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  • युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:

    युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रगीत, झंडा फहराने और राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने देशभक्ति से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ और महंगी होती ईएमआई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन पर चर्चा करने की मांग की है।

    कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अचानक इतना जोर देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। मसूद ने कहा कि देश में जब राष्ट्रगीत गाने को लेकर विरोध और कार्रवाई की स्थिति बनी थी, तब बीजेपी के लोग इस तरह सामने नहीं आए थे।

    उन्होंने आजादी के बाद के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लोगों ने लंबे समय तक राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और झंडा फहराने जैसे विषयों को लेकर वह भूमिका नहीं निभाई, जिसका दावा अब किया जा रहा है। मसूद ने कहा कि देश की जनता शिक्षित है और राजनीतिक दलों के पुराने रुख तथा उनके वर्तमान बयानों के बीच अंतर को समझती है।

    मसूद ने यह भी कहा कि आज सूचना तकनीक के दौर में लोगों के पास पुराने घटनाक्रमों और बयानों को जानने के कई साधन मौजूद हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी पुराने तथ्य की जानकारी हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार देशभक्ति से जुड़े इतिहास को किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक रहा है और इसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया था। इसलिए देशभक्ति पर किसी एक संगठन या राजनीतिक विचारधारा का अधिकार नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की मौजूदा राजनीतिक बहस को स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की।

    वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार और बीजेपी नेताओं से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने रोजगार की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने नौकरियों की चुनौती बनी हुई है। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक बहस को उन मुद्दों पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

    रेणुका चौधरी ने बढ़ती महंगाई, टैक्स के बोझ और ईएमआई महंगी होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये की स्थिति में गिरावट का असर लोगों की आर्थिक परिस्थितियों पर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़ी बहस के समानांतर आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई से राहत और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ जैसे विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

    दूसरी ओर, राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बहस केवल राष्ट्रगीत की स्वीकार्यता तक सीमित रहने के बजाय देशभक्ति की राजनीतिक व्याख्या और जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों तक भी फैल सकती है।

  • E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल

    E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि गन्ने और अनाज के एक हिस्से का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में होने से खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि लोगों को एक तरफ सड़क पर वाहन चलाने के दौरान और दूसरी तरफ रसोई में खाद्य सामग्री खरीदते समय कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने E20 नीति की दोबारा समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने का विकल्प देने की मांग की है।

    कांग्रेस की ओर से चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर गन्ने के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। पार्टी का दावा है कि लगभग 25 लाख टन चीनी बनाने में इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर गया। जयराम रमेश ने इसी संदर्भ में चीनी और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया।

    उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने गुड़, चावल और मक्के के आटे जैसी कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी का उल्लेख किया है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों और क्षेत्रों में इन वस्तुओं की कीमतों में अंतर हो सकता है।

    E20 पेट्रोल को लेकर कांग्रेस ने वाहनों के माइलेज का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है। खासकर पुराने वाहनों को लेकर भी कांग्रेस ने संभावित तकनीकी समस्याओं की चिंता जताई है।

    कांग्रेस की मांग है कि उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि ईंधन संबंधी नीतियों में उपभोक्ता हितों और वाहन मालिकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर, चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के देश में लाने की मंजूरी दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

    दिल्ली में 21 अगस्त को चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार के आयात फैसले के बाद E20 नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। कांग्रेस इसे खाद्य महंगाई और वाहन माइलेज से जोड़ रही है, जबकि सरकार का चीनी आयात का कदम बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में है।

    इथेनॉल मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोल में वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और किसानों के लिए गन्ने तथा अन्य फीडस्टॉक से अतिरिक्त बाजार तैयार करना रहा है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और वाहन ईंधन दक्षता पर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।

    आने वाले समय में चीनी की कीमतों, घरेलू आपूर्ति और E20 ईंधन के वास्तविक प्रभाव के आंकड़े इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कांग्रेस ने नीति की समीक्षा और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने की मांग को केंद्र में रखा है, जबकि सरकार का ताजा कदम चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर बाजार कीमतों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।

  • पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई

    पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई


    नई दिल्ली । 
    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला शुक्रवार को उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचव के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस ने छात्र की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

    साहिल लोचव का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेट गन से हमला हुआ था। उसके अनुसार, घटना के बाद उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से आगे एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन उसकी आंख की रोशनी अब भी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की बात सामने आई है और कुछ छर्रे उसकी आंख में भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाने से इनकार कर रही है तो फिर छात्र को चोट कैसे लगी। राहुल गांधी ने कहा कि मामले में अपराध हुआ है और इसकी जांच के लिए FIR दर्ज होना जरूरी है।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए साहिल और उसके वकील को अलग-अलग पुलिस अधिकारियों के पास भेजा गया। साहिल की वकील के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग थाने से संबंधित क्षेत्र को लेकर उन्हें भेजा गया। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि ऊपर से निर्देश मिले हैं। कांग्रेस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

    राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कुछ लोगों ने भजन गाते हुए तथा चरखे का इस्तेमाल करते हुए विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया और संसद मार्ग के दोनों ओर यातायात प्रभावित रहा।

    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है कि शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत को लेकर राहुल गांधी उसके साथ खड़े हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। भाजपा ने राहुल गांधी पर न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि घटना की जांच चल रही है और कांग्रेस को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

    इस बीच कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। पैलेट गन के इस्तेमाल और साहिल की चोटों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होती है या नहीं और इस मामले में आगे पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

  • पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा योजना किसानों को उनकी कृषि उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री रोकने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत खरीद व्यवस्था, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप को मजबूत करने के साथ किसानों तक सरकारी समर्थन पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

    पीएम-आशा के अंतर्गत दलहन, तिलहन और खोपरा जैसी प्रमुख कृषि उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने में सुविधा मिले, इसके लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे बाजार तक पहुंच बढ़ाने और बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिली है।

    योजना की खरीद व्यवस्था में नाफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों से निर्धारित व्यवस्था के तहत उपज खरीदी जाती है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतों के दबाव के समय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ उपलब्ध कराना और उन्हें तत्काल कम कीमत पर उपज बेचने से बचाना है।

    सरकार ने पीएम-आशा की खरीद प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे डिजिटल मंचों का उपयोग खरीद और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है। डिजिटल प्रणाली से किसानों की पहचान, खरीद संबंधी रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिल रही है।

    कृषि क्षेत्र में भंडारण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष का समर्थन भी योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने में उपयोगी माना गया है। खरीद केंद्रों और कृषि ढांचे के विस्तार से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

    पीएम-आशा के लिए बजटीय प्रावधान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2025-26 में इसका बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपये किया गया, जबकि 2026-27 के लिए 7,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बढ़ता आवंटन किसानों की आय सुरक्षा और कृषि मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करने की प्राथमिकता को दर्शाता है।

    फसल उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच अंतर भी किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा के महत्व को स्पष्ट करता है। वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह दोनों के बीच 814 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है।

    पीली सोयाबीन के मामले में उत्पादन लागत 3,805 रुपये प्रति क्विंटल और एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

    जूट के लिए उत्पादन लागत 3,662 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल है। इस आधार पर दोनों के बीच 2,293 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है। सरकार की कोशिश है कि खरीद व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और बाजार हस्तक्षेप के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले तथा कृषि बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता को और मजबूत किया जा सके।

  • योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री और पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के पीडीए की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय के साथ राजनीतिक रंग बदलने वाले लोग ‘पी’ की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले ‘पी’ को पिछड़े से जोड़ा गया, फिर पंडित से जोड़ा गया और एक दिन ऐसे लोग ‘पी’ की परिभाषा पाकिस्तान से भी करने लगेंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके पीडीए के दावे पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ विचार और परिभाषाएं बदलने वाले लोगों को जनता समझती है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के जीवन और सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का महत्व केवल उसके पद से निर्धारित नहीं होता। व्यक्ति अपनी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति योगदान से बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने संघर्ष और मेहनत के बल पर सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।

    योगी ने बताया कि कल्याण सिंह ने किसान और शिक्षक के रूप में काम करने के बाद विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने उनके जीवन को सादगी, संघर्ष, तप और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दबाव के बावजूद अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।

    मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के उस कथन को भी याद किया कि वह टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में इस विचार को व्यवहार में उतारा और गलत कार्यों के लिए किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया।

    राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन किया और ऐसी परिस्थितियों में भी अपने राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहे, जब उन्हें सत्ता गंवाने का जोखिम उठाना पड़ा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कल्याण सिंह का योगदान और अधिक याद आता है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों की भूमिका रही और कल्याण सिंह भी इस आंदोलन के महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे।

    योगी ने कल्याण सिंह के निधन के समय की परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी थी, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर से प्रत्यक्ष रूप से श्रद्धांजलि देने या संवेदना व्यक्त करने की पहल नहीं की गई। योगी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कल्याण सिंह का जीवन सामाजिक मूल्यों, सिद्धांतों और सनातन परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।

  • पश्चिमी अलास्का में चार्टर प्लेन रडार से गायब, दो पायलटों समेत आठ लोग लापता; दुर्गम इलाके में तलाश जारी

    पश्चिमी अलास्का में चार्टर प्लेन रडार से गायब, दो पायलटों समेत आठ लोग लापता; दुर्गम इलाके में तलाश जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका के पश्चिमी अलास्का में एक चार्टर विमान दुर्घटना के बाद रडार से गायब हो गया। विमान में दो पायलट और छह यात्री सवार थे। घटना के बाद से सभी आठ लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना स्थल बेहद दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण राहत और बचाव दल के सामने चुनौती बनी हुई है।

    जानकारी के अनुसार चार्टर विमान एंकोरेज से केप न्यूएनहैम के लिए उड़ान पर था। पश्चिमी अलास्का के दूरदराज इलाके में पहुंचने के बाद विमान का संपर्क और रडार सिग्नल टूट गया। इसके बाद विमान की तलाश शुरू की गई। शुरुआती जानकारी में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका जताई गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड के अधिकारी, अलास्का स्टेट ट्रूपर्स और बचाव समन्वय केंद्र की टीमें सक्रिय हो गईं। संबंधित एजेंसियों की ओर से संभावित दुर्घटना स्थल की तलाश और वहां तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    अलास्का का बड़ा हिस्सा दुर्गम और कम आबादी वाला है। कई क्षेत्रों में घने जंगल, पहाड़ी इलाकों और कठिन मौसम जैसी परिस्थितियां राहत एवं बचाव अभियान को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में लापता विमान और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए अभियान को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।

    अधिकारियों की ओर से विमान में सवार लोगों की पहचान और उनकी स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ दुर्घटना के कारणों और विमान के संभावित मलबे की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    यह हादसा अमेरिका में उसी दिन हुई एक अन्य विमान दुर्घटना के बाद सामने आया है। पेंसिल्वेनिया में लैंडिंग के दौरान एक विमान की हवा में मौजूद पुलिस हेलिकॉप्टर से टक्कर हो गई थी। उस हादसे में विमान के पायलट की मौत हो गई, जबकि हेलिकॉप्टर में सवार दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।

    लगातार सामने आए इन दोनों हादसों ने अमेरिका में विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों घटनाओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और इनके बीच सीधे संबंध का कोई संकेत सामने नहीं आया है। संबंधित एजेंसियां दोनों हादसों की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं।

    अलास्का में हुए हादसे की जांच में विमान की उड़ान से जुड़ी जानकारी, मौसम की परिस्थितियां, पायलटों के अंतिम संपर्क और रडार से विमान के गायब होने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा दुर्घटनास्थल मिलने के बाद विमान के मलबे और अन्य साक्ष्यों से घटना की वजह समझने में मदद मिल सकती है।

    फिलहाल प्राथमिकता लापता विमान में सवार आठ लोगों की तलाश करना है। बचाव एजेंसियां संभावित दुर्घटना क्षेत्र में अभियान चला रही हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान में समय लग सकता है।

    अधिकारियों की ओर से जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, लापता यात्रियों और पायलटों की स्थिति तथा दुर्घटना के संभावित कारणों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पूरा ध्यान खोज एवं बचाव अभियान पर केंद्रित है।

  • भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत और जापान ने अपने रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सैन्य युद्धाभ्यास को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को व्यापक रूप से विस्तारित करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, और जहाजों के रखरखाव व मरम्मत सुविधाओं में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बारूदी सुरंगों से निपटने और जहाजों के निर्माण में जापानी तकनीक तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल की रणनीतिक योजना बनाई गई है।

    वार्ता में भविष्य के सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। भारत में बनने वाले इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के संदर्भ में भी दोनों देशों के रक्षा बल आपस में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेंगे। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करेगी।

    वार्ता के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। भारतीय पक्ष ने जापानी समकक्ष के समक्ष संवेदनशील रक्षा तकनीकों के तीसरे देशों में प्रसार से जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारत ने यह बात रेखांकित की कि किस प्रकार तकनीक का अनधिकृत साझाकरण क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

    जापानी रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से और आगे ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच मजबूत होती यह साझेदारी न केवल दोनों राष्ट्रों की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी के रूप में भी उभरेगी।

    दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में रक्षा, अनुसंधान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों में दोनों मित्र राष्ट्र एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बनकर कार्य करेंगे।

  • उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    नई दिल्ली ।कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे के मामले की सुनवाई करते हुए ‘गृहिणी’ और ‘होममेकर’ शब्द की परिभाषा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपने घर पर परिवार के सदस्यों की सेवा और देखभाल करती है, तो उसे कानूनी व सामाजिक रूप से ‘गृहिणी’ ही माना जाएगा। इसके लिए महिला का अनपढ़ होना या केवल घर के कामों तक सीमित रहना बिल्कुल आवश्यक नहीं है, भले ही उसके पास उच्च शैक्षणिक डिग्री हो या वह कोई नौकरी करती हो।

    न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमलता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम से जुड़े एक दुर्घटना मुआवजे के मामले पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर एक महिला वर्ष 2013 में बस दुर्घटना के दौरान घायल हो गई थी। पीड़िता ने दुर्घटना के कारण हुए आर्थिक नुकसान और अपनी कार्यक्षमता प्रभावित होने का हवाला देते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। वहीं परिवहन निगम का तर्क था कि महिला की उच्च शिक्षा को देखते हुए उसे केवल एक सामान्य गृहिणी मानकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता।

    उच्च न्यायालय ने परिवहन निगम की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कोई महिला कितनी भी पढ़ी-लिखी हो या उसके पास डॉक्टरेट जैसी उच्च उपाधि ही क्यों न हो, यदि वह घर पर अपने परिवार की भलाई के लिए योगदान दे रही है, तो वह गृहिणी की श्रेणी में आती है। पीठ ने माना कि एक पेशेवर या कामकाजी महिला भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए गृहिणी की भूमिका निभाती है और उसके इस योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने गृहिणी शब्द के अर्थ को और अधिक विस्तार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति बिना थके परिवार के लिए मेहनत करता है, अपने आराम का त्याग करता है और एक खुशहाल घर का आधार बनता है, वह होममेकर है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यह अवधारणा केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो घर चलाने और परिवार के पोषण में योगदान देता है, वह इस परिभाषा के दायरे में आता है।

    इस मामले में अदालत ने महिला के चिकित्सकीय स्थिति और उपचार की अवधि का आकलन करते हुए माना कि चोटों के कारण पीड़िता को कम से कम तीन महीने तक पूर्ण विश्राम करना पड़ा। इस दौरान वह अपने परिवार की सेवा करने में असमर्थ रही, जो कि एक प्रत्यक्ष क्षति है। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए पीड़िता की काल्पनिक आय तय की और निचली अदालत द्वारा निर्धारित राशि के अतिरिक्त 1,96,800 रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश जारी किया।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच उच्च न्यायालय के इस फैसले की काफी सराहना हो रही है। इस निर्णय को महिलाओं द्वारा घर और परिवार के प्रति दिए जाने वाले अमूल्य और अनपेक्षित योगदान को कानूनी रूप से मान्यता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

  • चीनी खिलाड़ी के सामने सिंधु का संघर्ष बेअसर 3 गेम तक चला रोमांचक मुकाबला, हार के साथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सफर खत्म

    चीनी खिलाड़ी के सामने सिंधु का संघर्ष बेअसर 3 गेम तक चला रोमांचक मुकाबला, हार के साथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सफर खत्म

    नई दिल्ली । भारत में 17 साल बाद आयोजित हो रही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में घरेलू दर्शकों को भारतीय स्टार खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ ही कई बड़े नाम मेडल की दौड़ से बाहर हो गए हैं। भारत की दिग्गज महिला शटलर पीवी सिंधु को भी प्री-क्वार्टर फाइनल में चीन की वांग झी यी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में वांग झी यी ने सिंधु को 11-21 21-15 17-21 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। करीब एक घंटे 28 मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला लेकिन निर्णायक गेम में चीनी खिलाड़ी ने दबाव के क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाजी अपने नाम कर ली।

    मुकाबले की शुरुआत सिंधु के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पहले गेम में वांग झी यी ने शुरुआती बढ़त हासिल की और इंटरवल तक 11-9 से आगे रहीं। इसके बाद चीनी खिलाड़ी ने अपनी गति और आक्रामकता बढ़ा दी जबकि सिंधु लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आईं। इंटरवल के बाद भारतीय खिलाड़ी केवल दो अंक ही जुटा सकीं और पहला गेम 11-21 से गंवा दिया। हालांकि सिंधु ने दूसरे गेम में जोरदार वापसी की। उन्होंने शुरुआत से ही बेहतर नियंत्रण दिखाया और लगातार अंक जुटाते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दूसरे गेम में सिंधु ने 21-15 से जीत हासिल कर निर्णायक गेम का रोमांच बढ़ा दिया।

    तीसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। सिंधु ने कई मौकों पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन मैच के अंतिम दौर में वांग झी यी ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। निर्णायक क्षणों में चीनी खिलाड़ी ने लगातार महत्वपूर्ण अंक हासिल किए और 21-17 से तीसरा गेम अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु का घरेलू मैदान पर विश्व चैम्पियनशिप में एक और पदक जीतने का सपना टूट गया।

    सिंधु के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वह विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में अब तक पांच पदक जीत चुकी हैं। उनके नाम एक स्वर्ण दो रजत और दो कांस्य पदक हैं। वह विश्व चैम्पियनशिप में पांच पदक जीतने वाली चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। इस बार भी उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी। सिंधु ने टूर्नामेंट की शुरुआत मजबूत अंदाज में की थी। राउंड ऑफ 64 में उन्होंने आयरलैंड की सोफिया नोबेल को सीधे गेमों में हराया जबकि राउंड ऑफ 32 में कनाडा की वेन यू झांग के खिलाफ भी जीत दर्ज कर अंतिम 16 में प्रवेश किया था। लेकिन यहां उन्हें तीसरी वरीयता प्राप्त वांग झी यी की चुनौती से पार नहीं मिल सका।

    वांग के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड भी मुकाबले से पहले भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में नहीं था। दोनों के बीच इससे पहले आठ मुकाबले हो चुके थे जिनमें चीनी खिलाड़ी ने अधिक जीत दर्ज की थी। इस हार के बाद वांग ने एक बार फिर अपनी बढ़त मजबूत कर ली है।

    सिंधु के अलावा भारत के पुरुष वर्ग को भी बड़ा झटका लगा है। आयुष शेट्टी को इंडोनेशिया के अल्वी फरहान ने हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। इससे एक दिन पहले लक्ष्य सेन को अमेरिका के गैरेट टैन के खिलाफ अप्रत्याशित हार मिली थी। ऐसे में भारत के कई स्टार खिलाड़ियों के बाहर होने से घरेलू विश्व चैम्पियनशिप में भारतीय चुनौती को बड़ा झटका लगा है। हालांकि टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और बाकी खिलाड़ी अब देश के लिए पदक हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं।

  • नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी

    नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में TCS कार्यालय से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी निदा खान को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर राहत दी है। हालांकि जमानत के साथ अदालत ने शर्त रखी है कि निदा खान को नियमित रूप से संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। यानी मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें समय समय पर पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल आरोपी को राहत मिली है लेकिन मामले की कानूनी जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह मामला नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 166/2026 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि TCS कार्यालय में कुछ कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और इस्लाम से जुड़े रीति रिवाज अपनाने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता था। शिकायत में हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस केस में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    शुरुआत में इस मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तौसीफ बिलाल अत्तार दानिश एजाज शेख शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी और रजा रफीक मेमन के नाम शामिल थे। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने निदा खान का नाम भी मामले में जोड़ा और उन्हें आरोपी नंबर पांच बनाया। यानी शुरुआती एफआईआर में उनका नाम नहीं था बल्कि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने उन्हें मामले में आरोपी बनाया।

    पुलिस के अनुसार निदा खान की गिरफ्तारी से पहले करीब 25 दिनों तक उनकी तलाश की गई। इसके बाद नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की टीम ने उन्हें नारेगांव इलाके से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि वह कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में मौजूद थीं और वहां उनके चार रिश्तेदार भी मौजूद थे। गिरफ्तारी के बाद मामले में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस ने पूछताछ की।

    जमानत की सुनवाई के दौरान निदा खान की ओर से अदालत में कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं। अदालत के सामने उनकी गर्भावस्था की बात भी रखी गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी। हालांकि राहत के साथ नियमित पुलिस हाजिरी की शर्त लगाई गई है। इससे साफ है कि जमानत मिलने के बावजूद जांच की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रहेगी।

    इस मामले की जांच फरवरी 2026 में शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में एक निजी कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला के रमजान के दौरान रोजे रखने का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने मामले की पड़ताल के लिए महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में भेजकर वहां की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। जांच के दौरान कुछ टीम लीडरों पर कर्मचारियों को परेशान करने और अपने पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने के आरोप भी सामने आए थे।

    मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया था। अब निदा खान को भी अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच जारी रहेगी और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी। फिलहाल निदा खान को कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी और जांच में सहयोग करना होगा।