Category: National
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विजय माल्या के कर्ज विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने 6203 करोड़ की वसूली और शेयरों को लेकर क्या कहा, जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की आलीशान जीवनशैली और वित्तीय अनुशासन को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का ध्यान मेहनत और वित्तीय अनुशासन से हटकर अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास पर केंद्रित हो जाता है तो दशकों की मेहनत भी बर्बाद हो सकती है। अदालत की यह टिप्पणी किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या से जुड़े शेयर विवाद की सुनवाई के दौरान सामने आई। मामले में डियाजियो होल्डिंग्स नीदरलैंड्स बीवी और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह के बीच यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड के उन शेयरों को लेकर विवाद था जिन्हें एक ऋण के सिलसिले में गिरवी रखा गया था।जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस टीएम नदाफ की पीठ ने मामले में राहत देते हुए शेयरों पर दावों की प्राथमिकता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि संबंधित शेयरों पर डियाजियो का दावा बैंकों के कंसोर्टियम के दावे की तुलना में पहले और अधिक मजबूत है। इस फैसले का संबंध शेयरों पर अधिकार और ऋण से जुड़े दावों की कानूनी स्थिति से है। अदालत की टिप्पणी ने एक बार फिर विजय माल्या के कारोबारी मामलों और किंगफिशर एयरलाइंस पर बकाया कर्ज के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्तीय अनुशासन और व्यक्तिगत जीवनशैली के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया। अदालत के अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने काम और आर्थिक जिम्मेदारियों के बजाय व्यक्तिगत अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास को प्राथमिकता देने लगता है तो उसके लंबे समय के प्रयास भी निष्फल हो सकते हैं। अनुशासन की जगह दिखावे और खुद को बड़ा साबित करने की प्रवृत्ति हावी हो जाए तो आर्थिक संकट गहरा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी को विजय माल्या के कारोबारी सफर और किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े विवादों के संदर्भ में देखा जा रहा है।विजय माल्या कभी देश के चर्चित उद्योगपतियों में शामिल रहे हैं। किंगफिशर एयरलाइंस को एक प्रीमियम विमानन ब्रांड के रूप में पेश किया गया था और कंपनी की पहचान उसकी भव्य छवि तथा खर्चीली शैली से जुड़ी रही। हालांकि बाद में एयरलाइन गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई और बैंकों के कर्ज की वसूली एक बड़ा मुद्दा बन गई। माल्या के खिलाफ बैंकों का बकाया चुकाने और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामले लंबे समय से चर्चा में हैं। इसी पृष्ठभूमि में अदालत की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 6203 करोड़ रुपये के मूल ऋण के मुकाबले अब तक 14131.6 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति बरामद कर ली है। यह आंकड़ा वसूली की प्रक्रिया और बैंकों की ओर से प्राप्त संपत्तियों के मूल्य को दर्शाता है। शेयर विवाद में अदालत के फैसले का मुख्य प्रश्न यह था कि संबंधित गिरवी रखे गए शेयरों पर किस पक्ष का दावा प्राथमिकता रखता है।इस मामले में अदालत की टिप्पणी केवल एक कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने वित्तीय जिम्मेदारी और अनुशासित आर्थिक व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित किया। हालांकि शेयरों पर दावों की प्राथमिकता से जुड़ा फैसला और विजय माल्या की जीवनशैली पर अदालत की टिप्पणी अलग-अलग पहलू हैं। मामले का कानूनी महत्व इस बात में है कि संबंधित संपत्तियों पर अधिकार किस पक्ष का पहले माना जाएगा और ऋण वसूली से जुड़े दावों का निपटारा किस आधार पर होगा। -

टाटा ट्रस्ट में बढ़ी कानूनी खींचतान, मेहली मिस्त्री की शिकायतों पर सुनवाई से पहले उठी अधिकार क्षेत्र की बहस
नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन ने मेहली मिस्त्री की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों धर्मार्थ संस्थानों ने चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में दाखिल हलफनामों में दावा किया है कि मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को ही समाप्त हो गया था। ऐसे में अब उन्हें ट्रस्टों के प्रशासन और कामकाज को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। ट्रस्टों ने आग्रह किया है कि उनकी शिकायतों पर कोई जांच शुरू करने या आरोपों के गुण-दोष पर विचार करने से पहले यह तय किया जाए कि मिस्त्री की याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं।मेहली मिस्त्री दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के करीबी माने जाते रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए दोनों ट्रस्टों के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनकी आपत्तियों में प्रशासनिक खामियों और हितों के टकराव की आशंकाओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि ट्रस्टों ने इन शिकायतों पर सीधे विचार करने से पहले मिस्त्री के अधिकार और संबंधित कार्यालय के क्षेत्राधिकार पर फैसला करने की मांग की है। अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट सर रतन टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन अलग-अलग सार्वजनिक धर्मार्थ संस्थान हैं। इनके संचालन संबंधी दस्तावेज बोर्ड संपत्तियां और खाते अलग-अलग हैं। ऐसे में सभी ट्रस्टों से जुड़े विवादों को एक ही कार्यवाही में सुनने की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। ट्रस्टों का कहना है कि उनकी अलग कानूनी पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही मामले पर विचार किया जाना चाहिए।विवाद का एक अहम पहलू बाई हीराबाई ट्रस्ट की ट्रस्ट डीड में शामिल पात्रता शर्तें भी हैं। ट्रस्ट ने मिस्त्री की ओर से डीड की धाराओं 6 और 18 की व्याख्या पर आपत्ति जताई है। ये प्रावधान ट्रस्टी बनने के लिए धर्म और निवास से संबंधित शर्तों से जुड़े हैं। ट्रस्ट का तर्क है कि इन प्रतिबंधों की व्याख्या मूल वसीयत और उससे जुड़े कोडिसिल के प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। मिस्त्री को दोनों ट्रस्टों की ओर से दाखिल हलफनामों पर जवाब देने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है।इसी बीच बाई हीराबाई ट्रस्ट ने विजय सिंह के इस साल की शुरुआत में ट्रस्टी पद से हटने के बाद उनकी जगह नोएल टाटा को रिपोर्टिंग ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए आवेदन दिया है। इस प्रस्ताव ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया है। मेहली मिस्त्री ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आवेदन किया है कि उप चैरिटी कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि नोएल टाटा 7 दिसंबर 1923 की ट्रस्ट डीड में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं।मिस्त्री के मुताबिक ट्रस्ट डीड में ट्रस्टी के पारसी समुदाय से होने और जोरास्ट्रियन धर्म का पालन करने के साथ मुंबई या नवसारी का स्थायी निवासी होने जैसी शर्तों का उल्लेख है। उन्होंने बाई हीराबाई ट्रस्ट के बोर्ड में कुछ ट्रस्टियों की पात्रता पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर सर रतन टाटा ट्रस्ट ने एक अलग सुनवाई में कहा है कि 15 मई के आदेश के कारण उसे कामकाज में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आदेश के तहत ट्रस्ट को बैठक करने से रोका गया है।कुल मिलाकर टाटा ट्रस्ट विवाद अब ट्रस्टी के कार्यकाल शिकायतों की सुनवाई और नए ट्रस्टी की पात्रता जैसे कई कानूनी सवालों पर केंद्रित हो गया है। आने वाले समय में चैरिटी कमिश्नर कार्यालय का रुख यह तय करने में अहम होगा कि मिस्त्री की आपत्तियों पर आगे सुनवाई किस आधार पर होगी और नोएल टाटा की प्रस्तावित नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। -

दिल्ली के बंगाली मार्केट में सास सुधा मूर्ति के साथ घूमते नजर आए पूर्व ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक
नई दिल्ली। पूर्व ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक (Former British PM Rishi Sunak) पिछले दिनों भारत दौर पर आए हुए थे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह अपने परिवार के साथ भी समय बिताते हुए नजर आए। गुरुवार को सुनक अपनी सास और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति (Sudha Murty) के साथ दिल्ली के बंगाली मार्केट स्थित मशहूर ‘बंगाली स्वीट हाउस’ (‘Bengali Sweet House’) पहुंचे। यहां पर उनके साथ में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी नजर आईं। यहां सुनक ने भारतीय मिठाइयों के प्रति अपने लगाव को जाहिर करते हुए रस मलाई का ऑर्डर दिया। गौरतलब है कि पूर्व ब्रिटिश पीएम 2025 में दीवाली के समय भी इस दुकान पर आए थे।सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में सुनक को वहां ऑर्डर देते हुए देखा जा सकता है। ‘बंगाली स्वीट हाउस RC’ के पार्टनर वर्जेश अग्रवाल ने इस दौरे के कई वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किए हैं। इनमें से एक वीडियो में वे ऋषि सुनक, सुधा मूर्ति और स्वाति मालीवाल का रेस्तरां में स्वागत करते हुए नजर आ रहे हैं।
अग्रवाल ने कैप्शन में लिखा, “यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, सांसद और इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति और सांसद स्वाति मालीवाल का स्वागत करना हमारे लिए बेहद सम्मान और सौभाग्य की बात थी।”
बता दें, पूर्व ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में शामिल होने के लिए 13 से 15 अक्तूबर तक नई दिल्ली की यात्रा पर आए हुए थे। यहां पर उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की और सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई भी दी।
गौरतलब है कि भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक ऋषि सुनक ने इन्फोसिस सीईओ नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से शादी की है। ऋषि सुनक 25 अक्तूबर 2022 से लेकर 5 जुलाई 2024 तक ब्रिटिश पीएम रहे।
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उत्तर भारत में मौसम ने ली करवट.. पहाड़ों पर बर्फबारी और दिल्ली के आसपास बारिश… बढ़ी ठंड
नई दिल्ली। उत्तर भारत (North India) में मौसम (Weather) ने अचानक ऐसी करवट ली है कि ठंड का एहसास बढ़ने लगा है. 15 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) समेत आसपास के इलाकों में बारिश (Rain) और ठंडी हवाओं ने तापमान को नीचे ला दिया. दोपहर की धूप का तीखापन कम हो गया है और हवा में ऐसी ठंडक घुल गई है कि अब दिन में भी पंखे की जरूरत महसूस नहीं हो रही. सुबह और रात के वक्त घर से बाहर निकलने पर हल्के गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस होने लगी है।उत्तर भारत में मौसम बदलने का असर पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई दिया है. हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी (Snowfall) दर्ज की गई. लाहौल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और किन्नौर के कई इलाकों में ताजा बर्फ गिरी. कोकसर और केलांग में करीब 2 से 5 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई. पहाड़ों से आ रही ठंडी हवाओं और बारिश ने मैदानी इलाकों के मौसम को भी प्रभावित किया है. मौसम का यह बदला मिजाज संकेत दे रहा है कि उत्तर भारत में ठंड ने दस्तक दे दी है।
दिल्ली-NCR में आज कैसा रहेगा मौसम?
आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में मौसम का बदला मिजाज महसूस किया जा सकता है. आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और सुबह से दोपहर तक हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है. इस दौरान गरज-चमक भी हो सकती है. हालांकि, दिनभर लगातार बारिश होने के आसार नहीं हैं. हवा की रफ्तार सुबह करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटा और दोपहर में 18 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।बारिश के बाद तापमान में आई गिरावट से सुबह और देर शाम हल्की ठंड महसूस हो सकती है. खासकर सुबह जल्दी दफ्तर जाने वाले लोगों और रात में बाहर निकलने वालों को मौसम में आई इस ठंडक का अहसास होगा. फिलहाल दिन में भारी सर्दी जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन गर्मी की विदाई के संकेत जरूर दिखने लगे हैं. बारिश के बाद राष्ट्रीय राजधानी में अधिकतम तापमान गिरकर 28.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो इस महीने का अब तक का सबसे कम अधिकतम तापमान है. यह सामान्य से 4.9 डिग्री सेल्सियस कम रहा. मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना है।
पहाड़ों पर बर्फबारी, मैदानों में बढ़ी ठंडक
हिमाचल प्रदेश में 16 अक्टूबर को कई जगह बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है. 17 अक्टूबर को भी कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 16 अक्टूबर को बारिश के आसार हैं. उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों और राजधानी देहरादून में गुरुवार सुबह बादल छाए रहे और कुछ जगह बारिश हुई. रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण एक व्यक्ति घायल हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, उसे प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. उत्तराखंड में 18 अक्टूबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है. मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है।
जम्मू-कश्मीर में कहां कितनी बारिश हुई?
मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में सबसे ज्यादा 59.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसके बाद पुंछ में 39.5 मिमी, सांबा में 34 मिमी, शोपियां में 34 मिमी, बारामूला में 29 मिमी और कटरा में 23.1 मिमी बारिश हुई. कश्मीर घाटी में भी व्यापक बारिश दर्ज की गई. श्रीनगर में 12 मिमी बारिश हुई. क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में आसमान बादलों से ढका रहा. मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है. ऊंचाई वाले इलाकों में कुछ जगह हल्की बर्फबारी और ओलावृष्टि की भी आशंका है. वहीं, 16 अक्टूबर को जम्मू क्षेत्र में मौसम सामान्य तौर पर शुष्क रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ जगह थोड़े समय के लिए हल्की बारिश हो सकती है।
हिमाचल प्रदेश में 30 सेंटीमीटर बर्फबारी
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में शिंकू ला, बारालाचा ला, कुंजुम ला, कोकसर, जिस्पा, केलांग और गोंदला में ताजा बर्फबारी हुई. चंबा जिले की सुराल घाटी और सच पास के अलावा कांगड़ा जिले की धौलाधार माउंटेन रेंज में भी बर्फ गिरी. सुराल में 7 सेंटीमीटर बर्फ दर्ज की गई, जबकि सच पास पर 30 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई. गोंदला में 5 सेंटीमीटर और केलांग में 3 सेंटीमीटर बर्फ गिरी. भारी बर्फबारी के कारण सच पास को वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है. लाहौल-स्पीति में गोंदला के पास बर्फबारी के बाद फंसे करीब 100 वाहनों को पुलिस टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाला. ताजा बर्फबारी से पर्यटन और इससे जुड़े कारोबार करने वाले लोगों में उत्साह है. उन्हें आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. मौसम में बदलाव के कारण मनाली और धर्मशाला में तापमान भी काफी गिर गया है. बढ़ती ठंड को देखते हुए स्थानीय लोगों ने गर्म कपड़े निकालने के साथ अलाव जलाना शुरू कर दिया है. मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में शनिवार तक कुछ स्थानों पर बारिश और बर्फबारी जारी रहने का अनुमान जताया है।
यूपी-एमपी-राजस्थान में बारिश के आसार
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 16 अक्टूबर को बारिश हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम का असर बना रह सकता है. पूर्वी राजस्थान में कुछ जगह बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है. हवा के झोंके कभी-कभी 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं. पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16 अक्टूबर और पूर्वी मध्य प्रदेश में 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है. बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है. ऐसे में कई इलाकों में बादल छाए रहने और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
दक्षिण भारत में भारी बारिश का है अलर्ट
जहां उत्तर भारत में मौसम ठंडक की ओर बढ़ रहा है, वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर तेज हो सकता है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 16 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ जगह भारी बारिश की संभावना है. केरल और माहे में भी बारिश बढ़ सकती है. दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर तक बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है. कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं. तटीय कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर दिखाई दे सकता है. मौसम विभाग ने कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई है।चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक वी. आर. दुरई ने बताया कि पिछले 24 घंटों में तमिलनाडु के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि कुछ जगह भारी बारिश दर्ज की गई. करूर जिले के थोगैमलाई में सबसे ज्यादा 11 सेंटीमीटर बारिश हुई. नागपट्टिनम और धर्मपुरी में 8-8 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. राज्य के कई अन्य अंदरूनी इलाकों में भी मध्यम बारिश हुई. दुरई के मुताबिक, अगले दो दिनों के दौरान पश्चिमी घाट और उससे सटे अंदरूनी जिलों में गरज-चमक के साथ कुछ जगह भारी बारिश हो सकती है. इनमें नीलगिरी, कोयंबटूर, थेनी, इरोड, तिरुप्पुर, सलेम, नमक्कल, धर्मपुरी और तिरुवन्नामलाई शामिल हैं. चेन्नई और आसपास के इलाकों में भी मध्यम बारिश होने की संभावना है।
मुंबई में बढ़ रही गर्मी, लू का येलो अलर्ट
जहां उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान गिरने से ठंडक बढ़ रही है, वहीं महाराष्ट्र में सर्दी का कोई खास संकेत नहीं दिख रहा है. मुंबई और राज्य के दूसरे हिस्सों में तापमान बढ़ रहा है. कई इलाकों में पारा करीब 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो अक्टूबर के लिहाज से असामान्य है. मौसम विशेषज्ञों ने इसके पीछे दिन में समुद्री हवाओं के देर से चलने और गुजरात तथा दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर बने एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन को प्रमुख कारण बताया है. मौसम विभाग ने 16 अक्टूबर को मुंबई में लू चलने की आशंका के मद्देनजर येलो अलर्ट जारी किया है। -

प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए इस बार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में बढ़ती भागीदारी के पीछे राहुल गांधी की निगरानी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को अहम वजह माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने न केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले सांसदों की मौजूदगी पर नजर रखी बल्कि गैरहाजिर रहने वाले नेताओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से सीधे संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। बैठकों में प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की कोशिश थी कि सांसद केवल सोशल मीडिया पर बयान देने तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर उतरकर भी अपनी भूमिका निभाएं। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के आने और उनके ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।
इस पूरी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर चलना था। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया। इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों को भी महत्व देने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।
राहुल गांधी की पहल का असर गठबंधन के भीतर समन्वय में भी दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया ताकि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में स्पष्ट होगा लेकिन फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता ने विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। -

दिल्ली में फिर सुबह सुबह बवाल…. युवा कांग्रेस के कई नेताओं कों पुलिस ने हिरासत में लिया
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में इन दिनों आंदोलनों का केंद्र बनी हुई है। इस बीच शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर बवाल हुआ है। यहां कई युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress Leaders) को हिरासत में ले लिया गया है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई अन्य कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब NSUI के नेता महिला साथियों के साथ हुई कथित मारपीट के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर धरना दे रहे थे। छात्र नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की है।इससे पहले गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि NSUI की महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और उनमें से कुछ को एक अंधेरे कमरे में ले जाकर जूते से पीटा गया। जाखड़ ने कहा, “हम यहां केवल एफआईआर दर्ज कराने आए हैं, लेकिन DCP न तो हमसे बात कर रहे हैं और न ही हमारी सुन रहे हैं। क्या हमारी महिला कार्यकर्ताओं के लिए न्याय मांगना अपराध है?” संगठन का कहना है कि बुधवार को एडिशनल DCP सहित वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई FIR दर्ज नहीं की।
‘CEC ज्ञानेश कुमार को बचा रही है पुलिस’
वहीं NSUI के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडे ने विनोद जाखड़ और अन्य सदस्यों को हिरासत में लिए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय जवाबदेही मांगने वालों को ही हिरासत में ले रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश की है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
NSUI ने कहा है कि नेताओं को हिरासत में लेने से उनका विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को पूरा करते हुए प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, तो वे देश भर में अपना आंदोलन और तेज करेंगे।
राहुल गांधी ने बताया बब्बर शेर
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीते गुरुवार को पार्टी के तीन संगठनों भारतीय युवा कांग्रेस, NSUI और सेवा दल के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की और कथित वोट चोरी के खिलाफ हुए हालिया प्रदर्शनों में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए उनकी सराहना की। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने इन संगठनों के नेताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे ‘बब्बर शेर’ हैं जो डटकर खड़े हुए हैं। -

J&K: HC का बड़ा फैसला… श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील में पेट्रोल-डीजल मोटरबोट और जेट स्की पर लगाया बैन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट (Jammu & Kashmir and Ladakh High Court) ने श्रीनगर (Srinagar) की प्रसिद्ध डल झील (Famous Dal Lake) में पेट्रोल और डीजल से संचालित सभी प्रकार की मोटरबोट्स और जेट स्की के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश झील के लगातार घटते जलस्तर और बढ़ते जल प्रदूषण को रोकने के मद्देनजर दिया गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन किए जाने पर अवमानना की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने झील में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सोलर और ई-बोट्स के उपयोग की संभावनाएं तलाशने को कहा है।मुख्य न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की खंडपीठ ने मोहम्मद रफीक मीर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिबंध का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि अगले आदेश तक डल झील में ईंधन से चलने वाली कोई भी मोटरबोट, चाहे वह शिकारा मोटरबोट हो या जेट स्की… न चलाई जाए।
इसके साथ ही लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एलसीएमए), पर्यटन विभाग और जम्मू-कश्मीर पुलिस को निर्देश दिया है कि वे झील में किसी भी तरह की ईंधन आधारित मोटरबोट या जेट स्की का चलना पूरी तरह बंद कराएं। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में तैनात नावों को इस पाबंदी से छूट दी गई है। इसके अलावा, राज्य प्रशासन को विशेषज्ञों की सलाह से एक व्यापक नीति तैयार करने को कहा गया है, ताकि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन साधा जा सके।
पारिस्थितिकी व पर्यटन में संतुलन जरूरी
पीठ ने टिप्पणी की कि जलस्रोतों और झीलों का संरक्षण मौजूदा सभ्यता के लिए सबसे अहम चुनौती है। ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोकना अनिवार्य है। अदालत ने सुझाव दिया कि पर्यावरण व पर्यटन दोनों को सुरक्षित रखने के लिए सोलर और इलेक्ट्रिक बोट्स एक प्रभावी समाधान साबित हो सकती हैं। खंडपीठ ने वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहसिन कादरी को निर्देश दिया कि वे 30 अक्तूबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह रिपोर्ट दाखिल करें कि क्या सभी मशीनीकृत इंजनों को पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित ई-इंजनों में तब्दील किया जा सकता है। -

उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप
देहरादून। उत्तराखंड की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने धोखाधड़ी, कथित प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री ने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया है। इस बीच, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई है।रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने पक्ष में बात रखी। वीडियो में वह भावुक नजर आईं। उन्होंने बताया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला लिया। हालांकि, ऑडियो में कथित तौर पर कही गई बातों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पहली शादी छिपाने और प्रताड़ना के आरोप
एफआईआर के मुताबिक, रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि गिरधारी लाल साहू ने शादी के समय अपनी पहली शादी की जानकारी उनसे छिपाई थी। उन्होंने पति के दूसरी महिलाओं से संबंध होने का भी दावा किया है। शिकायत में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी देने तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप भी शामिल हैं।मंत्री ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कथित तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश से जुड़ी बातें सामने आईं। उनके अनुसार, रिकॉर्डिंग सुनने के बाद वह भीतर तक विचलित हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगी।
कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
रेखा आर्या ने अपने पति पर कंपनी के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है। शिकायत के अनुसार, इस मामले में दस्तावेजों के साथ कथित छेड़छाड़ की गई। मंत्री ने इसे अपने खिलाफ किए गए गलत कामों में से एक बताया है।अपने वीडियो संदेश में रेखा आर्या ने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें लगा कि अपनी और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे घरेलू हिंसा या किसी भी तरह की प्रताड़ना को चुपचाप सहन न करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लें।
उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को डर या दबाव में अन्याय सहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
15 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR
जानकारी के मुताबिक, देहरादून के कैंट थाना पुलिस ने रेखा आर्या की शिकायत पर 15 अक्टूबर 2026 को एफआईआर संख्या 0158 दर्ज की। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, मारपीट, धोखाधड़ी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, पूर्व विवाह छिपाकर दोबारा शादी करने, विवाहित महिला के साथ क्रूरता, जानबूझकर अपमान और आपराधिक धमकी देने से संबंधित आरोप शामिल हैं।एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) भी लगाई गई हैं।
पहले भी विवादों में आए थे गिरधारी लाल साहू
गिरधारी लाल साहू इसी साल जनवरी में भी विवादों में आए थे। उस समय बिहार की लड़कियों को लेकर उनके कथित बयान के सार्वजनिक होने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे। विवाद बढ़ने पर साहू ने अपने बयान को लेकर सफाई दी थी।अब रेखा आर्या की शिकायत के बाद मामला फिर चर्चा में है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई इस प्रकरण में अहम होगी।
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रेलवे काउंटर से टिकट लेने वालों को भी मिल सकता है बीमा, सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर तक कदम उठाने को कहा
नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करने वाले उन यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद है, जो रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट खरीदते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि काउंटर टिकट पर भी यात्रा बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 27 अक्टूबर तक ठोस कदम उठाए जाएं। अदालत ने ऑनलाइन और काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के बीच बीमा सुविधा को लेकर अंतर पर सवाल उठाए हैं।6 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को मामूली अतिरिक्त रकम देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है, जबकि काउंटर से टिकट खरीदने वालों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। अदालत ने इस अंतर को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया।
पीठ ने कहा कि काउंटर से टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी काफी है और उनके लिए बीमा की सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। अदालत के मुताबिक, रेलवे को व्यवस्था तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई। इसी के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर तक इस दिशा में कदम उठाने को कहा गया।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन उनके अनुरूप जमीन पर पर्याप्त बदलाव दिखाई नहीं दे रहे हैं।अदालत ने सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए तय बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने के लक्ष्य को पूरा करने में हर साल करीब एक-तिहाई की कमी का जिक्र किया गया। पीठ ने रेलवे से पूछा कि जब सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं, तो उन्हें निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक पूरा क्यों नहीं किया जा रहा।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। अदालत चाहती थी कि अधिकारी रेलवे ट्रैक की फेंसिंग के लक्ष्य को पूरा करने में लगातार हो रही देरी के कारणों और सुरक्षा कार्यों की प्रगति के बारे में जवाब दें।हालांकि, आदेश लिखवाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत से एक और मौका देने का अनुरोध किया। उन्होंने पिछले साल किए गए काम, फेंसिंग का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारणों और आगे की कार्ययोजना के बारे में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की।
केंद्र सरकार के इस अनुरोध के बाद रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी गई। अब रेलवे को हलफनामे के माध्यम से सुरक्षा कार्यों की प्रगति और भविष्य की योजना का विवरण देना होगा।
यात्रियों को कब मिलेगी सुविधा?
यदि रेलवे निर्धारित समयसीमा के भीतर जरूरी व्यवस्था करता है, तो काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिल सकता है। फिलहाल ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान अतिरिक्त रकम देकर बीमा चुनने की सुविधा उपलब्ध है।हालांकि, काउंटर टिकट पर बीमा किस तरह मिलेगा, इसके लिए कितनी रकम देनी होगी और बीमा के तहत कितना कवरेज मिलेगा, यह रेलवे की ओर से व्यवस्था स्पष्ट किए जाने के बाद ही पता चलेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश सुविधा लागू करने की दिशा में कदम उठाने से जुड़ा है; इसे सभी काउंटरों पर बीमा शुरू हो जाने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। रेलवे को हलफनामे में अब तक किए गए काम और आगे की योजना की जानकारी देनी होगी। अदालत सुरक्षा संबंधी निर्देशों पर हुई प्रगति की भी समीक्षा करेगी।
