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  • कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती

    कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती


    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। उत्तर कोलकाता के मुक्तारामबाबू स्ट्रीट स्थित चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात हुए हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले कई पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से पंडाल बंद रखने की सलाह दी गई है।

    हादसे के समय बारिश हो रही थी। इसी दौरान पंडाल में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 19 में से 17 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घायलों में 24 लोगों की हालत खतरे से बाहर बताई गई, जबकि एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की बात कही है। प्रशासन हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहा है और शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    कोलकाता में दुर्गा पूजा के अवसर पर करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं। वहीं, पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 58,000 पूजा आयोजनों की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है। पुलिस कई पंडालों का निरीक्षण कर रही है और भीड़भाड़ वाले आयोजनों को आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

    हादसे के बाद कोलकाता के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू की गई है। यह प्रतिबंध 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक तीन दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। आदेश के तहत कोलकाता मेडिकल कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों सहित निर्धारित इलाकों में रैली, सभा, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने, शांति भंग होने और सुरक्षा संबंधी जोखिमों की आशंका को देखते हुए उठाया है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार सुबह घायलों से मिलने उस अस्पताल पहुंचे, जहां भगदड़ में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है। उनके साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इससे पहले शाह ने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। हादसे के बाद उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों में जाने का अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि मृतकों के 19 परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसके अलावा प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 13 पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

    मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी दुर्गा पूजा आयोजकों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने पर्याप्त रोशनी, प्रवेश और निकास के उचित रास्ते, भीड़ नियंत्रण तथा पुलिस और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हादसे के बाद प्रशासन का मुख्य ध्यान पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है।

  • मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया

    मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में विद्याविहार के नए ईस्ट-वेस्ट पुल के नाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुल का उद्घाटन होने से पहले ही इसे किसके नाम पर रखा जाए, इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं। शिवसेना (यूबीटी) इस पुल का नाम दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के नाम पर रखने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा विधायक पराग शाह ने कैप्टन स्मित मच्छार के नाम का सुझाव दिया है। दोनों नामों के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने पुल पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ नाम का बैनर भी लगाया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में मांग की गई कि नए पुल का नाम नाना पाटेकर के नाम पर रखा जाए। पार्टी का मानना है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के जरिए भी महाराष्ट्र के लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई थी।

    दूसरी ओर, भाजपा विधायक पराग शाह ने पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। मच्छार ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपहरण की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के दौरान गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों का सामना किया। उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण उनका नाम भी पुल के नामकरण की चर्चा में शामिल हो गया है।

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खनकर ने शिवसेना (यूबीटी) पर इस मामले में राजनीतिक श्रेय लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाना पाटेकर को सम्मान देने के लिए पुल के बजाय किसी थिएटर या थिएटर परिसर का नाम उनके नाम पर रखना अधिक उपयुक्त होगा। इस तरह पुल के नाम को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। फिलहाल नामकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    बीएमसी के अनुसार, विद्याविहार का यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह विद्याविहार स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को घाटकोपर के पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है। पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे पटरियों के ऊपर बनाया गया है। इस संपर्क मार्ग से पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। फिल्मों के अलावा किसानों की मदद के लिए किए गए कार्यों के कारण भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने राज कपूर पुरस्कार के तहत मिली 10 लाख रुपये की राशि सूखा राहत के लिए दान कर दी थी। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की।

    यह संस्था सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करती है। उसी वर्ष उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों और लातूर तथा उस्मानाबाद के 113 परिवारों को चेक वितरित किए थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना में भी सेवा दी थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

    कैप्टन स्मित मच्छार का परिवार मुंबई के घाटकोपर पूर्व में रहता है। वह कपड़ा कारोबारी परिवार से आते हैं और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि बचपन से पायलट बनना उनका सपना नहीं था। उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल काम करने के बाद वर्ष 2022 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की।

    30 सितंबर को वह उड़ान एफजेड-1073 के कप्तान थे। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की।

    अब विद्याविहार पुल के नामकरण पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों को लेना है। नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान और स्मित मच्छार के साहसिक कार्य, दोनों को उनके समर्थक सम्मान देने योग्य बता रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि मुंबई के इस नए पुल को आखिर किस नाम से पहचान मिलती है।

  • भारत-पाक सीमा पर डिजिटल फेंसिंग शुरू…. अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स तस्करी पर लगेगी रोक

    भारत-पाक सीमा पर डिजिटल फेंसिंग शुरू…. अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स तस्करी पर लगेगी रोक


    चंडीगढ़।
    पंजाब (Punjab) से सटी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा ( India-Pakistan International Border) पर डिजिटल फेंसिंग का कार्य शुरू हो गया है। यह कदम घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ गतिविधियों पर भी इससे लगाम लगेगी। पंजाब से सटी दोनों देशों की सरहद पर कई जगहों पर यह फेंसिंग लग चुकी है।

    यह एक मजबूत लोहे की दीवार है, जिसमें छेद हैं और ऊपर कोबरा तार लगाई गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक बाड़बंदी के साथ अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी मजबूत करना है। इसमें सेंसर, थर्मल कैमरे, लेजर तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगे हैं। पंजाब से सटी लगभग साढ़े पांच सौ किलोमीटर की सरहद के कई हिस्सों में उक्त फेंसिंग लगाई गई है। ये दुश्मन की प्रत्येक गतिविधियों को भी भांप लेगी।


    निगरानी व्यवस्था की खासियत

    इस फेंसिंग में लगे सेंसर जमीन की हलचल, फेंसिंग से छेड़छाड़ या संदिग्ध गतिविधियों का संकेत देते हैं। थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन कैमरे रात के अंधेरे में भी नजर रखते हैं। ये सर्दी में घने कोहरे और खराब मौसम में भी मददगार होंगे।

  • मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज

    मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज


    मेरठ । मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान अब अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जता रही है। दूसरी ओर पति की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली रविता ने भी अपने बचाव के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों महिलाओं ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए निजी वकील उपलब्ध कराने की मांग की है। जेल प्रशासन के मुताबिक उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन दोनों मामलों में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
    नीला ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को पति सौरभ की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया गया है। इसी तरह सांप कांड में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को पति अमित की हत्या के मामले में फांसी की सजा दी गई है। दोनों घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया था। निचली अदालत के फैसले के बाद अब चारों दोषी उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे निजी अधिवक्ताओं की सहायता चाहते हैं ताकि अपने पक्ष को कानूनी तरीके से प्रस्तुत कर सकें।
    जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान और रविता की ओर से निजी वकील की मांग को लेकर आवेदन दिया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों के आवेदन पर नियमानुसार निजी वकील उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिलता है और मामले में आगे का निर्णय संबंधित अदालतों की सुनवाई तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर होता है। इसलिए निचली अदालत के फैसले के बाद भी इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
    इस बीच जेल में बंद चारों दोषियों के कामकाज से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान ने सिलाई और कढ़ाई का काम चुना है जबकि साहिल खेती से जुड़ा काम कर रहा है। रविता ने बैग बनाने का काम चुना है और अमरदीप रंगाई-पुताई से संबंधित काम कर रहा है। जेल प्रशासन ने बताया कि मृत्युदंड की सजा के बाद रविता और अमरदीप को नई बैरकों में स्थानांतरित किया गया है। बंदियों की निगरानी और जेल से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं।
    फांसी की सजा के मामलों में अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा सकती है। खबर के मुताबिक पुरुष बंदियों को आगरा सेंट्रल जेल और महिला बंदियों को लखनऊ स्थित निर्धारित जेल में भेजने की व्यवस्था है। हालांकि स्थानांतरण जेलों में उपलब्ध जगह और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। फिलहाल चारों दोषियों की अपील से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
    दूसरी ओर सांप कांड में सजा पाए अमरदीप की मां का एक वीडियो भी चर्चा में है। वीडियो में वह अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए उसे रिहा कराने की मांग करती नजर आ रही हैं। उन्होंने रविता को सजा देने की बात भी कही है। हालांकि किसी आरोपी के दोषी होने या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है।
    इसी बीच मेरठ के जल्लाद पवन का बयान भी सामने आया है। उसने कहा कि यदि जेल प्रशासन उसे जिम्मेदारी सौंपता है तो वह चारों दोषियों को फांसी देने के लिए तैयार है। उसका कहना है कि गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार सजा मिलना जरूरी है। अब इन मामलों में आगे की कानूनी कार्यवाही और उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए। पूछताछ हरिद्वार के भेल क्षेत्र स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में हुई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम और पूर्व विधायक वहां से रवाना हो गए। इस पूछताछ के बाद मामले की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

    पूछताछ के बाद सुरेश राठौड़ ने बाहर आकर अपने बयान में कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने जो भी सवाल पूछे, उनसे संबंधित बातें उन्होंने सत्यता के साथ बताईं। उन्होंने कहा, “मैंने सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग किया है। न इससे कम, न इससे ज्यादा।” पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करते रहेंगे।

    वायरल ऑडियो पर सवाल, उर्मिला सनावर से अनभिज्ञता जताई
    पूछताछ के बाद पत्रकारों ने सुरेश राठौड़ से कथित वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े संबंधों को लेकर सवाल किए। इस पर पूर्व विधायक ने उर्मिला सनावर के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि उर्मिला सनावर कौन हैं और उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वायरल ऑडियो को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में यह सवाल अहम माना जा रहा है, हालांकि पूछताछ में अधिकारियों ने किन-किन विशिष्ट बिंदुओं पर सवाल किए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अंकिता के परिजनों ने की थी कार्रवाई की मांग

    पिछले कुछ दिनों में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था और सीबीआई मुख्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। परिजनों ने मामले में जल्द और कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई थी। परिवार की ओर से न्याय की मांग लगातार चर्चा में रही है। इसी बीच सीबीआई की ओर से पूर्व विधायक से पूछताछ किए जाने की घटना जांच की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद बढ़ा था विवाद
    इससे पहले सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इस रिकॉर्डिंग को लेकर अलग-अलग सवाल उठे और मामले ने राजनीतिक चर्चा का रूप भी लिया। हालांकि, किसी कथित रिकॉर्डिंग में कही गई बातों और उनकी सत्यता को जांच के निष्कर्ष के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी कारण इस प्रकरण में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    सीबीआई जांच में किन पहलुओं पर नजर?

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वायरल ऑडियो से जुड़े सवाल भी इस मामले की चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, पूर्व विधायक से पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने किन विशेष जानकारियों की पुष्टि करने की कोशिश की और इस पूछताछ से जांच को क्या निष्कर्ष मिला, इसका आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    फिलहाल सुरेश राठौड़ ने जांच में सहयोग करने की बात कही है और उर्मिला सनावर को लेकर जानकारी होने से इनकार किया है। सीबीआई की पूछताछ को मामले की जांच की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आगे की कार्रवाई और जांच से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम के व्यापक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

  • गगनयान मिशन को मिली नई ताकत, ISRO ने परखी अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की तकनीक, 2026 के मानवरहित मिशन पर नजरें

    गगनयान मिशन को मिली नई ताकत, ISRO ने परखी अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की तकनीक, 2026 के मानवरहित मिशन पर नजरें


    नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष अभियान के लिए गगनयान मिशन एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO इस मिशन को सफल बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण परीक्षण कर रहा है। इसी कड़ी में इसरो ने क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने से जुड़े अहम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे तो उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में इस तकनीक की बड़ी भूमिका होगी। इस सफलता से गगनयान के पहले मानवरहित मिशन G1 की तैयारियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
    गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित वापस लाने की योजना है। इस अभियान में अंतरिक्ष यान के अलग-अलग हिस्सों का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। गगनयान के ऑर्बिटल मॉड्यूल में मुख्य रूप से दो हिस्से होते हैं। पहला क्रू मॉड्यूल है जिसमें अंतरिक्ष यात्री यात्रा करेंगे। दूसरा सर्विस मॉड्यूल है जो मिशन के दौरान जरूरी सेवाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है। अंतरिक्ष यान के उड़ान भरने के समय दोनों मॉड्यूल एक साथ जुड़े रहते हैं और अपने निर्धारित कार्य करते हैं।
    मिशन का सबसे महत्वपूर्ण चरण तब आता है जब क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी पर वापस लाना होता है। इस दौरान उसे सर्विस मॉड्यूल से अलग करना पड़ता है। दोनों मॉड्यूल के बीच बिजली और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए कई कनेक्शन होते हैं जिन्हें तय प्रक्रिया के तहत अलग किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई तकनीकी उपकरण एक साथ काम करते हैं। यदि किसी कनेक्शन या अलग करने वाले सिस्टम में गड़बड़ी होती है तो अंतरिक्ष यान की वापसी प्रभावित हो सकती है। इसलिए इसरो पहले ही इन प्रणालियों की क्षमता और विश्वसनीयता को परख रहा है ताकि वास्तविक मिशन के दौरान किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
    यह परीक्षण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में किया गया। यहां क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को जोड़कर ऐसी व्यवस्था तैयार की गई जिससे वास्तविक उड़ान के दौरान होने वाली प्रक्रिया का आकलन किया जा सके। परीक्षण में यह जांचा गया कि दोनों मॉड्यूल को जोड़ने वाले कनेक्शन निर्धारित समय पर अलग हो सकते हैं या नहीं। इसके साथ ही अलगाव के दौरान उत्पन्न होने वाले झटकों और उनके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तकनीकी प्रणालियों की मजबूती भी परखी गई।
    इसरो ने एवियोनिक्स इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम हीट शील्ड और तैनात होने वाली अंबिलिकल शील्ड जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की कार्यक्षमता की भी जांच की। ये सिस्टम अंतरिक्ष यान को सही दिशा में बनाए रखने और पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय जरूरी सुरक्षा प्रदान करने में मदद करते हैं। वापसी के दौरान क्रू मॉड्यूल को अत्यधिक तापमान का सामना करना पड़ता है इसलिए उसकी सुरक्षा व्यवस्था का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा तापमान और नमी नियंत्रित करने वाले उपकरणों की भी जांच की गई।
    अब इसरो की नजर गगनयान के पहले मानवरहित मिशन G1 पर है। वर्ष 2026 में इस मिशन को भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के बिना यान को अंतरिक्ष में भेजकर विभिन्न प्रणालियों और सुरक्षा प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा। इस उड़ान से मिलने वाले परिणाम आगे के मिशनों की तैयारियों में मदद करेंगे। गगनयान की सफलता भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है। साथ ही यह देश की वैज्ञानिक क्षमता और स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

  • हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नादरगुल स्थित एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा हो गया। कॉलेज में आयोजित उत्सव के दौरान लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाया गया एक स्ट्रक्चर अचानक गिर गया। इस घटना में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ईईई) की प्रथम वर्ष की छात्रा सोना नारायण दास की मौत हो गई, जबकि उसकी बहन मीना नारायण दास गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में कई अन्य छात्र भी घायल हुए हैं।

    यह घटना शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को कॉलेज में आयोजित डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुई। उत्सव में छात्र शामिल हुए थे और कार्यक्रम चल रहा था। इसी बीच लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाए गए स्ट्रक्चर के गिरने से वहां मौजूद लोगों में हादसे की स्थिति पैदा हो गई। घटना में कई छात्रों को चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल सोना नारायण दास को बचाने और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृत छात्रा की पहचान सोना नारायण दास के रूप में हुई है। वह एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रथम वर्ष की छात्रा थी। डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुए इस हादसे ने कॉलेज के उत्सवी माहौल को दुखद घटना में बदल दिया। सोना की बहन मीना नारायण दास भी हादसे की चपेट में आ गई। उसे गंभीर चोटें आई हैं और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

    घायल मीना नारायण दास को इलाज के लिए नादरगुल के पास स्थित प्रत्युषा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में उसका उपचार जारी है। हादसे में घायल हुए अन्य छात्रों को भी चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद घायलों के इलाज पर ध्यान दिया गया, जबकि मृत छात्रा की पहचान और हादसे से जुड़ी शुरुआती जानकारी सामने आई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह कार्यक्रम के दौरान लगाया गया स्ट्रक्चर गिरना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्ट्रक्चर किन परिस्थितियों में गिरा। यह भी अभी साफ नहीं है कि उसके गिरने के पीछे तकनीकी खराबी, असंतुलन या कोई अन्य कारण था। घटना के समय कार्यक्रम स्थल पर कितने छात्र मौजूद थे, इसकी भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। स्ट्रक्चर लगाने की व्यवस्था कैसी थी, उसे किस उद्देश्य से स्थापित किया गया था और कार्यक्रम के दौरान उसकी सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इन बिंदुओं पर अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, स्ट्रक्चर गिरने से कई छात्र घायल हुए और सोना नारायण दास की इलाज के दौरान मौत हो गई।

    इस घटना में सबसे गंभीर स्थिति सोना की बहन मीना की है, जिसका अस्पताल में उपचार जारी है। फिलहाल उसकी सेहत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान हुई इस दुर्घटना में एक छात्रा की मौत और कई विद्यार्थियों के घायल होने से कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारण और परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए अधिक जानकारी का इंतजार है।

  • भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग

    भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग


    नई दिल्ली। लंदन में यूट्यूबर ध्रुव राठी के प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में ध्रुव राठी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे तो दूसरी ओर उनके विरोध में भी लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ने लगा। हालात को संभालने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को अलग रखा ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
    ध्रुव राठी ने संसद चौक पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने कभी भारत पर शासन किया था और आज भारतीय नागरिक उसी देश की संसद के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं। राठी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि अपने देश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती लेकिन लंदन में लोग खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें उनके घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि ये आरोप राठी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
    राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति हो। उनके मुताबिक यह मांग इसलिए उठाई जा रही है ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें और प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने परिवार और परिचितों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा करने की अपील की।
    इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा ने किया था। इसे ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारतीय छात्र संगठनों और प्रवासी भारतीय समूहों का समर्थन भी मिला। प्रदर्शन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए। इसके साथ ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देने की कोशिश की गई। आयोजकों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना जरूरी है।
    दूसरी ओर ध्रुव राठी के विरोध में भी एक जवाबी प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंडिया डायस्पोरा यूके ने भारत समर्थक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। संगठन के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय मजबूत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में खड़ा है। इस तरह एक ही स्थान पर अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समूह आमने-सामने आ गए।
    दोनों पक्षों की ओर से लगातार नारेबाजी के कारण माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर समूह दूसरे की आवाज को दबाने के लिए तेज नारे लगाने लगा। इसके बाद पुलिस ने दोनों समूहों के बीच दूरी बनाए रखी। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि भारत की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

  • अठावले का अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता, बोले- मोदी हमारे कैप्टन, NDA फिर बनाएगा सरकार

    अठावले का अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता, बोले- मोदी हमारे कैप्टन, NDA फिर बनाएगा सरकार


    नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में NDA फिर सत्ता में आएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनी टीम का कप्तान बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में गठबंधन मजबूत है। अठावले ने इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया।

    अठावले महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “पीएम मोदी का बेड़ा मजबूत है और 2029 के लोकसभा चुनाव में सरकार में कोई बदलाव नहीं होने वाला है। मोदी हमारे कैप्टन हैं और मैं उनका प्लेयर हूं।” उन्होंने राहुल गांधी को लेकर भी राजनीतिक अंदाज में कहा कि वह उनका विकेट लेंगे।

    ‘अंबेडकरवादी हैं तो RPI(A) में शामिल होने पर विचार करें’

    अठावले ने अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि यदि वह अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े हैं, तो उन्हें RPI(A) के साथ आना चाहिए। उनके मुताबिक, दीपके युवाओं को पार्टी से जोड़ने और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आधार पर संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दीपके को RPI(A) में शामिल होने के प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दीपके दिल्ली में CJP के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई के बाद चर्चा में हैं।

    तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए गए थे दीपके

    अभिजीत दीपके को शुक्रवार को दिल्ली के झंडेवालान स्थित अपने घर से निकलने के बाद हिरासत में लिया गया था। वह कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें 10 अक्टूबर को दिए गए शांति बॉन्ड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

    शनिवार को उन्हें शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड के आधार पर सशर्त जमानत दे दी गई। उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जहां कुछ शर्तों के साथ रिहाई का आदेश दिया गया।

    शांति बॉन्ड के आधार पर मिली राहत

    पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शांति बॉन्ड में दिए गए आश्वासन के आधार पर दीपके को छोड़ा गया है। अधिकारी के मुताबिक, आगे की जानकारी के लिए लिखित आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

    हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस थाने और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

    इस तरह एक ओर रामदास अठावले ने दीपके को अपनी पार्टी में शामिल होने का राजनीतिक न्योता दिया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े मामले में दीपके को शांति बॉन्ड की शर्तों के साथ रिहाई मिल गई।

  • कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर भगदड़, 17 लोगों की मौत, मंत्री बोले- सीटी और अफवाह से बिगड़े हालात

    कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर भगदड़, 17 लोगों की मौत, मंत्री बोले- सीटी और अफवाह से बिगड़े हालात


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी के अवसर पर कथित तौर पर भगदड़ मच गई। खबर में 17 लोगों की मौत और करीब 40 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। घटना के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

    राज्य के मंत्री उमेश राय ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि महासप्तमी के मौके पर बड़ी संख्या में लोग दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन के लिए निकले थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई और बारिश से बचने के लिए लोग चोरबागान पंडाल के आसपास जमा होने लगे।

    सीटी या घोषणा के बाद अचानक बढ़ी भीड़

    मंत्री उमेश राय के मुताबिक, बारिश के बीच मची अफरा-तफरी के दौरान किसी ने संभवतः सीटी बजाई या कोई घोषणा की, जिसके बाद लोगों को पंडाल के अंदर जाने का संकेत मिला। इसके बाद अचानक बड़ी संख्या में लोग एक साथ आगे बढ़े और हालात बेकाबू हो गए।

    मंत्री ने इसे भगदड़ की संभावित वजह बताया है। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और भीड़ में अफरा-तफरी शुरू होने के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    अस्पतालों में घायलों का इलाज, छह मृतकों की पहचान का दावा

    घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को निकालकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, डॉक्टरों ने घायलों की हालत स्थिर बताई है और उनका इलाज जारी है। खबर में अब तक छह मृतकों की पहचान होने की बात भी कही गई है।

    मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना

    रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अस्पताल में मौजूद रहे और उपचाराधीन लोगों तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। हादसे के मद्देनजर सरकार की ओर से आगामी कार्यक्रम रद्द किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

    सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को सहायता देने और घायलों को उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन, पंडाल में प्रवेश की व्यवस्था और अफवाह से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

    नोट: इस खबर में हताहतों की संख्या, मंत्री के बयान और मुख्यमंत्री की भूमिका संबंधी विवरण उपलब्ध कराए गए मूल पाठ पर आधारित हैं। प्रकाशन से पहले घटना और संबंधित आधिकारिक बयानों की स्वतंत्र पुष्टि कर लें।