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  • ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली में शिकायत, पासपोर्ट जब्त करने और फंडिंग जांच की मांग के साथ NSA कार्रवाई का मुद्दा उठा

    ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली में शिकायत, पासपोर्ट जब्त करने और फंडिंग जांच की मांग के साथ NSA कार्रवाई का मुद्दा उठा

    नई दिल्ली ।यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ उनके कथित बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली में एक वकील ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राठी के कुछ बयानों से भारतीय सेना और पुलिस को सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाने की कोशिश की गई।शिकायतकर्ता ने उनके पासपोर्ट को जब्त करने और आर्थिक स्रोतों की जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनके आधार पर किसी अपराध का दोष सिद्ध नहीं होता।

    शिकायतकर्ता विवेक गर्ग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त, उत्तरी जिले के पुलिस उपायुक्त और रूप नगर थाने के प्रभारी को शिकायत दी है। इसमें सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो का हवाला देते हुए कथित बयानों की जांच करने की अपील की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन बयानों की प्रकृति गंभीर है और इनके पीछे संभावित साजिश की आशंका की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध भी किया है।

    शिकायत में ध्रुव राठी के आर्थिक स्रोतों और कथित संपर्कों की पड़ताल करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने पासपोर्ट जब्त करने की अपील की है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में शिकायत के आधार पर पुलिस की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष या आरोपों के सिद्ध होने की पुष्टि नहीं है। शिकायत दर्ज होने और जांच की मांग किए जाने को किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ध्रुव राठी के सेना और पुलिस से संबंधित कथित बयान पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे बयान गंभीर प्रकृति के हो सकते हैं और इन पर कानूनी दृष्टि से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से राठी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग उठाई है।

    डॉ. विक्रम सिंह ने आरोप लगाया कि जर्मनी में रहने वाले ध्रुव राठी भारत आकर युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं और एक साक्षात्कार में सेना तथा पुलिस को बगावत के लिए कहने जैसी बातें सामने आई हैं। उन्होंने कथित बयान को देश की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर बताया। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की स्थिति के बारे में उपलब्ध विवरण में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

    ध्रुव राठी इससे पहले भी एक आपराधिक मानहानि मामले को लेकर चर्चा में रहे हैं। दिल्ली की साकेत अदालत ने इस पुराने मामले में उनके खिलाफ नए सिरे से समन जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला विकास सांक्रित्यायन, जिन्हें विकास पांडे के नाम से भी जाना जाता है, की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी के ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ नामक वीडियो को लेकर मानहानि का मामला दायर किया गया था।अदालत ने समन की तामील के लिए दस्ती सेवा की अनुमति भी दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है। यह मानहानि प्रकरण मौजूदा शिकायत से अलग है और दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    ध्रुव राठी के खिलाफ शिकायत और एनएसए के तहत कार्रवाई की मांग ने अभिव्यक्ति, सार्वजनिक बयानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर बहस को बढ़ाया है। अब मामले में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

  • यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रदेश दौरों, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तथा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के मध्य से प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले करीब 12 कार्यक्रमों और रैलियों के जरिए जनता तक सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को पहुंचाने की तैयारी है।

    प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रदेश की 18 कमिश्नरियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी की योजना केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने की है। इसके लिए विकास योजनाओं, परिवहन सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। हालांकि, रैलियों और दौरों का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

    विकास परियोजनाओं को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। संभावित कार्यक्रमों में वाराणसी अर्बन रोपवे, कानपुर मेट्रो के अगले चरण और आगरा मेट्रो के नए भूमिगत स्टेशनों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शिलान्यास की संभावना भी जताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से जुड़े कामों को जनता के सामने रखने की योजना है।

    इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर परिसर की चारदीवारी और संग्रहालय, जेवर में एचसीएल-फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर इकाई, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी के गंजारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा रहा है। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट के कार्गो हब और वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर से संबंधित परियोजनाएं भी संभावित एजेंडे में शामिल बताई गई हैं।

    संगठन के स्तर पर बीजेपी की नजर 133 विधानसभा सीटों पर है। वाराणसी में प्रस्तावित बैठक में काशी और गोरक्ष प्रांत की इन सीटों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क, विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ बैठकें और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर देने की योजना है।

    पार्टी करीब 12 हजार विस्तारकों की तैनाती की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक 15 बूथ पर एक विस्तारक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ लगभग 80 हजार संगठनात्मक बैठकें आयोजित करने की योजना बताई गई है। कमजोर बूथों और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पार्टी को अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।

    चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहने की संभावना है। नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को भी प्रचार अभियान में शामिल किया जा सकता है। संगठन से जुड़े नितिन नवीन और विनोद तावड़े समेत अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के संगठन प्रभारियों के उत्तर प्रदेश में प्रवास की संभावना भी जताई गई है। यह अभियान करीब तीन महीने तक चल सकता है। इस दौरान जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।इस तरह बीजेपी की तैयारी में प्रधानमंत्री की संभावित रैलियों, विकास परियोजनाओं, वरिष्ठ नेताओं के प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों और परियोजनाओं से जुड़े आयोजनों की अंतिम तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  • दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही पटाखों की खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस बार आतिशबाजी के लिए लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, जरूरी सामग्री की आपूर्ति में देरी और पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा जांच के कारण बाजार में पटाखों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों के बजट पर पड़ सकता है।

    भारत में पटाखा उत्पादन का प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है। यहां बड़ी मात्रा में पटाखे तैयार किए जाते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी आपूर्ति होती है। इस साल पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से निर्माताओं की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ा है। कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, बढ़ती लागत के कारण कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।

    पटाखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सल्फर की कीमतों में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसकी कीमत एक समय 75 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। बाद में कीमत में कुछ गिरावट आई और यह लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। इसके बावजूद सल्फर की कीमत पहले के स्तर से अधिक बनी हुई है। इसके अलावा एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में भी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है।

    कच्चे माल की महंगाई के साथ-साथ आपूर्ति में देरी भी पटाखा निर्माताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के चलते सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जरूरी सामग्री समय पर नहीं पहुंचने से उत्पादन की प्रक्रिया में देरी होती है। इससे निर्माताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। कारोबारियों का अनुमान है कि इन परिस्थितियों के कारण पटाखे बनाने की लागत में लगभग 15 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है।

    पटाखा उद्योग पर सुरक्षा नियमों के पालन का दबाव भी बढ़ा है। पिछले 10 महीनों के दौरान पटाखा फैक्ट्रियों में हुए 24 हादसों में 41 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद 700 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच तेज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि खतरनाक सामग्री से जुड़े कारोबार में निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।

    बाजार में उपलब्ध पटाखों की कीमतों से भी ग्राहकों के खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 10 बड़े अनार वाले पटाखों के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये बताई गई थी। वहीं, 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर के पैकेट की कीमत लगभग 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट की कीमत करीब 70 रुपये थी। ये कीमतें उस समय की बताई गई हैं और त्योहार के दौरान इनमें बदलाव हो सकता है।

    दिवाली के नजदीक आने पर पटाखों की मांग बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी लागत, आपूर्ति में देरी और सुरक्षा संबंधी जांच का असर बाजार पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमतें अलग-अलग उत्पादों और बाजारों के अनुसार बदल सकती हैं। ग्राहकों को इस बार पटाखों की खरीदारी के लिए पहले से अधिक बजट रखने की जरूरत पड़ सकती है।

  • मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

    राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

    विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
    इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

    मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के जरिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र जैसे मुद्दों की आड़ लेकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली ताकतें युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता फैलाने के लिए करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं को देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी शक्ति का उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए होना चाहिए, न कि किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोकतंत्र, चुनाव सुधार और न्याय से जुड़े नारों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों का सहारा लेकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती जनता के विश्वास पर निर्भर करती है और इसे राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।

    योगी आदित्यनाथ ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वटवृक्ष से करते हुए कहा कि इसकी जड़ें जनविश्वास में हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे षड्यंत्रों और अस्थिरता पैदा करने वाली कोशिशों से हिलाया नहीं जा सकता। उनके बयान में जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सत्ता परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राजनीतिक विरोधियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे सत्ता से दूर रहने के बाद अब अराजकता के माध्यम से राजनीतिक परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं। उन्होंने ऐसे प्रयासों को सियासी साजिश करार देते हुए कहा कि देश को अस्थिरता की ओर धकेलकर सत्ता हासिल करने की कोशिश सफल नहीं होनी चाहिए।

    अपने बयान में योगी आदित्यनाथ ने कुछ राजनीतिक शक्तियों के लिए मारीच और कालनेमि जैसे पौराणिक पात्रों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि जनता ने राजनीतिक दलों और नेताओं को पहचानकर ही उन्हें सत्ता से दूर रखा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता हासिल करने के लिए जनादेश के अलावा दूसरे रास्ते नहीं अपनाने चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश में चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। उनके संदेश में इन मुद्दों को लेकर सक्रिय शक्तियों पर देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, उनके बयान में किसी विशेष घटना या कथित साजिश के समर्थन में अलग से कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा कि भारत की जनता देश को अराजकता की आग में झोंककर सत्ता हासिल करने की कोशिशों को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने युवाओं की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक बदलाव का आधार जनता का विश्वास और उसका जनादेश होना चाहिए।

  • पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया

    पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया


    नई दिल्ली ।पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्य में नशे के कारोबार, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही पंजाब में नशा फैलाने और राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।

    केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में अडानी पोर्ट के रास्ते पंजाब में नशा फैलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में नशे की समस्या उन राज्यों में भी गंभीर है, जहां लंबे समय से भाजपा की सरकारें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय पंजाब को लेकर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

    केजरीवाल ने अपने बयान में पंजाब में नशे के प्रसार और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच भी राज्य में नशे की समस्या को बढ़ावा मिला था। उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर पुराने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ाने का आरोप लगाया। ये आरोप केजरीवाल की ओर से लगाए गए हैं।

    अपने पलटवार में केजरीवाल ने पंजाब के पानी, पंजाब विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर राज्य के इन महत्वपूर्ण विषयों पर है। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि भाजपा दोबारा सत्ता में आने पर ऐसे कानूनों को फिर से ला सकती है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ऐसा नहीं होने देगा। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कृषि कानूनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है।

    दरअसल, अमित शाह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि राज्य नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। शाह ने सवाल किया कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से नशे के कारोबार और अपराध पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर भी सवाल किए।

    शाह ने अपने बयान में मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दिरबा में एक पिता की मौत से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। शाह के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा के पिता ने आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।

    शाह ने यह भी कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा हालात को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर पंजाब को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराया। शाह ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई, युवाओं के भविष्य की रक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही।

    दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि पंजाब में नशे का कारोबार, संगठित अपराध और कानून-व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। जहां भाजपा राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा के शासन और उसके पुराने राजनीतिक फैसलों को बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दीपके के घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन को लेकर दिया नोटिस

    दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दीपके के घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन को लेकर दिया नोटिस

    नई दिल्ली । दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन और तिरंगा यात्रा से पहले पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के ठिकाने पर पहुंचकर उन्हें नोटिस दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस में तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण मार्च निकालने से बचने के लिए कहा गया है।16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दीपके के पास पहुंची। पुलिस ने उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी। बताया गया कि टीम में लगभग 15 से 20 पुलिसकर्मी शामिल थे। उस समय दीपके दिल्ली के झंडेवालान इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास पर ठहरे हुए थे।

    पुलिस ने अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 के तहत नोटिस दिया। अधिकारियों ने बताया कि कनॉट प्लेस में किसी भी तरह की तिरंगा यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस की ओर से यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।पुलिस ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने और मार्च के लिए अनुमति नहीं मिलने के कारण यात्रा या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जाना चाहिए। यदि इसके बावजूद कोई मार्च निकाला जाता है, तो इसे लागू नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।

    नोटिस देने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दीपके के ठिकाने से लौट गई। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस सौंपने के बाद टीम वहां से रवाना हुई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर लागू प्रतिबंधों और अनुमति संबंधी स्थिति स्पष्ट की।कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को लेकर भी जानकारी सामने आई। बताया गया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने 16 और 17 अक्टूबर के लिए सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है। इसी दौरान संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने की बात कही गई। ऐसे में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा के आयोजन को लेकर पुलिस ने आयोजकों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी।

    इस घटनाक्रम से पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया था। इसमें उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास महात्मा गांधी हैं और देश के युवा हमेशा उनके दिखाए रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने की बात कही।दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने और धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए तिरंगा यात्रा नहीं निकालने को कहा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दीपके को नोटिस दिए जाने के बाद पुलिस टीम वहां से लौट चुकी है।

  • मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    नई दिल्ली ।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता की। इस दौरान उनसे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने के संबंध में सवाल पूछा गया। राजनाथ सिंह ने इस सवाल पर विस्तार से कुछ कहने के बजाय संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी और बातचीत समाप्त करते हुए धन्यवाद कहा।

    प्रेस वार्ता के आखिरी कुछ मिनटों में एक पत्रकार ने राजनाथ सिंह से सवाल किया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले व्यक्ति को पद्म पुरस्कार क्यों दिया गया। उस समय रक्षा मंत्री प्रेस वार्ता समाप्त कर वहां से निकलने की तैयारी में थे। हालांकि, सवाल सुनने के बाद वह दोबारा बैठ गए और पूरी बात सुनी। उन्होंने अपने पास बैठे उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से एक मिनट रुकने के लिए कहा।

    इसके बाद मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से जुड़े सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा, “चलिए देखते हैं। उसके कई कारण थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।” उन्होंने पुरस्कार दिए जाने के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस तरह प्रेस वार्ता में उनसे पूछा गया सवाल संक्षिप्त जवाब के साथ समाप्त हो गया।

    दरअसल, इसी प्रेस वार्ता में राजनाथ सिंह ने वर्ष 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े तीन घटनाक्रमों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल, वर्ष 1984 में सिख समुदाय के लोगों के नरसंहार और वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाए जाने के मुद्दे का जिक्र किया।

    राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले को समर्थन देकर सरकार बचाई गई थी। उनका यह बयान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में आया। इसी पृष्ठभूमि में मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से संबंधित सवाल भी प्रेस वार्ता के दौरान उठा।

    वर्ष 2008 में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लेकर केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार संकट में आ गई थी। उस समय वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 22 जुलाई 2008 को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को समर्थन दिया।

    इस समर्थन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विश्वास मत हासिल करने में सफल रही।विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 275 मत पड़े थे, जबकि विपक्ष को 256 मत मिले थे। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थन को केंद्र सरकार बचाने में महत्वपूर्ण माना गया था।

    उस समय मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस नीत गठबंधन की सरकार को समर्थन देने के पीछे भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को देशहित में बताया था। उन्होंने कहा था कि तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें समझौते के देश के हित में होने की जानकारी दी थी। इसी आधार पर समाजवादी पार्टी ने सरकार का समर्थन किया था।

    मुलायम सिंह यादव को वर्ष 2023 में सार्वजनिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान ग्रहण किया था। अब लखनऊ में राजनाथ सिंह से इसी सम्मान को लेकर पूछे गए सवाल ने मुलायम सिंह यादव, कारसेवकों पर गोलीबारी के पुराने विवाद और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    नई दिल्ली ।देश में एसआईआर और चुनाव सुधारों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदलने के लिए अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार बदलना है।

    लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा को स्पष्ट करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग उसी तरह भारत में भी सत्ता बदलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर सरकार बदलने और दूसरे देशों से प्रेरणा लेने संबंधी बयान दिए जा रहे हैं।

    भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन को मौजूदा संघर्ष का उद्देश्य बताने से विपक्ष की मंशा सामने आती है। एसआईआर के मुद्दे पर दिए गए बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह आंदोलन केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए है या इसके पीछे सरकार बदलने का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य भी है।

    विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों के बाद हुई। इसमें प्रशांत भूषण के साथ सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुई थीं। प्रशांत भूषण ने कहा था कि यदि सरकार की कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई नागरिक समाज और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि वे ‘रिजीम चेंज’ चाहते हैं।

    इससे पहले 14 अक्टूबर को नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इसमें उन्होंने बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वहां धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ चल रही लड़ाई और भारत में युवाओं की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ किए जा रहे संघर्ष के बीच समानता है। उनके इस बयान को भी मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने की बात करता है। उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय भी सरकार नहीं बदली थी क्या। खेड़ा के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य आंदोलन और चुनावों के जरिए सत्ता परिवर्तन करना होता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना विपक्ष की राजनीतिक भूमिका का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार बदलने के लिए चुनावी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्त भारतीयों के बीच की लड़ाई बताया। साथ ही उन्होंने इसे संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच का संघर्ष करार दिया।

    ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल, बांग्लादेश के आंदोलन के संदर्भ और सरकार बदलने की मांग को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा नेता इन बयानों को अराजकता और सत्ता परिवर्तन की साजिश से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के जरिए सरकार बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

  • मुंबई के मॉल में गरबा देखकर भावुक हुईं रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा, बोलीं- भारत छोड़ने पर इन खूबसूरत पलों को बहुत याद करूंगी

    मुंबई के मॉल में गरबा देखकर भावुक हुईं रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा, बोलीं- भारत छोड़ने पर इन खूबसूरत पलों को बहुत याद करूंगी

    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में गरबा कर रहे लोगों को देखकर रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा भावुक हो गईं। पारंपरिक कपड़ों में सजे लोगों, ढोल की थाप पर थिरकते कदमों और मां दुर्गा की भक्ति से भरे माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इस अनुभव के दौरान उनकी आंखें भर आईं और उन्हें एहसास हुआ कि जब वह भारत से जाएंगी, तो यहां की संस्कृति और त्योहारों से जुड़े ऐसे यादगार पलों को बहुत याद करेंगी। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    मारिया नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में आयोजित गरबा कार्यक्रम देख रही थीं। वहां बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक परिधानों में एक साथ नृत्य कर रहे थे। कोई गोल घेरे में घूमकर गरबा कर रहा था, तो कोई संगीत की लय के साथ अपने कदम मिला रहा था। चारों ओर उत्सव का माहौल था। मारिया ने इस दृश्य का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में वह सफेद कुर्ते और झुमकों में दिखाई दे रही हैं। हालांकि, लोगों का ध्यान उनके पहनावे से ज्यादा उस भावुक प्रतिक्रिया पर गया, जो गरबा देखते समय उनके चेहरे पर नजर आई।

    मारिया ने बताया कि उस समय उन्हें खुद भी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि वह इतनी भावुक क्यों हो गईं। भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव, भारत छोड़ने का विचार या फिर बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ खुशी मनाते देखना, इनमें से कोई भी वजह उनकी भावनाओं से जुड़ी हो सकती थी। उनके लिए यह केवल किसी उत्सव को देखने का अनुभव नहीं था, बल्कि भारत के साथ बने उनके भावनात्मक जुड़ाव को महसूस करने का एक खास अवसर था।

    उन्होंने कहा कि इस पल ने उन्हें एहसास कराया कि भारत छोड़ने के बाद वह ऐसे नजारों को बहुत याद करेंगी। त्योहार के दौरान लोगों की खुशी, एक-दूसरे के साथ उनका जुड़ाव और पूरे वातावरण में दिखाई देने वाली उमंग उनके लिए खास बन गई। किसी दूसरे देश में रहकर वहां की संस्कृति को करीब से देखना और उसके भावनात्मक पक्ष को महसूस करना उनके लिए यादगार अनुभव रहा।

    मारिया ने गरबा के धार्मिक महत्व पर भी बात की। उनके अनुसार, गरबा केवल संगीत पर किया जाने वाला नृत्य नहीं है, बल्कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के प्रति आस्था व्यक्त करने का माध्यम भी है। इस आयोजन में लोगों की खुशी और उनकी धार्मिक श्रद्धा एक साथ दिखाई देती है। नृत्य करते हुए लोग अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हैं और सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं। मारिया को यही मेल विशेष रूप से प्रभावित कर गया कि यहां उत्सव और भक्ति को एक साथ अनुभव किया जा सकता है।

    वीडियो के साथ उन्होंने यह भी लिखा कि इस अनुभव ने उन्हें याद दिलाया कि उन्हें भारत से प्यार क्यों हुआ था। उन्होंने नवरात्रि मनाने वाले लोगों से पूछा कि उनके लिए इस त्योहार का क्या अर्थ है। उनकी इस बात से पता चलता है कि वह केवल उत्सव का दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं, बल्कि उसके पीछे की आस्था और परंपरा को भी समझना चाहती थीं।

    मारिया के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना की और कहा कि किसी संस्कृति को समझने का अर्थ उसके रीति-रिवाजों के साथ-साथ उनसे जुड़ी भावनाओं को जानना भी है। कुछ लोगों ने उनके अनुभव को प्रेरणादायक बताया, जबकि अन्य ने उन्हें भारत के दूसरे त्योहारों को देखने की सलाह दी। इनमें दुर्गा पूजा और दिवाली का अनुभव लेने के सुझाव भी शामिल थे।

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों को विविध परंपराओं और तरीकों से मनाया जाता है। मारिया के लिए मुंबई के मॉल में गरबा देखना ऐसा ही एक अनुभव बना, जिसने उन्हें भारतीय संस्कृति से अपने जुड़ाव का एहसास कराया। उनकी भावुक प्रतिक्रिया ने यह दिखाया कि कभी-कभी किसी जगह के लोगों को खुशी मनाते देखना भी ऐसी याद बना सकता है, जिसे वहां से दूर जाने के बाद लंबे समय तक याद किया जाए।