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  • स्वदेश दर्शन से प्रसाद योजना तक दिखा बड़ा असर, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार ने भारत को बनाया उभरती वैश्विक पर्यटन शक्ति

    स्वदेश दर्शन से प्रसाद योजना तक दिखा बड़ा असर, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार ने भारत को बनाया उभरती वैश्विक पर्यटन शक्ति


    नई दिल्ली ।
    पिछले एक दशक में भारत के पर्यटन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने देश की पर्यटन तस्वीर को नई दिशा दी है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के उन्नयन तथा पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप देश के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों की पहुंच, सुविधाओं और आकर्षण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

    पर्यटन क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के पहले चरण के अंतर्गत देशभर में विभिन्न थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से न केवल पर्यटन स्थलों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया गया, बल्कि यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। सड़क संपर्क, पर्यटक सुविधाएं, सूचना केंद्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के विकास से पर्यटन अनुभव पहले की तुलना में अधिक सुगम और आकर्षक बना है।

    पर्यटन विकास की इसी श्रृंखला में धार्मिक स्थलों के उन्नयन के लिए संचालित प्रसाद योजना भी महत्वपूर्ण साबित हुई है। इस योजना के तहत देश के प्रमुख तीर्थ और आस्था केंद्रों में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अनेक परियोजनाएं लागू की गई हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे नई गति मिली है। कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं के विकास से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

    राज्यों को पर्यटन विकास के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष सहायता योजनाओं के माध्यम से भी बड़े निवेश किए गए हैं। विभिन्न राज्यों में स्वीकृत परियोजनाओं का लक्ष्य पर्यटन क्षमता वाले क्षेत्रों को विश्वस्तरीय गंतव्यों के रूप में विकसित करना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद स्थानीय रोजगार, व्यवसाय और सेवा क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पर्यटन क्षेत्र में हुए इन निवेशों का असर विदेशी और घरेलू पर्यटकों की बढ़ती संख्या के रूप में भी सामने आया है। बीते वर्षों में भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, डिजिटल सुविधाएं और आसान यात्रा प्रक्रियाएं इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित आधुनिक पर्यटन सुविधाओं ने भारत को वैश्विक पर्यटन बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।

    सरकार द्वारा ई-वीजा सुविधा का विस्तार भी पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस व्यवस्था ने अनेक देशों के नागरिकों के लिए भारत की यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। वीजा प्रक्रिया में आई सहजता का सकारात्मक प्रभाव विदेशी पर्यटकों की संख्या पर भी देखा गया है। पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार से भारत की वैश्विक पहुंच और मजबूत हुई है।

    पिछले दस वर्षों में देशभर के अनेक पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है और कई नए विकास प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है। पर्यटन क्षेत्र में बढ़ते निवेश के कारण होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और सेवा उद्योगों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिली है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन केवल सांस्कृतिक और सामाजिक आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। लगातार विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे और बढ़ते निवेश के चलते भारत वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है।

  • राष्ट्रपति से पीएम मोदी और अमित शाह की लगातार मुलाकातों से बढ़ी मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें, सियासी हलचल तेज

    राष्ट्रपति से पीएम मोदी और अमित शाह की लगातार मुलाकातों से बढ़ी मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें, सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली । केंद्र की राजनीति में संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इन बैठकों को सामान्य शिष्टाचार से आगे बढ़कर संभावित राजनीतिक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन की ओर से सोशल मीडिया पर इस बैठक की जानकारी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह मुलाकात राष्ट्रपति भवन में हुई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को राष्ट्रपति से भेंट की थी, जिसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में मंत्रिपरिषद में संभावित बदलावों की चर्चा तेज हो गई थी।

    सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन लगातार उच्च स्तरीय बैठकों को मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है।

    हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुछ बदलाव पहले ही देखने को मिले हैं। केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया।

    इसी तरह रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उच्च सदन में पुनः नामांकन नहीं हुआ है। वे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का भी दायित्व संभाल रहे थे। ऐसे घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि सरकार संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर पुनर्गठन की दिशा में विचार कर रही है।

    इसके अतिरिक्त कुछ केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। इस तरह के बदलाव अक्सर राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के दृष्टिकोण से किए जाते हैं। इन्हीं संकेतों के चलते मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार समय-समय पर अपनी टीम में बदलाव कर प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। ऐसे में आगामी समय में मंत्रिपरिषद में नए चेहरों की एंट्री या कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिका में बदलाव संभव माना जा रहा है।

    फिलहाल सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के आधिकारिक बयान में मंत्रिमंडल विस्तार की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रपति से लगातार शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातों ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक सक्रिय कर दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

  • छात्रों को ‘आतंकवादी’ कहने के आरोप पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर इस्तीफे और माफी की मांग

    छात्रों को ‘आतंकवादी’ कहने के आरोप पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर इस्तीफे और माफी की मांग

    नई दिल्ली । देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर छात्रों को लेकर की गई कथित टिप्पणी को लेकर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बजाय उनकी आवाज उठाने वालों को निशाना बना रही है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो छात्र निष्पक्ष परीक्षा, सुरक्षित भविष्य और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, उन्हें ‘आतंकवादी’ कहना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे युवाओं का भरोसा व्यवस्था से कमजोर होता है।

    कांग्रेस नेता ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में बार-बार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां, पेपर लीक की घटनाएं और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार आलोचना करने वालों को देशविरोधी करार देने की राजनीति कर रही है।

    राहुल गांधी ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रणाली युवाओं पर लगातार आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ा रही है। उन्होंने कोटा जैसे शिक्षा केंद्रों में बढ़ते खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अब कई परिवारों के लिए भारी वित्तीय दबाव का कारण बन रही है।

    कांग्रेस नेता ने शिक्षा मंत्री से सीधे तौर पर मांग की कि वे देश के युवाओं से माफी मांगें और अपने पद से इस्तीफा दें। उनका कहना है कि जब बार-बार परीक्षा प्रणाली में खामियां सामने आ रही हैं, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है तथा विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।

    दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल के बयानों में स्वीकार किया है कि देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठा रही है और सुधार की प्रक्रिया जारी है।

    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में छात्रों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • नागरिकता प्रमाण को लेकर नई बहस, सुप्रीम कोर्ट वकील ने उठाए सवाल, पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के बयान के बाद बढ़ी चर्चा

    नागरिकता प्रमाण को लेकर नई बहस, सुप्रीम कोर्ट वकील ने उठाए सवाल, पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के बयान के बाद बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली । भारत में नागरिकता और पासपोर्ट को लेकर जारी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता के बयान ने इस मुद्दे को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा है कि देश की आजादी के करीब 80 वर्ष पूरे होने के बावजूद भारत में नागरिकता को स्पष्ट और एकल रूप से प्रमाणित करने वाला कोई आधिकारिक दस्तावेज मौजूद नहीं है। उनके इस बयान के बाद कानूनी और नीतिगत ढांचे को लेकर बहस और गहरी हो गई है।

    यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विदेश मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के इस बयान के बाद यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा में आ गया और विभिन्न विशेषज्ञों, वकीलों तथा टिप्पणीकारों ने इस पर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की जटिलता को भी दर्शाती है।

    वकील के अनुसार, नागरिकता से जुड़े मामलों में कई दस्तावेजों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इनमें से कोई भी दस्तावेज पूर्ण और निर्णायक प्रमाण के रूप में स्थापित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर पहले भी न्यायिक स्तर पर बहस हो चुकी है और विभिन्न प्रक्रियाओं में नागरिकता निर्धारण को लेकर स्पष्टता की कमी सामने आती रही है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करती है।

    इस बीच विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यात्रा दस्तावेज के रूप में होता है और यह किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कानूनी स्थिति नई नहीं है, बल्कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के लागू होने के समय से ही व्यवस्था का हिस्सा रही है। इसके अनुसार कुछ परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पासपोर्ट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज नागरिकता से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं, लेकिन इन्हें स्वतंत्र और निर्णायक प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाता। मंत्रालय के अनुसार नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के आधार पर किया जाता है, जो इस विषय का कानूनी ढांचा निर्धारित करता है।

    विवाद तब और बढ़ गया जब एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पासपोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी सामने आई, जिसमें इसे मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज बताया गया था। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक और कानूनी हलकों में यह सवाल उठने लगा कि जब पासपोर्ट सरकारी जांच के बाद जारी किया जाता है, तो उसे नागरिकता का पूर्ण प्रमाण क्यों नहीं माना जाता।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में नागरिकता का निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्न स्तरों पर सत्यापन और दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि किसी एक दस्तावेज को अंतिम प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। हालांकि यह स्थिति आम नागरिकों के बीच अक्सर भ्रम पैदा करती है, विशेषकर तब जब विभिन्न सरकारी सेवाओं में अलग-अलग दस्तावेजों की मांग की जाती है।

  • NEET विवाद के बीच राघव चड्ढा की चुप्पी पर उठे सवाल, वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में तेज हुई राजनीतिक बहस

    NEET विवाद के बीच राघव चड्ढा की चुप्पी पर उठे सवाल, वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में तेज हुई राजनीतिक बहस

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं, बल्कि कथित तौर पर महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी चुप्पी बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और उससे जुड़ी चर्चाओं ने उनके राजनीतिक रुख को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    राघव चड्ढा लंबे समय तक उन नेताओं में गिने जाते रहे हैं जो महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रहते थे। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती थी। लेकिन हाल के महीनों में उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं में आई कमी को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सवाल उठा रहे हैं।

    इसी बीच एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग उनसे NEET पेपर लीक मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर उनसे पूछा जाता है कि वह इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं। इसी दौरान व्यंग्यात्मक अंदाज में यह टिप्पणी भी सुनाई देती है कि उनका बोलना ही बंद हो गया है। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    हालांकि वीडियो की परिस्थितियों और उसके पूरे संदर्भ को लेकर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इससे पैदा हुई राजनीतिक चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। कई लोगों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े इतने बड़े विवाद पर प्रमुख राजनीतिक नेताओं की स्पष्ट राय सामने आनी चाहिए। वहीं कुछ समर्थकों का कहना है कि किसी एक मुद्दे पर सार्वजनिक बयान न देने को राजनीतिक निष्क्रियता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    राघव चड्ढा के राजनीतिक सफर में जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने समय-समय पर करदाताओं के हित, बढ़ती महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और शहरी समस्याओं को लेकर अपनी बात प्रमुखता से रखी है। यही कारण है कि उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो सीधे आम लोगों से जुड़े विषयों पर सवाल उठाते रहे हैं। वर्तमान विवाद में भी उनकी पुरानी राजनीतिक शैली की तुलना मौजूदा स्थिति से की जा रही है।

    हाल के महीनों में उनके राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आए हैं। राज्यसभा में उनकी भूमिका और विभिन्न राजनीतिक निर्णयों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने उनके सार्वजनिक हस्तक्षेप और राजनीतिक सक्रियता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान दौर में सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की सक्रियता या चुप्पी दोनों ही चर्चा का विषय बन जाती हैं। विशेष रूप से शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले की तुलना में अधिक बढ़ गई हैं।

    फिलहाल NEET विवाद, वायरल वीडियो और राघव चड्ढा की कथित चुप्पी को लेकर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर उनकी ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया की नजर बनी हुई है। वहीं यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के बयान ही नहीं, बल्कि उनकी खामोशी भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाती है।

  • बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

    बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

    नई दिल्ली । मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर जलभराव, भूस्खलन और यातायात अवरोध जैसी समस्याओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि बारिश के मौसम में सड़क नेटवर्क को सुरक्षित, सुचारु और बाधारहित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते पूरे किए जाएं।

    हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठकों में तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। इन क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मानसून से पहले विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समीक्षा के दौरान सड़कों की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की गति और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर भी चर्चा की गई।

    मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भारी बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा न हो। अक्सर देखा जाता है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने को प्राथमिकता दी गई है।

    गडकरी ने पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में मानसून और खराब मौसम के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो सकता है। ऐसे में स्लोप स्टेबिलाइजेशन और सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत बनाना आवश्यक माना गया है।

    समीक्षा बैठकों में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौसम संबंधी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाए। इसके तहत ऐसे तंत्र तैयार किए जाएंगे जो किसी भी आपदा, सड़क अवरोध या संरचनात्मक समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और मरम्मत कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।

    मंत्री ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहें। इसके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, उन्नत निर्माण पद्धतियों और मजबूत निगरानी तंत्र को अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

    गडकरी ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेही बढ़ाने तथा नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था से परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्माण के दौरान संभावित कमियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा और रखरखाव की लागत भी कम की जा सकेगी।

    उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले और सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी गति देते हैं। ऐसे में मानसून से पहले व्यापक तैयारी करना और सड़क बुनियादी ढांचे को मौसम संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय का मानना है कि इन कदमों से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क अधिक मजबूत, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बन सकेगा।

  • पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है और दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी एवं ई-कॉमर्स कंपनियां देश में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में अमेजन ने भारत में 13 अरब डॉलर यानी लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा कर एक बड़ा संकेत दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित रहेगा।

    अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह घोषणा सामने आई है। कंपनी का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में शामिल रहेगा। नए निवेश के साथ देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

    कंपनी के ताजा निवेश प्रस्ताव के बाद भारत में अमेजन की कुल घोषित निवेश योजना 48 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2025 में 35 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए तो केवल छह महीनों के भीतर अमेजन ने भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उसके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    अमेजन के अनुसार, वर्ष 2030 तक एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विस्तार पर विशेष फोकस करेगी। इससे न केवल बड़ी कंपनियों बल्कि स्टार्टअप, डेवलपर्स, छोटे व्यवसायों और सार्वजनिक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

    कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है। ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग ने वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अमेजन लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय है और लाखों ग्राहकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

    एंडी जेसी ने भारत में कंपनी की भूमिका को केवल व्यवसाय तक सीमित न बताते हुए रोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ा। उनके अनुसार, अमेजन ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है। कंपनी का दावा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।

    कंपनी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कई योजनाएं तैयार की हैं। एआई आधारित समाधान, डिजिटल टूल्स और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी तकनीकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक छात्रों और संस्थानों को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह निवेश योजना भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई गति दे सकती है। एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश न केवल तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • घर की चौखट से आत्मनिर्भरता तक का सफर, भरतपुर की महिलाओं ने मिट्टी की कला को बनाया आय और पहचान का नया माध्यम

    घर की चौखट से आत्मनिर्भरता तक का सफर, भरतपुर की महिलाओं ने मिट्टी की कला को बनाया आय और पहचान का नया माध्यम

    नई दिल्ली । राजस्थान के भरतपुर जिले में महिलाओं का पारंपरिक कौशल आज आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। वर्षों से घरों तक सीमित रहने वाली मिट्टी और चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला अब महिलाओं को नई पहचान, सम्मान और आय प्रदान कर रही है। स्थानीय बाजारों में इन उत्पादों की बढ़ती मांग ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है।

    भरतपुर के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों से ही मिट्टी और चीनी मिट्टी के विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों में कुल्हड़, गिलास, कटोरी, प्लेट, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं। पारंपरिक कारीगरी और आकर्षक डिजाइनों के कारण ये उत्पाद ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। स्थानीय बाजारों के अलावा मेलों और विशेष आयोजनों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में पर्यावरण अनुकूल और पारंपरिक उत्पादों की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है। यही कारण है कि मिट्टी से बने बर्तनों को ग्राहक प्राथमिकता दे रहे हैं। इन उत्पादों की उपयोगिता के साथ-साथ इनका सांस्कृतिक महत्व भी लोगों को आकर्षित करता है। भरतपुर की महिलाओं ने इसी बदलती मांग को अवसर में बदलते हुए अपने कौशल को व्यवसाय का रूप दिया है।

    इस परिवर्तन में स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। इससे उनके काम में स्थिरता आई है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है। कई महिलाएं अब व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर समूह आधारित उत्पादन और बिक्री मॉडल अपना रही हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

    महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बर्तन और सजावटी उत्पाद सड़कों के किनारे लगाए गए स्टॉलों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासी, पर्यटक और राहगीर इन उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इनकी बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

    इन उत्पादों की कीमतें भी ग्राहकों की पहुंच के अनुरूप रखी जाती हैं। छोटे आकार के बर्तन कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं, जबकि बड़े और विशेष डिजाइन वाले उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक मूल्य पर बेचे जाते हैं। किफायती दरों और आकर्षक स्वरूप के कारण ग्राहक इनकी ओर आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि स्थानीय बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

    आर्थिक लाभ के साथ-साथ इस पहल का सामाजिक प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं पहले केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे अब परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की यह बढ़ती सक्रियता अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही है।

    सरकार और प्रशासन द्वारा भी स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं के जरिए महिलाओं को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है।

    भरतपुर की महिलाओं की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि पारंपरिक हुनर यदि सही अवसर और समर्थन के साथ जोड़ा जाए तो वह आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। मिट्टी के बर्तनों के माध्यम से ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प परंपरा को भी नई पहचान दिला रही हैं। उनकी यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

  • NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर छिड़े विवाद के बीच शिक्षा बोर्ड को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। हाल के दिनों में कुछ पोस्ट और रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि नई पाठ्यपुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम से जुड़े संदर्भों में बदलाव किया गया है और भारत की खान-पान संस्कृति का वर्णन करते समय मांसाहारी भोजन को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। इन दावों के वायरल होने के बाद NCERT ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    बोर्ड ने कहा है कि नई पुस्तकों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कई जानकारियां अधूरी और भ्रामक हैं। परिषद के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में किसी प्रकार के तथ्यात्मक बदलाव या सांस्कृतिक पक्षपात के आरोप निराधार हैं। शिक्षा बोर्ड का कहना है कि नई किताबों को निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं, विशेषज्ञों की सलाह और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है।

    विवाद का सबसे चर्चित पहलू ‘कृष्णा’ नाम से जुड़ा रहा। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि नई कन्नड़ पुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम को हटाया गया या उसमें बदलाव किया गया है। इस पर NCERT ने स्पष्ट किया कि जिस संदर्भ की चर्चा की जा रही है, वह भूगोल विषय से संबंधित है और उसमें भारत की प्रमुख नदियों का वर्णन किया गया है। बोर्ड के अनुसार पुस्तक में कृष्णा नदी का नाम यथावत मौजूद है और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। परिषद ने कहा कि भौगोलिक तथ्यों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

    दूसरा विवाद भोजन संस्कृति से जुड़ा रहा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुस्तक में भारतीय खान-पान की विविधता को दर्शाते समय मांसाहारी भोजन के उल्लेख को शामिल नहीं किया गया। इस पर NCERT ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सामग्री तैयार की जाती है। पुस्तकों में विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली, परंपराओं और खान-पान संबंधी विशेषताओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का कहना है कि किसी विशेष भोजन पद्धति को जानबूझकर बाहर रखने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

    NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही नई पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटने की शिक्षा देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और अनुभव आधारित सीखने को बढ़ावा देना है। इसी दृष्टिकोण से पाठ्यसामग्री को सरल, स्थानीय और विद्यार्थियों के परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। कई बार क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान उदाहरणों और संदर्भों को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कुछ लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    बोर्ड ने कहा कि यदि किसी पाठ्यपुस्तक में भाषाई, तकनीकी या अनुवाद संबंधी कोई त्रुटि सामने आती है, तो उसे विशेषज्ञ समितियों की समीक्षा के बाद सुधारा जाता है। ऐसे मामलों को किसी छिपे हुए एजेंडे या बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शिक्षा से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।

    NCERT ने अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें। परिषद का कहना है कि सभी नई पाठ्यपुस्तकें और उनका डिजिटल संस्करण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जहां कोई भी व्यक्ति सामग्री की स्वयं जांच कर सकता है। बोर्ड ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, तथ्यात्मकता और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    नई दिल्ली । निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित प्राचीन ग्यारस माता मंदिर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विशेष रूप से महिलाओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर निर्जल व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। मंदिर परिसर दिनभर भक्ति, मंत्रोच्चार और धार्मिक गतिविधियों से गूंजता रहा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से पूरे वर्ष की एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी विश्वास के चलते प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु ग्यारस माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचे। मंदिर में महिलाओं ने फल, नारियल, जल से भरे मिट्टी के कलश, छाते और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार यह स्थल क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल है और इसकी विशेष पहचान ग्यारस माता के एकमात्र प्रमुख मंदिर के रूप में है। निर्जला एकादशी के अवसर पर यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, किशनगढ़, बारां और अन्य क्षेत्रों से आए भक्तों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। कलश स्थापना, भजन-कीर्तन, कथा श्रवण और दान-पुण्य की गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं। श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई और शीतल पेय पदार्थों का वितरण किया गया, जबकि जरूरतमंदों को विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी पर जलदान और सेवा कार्यों को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

    मंदिर की एक विशेष पहचान यहां स्थित प्राचीन अग्निकुंड भी है, जहां अखंड ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस अग्निकुंड की परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं दिनभर परिक्रमा करती हुई दिखाई दीं। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे दिन बना रहा।

    श्रद्धालुओं का कहना है कि निर्जला एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। महिलाएं दिनभर निर्जल रहकर माता की आराधना करती हैं और धार्मिक कथाओं का श्रवण करती हैं। उनका विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन सभी एकादशी व्रतों का पालन नहीं कर पाते थे। तब उन्हें केवल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी गई थी। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

    गर्मी के मौसम में आयोजित होने वाले इस पर्व पर जलदान, छाता, मटका, पंखा और शीतल पेय पदार्थों का दान विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु इसे सेवा और परोपकार का अवसर मानते हैं। भीलवाड़ा का ग्यारस माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का भी जीवंत प्रतीक माना जाता है, जहां हर वर्ष निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करने पहुंचते हैं।