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  • फरीदाबाद में रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर के घर तीन राउंड फायरिंग, बुलेट बाइक सवार दो बदमाश सीसीटीवी में कैद

    फरीदाबाद में रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर के घर तीन राउंड फायरिंग, बुलेट बाइक सवार दो बदमाश सीसीटीवी में कैद

    नई दिल्ली । हरियाणा के फरीदाबाद में देर रात हरियाणा पुलिस के एक सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर के घर पर गोलीबारी की घटना सामने आई है। नगला एनक्लेव पार्ट-2 में बुलेट मोटरसाइकिल पर पहुंचे दो युवकों ने मकान को निशाना बनाकर तीन राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। घटना के समय परिवार घर के अंदर सो रहा था। गोलीबारी से मकान का शीशा टूट गया और दीवार पर भी गोली लगने के निशान मिले हैं। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    फायरिंग का शिकार हुए सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर की पहचान सुरजीत बैंसला के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि वारदात के समय वह अपने परिवार के साथ घर के अंदर सो रहे थे। देर रात एक पड़ोसी ने उन्हें जानकारी दी कि उनके मकान पर गोलियां चलाई गई हैं। सूचना मिलने के बाद उन्होंने घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी, जिसमें दो युवकों की गतिविधियां दिखाई दीं।

    फुटेज के अनुसार, दोनों युवक बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर मकान के पास पहुंचे थे। वहां रुकने के बाद उन्होंने पिस्तौल निकाली और घर की ओर गोलियां चलाईं। इसके बाद दोनों आरोपी उसी मोटरसाइकिल से घटनास्थल से भाग गए। बताया गया है कि वारदात के दौरान युवकों ने अपने चेहरे नहीं ढके हुए थे। ऐसे में पुलिस को उनकी पहचान करने के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से मदद मिलने की उम्मीद है।

    गोलीबारी के दौरान एक गोली मकान के शीशे पर लगी, जिससे शीशा टूट गया। दूसरी गोली दीवार में जा लगी, जबकि तीसरी गोली हवा में चलाई गई। घटना के समय घर के भीतर परिवार के सदस्य मौजूद थे, लेकिन किसी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। देर रात हुई इस वारदात से मकान को नुकसान पहुंचा और परिवार को घटना की जानकारी पड़ोसी के माध्यम से मिली।

    सुरजीत बैंसला ने बताया कि वह फायरिंग करने वाले दोनों युवकों को नहीं पहचानते। उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि आरोपियों ने उनके घर को निशाना क्यों बनाया। फिलहाल गोलीबारी के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि घटना किसी पुरानी रंजिश, विवाद या किसी अन्य कारण से जुड़ी है या नहीं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले वारदात के उद्देश्य को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद सारण थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर दोनों संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है। रिकॉर्डिंग में आरोपियों के मोटरसाइकिल से पहुंचने, पिस्तौल निकालने, गोलियां चलाने और फिर मौके से भागने की गतिविधियां दिखाई देने की बात कही गई है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

    सारण थाना प्रभारी हुक्म सिंह के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस फायरिंग के कारणों का पता लगाने के साथ आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल दोनों आरोपियों की पहचान और घटना के पीछे के कारणों को लेकर जांच जारी है।

  • गंगा के ऊपर चिनूक का कमाल, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान, 25 अक्टूबर को आएंगे पीएम मोदी

    गंगा के ऊपर चिनूक का कमाल, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान, 25 अक्टूबर को आएंगे पीएम मोदी


    वाराणसी । वाराणसी में गुरुवार को भारतीय वायुसेना के एयर शो विंग्स ओवर गंगा का भव्य आगाज हुआ। गंगा के किनारे नमो घाट पर आयोजित इस शानदार आयोजन में लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के हैरतअंगेज करतब देखकर लोग रोमांचित हो उठे। आसमान में कभी तिरंगे की आकृति बनी तो कभी हेलिकॉप्टरों ने दिल बनाकर लोगों का ध्यान खींचा। गंगा के ऊपर फूलों की बारिश और राफेल तथा सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों की तेज रफ्तार ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित इस एयर शो में कुल 100 विमान शामिल हुए जिनमें 52 लड़ाकू विमान भी थे।

    गुरुवार सुबह करीब 11 बजकर 50 मिनट पर नमो घाट के ऊपर वायुसेना के सारंग हेलिकॉप्टरों ने शानदार हवाई प्रदर्शन किया। हेलिकॉप्टरों ने गंगा के ऊपर आसमान में दिल की आकृति बनाई तो घाट पर मौजूद लोग तालियां बजाने लगे। कई लोगों ने इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल फोन में कैद किया। इसी दौरान हेलिकॉप्टरों से मां गंगा के ऊपर फूलों की बारिश की गई। इस दृश्य ने धार्मिक आस्था और देशभक्ति का अनूठा संगम पेश किया। घाट पर मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और वायुसेना के प्रदर्शन का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

    एयर शो का सबसे रोमांचक हिस्सा लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन रहा। राफेल और सुखोई ने आसमान में तेज गति से उड़ान भरते हुए शानदार करतब दिखाए। इन विमानों की गर्जना से गंगा का किनारा गूंज उठा। वहीं जगुआर मिराज 2000 तेजस और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों ने तीर की नोक जैसी आकृति में उड़ान भरकर अपनी सटीकता और तालमेल का प्रदर्शन किया। भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमान बीएई हॉक एमके 132 ने भी नमो घाट के ऊपर से उड़ान भरी। विमानों की गति और उनके करतब देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे।

    इस आयोजन में भारी परिवहन क्षमता वाले चिनूक हेलिकॉप्टर ने भी खास आकर्षण पैदा किया। चिनूक ने गंगा के पानी को छुआ और फिर तेजी से आसमान की ओर उड़ गया। इस दृश्य को देखकर घाट पर मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। एयर शो में लड़ाकू विमानों के अलावा 15 परिवहन विमान 32 हेलिकॉप्टर और विंटेज विमान भी शामिल रहे। ये विमान देशभर के 12 एयरपोर्ट से उड़ान भरकर वाराणसी पहुंचे। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नमो घाट को वीवीआईपी मेहमानों के लिए आरक्षित रखा गया।

    भारतीय वायुसेना ने इस तीन दिवसीय आयोजन को विंग्स ओवर गंगा नाम दिया है। एयर शो 22 23 और 25 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है और अनुमान लगाया गया है कि करीब 20 लाख लोग इस ऐतिहासिक नजारे के साक्षी बन सकते हैं। 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी एयर शो में शामिल होने की संभावना है। काशी में हो रहा यह आयोजन भारतीय वायुसेना की ताकत तकनीकी क्षमता और कुशल पायलटों के शानदार तालमेल को प्रदर्शित करने के साथ ही लोगों के भीतर देशभक्ति और गर्व की भावना को भी मजबूत कर रहा है।

  • तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को नोटिस जारी किया है। दोनों को तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा, अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है। पुलिस इस मामले में कथित सरकारी आदेश के उल्लंघन और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा होने के बाद नोटिस भेजे गए। वहीं, अजिंक्य शिंदे को भी जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है। क्राइम ब्रांच तीनों से संबंधित घटनाक्रम और आरोपों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह समझने की कोशिश कर सकती है कि कथित घटना किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।

    मामले का संबंध कथित तौर पर सरकारी आदेश का पालन नहीं करने और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोपों से बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित उल्लंघन से जुड़े घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल जांच का विषय माना जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में आरोप साबित होने या दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है।

    क्राइम ब्रांच की ओर से की जा रही पूछताछ का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करना हो सकता है। पुलिस तीनों से घटना के क्रम, कथित सरकारी आदेश और संपत्ति में प्रवेश से जुड़े पहलुओं पर सवाल कर सकती है। हालांकि, पूछताछ में किन विशिष्ट सवालों पर ध्यान दिया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस के आधिकारिक नोटिस, संबंधित दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध विवरण में यह पुष्टि नहीं की गई है कि तीनों के खिलाफ किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में किसी विशिष्ट अपराध या कानूनी निष्कर्ष का दावा करना उचित नहीं होगा।

    सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद नोटिस जारी होने तथा अजिंक्य शिंदे को तलब किए जाने से मामले की जांच आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ के बाद पुलिस क्या कदम उठाएगी या जांच में कौन-से नए तथ्य सामने आएंगे।

    फिलहाल, मामले में तीनों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान या नोटिस की पूरी जानकारी सामने आने पर आरोपों की प्रकृति, जांच के दायरे और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • पत्नी से बात कराने की जिद में रेलवे की हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, घंटों चला बचाव अभियान..

    पत्नी से बात कराने की जिद में रेलवे की हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, घंटों चला बचाव अभियान..


    नई दिल्ली ।
    तेलंगाना के वारंगल जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां पत्नी के बात नहीं करने से नाराज एक युवक रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन बिजली लाइन के गर्डर पर चढ़ गया। युवक ने ऊंचाई पर बैठकर नीचे कूदने की धमकी दी और कहा कि जब तक उसकी पत्नी उससे फोन पर बात नहीं करेगी या मौके पर नहीं आएगी, वह नीचे नहीं उतरेगा। घटना के दौरान स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने उसे समझाकर सुरक्षित नीचे उतारा।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना वारंगल जिले के नेक्कोंडा रेलवे स्टेशन की है। बताया गया कि युवक अचानक प्लेटफॉर्म से रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन के गर्डर पर चढ़ गया। वह जिस स्थान पर पहुंचा, वहां करीब 25 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन मौजूद थी। इतनी खतरनाक जगह पर युवक को देखकर स्टेशन पर मौजूद लोग घबरा गए। यात्रियों और रेल कर्मचारियों की नजर जब उस पर पड़ी, तो तत्काल स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू हुई।

    गर्डर पर बैठे युवक ने नीचे मौजूद लोगों के सामने रोना-धोना शुरू कर दिया। उसने बताया कि उसकी पत्नी उससे बात नहीं कर रही है और काफी समय से नाराज चल रही है। युवक ने अपनी पत्नी से बातचीत कराने की मांग की। उसने धमकी दी कि यदि उसकी पत्नी फोन पर बात नहीं करेगी या उससे मिलने मौके पर नहीं आएगी, तो वह नीचे कूदकर अपनी जान दे देगा। उसकी इस हरकत से वहां मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि बिजली की हाईटेंशन लाइन के पास जरा-सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के जवान मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन की बिजली आपूर्ति को सुरक्षित किया गया, ताकि बचाव के दौरान किसी तरह का बड़ा हादसा न हो। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने युवक से बातचीत शुरू की और उसे शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उसे समझाया कि उसकी मांग पर बात करने का रास्ता निकाला जा सकता है, लेकिन इस तरह जान जोखिम में डालना खतरनाक है।

    बताया जा रहा है कि युवक का यह घटनाक्रम काफी देर तक चलता रहा। पुलिस और स्थानीय लोगों ने धैर्य बनाए रखते हुए उसे लगातार समझाया। उसे आश्वासन दिया गया कि उसकी पत्नी से बातचीत कराने की कोशिश की जाएगी। काफी समझाने-बुझाने के बाद युवक शांत हुआ और गर्डर से नीचे उतरने के लिए तैयार हो गया। उसके सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने राहत की सांस ली।

    नीचे उतरने के बाद पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से युवक को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके परिजनों को भी घटना की जानकारी दी गई है। हालांकि, युवक और उसकी पत्नी के बीच विवाद की पूरी वजह तथा इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। कुछ लोग इसे फिल्म ‘शोले’ के उस दृश्य से जोड़कर देख रहे हैं, जिसमें वीरू टंकी पर चढ़कर अपनी शादी की बात मनवाने की कोशिश करता है। हालांकि, वास्तविक घटना में युवक की हरकत ने यात्रियों और रेल कर्मचारियों के सामने सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी। रेलवे की हाईटेंशन लाइन के आसपास इस तरह चढ़ना बेहद जोखिमभरा है और इससे संबंधित व्यक्ति के साथ अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

  • दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग

    दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान और कानूनी स्थिति से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उसने सरकार से धार्मिक स्थलों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की अपील भी की है।

    इस मामले में बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बयान जारी कर नोटिस का विरोध किया। उनके अनुसार, संबंधित सरकारी एजेंसी लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की ओर से मस्जिद को हटाने के लिए कार्रवाई की गई है। बोर्ड ने केंद्र सरकार से इस नोटिस को निरस्त कर वापस लेने की मांग की है। हालांकि, नोटिस जारी होने के पीछे सरकारी पक्ष की विस्तृत दलील और मस्जिद की जमीन को लेकर आधिकारिक स्थिति की पूरी जानकारी उपलब्ध विवरण में सामने नहीं आई है।

    डॉ. इलियास ने आरोप लगाया कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से दिल्ली की प्राचीन और ऐतिहासिक मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग आधारों पर इन धार्मिक स्थलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। रेस कोर्स मस्जिद के मामले में भी सरकारी जमीन पर निर्माण होने का दावा किया जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद के ऐतिहासिक अस्तित्व और कानूनी स्थिति के समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड के कई दस्तावेज मौजूद हैं। ये आरोप बोर्ड के प्रवक्ता ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    मस्जिद की ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि यह केवल पूजा का प्राचीन स्थल नहीं है, बल्कि दिल्ली के इतिहास से भी जुड़ी हुई है। प्रवक्ता के अनुसार, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी ने मस्जिद को अपनी ऐतिहासिक इमारतों की सूची में शामिल किया है। इसके अतिरिक्त, मस्जिद का उल्लेख वक्फ से जुड़े रिकॉर्ड में भी होने का दावा किया गया है।

    बोर्ड के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि रेस कोर्स मस्जिद को वर्ष 1977 में दिल्ली के राजपत्र में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मस्जिद को सूचीबद्ध किया गया है, जहां उसकी संपत्ति की पहचान से संबंधित जानकारी दर्ज है। इन रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बोर्ड ने मस्जिद के ऐतिहासिक दर्जे और उसके अस्तित्व से जुड़े पक्ष को महत्वपूर्ण बताया है।

    डॉ. इलियास के बयान के अनुसार, मस्जिद ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित की गई थी और इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित घोषित किए जाने की बात भी कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद के इमाम को वक्फ बोर्ड की ओर से वेतन दिया जाता है। बोर्ड इन तथ्यों को मस्जिद की धार्मिक और प्रशासनिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश कर रहा है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस और उसकी जमीन की कानूनी स्थिति है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर नोटिस वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, मस्जिद की भूमि, सरकारी रिकॉर्ड और नोटिस के आधार को लेकर संबंधित विभागों की विस्तृत स्थिति सामने आने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

  • अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमित शाह के वेतन, सरकारी सुविधाओं, निवेश और जमीन-जायदाद को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर सीट से नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण चुनावी हलफनामे में दिया था। इसके अनुसार, अमित शाह और उनकी पत्नी सोनल शाह की संयुक्त घोषित संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। इसमें अमित शाह की व्यक्तिगत संपत्ति करीब 36.55 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अमित शाह की आय में सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उनके चुनावी हलफनामे में किराये से होने वाली आय, कृषि से प्राप्त आमदनी और शेयरों से मिलने वाले लाभांश का भी उल्लेख है। उनकी कुल संपत्ति को समझने के लिए वेतन के साथ-साथ निवेश और अचल संपत्तियों के विवरण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, अमित शाह का मूल मासिक वेतन 1 लाख 24 हजार रुपये बताया गया है। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 87 हजार रुपये और अन्य भत्ता 2 हजार रुपये प्रति माह दर्ज किया गया है। दैनिक भत्ते के रूप में 75 हजार रुपये का आंकड़ा भी दिया गया है, लेकिन इसे नियमित मासिक वेतन के साथ जोड़कर निश्चित मासिक आय मानना सही नहीं होगा। दैनिक भत्ता निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार मिलता है।

    गृह मंत्री के पद पर रहते हुए उन्हें सरकारी कामकाज के लिए आवास, आधिकारिक वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और पात्रता के अनुसार चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। ये सुविधाएं पद से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए होती हैं। इन्हें उनकी निजी संपत्ति या व्यक्तिगत वेतन का हिस्सा नहीं माना जाता।

    वर्ष 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अमित शाह की चल संपत्ति लगभग 20.23 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति करीब 16.32 करोड़ रुपये थी। इस तरह उनकी कुल व्यक्तिगत घोषित संपत्ति लगभग 36.55 करोड़ रुपये बैठती है। चल संपत्ति में बैंक जमा, शेयर, निवेश, नकदी और आभूषण जैसी चीजें शामिल हैं, जबकि अचल संपत्ति में जमीन, भूखंड और मकान जैसी संपत्तियां आती हैं।

    हलफनामे में अमित शाह के पास लगभग 17.46 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर होने का उल्लेख था। इसके अलावा, करीब 72.87 लाख रुपये के कीमती धातुओं और आभूषणों का विवरण दर्ज किया गया था। उनके पास नकद राशि लगभग 24,164 रुपये बताई गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि उनकी घोषित चल संपत्ति में शेयर निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उनकी पत्नी सोनल शाह की संपत्ति को जोड़ने पर दंपति की संयुक्त संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। सोनल शाह की चल संपत्ति करीब 22.46 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति लगभग 6.55 करोड़ रुपये बताई गई थी। दोनों की कुल घोषित देनदारियां लगभग 42.10 लाख रुपये थीं। ये आंकड़े 2024 में दाखिल हलफनामे पर आधारित हैं, इन्हें वर्तमान बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।

    अमित शाह की घोषित संपत्ति में पिछले वर्षों के दौरान बदलाव भी दर्ज हुआ है। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के हलफनामे में उनकी संपत्ति लगभग 11.78 करोड़ रुपये बताई गई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह और उनकी पत्नी की संयुक्त संपत्ति करीब 40.33 करोड़ रुपये दर्ज हुई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 65.67 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग वर्षों में व्यक्तिगत और संयुक्त संपत्ति के विवरण का आधार अलग हो सकता है।

    संपत्ति में वृद्धि का अर्थ केवल वेतन से हुई कमाई नहीं है। शेयरों के मूल्य में बदलाव, कृषि और किराये से होने वाली आय, विरासत तथा अन्य निवेश भी कुल संपत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

    अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता अनिलचंद्र शाह प्लास्टिक पाइप के कारोबार से जुड़े थे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले अमित शाह पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहे और शेयर बाजार में भी काम किया। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े तथा भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति के जरिए आगे बढ़े। गुजरात विधानसभा में उनका चुनावी सफर 1997 में शुरू हुआ। उस समय संपत्ति संबंधी हलफनामों का आज जैसा व्यवस्थित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, इसलिए राजनीति में प्रवेश के समय उनकी कुल संपत्ति का सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,343.33 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.75 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

    कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 ने 22,554.85 का न्यूनतम स्तर छुआ। निफ्टी में 22,700 का स्तर टूटने से बाजार की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी। व्यापक बाजार में भी गिरावट देखने को मिली और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयर दबाव में रहे।

    निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार कारोबार में ऑटोमोबाइल, धातु और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांकों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट रही। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रहा है। व्यापक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ने के कारण निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन वाले बड़े शेयरों की ओर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेजी को कंपनियों की कमाई के बजाय बाजार में उपलब्ध तरलता से भी समर्थन मिला था। ऐसे में ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक चढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर निवेशकों की कारोबारी धारणा पर पड़ सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में सुधार की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, तेजी के मजबूत संकेत के लिए निफ्टी का 22,840 के स्तर से ऊपर लौटना जरूरी बताया गया। हालिया गिरावट और 22,700 के स्तर के नीचे कारोबार ने बाजार में संभावित सुधार को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।

    इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी करीब 1,614 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में बाजार गिरावट से नहीं उबर सका।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में दो प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को तेजी दर्ज की गई थी। प्रौद्योगिकी शेयरों में मजबूती के कारण नैस्डैक लगभग एक प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने अमेरिकी बाजारों को समर्थन दिया था।

  • 12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    लखीमपुर। बेल्जियम से भारत लाया गया विशालकाय रिएक्टर अब अपने अंतिम पड़ाव लखीमपुर खीरी पहुंच गया है। कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर में इसकी स्थापना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 308 पहियों वाले विशाल हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लदी इस मशीन को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इतने भारी-भरकम रिएक्टर को ट्रेलर से उतारकर निर्धारित स्थान पर कैसे स्थापित किया जाएगा।

    रिएक्टर को उतारने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसके लिए 12 क्रेनों की मदद ली जाएगी। साथ ही कर्मचारियों और मजदूरों की बड़ी टीम तैनात रहेगी। जिस मशीन को भारत लाने के लिए कई फुट ओवरब्रिज हटाने पड़े और नए रास्ते तैयार करने पड़े, उसे उतारने और स्थापित करने की प्रक्रिया भी बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

    बेल्जियम से आया करीब 110 फुट लंबा और 26 फुट चौड़ा यह रिएक्टर बुधवार सुबह खीरी जिले में पहुंचा। बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए महत्वपूर्ण यह मशीन करीब 160 दिनों के सफर और तीन राज्यों के दर्जनों जिलों से गुजरने के बाद अपने गंतव्य तक पहुंची है। इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को रवाना किया गया था। वहां से यह ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा और फिर विभिन्न जिलों से गुजरकर लखीमपुर खीरी आया।

    12 क्रेन मिलकर उठाएंगी भारी-भरकम रिएक्टर

    रिएक्टर को ट्रेलर से उतारने और निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की है। इस काम में 12 क्रेनें लगाई जाएंगी। इनके संचालन और पूरी प्रक्रिया में 60 कर्मचारियों तथा 150 मजदूरों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा करीब 40 मजदूर ट्रेलर के साथ चल रहे हैं। इस तरह उतारने और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी-मजदूर जुटे हुए हैं।

    प्रबंधन के मुताबिक, रिएक्टर को उतारने की प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। अनुमान है कि 23 या 24 अक्टूबर को ट्रेलर चीनी मिल परिसर में दाखिल हो जाएगा। इसके बाद मशीन को उतारने और स्थापित करने का काम आगे बढ़ेगा।

    ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर भी रही चर्चा

    रिएक्टर के परिवहन के दौरान ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर अलग-अलग सूचनाएं सामने आती रहीं। शुरुआत में 308 पहियों वाले ट्रेलर की चर्चा हुई। बाद में खबरें आईं कि झारखंड तक पहुंचने के दौरान पहियों की संख्या 308 थी, जिसके बाद करीब 50 पहिए कम कर दिए गए। मोड़ पर ट्रेलर को घुमाने में आ रही दिक्कतों के चलते पहियों की संख्या घटाए जाने की बात भी सामने आई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

    इन चर्चाओं के बावजूद विशालकाय ट्रेलर और उस पर लदे रिएक्टर को देखने के लिए लोगों का उत्साह बना रहा। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए।

    बुधवार को धौरहरा तहसील के सिसैया चौराहे से जिले में प्रवेश करने के बाद ट्रेलर को राष्ट्रीय राजमार्ग-730ए पर छाउछ में खड़ा किया गया। यहां से इसे गुरुवार सुबह कुंभी चीनी मिल पहुंचाया जाना था।

    ट्रेलर के साथ चल रही है विशेष टीम

    रिएक्टर को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तीन सहायक ट्रक, तीन एस्कॉर्ट वाहन और करीब 40 कर्मचारियों की टीम साथ चल रही है। रास्ते में बिजली के लटकते तारों को उठाने और पेड़ों की डालियां हटाने के लिए कर्मचारियों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

    सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस, सदर कोतवाली पुलिस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और बिजली विभाग की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया। रिएक्टर के आकार और ट्रेलर की लंबाई-चौड़ाई को देखते हुए रास्ते में कई तरह की व्यवस्थाएं करनी पड़ीं।

    बलरामपुर शुगर यूनिट, कुंभी के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि यह मशीन ‘साइक्लाइजेशन रिएक्टर’ है। इसमें लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) तैयार किया जाएगा। पीएलए का इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में होता है।

    3,080 करोड़ रुपये से बन रहा देश का पहला औद्योगिक बायोप्लास्टिक प्लांट

    लखीमपुर खीरी जिले की कुंभी चीनी मिल में देश का पहला औद्योगिक स्तर का पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) यानी बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।

    इसी परियोजना के लिए बेल्जियम से रिएक्टर मंगाया गया था, जो पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा और फिर सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी लाया गया। मिल अधिकारियों के मुताबिक, मशीन के पहुंचने का लंबे समय से इंतजार था। इसके पहुंचने के बाद स्थापना संबंधी काम शुरू किया जाएगा।

    अधिकारियों ने बताया कि रिएक्टर को जल्द स्थापित करने की योजना है और नवंबर में प्लांट चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट शुरू होने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

  • अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

    सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

    सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

  • यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की एक मतदाता सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल सूची में कुछ ऐसे नाम और पिता के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने जांच के निर्देश दिए हैं। झांसी के मंडलायुक्त से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और गुरुवार दोपहर तक रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उठे इन सवालों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची में राम ने यादव को मारा और मूर्खचंद जैसे नामों का उल्लेख किया जा रहा है। कुछ प्रविष्टियों में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम असामान्य बताए गए हैं। सूची में नरेंद्र यादव के पिता का नाम बीकाम लिखे होने और कुछ अन्य मतदाताओं के नामों में भी गड़बड़ी होने का दावा किया गया है। हालांकि इन वायरल प्रविष्टियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये वास्तविक मतदाता सूची की त्रुटियां हैं या किसी अन्य कारण से ऐसे नाम दर्ज दिखाई दे रहे हैं। निर्वाचन आयोग की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

    निर्वाचन आयोग ने आधी रात के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अजीब नाम होने की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। इसके बाद झांसी के मंडलायुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी हैं। मतदान से कुछ घंटे पहले मामला सामने आने के कारण जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस विवाद के बीच भाजपा ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव अधिकारियों से शिकायत की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम शामिल हैं। भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली स्नातक नेताओं ने एक ही व्यक्ति के नाम को दो से तीन बार दर्ज कराया है। पार्टी की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ऐसे नामों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

    भाजपा नेताओं के शिकायती पत्र के मुताबिक मतदाता सूची में कुल 4397 डुप्लीकेट मतदाता होने का दावा किया गया है। इनमें प्रयागराज में 3163 नाम होने की बात कही गई है। इसके अलावा कौशांबी में 320 जालौन में 179 झांसी में 178 बांदा में 140 फतेहपुर में 139 ललितपुर में 109 हमीरपुर में 81 चित्रकूट में 68 और महोबा में 20 डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया गया है। इन आंकड़ों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मतदाता सूची में उम्र और पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। भाजपा का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल हैं जिनकी जन्मतिथि के आधार पर उनकी पात्रता संदिग्ध है। स्नातक निर्वाचन में मतदान के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है तो वे निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डालें। एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की जांच रिपोर्ट पर है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि वायरल सूची में दिखाई गई गड़बड़ियां कितनी वास्तविक हैं और डुप्लीकेट नामों को लेकर किए गए दावों में कितनी सच्चाई है। मतदान से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।