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  • ट्रेन में मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना- रील देखना अब पड़ेगा महंगा, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल..!

    ट्रेन में मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना- रील देखना अब पड़ेगा महंगा, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल..!


    नई दिल्ली।
    ट्रेनों (Trains) और स्टेशन परिसरों (Station premises) में मोबाइल फोन (Mobile Phone) को स्पीकर मोड पर इस्तेमाल करने, तेज आवाज में गाने और रील देखने और देर रात तक ऊंची आवाज में फोन पर बात करने वाले यात्रियों के खिलाफ भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने सख्त कदम उठाया है। द जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2024/2026 के तहत किए गए नए संशोधनों के लागू होने के बाद अब इसे एक दंडनीय अपराध बना दिया गया है।

    दक्षिण रेलवे सहित सभी रेलवे जोनों को सार्वजनिक उद्घोषणाओं और स्टेशनों पर नोटिस बोर्ड लगाकर यात्रियों को जागरूक करने और टिकट जांचकर्ताओं को ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करने का अधिकार देने के निर्देश दिए गए हैं।


    रेलवे का नया नियम और दंडात्मक प्रावधान

    रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, साथी यात्रियों की शांति भंग करने पर कई कड़े जुर्माने और कानूनी सजा का प्रावधान किया गया है। पहली बार इस नियम का उल्लंघन करने पर 1,000 रुपए का जुर्माना और ट्रेन से उतारा जा सकता है। दूसरी बार या लगातार ऐसा करने पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना और 6 महीने की जेल (या दोनों) हो सकती है।

    यात्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संगीत सुनने, रील्स या सीरियल देखने के लिए ईयरफोन का ही इस्तेमाल करें। फोन पर बातचीत धीमी आवाज में करें और मोबाइल की रिंगटोन को भी धीमी वॉल्यूम या वाइब्रेशन मोड पर रखें, खासकर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के दौरान।


    AC और वंदे भारत कोचों में सबसे ज्यादा परेशानी

    रेलवे की एडवाइजरी में कहा गया है कि बंद AC डिब्बों और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी शांत ट्रेनों में लाउड फोन कॉल, सोशल मीडिया रील्स और बच्चों के कार्टून की तेज आवाज से सह-यात्रियों को मानसिक परेशानी होती है। नियमित यात्रियों का कहना है कि स्लीपर क्लास की तुलना में एसी कोचों में बाहरी शोर कम होने के कारण मोबाइल का शोर ज्यादा परेशान करता है।

    रेल यात्रियों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह मांग भी उठाई है कि TTE और RPF के जरिए इसका कड़ाई से पालन कराया जाए, क्योंकि रात के समय बार-बार शिकायत दर्ज कराना मुश्किल होता है।


    परेशानी होने पर कैसे करें शिकायत?

    अगर आपकी बोगी में कोई यात्री लगातार मना करने के बावजूद तेज आवाज में स्पीकर चला रहा है या उपद्रव कर रहा है, तो आप इन तरीकों से तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
    – रेल मदद ऐप के जरिए तुरंत अपनी पीएनआर (PNR) और कोच संख्या डालकर शिकायत दर्ज करें।
    – रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके चलती ट्रेन में शिकायत दर्ज कराएं।
    – ऑन-बोर्ड TTE, RPF जवानों या कोच अटेंडेंट को तुरंत सूचित करें।

  • आगरा से घूमने निकले दोस्तों की खुशियां मातम में बदलीं, सहारनपुर में थार का भीषण एक्सीडेंट, 2 गंभीर घायल

    आगरा से घूमने निकले दोस्तों की खुशियां मातम में बदलीं, सहारनपुर में थार का भीषण एक्सीडेंट, 2 गंभीर घायल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पांचों दोस्त दशहरे की छुट्टी पर आगरा से मसूरी घूमने जा रहे थे। रास्ते में नागल थाना क्षेत्र के बेलड़ा गोल चक्कर के पास उनकी थार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
    हादसा रविवार सुबह करीब चार बजे हुआ। दुर्घटना में साहिल तिवारी उम्र 25 वर्ष राहुल सिंह उम्र 25 वर्ष और सक्षम गौतम उम्र 22 वर्ष की मौत हो गई। वहीं सचिन और हेमंत वर्मा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दोनों चचेरे भाई बताए गए हैं और उनका इलाज सहारनपुर जिला अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय थार तेज रफ्तार में थी। अचानक जोरदार टक्कर की आवाज सुनाई दी। जब लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो कार पलटी हुई थी और उसके शीशे सड़क पर बिखरे पड़े थे। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आ रहा था।
    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया गया कि कार में सवार दो युवक पुल के नीचे जा गिरे थे। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को निकालने में मदद की। पुलिस ने कार के दरवाजे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों ने तीन युवकों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिवारों में मातम छा गया।
    इस हादसे में जान गंवाने वाले साहिल तिवारी अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसके पिता सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ में अधिकारी हैं और फिलहाल बेंगलुरु में तैनात हैं। साहिल अपनी मां और बहन के साथ दिल्ली में रहता था। उसके मौसा ब्रह्मानंद के मुताबिक वह दो दिन पहले ही आगरा आया था। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
    मृतक राहुल सिंह के पिता गोपाल सिंह ने बताया कि राहुल शनिवार दोपहर घर से निकला था। रात में फोन पर बातचीत के दौरान उसने घूमने जाने की जानकारी दी थी। पिता ने उसे घर लौटने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना। रविवार सुबह करीब पांच बजे परिवार को दुर्घटना की सूचना मिली। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बेटे की मौत का पता चला। राहुल एक निजी अस्पताल में कंपाउंडर के रूप में काम करता था।
    वहीं सक्षम गौतम के पिता राजेंद्र गौतम ने बताया कि सक्षम को तीन दिन की छुट्टी मिली थी और उसने मसूरी जाने की बात कही थी। वह शनिवार शाम अपने दोस्तों के साथ रवाना हुआ था। सुबह पुलिस का फोन आने पर परिवार को लगा कि उसे चोट लगी होगी और इलाज के बाद वह ठीक हो जाएगा। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बेटे की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया। सक्षम एक दवा कंपनी में एरिया मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
    नागल थाना प्रभारी राधेश्याम यादव के मुताबिक थार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। उन्होंने बताया कि आगे की सीट पर बैठे दोनों लोगों ने सीट बेल्ट लगा रखी थी और वे बच गए। हादसे में एयरबैग भी प्रभावी तरीके से नहीं खुल सके। फिलहाल इस दर्दनाक दुर्घटना ने तीन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

  • दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    नई दिल्ली ।दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन में कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोजकों ने इसे स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल बताया है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है।

    पीतमपुरा में वार्षिक रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कॉकरोच को गंदगी का प्रतीक बताया है। समिति के अनुसार, दशहरे के मौके पर इस पुतले का दहन करने के जरिए लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में संदेश दिया जाएगा। आयोजकों ने इस पहल को स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों से जोड़ते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।

    समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले के पीछे किसी राजनीतिक मकसद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पुतला दहन का उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ स्वच्छता की अहमियत को भी सामने लाना है। उनके मुताबिक, कॉकरोच के पुतले को रावण की सेना में शामिल असुरों के बीच दिखाया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस प्रतीक के माध्यम से सफाई से जुड़ा संदेश लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

    हालांकि, इस फैसले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि दशहरा जैसे पारंपरिक धार्मिक उत्सव में समसामयिक मुद्दों को शामिल करना कितना उचित है। उनका कहना है कि त्योहार का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है और आयोजन में किसी नए प्रतीक को शामिल करने से धार्मिक परंपरा के अर्थ को लेकर बहस पैदा हो सकती है।

    एक सोशल मीडिया यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस परंपरा को मौजूदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि त्योहारों का उद्देश्य लोगों को एकजुट करना होना चाहिए, न कि उनके बीच राजनीतिक मतभेदों को बढ़ाना।

    कुछ अन्य लोगों ने भी इस पहल पर आपत्ति जताई। एक यूजर ने आशंका जताई कि रावण की तुलना कॉकरोच से करने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया जा रहा है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा केवल स्वच्छता के संदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक आयोजनों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पहचाने जाने वाला समूह भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा है। इस समूह ने शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भी शामिल हो गया। हालांकि, समिति ने अपने फैसले को इन घटनाक्रमों से जोड़ने से इनकार किया है।

    इस पहल पर पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब शहर पहले से प्रदूषण से जूझ रहा है, तो इतने बड़े पुतले को जलाने की जरूरत क्यों है। इस तरह आयोजन को लेकर स्वच्छता के संदेश, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली में शहरी विकास को विस्तार देने के लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 12 लाख नए घर बनाने पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण की लैंडपूलिंग नीति को आगे बढ़ाते हुए किसानों और जमीन मालिकों के साथ बातचीत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य जमीन के नियोजित इस्तेमाल के जरिए आवासीय और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास करना है। योजना में खास तौर पर मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    इस पहल को दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 के प्रावधानों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े भूभाग को सुनियोजित तरीके से विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित विकास मॉडल में जमीन मालिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें लैंडपूलिंग नीति की प्रक्रिया, विकास की रूपरेखा और इसमें उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके लिए संबंधित किसानों और भू-स्वामियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।

    प्रस्तावित योजना के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर जमीन पर आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 12 लाख घर बनाने की योजना है। इन घरों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मध्यम आय वर्ग के लोगों को राजधानी में आवास पाने के अधिक अवसर मिल सकें। इसके साथ ही नियोजित विकास के माध्यम से अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योजना का एक प्रमुख हिस्सा बुनियादी ढांचे का विकास है। लैंडपूलिंग नीति के तहत घरों का निर्माण शुरू होने से पहले सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके लिए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाना है। प्रस्तावित योजना में 600 किलोमीटर से ज्यादा अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य है। इससे नए विकसित होने वाले क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा देने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

    इस टाउनशिप योजना में दिल्ली के कई नियोजन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें द्वारका और वसंत कुंज के K-1 जोन, द्वारका और नजफगढ़ के L जोन, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला, बवाना और कंझावला क्षेत्र के N तथा P-2 जोन और दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी क्षेत्र का J जोन शामिल हैं। इन इलाकों में शहरी विकास के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे की योजना बनाई जा रही है।

    प्रस्तावित क्षेत्रों में अकबरपुर माजरा, बुराड़ी, बापरौला, धूलसिरस, बवाना, इब्राहिमपुर, झड़ौदा माजरा, घेवरा, नजफगढ़ और नंगली पूना जैसे गांव भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों को नियोजित विकास से जोड़ने के लिए जमीन के इस्तेमाल और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    योजना में एक डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी है। इसके तहत आवासीय सुविधाओं के साथ व्यावसायिक जमीन, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इससे आवास और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ विकसित करने का अवसर मिल सकता है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, भंडारण सुविधाओं और अन्य गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य भी जुड़ा है।

    लैंडपूलिंग नीति के जरिए दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर शहरी विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। हालांकि, प्रस्तावित 12 लाख घरों, सड़क नेटवर्क और अन्य सुविधाओं को जमीन पर उतारने के लिए विकास प्रक्रिया, जमीन मालिकों की भागीदारी और बुनियादी ढांचे का चरणबद्ध निर्माण महत्वपूर्ण रहेगा। योजना का उद्देश्य आवासीय जरूरतों को पूरा करने के साथ राजधानी के विस्तार को व्यवस्थित स्वरूप देना है।

  • बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान

    बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस हादसे से प्रभावित परिवारों के साथ सरकार खड़ी है। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस घटना में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    चिराग पासवान ने कहा कि पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा रहना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम रद्द करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कदम सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, ऐसी दुखद घटना के समय प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने और उनकी पीड़ा को समझने की जरूरत है।

    इस दौरान चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद राहुल गांधी की गोवा में बड़ी रैली प्रस्तावित है। चिराग ने इस स्थिति का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें भी इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यह टिप्पणी उन्होंने बंगाल हादसे के संदर्भ में की।

    चिराग पासवान ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने से जुड़े सवाल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी व्यक्ति का भारत आकर विरोध प्रदर्शन करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, सरकार ने इस मामले में उचित कदम उठाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं और ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

    बिहार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के उस बयान पर भी चिराग पासवान ने आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि हत्याएं होती रहती हैं। चिराग ने कहा कि किसी भी घटना का होना शर्म की बात है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को लेकर इस प्रकार की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि वे ऐसी घटनाओं को सामान्य बताने वाले दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं।

    बिहार की राजनीति से जुड़े सवालों पर भी चिराग पासवान ने अपनी बात रखी। राघोपुर में हुए नाव हादसे को लेकर तेजस्वी यादव की ओर से सरकार पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में चिराग ने कहा कि वह जिम्मेदारी लेते हैं, क्योंकि वे उस क्षेत्र के सांसद हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े मामले पर जवाबदेही की बात कही।

    विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के विधायक अनंत सिंह द्वारा अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार का विरोध किए जाने के सवाल पर चिराग ने कहा कि वह किसी दूसरी पार्टी के आंतरिक मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने चुनाव परिणाम को लेकर विश्वास जताया। उनका कहना था कि जिस तरह विधानसभा चुनाव में परिणाम सामने आए थे, उसी तर्ज पर विधान परिषद चुनाव में भी नतीजे आएंगे और उनका गठबंधन सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा।

    पश्चिम बंगाल की भगदड़ से लेकर बिहार के हादसों और राजनीतिक घटनाक्रम तक, चिराग पासवान ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके बयानों में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना, सार्वजनिक घटनाओं पर जवाबदेही और राजनीतिक विरोधियों की टिप्पणियों पर सवाल प्रमुख रहे।

  • कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। इस हादसे पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष के बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि कोई नहीं जानता कि रात में क्या हो सकता है। उन्होंने हादसे को नसीब से जोड़ते हुए यह भी कहा कि कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती।

    सजल घोष ने कहा कि ऐसी घटनाओं में गलतियां हो सकती हैं और किसी भी व्यवस्था को सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह नसीब की बात है और कोई नहीं बता सकता कि रात में क्या होने वाला है। उनके इस बयान के बाद हादसे के समय की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    विधायक ने कहा कि किसी दुर्घटना को पूरी तरह रोक पाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सुरक्षा व्यवस्था हर परिस्थिति में पूरी तरह सफल नहीं रही है। उन्होंने भारत के दो प्रधानमंत्रियों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि गलतियां हो जाती हैं और दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    सजल घोष ने यह भी कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि चोरबागान पंडाल में हुई भगदड़ के लिए गलती किस स्तर पर हुई। उनके मुताबिक, अगर बारिश नहीं हुई होती तो संभव है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने किसी तरह की जानकारी छिपाने की कोशिश किए जाने की बात से भी इनकार किया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगा।

    घटना के बाद सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    विधायक ने पीड़ित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मृतकों में से दो लोग उनके विधानसभा क्षेत्र के निवासी थे। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा घायलों को पांच लाख रुपये की सहायता और उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है।

    इस हादसे ने दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने वाले आयोजनों में प्रवेश और निकास की व्यवस्था, भीड़ की निगरानी तथा मौसम से जुड़ी परिस्थितियों को संभालना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, चोरबागान पंडाल में इन व्यवस्थाओं में कहां कमी रही, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    सजल घोष के बयान को लेकर उठे विवाद के बीच हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और घायल हुए श्रद्धालुओं की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा के साथ-साथ दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। जांच से जुड़े तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।

  • कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती

    कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती


    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। उत्तर कोलकाता के मुक्तारामबाबू स्ट्रीट स्थित चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात हुए हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले कई पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से पंडाल बंद रखने की सलाह दी गई है।

    हादसे के समय बारिश हो रही थी। इसी दौरान पंडाल में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 19 में से 17 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घायलों में 24 लोगों की हालत खतरे से बाहर बताई गई, जबकि एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की बात कही है। प्रशासन हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहा है और शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    कोलकाता में दुर्गा पूजा के अवसर पर करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं। वहीं, पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 58,000 पूजा आयोजनों की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है। पुलिस कई पंडालों का निरीक्षण कर रही है और भीड़भाड़ वाले आयोजनों को आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

    हादसे के बाद कोलकाता के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू की गई है। यह प्रतिबंध 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक तीन दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। आदेश के तहत कोलकाता मेडिकल कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों सहित निर्धारित इलाकों में रैली, सभा, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने, शांति भंग होने और सुरक्षा संबंधी जोखिमों की आशंका को देखते हुए उठाया है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार सुबह घायलों से मिलने उस अस्पताल पहुंचे, जहां भगदड़ में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है। उनके साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इससे पहले शाह ने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। हादसे के बाद उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों में जाने का अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि मृतकों के 19 परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसके अलावा प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 13 पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

    मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी दुर्गा पूजा आयोजकों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने पर्याप्त रोशनी, प्रवेश और निकास के उचित रास्ते, भीड़ नियंत्रण तथा पुलिस और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हादसे के बाद प्रशासन का मुख्य ध्यान पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है।

  • मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया

    मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में विद्याविहार के नए ईस्ट-वेस्ट पुल के नाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुल का उद्घाटन होने से पहले ही इसे किसके नाम पर रखा जाए, इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं। शिवसेना (यूबीटी) इस पुल का नाम दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के नाम पर रखने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा विधायक पराग शाह ने कैप्टन स्मित मच्छार के नाम का सुझाव दिया है। दोनों नामों के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने पुल पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ नाम का बैनर भी लगाया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में मांग की गई कि नए पुल का नाम नाना पाटेकर के नाम पर रखा जाए। पार्टी का मानना है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के जरिए भी महाराष्ट्र के लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई थी।

    दूसरी ओर, भाजपा विधायक पराग शाह ने पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। मच्छार ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपहरण की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के दौरान गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों का सामना किया। उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण उनका नाम भी पुल के नामकरण की चर्चा में शामिल हो गया है।

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खनकर ने शिवसेना (यूबीटी) पर इस मामले में राजनीतिक श्रेय लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाना पाटेकर को सम्मान देने के लिए पुल के बजाय किसी थिएटर या थिएटर परिसर का नाम उनके नाम पर रखना अधिक उपयुक्त होगा। इस तरह पुल के नाम को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। फिलहाल नामकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    बीएमसी के अनुसार, विद्याविहार का यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह विद्याविहार स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को घाटकोपर के पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है। पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे पटरियों के ऊपर बनाया गया है। इस संपर्क मार्ग से पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। फिल्मों के अलावा किसानों की मदद के लिए किए गए कार्यों के कारण भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने राज कपूर पुरस्कार के तहत मिली 10 लाख रुपये की राशि सूखा राहत के लिए दान कर दी थी। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की।

    यह संस्था सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करती है। उसी वर्ष उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों और लातूर तथा उस्मानाबाद के 113 परिवारों को चेक वितरित किए थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना में भी सेवा दी थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

    कैप्टन स्मित मच्छार का परिवार मुंबई के घाटकोपर पूर्व में रहता है। वह कपड़ा कारोबारी परिवार से आते हैं और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि बचपन से पायलट बनना उनका सपना नहीं था। उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल काम करने के बाद वर्ष 2022 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की।

    30 सितंबर को वह उड़ान एफजेड-1073 के कप्तान थे। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की।

    अब विद्याविहार पुल के नामकरण पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों को लेना है। नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान और स्मित मच्छार के साहसिक कार्य, दोनों को उनके समर्थक सम्मान देने योग्य बता रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि मुंबई के इस नए पुल को आखिर किस नाम से पहचान मिलती है।

  • भारत-पाक सीमा पर डिजिटल फेंसिंग शुरू…. अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स तस्करी पर लगेगी रोक

    भारत-पाक सीमा पर डिजिटल फेंसिंग शुरू…. अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स तस्करी पर लगेगी रोक


    चंडीगढ़।
    पंजाब (Punjab) से सटी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा ( India-Pakistan International Border) पर डिजिटल फेंसिंग का कार्य शुरू हो गया है। यह कदम घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ गतिविधियों पर भी इससे लगाम लगेगी। पंजाब से सटी दोनों देशों की सरहद पर कई जगहों पर यह फेंसिंग लग चुकी है।

    यह एक मजबूत लोहे की दीवार है, जिसमें छेद हैं और ऊपर कोबरा तार लगाई गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक बाड़बंदी के साथ अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी मजबूत करना है। इसमें सेंसर, थर्मल कैमरे, लेजर तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगे हैं। पंजाब से सटी लगभग साढ़े पांच सौ किलोमीटर की सरहद के कई हिस्सों में उक्त फेंसिंग लगाई गई है। ये दुश्मन की प्रत्येक गतिविधियों को भी भांप लेगी।


    निगरानी व्यवस्था की खासियत

    इस फेंसिंग में लगे सेंसर जमीन की हलचल, फेंसिंग से छेड़छाड़ या संदिग्ध गतिविधियों का संकेत देते हैं। थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन कैमरे रात के अंधेरे में भी नजर रखते हैं। ये सर्दी में घने कोहरे और खराब मौसम में भी मददगार होंगे।

  • मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज

    मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज


    मेरठ । मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान अब अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जता रही है। दूसरी ओर पति की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली रविता ने भी अपने बचाव के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों महिलाओं ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए निजी वकील उपलब्ध कराने की मांग की है। जेल प्रशासन के मुताबिक उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन दोनों मामलों में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
    नीला ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को पति सौरभ की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया गया है। इसी तरह सांप कांड में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को पति अमित की हत्या के मामले में फांसी की सजा दी गई है। दोनों घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया था। निचली अदालत के फैसले के बाद अब चारों दोषी उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे निजी अधिवक्ताओं की सहायता चाहते हैं ताकि अपने पक्ष को कानूनी तरीके से प्रस्तुत कर सकें।
    जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान और रविता की ओर से निजी वकील की मांग को लेकर आवेदन दिया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों के आवेदन पर नियमानुसार निजी वकील उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिलता है और मामले में आगे का निर्णय संबंधित अदालतों की सुनवाई तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर होता है। इसलिए निचली अदालत के फैसले के बाद भी इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
    इस बीच जेल में बंद चारों दोषियों के कामकाज से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान ने सिलाई और कढ़ाई का काम चुना है जबकि साहिल खेती से जुड़ा काम कर रहा है। रविता ने बैग बनाने का काम चुना है और अमरदीप रंगाई-पुताई से संबंधित काम कर रहा है। जेल प्रशासन ने बताया कि मृत्युदंड की सजा के बाद रविता और अमरदीप को नई बैरकों में स्थानांतरित किया गया है। बंदियों की निगरानी और जेल से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं।
    फांसी की सजा के मामलों में अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा सकती है। खबर के मुताबिक पुरुष बंदियों को आगरा सेंट्रल जेल और महिला बंदियों को लखनऊ स्थित निर्धारित जेल में भेजने की व्यवस्था है। हालांकि स्थानांतरण जेलों में उपलब्ध जगह और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। फिलहाल चारों दोषियों की अपील से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
    दूसरी ओर सांप कांड में सजा पाए अमरदीप की मां का एक वीडियो भी चर्चा में है। वीडियो में वह अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए उसे रिहा कराने की मांग करती नजर आ रही हैं। उन्होंने रविता को सजा देने की बात भी कही है। हालांकि किसी आरोपी के दोषी होने या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है।
    इसी बीच मेरठ के जल्लाद पवन का बयान भी सामने आया है। उसने कहा कि यदि जेल प्रशासन उसे जिम्मेदारी सौंपता है तो वह चारों दोषियों को फांसी देने के लिए तैयार है। उसका कहना है कि गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार सजा मिलना जरूरी है। अब इन मामलों में आगे की कानूनी कार्यवाही और उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी।