Category: National

  • देश में गहराया LPG संकट: बिहार में बढ़ी लकड़ी-कोयले की मांग, राजस्थान के होटल लकड़ी पर बना रहे खाना; कई राज्यों में गोदामों पर छापे

    देश में गहराया LPG संकट: बिहार में बढ़ी लकड़ी-कोयले की मांग, राजस्थान के होटल लकड़ी पर बना रहे खाना; कई राज्यों में गोदामों पर छापे

    नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के असर अब भारत में भी दिखाई देने लगे हैं। देशभर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत तेजी से बढ़ रही है। कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि बिहार में लोग लकड़ी और कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जबकि राजस्थान के कई होटल और ढाबे गैस की जगह लकड़ी की भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में लोग रात से ही गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के इंतजार में बैठे रहे। कई जगहों पर घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की कालाबाजारी भी सामने आई है। करीब 2000 रुपए का कॉमर्शियल सिलेंडर कुछ इलाकों में 4000 रुपए तक बेचा जा रहा है। जमाखोरी की शिकायतों के बाद सरकार ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू कर दी है।

    पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है।पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है। तेज धूप में घंटों इंतजार करने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

    हरियाणा में गैस डिलीवरी में 20 से 25 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने से लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण होटल और ढाबा संचालक इंडक्शन हीटर खरीदने लगे हैं। दुकानदारों के अनुसार पहले हफ्ते में एक-दो इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब रोज 8 से 15 तक बिक रहे हैं।

    इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की निगरानी कर रही है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू किया गया है। सिलेंडर की डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।

    सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम भी बदल दिए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। वहीं सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और उत्पादन में करीब 28% तक बढ़ोतरी की गई है।

    इसके बावजूद जमीनी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बनी हुई हैं और होटल-ढाबा संचालकों ने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक एलपीजी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।

  • सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी

    सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी



    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगी नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक ने हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा किया है। अब वे जोधपुर जेल से रिहा होंगे।

    लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को हुए लेह हिंसा के बाद वांगचुक को 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया था। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 150 से अधिक घायल हुए थे। सरकार का आरोप था कि वांगचुक ने इन प्रदर्शनों को भड़काया। NSA के तहत ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जा सकता है, जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाएँ। अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने तक होती है।

    सोनम वांगचुक उस समय लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे और इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे। उनके नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया था।

    जोधपुर जेल में 170 दिन तक बंद रहने के बाद अब वांगचुक की रिहाई से उनके समर्थकों में राहत का माहौल है। अधिकारियों ने बताया कि रिहाई के बाद उनके लद्दाख लौटने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि NSA हटाए जाने से वांगचुक के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों पर कानूनी प्रतिबंध कम होंगे, और यह लद्दाख में केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

  • रायपुर-लखनऊ ट्रेन में AC कोच में रील बनाने के लिए तीन युवकों ने चादर ओढ़कर किया डांस, रास्ता तीन मिनट तक रुका, यात्रियों ने दर्ज कराई शिकायत

    रायपुर-लखनऊ ट्रेन में AC कोच में रील बनाने के लिए तीन युवकों ने चादर ओढ़कर किया डांस, रास्ता तीन मिनट तक रुका, यात्रियों ने दर्ज कराई शिकायत



    रायपुर। रायपुर से लखनऊ जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस (12536) के एसी कोच में गुरुवार रात एक अनोखी घटना ने यात्रियों को परेशान कर दिया। ट्रेन के सतना स्टेशन पहुंचने से कुछ ही देर पहले जी-1 एसी कोच के बर्थ नंबर 16 के पास तीन युवकों ने रील बनाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया कि कोच का बीच वाला रास्ता लगभग तीन मिनट तक ब्लॉक हो गया।

    जानकारी के अनुसार, एक युवक ने रेलवे की चादर सिर पर ओढ़कर कोच के बीचो-बीच डांस करना शुरू कर दिया। उसके साथ मौजूद महिलाएं मोबाइल से उसका वीडियो बनाने लगीं। थोड़ी ही देर में दो अन्य युवक भी उसी चादर को ओढ़कर डांस में शामिल हो गए। इस दौरान कोच का मध्य मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया, जिससे अन्य यात्रियों को पैदल चलने और बैठने में कठिनाई हुई। कोच में लगभग आठ-दस लोगों का एक परिवार भी यात्रा कर रहा था, जिन्हें इस डांस की वजह से असुविधा का सामना करना पड़ा।

    यात्रियों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और शुक्रवार 13 मार्च को रेलवे अधिकारियों को भेजकर शिकायत दर्ज कराई। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा था कि युवकों की हरकत से कोच का मार्ग रुक गया और यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

    आरपीएफ पोस्ट सतना के प्रभारी वीके यादव ने बताया कि वीडियो प्राप्त होने के बाद जांच की गई। जांच में यह पाया गया कि डांस अश्लील नहीं था, लेकिन यात्रियों को हुई असुविधा और कोच में अव्यवस्था के कारण रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत तीनों युवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    रेलवे अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ट्रेन में इस प्रकार की हरकतें गंभीर सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा को प्रभावित करती हैं। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि अगर ऐसे मामले सामने आए तो तुरंत आरपीएफ को सूचित करें।

    इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि सोशल मीडिया और रील बनाने की होड़ ट्रेन जैसे सार्वजनिक स्थान पर कभी-कभी यात्रियों और सुरक्षा दोनों के लिए समस्या बन सकती है।

    Keywords: रायपुर लखनऊ ट्रेन, गरीब रथ एक्सप्रेस, AC कोच डांस, चादर ओढ़कर रील, रेलवे एक्ट धारा 145, आरपीएफ सतना, ट्रेन में असुविधा, यात्रियों की शिकायत, सोशल मीडिया वीडियो, ब्लॉक हुआ रास्ता

  • अकेले घूमने वाली महिलाओं के लिए ये देश हैं सबसे ज्यादा सेफ… भारत टॉप 100 में भी नहीं

    अकेले घूमने वाली महिलाओं के लिए ये देश हैं सबसे ज्यादा सेफ… भारत टॉप 100 में भी नहीं


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर में महिलाओं (Women) के बीच अकेले यात्रा करना बहुत लोकप्रिय हो गया है लेकिन किसी जगह को चुनते समय सुरक्षा (Security) सबसे बड़ी चिंता होती है. हाल ही में एक लिस्ट जारी हुई है जिसमें बताया गया है कि महिलाओं की सुरक्षा (Women’s Safety) के मामले में नॉर्डिक (Nordic) और पश्चिमी देश (Western countries) सबसे ऊपर है. यानी ये देश सोलो ट्रैवल करने वाली महिलाओं के लिए सबसे सेफ हैं. जबकि इस लिस्ट में भारत टॉप 100 देशों में भी शामिल नहीं है।

    अमेरिका के जॉर्जटाउन इंस्टीट्यूट फॉर वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी ने पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के साथ मिलकर दि वीमेन, पीस एंड सिक्योरिटी (WPS) द वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी (WPS) इंडेक्स 2025-26 पब्लिश किया है. यह इंडेक्स 181 देशों को तीन मुख्य पैमानों के आधार पर रैंक करता है।

    2025-26 के WPS इंडेक्स के अनुसार, नॉर्डिक और पश्चिमी यूरोपीय देश इस रैंकिंग में सबसे ऊपर हैं जहां लैंगिक भेदभाव वाली नीतियों की कमी, समाज में महिलाओं की सुरक्षा ज्यादा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के कम मामले दर्ज किए गए हैं. इस लिस्ट में भारत 131वें स्थान पर रहा और वो टॉप 100 में भी जगह नहीं बना सकता है।


    1. डेनमार्क

    डेनमार्क महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश के तौर पर वैश्विक रैंकिंग में सबसे ऊपर है. यह देश सुरक्षा, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में बहुत अच्छा स्कोर करता है. यहां के सरकारी संस्थानों और कानूनों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं जो इसे अकेले ट्रैवल करने वाली महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश बनाता है.


    2. नॉर्वे

    नॉर्वे लगातार लैंगिक समानता और सुरक्षा के मामले में सबसे अच्छे देशों में से एक रहा है. अच्छी व्यवस्था, भेदभाव के खिलाफ मजबूत नीतियां और सार्वजनिक सुरक्षा की भावना WPS इंडेक्स में इसकी हाई रैंकिंग में योगदान देती हैं.


    3. आइसलैंड

    आइसलैंड अपनी प्रगतिशील लैंगिक समानता वाली नीतियों और वर्कप्लेस पर महिलाओं की भागीदारी के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है. देश में अपराध के कम मामले और मजबूत कानून इसे अकेले घूमने वाली महिलाओं के लिए एक आरामदायक जगह बनाता है।


    4. स्वीडन

    स्वीडन में लैंगिक समानता और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली मजबूत कानूनी प्रणाली पर विशेष जोर दिया जाता है जो इसे वैश्विक सुरक्षा इंडेक्स में शीर्ष स्थान पर बनाए रखने में मदद करता है. यहां का सार्वजनिक बुनियादी ढांचा बहुत विकसित है और यहां की संस्कृति सुरक्षा के साथ-साथ सभी को साथ लेकर चलने यानी समावेश को प्राथमिकता देती है जिससे महिलाओं और नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर वातावरण सुनिश्चित होता है.


    5. फिनलैंड

    फिनलैंड शिक्षा, सामाजिक समानता और सुरक्षा संकेतकों के मामले में बहुत अच्छा प्रदर्शन करता है. साक्षरता के मामले में ऊपर, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत कानूनी सुरक्षा इसे महिला यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और स्वागत योग्य जगह के तौर पर इसकी प्रतिष्ठा में योगदान देती हैं.

    इसके अलावा लक्जमबर्ग बेल्जियम नीदरलैंड्स ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैंड टॉप 10 देशों में बाकी स्थानों पर हैं।

  • पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी

    पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी


    गुवाहाटी। प्र
    धानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट और युद्ध की परिस्थितियों के बीच भी कांग्रेस देश में अफवाह फैलाने और गलत जानकारी देने में लगी हुई है, जबकि भाजपा-एनडीए सरकार किसानों के हित, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पूर्वोत्तर के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान असम के लिए 19,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में देश के प्रति ईमानदार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि वे 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषण को सुनें। मोदी ने कहा कि पंडित नेहरू ने एक बार कहा था कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत में महंगाई बढ़ रही है। आज कांग्रेस के लोग भी उसी तरह देश को गुमराह करने में लगे हैं, जबकि वैश्विक संकटों का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक काम किया है। आज भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों का ध्यान रख रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में गैस पाइपलाइन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास पर अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि किसानों के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले पूरे देश के करोड़ों किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है। यह योजना देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन चुकी है।

    उन्होंने कहा कि 2014 से पहले ऐसे लाखों किसान थे जिनके पास न तो मोबाइल फोन था और न ही बैंक खाता, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन के माध्यम से करोड़ों किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है और अब तक उनके खातों में सवा चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि भेजी जा चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई थी, तब कांग्रेस के लोगों ने इसके बारे में झूठ फैलाया था। कांग्रेस के नेता किसानों से कहते थे कि चुनाव के बाद उन्हें यह पैसा वापस करना पड़ेगा, लेकिन आज यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है। मोदी ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार के लिए किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले केंद्र में दस वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही और उस दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये मिले थे। इसके विपरीत पिछले दस वर्षों में उनकी सरकार ने किसानों को एमएसपी के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। एमएसपी, सस्ता कृषि ऋण, फसल बीमा और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वैश्विक संकटों का असर भारत की खेती पर कम से कम पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी और उसके बाद हुए वैश्विक संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी। कई देशों में इसकी कमी हो गई थी, लेकिन भारत सरकार ने किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत लगभग 3000 रुपये तक पहुंच गई थी, वहीं भारत में किसानों को यह मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराई गई। इसके लिए केंद्र सरकार ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देश को कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लंबे समय तक कांग्रेस सरकारों ने देश को कई क्षेत्रों में विदेशों पर निर्भर बनाए रखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकटों का सीधा असर भारत के किसानों और आम लोगों पर पड़ता था।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” नीति लागू की है, जिसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को सोलर पंप से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि डीजल पर उनकी निर्भरता कम हो सके। असम के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य आज पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि असम की प्रगति का प्रभाव पूरे नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है और यह क्षेत्र देश के विकास में नई गति प्रदान कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक परिवारों का जिक्र किया और कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करते हुए चाय बागान श्रमिकों को भूमि के पट्टे प्रदान कर रही है। इससे हजारों परिवारों को पहली बार भूमि का अधिकार मिल रहा है। असम आज शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह राज्य पूरे पूर्वोत्तर के उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा।

  • घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं , जमाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी

    घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं , जमाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी


    नई दिल्ली।
    सरकार ने आज देशवासियों को आश्वस्त किया कि देश की रिफायनरियों में कच्चे तेल से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन को बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की कोई भी संभावना नहीं है इसलिए आम जनों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सरकार ने जमाखोरी करने को चेताया है कि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    उच्चपदस्थ सूत्राें ने यहां संवाददाताओं से कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति पर पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण कुछ असर हुआ है लेकिन भारत में स्थिति तेल रिफायनरियों में क्षमता वृद्धि के उपाय किये गये हैं और जल्द ही बाज़ार में उपलब्धता बढ़ेगी। सूत्रों के अनुसार देश की रिफायनरियों में एलपीजी के उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसके और बढ़ने की संभावना है।

    सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट के नाम पर देश में जो भी वितरक कृत्रिम संकट बता कर जमाखोरी कर रहे हैं, उन पर सरकार की पैनी नज़र है और उन्हें पछताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल व्यावासयिक सिलेंडरों की आपूर्ति नियंत्रित की है और प्राथमिकता के आधार पर उनके वितरण का निर्णय करने का अधिकार राज्यों को दिया है।

    सूत्रों ने बताया कि भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है जो अपनी एलपीजी खपत का लगभग 55-60% हिस्सा मुख्य रूप से खाड़ी देशों- कतर एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सीधे आयात करता है, जबकि शेष 40-45% घरेलू स्तर पर रिफाइनरियों में कच्चे तेल के शोधन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में निर्मित होता है। हाल ही में सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को आदेश दिया है। वैश्विक आपूर्ति में बाधा का असर भारत पर पड़ना स्वाभाविक है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत एलपीजी का लगभग 29-34% हिस्सा कतर से आयात करता है और कतर के बाद यूएई लगभग 26% की हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। हाल के वर्षों में, भारत ने कतर से सालाना 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी का आयात किया है, जिसकी कीमत 4 अरब डॉलर से अधिक है। 2024 में, भारत और कतर ने 2048 तक सालाना 75 लाख टन द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक बड़ा समझौता भी किया है। भारत की आयातित एलपीजी का अधिकांश भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है जिसे ईरान ने बाधित कर रखा है।

    सूत्रों ने कहा कि भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति का कोई संकट नहीं है। भारत रूस समेत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल की खरीद करता है। भारत ने अपनी रिफायनरियों से कहा है कि वह कच्चे तेल के शोधन में उप उत्पादों में एलपीजी को प्राथमिकता दें और उनका उत्पादन बढ़ाएं ताकि बाहर से आने वाली एलपीजी की कमी की यथासंभव भरपाई हो सके। उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल के शोधन से प्रोपेन और ब्यूटेन, मीथेन, एथेन, नैफ्था, प्लास्टिक, रसायन और उच्च ऑक्टेन गैसोलीन, पेट्रोल, केरोसीन, जेट फ्यूल, डीज़ल, फ्यूल ऑयल, ल्यूब्रिकेंट्स, वैक्स तथा अस्फाल्ट / बिटुमेन का भी उत्पादन होता है।

  • विकसित भारत 2047’ की यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार : राष्ट्रपति

    विकसित भारत 2047’ की यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार : राष्ट्रपति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का उत्सव मनाने के लिए ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार हैं।

    राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान दिनभर चले उत्सव में 8 हजार से अधिक दिव्यांगजन अमृत उद्यान पहुंचे, जिसे विशेष रूप से उनके लिए खोला गया था। इस दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से दिव्यांगजनों ने खेल, सीखने और मनोरंजन से जुड़ी कई गतिविधियों में भाग लिया।

    शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी ने राष्ट्रपति भवन स्थित ओपन एयर थिएटर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया, जिसमें दिव्यांग कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

    राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश या समाज की पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह समाज के वंचित वर्गों के प्रति कितनी संवेदनशीलता दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास और संस्कृति में संवेदनशीलता, समावेशिता और सामंजस्य की भावना हमेशा से प्रमुख रही है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सामाजिक न्याय, समानता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के आदर्शों को स्थापित करता है। राज्य के नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सहायता का अधिकार भी प्रदान किया गया है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी समाज के निर्माण के लिए दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। यह केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

    उन्होंने दिव्यांगजनों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार और समाज उनके साथ खड़े हैं। उनका समर्पण, मेहनत और लगन न केवल उनके लिए प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि अन्य नागरिकों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

    उल्लेखनीय है कि ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने किया, जिसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में दिव्यांगजनों के प्रति समझ, स्वीकृति और समावेशन को प्रोत्साहित करना है।

  • दिल्ली से गुजरने वाले कमर्शियल वाहनों पर बढ़ेगा टैक्स, ट्रकों को अब देने होंगे 2600 की जगह 4000 रुपये

    दिल्ली से गुजरने वाले कमर्शियल वाहनों पर बढ़ेगा टैक्स, ट्रकों को अब देने होंगे 2600 की जगह 4000 रुपये


    नई दिल्ली।  देश की राजधानी दिल्ली से गुजरने वाले कमर्शियल वाहनों को अब ज्यादा चार्ज देना होगा। Supreme Court ने ग्रीन टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए नियम के तहत जो ट्रक अब तक लगभग 2600 रुपये ग्रीन टैक्स देते थे, उन्हें अब करीब 4000 रुपये तक भुगतान करना पड़ सकता है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा।

    सिर्फ दिल्ली पार करने वाले वाहनों पर लगेगा चार्ज
    यह बढ़ा हुआ ग्रीन टैक्स खास तौर पर उन कमर्शियल वाहनों पर लागू होगा जो दिल्ली में कोई काम नहीं करते और सिर्फ शहर को पार करने के लिए यहां की सड़कों का इस्तेमाल करते हैं। यानी जो ट्रक या अन्य भारी वाहन दिल्ली में माल उतारने या लोड करने नहीं आते, बल्कि सिर्फ शॉर्टकट के रूप में राजधानी की सड़कों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

    हल्के और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग चार्ज
    नए नियम के मुताबिक अलग-अलग वाहनों के लिए अलग शुल्क तय किया गया है। LMV कार, वैन जैसे हल्के वाहन लगभग 2000 तक चार्ज ट्रक और भारी वाहन करीब 4000 तक चार्ज इस फैसले के बाद कमर्शियल वाहनों के संचालन की लागत बढ़ने की संभावना है।

    ट्रैफिक और प्रदूषण कम करना है मकसद
    सरकार का कहना है कि कई वाहन दिल्ली को शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इससे शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों बढ़ते हैं। इसी वजह से सरकार ऐसे वाहनों को शहर के बाहर बने एक्सप्रेसवे और बाईपास का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। ज्यादा चार्ज लगने से वाहन चालक दिल्ली की बजाय बाहरी मार्गों का इस्तेमाल करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद दिल्ली के बाहर बने एक्सप्रेसवे और बाईपास का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि इस फैसले का प्रदूषण और ट्रैफिक पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।

  • गैस संकट के बीच रसोई में लौटेगा केरोसिन! सरकार ने जारी किया अतिरिक्त कोटा, होटल-रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की छूट

    गैस संकट के बीच रसोई में लौटेगा केरोसिन! सरकार ने जारी किया अतिरिक्त कोटा, होटल-रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की छूट


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की घबराहट में हो रही बुकिंग के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सालों बाद मिट्टी के तेल (केरोसिन) का अतिरिक्त कोटा जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, लेकिन लोगों की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति प्रभावित
    भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। यही समुद्री मार्ग भारत को रोजाना लगभग 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराता है। इसके अलावा देश की करीब 55 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई भी इसी रास्ते से आती है।

    होटल और रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की छूट
    गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों पर पड़ा है। होटल और रेस्तरां को मिलने वाली गैस की सप्लाई कम होने से समस्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने आतिथ्य क्षेत्र को राहत देते हुए बायोमास, आरडीएफ पेलेट और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दे दी है।

    घरों के लिए केरोसिन का अतिरिक्त कोटा
    घरेलू रसोई में गैस की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने राज्यों को मिलने वाले नियमित एक लाख किलोलीटर के कोटे के ऊपर 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। करीब एक दशक बाद पहली बार मिट्टी के तेल के कोटे में इतनी बढ़ोतरी की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

    गैस की जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
    बाजार में गैस की कमी की अफवाहों के कारण लोग घबराकर ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम समय 21 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 25 दिन रखी गई है। सरकार का कहना है कि फिलहाल एलपीजी की डिलीवरी का औसत समय करीब 2.5 दिन है और आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई देशों से गैस मंगाई जा रही है।

    कभी रसोई की पहचान था मिट्टी का तेल
    आज भले ही केरोसिन का नाम सुनकर लोग हैरान हों, लेकिन एक समय यह हर घर की जरूरत हुआ करता था। लालटेन जलाने से लेकर स्टोव पर खाना पकाने तक इसका इस्तेमाल आम था। सरकार की स्वच्छ ऊर्जा नीतियों, बिजली के विस्तार और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन मिलने के बाद धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल कम होता चला गया। यहां तक कि दिल्ली को साल 2014 में देश का पहला केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था। लेकिन अब वैश्विक तनाव के बीच यही पुराना ईंधन एक बार फिर रसोई में वापसी करता दिखाई दे सकता है।

    Tags:keroseneLPG Gaslpg gas prices

  • युद्ध की आहट से बाजार में भूचाल, एक दिन में अरबपतियों की दौलत से उड़े 35 अरब डॉलर

    युद्ध की आहट से बाजार में भूचाल, एक दिन में अरबपतियों की दौलत से उड़े 35 अरब डॉलर


    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran–United States–Israel के बीच टकराव की आशंका का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखा। गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 35 अरब डॉलर की कमी आ गई।

    बाजार में गिरावट के चलते Dow Jones Industrial Average 739 अंक टूट गया। वहीं S&P 500 में 1.52% और Nasdaq Composite में 1.78% की गिरावट दर्ज की गई।

    इस गिरावट का सीधा असर अरबपतियों की दौलत पर पड़ा।

    एलन मस्क को सबसे बड़ा नुकसान

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk को सबसे बड़ा झटका लगा। उनकी संपत्ति में 9.20 अरब डॉलर की गिरावट आई और उनका नेटवर्थ घटकर करीब 660 अरब डॉलर रह गया।

    इसके बाद Larry Page की संपत्ति में 4.11 अरब डॉलर की कमी आई और उनका नेटवर्थ 261 अरब डॉलर रह गया। वहीं Sergey Brin की संपत्ति 3.80 अरब डॉलर घटकर करीब 243 अरब डॉलर रह गई।

    बेजोस और जुकरबर्ग को भी झटका

    Jeff Bezos को गुरुवार को 2.83 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जिससे उनकी कुल संपत्ति 234 अरब डॉलर रह गई।
    वहीं Mark Zuckerberg की संपत्ति में 5.74 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और उनका नेटवर्थ करीब 226 अरब डॉलर रह गया।

    एलिसन और अर्नाल्ट की दौलत भी घटी

    Larry Ellison की संपत्ति में 4.58 अरब डॉलर की कमी आई और उनका नेटवर्थ करीब 210 अरब डॉलर रह गया।
    फ्रांस के उद्योगपति Bernard Arnault ने भी 2.39 अरब डॉलर गंवाए और उनकी संपत्ति घटकर लगभग 162 अरब डॉलर रह गई।

    जिम वॉल्टन को फायदा, बफेट पीछे

    Jensen Huang की संपत्ति में भी 2.30 अरब डॉलर की गिरावट आई और उनका नेटवर्थ 152 अरब डॉलर रह गया।

    हालांकि Jim Walton ऐसे इकलौते अरबपति रहे जिनकी संपत्ति में 1.58 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। उनका नेटवर्थ बढ़कर 159 अरब डॉलर हो गया और उन्होंने Warren Buffett को पीछे छोड़ते हुए अमीरों की सूची में 9वां स्थान हासिल कर लिया।
    वहीं बफेट को भी 579 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और उनकी कुल संपत्ति करीब 147 अरब डॉलर रह गई।

    भारत के अरबपतियों को फायदा

    वैश्विक बाजार में गिरावट के बावजूद भारत के दो बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में बढ़त दर्ज की गई। Mukesh Ambani को 64.5 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ और उनकी संपत्ति बढ़कर 92.4 अरब डॉलर हो गई। वे दुनिया के 18वें सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं।

    वहीं Gautam Adani की संपत्ति में 1.84 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और उनका नेटवर्थ 77.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि इस उछाल के बावजूद वे अभी टॉप-20 अरबपतियों की सूची में जगह नहीं बना पाए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के चलते आने वाले दिनों में बाजार और अरबपतियों की संपत्ति में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।