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  • रामपुर जेल में आजम खान से मिले अखिलेश यादव, एक घंटे की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

    रामपुर जेल में आजम खान से मिले अखिलेश यादव, एक घंटे की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जिला जेल में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद जेल से बाहर आए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि समाजवादी पार्टी का लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना है। इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों और पार्टी के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य स्पष्ट है और पार्टी के कार्यकर्ता भाजपा को हराने के लिए मजबूती से काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल का जनाधार कमजोर हो रहा है और आगामी चुनावों में उसे जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का फैसला करेगी। ये बयान सपा अध्यक्ष की राजनीतिक रणनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के रुख को दर्शाते हैं।

    सपा प्रमुख ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन परिणामों से जनता का संदेश सामने आ चुका है। अखिलेश यादव के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की रणनीति में पीडीए की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। पीडीए से आशय पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से है। पार्टी इस सामाजिक समीकरण के साथ सामाजिक न्याय और जमीनी मुद्दों को भी अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।

    मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से वंचित और पीडीए समुदायों को आगे बढ़ने का अवसर देना रहा है। उनके बयान में शिक्षा, सामाजिक न्याय और संस्थानों पर हो रही कार्रवाई से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, इन कार्रवाइयों के विशिष्ट मामलों और उनके कानूनी पहलुओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव की उनसे जेल में हुई मुलाकात को पार्टी के भीतर संपर्क और राजनीतिक एकजुटता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मुलाकात के दौरान किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव की टिप्पणियों में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष और 2027 के चुनाव की तैयारी प्रमुख रही।

    रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों के लिए यह मुलाकात वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद का संकेत है, जबकि इसके राजनीतिक प्रभाव का आकलन आगामी घटनाक्रम और पार्टी की रणनीति के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से भाजपा को हराने और पीडीए के मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्र में रखने का संदेश दिया है।

  • महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जे.जे. अस्पताल में एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के बैनर तले सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांग है कि मौजूदा मासिक स्टाइपेंड 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 2 नवंबर से हड़ताल शुरू कर देंगे। हालांकि, प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 25,000 रुपये या उससे अधिक मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में उन्हें 18,000 रुपये ही मिलते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि मुंबई जैसे महंगे महानगर में आवास, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च काफी अधिक है। ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड से जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। उनका तर्क है कि काम की जिम्मेदारियों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय बढ़ाना जरूरी है।

    एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स के महासचिव डॉ. रमन पवार ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा वर्ष 2024 से लंबित है। उस समय भी इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर मासिक स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग उठाई थी, लेकिन उनके अनुसार सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब डॉक्टरों ने एक बार फिर इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    डॉ. पवार के मुताबिक, संगठन ने अगस्त से अक्टूबर के बीच राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे। इनमें शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों को मांग से अवगत कराया गया। सितंबर में भी अनुरोध पत्र भेजकर सरकार को जवाब देने के लिए 15 से 20 दिन का समय दिया गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को पुनर्विचार के लिए एक और पत्र सौंपा गया। संगठन का कहना है कि इसके बाद भी करीब 10 दिन तक इंतजार करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

    डॉक्टरों ने बताया कि अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश भी की गई और दो बार बातचीत हुई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिले। किसी निश्चित बैठक या निर्णय की जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अब तक लंबित है। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के इंटर्न डॉक्टर भी इसमें शामिल हैं।

    अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। डॉ. पवार ने बताया कि पिछले तीन महीनों में डीन को तीन बार पत्र दिए गए। डीन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) को भेजा गया है। संगठन ने भी इसी अवधि में डीएमईआर को लगभग छह पत्र सौंपे हैं। डॉ. पवार के अनुसार, प्रस्ताव आगे भेजे जाने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला वित्त मंत्रालय तक पहुंच चुका है, तो फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए सरकार से 1 नवंबर तक निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तय समय सीमा तक स्टाइपेंड बढ़ाने पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 2 नवंबर से हड़ताल शुरू की जाएगी। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी। अब इस मामले में राज्य सरकार के फैसले पर नजर है, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने पर अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

  • हिंगोली स्टेशन पर RPF पर मारपीट का आरोप, यात्रियों ने पटरी पर बैठकर रोकी जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस

    हिंगोली स्टेशन पर RPF पर मारपीट का आरोप, यात्रियों ने पटरी पर बैठकर रोकी जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के हिंगोली रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगने के बाद यात्रियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यात्रियों ने आरोप लगाया कि आरपीएफ कर्मियों ने एक युवक के साथ मारपीट की और उसे बचाने पहुंची महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया। घटना से नाराज यात्रियों ने जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस को स्टेशन पर रोक दिया। प्रदर्शन के कारण ट्रेन करीब दो घंटे तक प्रभावित रही। यात्रियों ने संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस के हस्तक्षेप और जांच का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, जिसके बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया।

    जानकारी के अनुसार, संबंधित यात्री नागपुर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। बताया गया है कि ये लोग डॉ. बी.आर. आंबेडकर के अनुयायी हैं और अकोला रेलवे स्टेशन से नांदेड़ जाने के लिए भगत की कोठी-काचेगुड़ा एक्सप्रेस में सवार हुए थे। यह ट्रेन संख्या 17606 है। यात्रा के दौरान वाशिम स्टेशन पार करने के बाद समूह के साथ चल रहा एक युवक गलती से सामान्य श्रेणी के डिब्बे के बजाय आरक्षित डिब्बे में पहुंच गया।

    यात्रियों का आरोप है कि युवक के आरक्षित डिब्बे में प्रवेश करने के बाद आरपीएफ कर्मियों और कुछ यात्रियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर युवक के साथ मारपीट की गई। उसके साथ यात्रा कर रही महिलाओं ने बीच-बचाव करते हुए युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें धक्का देकर पीछे हटाया गया। समूह के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    इस घटना के बाद यात्रियों में नाराजगी फैल गई। जब ट्रेन हिंगोली रेलवे स्टेशन पहुंची, तो विरोध कर रहे यात्री नीचे उतर गए और रेलवे ट्रैक पर जाकर इंजन के सामने बैठ गए। उन्होंने रेलवे प्रशासन और आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की तथा आरोपित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई। यात्रियों के पटरी पर बैठने के कारण ट्रेन का परिचालन रुक गया। इसके चलते निर्धारित यात्रा में देरी हुई और रेल संचालन भी प्रभावित हुआ।

    प्रदर्शन की सूचना मिलने पर हिंगोली नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यात्रियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत पर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यात्रियों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद रेलवे ट्रैक खाली कराया गया और जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस को आगे नांदेड़ की ओर रवाना किया गया। हालांकि, ट्रेन के रुकने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और अन्य रेल सेवाओं पर भी असर पड़ने की बात सामने आई।

    यह पूरा मामला आरक्षित डिब्बे में गलती से प्रवेश करने के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। यात्रियों ने आरपीएफ कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन घटना में शामिल सभी पक्षों के बयान और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यात्रियों की मुख्य मांग संबंधित कर्मियों के व्यवहार की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस की ओर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और रेल यातायात बहाल हो सका।

  • तुर्किये-पाकिस्तान के साथ इंडोनेशिया के रक्षा समझौते से ब्रह्मोस तकनीक पर सवाल, विशेषज्ञों ने बताई भारत की सुरक्षा रणनीति

    तुर्किये-पाकिस्तान के साथ इंडोनेशिया के रक्षा समझौते से ब्रह्मोस तकनीक पर सवाल, विशेषज्ञों ने बताई भारत की सुरक्षा रणनीति

    नई दिल्ली । तुर्किये, कतर, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए हुए बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के बाद भारत के रक्षा हितों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस समझौते का उद्देश्य सैन्य उत्पादन, रक्षा क्षमताओं, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस साझेदारी से भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए मिसाइल सौदों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और क्या भारत की संवेदनशील सैन्य तकनीक उसके प्रतिद्वंद्वी देशों तक पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है।

    भारत ने जुलाई 2026 में इंडोनेशिया के साथ करीब 630 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5,300 करोड़ रुपये के दो रक्षा समझौते किए थे। इनमें ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की बिक्री से संबंधित समझौते शामिल हैं। ऐसे में चार देशों के नए रक्षा सहयोग को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि इंडोनेशिया के दूसरे देशों के साथ बढ़ते सैन्य संबंधों का इन सौदों पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विशेषज्ञों ने केवल बद्र MoU के आधार पर भारतीय मिसाइल तकनीक को खतरा मानने की आशंका को उचित नहीं बताया है।

    डीआरडीओ के चेयरमैन एमेरिटस और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व महानिदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार मिश्रा के अनुसार, इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों में तकनीकी जानकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया को हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित उपयोगकर्ता पुस्तिका दी जाएगी, न कि तकनीक हस्तांतरण से जुड़ी पुस्तिका। उनके मुताबिक, समझौतों में डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार और रक्षा संप्रभुता से जुड़े सख्त प्रावधान भी शामिल हैं, जिनका पालन इंडोनेशिया को करना होगा।

    मिश्रा की राय में, इन सुरक्षा उपायों के रहते ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की संवेदनशील तकनीक भारत के प्रतिद्वंद्वियों तक पहुंचने की आशंका नहीं है। हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी जानकारी साझा करना और उनके निर्माण या तकनीकी विकास से जुड़ी विस्तृत जानकारी हस्तांतरित करना अलग-अलग बातें हैं। यही अंतर भारत के रक्षा निर्यात समझौतों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत ने भी भारत-इंडोनेशिया रक्षा सौदों के प्रभावित होने की अटकलों को खारिज किया। वह सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज में वरिष्ठ फेलो हैं। उनके अनुसार, किसी समझौता ज्ञापन को सैन्य गठबंधन के बराबर नहीं माना जा सकता। केवल एक MoU पर हस्ताक्षर होने से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पहले से तय रक्षा निर्यात सौदे खतरे में पड़ गए हैं।

    अहलावत ने बद्र समझौते की भाषा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास में सहयोग और कार्य विभाजन की व्यवस्था के रूप में देखा। उनके मुताबिक, यह साझा इस्लामी पहचान वाले देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने की कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को इस घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन इसे लेकर अनावश्यक चिंता नहीं करनी चाहिए। किसी देश को हथियार बेचने का अर्थ यह नहीं है कि उसे उनके निर्माण और विकास की पूरी तकनीक भी सौंप दी जाए।

    भारत के लिए आगे सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बद्र MoU के तहत चारों देशों के बीच रक्षा अनुसंधान, सैन्य उत्पादन और तकनीकी सहयोग किस स्तर तक बढ़ता है। साथ ही, भारत-इंडोनेशिया समझौतों में तय सुरक्षा प्रावधान किस तरह लागू होते हैं, यह भी अहम रहेगा। फिलहाल विशेषज्ञों की राय है कि नए रक्षा सहयोग पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन केवल इस समझौते के आधार पर ब्रह्मोस और अस्त्र की तकनीक की सुरक्षा को लेकर खतरे का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

  • वोट चोरी के मुद्दे पर INDIA गठबंधन की बैठक स्थगित, खरगे की अध्यक्षता में होनी थी चुनाव आयोग के खिलाफ रणनीति पर चर्चा

    वोट चोरी के मुद्दे पर INDIA गठबंधन की बैठक स्थगित, खरगे की अध्यक्षता में होनी थी चुनाव आयोग के खिलाफ रणनीति पर चर्चा


    नई दिल्ली ।
    कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार करने के लिए प्रस्तावित विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की शाम होने वाली इस ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को करनी थी। बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं को आगामी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई की मांग और दिल्ली में प्रस्तावित रैली की तैयारियों पर चर्चा करनी थी।

    विपक्षी गठबंधन के नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में प्रस्तावित थी, जब कथित वोट चोरी का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। बैठक में इस मुद्दे को आगे उठाने के लिए साझा रणनीति तैयार किए जाने की योजना थी। हालांकि, बैठक स्थगित होने के बाद गठबंधन की अगली बैठक की तारीख को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बनाने के तरीकों पर विचार करना भी शामिल था। विपक्षी नेता कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपने विरोध को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा करने वाले थे। इसके साथ ही यह तय किया जाना था कि विभिन्न विपक्षी दल इस मुद्दे पर किस तरह संयुक्त रूप से अपनी गतिविधियां संचालित करेंगे। फिलहाल बैठक टलने के कारण इन विषयों पर प्रस्तावित चर्चा नहीं हो सकी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली की तैयारियों की समीक्षा करना भी था। विपक्षी दलों को रैली के आयोजन और उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था। इसके अलावा कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर आगे के प्रदर्शनों की रूपरेखा पर भी चर्चा प्रस्तावित थी। गठबंधन की ओर से इस मुद्दे पर विरोध जारी रखने की रणनीति तैयार करने की योजना थी।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ विपक्षी नेताओं के व्यस्त कार्यक्रमों के कारण बैठक स्थगित की गई। हालांकि, इसे दोबारा आयोजित करने के लिए किसी नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में एक नवंबर की रैली से पहले गठबंधन के नेताओं के बीच आगे कब चर्चा होगी, यह स्पष्ट नहीं है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द लागू करने के उद्देश्य से परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि, प्रस्तावित बैठक के स्थगित होने की वजह के रूप में विपक्षी नेताओं के व्यस्त कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है।

    इससे पहले विपक्षी दल कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर चुके हैं। पिछले सप्ताह किए गए इस मार्च के जरिए विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रखा था। इससे पहले 13 अक्टूबर को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आवास पर INDIA गठबंधन के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया था।

    उस बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन ने कथित वोट चोरी के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने और इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का संकल्प जताया था। अब 22 अक्टूबर को प्रस्तावित ऑनलाइन बैठक स्थगित होने के बाद गठबंधन की अगली रणनीतिक चर्चा और एक नवंबर की रैली की तैयारियों पर नजर रहेगी।

  • 4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी

    4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी सीएचओ का आंदोलन लगातार जारी है। नियमितीकरण वेतन विसंगति दूर करने और अलग कैडर बनाने समेत कई मांगों को लेकर प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारी इको गार्डन में धरना दे रहे हैं। गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सीएचओ प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो प्रदेश के करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सामूहिक इस्तीफा देने का कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।

    प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उनका धरना 25वें दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश के गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं लेकिन वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ है। सीएचओ संघ के प्रदेश सदस्य सनत सिंह ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में अलग कैडर का निर्माण हरियाणा की तर्ज पर 4800 ग्रेड पे और सातवें वेतनमान का लाभ शामिल है। इसके अलावा पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। उनका कहना है कि शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

    सीएचओ की अन्य मांगों में नियमितीकरण स्थानांतरण नीति लागू करना और कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार अपने अधिकार और सुविधाएं चाहते हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने के बावजूद उन्हें सेवा संबंधी लाभ और वेतनमान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला सीएचओ ने बताया कि वे 1956 की नियमावली के अनुसार व्यवस्था लागू करने कैडर निर्माण और वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार दूसरे कैडरों के कर्मचारियों की तुलना में उन्हें लगभग पांच हजार रुपये कम वेतन मिलता है। उन्होंने पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी दोहराई।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर करीब दस बार मंत्रियों के आवास पर जाकर अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि मांगों को लेकर संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक से दो महीने तक भी धरना जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है ताकि स्वास्थ्य अधिकारी बिना परेशानी के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

    धरने में शामिल बदायूं के प्रतीक कुमार और फिरोजाबाद के अमित नायक ने भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सीएचओ प्रतिनिधियों के अनुसार प्रदेश में करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमितीकरण कैडर निर्माण और वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे और विधानसभा घेराव की चेतावनी के बीच अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

  • भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क

    भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क


    नई दिल्ली ।
    भारत और पोलैंड के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भरोसे, साझा मूल्यों और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण आधार बताते हुए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि दोनों देशों के हितों में कोई टकराव नहीं है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत-पोलैंड मित्रता को स्वाभाविक और मजबूत साझेदारी बताया। टस्क ने कहा कि दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी के अलावा ऐसा कोई बड़ा अंतर नहीं है, जो उनके संबंधों को आगे बढ़ाने में बाधा बने।

    डोनाल्ड टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत को सार्थक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने और आने वाले वर्षों में सहयोग की प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा की। भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान लिया गया था। टस्क के अनुसार, मौजूदा बातचीत में इस साझेदारी के शुरुआती परिणामों का आकलन किया गया और भविष्य के सहयोग की दिशा पर जोर दिया गया।

    पोलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल साझा हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भरोसे और समान विचारों पर भी आधारित हैं। उन्होंने विशेष रूप से अहिंसा के विचार का उल्लेख किया। टस्क ने बताया कि पोलैंड की ऐतिहासिक सॉलिडेरिटी क्रांति अहिंसा पर आधारित थी और भारत की परंपराओं तथा इतिहास ने उनके देश को प्रेरित किया है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विभाजन पैदा करने वाले मुद्दों का अभाव भी आपसी संबंधों को सहज बनाने में मदद करता है।

    टस्क ने वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र कहने पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया अस्थिरता, अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत की भूमिका उम्मीद की किरण जैसी है। उन्होंने भारत को एक शक्तिशाली देश बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका को पोलैंड सम्मान और सराहना की दृष्टि से देखता है।

    दोनों देशों की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए पोलिश प्रधानमंत्री ने पिछले 35 वर्षों को तेज विकास और आर्थिक सफलता का महत्वपूर्ण दौर बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड की विकास यात्रा को दुनिया ध्यान से देखती है। टस्क ने जी20 के मंच पर भी दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड इन अंतरराष्ट्रीय बैठकों में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक समुदाय को भी लाभ होगा।

    अपने संबोधन में टस्क ने यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारतीय छात्रों की सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की देखभाल में पोलैंड की भूमिका दोनों देशों के बीच एकजुटता और दोस्ती का व्यावहारिक उदाहरण है। उन्होंने इस सहयोग को गर्व का विषय बताते हुए कहा कि ऐसी मदद के लिए समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता जरूरी थी।

    टस्क ने ‘गुड महाराजा’ का भी उल्लेख किया, जो पोलैंड की सामूहिक स्मृति में सम्मान के साथ याद किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक सहायता और ऐतिहासिक अनुभवों से भी जुड़ा है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और पोलैंड भविष्य में भी एक-दूसरे का साथ देंगे और अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करेंगे।

  • रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय

    रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय


    नई दिल्ली। रामपुर जेल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक रिश्ता बताया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान उनके दिल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस दौरान आजम खान के परिवार पर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।

    अखिलेश यादव गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से वह कार के जरिए सीधे रामपुर जेल पहुंचे। उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी कार में मौजूद थे लेकिन वह जेल के अंदर मुलाकात के लिए नहीं गए। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत करीब एक घंटे तक चली। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव दोपहर करीब 1 बजकर 42 मिनट पर जेल के अंदर दाखिल हुए और 2 बजकर 51 मिनट के आसपास बाहर निकले। एक साल के भीतर अखिलेश यादव की आजम खान से यह तीसरी मुलाकात बताई जा रही है।

    जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के परिवार ने जितना अन्याय झेला है वैसा किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पढ़ाई लिखाई और शिक्षा से कोई विशेष जुड़ाव नहीं है। जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विश्वविद्यालय के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अखिलेश यादव के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और उनके परिवार के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड से जुड़े मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इस मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को सात सात साल की सजा सुनाई थी। आजम खान ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के समर्थन में बयान देते रहे हैं और अब जेल में मुलाकात के बाद उन्होंने एक बार फिर उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव जाहिर किया।

    मुलाकात के दौरान और उसके बाद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की बात कहती रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को अलग से देखना जरूरी है।

    अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर जौहर विश्वविद्यालय के हेलीपैड के पास आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा उनके बड़े बेटे अदीब और अन्य समर्थक मौजूद रहे। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरान अदीब जेल के बाहर ही रहे। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान पार्टी और आजम खान के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस मुलाकात का मुख्य संदेश आजम खान के प्रति अखिलेश यादव का भावनात्मक समर्थन रहा जबकि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर उनके आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी है। 

  • यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित

    यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों में रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर कार्रवाई शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने आरोपी लिपिक निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वायरल ऑडियो और वीडियो में सामने आए आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इन कार्रवाइयों के बाद अब जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    गोरखपुर विकास प्राधिकरण में लिपिक निर्मल सिंह के खिलाफ कार्रवाई 20 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में स्टिंग ऑपरेशन प्रकाशित होने के बाद की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों के लिए लोगों से पैसे मांगे जाते थे। मामले का संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया और आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। विशेष कार्याधिकारी संजीव कुमार दीक्षित को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की समीक्षा होगी और नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आरोपी लिपिक को लेकर अलग से आरोपपत्र जारी करने की भी तैयारी है।

    निर्मल सिंह गोरखपुर विकास प्राधिकरण में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर आया था और कर्मचारी संयुक्त परिषद का अध्यक्ष भी रह चुका है। उस पर आरोप है कि वह अधिकारियों से नजदीकी और संगठन में अपनी सक्रियता का इस्तेमाल कर नक्शा पास कराने अवैध निर्माण से जुड़े कामों और आवासीय योजनाओं में फ्लैट आवंटन के नाम पर लोगों से पैसे लेता था। इसके अलावा पत्रकारपुरम और वसुंधरा एन्क्लेव में करीबियों के नाम पर फ्लैट लेकर मुनाफे में बेचने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    दूसरी ओर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भी अपने अधिकारी और कर्मचारी से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की जांच शुरू कर दी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने 21 अक्टूबर को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी में प्रभारी अधिकारी अधिष्ठान ओएसडी आईटी देवांश त्रिवेदी अधिशासी अभियंता मनोज सागर और लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। विनोद श्रीवास्तव को सदस्य संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा और जोनल अधिकारी मान सिंह से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की पड़ताल की जाएगी।

    दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने विकास प्राधिकरणों में कथित रिश्वतखोरी और निर्माण संबंधी अनियमितताओं की पड़ताल के लिए खुफिया कैमरे से बातचीत रिकॉर्ड की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि नक्शा और निर्माण संबंधी काम कराने के बदले पैसे मांगने की बातचीत सामने आई। इसके बाद यह सवाल उठा कि नियमों के तहत होने वाले सरकारी कामों के लिए आवेदकों से कथित तौर पर रकम क्यों मांगी जा रही है और ऐसी गतिविधियों पर विभागीय निगरानी कितनी प्रभावी है।

    अब दोनों प्राधिकरणों की जांच कमेटियों के सामने वायरल रिकॉर्डिंग की सत्यता और बातचीत की परिस्थितियों की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह पता लगाना होगा कि क्या किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी गई और क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल गोरखपुर में निलंबन और लखनऊ में जांच की कार्रवाई की गई है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।

  • शिवा शर्मा मौत मामले में श्रद्धा दुबे से पूछताछ तेज, कैश और मोबाइल को लेकर पुलिस के सवाल, रिमांड की तैयारी

    शिवा शर्मा मौत मामले में श्रद्धा दुबे से पूछताछ तेज, कैश और मोबाइल को लेकर पुलिस के सवाल, रिमांड की तैयारी


    लखनऊ । लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे को उत्तर प्रदेश एसटीएफ नागपुर से लखनऊ लेकर पहुंची है। गुरुवार सुबह हजरतगंज थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की। इस दौरान श्रद्धा अपना चेहरा छिपाते हुए थाने के अंदर जाती दिखाई दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान वह कई सवालों पर चुप रही और बार बार यही कहती रही कि उससे नहीं बल्कि उसके वकील से बात की जाए। मामले में श्रद्धा के साथ उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को भी लखनऊ लाया गया है। तीनों से अलग अलग कमरों में पूछताछ की जा रही है ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके और घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस के अनुसार तीनों आरोपियों को मंगलवार को नागपुर के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड मिलने पर एसटीएफ की टीम उन्हें सड़क मार्ग से लखनऊ लेकर आई। इस सफर में करीब 15 घंटे लगे। गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे तीनों को हजरतगंज थाने पहुंचाया गया। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारी मामले की अलग अलग कड़ियों को जोड़ने और घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने में जुटे हैं।

    पूछताछ के दौरान पुलिस का मुख्य फोकस 9 अक्टूबर की शाम हुई घटना पर है। इसी दिन कारोबारी शिवा शर्मा की लखनऊ स्थित उस फ्लैट से गिरने के बाद मौत हो गई थी जहां श्रद्धा रहती थी। शिवा की मां ने श्रद्धा के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद से श्रद्धा फरार बताई जा रही थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना वाले दिन फ्लैट में क्या हुआ था वहां कौन कौन मौजूद था और घटना के बाद आरोपी कहां गए। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि श्रद्धा नेपाल कैसे पहुंची और वहां से लखनऊ लौटने से पहले किन लोगों के संपर्क में थी।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद हुई है। पूछताछ में पुलिस ने नकदी के स्रोत को लेकर सवाल किए हैं। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बिना एटीएम और यूपीआई का इस्तेमाल किए पैसे कहां से आए। इसके साथ ही श्रद्धा के बैंक खातों की जांच की तैयारी की जा रही है ताकि लेनदेन और धन के स्रोत से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस तीनों के बयानों को मिलाकर यह समझने का प्रयास कर रही है कि घटना के बाद उनकी गतिविधियां क्या रहीं और क्या उनके बयान एक दूसरे से मेल खाते हैं।

    पूछताछ के बाद श्रद्धा का मेडिकल परीक्षण कराया जाना है और उसे अदालत में पेश करने की तैयारी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस अदालत से 14 दिन की रिमांड मांगने की तैयारी में है ताकि मामले में आगे की पूछताछ की जा सके। कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। इस बीच श्रद्धा से जुड़े फ्लैटों के हाउस टैक्स निर्धारण में कथित गड़बड़ी का मामला भी सामने आया है। नगर निगम के मुताबिक संबंधित फ्लैट दूसरे लोगों के नाम दर्ज हैं और उनका नए सिरे से कर निर्धारण किया जाएगा। फिलहाल शिवा शर्मा की मौत के मामले में पुलिस जांच जारी है। घटना की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।