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  • जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करने वाली अभिनेत्री और मॉडल पूनम पांडे अब पार्टी के नए आंदोलन के विरोध में नजर आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पूनम का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देश की छवि प्रभावित होती है।

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जून और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सीजेपी को कई लोगों का समर्थन मिला था। छात्रों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर आम लोगों के साथ कुछ चर्चित हस्तियां भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी। इसी दौरान पूनम पांडे भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने छात्रों की समस्याओं पर सरकार से जल्द ध्यान देने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की थी।

    हालांकि, अब पार्टी की ओर से चलाए जा रहे नए आंदोलन को लेकर पूनम का रुख बदल गया है। सीजेपी इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है। पूनम पांडे ने इन मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में विरोध के नाम पर जिस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, वे उचित नहीं हैं।

    पूनम ने कहा कि किसी के भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने का तरीका ऐसा नहीं हो सकता कि जब मन हुआ, सीधे पद छोड़ने की मांग कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पद की अहमियत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर इस तरह की मांगें किस आधार पर की जा रही हैं। उनके अनुसार, देश का संचालन इस तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई पड़ोसी या निजी परिचित नहीं हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति हैं।

    पूनम पांडे ने आंदोलन में शामिल युवाओं की समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस उद्देश्य से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्र और युवा बिना पूरी जानकारी के प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इसे देश के लिए अस्वस्थ माहौल बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय हित में नहीं हैं।

    इसी बातचीत के दौरान पूनम ने इमरान खान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के कारण उन्हें देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए था। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।

    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में विरोध का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समर्थकों को बुलाया था। हालांकि, वहां बड़ी संख्या में विरोध करने वाले लोग भी जुट गए। कनॉट प्लेस के कई कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारे लगाए तथा सीजेपी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    कार्यक्रम से पहले पार्टी के युवा नेताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इस घटनाक्रम के बीच सीजेपी को एक ओर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पहले समर्थन कर चुकी पूनम पांडे की आलोचना भी उसके लिए चर्चा का विषय बन गई है।

  • 26/11 आतंकी हमले के दोषी कसाब ने अदालत में क्यों लिया बॉलीवुड फिल्मों का नाम, उज्ज्वल निकम ने सुनाया मुकदमे से जुड़ा चौंकाने वाला किस्सा

    26/11 आतंकी हमले के दोषी कसाब ने अदालत में क्यों लिया बॉलीवुड फिल्मों का नाम, उज्ज्वल निकम ने सुनाया मुकदमे से जुड़ा चौंकाने वाला किस्सा


    नई दिल्ली । वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले और उससे जुड़े मुकदमे को लेकर विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कई अहम घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि हमले के दोषी अजमल कसाब ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार करने के बावजूद अपनी भूमिका को सीमित बताने की कोशिश की थी। कसाब ने दावा किया था कि वह मुंबई बॉलीवुड फिल्में देखने के शौक के कारण आया था। निकम के मुताबिक, आरोपी ने हत्याओं की जिम्मेदारी अपने साथी अबू इस्माइल पर डालने का प्रयास भी किया था।

    निकम ने बताया कि कसाब ने अदालत में कहा था कि वह मुंबई आया जरूर था, लेकिन लोगों की हत्या उसने नहीं की। उसके अनुसार, उसके साथ मौजूद अबू इस्माइल ने हत्याएं की थीं। उसने बॉलीवुड फिल्मों के प्रति अपने शौक को भी मुंबई आने की वजह बताया। निकम ने कसाब की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और उसके खिलाफ उपलब्ध सबूत अदालत में पेश करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि आरोपी अपनी पूरी भूमिका स्वीकार नहीं कर रहा था और केवल अपने बयान के आधार पर उसे जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जा सकता था।

    कसाब से जुड़ा यह दावा पहले भी चर्चा में आया था। निकम ने एक अन्य कार्यक्रम में बताया था कि कसाब ने हिंदी फिल्मों का प्रशंसक होने और अमिताभ बच्चन के घर जाने की इच्छा का भी उल्लेख किया था। हालांकि, मुकदमे के दौरान उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों और घटनाओं के क्रम ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    निकम ने 26/11 हमले के दौरान ताज महल पैलेस होटल में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, फोन पर हुई बातचीत को पकड़े जाने से जांचकर्ताओं को हमले के दौरान आतंकवादियों की गतिविधियों और उन्हें दिए जा रहे निर्देशों को समझने में मदद मिली। इस बातचीत को अभियोजन पक्ष ने सबूत के रूप में इस्तेमाल किया था।

    उन्होंने होटल में बंधक बनाए गए लोगों से जुड़ी एक घटना का उदाहरण दिया। निकम के मुताबिक, आतंकवादियों ने अपने हैंडलर्स को बताया था कि उनके कब्जे में तीन लोग हैं। इनमें एक क्लर्क, एक वेटर और एक शिक्षक बताया गया था। इसके बाद हैंडलर ने कथित शिक्षक से उसके स्कूल के बारे में पूछताछ करने और बंधकों के कपड़े उतरवाकर उन्हें केवल अंडरवियर में रखने का निर्देश दिया।

    निकम ने बताया कि हैंडलर को उस व्यक्ति के शिक्षक होने के दावे पर संदेह था। उसने हमलावर को उससे पूछताछ करने और मारपीट करने के लिए कहा। इसके बाद बंधक व्यक्ति ने अपनी वास्तविक पहचान बैंक के चेयरमैन के रूप में बताई। निकम के अनुसार, बाद में उन्होंने उस बैंक चेयरमैन का बयान दर्ज किया, लेकिन अदालत में गवाही देने के समय वह काफी डरे हुए थे।

    निकम ने बताया कि गवाह को भरोसा दिलाया गया कि उसके बयान के समर्थन में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने गवाही देने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने कोई गलत काम नहीं किया था और उसकी गवाही मामले में महत्वपूर्ण हो सकती थी।

    इसी कानूनी लड़ाई और निकम के पेशेवर जीवन को फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ में दिखाया गया है। फिल्म में राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है, जबकि ललित प्रभाकर अजमल कसाब के किरदार में हैं। अविनाश अरुण ने फिल्म का निर्देशन किया है और वामिका गब्बी निकम की पत्नी ज्योति की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उस मुकदमे और कानूनी संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है, जिसने निकम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

    नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कसाब इस हमले में पकड़ा गया एकमात्र जीवित आतंकवादी था। मुकदमे में दोषी ठहराए जाने के बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई, जिसे वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। यह मामला भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मुकदमों में शामिल रहा है।

  • इथेनॉल बनाने में अब नहीं होगा चीनी का इस्तेमाल… दाम बढ़ने के बाद सरकार का बड़ा कदम…

    इथेनॉल बनाने में अब नहीं होगा चीनी का इस्तेमाल… दाम बढ़ने के बाद सरकार का बड़ा कदम…


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (India Government) ने चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) पर काबू पाने और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तेल कंपनियों (Oil Companies) को निर्देश दिया है कि साल 2026-27 के सप्लाई में चीनी से इथेनॉल (Ethanol) बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल शून्य किया जाए। इसके तहत गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस (गुड़ बनाने की प्रक्रिया में बचने वाला गाढ़ा लिक्विड पदार्थ) से बने इथेनॉल की खरीद के लिए ताजा टेंडर में बोली नहीं मांगी गई है।


    क्या है डिटेल

    शुक्रवार को जारी टेंडर के मुताबिक, तेल कंपनियां नवंबर से शुरू होने वाले सप्लाई वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल खरीदने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, इस बार कंपनियां मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल से बने इथेनॉल की सप्लाई के लिए बोली लगा सकती हैं।


    चीनी की कीमतों पर काबू पाने की कोशिश

    भारत दुनिया में चीनी की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में शामिल है। पिछले कुछ समय से देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की चिंता बनी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना प्रोडक्शन राज्यों में कम बारिश के कारण चीनी प्रोडक्शन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि गन्ने और चीनी का ज्यादा हिस्सा घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध रहे। इसी वजह से इथेनॉल बनाने में चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया गया है।


    मक्का और चावल से बने इथेनॉल को मिलेगा मौका

    सरकार के नए टेंडर में इथेनॉल बनाने के लिए मक्का, टूटे चावल और अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इससे चीनी आधारित कच्चे माल के बजाय अनाज से इथेनॉल बनाने पर जोर बढ़ सकता है। इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। भारत ने इसी दिशा में इस साल देशभर में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य यानी E20 लागू किया है। हालांकि, कुछ वाहन चालकों ने चिंता जताई है कि ज्यादा इथेनॉल मिला पेट्रोल पुराने वाहनों के इंजन और उनके पुर्जों पर असर डाल सकता है।


    मक्का से बने इथेनॉल की खरीद कीमत भी घटाई

    तेल कंपनियों ने मक्का से बने इथेनॉल के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन में भी कटौती की है। टेंडर के मुताबिक, यह प्रोत्साहन 5.79 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इस बदलाव से इथेनॉल उत्पादकों की कमाई और उत्पादन से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है।


    पहले भी चीनी उत्पादन बढ़ाने पर हो रहा था विचार

    इससे पहले अगस्त में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही थी। इसका मकसद चीनी उत्पादन बढ़ाना और कीमतों को काबू में लाना था। अब ताजा टेंडर में चीनी आधारित कच्चे माल से बने इथेनॉल की खरीद को शामिल नहीं किया गया है। इससे साफ है कि फिलहाल सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दे रही है।

  • तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके पर शिकंजा, हिरासत के बाद आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी

    तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके पर शिकंजा, हिरासत के बाद आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई शुरू की है। शनिवार को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या अभिजीत दीपके को भी पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तरह तिहाड़ जेल भेजा जा सकता है। हालांकि फिलहाल उनके मामले में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है और आगे की कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर करेगी।
    रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को अभिजीत दीपके को झंडेवालान इलाके से उस समय हिरासत में लिया जब वह लहरा दो तिरंगा प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे। इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारु रखने के लिए कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया था।
    पुलिस ने दीपके के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। वहीं CJP ने उनकी हिरासत के दौरान परिवार के सदस्यों वकीलों और पार्टी के लोगों को उनसे संपर्क करने में परेशानी होने का आरोप लगाया था। इस मामले में अब मजिस्ट्रेट की सुनवाई और पुलिस की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों पर सबकी नजर है।
    अभिजीत दीपके के लिए यह पहली कानूनी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ हिरासत में लिया गया था। अगले दिन तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय तीनों को 50-50 हजार रुपये के जमानत-सह-मुचलके पर रिहा किया गया था। उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने की शर्त स्वीकार की थी।
    लेकिन कुछ ही दिनों बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और पहले से लागू शांति संबंधी शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। इसी घटनाक्रम के कारण अब अभिजीत दीपके के पुराने बॉन्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
    शांति बनाए रखने के लिए लिया जाने वाला बंधपत्र एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति से तय अवधि तक शांति भंग नहीं करने और अच्छा आचरण बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। यदि पुलिस को बाद में शर्तों के उल्लंघन की आशंका होती है तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत में उसका साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभिजीत दीपके के मामले में भी यह तय होना बाकी है कि पुलिस की नई कार्रवाई किन तथ्यों पर आधारित है और क्या पुराने बॉन्ड की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है।
    BNSS की धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र से संबंधित है। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने का बंधपत्र भरने को कह सकता है। वहीं धारा 170 संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति देती है। इस प्रावधान के तहत हिरासत की अवधि और आगे की कार्रवाई कानून में तय शर्तों के अधीन होती है।
    दूसरी ओर नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है। इस तरह दोनों की हिरासत के बाद कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ी है। अब अभिजीत दीपके की पेशी में यह महत्वपूर्ण होगा कि मजिस्ट्रेट पुलिस की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर क्या रुख अपनाते हैं। उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जाएगा या कोई अन्य आदेश दिया जाएगा यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

  • फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

    फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Opposition Leader Mallikarjun Kharge) ने परिसीमन (Delimitation) के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। खरगे की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए लिखा गया यह चौथा पत्र है। इससे पहले वह 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।


    खरगे बोले- पहले चर्चा हो, फिर संसद में लाया जाए विधेयक

    खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से कहा कि परिसीमन पर नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी दलों के साथ विस्तार से चर्चा कराई जाए। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

    उन्होंने प्रधानमंत्री को आगाह करते हुए लिखा कि पहले की तरह किसी व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद में जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश दोबारा नहीं होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, पहले भी ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन उसे संसद में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था।


    मॉनसून सत्र खत्म हुए 64 दिन, फिर भी दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं

    खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सत्रावसान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।


    अप्रैल में भी उठाई थी सर्वदलीय बैठक की मांग

    खरगे ने पत्र में बताया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार ने उस मांग पर बैठक नहीं बुलाई।

    इसके बाद 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार की ओर से लाया गया पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।


    दोबारा विधेयक लाने की अटकलों के बीच बढ़ी सियासी हलचल

    विधेयक गिरने के बाद से इस बात की अटकलें लगाई जाती रही हैं कि पर्याप्त संख्या बल जुटाने के बाद सरकार इसे दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, खबर प्रकाशित होने तक विधेयक फिर से पेश नहीं किया गया था।

    खरगे ने अपने ताजा पत्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि परिसीमन के नए प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने और उन्हें संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी दलों और संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

  • संजय राउत बोले CJI से माफी मांगने को तैयार, चुनाव चिह्न के मामले में अब तक नहीं मिला न्याय

    संजय राउत बोले CJI से माफी मांगने को तैयार, चुनाव चिह्न के मामले में अब तक नहीं मिला न्याय


    नई दिल्ली। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर माफी मांगने की पेशकश की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जवाब मांगे जाने के बाद राउत ने कहा कि यदि गुस्से में उनके मुंह से कोई अनुचित शब्द निकल गया है तो वह दस बार माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि उन्होंने इसके साथ ही कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा करना भी न्यायपालिका की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और न्यायिक हलकों में विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
    मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि वह शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर पिछले चार साल से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस मामले में लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा करने के कारण उनके भीतर नाराजगी है। इसी गुस्से में यदि उनसे कोई अनुचित टिप्पणी हो गई है तो वह उसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं। राउत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अदालत की अवमानना करना नहीं था और न्यायपालिका के प्रति उनका सम्मान बना हुआ है।
    यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद बढ़ा जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ संजय राउत की टिप्पणियों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
    राउत ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट को न्याय की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए आखिरी सहारा बताया। उन्होंने कहा कि वह न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणियों को चुनाव में कथित अनियमितताओं राजनीतिक दलों में दलबदल और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर जनता में मौजूद असंतोष के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
    विवाद की पृष्ठभूमि में विपक्षी नेताओं और मुख्य न्यायाधीश के बीच मुलाकात से जुड़ा घटनाक्रम भी है। खबरों के मुताबिक राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहता था। बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश की आलोचना की और न्यायाधीशों तथा राजनीतिक नेताओं के बीच कथित बातचीत को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
    इन बयानों के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राउत और निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति मांगी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राउत की याचिका पर प्रारंभिक रूप से विचार करने की सहमति जताई थी। हालांकि उनसे अपने आचरण को लेकर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई।
    संजय राउत ने दोहराया कि उन्हें न्यायपालिका से गलत कामों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है। उन्होंने माफी मांगने की तत्परता जताने के साथ लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा भी उठाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्पष्टीकरण पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को लेकर आगे क्या निर्णय होता है।

  • दिल्ली में तिरंगा मार्च के बाद बढ़ा विवाद, तिहाड़ में हाई सिक्योरिटी के बीच रखे गए CJP नेता, CCTV से हर वक्त नजर

    दिल्ली में तिरंगा मार्च के बाद बढ़ा विवाद, तिहाड़ में हाई सिक्योरिटी के बीच रखे गए CJP नेता, CCTV से हर वक्त नजर


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग सेल में रखा गया है और उनकी गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे नजर रखी जा रही है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेल के बाहर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। साथ ही जेल प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि वे दूसरे कैदियों के संपर्क में न आएं।
    बताया गया है कि 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वे कथित तौर पर शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जेल में दाखिल होने के बाद दोनों नेताओं को अलग-अलग कैदी नंबर दिए गए हैं। आशुतोष रांका को कैदी नंबर 1784 जबकि सौरव दास को 3752 आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआत में दोनों को जेल नंबर दो में रखा गया था लेकिन बाद में रांका को जेल नंबर चार में स्थानांतरित कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को ऐसे ब्लॉक में रखा गया है जहां कैदियों की संख्या अन्य ब्लॉकों के मुकाबले कम है।
    जेल सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दोनों की सेल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। निगरानी का एक उद्देश्य उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी संभावित आत्मघाती कदम को रोकना भी बताया गया है। इसके अलावा दूसरे वार्डों में रहने वाले कैदियों को उनके पास जाने की अनुमति नहीं है। गुरुवार को CJP के संयोजक अभिजीत दीपके और संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह उनसे मिलने तिहाड़ पहुंचे थे।
    रिपोर्ट के अनुसार सौरव दास को जेल नंबर दो में रखा गया है। इसी जेल में उमर खालिद भी बंद हैं और पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी यहां रखा गया था। वहीं आशुतोष रांका जेल नंबर चार में हैं। बताया जाता है कि इस जेल का इस्तेमाल पहले विपश्यना ध्यान के लिए भी किया जाता था।
    इस पूरे मामले का संबंध दिल्ली में हुए तिरंगा मार्च और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित करीब 150 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया। इन हिरासतों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए जबकि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन को युवाओं के इस्तेमाल के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश बताया गया।
    प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में मार्च निकाला और कई जगह जय हिंद के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान भी गाया। इसके बाद छात्रों और आइसा तथा एसएफआई के सदस्यों ने मंडी हाउस में प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को वापस लेना और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को वापस लेना शामिल था।
    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़पों की भी खबर सामने आई। मौके पर मौजूद कुछ स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और हूटिंग किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। वामपंथी नेताओं और सांसदों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फिलहाल यह मामला राजनीतिक विरोध प्रदर्शन पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तार नेताओं की न्यायिक हिरासत को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

  • दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज

    दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज


    नई दिल्ली। दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में दसवीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। छात्रा ने अपने ट्यूशन टीचर पर करीब दो साल तक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म मारपीट और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और उनके भरोसे का फायदा उठाकर किए जाने वाले अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    पुलिस के मुताबिक पीड़िता अपने परिवार के साथ जहांगीरपुरी क्षेत्र में रहती है और स्थानीय सरकारी स्कूल में दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। उसके पिता फैक्ट्री में काम करते हैं जबकि मां घरों में साफ सफाई का काम करके परिवार का सहयोग करती हैं। बेटी की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले मंथन नाम के ट्यूशन टीचर से संपर्क किया था। आरोपी करीब तीन साल से छात्रा को पढ़ा रहा था। परिवार को उस पर भरोसा था लेकिन छात्रा की शिकायत के अनुसार इसी भरोसे का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया।
    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले आरोपी उसे प्रैक्टिकल की पढ़ाई कराने के बहाने जीटीबी नगर स्थित एक होटल में ले गया था। वहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और वीडियो भी बनाया गया। छात्रा का आरोप है कि आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने और परीक्षा में फेल कराने की धमकी दी थी। इस डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही। शिकायत के मुताबिक आरोपी उसे बार बार होटल ले जाता था और उसके साथ यौन शोषण करता था। छात्रा ने इस स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश भी की लेकिन धमकियों के कारण वह अपने परिजनों को पूरी बात बताने का साहस नहीं जुटा सकी।
    इस दौरान छात्रा ने ट्यूशन जाने से इनकार करना शुरू कर दिया था। हालांकि परिजनों को शुरुआत में लगा कि वह पढ़ाई से बचने के लिए ऐसा कर रही है। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि बेटी किसी गंभीर परेशानी से गुजर रही है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव को गंभीरता से लेना और उनसे सहज तरीके से बात करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि वे बिना डर के अपनी परेशानी साझा कर सकें।
    पीड़िता के मुताबिक आरोपी उसे आखिरी बार 30 सितंबर को जीटीबी नगर स्थित होटल ले गया था। इसके कुछ दिन बाद 3 अक्टूबर को उसे पेट में दर्द होने लगा। परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे जहां जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार को मामले की गंभीरता का पता चला और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। गुरुवार को छात्रा ने मुखर्जी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। मामले में जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    इसी बीच दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस इलाके में घरेलू सहायिका के साथ कथित दुष्कर्म का एक अलग मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार असम के शोणितपुर जिले की रहने वाली 22 वर्षीय युवती को प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से करीब 20 दिन पहले संदेश विहार स्थित एक फ्लैट में घरेलू काम के लिए रखा गया था। युवती का आरोप है कि फ्लैट मालिक के 58 वर्षीय बेटे राजेश करनानी ने मंगलवार को उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद युवती फ्लैट से निकलकर अपने परिचितों के पास पहुंची और बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    दिल्ली में सामने आए इन दोनों मामलों में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान और निजता की रक्षा करना जरूरी है। बच्चों को सुरक्षित माहौल देना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की धमकी या शोषण की आशंका होने पर समय रहते पुलिस और संबंधित सहायता सेवाओं तक पहुंचना जरूरी है।

  • पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव

    पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव


    नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार तड़के रिहा कर दिया। रिहाई के बाद नेहा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को दिन या शाम के समय हिरासत में लेकर पूरी रात रखा जाता है और अगले दिन छोड़ा जाता है।

    दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को 16 अक्टूबर की शाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया था। पूरी रात हिरासत में रहने के बाद शनिवार सुबह उन्हें रिहा किया गया।

    ‘किस कानून के तहत पूरी रात हिरासत में रखना जायज?’

    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में नेहा बोरा ने कहा कि हर तरह से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से ऐसा चलन बना हुआ है, जिसमें लोगों को दिन हो या शाम, कभी भी हिरासत में ले लिया जाता है और पूरी रात रखने के बाद अगले दिन सुबह या शाम को छोड़ा जाता है।

    नेहा ने सवाल उठाया कि किस अधिकार, कानून या आदेश के तहत किसी व्यक्ति को पूरी रात हिरासत में रखना उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक सूर्यास्त के बाद महिलाओं को हिरासत में लेने पर प्रतिबंध संबंधी नियम हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी कार्रवाई हो रही है।

    ‘अराजकता का नैरेटिव फैलाने वाले पहले खुद देखें’

    नेहा बोरा ने दिल्ली में यातायात और आम लोगों की आवाजाही को लेकर भी पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अराजकता और अव्यवस्था का नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर अराजकता कैसी और किसकी ओर से फैलाई जा रही है?

    उन्होंने आरोप लगाया कि सेंट्रल दिल्ली में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और काम पर जाने के लिए चुने जाने वाले रास्ते बंद मिलते हैं। नेहा ने कहा कि पूरे देश में अव्यवस्था का माहौल बनाया जा रहा है और आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए।

    ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग और SIR रोकने की मांग

    AISA अध्यक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी मांग दोहराई। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की मांग की।

    नेहा ने कहा कि ऐसा होने से आम नागरिक चैन से रह सकेंगे और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। यह मांग CJP के प्रस्तावित मार्च और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में उठाई गई।

    ‘5-6 घंटे तक वकील से संपर्क की कोशिश करती रही’

    नेहा बोरा ने हिरासत के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और अन्य जानकारियां मांगीं, लेकिन काफी देर तक उन्हें अपनी बात रखने या किसी वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई।

    उन्होंने कहा कि उनके वकील 5-6 घंटे तक उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे। बाद में किसी तरह फोन पर संपर्क हो पाने के बाद ही वकील को उनसे मिलने की अनुमति मिली। नेहा ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई लंबे समय से की जा रही है।

    फिलहाल, हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और कानूनी प्रक्रिया को लेकर नेहा बोरा की ओर से लगाए गए आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।

  • कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को एहतियाती हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से पहले की गई। दिपके ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने इससे पहले उन्हें नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में बिना कानूनी अनुमति लोगों को एकत्र करने पर आपत्ति जताई थी।

    अभिजीत दिपके को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास से निकलने के बाद हिरासत में लिया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और इसी आधार पर उन्हें एहतियाती हिरासत में लिया जा रहा है।

    सीजेपी की ओर से शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया था। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से शाम पांच बजे कनॉट प्लेस में जुटने की अपील की गई थी। हालांकि, प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। इसी वजह से पुलिस ने दिपके को नोटिस जारी किया था।

    पुलिस ने अपने नोटिस में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि कनॉट प्लेस में बिना अनुमति भीड़ जुटने से यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, क्षेत्र में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस राजधानी का प्रमुख व्यावसायिक इलाका है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें, शोरूम, रेस्तरां, होटल, बैंक और कार्यालय संचालित होते हैं।

    नोटिस में यह भी कहा गया था कि प्रदर्शन के कारण कारोबारियों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। कनॉट प्लेस में किसी भी बड़े जमावड़े से आम लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कामकाज में बाधा आने की आशंका को पुलिस ने अपनी कार्रवाई का एक प्रमुख आधार बताया।

    पुलिस ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का उल्लेख करते हुए भीड़ जुटने से पैदा होने वाली संभावित समस्याओं पर चिंता जताई थी। यह स्टेशन ब्लू और येलो लाइन को जोड़ने वाला प्रमुख मेट्रो केंद्र है। पुलिस के अनुसार, यहां से प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान लोगों की संख्या बढ़ने पर यातायात जाम, अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा हो सकता है।

    दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    नोटिस के जरिए दिपके को कनॉट प्लेस और उसके आसपास किसी भी प्रकार का प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित नहीं करने तथा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा था कि कनॉट प्लेस अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं है। किसी अन्य निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए भी पहले संबंधित अधिकारियों से कानूनी अनुमति लेना आवश्यक है।

    इस तरह, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिपके को एहतियाती हिरासत में लिया गया; प्रदर्शन के आयोजन और आगे की कार्रवाई से संबंधित अतिरिक्त विवरण सामने नहीं आया है।