगभग 52 भारतीय श्रद्धालु नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हुए हैं और आगे की सुरक्षित यात्रा या स्वदेश वापसी के लिए तत्काल सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह पवित्र यात्रा चीन के तिब्बत क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए सीमा पार करने के लिए नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से जारी वैध वीजा और संबंधित चीनी प्राधिकारियों से मिलने वाला ट्रैवल परमिट अनिवार्य है।

    इस साल की यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए भारत और चीन दोनों ही तरफ से नियमों को काफी कड़ा किया गया है। सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद अब प्रत्येक श्रद्धालु अपने साथ केवल 20 किलोग्राम तक का ही आवश्यक सामान ले जा सकेगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने पूरे यात्री समूह के लिए अलग से केवल 5 किलोग्राम अतिरिक्त वजन ले जाने की विशेष छूट दी है। इन नए नियमों के तहत सामान के वजन को लेकर चीनी सीमा चौकियों पर बेहद सख्त जांच की जाएगी, इसलिए यात्रियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप ही पैकिंग करने को कहा गया है।

    सामान के वजन के साथ-साथ इस बार श्रद्धालुओं की मेडिकल फिटनेस को लेकर सबसे कड़ा नियम लागू किया गया है। यात्रा पर रवाना होने वाले प्रत्येक दल के साथ पांच सदस्यीय एक समर्पित सर्विस टीम चलेगी, जिसमें चार पेशेवर रसोइये (कुक) और एक योग्य डॉक्टर अनिवार्य रूप से शामिल होगा। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि यात्रा के दौरान किसी भी मार्ग या पड़ाव पर डॉक्टर को यह महसूस होता है कि किसी यात्री की सेहत या शारीरिक स्थिति आगे बढ़ने के अनुकूल नहीं है, तो पूरे ग्रुप को उसी पॉइंट से अपनी यात्रा तुरंत स्थगित कर वापस लौटना होगा। किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए स्वास्थ्य मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    विदेश मंत्रालय ने श्रद्धालुओं से यह भी अपील की है कि वे जिस भी प्राइवेट ऑपरेटर के माध्यम से बुकिंग कर रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता और पंजीकरण की अच्छी तरह जांच कर लें। वैध एजेंटों के माध्यम से ही नेपाल मार्ग के लिए अग्रिम अनुमति पत्र सुनिश्चित किए जाने चाहिए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला आधिकारिक जत्था आगामी 30 जून को नई दिल्ली से रवाना होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह जत्था विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए आगामी 5 जुलाई को धारचूला स्थित बेस कैंप पहुंचेगा, जहां से आगे की कठिन चढ़ाई और सीमा पार का सफर शुरू होगा।

  • पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में कई अहम विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। प्रस्तावित विधेयकों में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा बिल सबसे प्रमुख माना जा रहा है, जिस पर पूरे राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इसके साथ ही सरकार कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े अन्य चार विधेयक भी पेश करने की योजना बना रही है।

    प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने की बात कही जा रही है। इस कदम को सरकार समान नागरिक अधिकार और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा सुधार बताने की तैयारी में है।

    इसके साथ ही सरकार ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर तैयार एक विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसका उद्देश्य संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करना बताया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून में अवैध खनन, हथियार और ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर कठोर प्रावधान शामिल होने की बात कही जा रही है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कानून के तहत अपराधियों को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए हिरासत में रखने और उनकी संपत्ति जब्त व नीलाम करने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे, आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी अलग विधेयक लाया जा सकता है।

    राज्य सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावित कानूनों से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधेयकों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जा सकती है। वहीं, कानून-व्यवस्था से जुड़े सख्त प्रावधानों पर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

    सोमवार को होने वाला यह विशेष सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य की नीतिगत दिशा और भविष्य की कानून व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालने वाले निर्णय सामने आ सकते हैं।

  • भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    पटना । बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में साइबर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए कुल 128 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि इस दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अफवाह फैलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए की गई है।

    राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।

    साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।

    बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा

    लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे उनका लंबा चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों तक फैल चुका है।

    इस बार वांगचुक की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की बात शामिल है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग पर जोर दे रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    वांगचुक का आंदोलन पहली बार 2024 में लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने अत्यधिक ठंड में उपवास कर सरकार का ध्यान क्षेत्रीय अधिकारों और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    सितंबर 2024 में उनकी ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाई, जब उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली में 16 दिनों के अनशन के बाद सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने पर उन्होंने उपवास समाप्त किया था। हालांकि, लद्दाख मुद्दों पर स्थायी समाधान न मिलने के कारण आंदोलन लगातार जारी रहा।

    2025 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं और वांगचुक की संस्था पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। कई महीनों की हिरासत के बाद 2026 की शुरुआत में उनकी रिहाई हुई।

    रिहाई के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन को नए मुद्दों से जोड़ते हुए इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ जुड़कर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।

    वर्तमान चरण में उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को भी केंद्र में ला रहा है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

    इस आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या क्षेत्रीय अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

  • ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और संसाधन संरक्षण पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उन्होंने हाल की अपनी अपीलों का सकारात्मक प्रभाव सामने आने पर नागरिकों को धन्यवाद भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई परिवारों ने विवाह समारोहों में सोना खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों के पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए कार पूलिंग जैसे उपाय अपना रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के नागरिकों ने जिस तरह सामूहिक जिम्मेदारी दिखाई है, वह सराहनीय है। उन्होंने इसे देश की बदलती सोच और जागरूक समाज का प्रतीक बताया और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हाल ही में की गई उस अपील का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक विदेश यात्राओं में कमी और एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि इन कदमों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बचत होती है, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    संबोधन में उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती अपनाने का भी आग्रह दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटकर न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर गर्व जताया। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक के बढ़ते उपयोग को भी देश की बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।

    कार्यक्रम में विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने युवाओं को खगोल विज्ञान और विज्ञान गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और विभिन्न एस्ट्रोनॉमी क्लबों की सराहना की। उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हालिया पुरातात्विक खोजों और विदेशों से लौटाई गई ऐतिहासिक धरोहरों को भारत के लिए गर्व का विषय बताया।

    प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान और पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि भारतीय जीवनशैली की समृद्ध परंपरा को भी दर्शाते हैं।

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से वैज्ञानिक सोच अपनाने, अंधविश्वास से दूर रहने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे ले जाती है।

  • केंद्र सरकार में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा गर्म, नए चेहरों को मौका और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना

    केंद्र सरकार में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा गर्म, नए चेहरों को मौका और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार में इस संभावित बदलाव को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में किसी भी प्रकार की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित फेरबदल में युवाओं और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की संभावना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार नई पीढ़ी के सांसदों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर संगठनात्मक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा लाना चाहती है। इसके साथ ही महिला भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि सामाजिक प्रतिनिधित्व को और व्यापक बनाया जा सके।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछड़ी जातियों को साधने के लिए विशेष रणनीति अपनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह धारणा है कि विभिन्न वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सहयोगी दलों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर विभिन्न घटक दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। खासकर महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सहयोगी दलों को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    इसी बीच कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि इन चर्चाओं की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बड़े मंत्रालयों में फेरबदल के जरिए सरकार अपनी नीति और प्राथमिकताओं को नए सिरे से प्रस्तुत कर सकती है। इसे प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    विपक्ष से आए नेताओं की संभावित भूमिका को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ राजनीतिक वर्गों का मानना है कि ऐसे नेताओं को तुरंत मंत्रिमंडल में शामिल करना संगठनात्मक संतुलन के लिए उपयुक्त नहीं होगा, जबकि अन्य इसे क्षेत्रीय विस्तार की रणनीति का हिस्सा मानते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तो इसका प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें 2029 के लोकसभा चुनावों सहित कई आगामी चुनावों को ध्यान में रखा गया है।

    फिलहाल सभी चर्चाएं संभावनाओं पर आधारित हैं और अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय तथा पार्टी नेतृत्व के स्तर पर लिया जाएगा।