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  • जजों की नियुक्ति में सरकार के आगे नरम पड़ जाते थे पूर्व CJI चंद्रचूड़; SC के पूर्व जज कौल का दावा

    जजों की नियुक्ति में सरकार के आगे नरम पड़ जाते थे पूर्व CJI चंद्रचूड़; SC के पूर्व जज कौल का दावा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व न्यायाधीश (Former Judge) जस्टिस संजय किशन कौल (Justice Sanjay Kishan Kaul) ने अपनी आत्मकथा विदाउट फियर ऑफ फेवर (Without Fear of Favour) में कई दावे किए हैं। इस किताब ने देश की शीर्ष न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जस्टिस कौल का दावा है कि जजों की नियुक्ति के मामलों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) का सरकार की तरफ झुकाव रहता था। डीवाई चंद्रचूड़ कॉलेजियम की औपचारिक बैठक से पहले ही सरकार से अनौपचारिक सहमति लेने की कोशिश करते थे।

    दिसंबर 2023 में रिटायर हुए जस्टिस कौल के अनुसार, सरकार के साथ संबंधों को संभालने को लेकर उनके और तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ के बीच गंभीर मतभेद थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कौल ने अपनी किताब में लिखा है कि कॉलेजियम की चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेना एक गलत संदेश देता है। जब भी न्यायपालिका सरकार को मौका देगी तो राजनीतिक वर्ग अपनी बात मनवाने की कोशिश करेगा।

    जस्टिस कौल ने अपनी किताब में कॉलेजियम से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया है। जजों के छह खाली पदों को भरा जाना था। कॉलेजियम के सदस्य पहले ही पांच नामों पर सहमत हो चुके थे। कौल लिखते हैं, “बैठक में जाते समय सीजेआई ने एक छठा नाम सुझाया। बाकी जजों ने इसका विरोध किया। मुझे शक हुआ कि यह नाम सरकार के कहने पर सुझाया गया है। इसके बाद CJI उन्हें एक तरफ ले गए और सोचने लगे कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए।”

    कौल आगे लिखते हैं, “मेरा शक सही निकला और मैंने उनसे समझदारी से काम लेने को कहा। कॉलेजियम की बैठक के बीच वे ऐसा नहीं कर सकते थे।”

    एक अल्पसंख्यक समुदाय के जज उम्मीदवार की नियुक्ति के समय सरकार ने उनकी जाति और धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए। जस्टिस कौल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के सवाल बेतुके थे। जब चंद्रचूड़ ने सरकार के रुख को साझा किया तो जस्टिस कौल इतने नाराज हो गए कि उन्होंने फाइल बंद की और कॉलेजियम की बैठक से वॉकआउट कर दिया। बाद में सरकार ने अपना रुख बदला और उस जज की नियुक्ति हो गई।


    ‘रीढ़ की हड्डी’ वाले जजों का सम्मान करती है सरकार

    आत्मकथा में जस्टिस कौल ने लिखा, “मेरा अनुभव रहा है कि सरकार उन जजों का बहुत अधिक सम्मान करती है जिनमें रीढ़ की हड्डी यानी कि दृढ़ता होती है। जब न्यायपालिका मजबूती से अपनी बात रखती है तो सरकार को पीछे हटना पड़ता है।” उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का काम सरकार के साथ संतुलन बनाना है न कि विपक्ष की भूमिका निभाना। 2015 में रद्द किए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग पर उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को तुरंत खारिज करने के बजाय एक मौका दिया जाना चाहिए था।

    उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उनकी बेंच ने इस सौदे को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया था। उन्होंने लिखा, “जो लोग मौजूदा सरकार का विरोध करते हैं वे उम्मीद करते हैं कि अदालत उनकी मदद के लिए आगे आएगी। लेकिन अदालत का काम यह नहीं है।”


    जस्टिस चंद्रचूड़ क्या बोले?

    जस्टिस कौल के इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “मैंने अभी किताब नहीं पढ़ी है, इसलिए संदर्भ जाने बिना टिप्पणी करना कठिन है। हालांकि, मेरे कार्यकाल में कॉलेजियम की बैठकें बेहद सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई हैं। मुझे ऐसी किसी घटना की याद नहीं है जब जस्टिस कौल कॉलेजियम की बैठक से वॉकआउट कर गए हों। सरकार के साथ संवाद एक सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि जजों की नियुक्ति का वारंट राष्ट्रपति ही जारी करते हैं।”


    कॉलेजियम की कमियों पर सवाल

    जस्टिस कौल ने अपनी किताब में उस न्यायिक प्रणाली की भी आलोचना की है जिसमें उन्होंने 22 वर्षों तक सेवा दी। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली को अत्यधिक अपारदर्शी और कमियों से भरी बताया, जिसमें अनौपचारिक चैनलों के जरिए सरकारी दबाव की गुंजाइश बनी रहती है। इसके अलावा उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कुछ महत्वपूर्ण मामलों के उनके बेंच से हटाए जाने और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामांकन को टाले जाने पर भी अपनी निराशा व्यक्त की है।

  • चर्चा में सांसद हनुमान बेनीवाल का परिवार, सरपंच चुनाव में छोटी भाभी ने बड़ी भाभी को हराया

    चर्चा में सांसद हनुमान बेनीवाल का परिवार, सरपंच चुनाव में छोटी भाभी ने बड़ी भाभी को हराया


    नागौर। राजस्थान के पंचायती राज चुनाव में नागौर जिले के बरण गांव का सरपंच चुनाव चर्चा का विषय बन गया है। यहां राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़ी दो महिला प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ। सांसद की छोटी भाभी राजबाला पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बड़ी भाभी मीरा पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल को महज 21 वोट मिले। चुनाव परिणाम के साथ ही हनुमान बेनीवाल के मतदान करने नहीं पहुंचने की बात भी चर्चा में है।

    छोटी भाभी को 982 वोट, बड़ी भाभी को मिले 21

    बरण गांव में सरपंच पद के लिए छह महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। इनमें राजबाला और मीरा के बीच मुकाबले को लेकर खास चर्चा रही। घोषित नतीजों के मुताबिक, राजबाला ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि मीरा को केवल 21 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों को मिले मतों का बड़ा अंतर गांव की चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    राजबाला की जीत के बाद सांसद के परिवार में छोटी भाभी की चुनावी सफलता सुर्खियों में आ गई, वहीं मीरा को मिले बेहद कम वोटों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, परिणाम से मतदाताओं के फैसले के पीछे के कारणों का अपने आप निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    राजनीतिक विरासत के बावजूद मीरा को मिले सिर्फ 21 वोट

    इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मीरा को मिले 21 वोटों की हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके पति स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे थे। इसके बावजूद सरपंच पद के चुनाव में मीरा को बहुत कम मत मिले।

    दूसरी ओर, राजबाला को 982 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच मतों का यह अंतर स्थानीय चुनावी समीकरणों और मतदाताओं की पसंद को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस अंतर के पीछे क्या वजह रही, इसे लेकर कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    हनुमान बेनीवाल ने नहीं किया मतदान, नाराजगी की चर्चा

    चुनाव के दौरान सांसद हनुमान बेनीवाल के मतदान नहीं करने की बात भी चर्चा में रही। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि परिवार के सदस्यों के चुनाव लड़ने से वह नाराज थे और पारिवारिक राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे। यह भी चर्चा है कि उनकी इच्छा थी कि परिवार के सदस्यों के बजाय गांव के अन्य लोग चुनाव मैदान में उतरें।

    हालांकि, बेनीवाल के मतदान नहीं करने के पीछे नाराजगी को वजह बताए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में उनका आधिकारिक बयान सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    सरपंच चुनाव के नतीजे से बढ़ी चर्चा

    बरण गांव का यह चुनाव सरपंच पद की जीत-हार से आगे बढ़कर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़े घटनाक्रम के कारण चर्चा में आ गया है। एक ही परिवार की दो महिला प्रत्याशियों के अलग-अलग नतीजों और सांसद के मतदान नहीं करने की बात ने राजनीतिक हलकों में लोगों का ध्यान खींचा है।

    राजबाला की जीत के साथ गांव को नई सरपंच मिली है, जबकि मीरा की हार और दोनों को मिले वोटों के बड़े अंतर पर चर्चा जारी है। राजस्थान में शनिवार को पहले चरण के तहत सरपंच पद के चुनाव हुए थे। मतदान के बाद शाम को मतगणना की गई और नतीजे घोषित कर दिए गए।

  • आज शरद पूर्णिमा पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा…. चांदनी रात में इस समय रखें खीर…. जानें पूजन विधि

    आज शरद पूर्णिमा पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा…. चांदनी रात में इस समय रखें खीर…. जानें पूजन विधि


    नई दिल्ली।
    आज 25 अक्टूबर, रविवार को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का पर्व मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इसे कोजागरी पूर्णिमा (Kojagiri Purnima), रास पूर्णिमा और कौमुदी व्रत (Kaumudi Vrat) के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) और चंद्र देव (Moon God) की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है, उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है. यही वजह है कि इस रात दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा है।

    पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो चुकी है, यह 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. चूंकि पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर को पड़ रही है, इसलिए शरद पूर्णिमा का मुख्य पर्व आज ही मनाया जा रहा है. आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और खीर रखने की परंपरा।


    शरद पूर्णिमा 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त

    शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है. इस साल पूजा के लिए ये समय ध्यान में रखें.
    – शरद पूर्णिमा: 25 अक्टूबर 2026, रविवार
    – पूर्णिमा तिथि शुरू: 25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे
    – पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 9:41 बजे
    – चंद्रोदय: दिल्ली में शाम करीब 5 बजे
    – लक्ष्मी पूजा का निशीथ मुहूर्त: रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे तक.


    शरद पूर्णिमा पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?

    शरद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करके मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें. पूजा में फूल, फल, मिठाई और दीपक अर्पित कर सकते हैं।

    शाम को चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करें. इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें, सुख-समृद्धि की कामना करें. इस रात कई घरों में भजन-कीर्तन और जागरण भी किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, मां जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं।


    शरद पूर्णिमा की रात खीर क्यों रखी जाती है?

    शरद पूर्णिमा की सबसे खास परंपराओं में से एक है चांदनी में खीर रखना. इस दिन दूध, चावल और चीनी से खीर बनाई जाती है. फिर इसे साफ बर्तन में रखकर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है. कई परिवार अगले दिन खीर को भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है. इसी विश्वास के कारण चांदनी में रखी खीर को विशेष माना जाता है. खीर को खुले में रखते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें , उसे ढककर रखें, ताकि धूल और कीड़े उसमें न गिरें।


    कोजागरी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

    शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोजागरी शब्द का संबंध संस्कृत के ‘को जागर्ति’ यानी ‘कौन जाग रहा है’ से है. माना जाता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, जागकर पूजा करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इसी वजह से कई जगहों पर लोग रात में जागरण करते हैं और मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

  • अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं

    अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं


    देहरादून। उत्तर प्रदेश में ‘घुसपैठिया’ शब्द को लेकर दिए गए बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आलोचना हो रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई है। रावत ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने की नसीहत भी दी।

    हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट में अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बयान देते समय अखिलेश यादव के मन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि रही होगी। हालांकि, रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पहले एक ही राज्य का हिस्सा थे और विभाजन के समय दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल था।

    बंटवारे के बाद जहां रहे, वहां के नागरिक हैं लोग

    हरीश रावत ने कहा कि जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एक राज्य थे, तब लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। किसी ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में काम किया, तो किसी ने इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस और लखनऊ को अपना कार्यक्षेत्र चुना।

    उन्होंने कहा कि राज्य के बंटवारे के समय जो लोग जहां रह गए, वे वहीं के निवासी हैं और उन्हें वहां रहने का पूरा अधिकार है। उत्तराखंड में रह गए लोगों को वहां सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। इसी तरह उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक, ऐसे नागरिकों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।

    दूसरे राज्यों में काम करने वालों का देश के निर्माण में योगदान

    रावत ने कहा कि भारत में लोग रोजगार और कामकाज के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले लोगों और प्रवासियों का देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए उनके योगदान को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती है और विपक्षी दलों को उसके उकसावे में आने से बचना चाहिए।

    अखिलेश यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद

    दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “यूपी में सबसे बड़े घुसपैठिया कौन हैं? उत्तराखंड के…” इसके बाद उन्होंने कहा कि पहले ‘घुसपैठिया’ की परिभाषा तय करनी होगी।

    अखिलेश के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। समाजवादी पार्टी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव का इशारा एक व्यक्ति की ओर था। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बयान को उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताया था। इसके बाद हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

  • झांसी में प्रैक्टिकल के अंक बढ़ाने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप, स्कूल का लिपिक गिरफ्तार

    झांसी में प्रैक्टिकल के अंक बढ़ाने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप, स्कूल का लिपिक गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में 12वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में पुलिस ने स्कूल के लिपिक सुरेंद्र पाल को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने प्रैक्टिकल परीक्षा में अंक बढ़ाने का लालच देकर छात्रा को अपने पास बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस के अनुसार, जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।

    यह मामला झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुरेंद्र पाल पुनावली कला गांव का निवासी है और संबंधित स्कूल में लिपिक के पद पर कार्यरत था। पीड़िता की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पढ़ाई और प्रैक्टिकल के अंकों से जुड़ा लालच देकर उसे बहलाया-फुसलाया और फिर उसके साथ जबरन संबंध बनाए।

    पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपी पर लगातार संपर्क करने और बार-बार अपने पास आने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा, छात्रा का कहना है कि आरोपी ने उसकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।

    पुलिस ने इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) और 351(3) के साथ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की है। धारा 64(1) दुष्कर्म से संबंधित अपराध के लिए लागू होती है, जबकि धारा 351(3) आपराधिक धमकी से जुड़ी है। नाबालिग पीड़िता से संबंधित मामले में पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी को 22 अक्टूबर को सुबह करीब 7:34 बजे मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सारमऊ तिराहे से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

    एसपी सिटी प्रीति सिंह के मुताबिक, छात्रा की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपों से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर नामजद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

    आरोपी की गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक सूरज सिंह, हेड कांस्टेबल अजमत उल्ला और कांस्टेबल रविकांत शामिल थे। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। नाबालिग की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी को सार्वजनिक करना कानून के तहत प्रतिबंधित हो सकता है, इसलिए पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले विवरण सामने नहीं रखे गए हैं।

    यह मामला शैक्षणिक संस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अंक बढ़ाने के नाम पर कथित रूप से दबाव बनाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होने वाली कार्यवाही और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें

    सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते की शुरुआत से जुड़ी यादें साझा की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पहली पोस्ट में एक वीडियो जारी कर बताया कि इंग्लैंड में अपनी पसंद का खाना तलाशते हुए वह कैम्ब्रिज के एक ग्रीक रेस्तरां तक पहुंची थीं। इसी जगह एक मित्र ने उनकी मुलाकात राजीव गांधी से कराई थी। सोनिया ने इस मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यहीं से उनके प्रेम की शुरुआत हुई और दोनों ने मिलकर यादों से भरी दुनिया बनाई।

    सोनिया गांधी ने बताया कि राजीव गांधी से पहली मुलाकात के दौरान ही उन्हें महसूस हुआ था कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपना जीवन बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव की भावना भी कुछ ऐसी ही थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी। वे पार्टियों में जाते, घूमते और विद्यार्थियों की बैठकों में एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे।

    राजीव गांधी के व्यक्तित्व को याद करते हुए सोनिया ने कहा कि उनका स्वभाव बेहद सौम्य था। उन्होंने राजीव के आकर्षक व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया, लेकिन उनके अनुसार राजीव की सबसे खास बात उनका सहज और विनम्र व्यवहार था। सोनिया की ये यादें उनकी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ से जुड़ी हैं, जिसका विमोचन 10 नवंबर को होना है। उन्होंने शनिवार को ही अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाया और पहली पोस्ट में पुस्तक का वीडियो साझा किया।

    इस पुस्तक में सोनिया गांधी ने अपने बचपन से लेकर भारत में जीवन बिताने तक के अनुभवों का वर्णन किया है। इसकी शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में उनके बचपन से होती है। इसके बाद उनके कैम्ब्रिज पहुंचने और वर्ष 1965 में राजीव गांधी से मुलाकात का विवरण आता है। राजीव गांधी उस समय जवाहरलाल नेहरू के पोते के रूप में जाने जाते थे।

    पुस्तक में राजीव गांधी से विवाह और उनकी मां, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात का भी जिक्र है। सोनिया ने भारत में नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाने के अनुभव साझा किए हैं। इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान तथा संस्कृति को अपनाना शामिल है। इस तरह पुस्तक में निजी जीवन के साथ एक नए देश और परिवार में खुद को ढालने की यात्रा भी दर्ज है।

    सोनिया गांधी की आत्मकथा में गांधी परिवार को प्रभावित करने वाली कई बड़ी त्रासदियों का भी उल्लेख है। इनमें विमान हादसे में संजय गांधी की मृत्यु, वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद उनके निजी जीवन में आए बदलावों और परिवार की परिस्थितियों का भी वर्णन किया गया है।

    राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। उस समय पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 तक कांग्रेस की स्थिति कमजोर होने लगी और पार्टी के भीतर कई गुट उभर आए। पार्टी को एकजुट करने के प्रयासों के बीच सोनिया गांधी ने वर्ष 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद वर्ष 1998 में वह पार्टी की अध्यक्ष बन गईं।

    सोनिया गांधी वर्ष 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। उनका कार्यकाल पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा रहा। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला। सहयोगी दलों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

    पुस्तक में इस राजनीतिक दौर और प्रधानमंत्री पद से दूर रहने के उनके फैसले का भी उल्लेख है। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने भी अपनी पुस्तक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में उस समय के घटनाक्रम का वर्णन किया था। सोनिया गांधी की नई पुस्तक में निजी रिश्तों, पारिवारिक त्रासदियों और राजनीतिक जीवन से जुड़े अनुभवों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

  • कौन हैं ITBP के शौर्य कमांडो, LAC पर चीनी सैनिकों के सामने कैसे संभालते हैं मोर्चा..

    कौन हैं ITBP के शौर्य कमांडो, LAC पर चीनी सैनिकों के सामने कैसे संभालते हैं मोर्चा..


    नई दिल्ली
    । भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा सुरक्षा और सैनिकों की गश्त को लेकर सतर्कता लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में दोनों देशों के सैनिकों के आमने-सामने आने की स्थितियों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के शौर्य कमांडो विशेष चर्चा में हैं। कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में काम करने के लिए प्रशिक्षित ये जवान सीमा पर त्वरित प्रतिक्रिया देने और तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    राजस्थान के अलवर में आयोजित ITBP के वार्षिक अभिनंदन समारोह में संगठन के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में LAC के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना तथा तनातनी की स्थिति बने रहने की बात कही। उन्होंने शौर्य कमांडो के प्रदर्शन और उनकी भूमिका की भी सराहना की। इन विशेष दस्तों का उद्देश्य संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में जवानों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करना है।

    शौर्य कमांडो दस्तों के गठन की पृष्ठभूमि वर्ष 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प से जुड़ी है। इस घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त, निगरानी और सैनिकों की त्वरित तैनाती को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत महसूस की गई। इसी दिशा में ITBP ने अपने जवानों में से शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक तौर पर मजबूत और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों को चुनकर विशेष प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की।

    इन कमांडो को भारतीय सेना की घातक प्लाटून की तर्ज पर तैयार किया गया है। इनके प्रशिक्षण में पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही, अत्यधिक ठंड में काम करना, हाथों से मुकाबला करने की तकनीक, हथियारों का संचालन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संयम बनाए रखना शामिल है। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी, दुर्गम रास्तों और बेहद कम तापमान के बीच काम करना इनके लिए बड़ी चुनौती होती है। इसलिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी इनके प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है।

    ITBP की तैनाती व्यवस्था के तहत चीन सीमा पर तैनात प्रत्येक बटालियन के साथ कम से कम एक शौर्य कमांडो टीम जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इनकी भूमिका को देखते हुए दो अतिरिक्त इकाइयां तैयार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। भविष्य में इन दस्तों को कंपनी स्तर तक विकसित करने और एक अलग, समर्पित बटालियन बनाने की योजना पर काम किए जाने की बात कही गई है। ऐसी इकाई तैयार होने पर जरूरत के समय विशेष प्रशिक्षित जवानों को तनावग्रस्त क्षेत्रों में तेजी से पहुंचाने की क्षमता बढ़ सकती है।

    अरुणाचल प्रदेश में बुमला और मेचूका जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सीमा पर गश्त और सैनिकों की गतिविधियों पर निगरानी महत्वपूर्ण है। जब दोनों देशों के जवान आमने-सामने आते हैं, तब प्रशिक्षित टीमें स्थिति को संभालने, रास्ता रोकने और भारतीय क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में भूमिका निभा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के साथ तनाव को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोकना भी महत्वपूर्ण होता है।

    सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ITBP आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगठन ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों सहित तकनीकी संसाधनों पर निवेश बढ़ा रहा है। सीमा पर तैनात बटालियनों में ड्रोन प्लाटून शामिल किए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है, जिनका संचालन प्रशिक्षित जवान करते हैं। ड्रोन के जरिए दुर्गम घाटियों और ऊंची चोटियों पर गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है। इससे जमीन पर तैनात जवानों को परिस्थितियों की जानकारी मिलने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने में सहायता मिलती है।

    इस तरह शौर्य कमांडो की विशेष ट्रेनिंग, बटालियन स्तर पर तैनाती और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल LAC पर ITBP की तैयारियों का हिस्सा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करते हुए इन दस्तों की भूमिका त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और संवेदनशील परिस्थितियों के प्रबंधन से जुड़ी हुई है।

  • लुधियाना में युवक की कलाई काटकर लिफाफे में दुकानदार को थमाई, पुरानी रंजिश के मामले में पुलिस की जांच तेज

    लुधियाना में युवक की कलाई काटकर लिफाफे में दुकानदार को थमाई, पुरानी रंजिश के मामले में पुलिस की जांच तेज

    नई दिल्ली । पंजाब के लुधियाना में आपसी रंजिश के चलते एक युवक पर जानलेवा हमला करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ हमलावरों ने युवक के घर में घुसकर तेजधार हथियारों से हमला किया और उसकी कलाई काटकर शरीर से अलग कर दी। इसके बाद आरोपी कटी हुई कलाई को लिफाफे में रखकर एक दुकानदार के पास पहुंचे और उसे युवक के घर पहुंचाने के लिए कहा। घटना के सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

    घायल युवक की पहचान बसंत नगर निवासी शक्ति सिंह उर्फ भूरा के रूप में हुई है। उसकी उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष बताई जा रही है। यह घटना रेडू साहिब गुरुद्वारे के नजदीक हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमलावर तेजधार हथियार लेकर युवक के घर में दाखिल हुए और उस पर हमला कर दिया। हमले के दौरान उसकी कलाई कटकर अलग हो गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    वारदात के बाद आरोपी सतगुरु नगर की गली नंबर 9 स्थित राणा करियाना स्टोर पहुंचे। बताया गया है कि उन्होंने कटी हुई कलाई को एक लिफाफे में रखा और दुकानदार को सौंप दिया। आरोपियों ने कथित तौर पर दुकानदार से कहा कि वह इसे युवक के घर पहुंचा दे। इसके बाद वे वहां से फरार हो गए। इस असामान्य घटनाक्रम की जानकारी दुकानदार की ओर से पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। संबंधित थाना प्रभारी जतींदर सिंह ने मामले की जांच शुरू कराई। घायल युवक को एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय युवक होश में था और बातचीत कर रहा था। हालांकि, उसकी चोट की गंभीरता और आगे के उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में हमले के पीछे पुरानी आपसी रंजिश होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, घायल शक्ति सिंह उर्फ भूरा के खिलाफ पहले से लगभग 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, हमले में शामिल बताए जा रहे आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड होने की जानकारी मिली है। हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका और हमले के पीछे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और राणा करियाना स्टोर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ली है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दुकानदार को लिफाफा सौंपने पहुंचे आरोपी कैमरे में दिखाई दिए हैं। पुलिस इन फुटेज की मदद से संदिग्धों की पहचान करने और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास भी किया जा रहा है कि हमले में कितने लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम देने के बाद वे किस दिशा में गए। फिलहाल, मामले में पुरानी रंजिश को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन हमले से जुड़ी सभी परिस्थितियों की पुष्टि होना बाकी है।

    लुधियाना की इस घटना में पुलिस के सामने घायल युवक पर हमले, कलाई काटे जाने और दुकानदार को लिफाफा सौंपने की पूरी कड़ी स्पष्ट करने की चुनौती है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान तथा गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से मिलने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • मुंबई में रैपिडो राइडर गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध और टेलीग्राम पर भड़काऊ भाषण साझा करने का आरोप

    मुंबई में रैपिडो राइडर गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध और टेलीग्राम पर भड़काऊ भाषण साझा करने का आरोप

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध होने के संदेह में 33 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई है। उसे माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से पकड़ा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी रैपिडो राइडर के रूप में काम करने के साथ इत्र बेचने का व्यवसाय भी करता था। उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल और मोबाइल फोन में मिली संदिग्ध सामग्री की जांच की जा रही है।

    एटीएस का आरोप है कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के बीच नफरत फैलाने वाली सामग्री साझा कर रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह टेलीग्राम पर एक समूह भी संचालित करता था। आरोप है कि इस समूह में उसने 1 जून को जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भड़काऊ भाषण साझा किए थे। इन भाषणों में बाबरी मस्जिद सहित कुछ अन्य मुद्दों का उल्लेख होने की बात कही गई है।

    जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि आरोपी पाकिस्तान समर्थित बताए जा रहे ‘इब्न-ए-कासिम’ नाम के टेलीग्राम चैनल से जुड़ा हुआ था। हालांकि, उसके कथित संबंधों और गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति का पता लगाने के लिए जांच जारी है। मोबाइल फोन से मिली सामग्री, सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियों और संबंधित डिजिटल संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और उसके ऑनलाइन समूह में किस तरह की सामग्री साझा की जाती थी।

    इसी बीच, गुजरात में भी जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कदीवाला, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खाली अयूब सुनसारा, शफिया रईस मुख्ती और मोहम्मद हसन करदिया को गिरफ्तार किया था। इन पांचों को गुजरात के पाटन जिले के खडियाल गांव से पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।

    अधिकारियों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद के आठ कथित सदस्यों से संबंधित जांच के दौरान इन पांच लोगों के नाम सामने आए थे। मामले में उनकी भूमिका और अन्य संदिग्धों के साथ उनके संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित गतिविधियों में उनकी क्या भूमिका रही।

    अदालती कार्यवाही के दौरान सरकारी वकील पी.आर. दंतानी ने पांचों आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता बताई थी। उनके अनुसार, एक आरोपी पर टाइम बम बनाने की कोशिश करने का आरोप है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और प्रतिबंधित संगठन से संबंधित उर्दू में लिखे साहित्य की तलाश है।

    एटीएस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्ध सामग्री कहां से लाई गई, उसे कहां रखा गया था और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी बताई जा रही सामग्री आरोपियों तक कैसे पहुंची। इन सवालों के जवाब जुटाने के लिए आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता बताई गई थी। अदालत ने पांचों आरोपियों को एटीएस की हिरासत में भेज दिया था।

    मुंबई और गुजरात के इन मामलों में जांच एजेंसियां कथित आतंकी संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध सामग्री से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही

  • पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन

    पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश और ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वाराणसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में शामिल होंगे। दौरे के अगले चरण में वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे।

    प्रधानमंत्री का कार्यक्रम उद्योग, रोजगार, महिला भागीदारी, रक्षा क्षमताओं और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों पर केंद्रित रहेगा। दोनों राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए विनिर्माण क्षेत्र और वित्तीय तकनीक से संबंधित सुविधाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करेंगे। आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं पर आधारित इस इकाई से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    इस इकाई में तैयार होने वाले परिधानों को कंपनी के वैश्विक ग्राहक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। परियोजना को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री दोपहर करीब एक बजे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के एयर डिस्प्ले-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता और हवाई कौशल प्रदर्शित किया जाएगा।

    एयर डिस्प्ले में तेजस, एलसीएच प्रचंड, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनके साथ परिवहन विमानों की भी भागीदारी होगी। भारतीय थलसेना और नौसेना की मौजूदगी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम हवाई करतब दिखाएंगी। इन प्रदर्शनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित उड़ान और संचालन संबंधी दक्षता देखने को मिलेगी।

    वाराणसी के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री ओडिशा रवाना होंगे। शाम करीब 4:45 बजे भुवनेश्वर में वह RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    RBI का नया डेटा सेंटर देश की वित्तीय प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर होंगे, जहां महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों सहित RBI की प्रमुख डिजिटल सेवाओं से जुड़े सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इस सुविधा को अपटाइम इंस्टीट्यूट के टियर-IV मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर की परिचालन मजबूती और विश्वसनीयता से संबंधित उच्च स्तर का मानक है।

    भुवनेश्वर में स्थापित होने वाला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करना और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।