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  • पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती

    पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती


    नई दिल्ली । देश की अग्रणी पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ने पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने कंपनी का ईएसजी स्कोर बढ़ाकर 84.3 कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी सतत विकास, पारदर्शिता और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के मामले में उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल है।

    कंपनी का यह स्कोर पिछले मूल्यांकन के 81 अंकों की तुलना में 3.3 अंक अधिक है। इस सुधार के साथ अदाणी पोर्ट्स को केयरएज की ओर से ईएसजी के क्षेत्र में लीडरशिप श्रेणी में स्थान मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

    कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह नई रेटिंग वार्षिक समीक्षा के बाद जारी की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों और सुधारों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप नीतियों को मजबूत करने के प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया।

    पर्यावरण के क्षेत्र में कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरणीय मानकों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।

    सामाजिक जिम्मेदारी के मोर्चे पर भी अदाणी पोर्ट्स ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यस्थल पर विविधता और समान वेतन को बढ़ावा देना तथा कर्मचारियों की भागीदारी मजबूत करना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव कंपनी की सामाजिक रेटिंग पर भी देखने को मिला।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में बोर्ड स्तर पर ईएसजी की नियमित निगरानी, व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और सप्लाई चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय ने कंपनी की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया है। कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत सुधार की नीति ही उसकी दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी मानकों के मामले में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन के सर्वोत्तम मानकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    इस उपलब्धि के साथ कंपनी को हाल ही में एक और बड़ी सफलता मिली थी, जब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उसकी लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया। एजेंसी ने कंपनी का स्टेबल आउटलुक भी बरकरार रखा। यह अपग्रेड मजबूत नकदी प्रवाह, स्वस्थ वित्तीय स्थिति और बड़े विस्तार कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया गया।

    इन लगातार मिल रही सकारात्मक रेटिंग्स ने अदाणी पोर्ट्स की वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कंपनी भविष्य में सतत विकास, निवेशकों के भरोसे और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते

    किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते


    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के माछिल क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधुनिक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है। इस नई सुविधा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने सेना की इस पहल की खुले दिल से सराहना की है।

    नवनिर्मित स्टडी हब में कंप्यूटर प्रशिक्षण, आईटी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, लाइब्रेरी और हाई स्पीड वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए कालीन बुनाई, सिलाई और अन्य कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    स्थानीय युवतियों ने कहा कि पहले इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कंप्यूटर सीखने या व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें कुपवाड़ा शहर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार परिवार की अनुमति भी नहीं मिल पाती थी। अब गांव में ही आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र खुलने से नई-नई तकनीक और हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    एक अन्य युवती ने सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर सेंटर, कालीन बुनाई केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं शुरू होने से अब स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा अधिक से अधिक लड़कियां शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ सकेंगी।

    स्थानीय युवकों ने भी इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस केंद्र में माताओं और बहनों के लिए सिलाई और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    गांव के एक निवासी ने बताया कि इस परियोजना में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने से ग्रामीण छात्रों को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सीमावर्ती गांव में कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय सेना की यह पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर

    भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर


    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेश और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में आयोजित कई महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान दुनिया की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भारत की आर्थिक ताकत और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही है।

    पीयूष गोयल ने एशिया हाउस और दुनिया की प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित गोलमेज बैठक में आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत के विकसित होते मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, निवेश के अनुकूल माहौल और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी सीईटीए दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देगा।

    उन्होंने यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों और विभिन्न वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित इंटरैक्टिव लंच बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, नई कारोबारी संभावनाओं को विकसित करने और साझा आर्थिक विकास को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    पीयूष गोयल ने लंदन बिजनेस स्कूल में फैकल्टी, छात्रों, पूर्व छात्रों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास भारत और ब्रिटेन के संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार छात्र, युवा पेशेवर और उद्यमी दोनों देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का द्वार खोलेगा। इससे निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने उद्योग जगत से इस समझौते का अधिकतम लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।

    इस दौरे की एक और विशेषता यह रही कि पीयूष गोयल भारत के अब तक के सबसे बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों में से एक के साथ ब्रिटेन पहुंचे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में 160 से अधिक अग्रणी भारतीय कंपनियां शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना है।

    बिजनेस प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों से सहयोग बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और साझा समृद्धि के लिए अधिक निवेश करने की अपील की। उनके अनुसार भारत आज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार का विश्वसनीय साझेदार बनकर उभर रहा है।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सम्मान समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम देश की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आगामी महिला टी20 विश्व कप के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि भारतीय टीम विश्व कप जीतकर देश का गौरव बढ़ाएगी।

  • 2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन

    2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन


    नई दिल्ली । ऊर्जा सुरक्षा और सतत आर्थिक विकास आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। ऐसे समय में स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों पर आधारित ऊर्जा व्यवस्था भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। इसी दिशा में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा है कि तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आर्थिक विकास को नई गति देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनका मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा को आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के साथ जोड़कर ही चौबीसों घंटे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।

    लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान लंदन के साइंस म्यूजियम में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में सागर अदाणी ने वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायत और पर्यावरणीय स्थिरता तीनों चुनौतियों का समाधान बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण के जरिए संभव है। जो देश मजबूत अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहते हैं उनके लिए यह अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।

    सागर अदाणी ने कहा कि केवल सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन पर्याप्त नहीं है। इन स्रोतों को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को लगातार और भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अदाणी ग्रीन एनर्जी वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। गुजरात के खावड़ा में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाओं को भी शामिल किया जा रहा है।

    इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और जलवायु विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए मजबूत नीतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देशों के बीच सहयोग और तकनीकी साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

    एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सह-अध्यक्ष लॉर्ड अडेयर टर्नर ने कहा कि यदि दुनिया को शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना है तो बिजली आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। उनके अनुसार सड़क परिवहन, भवनों की हीटिंग और औद्योगिक प्रक्रियाओं में विद्युतीकरण पहले से ही आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा है। वहीं नई तकनीकों की मदद से भारी उद्योगों में भी स्वच्छ बिजली का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

    एम्बिशन लूप के सह-संस्थापक और यूके क्लाइमेट चेंज कमेटी के अध्यक्ष नाइजेल टॉपिंग ने कहा कि बिजली उत्पादन को कार्बन मुक्त बनाने के साथ-साथ उन क्षेत्रों का भी तेजी से विद्युतीकरण करना होगा जो अभी तक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक बिजली ग्रिड और घटती तकनीकी लागत बड़े निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    अदाणी समूह ऊर्जा परिवर्तन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुका है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, बिजली ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई औद्योगिक तकनीकों में लगातार निवेश कर रहा है। हाल ही में समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित करने और 10 गीगावाट तक परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना की घोषणा करते हुए भरोसेमंद और कम कार्बन ऊर्जा भविष्य की दिशा में समूह की दीर्घकालिक रणनीति को दोहराया।

  • जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू

    जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के एक नागरिक को हिरासत में लिया है। सुरक्षा एजेंसियां पकड़े गए व्यक्ति से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य और संभावित संपर्कों का पता लगाया जा सके। घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है।

    अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान मोहम्मद सज्जाद के रूप में हुई है जो रफीक का पुत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के पोलास क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। नियमित गश्त और निगरानी के दौरान सुरक्षाबलों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियां देखीं जिसके बाद उसे रोककर हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वह गलती से सीमा पार आया या किसी विशेष उद्देश्य से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।

    इस बीच जम्मू-कश्मीर में आगामी श्री अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। उधमपुर रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा ने कटड़ा में उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पुलिस सेना सीआरपीएफ इंटेलिजेंस ब्यूरो सीआईडी रेलवे ट्रैफिक पुलिस और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    बैठक में कटड़ा शहर यात्रा मार्ग और भवन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली जवानों की तैनाती आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती के निर्देश दिए।

    कटड़ा से भवन तक पूरे यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन किया गया ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिल सके। इसके अलावा होटल लॉज गेस्ट हाउस होमस्टे और अन्य ठहरने की जगहों के नियमित सत्यापन और निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक यात्राओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

  • बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन

    बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन


    नई दिल्ली । इस वर्ष होने वाली श्री अमरनाथ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। यात्रा के दौरान बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक पॉलीथिन बैग थर्माकोल और सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखना और यात्रा मार्ग को प्रदूषण मुक्त बनाना है।

    श्रद्धालुओं को यदि आधार शिविर पर पॉलीथिन बैग के साथ पाया जाता है तो उन्हें उसे आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए प्रशासन ने निशुल्क कपड़े के थैलों की व्यवस्था की है। दोनों प्रमुख आधार शिविरों बालटाल और पहलगाम में करीब डेढ़ लाख कपड़े के बैग तैयार रखे गए हैं जिन्हें जरूरतमंद श्रद्धालुओं को मुफ्त वितरित किया जाएगा।

    यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले सभी भंडारों और दुकानदारों को भी पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों का पालन करना होगा। भोजन परोसने के लिए केवल स्टील की प्लेट और गिलास का उपयोग करने की अनुमति होगी। प्लास्टिक के गिलास या अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

    श्राइन बोर्ड ने इस बार कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया है। यात्रा मार्ग पर उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी इंदौर की गैर सरकारी संस्था स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट को सौंपी गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग को पूरे अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है ताकि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

    यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग चार हजार कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 623 कर्मचारी विशेष रूप से कचरा संग्रहण और उसके प्रबंधन का कार्य संभालेंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 15 प्रतिशत कम कचरा उत्पन्न हो।

    श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर करीब पांच हजार अस्थायी शौचालय और स्नानघर भी स्थापित किए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य खुले में गंदगी रोकना और यात्रियों को बेहतर स्वच्छता उपलब्ध कराना है।

    पिछले वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग 450 टन कचरा एकत्र हुआ था। इस बार प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कचरे की मात्रा कम करने और पूरी यात्रा को अधिक स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा को स्वच्छ तथा प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकेगा।

  • केतन मर्डर केस में बड़ा खुलासा, सिया के भाई को पहले से थी चेतन संग रिश्ते की जानकारी

    केतन मर्डर केस में बड़ा खुलासा, सिया के भाई को पहले से थी चेतन संग रिश्ते की जानकारी


    नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र के लोनावला में स्थित लोहगढ़ किले से 18 जून को हुई रियल एस्टेट डायरेक्टर केतन अग्रवाल की मौत का मामला अब पूरी तरह से एक सोची-समझी हत्या के रूप में सामने आया है। पुणे पुलिस ने इस मामले में मृतक केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को पुलिस ने सिया के भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे तक कड़ी पूछताछ की।

    पूछताछ में साहिल ने खुलासा किया कि उसे अपनी बहन और चेतन के प्रेम प्रसंग के बारे में कई महीने पहले ही पता चल गया था। चूंकि सिया की सगाई केतन से हो चुकी थी, इसलिए उसने अपनी बहन को चेतन से दूरी बना लेने और रिश्ता खत्म करने की सलाह भी दी थी। पुलिस के मुताबिक, साहिल और आरोपी चेतन की दोस्ती साल 2024 में क्रिकेट खेलने के दौरान हुई थी जिसके बाद चेतन की मुलाकात सिया से हुई थी।

    पुलिस जांच में जो सबसे हैरान करने वाली वजह सामने आई है, वह केतन का गंजापन है। सूत्रों के मुताबिक, सगाई के बाद सिया को पता चला कि केतन के सिर पर बाल नहीं हैं और वह विग पहनता है। इसी बात से नाराज होकर सिया केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। दूसरी तरफ, केतन के परिवार का दावा है कि उन्होंने शादी तय होने के समय ही गोयल परिवार को साफ-साफ बता दिया था कि केतन सिर पर एक छोटा सा हेयर पैच लगाता है और इसके लिए उसका महंगा हेयर ट्रीटमेंट भी चल रहा है। इस बात को लेकर सिया और चेतन ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

    चैट डिलीट की, रीसायकल बिन भी किया खाली
    लोनावला डिविजन के पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोनपे ने बताया कि दोनों आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री को पूरी तरह डिलीट कर दिया था। यही नहीं, उन्होंने चालाकी दिखाते हुए फोन के रीसायकल बिन को भी पूरी तरह खाली कर दिया था ताकि कोई सबूत न बचे।

    पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन को डेटा रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) भेज दिया है। पुलिस कस्टडी में दोनों आरोपी अब एक-दूसरे पर हत्या का मढ़ रहे हैं, इसलिए पुलिस अब डिजिटल रिकॉर्ड्स और फॉरेंसिक सबूतों पर ज्यादा निर्भर है।

    उज्ज्वल निकम होंगे विशेष वकील
    इस सनसनीखेज हत्याकांड ने महाराष्ट्र सरकार का ध्यान भी खींचा है। शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में मृतक केतन के पिता विशाल अग्रवाल से मुलाकात की और उन्हें त्वरित न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा, “यह एक बेहद चौंकाने वाली और समझ से परे घटना है। एक समाज के रूप में हमें इस बात पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है कि अच्छे और शिक्षित परिवारों के युवा लड़के-लड़कियों में इस तरह की आपराधिक प्रवृत्ति और बदले की भावना क्यों पनप रही है? यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि इसका एक सामाजिक पहलू भी है।”

    मुख्यमंत्री ने इस मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन को मंजूरी दे दी है ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। पीड़ित परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी वकील एडवोकेट उज्ज्वल निकम को इस केस के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की घोषणा की है। सरकारी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एडवोकेट निकम ने इस केस को लड़ने के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी है।

  • बंगाल: शुभेंदु अधिकारी का धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC लागू करने का ऐलान, विपक्ष ने साधा निशाना

    बंगाल: शुभेंदु अधिकारी का धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC लागू करने का ऐलान, विपक्ष ने साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाएगी। इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा सरकार पर विपक्ष को डराने और दमनकारी कानून लाने का आरोप लगाया।

    रवींद्र सदन में ‘वंदे मातरम्’ गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव और कथित “लव जिहाद” जैसी समस्याओं का प्रमुख कारण है।

    उन्होंने कहा, “हमें थोड़ा समय दीजिए। बंगाल में धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) निश्चित रूप से लागू किए जाएंगे। जो लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर देश की संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं, उन्हें वापस भेजा जाएगा।”

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 1975 के आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 9 अगस्त को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के नए कार्यालय का उद्घाटन भी किया।

    महुआ मोइत्रा का जवाब
    मुख्यमंत्री के बयान और विधानसभा में प्रस्तावित विधेयकों को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

    महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित **बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026** को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर बिना न्यायिक सुनवाई के एक वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है।

    उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून आपातकाल के दौरान लागू रहे मीसा (MISA) और मौजूदा यूएपीए (UAPA) से भी अधिक कठोर है तथा इसमें पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं।

    भाजपा ने किया पलटवार
    टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष सत्ता खोने के बाद जनता के बीच भ्रम और भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि प्रस्तावित **एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026** का उद्देश्य गुजरात और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर संगठित अपराध, सिंडिकेट राज, जबरन वसूली और राजनीतिक हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण करना है। भाजपा के अनुसार, प्रस्तावित कानून में दंगों और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से क्षति की भरपाई कराने का भी प्रावधान किया गया है।

  • IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना

    IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। वायुसेना के करीब 40 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान अब एयर लॉन्च ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस हो चुके हैं। इस नई क्षमता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत और अधिक मजबूत हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र सहित पूरे इलाके में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह निदेशक अलेक्जेंडर मैक्सिचेव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी फ्लीट 2026 के दौरान जानकारी दी कि सुखोई विमानों को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस करने का कार्यक्रम अभी जारी है और अब तक लगभग 40 विमान इस क्षमता से सुसज्जित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई और ब्रह्मोस के संयोजन ने अपनी प्रभावी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल करीब 270 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनमें से कई विमानों को चरणबद्ध तरीके से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लैस किया जा रहा है। एयर लॉन्च ब्रह्मोस का वजन लगभग ढाई टन है जो जमीन से दागे जाने वाले तीन टन के संस्करण से हल्का है। इस हल्के संस्करण को सुखोई विमान के अनुरूप बनाने के लिए विमान में कई तकनीकी बदलाव और व्यापक परीक्षण किए गए हैं।

    इस मिसाइल प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन और समुद्र दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर बेहद सटीक और तेज हमला करने में सक्षम है। भविष्य में इसकी मारक क्षमता को और बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। प्रस्तावित अपग्रेड के बाद एयर लॉन्च ब्रह्मोस की रेंज लगभग 800 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भारतीय लड़ाकू विमान अपनी हवाई सीमा के भीतर रहते हुए भी दुश्मन के अंदरूनी सैन्य ठिकानों पर प्रभावी हमला कर सकेंगे।

    भारतीय वायुसेना लगभग 70 पुराने सुखोई 30MKI विमानों को सुपर सुखोई अपग्रेड कार्यक्रम से अलग रखकर उन्हें भारी मिसाइल वाहक के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इन विमानों का उपयोग भविष्य में ब्रह्मोस और अन्य स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के संचालन के लिए किया जा सकता है।

    इसी बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और ब्रह्मोस एयरोस्पेस अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस एनजी मिसाइल भी विकसित कर रहे हैं। यह मौजूदा मिसाइल से हल्की होगी और इसका वजन लगभग डेढ़ टन रहने की संभावना है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर होगी तथा इसके 2028 से 2029 के बीच सेवा में आने की उम्मीद है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस से लैस सुखोई विमानों की बढ़ती संख्या भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इससे भारत किसी भी संभावित चुनौती का अधिक प्रभावी और तेज जवाब देने में सक्षम होगा तथा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

  • 1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान

    1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान


    नई दिल्ली। भारतीय सेना के इतिहास में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का नाम अदम्य साहस दूरदर्शी नेतृत्व और ऐतिहासिक सैन्य रणनीति के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने केवल 13 दिनों में ऐसी निर्णायक जीत हासिल की जिसने दक्षिण एशिया का भूगोल ही बदल दिया और बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ। लेकिन देश को इतनी बड़ी जीत दिलाने वाले इस महान सैन्य अधिकारी को अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लंबे समय तक पूरा वित्तीय अधिकार नहीं मिल पाया।

    3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में जन्मे सैम होर्मूसजी फ्रैमजी जमशेदजी मानेकशॉ के पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें लेकिन उन्होंने सैन्य जीवन को चुना और 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी के पहले बैच में शामिल हो गए। आगे चलकर उन्होंने अपने नेतृत्व और साहस के दम पर भारतीय सेना में सर्वोच्च सम्मान हासिल किया। गोरखा सैनिकों ने उन्हें सम्मानपूर्वक सैम बहादुर नाम दिया जो आज भी उनकी पहचान बना हुआ है।

    1971 के युद्ध से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति को देखते हुए तत्काल सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया था लेकिन सैम मानेकशॉ ने मौसम और सैन्य तैयारियों का हवाला देते हुए कुछ महीनों का समय मांगा। उन्होंने भरोसा दिया कि पूरी तैयारी के बाद सफलता निश्चित होगी। उनकी रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई और 3 दिसंबर 1971 को युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय सेना ने तेजी से अभियान चलाकर ढाका को चारों ओर से घेर लिया। आखिरकार पाकिस्तान के लगभग 90 हजार सैनिकों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया और बांग्लादेश का गठन हुआ।

    सैन्य सेवा से 15 जनवरी 1973 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी फील्ड मार्शल का पद आजीवन माना जाता है। इस पद पर आसीन अधिकारी को पूर्ण वेतन और सभी सुविधाएं मिलने का अधिकार होता है। हालांकि प्रशासनिक और नौकरशाही कारणों से सैम मानेकशॉ को लंबे समय तक केवल आधी पेंशन ही मिलती रही। यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रही और उनका बकाया भुगतान लंबित रहा।

    बाद में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। उनके प्रयासों के बाद अप्रैल 2007 में तत्कालीन रक्षा सचिव शेखर दत्त अस्पताल पहुंचे और सैम मानेकशॉ को 1.16 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान सौंपा। यह केवल एक आर्थिक भुगतान नहीं बल्कि देश की ओर से अपने महान सैनिक को दिया गया सम्मान भी था।

    27 जून 2008 को तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित सैन्य अस्पताल में फेफड़ों के संक्रमण के कारण 94 वर्ष की आयु में सैम मानेकशॉ का निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि नेतृत्व केवल युद्ध जीतने का नाम नहीं बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने का साहस भी होता है। आज भी भारतीय सेना में उनकी रणनीति नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं।