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  • E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस

    E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस


    नई दिल्ली। E20 फ्यूल पॉलिसी और चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से पहले एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने दिल्ली पुलिस पर उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देने का आरोप लगाया है। पूनावाला का दावा है कि शनिवार को पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर जाने से रोक दिया।

    पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई वीडियो शेयर किए हैं। इनमें वह पुलिसकर्मियों से सवाल करते नजर आ रहे हैं कि उन्हें जंतर-मंतर जाने से क्यों रोका जा रहा है। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहता नजर आता है कि प्रदर्शन स्थल पर उनके पहुंचने से समर्थक जुट सकते हैं और भीड़ में कुछ गलत लोग शामिल हो सकते हैं। पूनावाला ने इस पर सवाल उठाया कि महज आशंका के आधार पर पुलिस किसी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने से कैसे रोक सकती है।

    ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं, कोई दस्तावेज नहीं मिला’
    पूनावाला ने इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में दावा किया कि उनके सिटिजन एडवोकेसी ग्रुप ‘टीम भारत’ ने चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं। कोई दस्तावेज नहीं दिया गया है।’ पूनावाला ने पुलिसकर्मियों पर तंज कसते हुए उन्हें गन्ने का जूस भी ऑफर किया। इसका वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीनी और एथेनॉल से जुड़ी नीतियां आगे बढ़ रही हैं, आने वाले समय में गन्ने का जूस भी महंगा हो सकता है।

    E20 नीति को लेकर भी विरोध
    पूनावाला का विरोध केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर भी है। इस नीति के तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने का प्रावधान है। पूनावाला का आरोप है कि एथेनॉल और चीनी से जुड़ी नीतियों का असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने इन नीतियों को ‘शुगर स्कैम’ और ‘एथेनॉल स्कैम’ बताते हुए दावा किया कि इससे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के परिवारों को फायदा पहुंच रहा है।

    हालांकि, पूनावाला द्वारा साझा किए गए वीडियो में पुलिस की ओर से उन्हें नजरबंदी या हिरासत का कोई लिखित आदेश देते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें जंतर-मंतर नहीं जाने की बात कहते हुए संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते नजर आते हैं।

    पहले भी पुलिस से हुआ है टकराव
    E20 के विरोध को लेकर पूनावाला और दिल्ली पुलिस के बीच पहले भी टकराव हो चुका है। 31 जुलाई को उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम रोड से तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति तक अकेले मार्च और दिनभर की भूख हड़ताल का ऐलान किया था।

    इससे पहले भी उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस ने संसद तक ‘टीम भारत’ की प्रस्तावित ‘गाड़ी मार्च’ को अनुमति नहीं दी थी। पूनावाला का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है और सरकार की चीनी तथा एथेनॉल नीति पर सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

  • ‘आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार’, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोले चिराग पासवान

    ‘आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार’, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोले चिराग पासवान


    पटना। जंतर-मंतर पर आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। पटना एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। इसे किसी के कहने या मांग करने भर से खत्म नहीं किया जा सकता।

    चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन सामाजिक वर्गों को आगे लाना है, जिन्हें लंबे समय तक भेदभाव और वंचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान में इन वर्गों को चिन्हित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और समान अवसर देने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया।

    ‘आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं’

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समाज में आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में आरक्षण की जरूरत और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों की चिंताओं को भी सुने जाने की बात कही।

    चिराग ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए निकाला जा सकता है। प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आरक्षण की जरूरत और इसके पीछे के उद्देश्य को लेकर बातचीत हो सके।

    ‘प्रदर्शनकारियों की बात सुनी जानी चाहिए’

    रामदास अठावले के बयान से जुड़े सवाल पर भी चिराग पासवान ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है और बातचीत के जरिए ही विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।

    बिहार की आर्थिक स्थिति पर तेजस्वी को घेरा

    चिराग पासवान ने बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर तेजस्वी यादव के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष को आंकड़ों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। विपक्ष की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि राज्य को आगे बढ़ाने में सरकार के साथ मिलकर भूमिका निभाना भी है।

    उन्होंने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।

    ‘डबल इंजन सरकार से बिहार को फायदा’

    चिराग पासवान ने केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार को बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मिलकर काम करने से राज्य को फायदा होगा। सरकार का लक्ष्य विकास को गति देने के साथ निवेश बढ़ाना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

  • चीनी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई आम लोगों की चिंता, सोशल मीडिया पर महंगाई को लेकर वायरल हो रहे मजेदार मीम्स और जोक्स

    चीनी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई आम लोगों की चिंता, सोशल मीडिया पर महंगाई को लेकर वायरल हो रहे मजेदार मीम्स और जोक्स

    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी अब केवल बाजार और घरेलू बजट तक सीमित नहीं रही है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। महंगी होती चीनी को लेकर लोग तरह-तरह के मजेदार मीम्स, वीडियो और जोक्स साझा कर रहे हैं। बढ़ती कीमतों के बीच इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से चर्चा में आ रही हैं।

    चीनी रोजमर्रा की जरूरत की प्रमुख खाद्य वस्तुओं में शामिल है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर त्योहारों का मौसम नजदीक होने के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मिठाइयों और घरेलू पकवानों में इसका इस्तेमाल अधिक होने से आने वाले दिनों में इसकी खपत भी बढ़ सकती है।

    बाजार से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, देश के कुछ हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। अलग-अलग राज्यों और बाजारों में कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। इसी वजह से उपभोक्ताओं के बीच बढ़ते खर्च को लेकर चिंता बढ़ी है।

    मुंबई के बाजार में भी चीनी के भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त के मध्य में एम30 ग्रेड चीनी की कीमत करीब 59 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। रोजाना इस्तेमाल की वस्तु होने के कारण कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है।

    पंजाब में स्थिति और अधिक चर्चा में है। यहां चीनी का थोक भाव करीब 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि खुदरा दुकानों पर इसकी कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जा रही है। स्थानीय बाजार में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान खींचा है।

    त्योहारों से पहले मांग बढ़ना चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे बताए जा रहे प्रमुख कारणों में से एक है। इस अवधि में घरों के अलावा मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े व्यवसायों में भी चीनी की मांग बढ़ती है। मांग और बाजार में उपलब्धता के बीच संतुलन बिगड़ने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की ओर से भी बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखने और जमाखोरी पर नजर बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। बाजार में आपूर्ति सामान्य बनाए रखना और अनावश्यक रूप से कीमत बढ़ने से रोकना इस समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अलग असर सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है। इंटरनेट यूजर्स महंगाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया सीधे शिकायत के बजाय हास्य और व्यंग्य के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं। कई मीम्स में चीनी की कीमतों की तुलना दूसरी महंगी वस्तुओं से की जा रही है, जबकि कुछ पोस्टों में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले घरेलू खर्च को मजाकिया अंदाज में दिखाया जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ये मीम्स इस बात का संकेत भी देते हैं कि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बदलाव आम लोगों के बीच कितनी तेजी से चर्चा का विषय बन जाता है। हालांकि मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट मनोरंजन का माध्यम हैं, लेकिन इनके पीछे बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्च को लेकर लोगों की वास्तविक चिंता भी दिखाई दे रही है।

    आने वाले त्योहारों को देखते हुए चीनी की कीमतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि मांग बढ़ती है तो आपूर्ति और कीमतों का संतुलन महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए बढ़े हुए भाव राहत की खबर नहीं हैं, जबकि सोशल मीडिया ने इस आर्थिक परेशानी को हास्य और मीम्स के जरिए एक अलग चर्चा में बदल दिया है।

  • जेन-जी वोटर्स से सीधा जुड़ाव बढ़ाएगी भाजपा, नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी समेत कई प्रमुख नेता शामिल

    जेन-जी वोटर्स से सीधा जुड़ाव बढ़ाएगी भाजपा, नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी समेत कई प्रमुख नेता शामिल

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने जेन-जी यानी युवा पीढ़ी के बीच अपनी पहुंच और संवाद को मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। शनिवार को भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक हुई। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ युवा मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा हुई।

    पार्टी ने जेन-जी से सीधे जुड़ने के लिए अपनी नई राष्ट्रीय टीम के प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। इस टीम में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े, गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी तथा छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं के माध्यम से युवाओं की सोच, उनकी प्राथमिकताओं और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझने पर जोर दिया जाएगा।

    भाजपा की योजना के तहत युवा संवाद अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से 14 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि संवाद आधारित कार्यक्रमों के जरिए युवा वर्ग के साथ सीधा संपर्क स्थापित किया जा सकता है और उनके मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

    प्रस्तावित कार्यक्रमों में युवाओं के साथ बातचीत, चर्चा और संवाद के अवसर तैयार किए जाएंगे। इनमें युवाओं को भाजपा नेताओं के साथ सीधे बातचीत करने तथा शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सामाजिक विषयों और भविष्य से जुड़े सवाल रखने का अवसर मिलने की संभावना है। अभियान का विस्तृत कार्यक्रम, स्थान और प्रारूप आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।

    शनिवार की बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और केंद्र तथा राज्य सरकारों की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की रणनीति पर विचार किया गया। पार्टी की कोशिश संगठनात्मक गतिविधियों को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की है।

    बैठक में वंदे मातरम को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा ने कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पद गाए जाने के फैसले की आलोचना की और कहा कि वंदे मातरम की विरासत और सम्मान से राजनीतिक सुविधा के लिए समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने इसके सम्मान और ऐतिहासिक विरासत को देशभर में पहुंचाने के लिए अभियान चलाने की बात कही।

    नितिन नवीन ने भाजपा अध्यक्ष बनने के 209 दिन बाद 17 अगस्त को 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। इसमें 51 नए चेहरों को जगह दी गई है। टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं। स्मृति ईरानी और राम माधव की संगठन में वापसी हुई है, जबकि वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा और तीरथ सिंह रावत जैसे अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

    नई टीम में पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और बीएल संतोष को संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। वहीं, भाजपा के आईटी सेल की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। अमित मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को यह जिम्मेदारी दी गई है। महासमुंद की लोकसभा सांसद रूपकुमारी चौधरी को भाजपा महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

    नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और टीम के सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। भाजपा के लिए जेन-जी अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी युवा वर्ग के साथ लगातार प्रत्यक्ष संवाद बढ़ाने और उनकी बदलती प्राथमिकताओं को संगठनात्मक रणनीति में शामिल करने पर जोर दे रही है।

  • अखिलेश के बयान से गरमाई यूपी की सियासत, मायावती ने सपा की जातीय राजनीति और पुराने गठबंधन पर उठाए सवाल

    अखिलेश के बयान से गरमाई यूपी की सियासत, मायावती ने सपा की जातीय राजनीति और पुराने गठबंधन पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की राष्ट्रीय लोकदल और जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयान को अमर्यादित और अशोभनीय बताया है। मायावती ने जयंत चौधरी और उनके राजनीतिक परिवार का सम्मान करने की बात कहते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की है।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव की ओर से यह कहना कि उन्होंने अपने पुराने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता को चवन्नी से रुपया बनाया, राजनीतिक शिष्टाचार के लिहाज से उचित नहीं है। उन्होंने इस टिप्पणी को लेकर अखिलेश यादव से राष्ट्रीय लोकदल, जयंत चौधरी और चौधरी चरण सिंह के परिवार के प्रति कथित अपमान के लिए माफी मांगने को कहा।

    बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का अपने सहयोगी दलों के साथ व्यवहार लंबे समय से राजनीतिक स्वार्थ और संकीर्णता से प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की इसी कार्यशैली के कारण कई मौकों पर उसके राजनीतिक सहयोगियों के साथ संबंध खराब हुए हैं। मायावती ने दावा किया कि ऐसे राजनीतिक मतभेदों का लाभ अक्सर भारतीय जनता पार्टी को मिला और विपक्षी या धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।

    मायावती ने अपने बयान में सपा और बसपा के पुराने गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा के साथ बसपा के गठबंधन और बाद में उसके टूटने की घटना को याद किया। उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र करते हुए उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने आरोपों के संदर्भ में सामने रखा।

    बसपा प्रमुख ने इसके बाद अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए सपा और बसपा के चुनावी गठबंधन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ था, लेकिन अपेक्षित चुनावी परिणाम नहीं आने के बाद यह गठबंधन ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। मायावती ने इसके लिए सपा के रवैये को जिम्मेदार ठहराया।

    मायावती ने अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अखिलेश यादव पीडीए में शामिल पी शब्द को कभी पिछड़ा वर्ग और कभी पंडितों के हित से जोड़ते हैं। मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य समुदायों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के हितों के प्रति पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं रही है।

    उन्होंने सपा की पिछली सरकारों पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ऊंची जातियों के लोगों के साथ भेदभाव तथा उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा शासन के दौरान अपराधी और अराजक तत्वों को बढ़ावा मिला। इन दावों के आधार पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं से आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील की।

    जयंत चौधरी को लेकर शुरू हुई टिप्पणी अब सपा, बसपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस का विषय बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन, सामाजिक समीकरण और पीडीए की रणनीति आगामी चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। मायावती के ताजा हमले ने इन मुद्दों पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की एक टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से जयंत चौधरी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस बयान को जाट समाज से जोड़ते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि जयंत चौधरी के खिलाफ की गई टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने सपा प्रमुख से अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा। मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक परेशानी के कारण अगड़े, पिछड़े और दलित समाज को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन्हें उचित नहीं माना जा सकता।

    मौर्य ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने सैफई परिवार के लिए काफी कुछ किया था और परिवार पर उनका बड़ा एहसान रहा है। मौर्य के मुताबिक, ऐसे राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी पर अखिलेश यादव को विचार करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।

    उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखेगी। मौर्य ने कहा कि भाजपा के साथ अगड़े, पिछड़े और दलित समाज के लोग खड़े हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इसी विवाद के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। मायावती ने कहा कि ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने वाली टिप्पणी जाट समाज को पसंद नहीं आई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अपने बयान के लिए जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

    जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और उनका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से जाट समुदाय से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में उनके खिलाफ किसी टिप्पणी को लेकर सामाजिक प्रतिक्रिया का मुद्दा बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा और बसपा दोनों ने अखिलेश यादव के बयान को लेकर उन्हें घेरने का प्रयास किया है।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। विभिन्न दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे समय में नेताओं के बयानों पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले मुद्दों का रूप ले सकती है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र अखिलेश यादव की जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी है। केशव मौर्य और मायावती दोनों ने अलग-अलग तरीके से इस बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की है। अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अखिलेश यादव इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • पुणे में आज राहुल गांधी का छात्रों से सीधा संवाद, शिक्षा सुरक्षा बराबरी और करियर पर होगी अहम चर्चा

    पुणे में आज राहुल गांधी का छात्रों से सीधा संवाद, शिक्षा सुरक्षा बराबरी और करियर पर होगी अहम चर्चा


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार 22 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम शहर के SSPMS कॉलेज मैदान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर पुणे पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों के सामने 30 शर्तें रखी हैं। इनमें आपत्तिजनक पोस्टर, बैनर और तस्वीरों पर रोक सहित आयोजन स्थल पर अनुशासन बनाए रखने से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और खास तौर पर छात्राओं से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में लाना है। संवाद के दौरान शिक्षा, छात्राओं की सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और करियर के अवसरों जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र-छात्राओं के शामिल होने की बात कही गई है।

    राहुल गांधी का यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब देशभर में युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अवसर महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे बने हुए हैं। कार्यक्रम में छात्राओं को अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं सीधे सामने रखने का अवसर देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके जरिए युवाओं की चिंताओं को समझने और उन्हें व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    SSPMS कॉलेज मैदान राहुल गांधी के लिए पहले से परिचित स्थान है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने इसी मैदान पर एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। करीब दो वर्ष बाद वह एक बार फिर इसी परिसर में पहुंच रहे हैं, लेकिन इस बार कार्यक्रम का केंद्र राजनीतिक जनसभा के बजाय विद्यार्थियों के साथ संवाद है।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत इससे पहले कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन आयोजनों में युवाओं की शिक्षा, भविष्य और देश के विकास में उनकी भूमिका से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई। प्रयागराज में राहुल गांधी ने युवाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए उनके सामर्थ्य को भारत के भविष्य से जोड़ने की बात कही थी।

    पुणे कार्यक्रम से पहले दिल्ली में राहुल गांधी से जुड़ा एक अलग राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के विरोध में उन्होंने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर धरना दिया था। उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

    दिल्ली के घटनाक्रम के बाद पुणे में होने वाले छात्र संवाद पर भी राजनीतिक और सामाजिक नजरें बनी हुई हैं। हालांकि पुणे कार्यक्रम का घोषित केंद्र छात्रों से जुड़े शैक्षणिक, सामाजिक और करियर संबंधी मुद्दे हैं। पुलिस की ओर से लगाई गई 30 शर्तों का उद्देश्य आयोजन के दौरान शांति, सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कार्यक्रम में छात्राओं की सुरक्षा और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े सवालों को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, उच्च शिक्षा तक पहुंच, करियर विकल्प और युवाओं के सामने मौजूद अवसरों जैसे विषय भी संवाद का हिस्सा रहेंगे। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को अपनी बात सीधे रखने का मंच मिलेगा।

    पुणे में आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पुलिस की शर्तों के तहत आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित न हो और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए आयोजकों और प्रशासन के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

  • मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड

    मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा की मौत के बाद सनसनी फैल गई है। छात्रा की गर्भावस्था और उसकी मौत को लेकर एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में शिक्षक खालिद हुसैन शेख और उसके भाई तारिक हुसैन को गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षक किश्तवाड़ के बुमालपोरा मिडिल स्कूल में शिक्षक ग्रेड-द्वितीय के पद पर तैनात था और प्रभारी हेडमास्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था। शिक्षा विभाग ने गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया है। मामले की जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार छात्रा को गर्भावस्था से जुड़ी चिकित्सीय प्रक्रिया के लिए किश्तवाड़ से बाहर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उसने दम तोड़ दिया। अलग-अलग रिपोर्टों में गर्भावस्था की अवधि को लेकर अलग जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम से गर्भावस्था की पुष्टि हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रा गर्भवती कैसे हुई और उसकी मौत से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनीं।

    परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में यौन शोषण और गर्भावस्था से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। आरोपी शिक्षक और उसके भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई की है। मुख्य शिक्षा अधिकारी किश्तवाड़ ने आरोपी शिक्षक को सेवा से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश में दर्ज एफआईआर और शिक्षक के पुलिस हिरासत में होने का हवाला दिया गया है। विभागीय स्तर पर भी मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार छात्रा कुछ समय से स्कूल नहीं आ रही थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि उसकी अनुपस्थिति के बावजूद स्कूल और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।

    घटना सामने आने के बाद किश्तवाड़ और छात्रू क्षेत्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्र

    वाई की मांग उठाई। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की न्यायिक जांच तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

    इस घटना ने नाबालिगों की सुरक्षा और स्कूलों में बच्चों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षक और छात्र के बीच भरोसे का रिश्ता होता है और इसी कारण शिक्षक पर लगे ऐसे आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं। हालांकि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और अदालत में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस छात्रा की मौत की पूरी परिस्थितियों को सामने लाने और उसके साथ कथित यौन शोषण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने पर है। पुलिस ने संबंधित साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों से पूछताछ जारी है। किश्तवाड़ में इस घटना को लेकर आक्रोश बना हुआ है और लोग पीड़ित परिवार के लिए न्याय तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    नई दिल्ली । इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने पर्यटन क्षेत्र में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर जारी किया है। कंपनी ने संविदा के आधार पर पर्यटन मॉनिटर के कुल नौ पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की है। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। उपलब्ध पदों में छह रिक्तियां कॉरपोरेट ऑफिस और तीन पद नॉर्थ जोन के लिए निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन वॉक-इन इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में सफल रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता और निर्धारित मानकों के अनुसार लगभग 30 हजार से 35 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त पद और नियमों के अनुसार अन्य लाभ तथा भत्ते भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

    पर्यटन मॉनिटर के पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव को महत्वपूर्ण रखा गया है। उम्मीदवार के पास पर्यटन विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी विषय में तीन वर्ष की स्नातक डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में एक वर्ष का डिप्लोमा और टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी से जुड़े काम में कम से कम एक वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे।

    एक अन्य निर्धारित योग्यता के अनुसार किसी भी विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में दो वर्ष की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। इस श्रेणी में उम्मीदवार के पास टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी फर्म में कम से कम दो वर्ष का कार्य अनुभव होना आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की अधिकतम उम्र एक सितंबर 2026 को 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आयु संबंधी सभी निर्धारित शर्तों को ध्यान से जांच लें।

    वॉक-इन इंटरव्यू 8 और 9 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। दोनों दिनों इंटरव्यू का समय सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित किया गया है। इंटरव्यू का आयोजन आईआरसीटीसी नॉर्थ जोन कार्यालय, बी-148, 11वीं मंजिल, स्टेट्समैन हाउस, बाराखंबा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में किया जाएगा।

    इंटरव्यू में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। उन्हें भरे हुए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आयु और अन्य जरूरी दस्तावेजों की मूल प्रतियां तथा उनकी फोटोकॉपी साथ ले जानी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो भी रखना जरूरी होगा। इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों का पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन किया जाएगा।

    आवेदन पत्र के लिए उम्मीदवार संबंधित भर्ती अधिसूचना में उपलब्ध फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म का प्रिंट निकालने के बाद उसमें मांगी गई सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी। उम्मीदवारों को यह आवेदन पत्र इंटरव्यू के दिन निर्धारित दस्तावेजों के साथ लेकर जाना होगा। भर्ती संविदा आधार पर होने के कारण उम्मीदवारों को नियुक्ति की अवधि और अन्य शर्तों को भी अधिसूचना के अनुसार समझना चाहिए।