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  • युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    नई दिल्ली । लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद का एक प्रेरक उदाहरण उस समय सामने आया जब कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आशुतोष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और राष्ट्रहित से जुड़े उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें देश के जागरूक युवाओं का प्रतिनिधि बताया। पत्र मिलने के बाद आशुतोष ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों से मिलने वाले आत्मीय और सकारात्मक विचार उन्हें राष्ट्रहित में लगातार कार्य करने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा व्यक्त भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के विषय को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

    पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और ऊर्जा बचत को जनभागीदारी से जुड़े अभियान का रूप देने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा आवश्यक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के संकल्प को सराहनीय बताया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच और समस्याओं के समाधान के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यही वर्ग भविष्य की दिशा तय करेगा।

    प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद आशुतोष यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक क्षण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है और उसे गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके पत्र का उत्तर मिलना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है।

    आशुतोष ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंता और सुझाव साझा किए थे। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके विचारों को महत्व दिया जाना युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

    आशुतोष ने पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उनके अनुसार तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति प्रदान की है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान या सरकारी योजना की सफलता में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब नागरिक स्वयं किसी उद्देश्य से जुड़ते हैं, तब उसके परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। आशुतोष का मानना है कि युवाओं में नई सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है, जो देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं पर व्यक्त किया गया विश्वास देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

  • इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका! EPI में 70 हजार रुपये तक की नौकरी, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका! EPI में 70 हजार रुपये तक की नौकरी, आवेदन प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली ।इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड (EPI) ने विभिन्न तकनीकी और प्रबंधकीय पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने निश्चित अवधि के अनुबंध के आधार पर कुल 14 रिक्तियों को भरने के लिए योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

    जारी अधिसूचना के अनुसार असिस्टेंट मैनेजर (सिविल) के 9 पद असिस्टेंट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) का 1 पद असिस्टेंट मैनेजर (मैकेनिकल) के 2 पद और सीनियर मैनेजर (सिविल) के 2 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया 24 जून 2026 की सुबह 9:30 बजे से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 3 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में बीई बीटेक एएमआईई या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य है। साथ ही न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त होना भी जरूरी है। उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम दो वर्ष का पोस्ट क्वालिफिकेशन कार्य अनुभव होना चाहिए।

    आयु सीमा की बात करें तो पदों के अनुसार अधिकतम आयु 32 वर्ष से 42 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसमें शैक्षणिक योग्यता प्राप्त अंकों का प्रतिशत और कार्य अनुभव जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

    सफल उम्मीदवारों को पद के अनुसार 40 हजार रुपये से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा कंपनी की ओर से अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इंटरव्यू का आयोजन मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा। इंटरव्यू की तिथि समय और विस्तृत जानकारी जल्द जारी की जाएगी।

    उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि इंटरव्यू में शामिल होते समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां और उनकी फोटोकॉपी अपने साथ अवश्य लेकर जाएं ताकि सत्यापन प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सके। इंजीनियरिंग क्षेत्र के अनुभवी और योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर माना जा रहा है।

  • नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज

    नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज


    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

    मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ।

    आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी।

    हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।

    अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

    बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी


    नई दिल्ली ।झारखंड में मानसून की बारिश के साथ आकाशीय बिजली लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में हुई बारिश के दौरान वज्रपात की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। अलग-अलग इलाकों में बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलसकर घायल हो गए। मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है तथा लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

    खूंटी जिले में वज्रपात की दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पहली घटना कर्रा प्रखंड के कच्चाबारी पंचायत क्षेत्र के पतराटोली गांव में हुई, जहां क्रिकेट मैच के दौरान अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बताया जा रहा है कि पतराटोली और लोधमा गांव की टीमों के बीच मैच खेला जा रहा था। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मैदान में मौजूद थे।

    खेल के दौरान मौसम अचानक खराब होने लगा। आसमान में काले बादल छा गए और तेज गर्जना होने लगी, लेकिन इसके बावजूद मैच जारी रहा। इसी दौरान अचानक तेज चमक और गर्जना के साथ आकाशीय बिजली मैदान में गिरी और वहां मौजूद खिलाड़ियों तथा दर्शकों को अपनी चपेट में ले लिया।

    इस दर्दनाक हादसे में पतराटोली निवासी 22 वर्षीय प्रेम बाखला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मैदान में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्रा पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्रेम बाखला को मृत घोषित कर दिया।

    हादसे में अंकित बाखला और जवकीम मिंज गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए खूंटी से रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर किया गया है। अन्य घायलों का भी इलाज जारी है।

    खूंटी जिले में ही दूसरी घटना तोरपा थाना क्षेत्र के हूसीर पंचायत अंतर्गत रोन्हे गांव में हुई। यहां बारिश के दौरान खेत में काम कर रहे निस्तार टोपनो नामक ग्रामीण पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बिजली की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में झारखंड के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। विभाग ने 27 जून तक कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और खेतों में काम करने से बचें। साथ ही गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    बारिश जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं आकाशीय बिजली जैसी घटनाएं गंभीर खतरा भी पैदा करती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

  • राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग

    राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मामले में चल रही जांच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका मानना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।

    गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों को स्वयं आगे आकर नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि न्याय होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि न्याय होता हुआ दिखाई दे। यदि जांच के दौरान पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं तो लोगों के मन में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील की कि ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश कम होगी।

    बिहार के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून के शासन वाले लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।

    लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा योजनाएं और निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने तेजी से हो रहे शहरी विकास पर भी चिंता जताई और कहा कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है तो ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आती रहेंगी। उनके अनुसार प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    राम मंदिर से जुड़े मामले पर दिए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • शिक्षा की नई उड़ान गुजरात में स्कूल ऑन व्हील्स की शुरुआत, गांव-गांव पहुंचेगी पढ़ाई

    शिक्षा की नई उड़ान गुजरात में स्कूल ऑन व्हील्स की शुरुआत, गांव-गांव पहुंचेगी पढ़ाई


    नई दिल्ली । गुजरात में शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने स्कूल प्रवेश महोत्सव के साथ स्कूल ऑन व्हील्स योजना की शुरुआत की है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य दूरदराज और छोटे कस्बों में रहने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मंगलवार को गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तैयार की गई 28 विशेष बसों का लोकार्पण किया।

    इन बसों को चलते-फिरते स्कूल के रूप में विकसित किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा का लाभ मिल सके जहां स्थायी स्कूलों तक पहुंचना कठिन है। गुजरात राज्य मार्ग वाहन व्यवहार निगम द्वारा तैयार की गई ये बसें विशेष रूप से अगरिया विस्तार और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाएंगी।

    स्कूल ऑन व्हील्स बसों को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है। बसों में स्मार्ट टीवी, डिश टीवी, एफएम पोर्टेबल रेडियो, योग गतिविधियों के लिए विशेष स्थान तथा डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।

    इन बसों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। प्रत्येक बस की छत पर उच्च क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से बसों को संचालित करने में मदद करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इन सोलर पैनलों में ऐसी तकनीक का उपयोग किया गया है जिससे बिजली से जुड़े उपकरण लंबे समय तक संचालित रह सकें। बसों में लगाए गए सोलर सिस्टम की वारंटी भी दी गई है, जिससे यह परियोजना लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चल सकेगी।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य में 23वें प्रवेश उत्सव की शुरुआत के साथ शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि गुजरात राज्य मार्ग वाहन निगम ने 28 विशेष बसें शिक्षा विभाग को सौंपी हैं। इन बसों में बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जो कई बार पारंपरिक कक्षाओं से भी बेहतर अनुभव प्रदान करती हैं।

    उन्होंने कहा कि हर बस में लगभग 20 बच्चों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिश टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर भी मिलेगा जिससे उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढ़ेगी।

    हर्ष संघवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसी और बसों को भी शामिल किया जाएगा ताकि राज्य के अधिक से अधिक बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सके। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक और नवाचार का यह प्रयोग भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है। गुजरात सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के प्रसार में मदद करेगी बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

  • बिजली के तार के सहारे बचाई जान, लखनऊ हादसे के जीवित बचे युवक की दर्दनाक आपबीती

    बिजली के तार के सहारे बचाई जान, लखनऊ हादसे के जीवित बचे युवक की दर्दनाक आपबीती


    नई दिल्ली । लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए लोगों को बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरना पड़ा। हादसे से जीवित बच निकले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर का वर्णन किया जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।

    आसिफ ने बताया कि दोपहर के भोजन के बाद वे अपने साथियों के साथ काम पर लौटने की तैयारी कर रहे थे। तभी कुछ कर्मचारियों ने आकर बताया कि नीचे कहीं शॉर्ट सर्किट हुआ है और आग लग गई है। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी भयावह हो जाएगी।

    उन्होंने बताया कि जब लोग बाहर निकलने के लिए स्टूडियो के मुख्य दरवाजे की ओर पहुंचे तो एक बड़ी समस्या सामने आ गई। प्रवेश और निकास के लिए लगाए गए बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था क्योंकि बिजली आपूर्ति बाधित हो चुकी थी। फिंगरप्रिंट मशीन काम नहीं कर रही थी और दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। इससे कई लोग अंदर ही फंस गए।

    किसी तरह कुछ लोग दूसरे कमरे की ओर पहुंचे और वहां से बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन तब तक सीढ़ियों में घना धुआं भर चुका था। हालात लगातार बिगड़ रहे थे। लोगों ने तौलियों और कपड़ों से अपना चेहरा ढककर सांस लेने की कोशिश की, लेकिन धुएं के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

    आसिफ के अनुसार जब उन्हें कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने खिड़की के पास से गुजर रहे एक बिजली के तार को देखा। जान बचाने के लिए उन्होंने उसी तार का सहारा लिया और नीचे उतरने का जोखिम उठाया। उनके साथ चार से पांच अन्य लोग भी किसी तरह नीचे उतरने में सफल रहे। यह कदम बेहद खतरनाक था, लेकिन उस समय उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

    उन्होंने बताया कि कई लोग दम घुटने से बचने के लिए वॉशरूम में छिप गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि वहां धुआं कम होगा, लेकिन दुर्भाग्यवश वे बाहर नहीं निकल सके। हादसे में कई लोगों की मौत का कारण धुएं से दम घुटना बताया जा रहा है।

    आसिफ ने अपने साथी जयंत गुप्ता का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने कांच तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। हालांकि नीचे कूदते समय वे लोहे की रेलिंग पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका कूल्हा टूट गया और वे लंबे समय तक सड़क पर मदद का इंतजार करते रहे।

    घटना की प्रत्यक्षदर्शी माला निगम ने भी हादसे की भयावहता को याद करते हुए बताया कि आग इतनी तेज थी कि किसी के लिए भी अंदर जाकर लोगों को बचाना लगभग असंभव हो गया था। उन्होंने कहा कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद पालतू जानवरों की दुकान से लोगों ने जानवरों को बचाने की कोशिश की, लेकिन ऊपर फंसे कई लोगों तक मदद नहीं पहुंच सकी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत का रास्ता भी बंद था, जिससे कई लोग सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच पाए। घबराए बच्चे अपने परिजनों को फोन कर मदद मांग रहे थे, लेकिन आग और धुएं ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।

    यह हादसा एक बार फिर भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है।

  • लोहागढ़ ट्रेकिंग हादसा निकला हत्या की साजिश, मंगेतर और दोस्त गिरफ्तार

    लोहागढ़ ट्रेकिंग हादसा निकला हत्या की साजिश, मंगेतर और दोस्त गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के पुणे जिले से सामने आए केतन अग्रवाल मौत मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआत में जिस घटना को एक दर्दनाक हादसा माना जा रहा था, वह अब पुलिस जांच में कथित हत्या की साजिश के रूप में सामने आई है। लोनावला के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के दौरान 24 वर्षीय कारोबारी परिवार के युवक केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।

    जानकारी के अनुसार 18 जून को केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहागढ़ किले पर घूमने और ट्रेकिंग के लिए गया था। दोनों की सगाई इसी वर्ष फरवरी में हुई थी और जल्द ही उनकी शादी होने वाली थी। घटना के दिन सुबह करीब साढ़े दस बजे सिया ने फोन कर सूचना दी कि केतन का पैर फिसल गया और वह किले से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, सुरक्षा कर्मी और दोनों परिवारों के सदस्य मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक तौर पर मामला दुर्घटना का प्रतीत हुआ और उसी आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस को मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए मजबूर कर दिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतक के परिजनों, मित्रों और परिचितों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। जांच में पता चला कि केतन को ट्रेकिंग का अच्छा अनुभव था और वह पहले भी कई कठिन ट्रेक कर चुका था। ऐसे में अनुभवी ट्रेकर का अचानक संतुलन खोकर गिर जाना पुलिस को संदिग्ध लगा।

    इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जानकारियों की जांच के दौरान एक नया पहलू सामने आया। जांच में पता चला कि सिया गोयल का चेतन चौधरी नामक युवक से लंबे समय से संपर्क था। दोनों परिवारों का व्यवसाय एक ही क्षेत्र में होने के कारण उनकी पहचान काफी पुरानी बताई जा रही है।

    पुलिस का दावा है कि जांच में मिले साक्ष्यों से यह संकेत मिले कि केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की योजना पहले से बनाई गई थी। आरोप है कि इसी योजना के तहत लोहागढ़ किले पर घटना को अंजाम दिया गया और उसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।

    मामले में पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर सिया गोयल और चेतन चौधरी को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दोनों से विस्तृत जानकारी जुटाई गई। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि मामले के सभी पहलुओं की पुष्टि के लिए आगे की कानूनी और तकनीकी जांच जारी है।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शादी से पहले एक खुशहाल भविष्य के सपने देख रहे युवक की मौत के पीछे कथित रूप से उन्हीं लोगों का नाम सामने आया है जिन पर वह सबसे अधिक भरोसा करता था। फिलहाल पुलिस सभी साक्ष्यों को जुटाकर मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जल्द ही अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।

  • फिर आंदोलन की राह पर अन्ना हजारे RTI नियमों के विरोध में 5 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी

    फिर आंदोलन की राह पर अन्ना हजारे RTI नियमों के विरोध में 5 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी


    नई दिल्ली ।सूचना के अधिकार को लेकर एक बार फिर देश के चर्चित समाजसेवी अन्ना हजारे आंदोलन की राह पर दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा सूचना के अधिकार से जुड़े नियमों में किए गए बदलावों के विरोध में अन्ना हजारे ने 5 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि राज्य सरकार नए नियमों को वापस नहीं लेती है तो वे जनहित में आंदोलन शुरू करेंगे।

    अन्ना हजारे ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किए गए महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026, सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार नए नियम नागरिकों की सूचना तक पहुंच को कठिन बना सकते हैं और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं।

    अपने पत्र में अन्ना हजारे ने विशेष रूप से आवेदन शुल्क में वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुल्क बढ़ाने के पीछे कोई ठोस आर्थिक विश्लेषण या स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि सूचना का अधिकार कोई राजस्व जुटाने वाला कानून नहीं है बल्कि नागरिकों को शासन से जुड़े तथ्यों और सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करने का एक लोकतांत्रिक माध्यम है।

    अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि यदि लगभग दो दशक बाद आवेदन शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो सूचना देने में अनावश्यक देरी करने या जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों पर लगने वाले दंड में भी समान रूप से वृद्धि होनी चाहिए। उनका मानना है कि जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।

    उन्होंने नए नियमों में पहचान पत्र को अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया है। अन्ना का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार किसी भी आवेदक को सूचना मांगने के कारण या व्यक्तिगत विवरण बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में पहचान संबंधी अतिरिक्त शर्तें व्हिसलब्लोअर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

    इसके अलावा उन्होंने एक विषय पर एक आवेदन की व्यवस्था को भी अनावश्यक और जटिल बताया है। उनके अनुसार यह नियम आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और कई मामलों में जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बना सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि बार-बार आवेदन आने पर उन्हें बंद करने की व्यवस्था से लोगों को पूर्ण और अद्यतन जानकारी प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।

    अन्ना हजारे का कहना है कि यदि सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अत्यधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासनिक नियंत्रण वाली बना दी जाएगी तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि नए नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए ताकि सूचना के अधिकार की मूल भावना सुरक्षित रह सके।

    अब सबकी नजर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि सरकार और अन्ना हजारे के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार को लेकर एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।