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  • नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी

    नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में TCS कार्यालय से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी निदा खान को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर राहत दी है। हालांकि जमानत के साथ अदालत ने शर्त रखी है कि निदा खान को नियमित रूप से संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। यानी मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें समय समय पर पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल आरोपी को राहत मिली है लेकिन मामले की कानूनी जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह मामला नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 166/2026 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि TCS कार्यालय में कुछ कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और इस्लाम से जुड़े रीति रिवाज अपनाने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता था। शिकायत में हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस केस में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    शुरुआत में इस मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तौसीफ बिलाल अत्तार दानिश एजाज शेख शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी और रजा रफीक मेमन के नाम शामिल थे। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने निदा खान का नाम भी मामले में जोड़ा और उन्हें आरोपी नंबर पांच बनाया। यानी शुरुआती एफआईआर में उनका नाम नहीं था बल्कि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने उन्हें मामले में आरोपी बनाया।

    पुलिस के अनुसार निदा खान की गिरफ्तारी से पहले करीब 25 दिनों तक उनकी तलाश की गई। इसके बाद नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की टीम ने उन्हें नारेगांव इलाके से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि वह कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में मौजूद थीं और वहां उनके चार रिश्तेदार भी मौजूद थे। गिरफ्तारी के बाद मामले में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस ने पूछताछ की।

    जमानत की सुनवाई के दौरान निदा खान की ओर से अदालत में कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं। अदालत के सामने उनकी गर्भावस्था की बात भी रखी गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी। हालांकि राहत के साथ नियमित पुलिस हाजिरी की शर्त लगाई गई है। इससे साफ है कि जमानत मिलने के बावजूद जांच की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रहेगी।

    इस मामले की जांच फरवरी 2026 में शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में एक निजी कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला के रमजान के दौरान रोजे रखने का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने मामले की पड़ताल के लिए महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में भेजकर वहां की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। जांच के दौरान कुछ टीम लीडरों पर कर्मचारियों को परेशान करने और अपने पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने के आरोप भी सामने आए थे।

    मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया था। अब निदा खान को भी अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच जारी रहेगी और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी। फिलहाल निदा खान को कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी और जांच में सहयोग करना होगा।

  • तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन के भीतर चल रहा विवाद अब 28 अगस्त को होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर खुलकर सामने आ गया है। तृणमूल छात्र परिषद के दो गुटों ने मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है। एक ही स्थान और एक ही दिन कार्यक्रम की मांग किए जाने से दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस हर वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाता है। इस अवसर पर मेयो रोड पर रैली और सभा का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार पार्टी से जुड़े दो छात्र गुटों की अलग-अलग गतिविधियों के कारण स्थापना दिवस का कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया जा चुका है। संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध भी किया गया। इसके बाद दूसरे गुट ने भी इसी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलने का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी 28 अगस्त को मेयो रोड पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है। इस गुट की ओर से कोलकाता पुलिस से रैली की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और इसे अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक गुट की याचिका पर पहले ही सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वजह से अब दोनों पक्षों की नजर अदालत के अगले रुख पर टिकी हुई है।

    मामले का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या दोनों गुटों को एक ही स्थान पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है या फिर प्रशासन और अदालत की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था तय की जाएगी। एक ही दिन और एक ही स्थान पर दो कार्यक्रम होने की स्थिति में कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करना होगा।

    मेयो रोड का स्थान तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थान को लेकर दोनों पक्षों की दावेदारी ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। पहले से मौजूद राजनीतिक खींचतान के बीच छात्र संगठन का यह विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।

    फिलहाल अदालत के फैसले और प्रशासन की अनुमति पर आगे की तस्वीर निर्भर करेगी। दोनों गुट अपने-अपने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय हैं, जबकि 28 अगस्त की तारीख नजदीक आने के साथ विवाद के समाधान को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थापना दिवस का आयोजन किस व्यवस्था के तहत होगा और क्या दोनों पक्षों को अलग-अलग कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

  • सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    नई दिल्ली ।1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे सज्जन कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन के बाद परिवार के सदस्य अस्पताल पहुंचे।

    जानकारी के अनुसार, जेल में सज्जन कुमार के शरीर में कोई हलचल नहीं मिलने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार भी निधन की जानकारी मिलने के बाद सफदरजंग अस्पताल पहुंचे।

    सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे। दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1 नवंबर 1984 को हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इस घटना में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या हुई थी।

    इस मामले में सज्जन कुमार पर हिंसा के दौरान भीड़ को उकसाने का आरोप था। अदालत ने उन्हें दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, हत्या और अन्य संबंधित अपराधों की धाराओं के तहत दोषी माना था। मामले की सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया गया और इसके बाद उन्हें दोषी करार दिया गया।

    फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया, जहां वह अपनी सजा काट रहे थे। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में यह उनके खिलाफ सुनाई गई महत्वपूर्ण सजा में शामिल थी।

    इससे पहले भी सज्जन कुमार को 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। वर्ष 2018 में उन्हें पांच सिखों की हत्या और एक धार्मिक स्थल को आग लगाए जाने से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस दोषसिद्धि के बाद उनके राजनीतिक जीवन को भी बड़ा झटका लगा था।

    सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत की। शुरुआती दौर में वह दिल्ली नगर निगम के पार्षद बने और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे दिल्ली की राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ता गया और वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

    सज्जन कुमार वर्ष 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। वह संजय गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते थे। कई वर्षों तक उन्होंने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान बनाई।

    वर्ष 2018 में 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से दंगा मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और सजा से जुड़ा रहा।

    सज्जन कुमार के निधन के साथ उनके लंबे राजनीतिक सफर और 1984 के दंगा मामलों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। उनके निधन की खबर के बाद परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।

  • राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली ।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर गुरुवार को देशभर में उन्हें याद किया गया। 20 अगस्त को मनाए जाने वाले इस अवसर को सद्भावना दिवस के रूप में भी जाना जाता है। दिल्ली स्थित वीर भूमि पर राजीव गांधी की समाधि पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली और 40 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बने। वह 1984 से 1989 तक इस पद पर रहे।

    राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में तकनीक, संचार, शिक्षा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए भी याद किया जाता है। उनके समर्थक उन्हें युवा भारत की बदलती जरूरतों और तकनीकी विकास के साथ देश को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल करते हैं। उनके राजनीतिक विचारों में युवाओं की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहा।

    कांग्रेस नेताओं ने जयंती के अवसर पर राजीव गांधी की उस विरासत को भी रेखांकित किया, जिसमें युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और देश में आधुनिक तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का संवैधानिक बदलाव भी उनके प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वपूर्ण पहलों में गिना जाता है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।

    राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कई विवादों और चुनौतियों से भी जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।

    राजीव गांधी की जयंती पर होने वाले कार्यक्रम हर वर्ष उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक विरासत को याद करने का अवसर बनते हैं। वीर भूमि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, तकनीकी प्रगति और युवाओं की भूमिका से जुड़े उनके विचारों को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का एक साथ पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देना उनके राष्ट्रीय राजनीतिक जीवन की व्यापक पहचान को भी दर्शाता है।

  • उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चल रही जननी सुरक्षा योजना का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नौ अगस्त तक प्रदेश में 7,17,736 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। योजना का उद्देश्य महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

    जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सहायता 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये निर्धारित है। इस आर्थिक सहयोग का उद्देश्य प्रसव से जुड़े खर्चों में सहायता देना और महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक अप्रैल से नौ अगस्त के बीच दर्ज कुल 7,17,736 संस्थागत प्रसवों में से 5,43,661 लाभार्थियों को योजना की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस तरह बड़ी संख्या में महिलाओं तक योजना का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा है। विभाग का जोर अब बाकी पात्र लाभार्थियों का भुगतान जल्द पूरा करने पर है।

    प्रदेश के कई जिलों में योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को भुगतान पहुंचाने में बेहतर प्रदर्शन सामने आया है। हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत, जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान किया जा चुका है।

    पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में योजना की प्रगति से यह संकेत मिलता है कि संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    सुरक्षित मातृत्व के लिए केवल अस्पताल में प्रसव कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसव के दौरान जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाएं जरूरत के अनुसार मिल सकती हैं। प्रसव के दौरान किसी जटिलता की स्थिति में समय पर पहचान और उपचार से मां तथा नवजात दोनों के स्वास्थ्य जोखिम को कम किया जा सकता है।

    इस व्यवस्था को मजबूत करने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ये कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रेरित करने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में लाभार्थियों के भुगतान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। इन जिलों में 50 प्रतिशत या उससे कम भुगतान होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों को भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर कर पात्र लाभार्थियों को शत प्रतिशत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की यह पहल मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अस्पतालों में प्रसव बढ़ने से जटिल मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य योजना की पहुंच को और व्यापक बनाते हुए भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाना और सुरक्षित प्रसव की सुविधा को अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना है।

  • अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति

    अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत तथा योग गुरु बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में युवाओं और जेन जी श्रेणी के संदर्भ में दिए गए एक विवादित बयान को लेकर दोनों हस्तियों के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है। बाबा रामदेव द्वारा कंगना के अतीत और जीवनशैली को लेकर दिए गए वक्तव्य के बाद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन पर कड़ा पलटवार किया है।

    यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान बाबा रामदेव से कंगना रनौत के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं के आचरण को लेकर टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योग गुरु ने कहा था कि किसी को भी युवाओं के लिए अनुचित शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने अभिनेत्री के पिछले जीवन और कारनामों का उल्लेख करते हुए इस प्रकार के बयानों से बचने की सलाह दी थी।

    बाबा रामदेव के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनके व्यक्तिगत जीवन, जवानी या निजी कक्ष के बारे में अफवाहों और गॉसिप के आधार पर अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत आचरण और चरित्र के विषय में उन्हें सलाह देने की आवश्यकता नहीं है और उनका सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत जीवन पूरी तरह से स्पष्ट है।

    अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में अतीत के कुछ कानूनी घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ झूठे दावों या भ्रामक प्रचार से संबंधित कोई अदालती आदेश मौजूद नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि बिना पक्के तथ्यों और केवल अनुमानों के आधार पर किसी भी जनप्रतिनिधि या कलाकार के चरित्र पर टिप्पणी करना अनुचित है।

    उल्लेखनीय है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शनों के दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। उस पोस्ट में उन्होंने सार्वजनिक आचरण की मर्यादा तोड़ने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी पूरी युवा पीढ़ी या सभी युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि केवल उन लोगों तक सीमित थी जिन्होंने मर्यादा का उल्लंघन किया था।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों में दोनों प्रमुख हस्तियों के बीच चल रहे इस वैचारिक टकराव की व्यापक चर्चा हो रही है। इस घटनाक्रम के बाद से सोशल मीडिया पर भी विभिन्न वर्गों द्वारा अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे यह विषय लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    नई दिल्ली । उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को शाम के समय अस्पताल परिसर के भीतर ही निजी प्रैक्टिस करने की सशर्त छूट प्रदान की जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को किफायती दर पर शाम के वक्त भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    वर्तमान में राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है, जिसके एवज में सरकार उन्हें नियमित वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस का भुगतान करती है। हालांकि, कतिपय व्यावहारिक समस्याओं और मरीजों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शाम के समय अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए यह सुविधा देने का मॉडल तैयार किया है।

    इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से ऐच्छिक रखा जाएगा और इसके संचालन के लिए तीन प्रमुख शर्तें अनिवार्य की गई हैं। पहली शर्त के अनुसार डॉक्टरों को मरीजों से बेहद न्यूनतम परामर्श शुल्क लेने की अनुमति होगी। दूसरी शर्त यह है कि परामर्श के दौरान डॉक्टर बाहर की दवाइयां नहीं लिख सकेंगे, बल्कि अस्पताल में उपलब्ध या जेनेरिक दवाएं ही सुझानी होंगी। तीसरी शर्त के तहत यदि मरीज को किसी प्रकार के ऑपरेशन या गंभीर इलाज की आवश्यकता होती है, तो वह प्रक्रिया केवल सरकारी अस्पताल में ही पूरी की जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है और जल्द ही इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से डॉक्टरों को अस्पताल परिसर के बाहर अनधिकृत क्लिनिक चलाने की आवश्यकता नहीं होगी और अस्पताल के संसाधनों का भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में दोपहर दो बजे के बाद सरकारी अस्पतालों में सेवाएं सीमित हो जाती थीं। नई नीति लागू होने से पर्वतीय जिलों के निवासियों को शाम के समय भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही प्राप्त हो सकेगा। इससे निजी अस्पतालों और महंगे क्लीनिकों पर मरीजों की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा भी इस प्रकार के हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाया जा सके। उत्तराखंड में इस निर्णय के लागू होने से न केवल आम मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि सरकारी डॉक्टरों की कार्यक्षमता का भी राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के हित में सही उपयोग हो सकेगा।

  • कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के साथ अपना संपर्क तथा संचार मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर देना तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों का सोशल मीडिया परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया। लगभग साढ़े तीन महीने के कामकाज और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई इस रैंकिंग सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे हैं।

    मंत्रियों का यह विशेष रिपोर्ट कार्ड 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक जैसी प्रमुख नेटवर्किंग साइट्स पर मंत्रियों की सक्रियता का गहन विश्लेषण किया गया। रैंकिंग तय करने के लिए दैनिक पोस्ट की संख्या, यूजर्स एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया।

    रिपोर्ट में केवल सत्ता पक्ष के मंत्रियों का ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और कंगना रनौत जैसे नेताओं ने उच्च रैंकिंग हासिल की। वहीं विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल भी शीर्ष डिजिटल प्रभाव वाले नेताओं में शामिल रहे।

    हाल के समय में राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद सरकार ने अपनी डिजिटल संचार नीति में व्यापक बदलाव किया है। अब पारंपरिक और औपचारिक राजनीतिक बयानों के स्थान पर लघु रील्स, अनौपचारिक संवाद और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं की पसंद के अनुसार सरल और प्रभावकारी भाषा में अपनी बात पहुंचाना है।

    इसी कड़ी में विभिन्न मंत्रालयों को नए और लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम के तहत विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू किया है। इसके अलावा कैबिनेट में यह निर्णय भी लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री सीधे संवाद के लिए देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर छात्रों से चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मंत्रियों के इस प्रत्यक्ष और डिजिटल संवाद कार्यक्रम को लागू करने की योजना है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीति से सरकार और युवा वर्ग के बीच सीधे संवाद का एक पारदर्शी माध्यम स्थापित होगा, जिससे सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक तेजी से पहुंचेगी।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए एनसीईआरटी समिति का पुनर्गठन, नवंबर तक आएगी 11वीं कक्षा की नई किताब

    राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए एनसीईआरटी समिति का पुनर्गठन, नवंबर तक आएगी 11वीं कक्षा की नई किताब

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने स्कूली शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और प्रासंगिक बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए 20 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम का पुनर्गठन किया है। इस नई समिति में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, स्कूल शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

    पुनर्गठित समिति में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और उत्कल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल हैं। इस 20 सदस्यीय टीम की संरचना में विविध शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों का समावेश किया गया है, ताकि अध्ययन सामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप संतुलित और समृद्ध बनाया जा सके।

    पाठ्यपुस्तक विकास दल की कमान प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक और शिक्षाविद संदीप शास्त्री को सौंपी गई है। समिति को दोनों कक्षाओं की पुस्तकों के निर्माण के लिए स्पष्ट समयसीमा प्रदान की गई है। इसके तहत कक्षा 11वीं की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को 30 नवंबर 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कक्षा 12वीं की नई पुस्तक 30 जुलाई 2027 तक तैयार की जाएगी।

    एनसीईआरटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के तहत संचालित की जाएगी। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह सामाजिक विज्ञान, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा और आधुनिक शिक्षाशास्त्र से जुड़े विभिन्न समूहों के मार्गदर्शन में कार्य करे। तैयार की जाने वाली सामग्री को अंतिम स्वीकृति देने, प्रकाशित करने और वितरित करने का दायित्व परिषद के पास ही रहेगा।

    शैक्षणिक सुधारों की इस श्रृंखला के तहत मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्कूलों में नए सत्र के अनुसार पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। नई पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा के दौरान समावेशन, सांस्कृतिक जुड़ाव, आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    अकादमिक जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि विषय विशेषज्ञों के व्यापक अनुभव से तैयार होने वाली ये नई किताबें विद्यार्थियों को राजनीतिक सिद्धांतों और भारतीय शासन व्यवस्था की गहरी समझ प्रदान करेंगी। एनसीईआरटी का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को अद्यतन जानकारी के साथ गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।