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  • अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप

    अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने भारत पर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादी संगठनों का कथित तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए इसे ‘डोभाल सिद्धांत’ करार दिया।

    पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार जमील ने दावा किया कि भारत अपनी रणनीति के तहत आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का कथित समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    मुक्ति वाहिनी और एलटीटीई का भी किया जिक्र

    13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में अपने संबोधन के दौरान जमील ने भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 1971 में मुक्ति वाहिनी और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को भारत से मिले कथित समर्थन का जिक्र किया।

    उन्होंने अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) की मौजूदगी के दौरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आसपास भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास संचालित किए जाने का भी उल्लेख किया। जमील ने इन घटनाओं को पाकिस्तान में भारत की कथित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।

    ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी जताई चिंता

    जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ब्रह्मोस मिसाइलों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

    हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसे भारत की सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा बताना भी सही नहीं है।

    जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु संघर्ष के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक संयम के कारण स्थिति को संभाला जा सका। ये उनके आरोप और आकलन हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों पर भी उठाए सवाल

    जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आकलन का हवाला देते हुए भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों की तैनाती के जरिए भारत अपनी सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की अलग से जांच जरूरी है।

    2022 की ब्रह्मोस दुर्घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया

    जमील ने मार्च 2022 में भारतीय वायु सेना की एक ब्रह्मोस मिसाइल के गलती से लॉन्च होने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान पर जानबूझकर किए गए हमले के रूप में पेश किया।

    दरअसल, मार्च 2022 में एक मिसाइल तकनीकी प्रक्रिया के दौरान गलती से लॉन्च हो गई थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में जाकर गिरी थी। भारत ने इस घटना को आकस्मिक मिसाइल प्रक्षेपण बताया था और मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

    जमील के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान में भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमताओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और जानबूझकर अस्थिरता फैलाने जैसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल

    Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) (Artificial Intelligence – AI) भारत (India) में नौकरियों को निगल नहीं रहा लेकिन कॅरिअर की पहली सीढ़ी को संकरा जरूर कर रहा है। विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट इंडिया डेवलपमेंट अपडेट अक्तूबर 2026 में यह दावा किया गया है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 10 शहरों की 651 आईटी कंपनियों के सर्वे में एआई के कारण कुल रोजगार में कमी नहीं मिली लेकिन 55 फीसदी कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती घटा दी। मध्यम स्तर की भर्ती घटाने वाली कंपनियां 25 फीसदी और वरिष्ठ पदों पर घटाने वाली 14% थीं। रिपोर्ट का आकलन है कि समायोजन अब तक मुख्यतः धीमी भर्ती के रास्ते हुआ है, मौजूदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी से नहीं। रूटीन कोडिंग, टेस्टिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम, जो आम तौर पर फ्रेशर्स के हिस्से आते थे, एआई के लिए सबसे आसान हैं।

    आईटी क्षेत्र की तस्वीर बंटी हुई है। छह सबसे बड़ी आईटी-सेवा कंपनियों ने 17 लाख के संयुक्त कार्यबल में से करीब 64 हजार कम किए। इसी दौरान जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) समेत बाकी टेक-सेवा क्षेत्र ने तीन साल में करीब सात लाख लोगों को जोड़ा। इससे इस क्षेत्र का कुल रोजगार लगभग 44 लाख पहुंच गया। रिपोर्ट इसे पूरे उद्योग का सिकुड़ना नहीं, चुनिंदा बड़ी कंपनियों में कर्मचारी संख्या की छंटाई मानती है।

    नोमुरा के मुताबिक, 2022 से अगस्त 2026 के बीच एशिया की 69 कंपनियों की घोषणाओं में करीब 1.31 लाख एआई-संबंधी भर्तियां और 61 हजार छंटनी दर्ज हुए। भारत में 83,100 भर्तियां और 31,921 छंटनी हुईं, यानी शुद्ध करीब 51 हजार पदों की बढ़त।


    किस पर और कितना प्रभाव?

    भारत में कुल रोजगार का केवल 22 प्रतिशत हिस्सा एआई के ‘उच्च जोखिम’ के दायरे में आता है, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा लगभग 60 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण भारत में कृषि और मैनुअल कार्यों की अधिकता है।

    22 प्रतिशत हिस्से में से 8 प्रतिशत कार्य ऐसे हैं जहां एआई काम का स्वरूप बदल देगा (जैसे वित्तीय और दूरसञ्चार सेवाएं), जबकि 14 प्रतिशत हिस्से (जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा) में उत्पादकता बढ़ने की संभावना है। एआई का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी, उच्च शिक्षित और पेशवर युवाओं पर पड़ रहा है, जबकि खेत मजदूरों और निर्माण श्रमिकों पर इसका असर नगण्य है।


    कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी हो रहा इस्तेमाल

    एआई और भारत का श्रम बाजार आमने-सामने नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बनकर खड़े हो रहे हैं। वैश्विक मंच पर एआई को अपनाने के मामले में भारत 83 अर्थव्यवस्थाओं में 10वें स्थान पर है।


    कृषि में क्रांति:

    केरल का काथिर प्लेटफॉर्म (केरल कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र और सूचना भंडार) और महाराष्ट्र का महाविस्तार-एआई उपग्रह तस्वीरों और एआई एनालिटिक्स के जरिये किसानों को उनकी अपनी स्थानीय भाषा में बोलकर कीट नियंत्रण, मौसम और मंडी भाव की सटीक जानकारी दे रहे हैं।


    स्वास्थ्य सेवा में चमत्कार:

    एआई-संचालित चेस्ट एक्स-रे टूल्स दूरदराज के गांवों में बिना इंटरनेट के भी गंभीर बीमारियों की पहचान पारंपरिक तरीकों से कहीं अधिक सटीकता और बेहद कम खर्च में कर रहे हैं।

  • काशी में फिर दिखा अद्भुत नजारा… 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर मूल स्वरूप में हुई गंगा आरती

    काशी में फिर दिखा अद्भुत नजारा… 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर मूल स्वरूप में हुई गंगा आरती


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) में मां गंगा (Mother Ganga) की विश्वप्रसिद्ध आरती का भव्य नजारा एक बार फिर दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat) पर देखने को मिला. बाढ़ के पानी के कारण 64 दिनों से अपने पारंपरिक स्थान (Traditional location) से दूर हो रही गंगा आरती मंगलवार, 20 अक्टूबर को अपने मूल स्थान पर लौट आई. घाट के निर्धारित प्लेटफॉर्म पर आरती शुरू होते ही हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने पहुंचे. दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और मां गंगा की आराधना से पूरा घाट भक्तिमय हो उठा।


    64 दिन तक छत पर हुई गंगा आरती

    दरअसल, गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट पर आरती के आयोजन में बदलाव करना पड़ा था. 17 अगस्त से गंगा सेवा निधि की ओर से विश्वप्रसिद्ध आरती संस्था के कार्यालय की छत पर कराई जा रही थी. बाढ़ के पानी के चलते श्रद्धालु घाट के पारंपरिक प्लेटफॉर्म पर आरती का नजारा नहीं देख पा रहे थे. अब जलस्तर में कमी आने के बाद आरती को फिर से उसके मूल स्थान पर शुरू कर दिया गया है।

    मंगलवार को जैसे ही दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक तरीके से आरती संपन्न हुई, वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उत्साह देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग मां गंगा की आरती में शामिल हुए. काशी की पहचान मानी जाने वाली इस आरती के अपने पुराने स्थान पर लौटने से घाट पर एक बार फिर रौनक दिखाई दी।


    अभी सामान्य नहीं हुआ गंगा का जलस्तर

    गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि मां गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण 64 दिनों तक कार्यालय की छत पर आरती आयोजित की गई. मंगलवार को दशाश्वमेध घाट के पारंपरिक स्थान पर आरती संपन्न हुई. हालांकि, गंगा का जलस्तर अभी भी सामान्य से करीब 10 से 15 फीट अधिक बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पक्के घाटों का संपर्क एक बार फिर जुड़ गया है. आगामी पर्वों को देखते हुए घाटों की सफाई भी कराई जा रही है. बाढ़ के कारण बदली व्यवस्था के बाद गंगा आरती का अपने मूल स्थान पर लौटना काशी के श्रद्धालुओं के लिए राहत और आस्था से जुड़ा खास अवसर है।

  • चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या

    चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या


    देहरादून।
    चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2026) अंतिम चरण में है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम (Kedarnath and Badrinath Dhams) में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है। अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 60 लाख पार हो गया है। 16 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद यात्रा शीतकाल के लिए स्थगित होगी। चारधामों के शीतकालीन प्रवास स्थल से शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जाएगा।

    19 अप्रैल को चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। बीते वर्ष की तुलना में इस बार मानसून सीजन में चारधाम यात्रा का संचालन निर्बाध रूप से जारी रही। पहली बार केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के अलावा हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है।

    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया, केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी के दिशानिर्देश पर यात्रा सुचारू रूप से संचालित है। पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन करने का नया रिकॉर्ड बना है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या उत्तराखंड के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को दर्शाती है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यात्रा मार्गों पर सड़क, स्वास्थ्य, यातायात और सुरक्षा संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।


    धाम – दर्शनार्थियों की संख्या

    केदारनाथ – 17,65,520
    बदरीनाथ – 20,70,500
    गंगोत्री – 8,38,422
    यमुनोत्री – 9,45,572
    हेमकुंड साहिब – 3,90,696

  • अमृतसर से हथियार, ट्रेन से मुंबई और फिर फायरिंग, टाइगर श्रॉफ केस में लॉरेंस गैंग के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

    अमृतसर से हथियार, ट्रेन से मुंबई और फिर फायरिंग, टाइगर श्रॉफ केस में लॉरेंस गैंग के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा


    नई दिल्ली। मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो युवकों और दो महिलाओं को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाएं कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए कुरियर का काम करती थीं और ट्रेन से पिस्तौल लेकर मुंबई पहुंची थीं। इस मामले में पहले ही तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक कुल सात आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार किसके निर्देश पर जुटाए गए और फायरिंग की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों से इनका संपर्क कैसे हुआ।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल सुमित राधा और बबिता के रूप में हुई है। कुणाल की उम्र 21 साल और सुमित की उम्र 19 साल बताई गई है। दोनों हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। वहीं 23 वर्षीय राधा उत्तर प्रदेश के सीतापुर और 23 वर्षीय बबिता आजमगढ़ की निवासी है। पुलिस के अनुसार हथियारों की व्यवस्था करने में कुणाल की अहम भूमिका थी। वह हाल ही में जेल से जमानत पर बाहर आया था। एक दोस्त के माध्यम से उसकी पहचान अनिल पंडित से हुई थी। इसके बाद दोनों कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत करने लगे। जांच में सामने आया कि अनिल पंडित के निर्देश पर कुणाल अमृतसर गया और वहां से एक पिस्तौल तथा 20 कारतूस जुटाए।

    पुलिस के मुताबिक हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए कुणाल ने राधा को तैयार किया। करीब दो महीने पहले दोनों की मुलाकात हुई थी। इसके बाद कुणाल ने उसे अपनी गतिविधियों के बारे में बताया और पिस्तौल लेकर मुंबई जाने के लिए राजी किया। 15 अक्टूबर 2026 को कुणाल राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा। दोनों महिलाएं ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हुईं। पिस्तौल राधा के बैग में रखी गई थी और सफर के दौरान कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए उनके संपर्क में रहा।

    जांच के अनुसार 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएं मुंबई के दादर स्टेशन पहुंचीं और एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास आया और राधा से बैग लेकर चला गया। उस बैग में पिस्तौल होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैग लेने वाला नाबालिग किसके संपर्क में था और हथियार आगे किसे सौंपा गया। फिलहाल वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद नहीं हुई है।

    इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर कई राउंड फायरिंग की गई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल खेलने के बाद लौट रहे थे। इस दौरान उनकी कार को निशाना बनाया गया। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से एक पोस्ट भी सामने आई थी लेकिन उसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस के मुताबिक फायरिंग के बाद हमलावरों को मुंबई से बाहर निकालने की कोशिश भी की गई थी। इसी मामले में राजस्थान के कोटा से पहले तीन संदिग्धों रेहान उर्फ सुक्का ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और एक नाबालिग को पकड़ा गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने आशंका जताई थी कि फायरिंग का मकसद अभिनेता को डराना था। हालांकि मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। चार नई गिरफ्तारियों के बाद अब पुलिस हथियार जुटाने से लेकर मुंबई पहुंचाने फायरिंग और आरोपियों को बाहर निकालने की कथित योजना तक सभी कड़ियों को जोड़ रही है। 

  • CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था

    CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन और पार्टी के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे जबकि वह खुद उनके निर्देशों का पालन करते थे। दिपके के इस बयान ने आंदोलन के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई और परिवार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया भी दी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि दिवाली तक पार्टी की ओर से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है।

    अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया था। यह वीडियो उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और समर्थकों से कुछ समय के लिए विराम लेने की अपील की। दिपके ने कहा कि बाहर से लोगों को भले ही ऐसा लगता रहा हो कि आंदोलन का नेतृत्व वह कर रहे हैं लेकिन वास्तव में कई बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका ही लेते थे। उनके मुताबिक दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है।

    दिपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है। उन्होंने दोनों को केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं बल्कि अपना भाई और परिवार बताया। दोनों की गिरफ्तारी से उन्हें गहरा भावनात्मक झटका लगा है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने तीनों के बीच के निजी संबंधों का भी जिक्र किया। दिपके ने बताया कि उनका एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था जिसमें वे एक दूसरे के साथ मीम्स साझा करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि दोनों अब भी उनके साथ मौजूद हैं।

    CJP संस्थापक ने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं और आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर फिलहाल आराम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी की ओर से किसी प्रदर्शन की योजना नहीं है। उनके इस ऐलान को मौजूदा परिस्थितियों के बीच आंदोलन की गतिविधियों में अस्थायी विराम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आगे आंदोलन की रणनीति क्या होगी इस पर उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

    गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया और पहले से हस्ताक्षरित पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए जाने की भी बात सामने आई थी। दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।

    दिपके ने फ्रांस में हुए दंगों से CJP के प्रदर्शन की तुलना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना। उनके अनुसार दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति और करुणा का रास्ता अपनाया। दिपके ने उनके इस रुख की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि जेल जाने के बाद भी उन्होंने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।

    अभिजीत दिपके के बयान से साफ है कि वह सौरव दास और आशुतोष रांका को आंदोलन की रणनीति और फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाला मानते हैं। फिलहाल दिवाली तक प्रदर्शन स्थगित रखने के ऐलान के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि त्योहार के बाद CJP अपनी अगली रणनीति किस तरह तय करती है।

  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 42 साल बाद उसी किरण विमान से भरी आखिरी उड़ान, पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रहे साथ

    वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 42 साल बाद उसी किरण विमान से भरी आखिरी उड़ान, पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रहे साथ

    नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अपने लंबे फ्लाइंग करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पूरी की। उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी में एचजीटी-16 किरण ट्रेनर विमान से अपनी ‘यूनिफॉर्म में आखिरी उड़ान’ भरी। इस 55 मिनट की उड़ान को खास बनाने वाली बात यह रही कि उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) वीएस कोचर भी मौजूद थे। यह उड़ान उनके चार दशक से अधिक लंबे विमानन करियर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आई।

    एपी सिंह ने 28 जनवरी 1984 को इसी एयर फोर्स एकेडमी से किरण विमान के जरिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। चार दशक से अधिक समय बाद उसी स्थान और उसी प्रकार के विमान में अंतिम आधिकारिक उड़ान पूरी करके उन्होंने अपने करियर के एक खास अध्याय को प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया। विमान की पहचान संख्या U 707 थी। इस उड़ान के साथ उनकी शुरुआती प्रशिक्षण यात्रा और वर्तमान जिम्मेदारी के बीच एक अनूठा जुड़ाव देखने को मिला।

    उड़ान पूरी होने के बाद एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी वायुसेना यात्रा इसी बेसिक ट्रेनर विमान से शुरू की थी। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः वह पहले ऐसे वायुसेना प्रमुख हैं, जो उसी बेसिक ट्रेनर विमान से सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में उड़ाया था और जो अब भी सेवा में है। उन्होंने अपने पहले प्रशिक्षक वीएस कोचर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि कोचर ने इसी स्थान पर उन्हें उड़ान भरना सिखाया था। इसी वजह से वह अपने फ्लाइंग करियर का यह महत्वपूर्ण पड़ाव उनके साथ पूरा करना चाहते थे।

    किरण विमान के एयर फोर्स एकेडमी के रनवे पर उतरते ही वहां मौजूद वायुसेना के अधिकारियों और जवानों ने वाटर कैनन सैल्यूट देकर उनका स्वागत किया। यह सम्मान वायुसेना में एक विशेष अवसर पर दिया जाने वाला पारंपरिक अभिनंदन है। इस मौके पर एपी सिंह के पूर्व प्रशिक्षक वीएस कोचर भी मौजूद थे। 73 वर्षीय कोचर अपने पूर्व छात्र के साथ दोबारा आसमान में उड़ान भरने के अनुभव से भावुक नजर आए।

    कोचर ने एपी सिंह की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपने सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि एपी सिंह बेहतरीन वायुसेना प्रमुखों में शामिल हैं और उनके साथ दोबारा उड़ान भरना किसी सपने के सच होने जैसा है। इस अनुभव ने प्रशिक्षक और प्रशिक्षु के उस रिश्ते को भी रेखांकित किया, जो प्रशिक्षण के वर्षों बाद भी कायम रहता है।

    इससे पहले 12 अक्टूबर को एपी सिंह ने जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में अपनी अंतिम फाइटर जेट उड़ान भरी थी। तेजस की उड़ान लड़ाकू विमान संचालन से जुड़ी उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव थी, जबकि किरण विमान में मंगलवार को भरी गई उड़ान वर्दी में उनकी अंतिम आधिकारिक उड़ान बनी।

    एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की सेवानिवृत्ति इसी महीने के अंत में निर्धारित बताई गई है। ऐसे समय में अपने पहले प्रशिक्षक के साथ उसी विमान में उड़ान भरना, जिसमें उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान करियर शुरू किया था, उनके लिए विशेष महत्व रखता है। यह घटना वायुसेना के प्रशिक्षण, पेशेवर अनुशासन और अनुभव की निरंतरता को भी सामने लाती है।

    चार दशक से अधिक के फ्लाइंग करियर के इस पड़ाव में पहली उड़ान से अंतिम आधिकारिक उड़ान तक का जुड़ाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। जिस संस्थान और विमान से एपी सिंह ने अपने विमानन जीवन की शुरुआत की थी, उसी से जुड़कर उन्होंने वर्दी में अपनी अंतिम उड़ान पूरी की। उनके साथ पहले प्रशिक्षक की मौजूदगी ने इस अवसर को और यादगार बना दिया।

  • मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संबोधन दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़े इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

    भागवत ने स्वदेशी अपनाने और अपने देश की पहचान को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय समाज भावनात्मक रूप से एकजुट है। इस संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक चेतना और नागरिकों के बीच परस्पर जुड़ाव राष्ट्रीय जीवन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों का भी स्मरण किया। उन्होंने इन महापुरुषों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही बंगाल के राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वदेशी मेलों के माध्यम से आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के प्रयासों की चर्चा की।

    नेपाल में आई त्रासदी पर चिंता जताते हुए भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन में हुए एकांगी विकास को क्षेत्रीय संकट के संदर्भ में रेखांकित किया। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि अपनाने की जरूरत है।

    भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा पर बात करते हुए उन्होंने सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि विभिन्न पंथों, जातियों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव रखती है। सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया।

    नई पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए भागवत ने उचित और अनुचित के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ओटीटी मंचों पर नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों की भूमिका कम होने के कारण बच्चों और युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन तथा समाज को मिलकर देशव्यापी प्रयास करने की जरूरत बताई।

    भागवत ने हिंदू भाव को किसी एक पूजा पद्धति, भाषा, खानपान या रहन-सहन तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व से जुड़ी व्यापक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने वाली विभाजनकारी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। उनके भाषण में विदेशी शक्तियों और उनके कथित सहयोगियों द्वारा भारत में आंतरिक मतभेद बढ़ाने की आशंका भी शामिल रही।

    आंदोलनों के संबंध में भागवत ने कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों के कारण विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संविधान, कानून और शालीन व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, राजनीतिक लाभ, वोट और लोकप्रियता की इच्छा सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

    अंत में उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के प्रयास, जिम्मेदारी और कर्तव्यपालन से ही हासिल किया जा सकता है।

  • दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    नई दिल्ली । दशहरा और विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में लोग भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं और रावण दहन के माध्यम से बुराइयों के अंत का संदेश देते हैं। दशहरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह सत्य, साहस, सदाचार और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

    विजयादशमी के अवसर पर परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को शुभकामनाएं देने की परंपरा भी खास महत्व रखती है। लोग इस दिन संदेशों, प्रेरणादायक विचारों और सामाजिक माध्यमों पर साझा किए जाने वाले स्टेटस के जरिए एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं। शुभकामना संदेशों में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना प्रमुख रूप से शामिल रहती है।

    दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इस घटना को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में याद किया जाता है। वहीं, कुछ परंपराओं में विजयादशमी को देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है। इस तरह यह पर्व अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शक्ति, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है।

    दशहरे पर रावण दहन की परंपरा इस पर्व का प्रमुख आकर्षण है। रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। इनमें अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, घृणा, भय और वासना जैसी बुराइयां शामिल हैं। रावण दहन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में केवल बाहरी बुराइयों का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी गलत आदतों और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रयास भी जरूरी है।

    20 अक्टूबर को दशहरा पूजा के लिए बताए गए प्रमुख शुभ समय में विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। इसी समय को ध्यान में रखते हुए रावण दहन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद करने का उल्लेख है। हालांकि, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    दशहरे पर भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में भगवान श्रीराम की कृपा, परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना की जाती है। लोग अपने प्रियजनों को संदेश भेजकर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बने रहने की प्रार्थना करते हैं। कुछ संदेश जीवन की चुनौतियों का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देते हैं।

    प्रेरणादायक विचारों में यह संदेश प्रमुख है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः अच्छाई का महत्व बना रहता है। विजयादशमी लोगों को अपने व्यवहार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने की सीख भी देती है। इस अवसर पर अहंकार और नफरत छोड़कर आपसी सम्मान तथा विश्वास को मजबूत करने का संकल्प लिया जा सकता है।

    WhatsApp स्टेटस के जरिए भी लोग दशहरा की शुभकामनाएं साझा करते हैं। जय श्रीराम, सत्य की जीत और असत्य के अंत जैसे संदेश इस अवसर पर विशेष रूप से प्रासंगिक रहते हैं। इन संदेशों का उद्देश्य पर्व की भावना को अपनों तक पहुंचाना और जीवन में अच्छे विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

    दशहरा 2026 का पर्व धार्मिक आस्था के साथ आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है। भगवान श्रीराम की विजय और रावण दहन की परंपरा लोगों को याद दिलाती है कि सत्य, संयम और सदाचार का रास्ता जीवन में महत्वपूर्ण है। विजयादशमी पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के साथ अपनी बुराइयों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करने का संकल्प इस त्योहार के संदेश को सार्थक बना सकता है।